tantrik masannath - 14 in Hindi Horror Stories by Rahul Haldhar books and stories PDF | तांत्रिक मसाननाथ - 14

तांत्रिक मसाननाथ - 14

यमहि मन्दिर का अभिशाप ( 4 )

उस दिन दोपहर को मसाननाथ स्वयं थाने में उपस्थित हुए । नरेंद्र उस समय कुर्सी पर बैठा हुआ था । तांत्रिक मसाननाथ को थाने के हॉल रूम में प्रवेश करते देख नरेंद्र बोला -
" तांत्रिक बाबा आप यहां पर , मुझे बताया होता तो मैं स्वयं चला आता । "
" नरेंद्र एक बहुत ही जरूरी काम है । इस चिट्ठी को जल्द से जल्द गोविंदपुर भेजनें का प्रबंध करो । मैंने इसमें पूरा पता लिख दिया है । "
" हां भेज रहा हूं । लेकिन यह चिट्ठी किसके लिए है ? "
" अभी इतना सवाल मत पूछो ,समय आने पर तुम्हें सब कुछ पता चल जाएगा । मैं तुम्हें सब कुछ बताऊंगा लेकिन अभी छुट्टी को भेजना जरूरी है । "
नरेंद्र ने कुछ और नहीं कहा । एक हवलदार को बुलाकर उसे चिट्ठी को डाकघर भेजने का आदेश दिया । हवलदार भी चिट्ठी को लेकर जल्दी से थाने के बाहर चला गया क्योंकि सबसे नजदीक का डाकघर यहां से लगभग 9 किलोमीटर दूर है ।
हवलदार के जाने के बाद मसाननाथ भी थाने से बाहर निकल आए । उनके दिमाग में केवल उस बूढ़े आदमी की बात इधर-उधर घूम रहा है ।
कई वर्षों का अभिशाप , लोगों की मौत , बंद यमहि और भी ना जाने क्या-क्या लेकिन दुर्भाग्य की बात यह है कि मसाननाथ कुछ भी नहीं जानते ।
इन्हीं सब बातों को सोचते हुए वह अपने रूम में लौट गए ।
चिड़ियाँ धीरे-धीरे अपने घोसले को लौट रही हैं क्योंकि शाम होने वाली है । अंधेरा थोड़ा बढ़ते ही रूम के सामने एक चेहरा दिखाई दिया । मसाननाथ उस समय चिंतित मन से आँगन में टहल रहे थे ।
एक आदमी रूम की ओर आ रहा है यह देख वो खड़े हो गए । उस आदमी के पास आते ही समझ आया यह कोई अपरिचित व्यक्ति नहीं है । नरेंद्र के आंगन में पहुंचते ही मसाननाथ बोले - " क्या हुआ नरेंद्र फिर कोई मामला हुआ है ? "
नरेंद्र ने आश्चर्य होकर कहा - " क्यों ? "
" कुछ नहीं , असल में तुम गेट खोल कर जल्दी से अंदर आ गए इसलिए मुझे लगा कुछ बात हो गई है । "
थोड़ा सा हंसकर नरेंद्र बोला - " जल्दी तो आना ही पड़ेगा क्योंकि खाना तो मुझे ही बनाना है । "
" तुम खाना बनाओगे क्यों खाना बनाने वाली मौसी आज शाम को नही आएंगी ? "
" खाना बनाने वाली , हमारे यहां क्या कोई खाना बनाने वाली भी आती है । "
" यह सब क्या बोल रहे हो नरेंद्र , खाना बनाने वाली मौसी का भोजन भूल गए जो एकदम बेकार खाना बनाती थी । हम दोनों एक साथ बैठकर उनके खाने के बारे में कितनी चर्चा की है और उन्हें ही तुम याद नहीं कर पा रहे हैं । "
" तांत्रिक बाबा आपने गांजा तो नहीं चढ़ाया है । हमारे यहां खाना बनाने वाली मौसी कहां है । इतने दिन मैंने ही तो आपको खाना बनाकर खिलाया । "
यह सुन मसाननाथ को अपने कानों पर विश्वास नहीं हुआ । वो वही चबूतरे पर बैठ गए ।
" क्या हुआ आप ठीक तो हैं ? "
यही बोलकर नरेंद्र मसाननाथ की ओर गया । मसाननाथ का चेहरा पूरी तरह उतरा हुआ है । वह समझ गए कि उनके द्वारा कोई बहुत ही बड़ी गलती हुई है । जिसका शिकार इस समय नरेंद्र भी है । शायद किसी अमानवीय शक्ति ने रामा की तरह मौसी को भी ऐसे गायब कर दिया है कि उनका कोई अस्तित्व ही नहीं ।
लेकिन नरेंद्र पुरानी बातें याद कर पा रहा है या नहीं यह जानने के लिए उससे कुछ पूछना होगा ।
यही सोचकर मसाननाथ बोले - " अच्छा नरेंद्र बताओ यशपाल कौन थे ? "
" यह कैसा प्रश्न है आपने क्या सच में नशा किया है ? "
" जितना पूछ रहा हूं उसका उत्तर दो पलट कर फिर प्रश्न मत पूछो । "
मसाननाथ के कठोर आवाज को सुन नरेंद्र समझ गया की तांत्रिक बाबा नशे में नहीं हैं । जरूर कुछ सोच कर ही वो यह प्रश्न पूछ रहे हैं ।
उसने उत्तर दिया - " यशपाल जी हमारे शिवपुर थाने के ऑफिसर थे । "
" थे मतलब वह अभी इस समय कहां पर हैं ? "
" वह मर गए हैं । "
" कैसे ? "
" इस प्रश्न का उत्तर तो आप ही अच्छी तरह जानते हैं । उस रात आप ही त्रिकाल यज्ञ कर रहे थे । भैरव को रोकने के बावजूद आप यशपाल जी को नहीं बचा पाए । "
इस उत्तर को सुन मसाननाथ को थोड़ा सुकून मिला । वह समझ गए कि नरेंद्र को बीती सभी बातें याद है केवल खाना बनाने वाली मौसी ही उसके दिमाग से गायब हो गई हैं । मौसी की यादें इस समय नरेंद्र के दिमाग से बाहर है इसीलिए वो जिंदा हैं या मर गई इससे नरेंद्र को कोई फर्क नहीं पड़ता । क्योंकि खाना बनाने वाली मौसी को वह अब पहचानता ही नहीं ।
मस्ताननाथ ने अपने मन को सख्त कर लिया । जो गलती उनके द्वारा हुई है उसको सुधारना ही होगा । इस कार्य में अगर उनका प्राण भी चला गया तो उन्हें कोई गम नहीं । लेकिन इस समय उनके पास कोई तथ्य नहीं है । उनके दिमाग के अंधेरे में केवल एक ही बात घूम रही है । और वो है यमहि ….
लेकिन यमहि क्या है ? यह मसाननाथ को नहीं पता । उस दिन नदी के पास जिस बूढ़े आदमी ने यमहि का नाम लिया था । वो इस रहस्य को बिना बताए ही चले गए ।
उनका पीछा करने पर भी कोई लाभ नहीं हुआ था । लेकिन मसाननाथ इतना समझ गए कि शिवपुर गांव और अजय नदी के के बीच जो भी अलौकिक घटनाएं हो रही हैं इसके जड़ में यमहि ही है ।
इसके अलावा नरेंद्र का मौसी को भूल जाना व गोपाल का दोस्त रामा के गायब हो जाने के पीछे भी इसी यमहि से ही संबंध है । यमहि जो कुछ भी है लेकिन उसके अशुभ शक्ति ने तांत्रिक मसाननाथ को काबू नहीं कर पाया । इसीलिए नरेंद्र के भूलने पर भी मसाननाथ को सब कुछ याद है । इसीलिए एक छोटी सी प्रकाश की किरण दिख रही है । मन कह रहा है कि यमहि नामक अशुभ शक्ति के विरुद्ध मानव ही विजेता होंगे । लेकिन इसके लिए तांत्रिक मसाननाथ
को हर एक कदम फूँक कर आगे बढ़ना होगा । क्योंकि कुछ भी गलत हुआ तो खतरा और बढ़ सकता है ।
मसाननाथ ने नरेंद्र से पुछा - " अच्छा क्या तुम्हें याद है । जिस दिन हम यशपाल के साथ मंदिर की ओर जा रहे थे । लालू माझी के नाव में चढ़ते ही एक बूढ़ा आदमी हमें रोक रहा था । उसके बाद यशपाल ने उन्हे पागल बोलकर भगा दिया था क्या तुम उन्हें जानते हो और वह हमें क्यों रोकने आए थे इस बारे में तुमने कुछ पता किया था । "
नरेंद्र कुछ देर सोचता रहा फिर बोला - " हां मैंने उनके बारे में पता किया था वह कोई पागल नहीं है । असल में उनका नाम मणिप्रसाद दीक्षित है । वह इस गांव के एक पुरोहित पंडित हैं । "
" तो क्या तुम उनका घर कहां है बता सकते हो ? "
" बब्बन किराने वाले की दुकान के पास से बाएं तरफ एक रास्ता गया है । उस रास्ते को पकड़कर सीधे जाने से आप पंडित बस्ती पहुंच जाएंगे । लेकिन वहां उनका घर कौन सा है यह मुझे नहीं पता । कहिए तो मैं खोजबीन करके बताऊं । "
मसाननाथ जल्दी से बोले - " अरे नहीं कोई जरूरत नहीं । मैं देख लूंगा । "
उस रात इस बारे में कोई दूसरी बात उन दोनों में नहीं हुई ।
सुबह होते ही तांत्रिक मसाननाथ अपने थैले को कंधे से लटकाकर मणिप्रसाद के घर के उद्देश्य से चल पड़े ।

सुबह होते ही तांत्रिक मसाननाथ अपने थैले को कंधे से लटकाकर मणिप्रसाद के घर के उद्देश्य से चल पड़े । बब्बन की दुकान के सामने पहुंचते ही बाएं तरफ ईंटो वाला रास्ता दिखाई दिया ।
दोनों तरफ की हरियाली को देखकर आंख तृप्त हो जाता है । सुबह-सुबह पूरब की ओर रंग - बिरंगे बादल और उसी के बीच से सूर्य देवता झाँक रहे हैं । चारों तरफ के पेड़ों में ना जाने कितनी तरह की चिड़ियाँ उड़ रहीं हैं । सभी के नाम भी शायद मसाननाथ को नहीं पता । चारों तरफ का दृश्य बहुत ही मनोरम है । लेकिन इस समय यह सब देखने का समय मसाननाथ के पास नहीं है । आसमान में चाहे कितनी भी
मनोरम दृश्य हों लेकिन शिवपुर में खतरा कभी भी आ सकता है । जल्द से जल्द मणिप्रसाद के घर पहुंचना ही होगा । मसाननाथ तेजी से चलते रहे ।

मणिप्रसाद दीक्षित उस समय भी नींद से नहीं जागे थे । लकड़ी के दरवाजे में किसी के खटखटाने की आवाज सुनाई दिया । मणिप्रसाद जल्दी से उठकर हाथ मुंह धो दरवाज़े की तरफ आगे बढ़े । दरवाजा खोलते ही दिखाई दिया कंधे पर थैला लटकाए एक व्यक्ति वहाँ खड़ा था ।
इस आदमी को मणिप्रसाद पहचानते हैं लेकिन उनका नाम नहीं जानते ।
उन्होंने खड़े उस आदमी को नीचे से ऊपर तक ध्यानपूर्वक देखा । बहुत ही अद्भुत चेहरा है । चेहरे पर काला - सफेद मिक्स दाढ़ी , कंधे तक लंबे बाल , माथे पर तिलक , गले में रुद्राक्ष की माला एवं पहनावे को देखकर कोई साधु हैं यही कहा जा सकता है । लेकिन केवल साधु बोलना थोड़ा निम्न होगा क्योंकि उनको देखकर कोई आम सन्यासी प्रतीत नहीं हो रहा ।

मणिप्रसाद गुस्से से धमक पड़े - " आप यहां पर कैसे आ गए और मेरे घर का पता आपको किसने दिया । "
मसाननाथ बोले - " आप बेवजह ही मुझ पर गुस्सा कर रहे हैं । उस मंदिर पर अभिशाप लगा है इस बारे में अगर मुझे पहले पता होता तो मैं यह गलती कभी नहीं करता । "
" क्या उस दिन मैंने आप सभी को नहीं बताया था । लेकिन उस दिन तुम लोगों ने मुझे वहाँ से भगा दिया था । और आज यहां पर आए हो सफाई देने । "
" अब जो होना था वह तो हो गया । लेकिन जो हमारा कर्तव्य है उसे तो करने दीजिए । "
बूढ़े आदमी के चेहरे पर हताशा की एक हंसी उभर आई । - " मैं कहां रोक रहा हूं आप सभी को जो भी करना है कीजिए । "
" उस मंदिर के बारे में केवल आप ही सभी तथ्य बता सकते हैं इसीलिए मैं यहां पर आया हूं । "
बूढ़ा आदमी मानो अब और खींझ गया ।
" मंदिर के अभिशाप के बारे में जानकर आप क्या करेंगे ? जिस गलती को आपने किया है उसे माफ नहीं किया जा सकता । "
" पंडित जी माफी मांगने मैं यहां पर नहीं आया हूं क्योंकि मैं जानता हूं कि इतनी बड़ी गलती की कोई माफ़ी नहीं हो सकती । मैं यहां पर आया हूं अपनी गलती को सुधारने के लिए । "
" क्या गलती सुधार लेंगे । प्रतिदिन जो जानें जा रही हैं क्या आप उसे लौटा सकते हैं । "
यह सुन मसाननाथ समझ गए कि उनका संदेह ही सही था । रामा और खाना बनाने वाली मौसी दोनों ही अब जिंदा नहीं हैं ।
मसाननाथ ने जवाब दिया - " नहीं ये तो नहीं कर सकता लेकिन उनके जान क्यों जा रहे हैं इस बारे में अगर आप मुझे बताएंगे तो मैं उसे रोकने की कोशिश करूंगा । "
बूढ़ा आदमी हंसते हुए बोला - " रोकेंगे , यमहि को रोकेंगे । रुकिए मैं जरा हंस लेता हूं । 2 दिन साधू - सन्यासियों के साथ घूमकर गले में रुद्राक्ष पहन और माथे पर तिलक लगाकर आप सोच रहे हैं कि यमहि को हरा देंगे । "
मसाननाथ का चेहरा गंभीर हो गया । क्योंकि यह बातें उनके आत्मसम्मान को चोट पहुंचाने वाली थी ।
" साधु - सन्यासी नहीं , मैं हूं मसाननाथ , तांत्रिक मसाननाथ । "
' तांत्रिक ' नाम सुनते ही बूढ़े आदमी की हंसी गायब हो गई और उनका चेहरा सिकुड़ गया ।
" आपका मतलब है आप तंत्र साधनाओं में सिद्ध तांत्रिक हैं । "
" मेरा नाम मसाननाथ यूं ही नहीं हैं । देवी श्मशान काली व श्मशान सिद्धि प्राप्त करने के बाद मेरे गुरु ने मुझे इस नाम से सम्बोधित किया था । "
अचानक उस बूढ़े आदमी के आवाज में परिवर्तन आ गया ।
" मुझे माफ कर दीजिए । आप एक तांत्रिक हैं यह मुझे पहले पता होता तो मैं आपके साथ ऐसा दुर्व्यवहार नहीं करता । आइए आप घर के अंदर आइए लेकिन आपके साथी नहीं दिखाई दे रहे । "
मसाननाथ बोले - " कौन साथी , यहां के थाने का इंचार्ज नरेंद्र । "
" नहीं आपके साथ वाले तांत्रिक वो नहीं आए । "
" मेरे साथ तो कोई तांत्रिक नहीं है । शायद इस गांव में मैं अकेला ही तांत्रिक हूं । कोई दूसरा तांत्रिक भी है गांव में मैंने तो नहीं सुना । "
बूढ़ा आदमी सोच में पड़ गया । वो अपने मन ही मन कहते रहे ।
" एक तांत्रिक , लेकिन जैसा कहा गया था उसके अनुसार दो महा तांत्रिक होने चाहिए । कहीं मुझसे ही कोई भूल नहीं हो रहा । "
मसाननाथ बोले - " क्या हुआ आप सोच में क्यों पड़ गए । चलिए अंदर चलकर बात करते हैं । "
" हाँ , हाँ आइए । "

बूढ़े आदमी के साथ मसाननाथ घर के अंदर गए । तीन - चार कमरे का घर एवं सामने छोटा सा आँगन , घर के अंदर धूल व मकड़ी के जालों को देखकर अनुमान लगाया जा सकता है कि इस घर में ज्यादा सफाई नहीं होता ।
बूढ़े आदमी के अलावा घर में शायद दूसरा कोई भी नहीं रहता । यही सोचकर मसाननाथ बोले - " आप क्या यहां पर अकेले ही रहते हैं । "
बूढ़े आदमी ने ऐसे देखा मानो वो इसी प्रश्न का इंतजार
कर रहे थे ।
" बताऊंगा , सब कुछ बताऊंगा आपको लेकिन उससे पहले कुछ खाने - पीने को लाता हूं क्योंकि हमारे यहां अतिथि को बिना पानी पिलाए नहीं बैठाया जाता । "
" अरे नहीं ! केवल आप मेरे प्रश्नों का उत्तर दे दीजिए बस । "
लेकिन तब तक बूढ़ा आदमी घर के अंदर प्रवेश कर चुका था । मसाननाथ वहीं आँगन में रखे खटिए पर बैठकर इंतज़ार करने लगे ।......

अगला भाग क्रमशः.....


@rahul