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# काव्योत्सव

होके सिंह पर सवार
पहन मोतियों का हार
कर सुहागन का श्रंगार
हाथो में अस्त्र शस्त्र धार
पुकारते तुमको मां आ जाना
खुशियों की बहार लेकर
रिश्तों का प्यार लेकर
समाज का संस्कार लेकर
बच्चों पर दुलार लेकर
पुकारते तुमको मां आ जाना
भूखो को भोजन देने
सभी को उन्नति देने
चहुं ओर प्रगति देने
सुख शांति शक्ति देने
पुकारते तुमको मां आ जाना
राह हमको दिखाने
दुखों को सारे मिटाने
अमृत का घूंट पिलाने
पथ को सुगम बनाने
पुकारते तुमको मां आ जाना
शैलपुत्री, ब्रह्मचारिणी बनकर
चंद्रघंटा, कूष्माण्डा बनकर
स्कंदमाता, कात्यायनी बनकर
कालरात्रि, महागौरी बनकर
माता सिद्धिदात्री बनकर
पुकारते तुमको मां आ जाना
हैं सभी भक्त तुम्हारे
तुम्हारी कृपा के सहारे
अंकुर बारम्बार तुम्हे पुकारे
आशीर्वाद देने मां आ जाना
पुकारते तुमको मां आ जाना

अंकुर गुप्ता

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