मी माझ्या लेखनाची शुरवात २०१८ मध्ये माझी पहिली स्वःलिखित कथा "गुलाबी" सोबत केली, व त्यानंतर मी माझ्या आयुष्यातली पहिली प्रेम कथा "अरुल सरू" प्रकाशित केली, या कथेला इमाध्यमात भरपूर सराहना भेटल्या तसाच व मागो मागो मी कथा व कविता लिहीत गेलो... मी एक लेखक रुपी स्वतःला कधीच निरखून पाहिलं नव्हतं, माझ्या आतल्या लेखकाला समजण्यात आणि त्याला जागृत करण्यात माझी एका जवळ ची मैत्रीण चा हाथ आहे... आणि त्या साठी मी नेहमी तिचा आभारी आहे...

काफी है

मै फिक्र अब नही करता
तेरा ज़िक्र अब नही करता
ये दिखावा सिर्फ दुनिया के लिए है

ये ना सोच तू सोचना ही मत
मैं सोचता भी हूँ तुझे ऐसा सोचना भी मत
मेरी सोच मैं तू है इतना काफी है

तेरे जाने के बाद भी चाहत मेरी जिंदा है इतना काफी है
वो यादें आँखों को आज भी भीगा जाती है इतना काफी है
तेरी खुशबू आज भी साँसों मै बसी है इतना काफी है

तू भूल जाए मुझे यही अच्छा है
याद न करे मुझे यही अच्छा है
मुझे पता है ये दर्द तुझसे सहा नही जाएगा
इस दर्द के बिना ही तुझे जिंदगी जीने का सहारा मील जाए
मेरे लिए इतना काफी है....

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Kaash naa samjhi main hi beet jaye ye zindagi
Samajhdaari ne toh bahot kuch cheen kiya humse....

Happy Republic Day 🇮🇳
भारत देश हमारा है...
टुकड़ो मै बटा है देश...
फिर भी कहते एक है ये
नक्शा करे हाल बयान
देश है सरहदों से घिरा
यहा हर भाषा मै देश है
मगर देश मै भाषा हज़ार है
यहा सभी जाति मै देश है
मगर देश मे जाती हज़ार है
हिंदी में कहु या कहु उर्दू में
जय हिंद एक ही नारा है
मराठी मे कहु या कहु गुजराती मे
हिंद ही हमारा प्यारा है
हर रंग जुदा
हर ढंग जुदा
धरम जुदा
भगवान जुदा
मगर एक ही इनका करमा है
देश के आगे झुके सभी
यही गीता यही कलमा है
सरहद जुदा
हर प्रान्त जुदा
रीत जुदा
रिवाज जुदा
जुदा इनका पहनावा है
मगर करते सभी सलाम...
जहा तिरंगा लहराता है...
जवान का है देश ये
जवान यहा जान खोता है
किसान की है ये मिट्टी
किसान यहा रोता है
फिर भी उठते एक साथ कदम
जब दुश्मन आग उगलता है
सब के मन में बसा ये देश...
ये देश हमारा प्यारा है
भारत देश हमारा है.....

हर्षद मोलिश्री...

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वक़्त के साथ वक़्त का जनाज़ा भी उठ जाता है
कितना भी समेट ले यहां मुठी से छूट जाता है...

राह पर चलते हुए रोशनी से अंधेरे में चले जाना
अपनो पे भरोसा आ जाये तो फिर लौट आना
ये जताना की तेरे दामन मै तारे बहोत है
वो चाँद की चाह करे तो तू अपने आसमान में लौट आना...

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तेरी मर्ज़ी तू देख या ना देख
मुझे देखने से ना रोक पाएगी
मै देखता हूं तुझे जिंदगी की तरह
तू सपना है हक़ीक़त ना बन पाएगी...

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Death is a wonderful gift for those who have lived there life very well...

मेरे सबसे कमजोर हिस्से की कड़ी है वो
टूट गई बहार आने से पहले वो कली है वो
मेरी जिंदगी पलटने वाली वो बारिश
जिसमें तूफान जलजला बिजलियाँ खुप कड़की
मेरी जिंदगी पलटने वाली है वो
मुझे अपने से वाकिफ करवाया उसने
प्यार था उसका या क्या था पता नही
मगर मुझे मुझसे ही वाकिफ करवाया उसने
मुझे मुझसे बेहतर समझने वाली है वो
मेरे जिस्म से लेके रूह तक को जिसने पढ़ा
मेरे जिंदगी के हर बारीक लम्हे को जिसने छुवा
मेरे लम्हो को गुजारने वाली है वो
और आखिर मे जो उससे ना बन पड़ी वो शक्शियत हूँ मै
उससे जो ना बन पड़ी वो शक्शियत हूँ मै
मुझे अपने खातिर बीच रास्ते पर छोड़ जाने वाली है वो...

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#काव्योत्सव२

ज़हर...

सुनी है सदा... आज भी खोया हुवा गम है...
ना तुम खोये ना हम खोये.....
वो भी एक पल था ये भी एक पल है...
रह जाती है धरि... आसुओं में आँखें नाम ये....
कभी तुम रोये कभी हम रोये...
वो भी एक पल था ये भी एक पल है...
अल्फ़ाज़ों में लिपटी शाम दामन में छुपी रात है...
कभी तुम जागे तो कभी हम जागे रात....
वो भी एक पल था ये भी एक पल है....
कहने को था बहोत कुछ... बोल न पाए ये बात और है...
वो भी एक पल था ये भी एक पल है...
लिपटती थी बाहों में अंगडायों की शाम थी...
प्यार के घेरे में बस तेरी मेरी बात थी...
ख़्वाइशों में सजी प्यार की सौगात थी...
आंसुओं में डूब गई ये बारिश... गमों की बात तो और थी...
वो भी एक पल था ये भी एक पल है...
ये पल अजीब है...
वो पल खुशनसीब था...
ये पल गमगीन है...
वो पल हसीन था...
ये पल वो पल सब लम्हो की दास्तान है...
जिसमें जिये हम और तुम...
ये यादें क्या जुदाई से नासाज है....
यही यादें जिंदगी का साज़ है...
कल लाएगी हसी यह दोनों के चेहरे पे कभी...
जब गम मैं होगी सदा खुशियों से होगा बेर याद आएंगे ये पल जो आज लगते है ज़हर...

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