Tantrik Masannath - 2 in Hindi Horror Stories by Rahul Haldhar books and stories PDF | तांत्रिक मसाननाथ - 2

तांत्रिक मसाननाथ - 2

तांत्रिक मसाननाथ व कापालिक ( 2 )

आज सुबह से ही आसमान काला है । कल रात को बारिश भी हुई थी । थाने का काम उस समय शुरू नहीं हुआ था । रूम से थाने तक जाने में पांच मिनट लगता है । आज यशपाल को कुछ ज्यादा ही समय लगा एवं थाने के पास आते ही कई लोगों के आवाज को सुनकर उन्हें आश्चर्य हुआ । और कुछ आगे बढ़ते ही उन्हें नजर आया कुछ आदमी और एक महिला चिल्ला रहे थे ।
यशपाल को देखते ही वह महिला उनके पास दौड़ती हुई आई और रोते हुए बोली - " साहब कल रात किसी ने मेरी लड़की को मार डाला । "
यशपाल चौंक गए - " मार डाला मतलब ? "
" मैं कुछ भी नहीं जनता साहब , कल रात को मेरी लड़की एक बार बाहर निकली थी । कुछ देर बाद उसके चिल्लाने की आवाज़ सुन मैं दौड़कर वहाँ पहुंचा । जाकर देखा तो ऐसा हो गया था । "
यशपाल समझ गए कि यह हत्या स्वाभाविक नहीं है । उन्होंने महिला से पुछा - " आप थोड़ा सोचकर बताइए
कि आपने वहाँ आसपास किसी को देखा था ? "
महिला ने उत्तर दिया - " नहीं साहब किसी को भी नहीं
देखा । "
इसके बाद यशपाल कुछ देर सोचने के बाद बोले -
" ठीक है आप घर जाइये , हम जाँच पड़ताल करके
बताएंगे । "

गांव वाला सड़क पूरी तरह कच्ची है । और कल रात बरसात होने के कारण जीप के पहिये मिट्टी में धंस रही है इसीलिए घटना स्थल पर पहुंचने में पुलिस को कुछ ज्यादा ही समय लगा ।
गाड़ी से उतर नरेंद्र भीड़ को हटाकर लाश की ओर बढ़ा । उत्तेजित जनता के कुछ शांत होने के बाद यशपाल गाड़ी से उतरे । उन्होंने देखा कि उस महिला के घर से कुछ दूर उनके 15 - 16 साल की लड़की की हत्या हुई है ।
दूर से ही दिखाई दे रहा है कि मृत शरीर के अंग इधर - उधर बिखरे हैं । यशपाल मृत शरीर के पास पहुंचे ।
उस लड़की का शरीर उल्टा पड़ा हुआ था । कंधे से पकड़ शरीर को सीधा करते ही यशपाल और नरेंद्र चौंक कर पीछे हट गए । क्योंकि यह हत्या भी पहले के दोनों हत्याओं जैसा अमानवीय व रहस्यमय है । लड़की के दोनों आँखों को हत्यारे ने निकाल लिया है , शरीर के कई जगहों से काटा है । यह दृश्य इतना ही विभत्स है कि मृत शरीर की तरफ कोई देख नहीं पा रहा ।
यशपाल , नरेंद्र से बोलकर शरीर को थाने और फिर पोस्टमार्टम में भेजनें के लिए बोले ।
घटनास्थल से लौटने के पहले यशपाल ने कई गांव वालों से पुछा - " कल रात को आपने यहाँ पर किसी को देखा था ? "
पहले किसी ने उत्तर नहीं देना चाहा । सभी चुप थे । यशपाल समझ गए कि इसबार बहुत जाँच पड़ताल करना होगा ।
उनके जीप की ओर बढ़ते ही भीड़ से एक बुढ़ा आदमी निकला और पास जाकर बोला - " साहब एक बात आपको बोलना था । "
उस बूढ़े ने एक ओर इशारा करते हुए कहा - " साहब , उस पेड़ के पीछे ही मेरा घर है । कल रात को बारिश शुरू होते ही मैं अपने गाय भैसों को देखने के लिए बाहर निकला । बाहर निकलते ही मुझे ऐसा लगा कोई सामने के रास्ते से भाग गया । मैंने सोचा कोई गाय चुराने वाला होगा इसीलिए धीरे - धीरे छुपकर कच्चे सड़क पर आते ही देखा वहाँ जगदीश मास्टर का लड़का विनय खड़ा था । "
" वहाँ पर विनय क्या कर रहा था ? "
" क्या कर रहा था ये तो नहीं जानता । लेकिन उसके हाथ में शायद एक धारदार अस्त्र था जो बिजली चमकते ही दिख रहा था । विनय ने मुझे नहीं देखा । मैं इस पेड़ के पीछे छुपकर देखा वो इधर ही आ रहा था । बारिश बहुत जोरों से हो रही थी इसीलिए मैं घर के अंदर चला गया । विश्वास कीजिए इससे ज्यादा मैं कुछ भी नहीं जानता । "
यशपाल बोले - " जो बता रहे हो सभी बातें सच हैं या नहीं । "
" पूरी तरह सच है । झूठ बोलकर मुझे क्या फायदा ? "
" अच्छा ठीक है तुम मुझे विनय के घर लेकर चलो । "
बूढा आदमी मान गया । इधर नरेंद्र ने कोतवाली में सूचना देते ही । कुछ पुलिस और दो गाड़ी की व्यवस्था हुई । उस लड़की के शरीर को घटनास्थल से ले जाने में लगभग 3 घंटे लग गए । दूसरी तरफ यशपाल उस बूढ़े आदमी के साथ विनय के घर पहुंचते ही अवाक रह गए । दोपहर बीतने के बाद भी विनय सो रहा था । विनय के घर का दरवाजा अंदर से बंद था । दो - तीन बार बाहर से कुण्डी खटखटाने के बाद अंदर से आवाज सुनाई दिया ।
विनय घर से बाहर निकला । उसे देखते ही यशपाल ने सीधे प्रश्न पूछा - " विनय कल रात को तुम धारदार हथियार लेकर कहां गए थे ? "
यह सुनते ही विनय चौंक उठा । फिर उत्तर दिया - " कल रात को सर् मैं अपने खेत की ओर गया था । लेकिन कुछ दिन से ऐसी घटनायें हो रही है इसीलिए अपने बचाव के लिए साथ में कुल्हाड़ी को लेकर निकला था । "
यशपाल हँसते हुए बोले - " विनय तुम झूठ बोलकर और कितने दिन बचोगे । एक न एक दिन जरूर पकड़े जाओगे ।"
विनय अब रोने लगा और बोला - " मैं सच बोल रहा हूं सर् , मुझे कुछ भी नहीं पता । मैंने कुछ भी नहीं किया , मैं निर्दोष हूं । "
यशपाल ने और ज्यादा कुछ नहीं बोले । उनके पास
विनय के खिलाफ कोई बड़ा सबूत नहीं है । इसीलिए
घर से बाहर निकल आए । इसके बाद बूढ़े आदमी को उनके घर पहुंचाकर । जीप में बैठ थाने की ओर चल पड़े ।
उस समय शाम के पांच बज रहे थे । नरेंद्र नगर कोतवाली से काम खत्म करके अभी यहां लौटे थे ।
यशपाल ने उन्हें अपने केविन में बुलाया ।
केविन में नरेंद्र के प्रवेश करते ही वो बोले - " समझे नरेंद्र पहरेदारों से कुछ नहीं होगा । कल पहरेदार थे इसके अलावा भी इतनी बड़ी घटना घट गई । ऐसे ही हत्याएं होती रही तो अपने ऊपर बैठे अधिकारी को क्या जवाब दूंगा । "
नरेंद्र के मन में भी यही प्रश्न है लेकिन इसका उत्तर नहीं है । वह कुछ देर चुप रहने के बाद बोला - " सर् आप ही बताइए अब क्या किया जाए ? "
यशपाल कुर्सी छोड़ उठ खड़े हुए । उन्होंने सोच लिया है कि क्या करना होगा ।
" अब ऐसा लग रहा है कि हम दोनों को ऑपरेशन में उतरना होगा । ज्यादा कुछ करने की जरूरत नहीं है केवल विनय के ऊपर थोड़ा नजर रखना होगा ।लेकिन गांव के किसी को भी इस बारे में पता न चले । "
" ठीक है सर् आज रात से ही हम शुरू कर देंगे । "…….

।। अगला भाग क्रमशः.........


@rahul

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