Tantric Masananath - 9 in Hindi Horror Stories by Rahul Haldhar books and stories PDF | तांत्रिक मसाननाथ - 9

तांत्रिक मसाननाथ - 9

तांत्रिक मसाननाथ व कापालिक ( 9 )


दोपहर को यशपाल स्वयं ही गांव में जाकर लालू नाम मल्लाह को लेकर आए । नदी में करना क्या है यह सुनने के बाद लालू आश्चर्यचकित है । उस प्राचीन पवित्र मंदिर के ऊपर जाना है यह उसके सोच के बाहर था ।
लालू ने यह भी बताया कि अजय नदी में कभी कभी मीठे पानी के मगरमच्छ भी देखे जाते हैं । अंत में कुछ पैसे देकर उसे राजी कराया गया । दोपहर तक सबकुछ सेट हो गया लेकिन लालू मल्लाह के अलावा गांव के किसी भी आदमी को इस बारे में भनक भी ना लगे इसका विशेष ध्यान रखा गया । सर्वेश के हालत को जिस तरह छुपा कर रखा गया है ठीक उसी तरह इस अभियान को भी छुपकर किया करना होगा ऐसा ही यशपाल का कहना है । इस पर मसाननाथ व नरेंद्र का भी एक ही मत है ।
अगर कोई जान गया तो इस क्रिया में बाधा भी हो सकता है । शाम होने से पहले वे सभी नदी की ओर चल पड़े । लालू मांझी जब तक नाव को लेकर नदी में उतरा तबतक चारों तरफ काले बादल घिर चुके थे ।
दूर कहीं बिजली भी गिर रही थी । ऐसे समय नदी में नाव को लेकर जाना आत्महत्या करने जैसा है । लेकिन लालू क्या कहे क्योंकि इस काम के लिए उसने तीन गुना ज्यादा पैसा लिया है । यह काम उसे करना ही होगा । पहले मांझी फिर नरेंद्र व यशपाल इसके बाद सबसे अंत में मसाननाथ नाव पर बैठे ।
लालू मांझी नाव चलाने वाला था कि सभी ने देखा एक आदमी नदी के पास वाले पगडंडी से दौड़ते हुए इधर ही आ रहा है ।
" सर कहीं गांव वाली जान तो नहीं गए । "
यशपाल के जवाब देने से पहले ही वह बूढ़ा आदमी नाव के पास आकर खड़ा हो गया ।
वह बूढ़ा आदमी बोला - " आप सभी रुक जाइए । उस मंदिर में कुछ भी मत कीजिएगा । कई सालों से वे सभी वहां पर सो रहे हैं । आप सभी के कामों से अगर वो जाग गए तो कोई नहीं बचेगा सभी मारे जाएंगे । "
यह सुन यशपाल गुस्से से उठ खड़े हुए । नरेंद्र और मसाननाथ किसी तरह उन्हें संभाला ।
" ठीक है जाइए तब , आप सभी जवान हैं इसीलिए इतनी क्षमता नहीं है कि मैं आप को रोक सकूं । लेकिन याद रखना अगर वह सभी जाग गए तो आप सभी के लिए खतरे का द्वार खुल जाएगा । "
इतना बोल कर वह बूढ़ा आदमी जिस रास्ते से आया
था उधर ही लौट गया । लालू माझी ने भी कुछ ज्यादा
न सोच नाव चलाना शुरु कर दिया ।
अजय नदी के काले पानी व आसमान के काले बादल
ने एक भयानक वातावरण को उत्पन्न किया है।
मसाननाथ बोले - " चिंता की कोई बात नहीं । सभी सामान मेरे पास है । और वह शैतान भी मेरे मायाजाल में बंद है । अब जल्दी से उस जगह पर पहुंचकर त्रिकाल यज्ञ को पूर्ण करना ही हमारा लक्ष्य है । और वैसे भी इसमें रूकावट डालने वाला कोई भी नहीं है । "
यह सुनने के बाद भी नरेंद्र मन में खतरे की आशंका बढ़ने लगी है । बार-बार उसे ऐसा लग रहा है कि वह कुछ भूल रहा है लेकिन वह क्या है ये याद नहीं आ रहा ।
इधर लालू की नाव धीरे-धीरे मंदिर की ओर बढ़ रहा है । देखने से ऐसा लग रहा है कि एक बड़ा सा स्तूप उनकी ओर धीरे-धीरे चला आ रहा है ।

शाम होने के बाद खाना बनाने वाली मौसी यशपाल को कमरे में न पाकर उन्हें थाने में खोजने के लिए आई । थाने के हॉल रूम में प्रवेश करते ही उन्होंने देखा टेबल के ऊपर हल्दी द्वारा एक गोला बना हुआ है ।
" यहां पर हल्दी किसने फैलाया । शायद यशपाल बाबू ने इसे नहीं देखा वरना साफ करने के लिए जरूर कहते । अब आ ही गई हूं तो इसे साफ कर देता हूं । "
यही बोलकर वो रूम के कोने से झाडू लाकर साफ करने लगी । साफ करते हुए उन्होंने उस व्याध पतंग को देखा लेकिन उस पर ज्यादा ध्यान नहीं दिया । उन्हें लगा वह मरा हुआ है । टेबल से हल्दी साफ करने के बाद खाना बनाने वाली मौसी ने देखा वह मरा हुआ व्याध-पतंग फिर से जिंदा होकर उड़ गया । यह देख उन्हें थोड़ा आश्चर्य हुआ कि कुछ देर पहले ही वह मरा हुआ था लेकिन अचानक जिंदा कैसे हो गया ?

अब नरेंद्र को याद कि यशपाल ने उसे आज के बारे में खाने बनाने वाली मौसी को बताने के लिए कहा था । और यह भी कि आज हम सभी नहीं रहेंगे ।
अचानक मसाननाथ बोले - " मांझी जल्दी से नाव चलाओ । वह मुक्त हो गया अब हमारे लिए खतरा ही खतरा है । "
" मुक्त हो गया है लेकिन कैसे ? आपने तो कहा था कि आप के मायाजाल से वह कभी नहीं निकल सकता । "
" इस बारे मैं नहीं जानता लेकिन वह आ रहा है । मैं उसे अनुभव कर सकता हूं वह गुस्से में हमारी ओर ही बढ़ रहा है । मांझी तुम और तेजी से नाव को मंदिर की ओर आगे बढ़ाओ । "
लालू मांझी की तरफ इशारा करते हुए बोला - " चला तो रहा हूं लेकिन पानी में देखिए वह क्या है? "
" कहां " बोलकर नरेंद्र ने पानी में टोर्च जलाया ।
नरेंद्र ने देखा एक बड़ा सा मगरमच्छ उनके तरफ ही बढ़ रहा था । यह मगरमच्छ कुछ अलग ही था उसकी आंखें अँधेरे में लाल चमक रही थी । सभी संभल पाते इससे पहले एक धक्के में नाव पलट गई ।
" सभी जल्दी से तैरों सामने ही मंदिर का पत्थर दिख रहा है । "
नरेंद्र के आवाज को सुन सभी सामने के पत्थर की ओर तैरने लगे । लेकिन अचानक से उस पानी के दानव ने यशपाल के बायां हाथ को काट उन्हें पानी के अंदर खींच कर ले गया ।
नरेंद्र ने यशपाल के दर्द से कराहने की आवाज सुनी ।
वह यशपाल को बचाने के लिए पीछे मुड़ने ही वाला था कि मसाननाथ ने उसे रोकते हुए कहा ।
" सामने मंदिर की ओर तैरते रहो । हमें चारों तरफ से इन शैतान रुपी मगरमच्छों ने घेर रखा है । जल्दी से हाथ चलाओ वरना हम भी मारे जाएंगे । "
पीछे ना देखते हुए तीनों अपनी पूरी क्षमता से सामने दिखाई देने वाले पत्थर की ओर तैरते रहे ।


अगला भाग क्रमशः ।।


@rahul

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