tantrik masannath - 12 in Hindi Horror Stories by Rahul Haldhar books and stories PDF | तांत्रिक मसाननाथ - 12

तांत्रिक मसाननाथ - 12

यमहि मन्दिर का अभिशाप ( 2 )

रामा नाम का एक ग्वाला उस दिन नदी के किनारे से अपने घर लौट रहा था । आज गाय - भैसों ने बहुत परेशान किया । उन्हें संभालने में ही आज देर हो गई ।
नदी के किनारे वाले बबूल के पेड़ के पास आते ही उसे ऐसा लगा कि एक जीव पानी के अंदर भाग गया । गाय-भैंसों को वहीं खड़ा करके वह लाठी को लेकर नदी की ओर गया । पानी के पास पहुंचते ही उसे कुछ बड़े-बड़े पंजों के निशान नजर आए । वो सभी पंजों के निशान नदी के किनारे से पानी की तरफ गए थे । मनुष्य के हाथ और जिराफ के खुर को मिलाकर जैसा निशान बनेगा ये ठीक वैसा ही था । बारिश होने वाली है इसलिए वह जानवर क्या था ये सोचने का समय नहीं है । अगर बारिश शुरू हो गई तो गाय-भैंसों को परेशानी होगा ही इसके साथ रामा को भी पूरे रास्ते भीगते हुए जाना होगा ।
शाम को जब वह घर पहुंचा तब बाहर तेज बारिश शुरू हो गई थी । गाय-भैंसों को तबेले में बांधकर जल्दी से घर के आंगन में आते ही वहां उसका दोस्त गोपाल दिखाई दिया । गोपाल यहां रामा से मिलने आया था लेकिन बारिश की वजह से अटक गया । एक कप चाय लेकर बारिश की शाम दोनों दोस्त बात करने बैठे । इधर-उधर की बातों के बीच में रामा ने आज उस आश्चर्यजनक घटना का उल्लेख किया । पहले गोपाल ने इसे सच नहीं माना फिर पैरों के निशान वाली बात सुनने के बाद वह थोड़े सोच में पड़ गया । रामा के कहे अनुसार जीव को देखना तो दूर गोपाल ने ऐसे जीव की कहानी भी कभी नहीं सुना । कुछ देर तक इस बारे में चर्चा होती रही । रात को बारिश रुकने के बाद गोपाल लालटेन लेकर घर की ओर चल गया ।

भैरव कापालिक के आतंक को खत्म करने के बाद तांत्रिक मसाननाथ शिवपुर में ही लगभग 10 दिन से रुके हैं । गांव का स्वच्छ वातावरण , चिड़ियों की आवाज़ और दो वक़्त की रोटी यही तो जीवन है । लेकिन एक ही समस्या है खाना बनाने वाली मौसी का भोजन दिन-प्रतिदिन स्वादहीन होता जा रहा है । कभी कभी खाते वक्त मसाननाथ बोल ही देते हैं कि अब ये नहीं खाया जाता इससे अच्छा मैं ही कुछ बना देता तो वह ज्यादा स्वादिष्ट होगा । नरेंद्र हालांकि इन बातों पर ध्यान नहीं दे रहा । शिवपुर आने के बाद खाना बनाने वाली मौसी के भोजन से उसका परिचय है । यशपाल के रहते उसने कई बार इस बारे में शिकायत की थी लेकिन कोई बात नहीं बनी । इसीलिए नरेंद्र को इसकी आदत पड़ गई है ।
और वैसे भी उसे इस समय ज्यादा भूख नहीं लगती क्योंकि यशपाल का शोक अभी भी उसके मन से नहीं गया है ।उन्होंने नरेंद्र को अपने छोटे भाई की तरह देखभाल किया था । उस रात मगरमच्छ से लड़ाई करने के बाद भी वह जिंदा थे । भैरव कापालिक के हाथों से अपने भाई जैसे नरेंद्र को बचाते हुए वह मारे गए । इस अलौकिक घटना को बड़े थाने में कोई भी विश्वास नहीं करेगा इसीलिए मगरमच्छ ने बड़े साहब को मार डाला ऐसी कहानी बनानी पड़ी । मसानानाथ और लालू माझी ने गवाही दी है । लेकिन अदालत अभी भी
इस बारे में जाँच कर रहा है क्योंकि एक सीनियर ऑफिसर की आकस्मिक मृत्यु को अनदेखा नहीं किया जा सकता । शिवपुर के थाने का इंचार्ज ऑफिसर इस समय नरेंद्र स्वयं है । नए ऑफिसर आने से पहले इस थाने की पूरी जिम्मेदारी नरेंद्र को दिया गया है ।
सुबह रूम से कुछ खाकर नरेंद्र थाने की ओर चला जाता है । दोपहर को अब वह कभी कभार ही भोजन करता । मौसी थाने में खाना भेजतीं हैं लेकिन वो भी वहीं टेबल पर ही रह जाता है ।
हालांकि छुट्टी के दिन मसाननाथ के साथ बैठकर खाने का अवसर मिलता ।
उस दिन मसाननाथ रूम के बाहर माला हाथ में लेकर जप कर रहे थे । कुछ देर बाद ही आवाज सुनने के कारण उन्होंने आंखें खोली तो देखा नरेंद्र का चेहरा आज कुछ अलग ही दिख रहा है ।
मनुष्य के अंदर डर और संदेह होने पर जैसा आचरण दिखाई देता है । नरेंद्र के चाल चलन में भी वही दिख रहा था ।
मसाननाथ बोले - " क्या हुआ नरेंद्र तबीयत तो ठीक है ? "
वह मसाननाथ के इन बातों पर ध्यान नहीं दिया क्योंकि उसका मन कहीं और खोया हुआ है ।
" अरे ओ नरेंद्र ! क्या हुआ है ? "
अब नरेंद्र को सुनाई दिया ।
" मुझसे कह रहें हैं । "
" हाँ तुम्हीं से , तबीयत तो ठीक है न "
" हाँ तांत्रिक बाबा सबकुछ ठीक है । दोपहर को कुछ खाया नहीं और उधर हवलदारों को काम समझाने में भी देर हो गई इसीलिए थोड़ा थका हुआ हूं । एक कप चाय पीते ही सब कुछ ठीक हो जाएगा । "
" केवल इतना ही नरेंद्र , मुझसे कुछ भी मत छुपाओ मैं सबकुछ समझ सकता हूं । "
" बात यह है कि आज थाने में एक अद्भुत FIR दर्ज हुआ । "
" कैसा FIR ? "
कमरे के कोने में जूतों को खोलते हुए नरेंद्र बोला -
" रुकिए मैं हाथ पैर धोकर दो कप चाय बना कर लाता हूं । इसके बाद आपको सब कुछ बताऊंगा । "
मसाननाथ ने सिर हिलाकर सहमति जताई ।
कुछ देर बाद चाय की टेबल पर बात शुरू हुई ।
" अब बताओ नरेंद्र क्या हुआ है ? "
नरेंद्र ने बताना शुरू किया - " आज सुबह थाने पहुंचते ही दिखा एक लड़के के साथ दो हवलदार बहस कर रहे थे । मुझे देखते ही वो तीनों कुछ शांत हुए । बाद में मैंने उस लड़के को बुलाया ।
उसने अपना नाम गोपाल बताया । गोपाल थाने में आया था अद्भुत एक घटना को बताने । और उसे एक दंपति के खिलाफ रिपोर्ट लिखवाना था । उसने बताया कि उसका दोस्त रामा गायब है । पिछले जिस दिन शाम को बारिश हो रहा था उसी दिन गोपाल ने रामा से अंतिम बार मिला था । इसके बाद चार - पांच दिन अपने दोस्त को ना देखने के कारण वह उसके घर गया । लेकिन जाकर देखा वहां रामा नहीं है । सबसे आश्चर्य की बात यह है कि रामा के माता - पिता ने कहा कि वे रामा को नहीं जानते हैं । और आज तक उनका कोई लड़का भी नहीं हुआ । इसी बात को लेकर गोपाल के साथ उनका झगड़ा होने लगा ।
झगड़े को सुन आसपास के लोग जमा होते ही मामला और गंभीर हो गया । क्योंकि गोपाल की तरह सभी रामा के बारे में जानना चाहते हैं । इधर रामा के माता-पिता अपने बात पर अडिग हैं उनका कहना है कि इस नाम से उनका कोई लड़का नहीं है । रामा नाम को उन्होंने पहले कभी नहीं सुना ।
झगड़े के बाद कुछ गांव वाले उसके घर में जाकर खोजबीन किया लेकिन वहां भी रामा का कोई अता पता नहीं । इसके बाद ही गोपाल ने विचार किया कि वह थाने में उनके खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कराएगा । "
इतना बताकर नरेंद्र शांत हुआ । इसी बीच मसाननाथ बोले - " अच्छा ये बात है । किसी ने रामा का कत्ल व अपहरण किया होगा और शायद उसके माता-पिता को इस बारे में किसी को ना बताने के लिए डराया धमकाया है । "
" नहीं बाबाजी गोपाल ने एक ऐसी बात बताइ जिसे सोच एक बार तो मैं कांप गया था । गोपाल ने बताया कि जिस दिन शाम को रामा से मिला था उस दिन रामा ने अजय नदी के किनारे एक अद्भुत जानवर को देखा था । नदी के किनारे उसके पैरों के चिन्ह भी थे । वह चिन्ह मनुष्य के पंजे और जिराफ के खुर मिलकर जैसा बनता है ठीक वैसा ही था । "
" इसका मतलब तुम कहना चाहते हो रामा के गायब होने में इस जीव का भी कोई हाथ है । "
" नहीं जानता लेकिन अजय नदी का नाम सुनते ही मेरा मन कांप उठता है । अगर उस पानी में वैसे खतरनाक मगरमच्छ रह सकते हैं तो उसमें किसी बड़े जीव का रहना आश्चर्य की बात नहीं । "
नरेंद्र की बात समाप्त होते ही मसाननाथ खड़े हुए और बोले - " अब तुम क्या करोगे ? "
" देखता हूं रामा का पता लिख लिया है अब कल उसके घर जाकर एक बार पूछताछ करूंगा । "
" ठीक है कल मैं भी वहां पर तुम्हारे साथ जाऊंगा । गोपाल के साथ मुझे भी एक बार बात करनी है ।"

उस रात मसाननाथ को नींद नहीं आई क्योंकि उनका मन कह रहा है कि एक अनजाना खतरा सभी के ऊपर मंडरा रहा है । और सबसे बड़ी बात यह है कि इस खतरे का कारण मसाननाथ स्वयं हैं ।....


।। अगला भाग क्रमशः ...


@rahul

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