Unfortunate Love - 22 in Hindi Love Stories by Veena books and stories PDF | अनफॉरट्यूनेटली इन लव - ( पहली डेट ) 22

अनफॉरट्यूनेटली इन लव - ( पहली डेट ) 22

गाड़ी मे बैठ नियान अभी भी मूर्खो की तरह मुस्कुराए जा रही थी। उसे बार बार ब्लूबेरी के कहे शब्द याद आ रहे थे। उसके दिल मे सच मे मेरे लिए कुछ खास भावनाएं है, इसीलिए वो हमेशा मुझसे बाकी लोगो से अलग बर्ताव करता है। जैसे ही वो लोग घर पोहोचे, नियान दादाजी से जा मिली।

" आओ आओ अपने घर मे तुम्हारा स्वागत है, बेटी।" बुजुर्ग ने हसते हुए कहा।

नियान इस तरह शर्मा गई के उसे देख गन के चेहरे पर मुस्कान खिल गई। वही डेमो चुपचाप अपने बॉस को मुस्कुराते हुए देख रहा था। मिलने मिलाने के बाद वो तीनो किचन मे गए। " अब तुम्हे डंपलिंग्स बनाने है, बताओ कहा से शुरू करे।" गन ने कहा।

नियान ने बाजार से लाई हुई पट्टियां उठाई। " इस से शुरू करते है। फीलिंग बना कर रैप कर देंगे।" उसने कहा।
" तो फिर हम इतना सारा आटा क्यों लाए हैं ? आटे से बनाते है।" गन ने जैसे ही कहा उसने देखा डेमो और नियान एक दूसरे को देखे जा रहे है। " तुम दोनो मे से किसीको आटा गुनना आता है ?"

" भाभी। गूगल सर्च कर लो पता चल जायेगा।" डेमो ने कहा।

" हा । सही कहा।" नियान ने हा मे हा मिलाई।

" चलो दोनो किचन से बाहर जाओ।" गन ने दोनो को वहा से बाहर निकाला। डेमो एक बार मे बाहर चला गया।

" मुझे तुम्हारी मदद करनी है। मुझे रहने दो। प्लीज । में तुम्हे नही सतावूंगी। पक्का । चुपचाप बैठ कर बस तुम्हे देखूंगी । प्लीज । प्लीज।" नियान ने मानो जिद्द पकड़ ली थी। और ये बात भी सच थी की गन उस से अलग बर्ताव करता था। अगर नियान की जगह यही जिद्द डेमो ने की होती तो वो उसे कॉलर से पकड़ बाहर निकाल देता, पर यहां तो उसे आवाज चढ़ाना तक गलत लगता है। इसीलिए उसने कहा, " बिल्कुल चुपचाप यहां बैठना।"

वो टेबल पर बैठ दूर से उसको काम करते हुए देख रही थी, " कोई कैसे हर तरह से इतना खूबसूरत दिख सकता है ?" उसने सोचा।

" लड़की होने के बाद भी काफी कम बोलती हो तुम।" गन ने ना रह उस से पूछा।

" तुमने कहा ना। में कभी तुम्हे नही सता सकती। जो भी तुम कहोगे करूंगी। वादा।" उसने गहरी आखों से देखते हुए कहा।

उसकी बाते सुन गन वही रुक गया, और उसे देखने लगा। पूरे किचन मे अजीब सन्नाटा था। वो दोनो बस एक दूसरे को घुरे जा रहे थे। गन बचपन से अकेला रहा था। उसने कभी कोई उसके लिए कुछ करे ऐसी आशाएं नहीं रखी थी। पर जब से ये लड़की आई थी हमेशा उसे महसूस करवाती थी की वो उसके लिए कितना खास है।

" ये क्या हो रहा है ?" वू बाई ने किचन मे अपने कदम रखे। " में पिछले दस मिनट से देख रहा हु। तुम दोनो कुछ बोल नहीं रहे बस एक दूसरे को देखे जा रहे हो। क्या चल रहा है ????"

" चुप रहो। देख नही सकते में खाना बना रहा हु और वो सिख रही है। अब तुम आ गए हो तो सब्जियां काटने मे मदद कर दो।" उसने फिर से आटा गुनना शुरू किया। अचानक पूरे किचन मे अजीब सा मौहोल बन गया। जिसके चलते नियान ने वहा से बाहर जाना ठीक समझा। वो जाकर दादाजी के पास बैठ गई।

उसके बाहर जाते ही वु बाई ने कहा, " मेरे आने से पहले क्या चल रहा था? "

" मैने कहा ना कुछ नही।" गन

" अच्छा। अगर में बीच मे नहीं बोलता तो तुम लोग किस करने वाले थे ऐसा लग रहा था। दूर से देखने पर।" वू बाई ने चाकू कैबेज पर मारा।

" ये किस तरह काट रहे हो। क्या तुम कोई किलर हो ? इंसान को काट रहे हो ? इस तरह पकड़ो ऐसे काटते है। क्या अब क्लब मे मुझे तुम सब को कुकिंग भी सीखानी पड़ेगी ? " उसने उसे कुछ सब्जियां काट कर दिखाई। " अपनी कल्पनाओं को ज्यादा मत उडाना। हम किस या और कुछ नही करने वाले थे। बस बाते कर रहे थे। वैसे भी में इस डेटिंग के चक्कर मे तुम्हारी वजह से फसा हू। इसलिए तुम मुझसे दूर रहो ये तुम्हारे लिए अच्छा है।" उसने वू बाई के गाल पर थपथपाते हुए कहा।

" पर तुम्हे देख के ऐसा नहीं लगता की ये तुम्हारे मन के खिलाफ हो रहा है। मतलब जितना में तुम्हे जानता हू, उस हिसाब से तुम हमेशा वही करते हो जो तुम्हारा दिल कहता है।" उसने नीचे देख सब्जियां काटना शुरू किया। इन दो भायोकी नोकझोक मे आखिर खाना तैयार हो ही गया। शाम को सब एक साथ खाना खाने बैठे।

" ये तुम्हारे लिए।" गन ने एक प्लेट डंपलिंग नियान को दिए।
" वाउ। भाभी के लिए खास है। मुझे भी खाने है वो वाले।" इतना कह डेमो ने तुरंत नियान की प्लेट से एक डंपलिंग उठा लिया।

डेमो उसे मूंह मे डाले उस से पहले वू बाई ने उसे टोका। " ये डंपलिंग्स गन ने खास उसकी गर्लफ्रेंड के लिए बनाए है। तुम सच मे इसे खाना चाहोगे ? " एक पल मे मानो डेमो की याददाश वापस आ गई। उसने वो डंपलिंग वापस रख दिया।
उन लोगो ने प्रार्थना की और एक साथ खाना खाना शुरू किया। दादाजी काफी उत्सुकता के साथ नियान को खाते देख रहे थे। जब आखरीवाला भी खत्म हो गया उन्होंने नियान से पूछा, " बेटा क्या तुम्हे खाते हुए कोई कड़क चीज महसूस नहीं हुई उनके अंदर ????"

" नहीं दादाजी। मुझे तो इसमें अंडो का स्वाद आया।" नियान से जवाब पा कर उन्होंने गुस्से से गन को पूछा, " तुम्हे बिल्कुल शर्म नही आती। कभी बड़ो की बाते नही मानते।"

गन और वू बाई ने मानो कब से अपनी हसी रोक रखी थी । आखिरकार अब उसने हंसते हुए कहा, " मैने उसी वक्त आपको मना किया था। वो बिल्कुल भी अच्छा नहीं है, सेहत के लिए।" उसने अपनी जेब से एक बॉक्स निकाल कर टेबल पर नियान के पास रखा।

" मैने भी तुमसे कहा था। वो सेनिटाइज की हुई है।" दादाजी अभी भी गुस्से मे थे। " नियान ये हमारे परिवार की तरफ से तुम्हारे लिए।"

नियान ने गन को देखा, " में नही लाया, उनकी तरफ़ से है। तुम देख सकती हो।" गन से जवाब मिलते ही, उसने तुरंत उस बॉक्स को खोला। उसमे एक चैन थी जिसके पेंडेंट पे हान लिखा हूवा था। जो की गन का आखरीनाम था।
" तुम्हे अच्छा लगा ? ये तुम्हारे लिए क्यों की अब तुम हम मे से एक हो फ्यूचर ऑफ हान फैमिली।" दादाजी ने नियान से कहा।

उस लॉकेट को देख नियान पहले ही बोहोत खुश थी। " मुझे बोहोत पसंद आया। बोहोत खूबसूरत है।" उसने कहा।

" अब उसे पहनावोगे या उसके लिए भी मुहूर्त निकालू ? " दादाजी अब भी गन पर गुस्सा थे। उनका गुस्सा कम करने के हिसाब से गन ने बिना कुछ कहे उसे वो चैन पहनाई। दादाजी ने गन को ऊस चैन को डंपलिंग्स मे छिपा कर नियान को देने के लिए कहा था। पर उसे ऐसा करना ठीक नहीं लगा इसलिए उसने खुद का तरीका अपनाया।
हर रिश्ते के कुछ अपने अपने से पल होते है। शायद इन लोगो को भी जिंदगी कुछ अपने अलग पल दे। कुछ हसीन पलों के साथ उन सब ने खाना पुरा किया।

खाने के बाद गन ने अकेले ने साफ सफाई की शुरुवात कर दी। नियान और डेमो उसे मदद कर रहे थे।

" देखा मैने नहीं कहा था, आप खास हो। वो हमेशा आपकी बात मानते है। अगर आपकी जगह कोई और होता तो वो उसे डाट कर उसी दिन वेन्यू से भगा देते। वो कभी किसी को गले बांध कर नहीं लेते।" दोनो उसे देख रहे थे, जब गन ने उन्हे फुसफुसाते हुए देखा " ये तुम दोनो आज इतने धीरे धीरे क्या बाते किए जा रहे हो।" दोनो तुरंत अलग हो बरतन जमा करने लगे।
" तुम्हे ये सब करने की जरूरत नहीं है। में कर लूंगा। जाओ अपना सामान लेलो।" गन ने उसका हाथ रोकते हुए कहा।

" लेकिन सारा खाना भी तुमने बनाया है। मुझे कम से कम सफाई करने दो। " नियान ने कहा।

" नहीं। इस की कोई जरूरत नही है।" उसने उसे अंदर भेज दिया कुछ देर बाद वो दोनो दादाजी से विदा ले बाहर निकले।

आधे घंटे मे वो नियान के घर के बाहर थे।

" अभी भी वक्त है 9 बजने मे। क्या तुम गाना सुनना चाहोगी? " गन ने पूछा।

नियान को उसके साथ मिलने वाला हर पल खास था उसने बीना किसी जीझक के हा कर दी। दोनो कार में बैठ गाने सुन रहे थे। तभी गन की खिड़की से हू दाई अचानक आ टकराया।

गन ने तुरन्त खिड़की खोली।

" पागल हो क्या तुम हम दोनो डर गए।" नियान उस पर चिल्लाई।
हू दाई हसने लगा, " जैसे ही मुझे पता चला तुम आ रहे हो। में भी तुरंत यहां आ गया। चलो हमारे साथ चाय पियो। अंदर आओ।" उसने गन से कहा।

" प्लीज इसके लिए मुझे माफ कर देना।" नियान गाड़ी से उतरी। उसने हू दाई का कान पकड़ा और खींचा। " उसे बोहोत काम है तुम्हारे जैसा वेल्ला नहीं है वो।"
" तुम जा सकते हो मुझे माफ करना ज्यादा देर नहीं बैठ पाई। बाय।" उसने गन से विदा ली।

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