तुम कलयुग की 'राधा' हो .....
तुम पूज्य न हो पाओगी...

कितना भी आलौकिक और नैतिक
प्रेम हो तुम्हारा
तुम दैहिक पैमाने पर नाप दी जाओगी...!

तुम मित्र ढूंढोगी
वे प्रेमी बनना चाहेंगे
तुम आत्मा सौंप दोगी
वे देह पर घात लगाएंगे
पूर्ण समर्पित होकर भी
तुम 'राधा' ही रहोगी
'रुक्मिणी' न बन पाओगी...!

पुरुष किसी भी युग के हो
वे पुरुष हैं ...
अतः सम्माननीय हैं
तुम तो स्त्री हो
तुम ही चरित्रहीन कहलाओगी..!

वो युग और था
ये युग और है
तब 'राधा' होना
पूज्य था
अब 'राधा' होना हेय है
तुम विकल्प ही रहोगी
प्राथमिकता न हो पाओगी...!

एक पुरुष होकर जो
स्त्री की 'मित्रता' की मर्यादा समझे
निस्वार्थ प्रेम से उसे पोषित करे
समाज की दूषित नजरों से बचाकर
अपने हृदय में अक्षुण्ण रखे
वो मित्र कहाँ से लाओगी?
वो 'कृष्ण' कहाँ से लाओगी?

तुम कलयुग की राधा हो
तुम पूज्य न हो पाओगी...!!

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न जाने कोन सी साजिशों के हम शिकार हो गए,!

जितना दिल साफ़ रखा उतना “गुनहगार” हो गए...!! Hema

कुछ कही.. कुछ अनकही...
कहने सुनने में क्या रखा है.?

उम्र गुज़ार दी.. आँखों से गुफ़्तगू में,
अब शब्दों में क्या रखा है.?

तूने जो कहा नहीं... मैं वो भी जानूँ,
फिर गीत ग़ज़लों में क्या रखा है..? Hema

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एक तुम मेरे मुस्कुराने की वजह बने रहना, बस..

हर गम खुद-ब-खुद किनारा कर लेगा मुझसे.!! Hema

तुम्हारा रंग ओढ़कर ही तो,,,
मैं...खुशनुमा हूँ...!

तुम ही तुम हो मुझमें...
मैं कहाँ हूँ...??
Hema

😏😒😠

किसी को नफरत है मुझसे और कोई प्यार कर बैठा,

किसी को यकीन नहीं मेरा और कोई ऐतबार कर बैठा।...Hema