tantrik masannath - 16 in Hindi Horror Stories by Rahul Haldhar books and stories PDF | तांत्रिक मसाननाथ - 16

तांत्रिक मसाननाथ - 16

यमहि मन्दिर का अभिशाप ( 6 )

मसाननाथ बोले - " साध्वी मां अभी जिंदा हैं लेकिन उन्हें खोजने का समय हमारे पास नहीं है । जिस तंत्र क्रिया से साध्वी मां ने यमहि को बंद किया था उसी क्रिया से मैंने भी भैरव का प्रतिरोध किया था लेकिन इसी में मेरे द्वारा एक बहुत बड़ी गलती हो गई । यमहि जिस जगत में बंदी था भूलवश भैरव को भी मैंने उसी की जगत में भेजा था । इसीलिए अशुभ शक्ति का द्वार खुलते ही वह प्रेत आत्मा
यमहि मुक्त हो गया । "
बूढ़ा आदमी बोला - " हाँ , इसीलिए मैंने उस दिन कई बार मना किया था । लेकिन एक बात और है साध्वी मां ने उस यमहि को इतना कमजोर कर दिया था कि वह मुक्ति पाने पर भी कुछ नहीं कर सकता था । यमहि को अपना शक्ति पाने के लिए तीन जानो की जरूरत है । तीन पुरोहित शरीर के लिए तीन नई आत्मा लेकिन आपने तो उस तीन आत्मा को नहीं दिया । फिर भी न जाने यमहि इतना शक्तिशाली कैसे हो गया समझ नहीं आ रहा । वैसे कुछ साल पहले कुछ लड़के नदी में डूब गए थे । लोग बताते हैं कि वह सभी उस मंदिर में जाने के लिए ही नदी में तैर रहे थे । इसके बाद वह सभी
मंदिर तक पहुंचे थे या मगरमच्छ का शिकार बने यह किसी को नहीं पता । गोताखोरों को भी कोई निशान नहीं मिला । अगर उन्हें यमहि ने मार डाला होगा फिर भी गलती आपका ही है । आपकी वजह से ही वह इस जगत में लौटा है । "
" हां गलती मेरे द्वारा ही हुई है । अब यमहि के हाथ से गांव की रक्षा कैसे की जाए इसी बारे में सोचना होगा । "
बूढ़ा आदमी हताश होकर बोला - " और क्या सोचना अब केवल मृत्यु का इंतजार करना है । "
" आप हमेशा नकारात्मक ही सोचते हैं । अब मंदिर के बारे में मैं इतना कुछ जान गया हूं तो कुछ ना कुछ उपाय अवश्य निकलेगा । अच्छा यह सब आपने अभी जो बताया क्या इसे आपके दादाजी ने आपको बताया था ? "
" हां दादा जी मरने से पहले पिताजी फिर मुझे बताकर गए थे । "
" इसका मतलब आप भी भूलभुलैया का समाधान जानते हैं । "
" हां जानता हूं लेकिन इसे मैं आपको नहीं बता सकता । हमारे वंश की परंपरा है कि इस रहस्य को संरक्षण में रखना । भूल भुलैया का समाधान केवल हमारे वंश के लड़के ही जान सकते हैं । किसी दूसरे को मैं यह नहीं बता सकता । "
यह सुन मसाननाथ का चेहरा लाल हो गया ।
यही देखकर बूढ़ा आदमी डरते हुए बोला - " लेकिन अगर आप चाहे तो आपके साथ मैं उस भूलभुलैया में जाने को तैयार हूं । जब तक मैं आपके साथ रहूंगा आप उसमें कभी रास्ता नहीं भूलेंगे । "
यह सुनकर मसाननाथ ने चैन की सांस ली ।
उन्होंने फिर पूछा - " लेकिन आपने कहा कि आप इस मंदिर के रहस्य को वंश परंपरागत आपके लड़के को ही बताते हैं लेकिन मैं तो आपके वंश नहीं हूं इसीलिए आप मुझे समाधान नहीं बता रहे । परंतु आपने कुछ रहस्य का भेद मुझे क्यों बता दिया ? "
बूढ़ा आदमी हंसते हुए बोला - " हां प्रश्न तो आपने सही किया है लेकिन आप यह थोड़ी ना जानते हैं कि दादाजी ने मुझे केवल इतनी ही बातें बताई थी । "
" इसका मतलब और भी बातें हैं । "
" हाँ तो सुनिए दादा जी ने कहा था कि साध्वी माँ चाहते हुए भी यमहि को हरा नहीं सकती थी क्योंकि साध्वी मां ने कहा था कि उनके हाथों से यह कार्य पूर्ण नहीं होगा इसीलिए यमहि को केवल बंदी बनाया गया । शिवपुर गांव से जाने के पहले उन्होंने भविष्यवाणी की थी कि जिस वर्ष शिवपुर गांव में दो महा तांत्रिक आएंगे उसी समय यमहि पूरी तरह पराजित होगा । इससे पहले यमहि से लड़कर उसे हराना किसी के लिए भी सम्भव नहीं । केवल वहीं दो महा तांत्रिक ही यमहि के मृत्यु का कारण बनेगें । जब तक वह दो तांत्रिक इस गांव में नहीं आते तबतक केवल प्रतीक्षा ही करना होगा । इसीलिए आज सुबह जब मैंने आपके मुंह से तांत्रिक सुना तुम मुझे लगा कि यमहि का मृत्यु निकट है । फिर याद आया साध्वी मां ने दो तांत्रिक कहा था लेकिन आपके साथ तो इस गांव में कोई भी तांत्रिक नहीं है । "

मसाननाथ के मन में एक प्रकाश की किरण जल उठी । दो तांत्रिक इसका मतलब क्या साध्वी मां ने कालीचरण के बारे में कहा था । असंभव कुछ भी नहीं क्योंकि इसी बीच मसाननाथ ने कालीचरण के घर गोविंदपुर चिट्ठी भेज दिया है । लेकिन उस चिट्ठी को पाकर कालीचरण यहां आएंगे की नहीं और किस दिन आएंगे इस बारे में उन्हें कुछ भी नहीं पता ।
संशय भरे मन से मसाननाथ बोले - " और एक तांत्रिक इस गांव में आएंगे लेकिन उनके लिए इंतजार नहीं कर सकता । गलती जब मैंने की है तो इसे ठीक भी मैं ही करूंगा । आप केवल इतना बताइए कि यमहि के बारे में कुछ और तथ्य हैं जो बाद में मेरे काम आए । "
बूढ़ा आदमी कुछ देर चुप रहा फिर सोचकर बोला - " लोगों द्वारा यमहि के बारे में एक धरणा थी कि यमहि जिंदा मनुष्य को नहीं लेकर जाता । पहले वह अपने शिकार की हत्या करता है फिर उसे ऐसे ले जाता है कि उसका कोई प्रमाण नहीं रहता । "
" इसका मतलब आप कहना चाहते हैं कि कोई मनुष्य अगर साधारण तरीके से मारा जाए या उसका अकाल मृत्यु हो उसे भी यमहि ले जाता है । "
" पता नहीं लेकिन मैंने इस बारे में बहुत सोचा था परंतु कोई उत्तर नहीं मिला । "

मसाननाथ उठ खड़े हुए । सुबह से दोपहर होने वाली थी । बाहर धूप भी जोर पकड़ने लगा था । और देर नहीं किया जा सकता ।
आंगन में चलते हुए उन्होंने बोला - " मैं अब चलता हूं । अब देखूँ मैं कुछ कर सकता हूं या नहीं । लेकिन जिस दिन मंदिर जाना है उस दिन आप मेरे साथ रहेंगे क्योंकि उस भूलभुलैया का समाधान आपने मुझे नहीं बताया । "
बूढ़े आदमी ने सहमति जताई ।
" हाँ जरूर , मेरी तरफ से आपको पूर्ण सहायता मिलेगा । लेकिन फिर से मैं आपको याद दिला दूं कि साधिका साध्वी माँ ने दो महा तांत्रिक के बारे में उल्लेख किया था एक नहीं । "
बात समाप्त होते ही मसाननाथ उस बूढ़े आदमी के घर से बाहर निकल आए । इसके बाद उनका अगला गंत्वव्य लालू मांझी का घर है ।

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वासुकीनाथ के पास मेघुआ गांव में प्रतिदिन की तरह आज भी सुबह हुआ है । बहुत सारे पंछी , मुर्गी और गाय ,बकरी के आवाज़ प्राकृतिक गांव के बारे में बता रहें हैं । एक सफेद कबूतर कुछ देर हवा में इधर उधर घूमकर एक झोपड़ी के ऊपर बैठा ।
इसके बाद झोपड़ी से एक महिला बाहर आई । सफेद कपड़े में उनका सुन्दर चेहरा चमक रहा है । महिला को देखते ही वह कबूतर उनके कंधे पर जा बैठा ।
वह महिला बोली - " कैसे हो गरुड़ा । कितने सालों बाद आज तुझे देखा । "
बोलकर उन्होंने उस कबूतर को अपने बाएँ हाथ पर बैठाया । आश्चर्य की बात यह है कि वह कबूतर बिना उड़े वहीं सिर झुकाकर गुटुर - गुटुर करने लगा । मानो वह उस महिला के बातों का उत्तर दे रहा है ।
" जानता हूं तुम सोच रहे हो कि साधना के बीच में तुम्हें क्यों बुलाया । ध्यान से सुनो यह मेरे साधना के बारे में नहीं है । 500 साल पहले जिस काम को मैं पूर्ण नहीं कर पाया था आज उसका कुछ आशा दिखा है । शिवपुर के ऊपर इस समय बहुत ही बड़ा खतरा मंडरा है । दो तांत्रिक के योग से शिवपुर बच जायेगा । एक महा तांत्रिक इसी बीच उस गांव
में पहुंच गए हैं लेकिन दूसरे का अभी कोई अता पता नहीं । "
अचानक वह कबूतर जोर से गूं - गूं करने लगा ।
" क्या कह रहे हो मैं भी महा तांत्रिक हूं लेकिन मैं क्यों शिवपुर नहीं जा रहा ? तुम जानते हो गरुड़ा मेरे हाथों में बहुत सारे पापों का खून लगा है । कालीचरण जैसे अच्छे आदमी को मैंने कितना क्षति पहुंचाया । अपने पाप को लेकर मैं प्रतिदिन पुण्य की साधना करता हूं लेकिन मुझे मुक्ति नहीं मिलता क्योंकि ईश्वर को लेकर मैंने व्यवसाय किया है । जो महा तांत्रिक इस समय शिवपुर में हैं उन्हें मेरे बारे में पता चल चुका है कि मैं अमर हूं । बूढ़ी महिला का भेष बदलने से भी कोई लाभ नहीं हुआ । लेकिन अच्छी बात है कि वह मुझे ढूंढने के लिए नहीं आएंगे । तुम एक काम करो इस ताबीज़ को लेकर शिवपुर चले जाओ और वहीं पर प्रतीक्षा करना । जिस दिन किसी ऐसे आदमी को देखोगे जो शराब हाथ में लेकर मंदिर के अंदर जाने का प्रयत्न कर रहा है उसी समय
उसके हाथ में यह ताबीज़ दे देना । और हाँ इसके बाद वहाँ पर एक क्षण के लिए भी मत रुकना सीधे अपने घोंसले में लौट जाना । "
महिला की बात समाप्त होते ही गरुड़ा गुटुर - गुटुर आवाज़ करके उड़ गया ।
यह महिला कोई और नहीं स्वयं सर्वेश्वरी देवी उर्फ़ साध्वी मां हैं ।
साध्वी मां ने चेहरा उठाकर दूर आसमान में देखा । देखते ही देखते दो सफेद पंख बदलों में कहीं खो गए । साध्वी माँ वहीं खड़ी होकर कुछ संस्कृत मंत्र बोलती रही ।………

अगला भाग क्रमशः ।।


@rahul

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