हम लिखने आते हैं तुम्हें खुश करने नहीं

जी में आता है
तेरे दामन में सर छुपा के हम

रोते रहें ....... रोते रहें ....

सुना है बेवफाओ का बाज़ार लगा है

तुम तो यकीनन बहुत महंगे बिकोगे

गीत गाया पत्थरों ने...

वो थक गयी थी भीड़ में चलते हुए

उसके बदन पर अनगिनत आँखों का बोझ था !

मैं फिर निकलूंगा ज़िन्दगी की तलाश में ....

दुआ करना दोस्तों ... इस बार इश्क़ से मुलाक़ात ना हो

सबके आंगन दिया जले रे..
मोरे आंगन जिया..!

हमें इतनी बड़ी दुनिया का.......पता थोड़ी था !
जहाँ हम तुम हुआ करते थे... वहाँ रह गए हम

तुम कहाँ उनकी उम्मीद लगाए बैठें हो

वो कहीं और अपना दिल लगाए बैठें हैं!!!

बे बस कर दिया तूने,
अपने बस में करके।

शायद उतना तो प्यार भी नहीं था उससे,,,
जितना अब याद आता है...!!!🖊️