Tantrik Masannath - 1 in Hindi Horror Stories by Rahul Haldhar books and stories PDF | तांत्रिक मसाननाथ - 1

तांत्रिक मसाननाथ - 1

तांत्रिक मसाननाथ व कापालिक ( 1 )

आसनसोल स्टेशन से लगभग 15 मील दूर उत्तर पूर्वी
कोने पर हैं शिवपुर गांव I गांव न बोल इसे एक छोटा ब्लॉक बोलना सही रहेगा क्योंकि स्कूल , कॉलेज , हॉस्पिटल से लेकर शहरी ढांचे तक यहां मौजूद हैं I
इसके अलावा गांव के बाहर वाले पुलिस चौकी को
भी अब थाने में बदल दिया गया है I
शिवपुर के पश्चिम दिशा में अजय नदी बह रही है I इस नदी का एक इतिहास है I आज से लगभग 500 साल पहले 15 वीं व 16 वीं शताब्दी में अजय नदी ने अपना दिशा बदला I जिसके कारण शिवपुर के पश्चिम का एक बड़ा भाग पानी के नीचे खो गया I बड़े - बूढ़े बताते हैं कि वहां पर बाबा महादेव का एक सुंदर बड़ा सा मंदिर था I उस मंदिर का बहरी हिस्सा इतना मजबूत था कि सुल्तान बाबर भी इसका कुछ न बिगाड़ सके I
और यह भी कहा जाता हैं कि मंदिर के अंदर कई भूलभुलैया को खोजा गया था I उस भूलभुलैया का समाधान केवल एक पुरोहित परिवार के पास ही था I
वंश परंपरा में यह आज भी चल रहा है I मरने से पहले ब्राह्मण पिता अपने संतान को या अपने उत्तराधिकारी
पौत्र को मंदिर के सभी भूलभुलैयों का समाधान बताकर जाते हैं I वह ब्राह्मण परिवार अब शिवपुर में नहीं रहता है इसलिए उनके वंश के बारे में विवरण देना बिल्कुल भी सहज नहीं है I लेकिन यह कहानी सौ प्रतिशत सच न होने पर भी , पश्चिम के खोए भाग में एक महादेव का मंदिर था यह बिल्कुल सच है I क्योंकि गर्मी में जब अजय नदी की पानी कम हो जाती हैं तो उस ऐतिहासिक मंदिर के ऊपर
का भाग थोड़ा सा दिखता हैं I 3 साल पहले गांव के कुछ युवक तैरकर उस मंदिर के पास गए थे I उनका लक्ष्य पानी के अंदर डुबकी लगाकर मंदिर के बाहरी भाग को देखना व उस बारे में तथ्य संग्रह करना था I लेकिन आश्चर्य की बात ये हैं की पानी में जाने के कई घंटों बाद भी कोई भी युवक लौटकर नहीं आया I अजय नदी के दूसरी ओर देवकर गांव है I वहां पर खोजबीन करके पता चला कोई भी युवक व उसका लाश नहीं दिखा I इसके बाद शिवपुर पुलिस चौकी में सूचना पहुंचने पर उन्होंने गोताखोरों को बुलवाया I लेकिन तबतक गांव में बारिश होने लगी थी जिसके कारण नदी का पानी बढ़ गया है I मंदिर का ऊपरी भाग भी पानी के नीचे चला गया है I लगभग 8 दिन तलाशी के बाद भी किसी युवक का लाश नहीं मिला I पुलिस ने अनुमान लगाया था कि कोई बड़ी मछली या मगरमच्छ ने लाशों को खा लिया होगा I लेकिन इस बात पर वो कोई प्रमाण ही नहीं दे पाए और उसका रहस्य अधूरा ही रह गया I
अब शिवपुर गांव के बारे में बताता हूँ I इस गांव में पांच साल पहले सौ से अधिक लोग रहते थे लेकिन अब ज्यादातर शहर कि ओर चले गए I दिन पर दिन लोग कम ही हो रहें हैं I उनका कहना है कि इस गांव में उनके लड़कों का कोई भविष्य नहीं है I
नौकरी व पैसों के लिए एक समय शहर तो जाना ही होगा इससे अच्छा पहले ही चला जाए I खेती व स्थानीय व्यवसाय से शिवपुर के लोग जीवन यापन रहे थे I लेकिन इस गांव में मानो अभिशाप लगा है I मिट्ठी सूख रही है , पेड़ों के पत्तें काले होते जा रहें हैं I आसमान में पहले के जैसे चिड़िया नहीं दिखाई देते I प्रकृति देवी मानो इस गांव से रुष्ट हो गई हैं I
और इससे भी भयानक बात कि पिछले दो रातों में एक के बाद एक दो हत्याएं हुई है I लेकिन यह कोई साधारण हत्या नहीं है I चोरी , डकैती व कोई दूसरा अपराध होता तो कोई बात नहीं थी लेकिन बहुत ही अद्भुत तरीके से हत्याएं हुई है I किसी ने उन लोगों के आँखों को निकालकर , अपने अंदर के पैशाचिक हिंसा को पूरा किया है I केवल इतना ही नहीं धारदार अस्त्र से उनके छोटे - छोटे टुकड़े भी किए I और शरीर के कई अन्य भाग भी नहीं मिले I
इसी घटना कोलेकर शिवपुर थाने में बात चल रही थी I इस समय यशपाल चौधरी इस इलाके के ऑफिसर इंचार्ज हैं I
थाने में यशपाल के अलावा नरेंद्र नाम के एक सबइंस्पेक्टर भी हैं I नरेंद्र ने कुछ दिन पहले ही पुलिस डिपार्टमेंट को जॉइन किया था I यशपाल से नरेंद्र का उम्र लगभग 12 साल कम होगा I
यशपाल ने नरेंद्र से पूछा - " अब क्या किया जाए नरेंद्र ? "
नरेंद्र ने उत्तर दिया - " सर् , मुझे लगता है थोड़ा पूछताछ करके छोड़ देना ही सही रहेगा I "
उन दोनों की नजर सामने कुर्सी पर बैठे एक आदमी के तरफ है I आज सुबह ही विनय नाम के इस आदमी को थाने में लाया गया है I पिछले दो रातों में हुए हत्याओं का शक इसी आदमी के गया है I
यशपाल ने नरेंद्र की ओर देखते हुए बोले - " हाँ तुम सही कह रहे हो I और तुम विनय कल रात को घर कब लौटे थे ? फिर क्या किया सब कुछ बता सकते हो I "
विनय का गला मानो सूख गया है I कुछ देर सोचने के बाद वह बोला - " सर् , मैं कल रात को साढ़े दस बजे के आसपास घर लौटा था I इसके बाद बहुत गर्मी के कारण बाहर नल पर स्नान करने गया I तभी मुझे लगा कोई मेरे पीछे खड़ा है I पीछे घुमते ही उसने मेरे सिर पर वार किया जिससे मैं बेहोश हो गया I जब होश आया तब मैंने देखा कुछ लोग मुझे घेर कर खड़े हैं I एवं उनके द्वारा ही मैं जान पाया की ऐसी दुर्घटना घटी है I इसके अलावा मैं कुछ भी नहीं जानता I "
" ठीक है समझ गया I अब तुम जा सकते हो I कभी काम लगा तो तुम्हें फिर हम बुला लेंगे I "
विनय के जान में जान आई I जल्दी से कुर्सी छोड़ उठकर दरवाजे की ओर जाते हुए वह बोलता रहा -
" ठीक है सर् , बहुत बहुत धन्यवाद I "
कुछ देर बाद ही विनय दूर निकल गया I
यहां बता देता हूँ कि उसे एक विशेष से पकड़कर लाया
गया था I कई गांव वालों का कहना है कि विनय इन हत्याओं के साथ स्पष्ट रूप से जुड़ा हुआ है I इस हत्या
के जाँच पड़ताल में भी कुछ ऐसे ही संकेत मिले हैं I
कुछ सोचकर यशपाल बोले - " नरेंद्र , ये जो लगातार दो रात दो मृत्यु हुई I इन दोनों में कुछ समानताएं दिख रही है I पहला दोनों के मौत का समय लगभग एक जैसा था I
और दोनों के आँख को हत्या के समय निकाल लिया गया I एक और बात आश्चर्य कर देने वाला है कि इन दोनों का घर विनय के घर के पास ही है I लेकिन विनय कुछ भी नहीं बताया I आज रात को विनय के ऊपर नजर रखना होगा I "
नरेंद्र बोला - " हाँ सर् , मुझे भी विनय के ऊपर ही संदेह हो रहा है I लेकिन उसके खिलाफ हमारे पास कोई सबूत नहीं है I पर शायद आज रात हम कुछ जान पाएंगे I "
" हाँ ऐसा ही लगता है I " यह बोलकर वो टेबल से गर्म चाय के प्याले को उठा लिए I
और फिर बोले - " मैं सोच रहा हूँ कि कुछ पहरेदारों को आज गांव में नियुक्त कर दूंगा I जिससे सभी तरफ नजर रखा जाए I "
नरेंद्र ने थोड़ा सोचकर उत्तर दिया - " हाँ सर् , यह ठीक रहेगा I "

उस दिन शाम को पैसे देकर पहरेदार बुलाए गए I कुछ आदमियों की टोली इसके लिए मान गए I
उनसे बताया गया कि शाम होने के बाद गांव के पूर्वी दिशा से अजय नदी के किनारे तक फ़ोर्स के जैसा पहरा लगाया जाएगा I और इसके साथ ही बीच - बीच में ' जागते रहो ' कहकर सोते हुए लोगों को सतर्क करना होगा I इन सभी कामों को नरेंद्र के अंतर्गत किया जाएगा I कुछ ज्यादा ही काम कि वजह से यशपाल आज थाने से बाहर नहीं आएंगे I
शाम आठ बजे के पहले ही सभी 20 पहरेदार उपस्थित हुए I उनको काम समझाकर लगभग तीन घंटे बाद नरेंद्र थाने में लौट आया I और यशपाल से इशारों में बता दिया कि आज रात को कोई डर नहीं है I.....

अगला भाग क्रमशः....


@rahul

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