Tantrik Masannath - 4 in Hindi Horror Stories by Rahul Haldhar books and stories PDF | तांत्रिक मसाननाथ - 4

तांत्रिक मसाननाथ - 4

तांत्रिक मसाननाथ व कापालिक ( 4 )

विनय के मौत का खबर हवा से भी तेज फैल रहा था । इसीलिए दोपहर का यह मीटिंग सभी के लिए संदेह भरा है । उस समय दोपहर के 12:25 हो रहे थे ।
पुराने कृष्ण मंदिर के पास भीड़ इकट्ठा हो गई है । यशपाल ने सभी को शांत कराया और बोले -
" गांव में पिछले कुछ दिनों से जो भी हो रहा है यह स्वाभाविक नहीं है । ऐसे विभत्स हत्याएं मैंने अपने जीवन में पहले कभी नहीं देखा । मैंने आपके कहे अनुसार विनय के ऊपर शक किया था लेकिन कल रात हमारी सभी धारणाएं खत्म हो गई । मुझे ऐसा लग रहा है इन हत्याओं के पीछे कोई मास्टरमाइंड है । और वह तुम में से ही कोई एक है । "
यह सुनते ही सभी एक दूसरे को देखने लगे । कोई कुछ भी नहीं बोल रहा ।
अब नरेंद्र बोला - " कोई भी अगर इस बारे में जानता है तो हमें बता सकता है हम उसका कानून से रक्षा करेंगे । और अगर नहीं बताओगे तो तुम में से कोई एक गांव वाला मारा जाएगा क्योंकि हमें भी अपने ऊपर जवाब देना पड़ता है । "
इस बार भी किसी ने कोई उत्तर नहीं दिया ।
यशपाल को लगा कि सब साले इसी में मिले हुए हैं । लेकिन तुरंत ही उन्होंने अपने क्रोध को शांत कर लिया ।
यशपाल ने कठोर आवाज में पूछा - " यहां पर सभी गांव वाले उपस्थित हैं या नहीं ? "
कुछ देर बाद भीड़ में से एक आदमी बोला - " नहीं साहब सर्वेश अभी नहीं आया । "
" यह सर्वेश कौन है ? "
इसी वक्त कृष्ण मंदिर से दूर खेत से कोई आता हुआ दिखाई दिया । यशपाल समझ गए कि यही सर्वेश है ।
वह लगभग 30 साल का एक आदमी है । गालों पर बड़ी-बड़ी दाढ़ी व बाल इधर-उधर बिखरे हुए । वह आकर सीधा यशपाल के सामने आकर खड़ा हुआ ।
उसके आते ही एक सड़ा गंध चारों तरफ फैल गई । लेकिन यह गंध कहां से आ रहा है कोई नहीं समझ पाया ।
यशपाल बोले - " तुम्हें ऐसा क्या काम था जो इतनी देर से यहां पर आए ? "
सर्वेश ने उत्तर दिया - " साहब , काम तो कुछ ऐसा नहीं था लेकिन सुबह उठने में देर हो गई । "
ये बोलकर वह थोड़ा सा हँसा । ठीक उसी समय यशपाल ने एक ऐसी वस्तु सर्वेश के दांतो में देखा जिससे उनके होश उड़ गए । इसके बाद यशपाल कुछ नहीं बोले ।
नरेंद्र को इशारे से काम समझा कर अपने जीप की तरफ चले गए । नरेंद्र ने गांव वालों को लौटने का आदेश देकर वो भी यशपाल के पीछे चल पड़ा ।
यशपाल को उस दिन शाम बहुत तेज बुखार चढ़ा । नरेंद्र समझ गया कि किसी वस्तु से वो बहुत ज्यादा डर गए हैं । लेकिन वह क्या है इसे यशपाल नहीं बता रहे । बहुत अनुरोध करने पर भी कोई लाभ नहीं हुआ ।
शाम होने से पहले नरेंद्र हाथ में कॉफी लेकर एक बार फिर यशपाल के रूम में पहुंचा ।
कप को उनके हाथ में देकर बोला - " सर आपने आज दोपहर में क्या देखा मुझे बताइए शायद मैं आपकी मदद कर सकता हूं । "
कोई उत्तर नहीं आया ।
" सर ऐसे केस सॉल्व नहीं होगा आप । आपने जो देखा था व इस समय क्या सोच रहे हैं मुझे बताइए । "
नरेंद्र और भी कुछ बोलने जा रहा था लेकिन यशपाल बोले - " नरेंद्र उस दिन विनय के मरने से पहले उसने क्या पहना था तुम्हें याद है ? "
थोड़ा सा सोचकर नरेंद्र उत्तर दिया - " सर मृत शरीर में जो देखा था उसके अनुसार उसने पीला शर्ट और एक भूरे रंग का पैंट पहना था । "
" उसी पीले शर्ट का एक छोटा टुकड़ा सर्वेश के दातों में फंसा हुआ था । "
नरेंद्र आश्चर्यचकित होते हुए बोला - " नहीं सर ऐसा नहीं हो सकता । "
" हां मैंने खुद को बहुत बार गलत ठहराने कोशिश की है लेकिन नहीं मैंने कुछ भी गलत नहीं देखा । "
" इसका मतलब विनय को एक आदमी ने अपना शिकार बनाया है । "
" इसके अलावा ऐसा कुछ अलौकिक भी हो सकता है जो इस विज्ञान के युग में भी हमें सोचने पर मजबूर कर दे । "
इसी बीच किसी ने रूम का दरवाजा खटखटाया । बाहर शाम हो गई है दोनों में से किसी को भी नहीं पता । नरेंद्र दरवाजा खोलने के लिए आगे बढ़ा । वो सोच रहा था कि खाना बनाने वाली मौसी आई होंगी । लेकिन दरवाजा खोलते ही उसने देखा एक बूढ़ा आदमी बाहर खड़ा है ।
" कौन हो तुम ? "
" मुझे बड़े साहब से जरूरी बात करना है । "
यशपाल के अंदर से देखते ही वो उस बूढ़े आदमी को पहचान गए । ये वही बूढ़ा आदमी है जिसके साथ वो विनय घर गए थे ।
बूढ़ा आदमी अंदर आकर फर्श पर बैठ गए और बोले - " साहब इन बातों को मुझे पहले ही आपको बता देना चाहिए था । अगर यह बातें जानते तो आप शायद इन मौतों को रोक सकते थे । "
नरेंद्र बोला - " अरे पहले आप कुर्सी पर उठकर बैठिए फिर बताइए । "
" नही साहब मैं यहीं पर ठीक हूं । अब मैं अपने बात को बताता हूं । यह घटना आज से 4 साल पहले की है ।
गांव में भैरव नाम का एक लड़का रहता था । उसके पिताजी सांप काटने की वजह से मार गए फिर उसकी मां भी स्वर्ग सिधार गई । भैरव को अपने आसपास देखकर गांव की लड़कियां असुरक्षित महसूस करती थी । उसके पौरूष कामना को देखकर उसे स्वाभाविक नहीं कहा जा सकता था । शिवपुर के कुछ समृद्ध परिवारों में से एक परिवार में रीमा नाम की एक लड़की रहती थी ।
उस समय उस लड़की की उम्र यहीं लगभग 18 साल होगा । भैरव इसी लड़की को पसंद करता था । लेकिन वह लड़की और उसके घरवाले भी भैरव को शैतान समझते थे । एक दिन बरसात के समय खेत के पास रीमा को अकेले देखकर उससे बत्तमीजी किया व शायद शरीर के गलत स्थानों पर जबरदस्ती हाथ लगाया । लेकिन उस समय जगदीश मास्टर उधर से ही कहीं जा रहे थे । वह रीमा को बचाकर गांव में ले आए और भैरव के गलत काम को सभी गांव वालों से बता दिया । प्रधान के साथ मिल सभी ने भैरव को पकड़ा । इसके बाद उसे लाठी से पीटकर अधमरा कर दिया गया । बात यहीं समाप्त हो जाता लेकिन रीमा के आंसुओं को देखकर जगदीश मास्टर और कुछ लोग अपने गुस्से को संभाल नहीं पाए ।
पुराने कृष्ण मंदिर के पास जो एक बरगद का पेड़ है उसी में उसे बांधकर पीटते हुए नरहत्या की गई ।
लेकिन उसके शरीर का क्रिया - कर्म नहीं किया गया । उसके शरीर को अजय नदी में फेंक दिया गया था । साहब मुझे याद है कि मरने से पहले भैरव ने कहा था कि वह लौटकर जरूर आएगा । "
यह सुन यशपाल हंस पड़े ।
" इसका मतलब आप कहना चाहते हैं कि भैरव के भूत ने ही यह सब किया है । "
" सही नहीं हो सकता लेकिन भैरव मर गया है इसका प्रमाण भी तो हमारे पास नहीं है क्योंकि उसके शरीर को फेंक दिया गया था । "
इस बात पर यशपाल ने ध्यान नहीं दिया था ।
" इसका मतलब भैरव जिंदा है और ये सब कुछ वही कर रहा है । "
बूढ़ा आदमी बोला - " नहीं जानता साहब आप लोग तो विज्ञान मानते हैं । इन भूत वाली बातों को आप विश्वास नहीं करेंगे लेकिन लोगों को ऐसे मरते हुए देख मुझे ऐसा लग रहा है कि भैरव लौट आया है । क्योंकि भैरव के गलत काम को सभी के सामने जगदीश मास्टर ने ही बताया था । "
बूढ़ा आदमी चुप हो गया । नरेंद्र ने इन बातों को मानने से पूरी तरह मना कर दिया ।
उस बूढ़े आदमी के लौटने से पहले यशपाल ने सर्वेश के घर का पता व जगह ठीक से पूछ लिया क्योंकि आज रात का ऑपरेशन है फॉलो द सस्पेक्ट सर्वेश । ......

।। अगला भाग क्रमशः ।।


@rahul

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