I am reading on Matrubharti!

आखिरी हिचकी लेनी है अब तो आ जाओ,


बाद मे तुमको कौन बुलाने वाला है।

तुमने भी सनम हमे बस दिये कि तरह समजा था,


रात हुई तो जला दिया और सुबह हुई तो बुझा दिया ।

फिर आएंगे एक उम्र प्यार की लिखवा कर ,


फिर तेरे होकर रहेंगे सदा के लिए ।

एहसास ना हुआ जब खंजर लगा,


दर्द तब हुआ जब कातिल पर नजर गई ।

फिर गलतफहमी में डाल दिया ना मुझे,


मुस्कुरा के गुजरना जरूरी था क्या ?

शायद इसीलिए शायरी इतनी खूबसूरत होती है,

कभी सच छुपा लेती है तो, कभी शख्स छुपा लेती है।