️️️️️️અહા, જિંદગી.... તું જેમ - જેમ વીતતી જાય છે ને એમ - એમ બહુ વ્હાલી લાગે છે હો...

आगे सिर्फ वो ही बढ़ते है
जो वक़्त के साथ चलते हैं
-Falguni Shah ©

अलौकिक होते हैं कुछ संबंध
मान लो जैसे
धूम्रसेर
और
उसकी बहती सुगंध

-Falguni Shah©

परिवर्तन
पुनरावर्तन
और
पुन: निर्माण
अत्यंत जटिल है

हां, आपने ठीक ही पढ़ा
मैंने जीवन की बात लिखी है

-Falguni Shah©

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रिक्त स्थान भी भर जाता है
ठीक वैसे ही जैसे
मैंने हवा को छू लिया

-Falguni Shah©

"अरे, तुम तो कभी आती ही नहीं,
इतनी भी क्या नाराज़गी है मुझसे"
"कैसे आऊं ?
तुम्हारे पास मेरे लिए वक़्त ही कहां है?

मेरी फ़ुरसत अभी तक मुझसे नाराज़ है...

-Falguni Shah©

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धूप का एक टुकड़ा
अक्सर संजोकर रखती हैं
वो अपने पल्लू में लपेटकर
पता नहीं कब
अपने आंसूओं की भाप से
समझौता के बादल रचाकर
मुस्कुराहट
बरसाने के काम आ जाए

-Falguni Shah©

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અહા, જિંદગી....
તું જેમ - જેમ વીતતી જાય છે ને
એમ - એમ બહુ વ્હાલી લાગે છે હો...

-Falguni Shah©

A Dream is a Co-relation Of Day's Concious Thoughts & Night's Unconscious feeling expectations.
-Falguni Shah ©

Imagine best
Write better
-Falguni Shah ©