tantrik masannath - 11 in Hindi Horror Stories by Rahul Haldhar books and stories PDF | तांत्रिक मसाननाथ - 11

तांत्रिक मसाननाथ - 11

यमहि मन्दिर का अभिशाप ( 1 )


राजदीप और उसके दो साथी जब अजय नदी के पास पहुंचे उस समय दोपहर हो गया था । गर्मी के इस दोपहर धूप में निकलना सभी के बस का नहीं ।
लेकिन ये तीन लड़के आज ही उस ऐतिहासिक कार्य को पूर्ण करके ही रहेंगे । ऐतिहासिक इसलिए क्योंकि वो सभी जो करने जा रहे हैं उसे बीते 500 सालों में किसी ने करने की हिम्मत नहीं दिखाई ।
अजय नदी का पानी इस समय मिट्टी से घुला हुआ है । राजदीप ने हाथ जोड़ प्रणाम कर किनारे से ही मंदिर को एक बार देखा । हर साल इस समय गर्मी की वजह से जब अजय नदी का पानी कम हो जाता है उस समय नदी के बीचो-बीच काई से भरी मंदिर की चोटी दिखाई देता है । गांव वालों का कहना है कि 500 साल पहले उस मंदिर को बनाया गया । बाद में अजय नदी ने अपना बहाव पथ बदला जिसके कारण गांव के एक बड़े भू-भाग के साथ मंदिर भी नदी में समा गया । लेकिन यह पूरी तरह सुनी सुनाई घटना है असल में वहाँ क्या हुआ था ये किसी को नहीं पता । और यही बात राजदीप के कौतुहल का कारण है । बचपन से ही उसने सुना कि उस मंदिर में कोई अभिशाप लगा है । कोई भी उस मंदिर में प्रवेश न कर सके इसीलिए प्रकृति ने अजय नदी के बहाव को घुमाकर मंदिर के दरवाजे को हमेशा के लिए बंद कर दिया है । लेकिन राजदीप का मन ये सब नहीं मान रहा । अगर इस गर्मी में काम समाप्त नहीं हुआ तो 1 साल और प्रतीक्षा करना होगा । और हर गर्मी में पानी कम हो जाएगा ऐसा कहीं लिखा भी नहीं है । फिर कभी मंदिर की चोटी दिखेगा इसमें भी संदेह है । इतना धैर्य राजदीप के अंदर नहीं है वह अपने कुछ साथी को लेकर यहाँ आया है । भोला और दीपक दोनों को तैरना बखूबी आता है , इसके अलावा राजदीप भी बचपन से ही तैरना जनता है । लेकिन केवल तैराकी जानने से अजय नदी में नहीं उतरा जा सकता । अजय नदी में मीठे पानी के मगरमच्छों का बोलबाला है , इसके अलावा कहीं कहीं तेज खिंचाव भी है । हालांकि राजदीप को इस बारे में कोई डर नहीं है ।
अजय नदी में कहां बहाव तेज है ? कहां मगरमच्छ नहीं हैं ? किस समय नदी में उतरने से मगरमच्छ हमला नहीं करेंगे ? मगरमच्छों से कैसे बचा जाए ?
राजदीप ने इस बारे में पहले से ही तैयारी कर रखी है । इसीलिए भोला और दीपक को भी कोई चिंता नहीं है । वैसे राजदीप ने उन दोनों को जबरदस्ती नहीं लाया है । उस दिन शाम को दीपक ने ही मंदिर के बारे में बात शुरू किया था वरना राजदीप इसे अकेले ही करता ।
तीनों लड़कों ने ज्यादा देर नहीं किया क्योंकि अगर उन्हें किसी ने यहाँ घूमते हुए देख लिया तो उसे अवश्य संदेह हो जायेगा । इसी डर के कारण उन्होंने नाव व मांझी की व्यवस्था नहीं किया ।
छपाक आवाज के साथ वो तीनों नदी में कूद पड़े । देखते-देखते तीनों मछली की तरह बहाव के साथ बढ़ते गए । कितना देर लगा यह नहीं पता । राजदीप ने सिर उठाकर देखना चाहा कि मंदिर कितना दूर है । लगभग 10 हाथ और तैरते ही मंदिर की दीवार को छुआ जा सकता है । सांस लेकर फिर वह तीनों आगे तैरते रहे ।

सूरज उस समय आसमान में पश्चिम की ओर बढ़ रहा है । तीनों लड़के मंदिर के ऊपर बैठकर अपने भीगे बनियान से पानी खंगालने लगे । इसके बाद वो तीनों मंदिर के चपटे चोटी पर चढ़ गए । चारों तरफ केवल पानी ही पानी है । भोला को डर लगने लगा क्योंकि शाम के अंधेरे में सही दिशा में लौटना भी होगा । हालांकि राजदीप भैया के रहते डरने की कोई जरूरत नहीं ।
मंदिर की चोटी चौड़ा होने के साथ - साथ बड़ा भी है । लेकिन पानी के अंदर रहने के कारण उस पर फिसलन आ गया है । तीनों ने चारों तरफ एक एक जगह को चेक किया । वहाँ से अंदर जाने के लिए कोई रास्ता नहीं दिखा । राजदीप जान गया कि इस मंदिर का दरवाजा पानी के अंदर कहीं पर है । लेकिन उस दरवाजे तक पहुंचना उनका काम नहीं है । किसी तरह दरवाजा खोजने के बाद भी सांस रोककर उसके अंदर जाना आत्महत्या करने जैसा है । लेकिन यहां तक उन्होंने जो किया है यह कम गर्व की बात नहीं है । 500 साल पुराने मंदिर की चोटी पर जाने को कम नहीं कहा जा सकता । इसके बाद भी मंदिर के अंदर जाने की इच्छा वहीं पर खत्म हो गया । वो तीनों घर लौटने के बारे में सोच रहे थे लेकिन अचानक एक ठंडी हवा से फिसफसाहट की आवाज़ सुनाई देने लगी ।
इसके बाद पत्थर रगड़ने की आवाज को सुन राजदीप ने पीछे मुड़कर देखा । मंदिर के चोटी का एक भाग अपने आप ही खुल रहा था ।
आवाज बंद होते ही उन्होंने देखा पत्थर हट जाने के कारण अंदर की ओर एक गड्ढा दिखाई दे रहा है ।
राजदीप पहले उस ओर आगे बढ़ा । गड्ढे के अंदर झाँकते ही कुछ सीढ़ियां दिखी । वो तीनों सोचने लगे कि भगवान स्वयं उन्हें अपना दर्शन देना चाहते हैं । इसीलिए अपने आप ही पत्थर सरककर उनके लिए रास्ता बना दिया है । लेकिन दीपक के मन में कुछ प्रश्न उठ खड़े हुए ।
अगर पत्थर खुल गया है तो इसे खोला किसने ? क्यों कि उनके तीनों के अलावा वहां पर कोई भी नहीं है । क्या मंदिर के अंदर कोई जीवित है जो यह सब कर रहा है ? उस गड्ढे में जाना क्या सही रहेगा ?
कैसे हजारों प्रश्न दीपक के मन में आने पर भी कोई लाभ नहीं हुआ क्योंकि एक तीव्र सुगंध उसके नाक में जाते ही वह अपने सोचने की क्षमता को खो बैठा । निसंदेह यह सुगंध उस गड्ढे से ही निकल रहा था । तीनों युवक ही उस अनजाने सुगंध के पीछे गड्ढे में उतरने लगे ।
इधर आसमान में सूर्य अस्त होने को आया है । राजदीप जितनी बार घर लौटने के बारे में सोचता वह सुगंध उसके नाक में और तेजी से घुसने लगते । फिर उसे ऐसा लगता कि गड्ढे में अंदर जाना ही होगा । कोई मानो उनकी प्रतीक्षा में सालों से बैठा है । कुछ सीढ़ी पार करते ही वह तीनों गहरे अँधेरे में न जाने कहाँ समा गए । धीरे - धीरे पत्थर भी अपने आप बंद हो गया । तीनों कहां गए किसी को क्या पता ?

अगला भाग क्रमशः ..


@rahul