tantrik masannath - 13 in Hindi Horror Stories by Rahul Haldhar books and stories PDF | तांत्रिक मसाननाथ - 13

तांत्रिक मसाननाथ - 13

यमहि मन्दिर का अभिशाप ( 3 )


अगले दिन सुबह 10 बजे जब नरेंद्र को अपने काम से फुर्सत मिला तो वह मसाननाथ के साथ गोपाल के घर की ओर रवाना हुआ । शिवपुर के पश्चिम ओर जहाँ बब्बन के किराने का दुकान है वहां से बीस कदम आगे बढ़ते ही गोपाल यादव का घर है । युवक गोपाल के परिवार में केवल उसकी बूढ़ी मां ही है । अपने कुछ गाय और भैसों का का दूध बेचकर ही वह जीवन यापन करता है । बूढ़ी मां पहले की तरह अब काम नहीं कर पाती इसीलिए गोपाल के ऊपर घर की पूरी जिम्मेदारी है ।
घर के बाहर खड़े होकर नरेंद्र ने गोपाल को कई बार बुलाया । कुछ देर बुलाने के बाद गोपाल घर से बाहर निकला ।
" अरे दरोगा साहब आज सुबह सुबह मेरे घर कैसे आना हुआ । कोई जरूरी काम है ? "
" जरूरी काम मतलब कल सुबह तुमने ही तो रामा के माता पिता के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कराई थी । तुमने कहा था कि रामा नहीं मिल रहा इसीलिए तुमसे बात करने आया हूं । "
" रामा , ये कौन है ? " गोपाल मानो इस बारे में कुछ भी नहीं जानता ।
" रामा तुम्हारा दोस्त , कल ही तो तुम उसी के लिए थाने पर आए थे । "
यह सुनकर भी गोपाल के हाव - भाव में कोई परिवर्तन नहीं आया ।
गोपाल हंसते हुए बोला -" मैं कल सुबह रिपोर्ट लिखवाने गया था ? ऐसा हो ही नहीं सकता क्योंकि मैं कल पूरे दिन अपने घर में ही था । "
यह सुन नरेंद्र का दिमाग गरम हो गया । वह गोपाल को डांटते हुए बोला - " मेरे साथ मजाक करने का कीमत क्या हो सकता है यह तुम सोच भी नहीं सकते । अगर चाहूँ तो मैं अभी तुम्हें गिरफ्तार कर सकता हूं । "
यह सुन गोपाल थोड़ा सहम गया और बोला - " साहब मैं क्यों मजाक करूंगा । मैं सच बोल रहा हूं । रामा नाम का मेरा कोई दोस्त नहीं है । "
" अच्छा तुम रामा को नहीं जानते ,अभी तुम्हें बताता हूं । " यह बोल मसाननाथ ने आसपास के कई लोगों को बुलाया ।
उन सभी से रामा के बारे में पूछताछ किया गया ।
आश्चर्य की बात यह है कि उनमें से कोई भी रामा को नहीं जानता है । यह तमाशा देख नरेंद्र को बहुत गुस्सा आ रहा था । उसे ऐसा लग रहा था कि सभी झूठ बोल रहे हैं या फिर पगला गए हैं ।
इधर मसाननाथ के मन में अनजाने खतरे का आभास फिर होने लगा था ।
मसाननाथ बोले - " नरेंद्र रहने दो , इनसे बहस करके कोई फायदा नहीं । तुम थाने में जाओ मैं कुछ देर बाद आता हूं । "
" ठीक है लेकिन आप जा कहाँ रहे हैं ? "
मसाननाथ जाते हुए बोलते रहे ,
" लौटकर बताता हूं शायद मुझसे ही कोई गलती हुई है । "
वह मसाननाथ की बातों को नहीं समझ पाया । आखिर तांत्रिक बाबा क्या बोलना चाहते हैं ? यही सब सोचते हुए नरेंद्र थाने की ओर लौट गया ।

अजय नदी के इस तरफ लोग ज्यादा नहीं जाते हैं । बड़े बड़े घाँस , झाड़ी व सियार के बिलों के बीच से एक छोटी सी पगडंडी बनी है । पगडंडी से चलते हुए मसाननाथ उस रात के बारे में सोच रहे थे ।
त्रिकाल यज्ञ से भैरव रूपी राक्षस को हराने के लिए उन्होंने पूरे शिवपुर को दूसरे जगत में लेकर गए थे । इसके बाद भैरव पिशाच को उसी जगत में बंद करके फिर शिवपुर को इस जगत में ले आए । लेकिन इस यज्ञ को किसी साधारण स्थान पर नहीं किया गया था । इस यज्ञ को संपूर्ण किया गया था एक प्राचीन मंदिर के ऊपर जो नदी के बीच में है ।
मसाननाथ कुछ देर खड़े होकर नदी के बीचोबीच दिखते मंदिर के ऊपरी भाग को ध्यान से देख रहे थे । यहां से मंदिर के समतल चोटी के अलावा ज्यादा कुछ नहीं दिखता । उन्हें ऐसा लगता है कि कहीं रामा के देखें गए जीव के साथ इस मंदिर का कोई संबंध तो नहीं ।
ना जाने क्या सोच वो आंख बंद करके मंत्र पढ़ने लगे । मंत्र पाठ आरंभ होते ही उनके चारों तरफ एक काला तरल घूमने लगा ।
कहीं से फिसफिसाहट की एक आवाज भी सुनाई देने लगी लेकिन मसाननाथ ने आंख नहीं खोला । मंत्र पाठ जितना तेज होता गया काला तरल भी उतना ही बढ़ता चला गया । देख कर ऐसा लगता है कि वह काला तरल मसाननाथ के मंत्रों को सहन नहीं कर पा रहा । कुछ ही देर में अजय नदी के एक भाग का पानी काले रंग में बदलने लगा । मंत्र पाठ खत्म कर मसाननाथ ने आँख खोला लेकिन कहां है वह काला तरल , क्षण में सब कुछ गायब हो गया । मसाननाथ के पैर कांपने लगे मानो वो अभी जमीन पर गिर जाएंगे । लेकिन किसी तरह उन्होंने अपने आप को संभाला ।
धीमी आवाज़ में उनके मुंह से कुछ बात सुनाई दिया ।
" यह क्या गलती कर दी मैंने , गलती हो गई मुझसे बहुत बड़ी गलती हो गई । "
यही बोलते हुए उन्होंने अपने पीछे देखा । और तुरंत ही पेड़ों के बीच से एक बूढ़े आदमी की गुस्सैल आँखे दिखाई दी । यह वही बूढ़ा आदमी है जिसने उस दिन कई बार मना किया था कि उस मंदिर के ऊपर मत जाना । लेकिन उन्होंने उस बूढ़े आदमी की बातों को नहीं सुना था ।
बूढ़ा आदमी धीरे-धीरे मसाननाथ की ओर बढ़ा । वह बूढ़ा आदमी मसाननाथ को ऐसे घूर रहा था कि यह देख मसाननाथ भी दो कदम पीछे हट गए ।
बूढ़ा आदमी बोला - " कहा था मैंने कई बार कहा था कि उस मंदिर में मत जाइए । लेकिन आपने नहीं माना अब कोई भी नहीं बचेगा । कई वर्षों का अभिशाप था उस मंदिर पर आप सभी ने उस अभिशाप को मुक्त कर दिया है । सभी मारे जाएंगे अब कोई भी नहीं बच सकता । आप भी नहीं बच पाओगे । हमारी तरह धीरे-धीरे आप लोग भी मरेंगे । "
मसाननाथ सिर झुकाकर बोले - " कृपया कर ऐसा मत बोलिए । मैं मानता हूं कि गलती मेरी है लेकिन आप किस अभिशाप के बारे में बता रहे हैं मुझे कुछ भी नहीं पता था । अगर आप मुझे इस बारे में बताएंगे तो हम सभी मिलकर इसका सामना करेंगे । "
" जो होना था हो गया । यमहि अब मुक्त है आप लोगों ने उसे मुक्त किया है । अब केवल मौत का इंतजार कीजिए एक एक करके सभी मारे जाएंगे । "
बात समाप्त किए बिना ही वह बूढ़ा आदमी उल्टी तरफ दौड़ता हुआ चला गया ।
" रुकिए , आपसे कुछ बात करनी है । "
यह बोलकर मसाननाथ कुछ दूर उस बूढ़े आदमी के पीछे गए लेकिन पेड़ों के पीछे झाड़ियों में वो पता नहीं कहाँ चले गए ।

लगभग 2 घंटे बाद तांत्रिक मसाननाथ रूम में लौटकर कागज और पेन लेकर बैठ गए । ज्यादा समय नहीं है नरेंद्र से बोलकर एक चिट्ठी भेजनें की व्यवस्था करनी होगी । उन्होंने सोचा शिवपुर में ना हो लेकिन कहीं आस-पास डाकघर अवश्य होगा ।
चिट्ठी अगर सही समय से अपनी जगह पर नहीं पहुंची तो खतरा और भी बढ़ सकता है ।मसाननाथ के कलम चलाते ही सफेद कागज पर कुछ शब्द दिखाई दिया ।
" कालीचरण मैं तांत्रिक मसाननाथ हूं । पता नहीं तुम्हें याद है या नहीं लेकिन हम देवघर के श्मशान में मिले थे । अगर उस भयानक रात को तुमने अपना शक्ति नहीं दिखाया होता तो वहाँ के शायद सभी तांत्रिक मारे जाते । उसी दिन मैं समझ गया था कि तुम्हारे अंदर एक दिव्य ज्योति है । शायद कोई मायावी शक्ति हमेशा तुम्हारी रक्षा करता है ।
वो जो भी हो अब मैं असल मुद्दे पर आता हूं । मैं इस समय शिवपुर गांव में हूं । आसनसोल स्टेशन से कुछ दूर अजय नदी के किनारे यह बड़ा सा गांव बसा है । यहां पर एक रहस्य का समाधान करने आया था लेकिन मेरे एक गलती से सभी गांव वालों के ऊपर खतरा मंडरा रहा है । ऐतिहासिक एक मंदिर के अभिशाप ने हम सभी को जकड़ लिया है । तुम्हारे बिना इसे खत्म कर पाना मेरे द्वारा संभव नहीं है ।
इसीलिए कृपया कर जल्दी से यहां आने का कष्ट करें । और हां ज्यादा सोचना मत क्योंकि तुम्हारे घर का पता मैंने अपने दिव्य शक्ति द्वारा पाया है । इतना सामर्थ्य तो मसाननाथ के अंदर है ।
तांत्रिक मसाननाथ,,,,, "

अगला भाग क्रमशः ....


@rahul

Rate & Review

Amrita Singh

Amrita Singh 1 year ago

Rojmala Yagnik

Rojmala Yagnik 1 year ago

Hema Patel

Hema Patel 1 year ago

Nayana Nakrani

Nayana Nakrani 1 year ago

Vinod Kumar

Vinod Kumar 1 year ago

very nice👍👏😊.