Tantrik Masannath - 3 in Hindi Horror Stories by Rahul Haldhar books and stories PDF | तांत्रिक मसाननाथ - 3

तांत्रिक मसाननाथ - 3

तांत्रिक मसाननाथ व कापालिक ( 3 )

उस दिन रात आठ बजे से पहले ही यशपाल व नरेंद्र ने खाना समाप्त किया । खाना बनाने वाली मौसी का भोजन मानो दिन पर दिन अस्वादिष्ट होता जा रहा है । दाल , मछली करी के बावजूद यशपाल चार से ज्यादा रोटी नहीं खा सके । लेकिन अच्छा ही हुआ रात जागने के लिए सुविधा ही होगा । 9 बजते ही दोनों रूम से निकल पड़े । नरेंद्र के हाथ में बड़ा वाला टोर्च है ।
गाड़ी न लेकर पैदल ही दोनों चल पड़े । इसीलिए दो मील दूर गांव में पहुंचने के लिए उन्हें काफी समय लग गया । गांव में लोग कुछ जल्दी ही सो जाते हैं । यशपाल , नरेंद्र के साथ जब विनय के घर पहुंचे उस समय रात बहुत हो गया था । उस समय घड़ी में रात के लगभग 1 बज रहे थे । वो दोनों विनय के घर से दूर एक झाड़ी में बैठ गए ।
चारों तरफ गहरा अंधेरा ,चांद भी बादल की वजह से गायब हो गया है । नरेंद्र सोच रहा था कि इस समय अगर बारिश होने लगी तो हालत भीगी बिल्ली के जैसा हो जाएगा । झाड़ी के पीछे चार आंखे किसी भी विप्पति की आशंका के लिए सतर्क है । देखते ही देखते रात के तीन बजे गए । अब धीरे - धीरे ठंडी हवा चलने लगी शायद दूर कहीं बारिश हो रही है । अचानक पास ही कहीं एक सियार चिल्ला उठा । गांव में सियार की आवाज सुनाई देना कोई आश्चर्य की बात नही लेकिन यह आवाज थोड़ा अलग व डरावनी था । अचानक इस आवाज से नरेंद्र चौंक उठा था ।
यशपाल अब और धैर्य नही रख पाए । झाड़ी से निकल नरेंद्र से बोले - " रात बहुत हो गया है और आज कोई दुर्घटना होने की संभावना नही दिख रही । आज रात लौट चलना ही ठीक रहेगा । "
नरेंद्र भी झाड़ी से निकल आया । अंधेरे में ही बातचीत होती रही अगर टोर्च जलाया गया तो सब गुड़ गोबर हो जाएगा ।
नरेंद्र बोला - " सर अगर लौटना ही है तो क्यों ना एक बार विनय के घर के अंदर भी देख लिया जाए । "
यशपाल ने सोचकर उत्तर दिया - " घर के अंदर जाना
ठीक रहेगा क्योंकि हमारे पास कोई सबूत भी नहीं है
और मैंने अपना सर्विस रिवाल्वर भी नहीं लाया ।
लेकिन उसके पास कोई हथियार होगा इसमें कोई शक
नहीं । "
" लेकिन सर इतनी दूर आकर बिना इन्वेस्टिगेशन के घर लौट जाना भी तो सही नहीं होगा । इसके अलावा प्रतिदिन ऐसे बैठे रहना भी सम्भव नहीं । "
कुछ देर सब कुछ चुपचाप रहा फिर नरेंद्र बोला - " उसके पास कोई धारदार हथियार होगा लेकिन सर हमारा यह बड़ा टॉर्च भी किसी हथियार से कम नहीं । "
यह बात यशपाल को बहुत ही अच्छा लगा क्योंकि आज से लगभग 10 साल पहले पुलिस ज्वाइन करके अपने पहले ही महीने उन्होंने एक डाकू को गिरफ्तार किया था । उसका नाम था कालू डकैत , कुछ सालों से हजारीबाग के इलाकों में बहुत डकैती व लूटपाट करता था । हजारीबाग में पोस्टिंग मिलते ही वो कालू डकैत के पीछे लग गए । कहानी के क्लाइमेक्स में उस रात को इसी टॉर्च की वजह से यशपाल की जान बच गई और कालू डकैत घायल भी हो गया ।
यह घटना याद आती है यशपाल बोले - " हां तुमने सही कहा तो फिर चलो अंदर चला जाए । "
इतना बोलते ही नरेंद्र धीरे-धीरे विनय के घर की ओर बढ़ा । अंधेरी में कुछ भी नहीं दिख रहा । दरवाजे के पास पहुंचते ही यशपाल ने नरेंद्र को सतर्क किया । इसके बाद नरेंद्र आगे बढ़कर दरवाजे को धक्का दिया । अगर विनय घर के अंदर होगा तो दरवाजा अंदर से बंद होता । नरेंद्र ने सोचा था कि इसके बाद दीवार फांदकर घर के अंदर जाएंगे लेकिन ऐसा नहीं करना पड़ा । दोनों को चौकातें हुए दरवाजा खुल गया । नरेंद्र अंदर प्रवेश किया । उसने जितना सोचा था इतना अंधेरा घर में नहीं है ।
सामने के दरवाजे से कुछ ही दूर एक लालटेन जल रहा था । आँगन में 2 कमरे हैं , यह घर कच्चा होने पर भी गांव के कई घरों से बड़ा हैं ।
आंगन में पहुंचते फिर से वह दोनों चौक गए । क्योंकि सोने वाले कमरे का दरवाजा खुला हुआ है लेकिन विनय वहां पर नहीं है ।
नरेंद्र बोला - " सर यहां पर तो विनय नहीं है । क्या वह बाहर निकल गया ? लेकिन हम तो सामने दरवाजे पर ही पहरा दे रहे थे । "
यशपाल घर के अंदर से बाहर की ओर दौड़ पड़े और बोलते रहे - " इसके बारे में बाद में सोचा जाएगा पहले
चलो उसको जल्दी खोजा जाए । ना जाने आज किस घटना को अंजाम देने वाला है । इतनी रात को घर से निकलने का कोई ना कोई कारण अवश्य है । नरेंद्र उसे
चारों तरफ खोजो । "
नरेंद्र भी यशपाल को निर्देश करके एक अँधेरे दिशा की ओर दौड़ पड़ा । घर के दक्षिण तरफ कुछ ज्यादा ही अंधेरा है शायद यहां पर एक बड़ा सा जामुन का पेड़ है इसीलिए । यशपाल और नरेंद्र उधर ही जा रहे थे ।
दौड़ते हुए अचानक नरेंद्र के पैरों तले कुछ मांसल जैसा महसूस हुआ । सांप समझकर चौक उठा लेकिन जैसे ही टोर्च को जलाया नीचे पड़े वस्तु को देखकर यशपाल जैसे शक्तिशाली आदमी भी डर से कांप उठे । उन्होंने देखा नरेंद्र के पैरों तले दबने वाला वस्तु एक कटा हुआ हाथ है । टॉर्च की रोशनी में इधर उधर देखते ही विनय का छिन्न-भिन्न शरीर दिखाई दिया । धीरे-धीरे नरेंद्र उस ओर आगे बढ़ा । मृत शरीर के पास पहुंचते ही यशपाल चौंक उठे । उसका शरीर एक मांसल विभत्स गोले जैसा हो गया था । पहले के मौतों के साथ इसका भी एक ही चिन्ह है । फिर से वही आंखों को निकालकर हत्या किया गया है । लेकिन यह हत्या और भी आमनवीय है मानो जैसे कई जंगली जानवरों ने उसके शरीर को फाड़कर टुकड़े टुकड़े में बदल दिया है । इसके अलावा उसके पीले शर्ट व पैंट को भी नहीं छोड़ा ।
यशपाल ने अपने मन में ही प्रश्न किया - " इसका मतलब हम गलत थे । क्या हत्याओं को विनय ने नहीं किया था ? क्या इसके पीछे भी कोई मास्टरमाइंड है ? ऐसी हत्या क्या कोई मनुष्य कर सकता है या कुछ दूसरा ? "
उस रात की सभी परिकल्पना यहीं समाप्त हो गई । यशपाल समझ गए यह रहस्य और भी जटिल होता जा रहा है । अगले दिन सुबह विनय के शरीर को पोस्टमार्टम में भेजने के बाद पूरे गांव में सतर्कता जारी किया गया । और इसके साथ ही आज दोपहर 12 बजे सभी गांव वालों को पुराने कृष्ण मंदिर के सामने आने के लिए कहा गया ।........

।। अगला भाग क्रमशः ।।