Tantric Masananath - 8 in Hindi Horror Stories by Rahul Haldhar books and stories PDF | तांत्रिक मसाननाथ - 8

तांत्रिक मसाननाथ - 8

तांत्रिक मसाननाथ व कापालिक ( 8 )

रात 1 बजे थाने के सामने जीप आकर रुकी । सबसे पहले यशपाल फिर मसाननाथ उसके बाद नरेंद्र गाड़ी से उतरे । सर्वेश की स्थिति ठीक नहीं है गोली लगने वाली जगह से खून का बहाव बढ़ता ही जा रहा है ।
यशपाल ने आदेश दिया - " नरेंद्र तुम सर्वेश को जिला अस्पताल में लेकर जाओ । अभी अगर रवाना होगे तो सुबह तक चले आओगे । क्योंकि अगर उसे हॉस्पिटल में न भर्ती किया गया तो स्थिति गंभीर हो सकती है । "
नरेंद्र कुछ भी न बोलकर ड्राइविंग सीट पर बैठ गया । कुछ देर में पुलिस जीप आँखों से ओझल हो गया ।
मसाननाथ ने यशपाल के कंधे पर हाथ रखकर कहा -
" चिंता मत कीजिए सब कुछ ठीक हो जाएगा । मैं यहां पर आ गया हूं अब इसका अंत अवश्य होगा । अंदर चलिए आपके साथ कुछ बात करनी है । "
थाने के हॉल रूम में प्रवेश करते ही मसाननाथ ने अपने थैली से हल्दी पाउडर निकाला । उसके बाद टेबल के ऊपर बिखरे कागजों को एक तरफ करके वहां पर हल्दी द्वारा एक वृत्त बनाया । इसके बाद अपने हाथ में रखें व्याध-पतंग को उस वृत्त के केंद्र में रख अपने आंखों को बंद करके मंत्र पढ़ना शुरू कर दिया ।
जब तक मंत्र जाप चलता रहा तब तक यशपाल के मुँह से कोई भी बात नहीं सुनाई दिया ।
मंत्र पाठ समाप्त होते ही यशपाल बोले - " बाबाजी नरेंद्र मुझसे जूनियर है । उसके सामने ऐसी बातें नहीं कर सकता इसीलिए आपको बता रहा हूं ।
मुझे बहुत ही डर लग रहा है । क्या मैं यह सब कर पाऊंगा ? आप तंत्र मंत्र जानते हैं लेकिन मैं तो एक साधारण पुलिस ऑफिसर हूं । मेरा मानना है आप अकेले ही यह सब कीजिए । "
" यशपाल जी आपके अंदर कितनी क्षमता है उसे आप खुद भी नहीं जानते । समय आपको सभी चीजें समझा देगी । और वैसे भी हम जिस प्रक्रिया में शामिल हुए हैं उसके हर एक कदम पर खतरा है ।
मेरे द्वारा अकेले इसे संपूर्ण करना संभव नहीं है ।"
" कैसी प्रक्रिया बाबाजी ?"
" त्रिकाल यज्ञ "
" यह क्या है ? "
" शुरू से ही बताता हूं । किस गांव में पैर रखते ही मैं
समझ गया था कि जिस नकारात्मक शक्ति का अनुभव
मैंने किया था वो इस जगत का नहीं है । क्योंकि इतनी शक्तिशाली प्रभाव को मैंने पहले कभी नहीं महसूस
किया है । इसके बाद आप सभी के पास से पूरी घटना
को सुनने के बाद मैं निश्चिंत हो गया कि मैं सही था । "
इसके बाद टेबल पर रखे व्याध-पतंग की ओर इशारा
करते हुए मसाननाथ बोले -" यह कोई साधारण व्याध-पतंग नहीं है । इसके अंदर कितना नकारात्मक शक्ति है उसे आप सोच भी नहीं सकते । लेकिन इस समय वो मेरे मायाजाल में बंद है । जब तक वह इस हल्दी के वृत्त के अंदर रहेगा तब तक हमें कोई डर नहीं । हम आसानी से त्रिकाल यज्ञ संपन्न कर लेंगे । "
" लेकिन इस यज्ञ का असली उद्देश्य क्या है? "
" हमारा मूल लक्ष्य है इस शैतानी शक्ति को उसके जगत में वापस पहुंचा देना । लेकिन इसे करने के लिए हम सभी को 13 वें जगत में प्रवेश करना होगा । केवल हम ही नहीं त्रिकाल यज्ञ के माध्यम से पूरा शिवपुर गांव 13 वें जगत में प्रवेश करेगा । और इसी में हमारा कार्य सिद्ध हो जाएगा । क्योंकि विपरीत क्रिया में जब शिवपुर गांव को उस जगह से लौटना होगा तब यह नकारात्मक शक्ति फिर नहीं लौट पाएगा । उसी जगत में अटक जाएगा क्योंकि वह मेरे मंत्र के मायाजाल में बंद है । "
" परंतु अगर यह वृत्त मिट गया तब तो बहुत ही खतरा हो सकता है । "
" अंदर से लकीर मिटना संभव नहीं है केवल बाहर से कुछ किया जा सकता है । "
" नरेंद्र को इस बारे में बताना होगा । वैसे भी वो इस टेबल पर हाथ नहीं लगाएगा । "
" एक समस्या और है । त्रिकाल यज्ञ को करने के लिए एक ऐसी जगह पर बैठना पड़ता है जहां चारों तरफ पानी हो । और हम जिस जगत में जाएंगे वहां पर पानी नहीं है वहां केवल खून ही खून है । आप किसी ऐसे तालाब व पोखरा को जानते हो जहां पर कोई ऐसा स्थान हो । "
यशपाल ने बिना सोचे ही उत्तर दिया - " इस गांव के पीछे अजय नदी में एक प्राचीन मंदिर है । बरसात से पहले उसके ऊपर का भाग दिखता है । "
" ऐसा क्या , यह सब तो मैंने कहानियों में सुना है । "
" मैंने भी इसे पहली बार देखकर चौंक गया था । यहाँ के लोग बताते हैं कि 500 साल पहले यह नदी के अंदर समा गया था । कल सुबह एक बार वहां जाकर देखना होगा कि मंदिर की चोटी दिखाई दे रहा है या नहीं । अगर दिखाई दिया तो किसी मांझी को बुलाकर वहां पहुंच जाएंगे । "
" हां ठीक है । पहले नरेंद्र को वापस आने दो फिर आगे के बारे में सोचेंगे । "
" हां चलिए अभी थोड़ी रात बाकी है नरेंद्र के लौटने तक हम थोड़ा सो लेंगे । "

उस समय सुबह के 8 बज रहे थे । नरेंद्र के बुलाने से यशपाल जाग गए । हॉल रूम के एक कुर्सी पर ही वो सो गए थे ।
नरेंद्र बोला - " सर सर्वेश को हॉस्पिटल में भर्ती कर
दिया हूं । वह होश में आया हैं लेकिन पिछले दिनों की
कोई भी बात उसे याद नहीं । इसीलिए मैंने भी गोली
लगने के बारे में कुछ नहीं बताया । शायद डॉक्टरों ने
कुछ अंदाजा लगाया था लेकिन मुझसे पूछने की हिम्मत उन्होंने नहीं किया । अब आप बताइए यहां क्या हुआ? "
" सब कुछ बताऊंगा लेकिन पहले तुम जाकर आराम
करो । तुमने पूरी रात जागा है । "
" नहीं सर जी मैं ठीक हूं । वैसे तांत्रिक बाबा कहां पर हैं? "
" वो अभी अंदर के कमरे में सो रहें है । तुम अंदर
जाओ मैं फ्रेश होकर आता हूं । "

मसाननाथ से नरेंद्र को सभी बातें पता चली । अचानक एक कौतूहल से उसका शरीर ऊर्जावान हो गया । अजय नदी के अंदर जो प्राचीन मंदिर है उसके रहस्य को जानने की इच्छा नरेंद्र के मन में बहुत पहले से ही है । लेकिन सबसे विशेष बात जो उसने बताई वो यह था कि सर्वेश को हॉस्पिटल भर्ती करने बाद ज़ब वो लौट रहा था । उस समय नदी के पास वाले रास्ते पर आते ही उसने देखा अजय नदी के बीचो-बीच एक समतल स्तूप निकला हुआ है । वही प्राचीन मंदिर है इसमें कोई शक नहीं । इसीलिए इस समय नदी के किनारे न जाकर शाम को किसी नाव वाले के साथ जाने के लिए सभी का विचार हुआ ।……

अगला भाग क्रमशः ।।



@rahul

Rate & Review

Amrita Singh

Amrita Singh 1 year ago

Rojmala Yagnik

Rojmala Yagnik 1 year ago

Hema Patel

Hema Patel 1 year ago

Vijay

Vijay 1 year ago

Minaz Shaikh

Minaz Shaikh 1 year ago