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#घोंसला
घोंसला पखेरुओं का,है सुरक्षित आवास।
निश्चिंत हो कर वे,करते हैं उसमें निवास।
तिनका-तिनका जोड़ कर, बनाते हैं सुंदर
बड़े परिश्रम से आशियाना अपना ख़ास।।

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#पतंग
मन पतंग सम उड़ता
कल्पना के आकाश में
इठलाता, कलाबाजियां खाता
गोते लगता रोज, उतर आता
यथार्थ की जमीन पर
मन बड़ा चंचल रोके ना रुके
बुद्धि की लगाम लगता
तब कहीं काबू में आता
फिर वही पतंग-सम उड़ान भरता
कल्पना के अनन्त आकाश में।

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(मातृ दिवस पर)


1.
घर में जब माँ है होती
सब कुछ ठीक-ठाक रहता
बालक निश्चिंत होकर खेलता
खाता-पीता-मचलता
और सोता ।
जवान होश में रहता
मर्यादा का पालन करता ।
वृद्ध मार्गदर्शक होता
रास्ता नहीं कोई भटकता
घर आशीर्वाद से है भरा रहता।

*
2.
माँ नहीं कभी अकेली होती
हरदम ममता से भरी रहती
प्रेम-व्यंजनों से पूर्ण उसकी रसोई
वात्सल्य से गोद भरी होती।
घर-आँगन गूँजता खुशियों से
महकता अपनत्व की खुशबू से
भजन-कीर्तन नित्य होता,
भोग ठाकुर जी के लड्डुओं का लगता
बिस्तर रहता आनन्दित हमेशा
लोरियों से चहकता।
*
ज्ञानप्रकाश 'पीयूष' आर.ई.एस.
पूर्व प्रिंसिपल,
1/258 मस्जिदवाली गली
तेलियान मोहल्ला,
सदर बाजार के समीप,सिरसा (हरि.)
पिनकोड-125055.
मो. 94145 -37902 ,70155-43276
ईमेल-gppeeyush@gmail.com

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सुरक्षा कवच'

ज्ञानप्रकाश 'पीयूष'

मोहल्ले के सफाई कर्मी बासु ने सुबह आठ बजे कचरे की
खाली ट्राली को निर्धारित स्थान पर लाकर खड़ा कर दिया
और स्वयं सड़क की सफाई करने लगा। उसके चेहरे पर काले रंग का मास्क लगा हुआ था और हाथों में मोमजामे के
दस्ताने चढ़े हुए थे।
दस्तानों को देखकर उसकी स्मृति ताजा हो गई । आज वह घर से बाहर निकलते समय जल्दी-जल्दी में अपने मुँह पर मास्क लगाना भूल गया था। दस -एक कदम ही आगे बढ़ा था कि उसकी दस वर्षीय बेटी श्यामा पापा-पापा पुकारते हुए उसके पास आई और मास्क व ग्लोव्ज उसके हाथ में देते हुए मुस्कुरा कर बोली , " ये लो पापा, आपके सुरक्षा कवच।इन्हें धारण करो।फिर निश्चिंत हो कर अपना कर्म करो। जन -सेवा करो।दुष्ट कोरोना आपका कुछ नहीं बिगाड़ सकेगा। परन्तु मैं महसूस कर रही हूँ कि आजकल आप बड़े भुलक्कड़ होते जा रहे हैं।" शिकायत भरे अंदाज में उसने मिठास से कहा था।
उसकी बात का आशय समझते हुए बासु ने भी प्यार से कहा ,
"हाँ मेरी एक समझदार बिटिया जिसका नाम श्यामा है मेरा ध्यान जो रखने लगी है। "
"नहीं पापा,मेरी बात को यों मज़ाक में मत उड़ाओ। यह जीवन और मरण का सवाल है ।कोरोना बहुत भयंकर वायरस है। इसे हलके में नहीं लेना चाहिए।अपनी सुरक्षा का पूर्ण ध्यान रखना
चाहिए। "
"सॉरी बिटिया, आगे से मैं पूरा ध्यान रखूँगा। तुझे शिकायत का बिल्कुल भी मौका नहीं दूँगा। यह कहकर उसने अपने मुँह पर मास्क और हाथों में दस्ताने चढ़ा लिए थे। और ड्यूटी पर जाते हुए फिर उसने बड़ी आत्मीयता से कहा था, "बिटिया निश्चिंत हो कर अब तुम घर जाओ। मैं लोगों से निश्चित दूरी भी बनाए रखूँगा। निश्चित दूरी की बात ख्याल में आते ही वह मानो सोते से जगा,देखा वह मोहल्ले में अपनी ड्यूटी पर तैनात था।
*
ज्ञानप्रकाश 'पीयूष' आर.ई.एस.
पूर्व प्रिंसिपल,
1/258 मस्जिदवाली गली
तेलियान मोहल्ला,
सदर बाजार के समीप,सिरसा (हरि.)
पिनकोड-125055.
मो. 94145 -37902 ,70155-43276
ईमेल-gppeeyush@gmail.com

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#महसूस
उपस्थित प्रत्येक पल को महसूस हर कोई करता है,मगर अभिव्यक्त कोई बिरला ही कर पाता है।

#महसूस

अपने दर्द को मैंने महसूस किया
पर भूल कर भी प्रकट नहीं किया
वह मेरा अपना था,सोच कर
उसे सार्वजनिक नहीं किया।।

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लघुकथा

' जान है तो जहान है '

ज्ञानप्रकाश 'पीयूष'

दादी ने अपनी पोती रितु से पूछा ,
"बेटी! कई दिनों से मैं देख रही हूं, तू दिन में कई-कई बार साबुन से मलमल का बहुत देर तक हाथ होती है।
मुंह पर मास्क भी लगाए रखती है। किसी का स्पर्श भी नहीं करती, दूर से ही हाथ जोड़कर प्रणाम कर लेती है।
बेटी, क्या बात है, मुझे बता।"
"दादी अम्मा, मैं ही क्या, आपने देखा होगा ,पापा ,भैया, मम्मा सभी साबुन व सेनेटाइजर से कम से कम बीस सेकंड तक
अच्छे से हाथ साफ करते हैं। आप भी अच्छी तरह से हाथ धो कर साफ-सफाई से रहा करो दादी अम्मा।"
"हां बेटी , तू ठीक कहती है । तेरे पापा बहुत दिनों से ऑफिस नहीं जा रहे । कहते हैं कोरोना वायरस फैला है। यह छूत की बीमारी है। संपर्क में आने से फैलती है ।पूरे देश में लॉक-डाउन लगा रखा है। किसी को घर से बाहर नहीं निकलना चाहिए। बहुत जरूरी काम हो तो मास्क लगाकर बाहर निकलना चाहिए, भीड़ -भाड़ से बचना चाहिए।"
"हाँ, बेटी! तेरी बात बिल्कुल सही है। मैं भी अच्छे से हाथ धोया करूंगी। पूरी सावधानी से नियमों का पालन करूंगी।
जान है तो जहान है और सावधानी में ही सावधानी है।
*

ज्ञानप्रकाश 'पीयूष' आर.ई.एस.
पूर्व प्रिंसिपल,
1/258 मस्जिदवाली गली
तेलियान मोहल्ला,
सदर बाजार के समीप,सिरसा (हरि.)
पिनकोड-125055.
मो. 94145 -37902 ,70155-43276
ईमेल-gppeeyush@gmail.com

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#संबंधित
जीवन से सम्बन्धित मसले ,
नज़रअंदाज़ नहीं किए जाते।
स्वावलम्बन की सीढ़ी पर ,
चढ़ कर तय किए जाते।।

ज्ञानप्रकाश 'पीयूष'
सिरसा,हरियाणा।
94145-37902

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#संबंधित
जीवन से सम्बन्धित मसले ,
नज़रअंदाज़ नहीं किए जाते।
स्वावलम्बन की सीढ़ी पर ,
चढ़ कर तय किए जाते।।

ज्ञानप्रकाश 'पीयूष'
सिरसा,हरियाणा।
94145-37902

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विश्व पुस्तक दिवस पर

पुस्तक गुरु को शत नमन , दूर करे अज्ञान।
ईश कृपा लवलेश से, जागे नव इंसान।।

धरती पर हैं पुस्तकें, सबसे अच्छी मित्र ।
हर कर ये अज्ञान को, करती हृदय पवित्र।।

कमी न खलती मित्र की, जब हो पुस्तक पास।
दूर करे अवसाद को , भर देती उल्लास ।।

पुस्तक देती ज्ञान का ,उजला नया प्रकाश।
जीवन की शुभ राह में, भर देती विश्वास।।

पुस्तक जीवन तम हरे,जागृत करे विवेक।
इसके सम्यक ज्ञान से ,खुलती राह अनेक।।

पुस्तक में गुण बहुत हैं,निर्मल करे विचार।
तम धरती अज्ञान का ,देती जन्म सुधार।।

जंगल में मंगल करे ,करे जगत उत्थान ।
नाश हीनता का करे ,पावन गीता ज्ञान।।
*

ज्ञानप्रकाश 'पीयूष' आर.ई.एस.
पूर्व प्रिंसिपल,
1/258 मस्जिदवाली गली
तेलियान मोहल्ला,
सदर बाजार के समीप,सिरसा (हरि.)
पिनकोड-125055.
मो. 94145 -37902 ,70155-43276
ईमेल-gppeeyush@gmail.com

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