Tantric Masananath - 6 in Hindi Horror Stories by Rahul Haldhar books and stories PDF | तांत्रिक मसाननाथ - 6

तांत्रिक मसाननाथ - 6

तांत्रिक मसाननाथ व कापालिक ( 6 )

20 साल पहले की इस घटना को सोचते हुए नरेंद्र कहीं खो गया था । उसे होश आया मसाननाथ की आवाज को सुनकर ।
" नरेंद्र क्या यही तुम्हारा ऑफिस है ? लेकिन इसे देख कर तो किसी थाने जैसा लगता है । "
नरेंद्र बोला - " हां मैं एक पुलिस वाला हूं यह थाना ही मेरा ऑफिस है । आइए अंदर आइए यशपाल जी हमारे लिए प्रतीक्षा कर रहे हैं । "
थाने के हॉल रूम में पहुंचते ही यशपाल नजर आए । उन्हें देखकर ही ऐसा लग रहा था मानो बहुत ही परेशान हैं । अगर कोई मनुष्य अचानक अपने सामने अविश्वसनीय घटना देखता है तो उसका चेहरा ठीक है ऐसा ही होता है । दो कुर्सी लेकर नरेंद्र और मसाननाथ बैठ गए ।
मसाननाथ को खोजने के लिए नरेंद्र को बहुत परिश्रम करना पड़ा । देवाशीष जी के पास से जो पता मिला था वहां से जानकारी लेने पर पता चला मसाननाथ 5 साल पहले ही गांव से चले गए थे ।
अब कहां पर रहते हैं किसी को भी नहीं पता । अंत में मिसिंग डायरी करके मसाननाथ को खोजा गया । रांची के किसी गली में अब वो रहते हैं ।
वहां से उनको ट्रेन द्वारा आसनसोल लाया गया । नरेंद्र स्वयं जाकर मसाननाथ को स्टेशन से शिवपुर तक लेकर आए ।
अब तक यशपाल पूरी घटना मसाननाथ से बता रहे थे । सब कुछ सुनकर मसाननाथ बोले - " आप जैसा कह रहे हैं अगर यह सच हुआ तो सामने बहुत ही बड़ा खतरा है । कुछ भी इधर उधर हुआ तो कोई भी मारा जा सकता है । "
नरेंद्र चौंककर बोला - " मारा जाएगा मतलब ? "
" क्योंकि जिस शैतानी शक्ति के विरुद्ध हम लड़ाई में उतरेंगे । वह इस जगत का नहीं है । उसे शैतानी शक्तियों द्वारा इस जगत में लाया गया है । "

यशपाल बोले - " इस जगत का प्राणी नहीं है मतलब ,
मैं कुछ समझ नहीं पाया । "
मसाननाथ जवाब देने जा रहे थे लेकिन उन्हें रोककर
नरेंद्र बोला - " असल में तांत्रिक बाबा डाइमेंशन की बात कर रहे हैं । हमारे इस डाइमेंशन के अलावा भी और भी बहुत सारे डाइमेंशन होते हैं । जो एक दूसरे के ऊपर जाल की तरह फैले होते हैं । "
मसाननाथ सहमति देते हुए बोले - " हाँ , जहां तक मैं जानता हूं कुल 27 जगत हैं । जिसमें 11 व 13 नंबर बहुत ही खतरनाक है । जहां समय का अस्तित्व नहीं है । मुझे ऐसा लगता है कि शैतानी शक्ति उसी जगत से आया है । पहले हमें यही जानना होगा । "
यशपाल बोले - " लेकिन क्या मैं इसे कर पाऊंगा क्योंकि मुझे तो कुछ भी समझ में नहीं आ रहा है । नरेंद्र तुम्हें कुछ समझ में आ रहा है । "
मसाननाथ बोले - " पहले मुझे सर्वेश के घर लेकर
चलो । वहां जाकर ही मैं इस शैतानी शक्ति के प्रकृति
को जान पाऊंगा । इससे पहले आप एक घड़ी की
व्यवस्था कीजिए । "
" घड़ी से क्या होगा ? "
मसाननाथ बोले - " मैंने पहले ही बताया कि 11 व
13 जगत में समय का अस्तित्व नहीं है । लेकिन यह
बात पूरी तरह सही नहीं है ।
11 वें जगत में समय रुका रहता है लेकिन 13 वें
जगत में यह समय उल्टा चलता है । "
अब कुछ बातें यशपाल को समझ में आने लगी ।
" लेकिन सर्वेश के घर के साथ इसका क्या संबंध है ? "
" ये तो वहां पर जाने से ही पता चलेगा । "
" चलिए फिर अभी चलते हैं । "

धूल उड़ाते हुए पुलिस का जीप थाने से निकल गया ।
रास्ते में जाते हुए मसाननाथ ने इस रहस्य के बारे में
और भी बातें बताई ।
उनका मानना है कि भैरव ने किसी काले शक्ति के
द्वारा उस शैतान को इस जगत में लाया है । जिसे
अंग्रेजी में कहते हैं someone offer demons.
उन्होंने यह भी बताया कि इन सभी शैतानी शक्ति का अपना कोई आकार नहीं होता । इसके लिए उन्हें एक माध्यम की जरूरत होती है । वर्तमान में वही माध्यम
सर्वेश का शरीर है ।
लेकिन सर्वेश को खोजने से पहले और एक बड़ा कार्य करना होगा । लेकिन वो क्या है इस बारे में मसाननाथ विशेष कुछ नहीं बता बता पाए । क्योंकि इसी बीच जीप सर्वेश के घर के सामने पहुंच गया था । पहले नरेंद्र फिर एक-एक करके यशपाल और मसाननाथ जीप से उतरे ।
चारों तरफ देखने के बाद यशपाल सोचे क्या यह वही जगह है जहां 2 दिन पहले ही वो बैठे हुए थे ।
सर्विस का असल रूप अगर उन्हें पहले ही पता होता
तो वो इस केस में कभी नहीं जुड़ते । लेकिन अब एक
बार जब सब कुछ शुरू हो ही गया है तो अब उन्हें
इसका अंत देखना है । यशपाल धीरे-धीरे सर्वेश के
घर में पहुंचे । मसाननाथ व नरेंद्र भी उनके पीछे चल
पड़े । घर में कोई नहीं है और सर्वेश भी नहीं दिख रहा । सबसे आश्चर्य की बात है कि सर्वेश के माँ की शरीर
अब वहां पर नहीं है ।
बीते 2 दिनों में इस बारे में किसी ने शिकायत भी नहीं किया था । यशपाल ने सोचा था कि अभी भी उसके
मां का सड़ा हुआ मृत शरीर यहाँ होगा लेकिन मृत
शरीर तो दूर कमरे में एक बूंद खून भी नहीं मिला ।
मसाननाथ ने पूछा - " क्या ये वही कमरा है जहां पर
आपने उस शैतान को अंतिम बार देखा था ? "
नरेंद्र ने हां में जवाब दिया ।
" ठीक है , घड़ी को तो लेकर आए हैं ?
यशपाल बोले - " घड़ी मेरे पास है । काम पर निकलने से पहले घड़ी पहनना मेरी आदत है । "
" ठीक है अब काम शुरू करते हैं । "
यही बोल मसाननाथ आंख बंद करके मंत्र पढ़ने लगे । इधर एक दुर्गंध धीरे धीरे बढ़ता ही जा रहा है
। शाम होने में अभी बहुत देर है लेकिन सर्वेश के घर में मानो अंधेरा छा गया है ।
लगभग 10 मिनट बाद मसाननाथ ने आँख खोला और फिर बोले - " यशपाल अब अपने घड़ी को देखो । "
यशपाल ने बाएं हाथ की तरफ नजर डाला ।
घड़ी को देख यशपाल और नरेंद्र दोनों ही चौंक गए
क्योंकि घड़ी की सुइयां पीछे की ओर चल रही थी ।
" नरेंद्र यह गाड़ी खराब हो गई है क्या ? "
इसका उत्तर मसाननाथ ने दिया -
" नहीं ,आपका घड़ी ठीक है । मैं समय के अंदर
जाकर देख रहा था कि यह शैतानी शक्ति किस जगह
से आया है । अब साफ हो गया है कि यह 13 वें जगत
की शैतानी शक्ति है । अब आगे का काम इसी अनुसार किया जाएगा । अब यहां से भागना ही ठीक रहेगा
बाकी बातें मैं थाने में जाकर बताऊंगा । "
तीनों ही घर से बाहर निकल आए । इधर सूर्य पश्चिम
की ओर ढल रहा है ।
इधर - उधर देखते हुए थाना पहुंचने में रात हो गया ।
आज पूरे दिन के भाग दौड़ से नरेंद्र बहुत थक गया था ।
उसे देखकर ही मसाननाथ बोले - " आज आराम करो
कल इस बारे में विस्तार से क्रिया शुरू करते हैं । "
उस रात इस बारे में कोई भी बात नहीं हुआ । .........

अगला भाग क्रमशः....


@rahul