Tantric Masananath - 7 in Hindi Horror Stories by Rahul Haldhar books and stories PDF | तांत्रिक मसाननाथ - 7

तांत्रिक मसाननाथ - 7

तांत्रिक मसाननाथ व कापालिक ( 7 )

अगले दिन सुबह के 10 बजे इस बारे में बातचीत शुरू
हुई । चाय के कप को हाथ में लेकर नरेंद्र थाने के हॉल
रूम में पहुंचा । मसाननाथ व यशपाल वहां पर पहले
ही पहुंच गए थे ।
एक कुर्सी लेकर नरेंद्र के बैठते ही मसाननाथ बोले
- " कल रात इस बारे में बहुत कुछ सोचा । सबसे पहले
हमें उस जीव को ढूंढना होगा । जिसके माध्यम से वह शैतानी शक्ति इस जगत में आया है । "
यशपाल बोले - " किस प्रकार का जीव बाबाजी ? "
" ऐसा एक जीव जो इन दोनों जगत के दीवारों को
पार कर सकता है । "
" लेकिन जीव का नाम क्या है ? "
" व्याध-पतंग , दूसरे जगत का व्याध-पतंग "
यशपाल हंसते हुए बोले - " आपके कहने का मतलब है एक छोटे से व्याध-पतंग ने शैतानी शक्ति को इस जगत
में लाया । "
नरेंद्र बोला - " सर आपको पता होगा कि
व्याध-पतंग को इंग्लिश में ड्रैगनफ्लाई कहते हैं ।
क्योंकि व्याध-पतंग डायनासोर के समय से जिंदा है ।
उस अपोकेलिप्स में सबसे शक्तिशाली जीव डायनासोर
मारे गए लेकिन ड्रैगनफ्लाई जिंदा थे । "
यशपाल और कुछ नहीं बोले ।
नरेंद्र फिर बोला - " तांत्रिक बाबा यह व्याध -पतंग इस समय कहां पर है ? "
" इसी गांव में कहीं पर छुपा हुआ है । "
" लेकिन हम उसे कहां पर ढूंढे ? "
" उसे खोजना नहीं होगा वो खुद ही हमारे पास चला आएगा । तुम केवल थोड़ा सा हल्दी व चावल मुझे
लाकर दो । "
यशपाल बोले - " नरेंद्र तुम जाकर खाना बनाने वाली
मौसी से तांत्रिक बाबा को जो कुछ भी चाहिए लेकर
चले आओ । "
कुछ देर बाद दोनों सामानों को हाथ में पाकर मसाननाथ थाने से बाहर निकल आए । नरेंद्र और यशपाल भी उनके पीछे चल पड़े ।
सामने की ईट वाले रास्ते से चलते हुए वे सभी एक
जगह पर पहुंचे । क्योंकि मसाननाथ जिस कार्य को
संपन्न करने जा रहे हैं उसके लिए मिट्टी की जरूरत है । फर्श पर इसे नहीं किया जा सकता ।
मसाननाथ ने मिट्टी पर बैठकर हल्दी द्वारा एक वृत्त
बनाया । और फिर उस वृत्त के अंदर एक क्रास का
चिन्ह बनाकर उसे चार भागों में बाँट दिया ।
नरेंद्र और यशपाल एकटक उनके उस क्रियाकलाप को देख रहे थे । अब हर एक भाग में थोड़ा सा चावल रखा
गया । इसके बाद मसाननाथ ने आंख बंद करके मंत्र
पढ़ना शुरू कर दिया ।
कुछ ही देर में बाएं तरफ के चावल का रंग काला होने
लगा ।
मसाननाथ बोले - " मिल गया , वह गांव के पश्चिम
तरफ छुपा हुआ है । "
नरेंद्र बोला - " लेकिन उधर तो जंगल है ।
और नदी के उस तरफ कोई घर भी नहीं है । "
यशपाल बोले - " इससे हमें क्या , हम तो
व्याध-पतंगा पकड़ने जा रहे हैं कोई बाघ शिकार पर
नहीं । "
मसाननाथ ने मन ही मन सोचा कि यह
व्याध-पतंग किसी बाघ से कम नहीं । लेकिन वह दोनों
डर जाएंगे इसीलिए कुछ नहीं बोला ।
यशपाल बोले - " ठीक है तो अभी चलते हैं और वरना
रात हो जाएगा । "
" नहीं अभी जाकर कोई लाभ नहीं होगा । केवल
सूर्यास्त के बाद ही इसे पकड़ा जा सकता है । दिन
में दूसरे व्याध-पतंग के साथ इसको नहीं खोजा जा
सकता । "
" इसका मतलब हमें रात को जाना होगा । "
" हाँ "
इतना बोल कर मसाननाथ थाने की ओर चल पड़े
तय हुआ कि शाम 4 बजे जंगल की तरफ सभी
निकलेंगे । क्योंकि नदी के पास वाले जंगल में पहुंचने
के लिए लगभग 3 घंटा लगेगा । शाम के अंधेरे में उस ड्रैगनफ्लाई को खोजना आसान होगा ।

शाम के 3 बजते ही यशपाल वहाँ जाने के लिए
तैयारी शुरू करने लगे । सर्विस रिवाल्वर ,टॉर्च इत्यादि सामानों को भी साथ ले लिया ।
समय रात के 8 बज रहे थे । जीप से उतर वे सभी
चल पड़े ।
मसाननाथ बोले - " यशपाल तो मेरे साथ टॉर्च लेकर
आओ और नरेंद्र तुम पीछे ध्यान रखना । "
अजय नदी के इस ओर चारों तरफ जंगली झाड़ियों
से भरा हुआ है । इसीलिए वे सभी सावधानी से चल
रहे थे ।
" तांत्रिक बाबा हम कहां पर जा रहे हैं? और वह व्याध-पतंग कहां पर है ?" यशपाल बोले ।
मसाननाथ बोले - " आप नकारात्मक शक्ति को अनुभव करना चाहते हैं । "
" हां लेकिन कोई परेशानी तो नहीं होगी । "
" अभी ऐसा कुछ भी नहीं होगा "
बोलकर मसाननाथ ने यशपाल के माथे पर हाथ रखा । तुरंत ही उन्हें ऐसा लगा कि जंगल के अंदर से एक
ठंडी हवा बाहर निकल रही है ।
" यही है नकारात्मक शक्ति , शैतान के जितना पास हम जाएंगे उतना ही ठंडी बढ़ती जाएगी । "

वो सभी फिर से चलने लगे । मसाननाथ जितना आगे बढ़ते रहे यशपाल को उतना ही ठंडी लगती रही ।
लगभग आधे घंटे चलने के बाद नरेंद्र को ऐसा लगा
मानो सामने और पीछे के जंगल एक जैसे हैं । तो
क्या वह सभी रास्ता भटक गए ।
इधर किसी अनजाने खतरे की अनुभूति से
मसाननाथ भी रुक गए ।
" सभी रुक जाओ यहां कुछ तो गड़बड़ है । "
बात के समाप्त होने से पहले ही पास के झाड़ी से
कोई एक जीव यशपाल की ओर झपट पड़ा ।
उस चार पैर वाले जीव के चेहरे पर दांतो के अलावा
आंख व नाक कुछ भी नहीं है । तुरंत ही नरेंद्र ने गोली
चला दिया ।
" सर आप ठीक तो हैं । "
शरीर के ऊपर से उस भयानक जीव को हटाकर
यशपाल खड़े हुए ।
" well done नरेंद्र ,सही समय पर गोली चलाया
वरना आज तो… "
“ चलिए व्याध-पतंग मिल गया । "
पीछे की झाड़ी से निकलते हुए मसाननाथ बोले -
" ये यहां पर बैठकर पहरा दे रहा था । मुझसे थोड़ा
भूल हो गया । पहले ही मुझे अंदाजा लगा लेना चाहिए
था । "
" अब इसका क्या करें । " यह कहते हुए यशपाल
नीचे जमीन की ओर इशारा करके उस जीव को
दिखाना चाहते थे ।
लेकिन कोई जानवर कहां यह तो सर्वेश है । गोली
लगने के कारण नीचे पड़ा हुआ है ।
" नरेंद्र देखो बचा है या नहीं । "
" सर हार्टबीट चल रहा है । गोली उसके कंधे के पास
लगी है । "
यशपाल पास ही कहे मसाननाथ से बोले - " हमने सर्वेश को गोली जान बूझकर नहीं मारा । "
मसाननाथ बोले - " हां मैं जानता हूं । अब जब तक यह शैतानी शक्ति मेरी कब्जे में है तो इसकी वश में जो भी थे सभी सामान्य हो जाएंगे । "
नरेंद्र बोला - " लेकिन सर सर्वेश को अगर पता चला
है कि उसने अपने बूढ़ी मां को मारकर खा लिया तो यह उसके लिए बहुत ही डार्क होगा । "
" यह बातें अभी उसे नहीं बताना है । चलिए हम सभी
थाने में चलते हैं । इसके आगे क्या करना है वहीं पर
सोचा जाएगा । "

नरेंद्र और यशपाल ने सर्वेश को उठाकर जीप की
ओर चल पड़े । यशपाल ने एक बार मसाननाथ के
हाथ में रखे उस भयानक ड्रैगनफ्लाई को देखा ।
ड्रैगनफ्लाई ना बोलकर इसे एक उड़ने वाली बड़ी सी
मकड़ी कहा जा सकता है ।
रात बढ़ता ही जा रहा था । सर्वेश को जीप में बैठाकर
वे सभी थाने की ओर चल पड़े । .....

अगला भाग क्रमशः ...


@rahul