Tantric Masananath - 10 in Hindi Horror Stories by Rahul Haldhar books and stories PDF | तांत्रिक मसाननाथ - 10

तांत्रिक मसाननाथ - 10

तांत्रिक मसाननाथ व कापालिक ( अंतिम )


लगभग 10 मिनट तैरने के बाद वो सभी उस पत्थर पर पहुंचे । तैरते हुए थक जाने के बावजूद नरेंद्र ने टोर्च को नहीं छोड़ा । फिसलन भरे उस पत्थर पर पहुंचने के बाद नरेंद्र ने पीछे टॉर्च जलाया ।
" तांत्रिक बाबा सर कहां गए ? "
मसाननाथ ने कोई उत्तर नहीं दिया ।
लालू बोला - " बाबू साहब यहां पानी में एक हाथ दिखाई दे रहा है । "
नरेंद्र ने उस ओर टोर्च जलाया । जैसे ही लालू ने उस हाथ को पकड़कर खींचा वह डर से कांप उठा क्योंकि वह कंधे के पास से कटा हुआ हाथ था ।
यशपाल के साथ क्या हुआ है यह सोच नरेंद्र और मसाननाथ दोनों के रोंगटे खड़े हो गए ।
" बाबा तो क्या यशपाल सर् हमारे बीच नहीं रहे ? "
" नरेंद्र कुछ पाने के लिए कुछ खोना भी पड़ता है । अपने आवेग के उपर नियंत्रण रखो । "
किसी तरह खुद को संभालकर नरेंद्र बोला - " ठीक है चलिए । "
मंदिर के उस बड़े से चोटी पर पहुंचकर मसाननाथ ने अपने पास रखे हल्दी के पॉलिथीन को निकाला ।
इसके बाद सभी को पास बुलाकर अपने चारों ओर हल्दी द्वारा एक वृत्त बना दिया ।
" इस वृत्त के बाहर निकलने पर खतरा है । जब तक मेरा यज्ञ चलेगा तुम सब इसके अंदर ही रहोगे । शैतानी शक्ति कई प्रकार से तुम्हें आकर्षित करेगा जिससे तुम बाहर निकल जाओ । अगर ऐसा किया तो मौत हो सकती है । फिर बता रहा हूं किसी भी तरह अपने आवेग को नियंत्रण में रखना । "
नरेंद्र और लालू दोनों ने से सिर हिलाकर हाँ में उत्तर दिया । तांत्रिक मसाननाथ बीच में बैठ गए ।
बैठते ही तांत्रिक मसाननाथ ने मन्त्र पाठ आरंभ कर दिया । अचानक ही आसपास का वातावरण दुर्गंध से भर गया । नरेंद्र ने देखा अजय नदी का पानी धीरे-धीरे लाल हो रहा है ।
इसी वक्त लालू ने देखा रक्षा वृत्त के चारों तरफ कुछ भयानक सा घूम रहा है । नरेंद्र ने भी इसे देखा । टॉर्च जलाते ही जो दृश्य उन्हें दिखा उसकी वर्णना करना भी कठिन है । एक बड़ा सा मकड़ी उनके चारों तरफ घूम रहा था । लेकिन मसाननाथ द्वारा बनाया गए रक्षा लकीर के अंदर आना उसके लिए संभव नहीं है ।
इधर अजय नदी का पानी अब पूरी तरह से खून बन गया है । शिवपुर के सभी पेड़ों के पत्ते काले रंग में बदल गए हैं । घड़ी की सुईयां उल्टी दिशा में घूम रही है । शिवपुर इस समय 13 वें जगत में प्रवेश कर चुका है ।
अचानक नरेंद्र ने देखा एक बूढ़ा आदमी उनके तरफ ही चलकर आ रहा था । नरेंद्र उन्हें पहचानता है ।
ध्यान से देखने पर पता चला वह उसके दादाजी हैं जो रक्षा वृत्त के बाहर खड़े हो गए ।
देवाशीष के पिताजी स्वयं यहां पर उपस्थित हैं और बोल रहे हैं - " बेटा इधर आओ , आओ देखो तुमसे कौन मिलने आया है । "
मंत्रमुग्ध होकर नरेंद्र उस ओर धीरे-धीरे बढ़ने लगा ।
यह देख मसाननाथ चिल्लाते हुए बोले - " नरेंद्र वो सब
मत सुनो । लकीर से बाहर मत निकलना । "
लेकिन नरेंद्र ने मसाननाथ की बातों पर कोई ध्यान नहीं दिया । 20 साल पहले मरे हुए दादाजी उसे बुला रहे हैं । उसे उनके पास जाना ही होगा ।

मसाननाथ की बातों को अनसुना करके नरेंद्र लकीर के बाहर निकल आया । लेकिन बाहर उसके दादा जी कहां हैं वहां पर तो विभत्स चेहरे वाला एक भयानक मकड़ी खड़ा है । यह देख नरेंद्र जल्दी से लकीर के अंदर आना चाहा । लेकिन उससे पहले ही मनुष्य चेहरे वाले उस मकड़ी ने नरेंद्र को जकड़ लिया ।

यह चेहरा किसी और का नहीं भैरव कापालिक का है ।
उस भयानक मकड़ी ने आपने बड़े-बड़े दातों से नरेंद्र
को काटने लगा । दर्द से नरेंद्र चिल्लाता रहा ।
अचानक यशपाल का आवाज सुनाई दिया ।
" ह**** साले ले मर , आज तेरा खेल खत्म कर दूंगा । "
यशपाल अपने पास रखें बड़े से स्टील बॉडी टॉर्च से उस मकड़ी के सिर पर वार कर रहे थे । उनका शरीर जगह-जगह से कटा हुआ है । लेकिन सबसे बड़ी बात कि वह केवल एक हाथ से वार कर रहे हैं क्योंकि उनके दूसरे हाथ की जगह केवल मांस का लोथड़ा बचा है ।
यशपाल बोलते रहे - " तांत्रिक ने कहा है कि मेरे अंदर बहुत ही ताकत है । उस मगरमच्छ को भी फाड़ डाला अब तुझे भी मार डालूंगा । मार साले को "
अब मकड़ी ने नरेंद्र को छोड़ यशपाल की तरफ लपक पड़ा । इसी का अवसर लेकर लालू ने लकीर से बाहर निकल नरेंद्र के अधमरे शरीर को लकीर के अंदर खींचकर ले गया । इधर भैरव रुपी राक्षस मकड़ी यशपाल के शरीर को चबाकर कई टुकड़ों में काट दिया ।
अब मसाननाथ खड़े हुए और बोले - " लालू तैयार रहो मेरे इशारा करते ही नरेंद्र को लेकर लकीर के बाहर चले जाना । "
लालू को कुछ भी समझ नहीं आ रहा था । लेकिन मसाननाथ के आदेश के लिए खुद को तैयार करने लगा ।
मसाननाथ ने हुंकारा - " भैरव इधर देख "
हुंकार सुनते ही वह भयानक मकड़ी मसाननाथ की ओर बढ़ चला लेकिन इस बार रक्षा लकीर से उस मकड़ी को कुछ भी नहीं हुआ । वृत्त के अंदर पहुंचते ही मसाननाथ चिल्लाए ।
" लालू भागो । "
लालू ने नरेंद्र को कंधे पर लादकर लकीर के बाहर भागा । मसाननाथ भी उल्टी दिशा में भाग गए ।
रक्षा वृत्त से बाहर निकलते ही लालू ने देखा हल्दी की लकीरें अब जलने लगी और उसके बीच में वह भयानक जीव अटक गया है ।
मसाननाथ लालू से बोले - " अब विपरीत प्रक्रिया को करने वाला हूं जैसे ही भूकंप के झटके महसूस हो तुरंत नरेंद्र को लेकर नदी में कूद जाना ।
मसाननाथ ने आंख बंद करके फिर से मंत्र को पढ़ाना शुरू कर दिया । छूट गई थी आसमान गरजकर बिजली चमकने लगी । हवा भी आंधी की तरह चलने लगा जिसने खड़े होना भी कठिन था ।
उधर मसाननाथ जोर-जोर से मंत्र पढ़ रहे थे । अचानक भूकंप शुरू होते ही लालू माझी ने नरेंद्र को कंधे पर लादकर पानी में कूद पड़े । नदी की पानी मानो समुद्र की लहरें बन गई थी । बहुत ही माहिर तैराक होने के बावजूद लालू पानी के अंदर डूबने लगा । बेहोश होने से पहले उसे एक ही बात याद था कि वह नरेंद्र के हाथ को कस कर पकड़ा हुआ है ।

होश में आते ही नरेंद्र हड़बड़ाकर उठ बैठा । उसके पूरे शरीर से चोटों की वजह से खून बह रही है ।
कुछ ही दूर लालू माझी बेहोश पड़ा था । इधर उधर नजर घुमाते ही वह इस जगह को पहचान गया । यह अजय नदी का घाट है ।
" तुम ठीक हो नरेंद्र "
आवाज कोई सुन नरेंद्र चौंक गया । पीछे मुड़कर देखा तो मसाननाथ बैठे हुए थे ।
" अब कोई डर नहीं है और शैतान को मायाजाल में बांधकर 13 वें जगत में ही छोड़ आया हूं । इस जगत में फिर वह नहीं आ पाएगा । लेकिन सबसे बड़ी बात क्या है नरेंद्र जानते हो वह मंदिर मुझे कोई आम मंदिर नहीं लगा । वहां कुछ तो है क्योंकि उस पत्थर पर जाते ही मैं समझ गया था । "
नरेंद्र इधर उधर देखते हुए बोला - " यशपाल सर कहां पर है ? "
" अब वह हमारे बीच नहीं हैं उन्होंने अपने प्राण देकर तुम्हारी रक्षा की है । "
इसी बीच लालू भी उठ बैठा था ।
मसाननाथ बोले - " अब यह रहस्य साफ हो गया है । भैरव एक कापालिक बन गया था । उसने अपने काले शक्तियों से उस भयानक पिशाच शक्ति को बुलाया था । लेकिन वो उसे वश में नहीं कर पाया जिसके बदौलत उस शैतानी शक्ति ने भैरव को ही अपने वश में कर लिया । उस मकड़ी के ऊपर जिस चेहरे को देखा था वह भैरव का ही था ।
शक्ति पाने के बाद अपने हिंसा के कारण भैरव ने गांव वालों को मारना शुरू कर दिया । जिस व्याध-पतंग को तुमने देखा था वह ऐसे कई भयानक रूप ले सकता था । इसको जानकर ही मैंने उसे अपने मंत्र के मायाजाल में बंद किया था पर ना जाने कैसे वो वहां से निकल आया । यशपाल को बचाने के लिए मैंने कोशिश किया था लेकिन ऐसे भयानक कार्य में मौत अवश्य होता है । इसके बारे में मैंने पहले ही बताया था । "
यह सब सुनते हुए नरेंद्र के आंखों से दो बूंद आंसू
छलक पड़े ।

इस घटना के 1 महीने बाद की बात है । लगातार हो रही हत्याओं का डर गांव वालों के मन से खत्म होने में कुछ दिन लगे । मसाननाथ अब भी शिवपुर में ही हैं । रांची लौटने का उनका कोई मन नहीं है । गांव की सुंदर हवा , मिट्टी की महक , हरे भरे खेत और सुबह चिड़ियों की आवाज़ यही तो जिंदगी है । केवल खाना बनाने वाली मौसी का खाना की एकमात्र समस्या है । .....

रामा नामक एक युवक अपनी गाय - भैसों को चरा रहा था । गाय - भैंसों ने आज बहुत उत्पात मचाया इसलिए उसे घर लौटने में आज शाम हो गया । नदी के पास वाले बबूल के नीचे पहुंचते ही कोई एक जीव नदी में चला गया । गाय - भैसों को वहीं खड़ा करके वो नदी की ओर देखने के लिए
गया । नदी के किनारे आते ही उसने देखा बड़े-बड़े पैरों के चिन्ह पानी में उतर गए हैं । और सामने नदी के बीचो-बीच पुराने मंदिर का ऊपरी भाग दिखाई दे रहा है । वहां एक बड़ा सा लाल छटा भी है । मानो आसमान के काले बादल वहीं पर उतर आए हो ।
धीरे-धीरे लाल छटा की आकर बढ़ने लगा । मानो वह मंदिर किसी खतरे से सभी को सावधान कर रहा है । तो क्या उस बूढ़े आदमी की बातें सच है ?
इसका उत्तर आने वाले समय में ही पता चलेगा ।…..

।। समाप्त ।।

कहानी अभी बाकी है । पढ़ते रहिए ।

तांत्रिक मसाननाथ क्रमशः ....


@rahul

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Himanshu P

Himanshu P 4 weeks ago

Mom's Tips by pallavi
Amrita Singh

Amrita Singh 1 year ago

Jeevan Tiwari

Jeevan Tiwari 1 year ago

कहानी अच्छी है लेकिन बहुत ज्यादा ऐडवरटीज़मेन्ट। एक दिन में 15 से ज्यादा पार्ट नहीं पढ़ सकते। इससे बेहतर प्रतिलिपि प्लेटफॉर्म है।

Rojmala Yagnik

Rojmala Yagnik 1 year ago