Charlie Chaplin - Meri Aatmkatha - 42 in Hindi Biography by Suraj Prakash books and stories PDF | चार्ली चैप्लिन - मेरी आत्मकथा - 42

चार्ली चैप्लिन - मेरी आत्मकथा - 42

चार्ली चैप्लिन

मेरी आत्मकथा

अनुवाद सूरज प्रकाश

42

मैंने इसके बारे में बाद में कुछ भी नहीं सोचा कि तभी घर से फोन आया कि एक लड़की सामने वाले दरवाजे पर बैठी हुई है। इससे मेरे कान खड़े हो गये। मैंने बटलर से कहा कि इस लड़की से पीछा छुड़ाये और मैं तब तक स्टूडियो में ही रहूंगा जब तक मैदान साफ नहीं हो जाता। दस मिनट बाद संदेश आया कि वह लड़की जा चुकी है।

उसी शाम पोला, डॉक्टर रेनाल्ड्स और उनकी पत्नी मेरे घर पर डिनर के लिए आये हुए थे और मैंने उन्हें इस घटना के बारे में बताया। हमने सामने वाला दरवाजा खोला और जायज़ा लेने के लिए आस पास देखा कि कहीं लड़की लौट कर आयी तो नहीं है। लेकिन हमने अभी अपना डिनर पूरा भी नहीं किया था कि बटलर हड़बड़ाता हुआ डाइनिंग रूम में आया। उसका चेहरा फक्क पड़ा हुआ था,"वह ऊपर आपके बिस्तर में है।" उसने बताया कि वह रात के लिए मेरे लिए कमरा तैयार करने के लिए ऊपर गया था तो पाया कि वह आपका पायजामा पहने आपके बिस्तर में घुसी हुई है।

मैं हक्का बक्का कि करूं तो क्या करूं!!

"मैं उसे देखता हूं," रेनॉल्ड्स ने मेज पर से उठते हुए और लपक कर ऊपर जाते हुए कहा। हम बाकी लोग इंतज़ार करने लगे कि देखें क्या होता है। कुछ देर बाद रेनॉल्ड्स नीचे आये,"मैंने उससे लंबी बात की है।" बताया उन्होंने,"वह युवा है और देखने में सुंदर है। काफी समझदारी से बात करती है। मैंने उससे पूछा कि वह मिस्टर चैप्लिन के बिस्तर में क्या कर रही है। तो उसने बताया,'मैं मिस्टर चैप्लिन से मिलना चाहती हूं।'

"क्या तुम जानती हो," मैंने उससे पूछा,"तुम्हारा ये व्यवहार पागलपन माना जा सकता है और शायद इसके लिए तुम्हें पागलखाने भी भेजा जा सकता है?" वह ज़रा भी विचलित नज़र नहीं आयी।

'मैं पागल नहीं हूं,' वह बोली,'मैं तो मिस्टर चैप्लिन की कला की प्रशंसक हूं बस, और मैक्सिको से उनसे मिलने के लिए ही आयी हूं।' मैंने उसे बताया कि बेहतर होगा वह आपका पायजामा उतार दे और अपने कपड़े पहन कर तुरंत वहां से चली जाये। नहीं तो हमें पुलिस बुलवानी पड़ेगी।"

"मैं उस लड़की से मिलना चाहूंगी," पोला ने हल्के फुल्के ढंग से कहा,"उसे नीचे दीवानखाने तक ले आइये।" मैं हिचकिचाया क्योंकि ऐसा करना सबको परेशानी में डालना होगा। अलबत्ता, लड़की पूरे आत्मविश्वास के साथ कमरे में आयी। रेनॉल्ड्स का कहना सही था। वह युवा और आकर्षक थी। उसने हमें बताया कि वह बाहर और स्टूडियो में सारा दिन भटकती घूमती रही है। हमने उसे डिनर लेने के लिए कहा लेकिन उसने कहा कि वह सिर्फ एक गिलास दूध लेगी।

जिस वक्त वह दूध पी रही थी, पोला ने उस पर प्रश्नों की झड़ी लगा दी, "क्या तुम मिस्टर चैप्लिन से प्यार करती हो?" ( मेरी हालत खराब।)

लड़की हँसी,"प्यार? ओह नहीं, मैं सिर्फ उनकी प्रशंसक हूं क्योंकि वे बहुत बड़े कलाकार हैं।"

पोला ने अगला सवाल दागा,"क्या तुमने मेरी कोई फिल्म देखी है?"

"ओह हां," लड़की ने चलताऊ ढंग से कहा।

"तुम उनके बारे में क्या सोचती हो?"

"बहुत अच्छी। लेकिन आप उतनी बड़ी कलाकार नहीं हैं जितने बड़े मिस्टर चैप्लिन हैं।"

पोला का चेहरा देखने लायक था।

मैंने लड़की को चेतावनी दी कि उसकी हरकतों की वजह से उसका गलत अर्थ लिया जा सकता है और उससे पूछा कि क्या उसके पास वापिस मैक्सिको जाने के लिए किराया भाड़ा है। उसने बताया कि उसके पास पैसे हैं। मिस्टर रेनॉल्ड्स की ओर से उसे सलाहों की और घुट्टी पिलाये जाने के बाद वह घर से चली गयी।

लेकिन अगले दिन दोपहर को ही बटलर कमरे में एक बार फिर हड़बड़ाता हुआ आया और बताने लगा कि वह सड़क के बीचों बीच बैठी हुई है और उसने ज़हर खा लिया है। बिना और वक्त गंवाये, हमने पुलिस को फोन किया और उसे वहां से एम्बुलेंस में ले जाया गया।

अगले दिन इस बात को ले कर अखबारों ने काफी हो हल्ला मचाया। अस्पताल के बिस्तर पर बैठे हुए उसकी तस्वीरें छापी गयीं। उसके पेट को साफ किया गया था और अब वह प्रेस को बयान दे रही थी। उसने घोषणा की कि उसने ज़हर नहीं खाया था वह तो बस, जनता का ध्यान आकर्षित करना चाहती थी, कि उसे चार्ली चैप्लिन से प्यार नहीं है। वह तो बस, हॉलीवुड में किस्मत आजमाने और फिल्मों में काम पाने की कोशिश कर रही थी।

अस्पताल से छुट्टी दे दिये जाने के बाद उसे कल्याण संस्था की देखरेख में रखा गया। उन्होंने मुझे एक बहुत ही प्यारा सा पत्र लिखा कि क्या मैं उसे मैक्सिको वापिस भेजने के लिए कुछ मदद करना चाहूंगा। उन्होंने बताया कि वह कोई नुक्सान नहीं पहुंचायेगी और वह खराब लड़की नहीं है। हमने उसके घर वापिस जाने के लिए किराया अदा कर दिया।

अब मैं युनाइटेड आर्टिस्ट्स के लिए अपनी पहली कॉमेडी बनाने के लिए स्वंतत्र था और चाहता था कि द किड की सफलता से आगे कुछ काम करूं। कई हफ्तों तक मैं छटपटाता रहा, सोचता रहा, सिर खुजाता रहा कि कहीं से कोई विचार आये। मैं अपने आप से कहता रहा कि अगली फिल्म महाकाव्य की तरह होनी चाहिये। अब तक की महानतम। लेकिन कुछ सामने आने को तैयार ही नहीं था। तभी एक दिन रविवार की सुबह फेयरबैंक्स के यहां वीक एंड मनाते हुए मैं डगलस के साथ नाश्ते के बाद बैठा था और स्टीरियोस्कोपिक तस्वीरें देख रहा था। कुछ अलास्का पहाड़ के थे और कुछ क्लोंडाइक पहाड़ के। एक दृश्य चिलकूट दर्रे का था जिसमें बर्फ से जमे हुए पहाड़ पर चढ़ने वालों की लम्बी कतारें थीं और पीछे की तरफ उसके बारे में बताया गया था कि किस तरह से इस पहाड़ को फतह करने में कितनी कोशिशें लगती हैं और कितनी मुसीबतों का सामना करना पड़ता है। ये एक बहुत ही शानदार थीम थी, मेरे ख्याल में ये मेरी कल्पना शक्ति को पंख लगाने के लिए काफी थी। तत्काल ही विचार और कॉमेडी की हरकतों ने आकार लेना शुरू कर दिया और हालांकि मेरे सामने कोई कहानी नहीं थी, एक कथा ने रूप लेना शुरू कर दिया।

कॉमेडी का सृजन करने में सबसे बड़ी विडम्बना ये होती है कि त्रासदी मज़ाक उड़ाने की भावना को शह देती है क्योंकि मेरे ख्याल से मज़ाक उड़ाना एक तरह से ललकारने वाला नज़रिया होता है। हमें प्रकृति की शक्तियों के खिलाफ अपनी विवशता को देखते हुए हँसना ही होगा नहीं तो हम पागल हो जायेंगे। मैंने डोनर पार्टी के बारे में एक किताब पढ़ी थी जो कैलिफोर्निया जाते हुए रास्ता भटक जाते हैं और सिएरा नेवादा पहाड़ों पर हिम पात में घिर जाते हैं। एक सौ साठ लोगों में से केवल अट्ठारह ही जीवित बचे थे। ज्यादातर लोग भूख और ठंड से मर गये थे। कुछ नरभक्षी बन गये और अपने मृतक साथियों को ही खाना शुरू कर दिया। कुछ ने अपनी भूख मिटाने के लिए हिरन की खाल के अपने जूते ही भून कर खाये। इस हौलनाक दृश्यावली से मैंने अपनी फिल्म का सबसे मज़ाकिया दृश्य बुना। भयंकर भूख के मारे मैं अपना जूता उबालता हूं और उसे खाता हूं। कीलों को मैं इतने सलीके से निकालता हूं मानो वे किसी स्वादिष्ट मुर्गे की हड्डियां हों और तस्मों को मैं नूडल्स समझ कर खाता हूं। इसी बदहवासी में मेरा साथी मुझे मुर्गा समझता है और मुझे खाना चाहता है।

छ: महीने तक मैं कॉमेडी की दृश्यावलियां विकसित करता रहा और बिना किसी पटकथा के शूटिंग शुरू कर दी। मैं यह मान कर चल रहा था कि कॉमेडी के रूटीन से और इसी तरह से कथा खुद ब खुद जन्म ले लेगी। बेशक मैं कई बार अंधी गलियों में जा फंसा और कई मज़ेदार दृश्यों को भी छोड़ देना पड़ा। ऐसा ही एक सीन था: एस्कीमो लड़की के साथ प्यार का सीन जिसमें एस्कीमो लड़की ट्रैम्प को एस्कीमो तरीके से चुम्बन लेना सिखाती है और दोनों को नाक रगड़नी होती है। जब वह सोने की तलाश में विदा होता है तो वह प्यार भरी विदाई के रूप में अपनी नाक बहुत ज़ोर से उसकी नाक से रगड़ता है। और जिस वक्त वह चलता है और पीछे मुड़ कर देखता है और अपनी मध्यमा उंगली से अपनी नाक को सहलाता है और उसकी तरफ एक प्यार भरा चुम्बन उछालता है और फिर अंध विश्वास में अपनी उंगली को अपनी पैंट से पोंछता है क्योंकि उसे थोड़ा सा जुकाम लगा हुआ है। लेकिन एस्कीमो वाला हिस्सा काट दिया गया था क्योंकि ये एक और ज्यादा महत्त्वपूर्ण दृश्य डांस हाल वाली लड़की से टकरा रहा था।

द गोल्ड रश के निर्माण के दौरान मैंने दूसरी बारी शादी की। चूंकि हमारे दो बड़े-बड़े बेटे हैं जिन्हें मैं बहुत प्यार करता हूं इसलिए मैं ज्यादा ब्यौरों में नहीं जाऊंगा। दो वर्ष तक हम विवाहित बने रहे और शादी को ठीक ठाक चलाने की कोशिश भी करते रहे लेकिन मामला निराशाजनक था। ये शादी बहुत ज्यादा कड़ुवाहट के साथ समाप्त हुई।

गोल्ड रश का पहला शो न्यू यार्क में स्ट्रैंड थियेटर में हुआ और मैं उसके प्रीमियर में शामिल हुआ। जिस पल से फिल्म शुरू हुई, जिसमें मैं पीछे आ रहे आ रहे भालू से अनजान सीधी खड़ी चट्टान का चक्कर लगा रहा हूं, दर्शकों ने लगातार चिल्लाना और तालियां बजाना जारी रखा। पूरी फिल्म में हँसी के दौरान बीच बीच में एकाध ठहाका सुनायी पड़ जाता। हिरैम अब्राम्स, युनाइटेड आर्टिस्ट्स के बिक्री प्रबंधक बाद में मेरे पास आये और मुझे गले से लगा लिया,"चार्ली, मैं गारंटी देता हूं कि ये साठ लाख डॉलर से ज्यादा का कारोबार करेगी" और उसने किया भी।

प्रीमियर के बाद मुझे दौरा पड़ा। मैं रिट्ज होटल में ठहरा हुआ था और सांस नहीं ले पा रहा था। इसलिए मैंने घबरा कर एक दोस्त को फोन किया,"मैं मर रहा हूं। मेरे वकील को बुलवाओ।"

"वकील? तुम्हें डॉक्टर की ज़रूरत है," उसने चिंतित होते हुए कहा।

"नहीं, नहीं, मैं वसीयत करना चाहता हूं।"

मेरा दोस्त हक्का बक्का रह गया। उसने दोनों को बुलवाया। लेकिन चूंकि मेरा वकील उस वक्त यूरोप में गया हुआ था, सिर्फ डॉक्टर ही आ पाया।

गहन जांच पड़ताल करने के बाद डॉक्टर ने पाया कि मुझे कुछ भी नहीं हुआ था, बस शिराओं का दौरा पड़ा था। "सिर्फ गर्मी की वजह से हुआ है ये।" बताया उसने,"न्यू यार्क से बाहर निकलो, समुद्र की तरफ चले जाओ जहां पर आप आराम से और शांति से रह सकते हैं।"

एक घंटे के भीतर ही मुझे ब्राइटन बीच में भेज दिया गया। रास्ते में मैं बिना किसी वजह से रोया। अलबत्ता, मुझे होटल में समुद्र की तरफ खुलने वाला कमरा मिल गया। मैं वहां पर साफ सुथरी हवा भीतर उतारने के लिए लम्बी लम्बी सांसें लेने लगा। लेकिन होटल के बाहर भीड़ जमा होने लगी,"हाय चार्ली! क्या खूब, चार्ली!!" इसका नतीजा ये हुआ कि मुझे अपनी खिड़की पर से हट जाना पड़ा ताकि दिखायी न दूं।

अचानक ही शोर शराबा होने लगा। जैसे कोई कुत्ता भूंक रहा हो। कोई आदमी डूब रहा था। जीवन रक्षकों ने उसे बाहर निकाला और ठीक मेरी खिड़की के नीचे ले आये। उसे प्रथम उपचार देने की कोशिश की गयी लेकिन बहुत देर हो चुकी थी। वह मर चुका था। अभी उसे लेकर एम्बुलेंस गयी ही थी कि एक बार फिर कुत्ते के भूंकने की आवाज़। कुल मिला कर तीन आदमियों को लाया गया। दो को बचा लिया गया। ये अब तक की सबसे खराब हालत थी। इसलिए मैंने फैसला किया कि न्यू यार्क ही लौटा जाये। दो दिन के भीतर ही मैं इतना ठीक हो चुका था कि कैलिफोर्निया लौट सकूं।

*****

बेवरली हिल्स में वापिस आने पर मुझे एक न्यौता मिला कि मैं अपने एक दोस्त के यहां मिस गर्टरूड स्टेन से मिलूं। जब मैं वहां पर पहुंचा तो मिस स्टेन ड्राइंग रूम के बीचों बीच एक कुर्सी पर बैठी हुई थीं। उन्होंने भूरी ड्रेस पहनी हुई थी और लेस कॉलर लगा रखा था। उनके हाथ गोद में थे। किसी वज़ह से वे मुझे वान गॉग के पोर्टरेट मैडम रॉलिन जैसी लगीं, बस फर्क सिर्फ यही था कि लाल बालों के जूड़े के बजाये गर्टरूड के छोटे कटे हुए भूरे बाल थे।

मेहमान उनके चारों तरफ सम्मानित दूरी बनाये रखते हुए एक घेरे में खड़े हुए थे। मेज़बान की बांदी गर्टरूड के कानों में कुछ फुसफुसायी और फिर मेरे पास आयी,"मिस गर्टरूड स्टेन आपसे मिलना चाहेंगी।" मैं आगे बढ़ा। उस वक्त उनसे बात कर पाने के बहुत ही कम मौके थे क्योंकि और लोग आ रहे थे और परिचय कराये जाने का इंतज़ार कर रहे थे।

लंच पर मेजबान ने मुझे उनके साथ वाली कुर्सी पर बिठाया। हमारी बातचीत का विषय पता नहीं कैसे कला की तरफ मुड़ गया। मेरा ख्याल है इसकी शुरुआत डाइनिंग रूम से दिखायी देते नज़ारे की मेरे द्वारा तारीफ करने से हुई। लेकिन गर्टरूड स्टेन ने कोई उत्साह नहीं दिखाया,"प्रकृति," उन्होंने कहा,"साधारण बात है, नकल ज्यादा रोचक होती है।" उन्होंने अपनी बात को विस्तार देते हुए कहा, कि नकली संगमरमर वास्तविक संगमरमर की तुलना में ज्यादा सुंदर दिखता है। और कि चित्रकार टर्नर का सूर्यास्त किसी भी वास्तविक आसमान की तुलना में ज्यादा प्यारा है। हालांकि उनकी ये दलीलें कुछ हद तक कोफ्त दिलानेवाली थीं, मैं विनम्रता पूर्वक उनसे सहमत होता रहा।

उन्होंने सिनेमा प्लॉट के बारे में अपनी राय रखी,"ये बहुत ही घिसे पिटे, जटिल और बनावटी लगते हैं।" वे मुझे किसी फिल्म में बस, किसी गली में चलते हुए फिर किसी कोने पर मुड़ते हुए और एक और गली में फिर एक और गली में मुड़ते हुए देखना पसंद करेंगी।

मैंने ये कहने के बारे में सोचा कि उनके विचार उन्हीं की रहस्यवादी जुमलेबाजी वाले शब्दों की कलाबाजी है। मैं कहना चाहता था,"गुलाब गुलाब है, गुलाब है गुलाब।" लेकिन मेरी भीतरी प्रेरणा ने मुझे रोक दिया।

लंच बहुत ही खूबसूरत बेल्जियन लेस वाले मेजपोश पर परोसा गया था और इस मेजपोश की सभी मेहमानों ने खुल कर तारीफ की। हमारी गपशप के दौरान कॉफी बहुत ही हल्के, लाख के बने कपों में परोसी गयी थी और मेरा कप मेरी बांह के इतना नज़दीक रख दिया गया कि मैंने ज्यों ही अपना हाथ ज़रा सा हिलाया, कॉफी का प्याला डगमगाया और कॉफी मेजपाश पर छलक गयी। मेरी तो जैसे जान ही निकल गयी! मैं अपनी मेजबान से बार बार माफी मांगे जा रहा था कि तभी गर्टरूड स्टेन ने भी कमोबेश वही किया जो मैंने किया था। अपनी कॉफी का प्याला लुढ़का दिया। मुझे भीतर ही भीतर राहत मिली, क्योंकि अब मैं अपनी परेशानी में अकेला नहीं था। लेकिन गर्टरूड स्टेन ने एक बार भी अफसोस नहीं किया। उन्होंने कहा,"कोई बात नहीं, हो जाता है। शुक्र है ये मेरी पोशाक पर नहीं गिरी।"

जॉन मेसफील्ड स्टूडियो में आये। वे लम्बे, आकर्षक, सज्जन, दयालु और समझ बूझ रखने वाले शख्स थे। लेकिन उनके इन्हीं गुणों के कारण मैं उनसे झेंप महसूस कर रहा था। सौभाग्य से मैंने अभी हाल ही में उनकी किताब द विडो इन द बाइ स्ट्रीट पढ़ी थी जिसे मैंने सराहा था, इसलिए मैं पूरी तरह से गूंगा भी नहीं बना हुआ था। मैंने उसमें से अपनी कुछ प्रिय पंक्तियां सुनायीं:

वहां थे कुछ लोग जेल के दरवाजे के बाहर

बजने वाली घंटी की आवाज़ सुनने को बेताब

इंतजार में

वैसा ही इंतजार जैसा खाली लोग करते रहते हैं: इंंतजार

दूसरे के नरक के तीखे जहर के लिए।

द गोल्ड रश के निर्माण के दौरान मुझे एलिनॉर ग्लिन की तरफ से एक टेलीफोन आया: मेरे प्यारे चार्ली, आपको मैरियन डेविस से ज़रूर मिलना चाहिये: वे सचमुच बहुत ही प्यारी शख्सियत हैं और तुमसे मिल कर बहुत खुश होगीं, इसलिए तुम एम्बेसेडर होटल में हमारे साथ खाना खाओगे और उसके बाद हमारे साथ पसाडेना चलोगे जहां पर हम तुम्हारी फिल्म द आइडल क्लास देखेंगे।

मैं मैरियन डेविस से कभी नहीं मिला था। लेकिन उनके धूंआधार प्रचार से वाकिफ था। वे हर्स्ट के सभी अखबारों में और पत्रिकाओं में छायी रहतीं और उनकी पूरे पेज की तस्वीर छपती थी। ये सब कोफ्त पैदा करता। उस समय ये प्रचार इतना ज्यादा हो चला था कि मैरियन डेविस कई लतीफों के केन्द्र में आ गयी थीं। एक बार बिट्रीस लिली ने एक मज़ेदार लतीफा उन पर कह दिया था। जब उन्हें किसी ने लॉस एंजेल्स की झुंड की झुंड बत्तियां दिखायी थीं तो वे बोलीं,"हाय कितनी शानदार," बिट्रीस ने कहा, "मेरा ख्याल है कि बाद में ये बत्तियां आपस में मिल जायेंगी और उनमें मैरियन डेविस का नाम पढ़ा जा सकेगा।"

हर्स्ट की कोई भी पत्रिका या अखबार ऐसा नहीं था जिसे खोलने पर मैरियन डेविस की बड़ी सी तस्वीर नज़र न आये। इन सारी बातों ने जनता को बॉक्स ऑफिस से दूर ही रखा।

लेकिन एक दिन फेयरबैंक्स दम्पत्ति ने मैरियन डेविस की फिल्म वैन नाइटहुड वाज ए फ्लावर चला दी थी। मैं ये देखकर हैरान हुआ कि वे काफी हद तक कॉमेडी कर लेती हैं, उनमें आकर्षण और अपील थे, और वे हर्स्ट के तूफानी प्रचार के बिना भी अपने बलबूते पर स्टार बन सकती थीं। एलिनॉर ग्लिन के यहां डिनर पर मैंने उन्हें सादगीपूर्ण और आकर्षक पाया और उसके बाद से हम दोनों में दांत काटी दोस्ती वाला मामला हो गया।

हर्स्ट और मैरियन के बीच संबंध युनाइटेड स्टेट्स में मिथक बन गये थे और शायद पूरी दुनिया के लिए भी। उनके बीच तीस बरस का लम्बा संग साथ रहा और हर्स्ट की मृत्यु के दिन तक चलता रहा।

अगर मुझसे पूछा जाये कि वह कौन सा व्यक्तित्व है जिसने मेरे जीवन पर सबसे गहरा प्रभाव छोड़ा है तो मैं कहूंगा, स्वर्गीय विलियम रैंडोल्फ हर्स्ट। मैं ये बताना चाहूंगा कि ये असर हमेशा ही सुखद नहीं था, हालांकि उनमें अनुकरणीय गुण थे। ये उनके व्यक्तित्व की पहेली थी जो मुझे अभिभूत करती थी। उनका लड़कपन, उनकी काइयांपन, उनकी दयालुता, उनका अक्खड़पन, उनकी बेइंतहा ताकत और दौलत, और सबसे बड़ी बात, उनकी असली सहजता। सांसारिक मूल्यों से देखें तो वे इतने स्वतंत्र व्यक्ति थे जैसा मैंने आज तक नहीं देखा। उनका कारोबारी साम्राज्य विपुल और विविधता लिये हुए था। उनके सैकड़ों प्रकाशन, न्यू यार्क भू संपदा में बहुत बड़ी-बड़ी ज़मीनें, खनन, और मैक्सिको में बहुत बड़े-बड़े प्लॉट थे। उनके सचिव ने मुझे बताया था कि हर्स्ट की सम्पत्ति 400,000,000 डॉलर के आस-पास थी और उन दिनों ये बहुत बड़ी दौलत हुआ करती थी।

हर्स्ट के बारे में विरोधाभासी अभिमत थे। कुछ लोगों का मानना था कि वे सच्चे अमेरिकी देशभक्त थे, जबकि कुछ अन्य लोगों की राय थी कि वे अवसरवादी थे और मात्र अपने अखबारों की प्रसार संख्या बढ़ाने और अपना साम्राज्य बढ़ाने में ही रुचि रखते थे। लेकिन जब वे युवा थे तो वे रोमांचकारी और उदार थे। इसके अलावा, उन्हें अपने माता-पिता से भी विरासत में बहुत कुछ मिला था। एक किस्सा चलता है कि वित्तपोषक रसेल सेज, हर्स्ट की मां फोबे हर्स्ट से फिफ्थ एवेन्यू में मिले। कहा उन्होंने,"अगर आपका बेटा वॉल स्ट्रीट पर अपने हमले करना जारी रखेगा तो उसके अखबार को हर साल दस लाख डॉलर का नुक्सान उठाना पड़ेगा।"

"इस दर से तो, मिस्टर सेज, वह कारोबार में अगले अस्सी बरस तक रह सकता है," उनकी मां ने जवाब दिया।

मैं जब पहली बार हर्स्ट से मिला तो मैं एक बड़ी गलती कर बैठा। साइम सिल्वरमैन, वेराइटी के प्रकाशक और संपादक मुझे हर्स्ट के रिवरसाइड ड्राइव वाले अपार्टमेंट में लंच के लिए ले गये। ये एक परम्परागत अमीर आदमी का घर था, डुप्ले किस्म का घर, उसमें लगी हुई दुर्लभ पेंटिंग्स, महोगनी के पैनल, और दीवार में ही बने हुए शो केस जिनमें पोर्सलीन की वस्तुं रखी हुई थीं। जब हर्स्ट परिवार से मेरा परिचय करा दिया गया तो हम सब खाना खाने के लिए बैठे।

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