tantrik masannath - 17 in Hindi Horror Stories by Rahul Haldhar books and stories PDF | तांत्रिक मसाननाथ - 17

तांत्रिक मसाननाथ - 17

यमहि मन्दिर का अभिशाप ( 7 )


सुबह के 9 बजे आसनसोल स्टेशन पर गोमो - आसनसोल पैसेंजर रुका । रेलिंग पकड़कर एक आदमी ने प्लेटफार्म पर पैर रखा । उनके शरीर पर बहुत ही अद्भुत पोशाक है । गेरुआ कुर्ता के नीचे सफेद पजामा , गले में रुद्राक्ष और माथे पर तिलक देखकर इतना समझा जा सकता है इस व्यक्ति का भगवान के ऊपर विश्वास है । भीड़ से वह आदमी आगे बढ़ता हुआ बोला - " हट जाइए तांत्रिक कालीचरण का रास्ता कोई मत रोकना वरना पाप लगेगा । "
यह सुन सभी डरकर उनके रास्ते से हट गए ।
डर मतलब कोई दूसरा डर नहीं , मनुष्य जैसे पागलों को देखकर डरता है यह ठीक वैसा ही था ।
कालीचरण का स्वाभाव भी कुछ पागलों जैसा ही है और साथ में थोड़ा तुतलाकर बोलते हैं इसीलिए लोगों को उनकी बातें कम ही समझ आता है ।
रास्ता मिलते ही कालीचरण जल्दी से स्टेशन के बाहर निकले और देखा चारों तरफ ज्यादा लोग नहीं हैं । इस समय शिवपुर का रास्ता ना मिलने पर समस्या और बढ़ेगा । यही सोचकर कालीचरण ने एक लड़के को अपने पास बुलाया ।
" ओ लड़के , अबे ओ चश्मा इधर आओ । "
लड़के का नाम अनुज है । उसके बड़े फ्रेम का चश्मा चेहरे पर जरा भी नहीं जच रहा ।
" मुझे बुला रहे हैं ? "
" हाँ तुम्हीं को क्या तुम्हारे अलावा भी कोई आसपास है । "
" बताइये क्या हुआ ? "
" मुझे जल्दी से शिवपुर जाना है क्या तुम उसका रास्ता बता सकते हो ? "
कालीचरण की बातों से अनुज इतना समझ गया कि सामने वाला आदमी बहुत मज़ाकिया है ।
अनुज ने जवाब दिया - " अच्छा शिवपुर जाना है पहले बताना था । वो दूर चाय का दुकान दिख रहा है ? "
कालीचरण बोले - " हाँ दिख रहा है ।"
" उसके सामने एक बेंच है । "
" हाँ "
" दो आदमी बेंच पर बैठे हैं । "
" हां "
" उसके पास एक आदमी खड़े होकर चाय पी रहा है । "
" हां "
" दुकान के अंदर और दो आदमी बैठे हैं । "
" हां "
" वहां पर जाकर पूछो वो ही बताएंगे । "
" अच्छा बेटा ये तुमने रास्ता बताया । "
अनुज ने हंसकर जवाब दिया - " अरे दादा जी मैं तो मजाक कर रहा था । "
" दादाजी होंगे तुम्हारे बाप के बाप , अभी मेरा एक भी बाल सफेद नहीं हुआ और तुम मुझे दादाजी कह रहे हो । "
" बाल सफेद नहीं है तो क्या हुआ दादाजी की तरह दिखोगे तो दादाजी ही बोलूंगा । "
" नहीं बोलोगे , तेरा चेहरा आम के सूखी गुठली की तरह है क्या मैंने कुछ बोला । "
" ठीक है , बताता हूं । रास्ता बहुत ही खराब है उस गांव की ओर गाड़ी नहीं चलता । जाने के लिए केवल बैलगाड़ी का सहारा लिया जा सकता है । इस रास्ते को पकड़कर सीधा चले जाइए । दो ढाई किलोमीटर जाने के बाद आपको एक बड़ा बरगद का पेड़ दिखेगा अब उसके पास कच्ची रास्ता अंदर शिवपुर गांव की ओर गया है । अगर कोई बैलगाड़ी मिल गई तब तो अच्छा है वरना आपको पैदल ही जाना होगा । "
यह सुनकर कालीचरण को थोड़ा आश्वस्त हुए । उन्हें दूर तक पैदल चलने में कोई असुविधा नहीं है ।
कालीचरण बोले - " अच्छा ठीक है धन्यवाद , वैसे तुम्हारा नाम क्या है ? "
" अनुज दास "
" इस समय कॉलेज में पढ़ रहे हो क्या ? "
" नहीं ग्रेजुएशन हो गया है अभी SSC की पढ़ाई कर रहा हूं । "
" ssc से क्या होगा और अब उसका परीक्षा होगा भी या नहीं क्या पता । "
अनुज समझ गया कि इस व्यक्ति के अंदर पढ़ाई के बारे में जानकारी है । पहले देखकर पागल जैसे लग रहे थे लेकिन वैसे आदमी वो नहीं हैं ।
" अरे इस ssc का मतलब स्टाफ सिलेक्शन कमीशन है स्कूल सर्विस कमीशन नहीं । "
" अच्छा अब समझा । "
" दादा जी मुझे लगता है इस इलाके में आप नए हैं इसलिए जिस काम के लिए आएं हैं उसे पूरा कीजिये । किसी अनजाने मसले में पड़ने की जरूरत नहीं । "
" हाँ सही , इतने कम उम्र में भी तुम समझदार हो । और एक मुझे देखो सब कुछ खो कर भी मैंने कुछ नहीं सीखा । अच्छा ये लो इस फूल को अपने पास रख लो CGL में पॉस हो जाओगे । "
फूल को अपने बैग में रखकर अनुज बोला - " आपको देखकर ऐसा नहीं लगता कि इस बारे में जानते होंगे । "
" ऐसे घुमा फिरा कर बोलने की क्या जरूरत है सीधे बोलो की मैं अनपढ़ दिखता हूं । असल में आजकल के लड़कों को लगता है कि जो पूजा - पाठ करते हैं वो सभी अनपढ़ हैं वो कुछ भी नहीं जानते । लेकिन ऐसा नहीं है तुम्हारी उम्र में मुझे भी सरकारी नौकरी का बहुत सपना था हालांकि उनमें से कुछ पूरा भी हुआ था । लेकिन "
बात के बीच में अचानक कालीचरण चुप हो गए ।
अनुज ने पूछा - " लेकिन क्या ? "
" कुछ नहीं वो बातें रहने दो क्योंकि तुम अभी छोटे हो । ये बातें तुम्हें समझ में नहीं आएगी । ठीक है धन्यवाद जाओ तुम अपना काम करने । मैं भगवान के पास प्रार्थना करूंगा जिससे तुम्हें जल्दी सरकारी नौकरी मिल जाए । "
अनुज ने कोई दूसरा प्रश्न नहीं किया क्योंकि वह समझ गया कि इस व्यक्ति के बीते दिन बहुत ही दुःख भरे थे । उस अतीत का इतिहास इतना ही बुरा है कि कालीचरण उसे याद नहीं करना चाहते ।
अनुज के चले जाने के बाद तांत्रिक कालीचरण ने हाथ जोड़ ऊपर देखते हुए कहा ,
" जय देवी महामाया , इस लड़के के मनोकामना को पूरा कर दीजिएगा । इसके अंदर अपने छात्र जीवन को देख रहा हूं । संभाल कर रखना उसे कोई परेशानी ना हो । हालांकि उसके ऊपर किसी भी खतरे की संभावना बहुत ही कम है । क्योंकि जिन्होंने ईश्वरी शक्ति का प्रयोग करके मेरा जीवन नर्क बनाया है उन सभी को मैं ऐसा सबक सिखाऊंगा जिससे किसी का बुरा करना तो दूर इस बारे में सोचते हुए उनका रूह कांप जाएगा । तुम में से कोई भी नहीं बचेगा । यह कालीचरण तांत्रिक एक - एक को खोजकर ख़त्म करेगा । " ………..

मसाननाथ जब लालू मांझी के घर पहुंचे उस समय दोपहर के लगभग 1 बज रहे थे । एक छोटे से घर में लालू अकेला रहता है । परिवार के किसी का भी अता - पता नहीं है । मसाननाथ को देखते ही लालू का शरीर कांप उठा । उस भयानक रात को इसी व्यक्ति के कहने पर उस मंदिर के ऊपर जाने से वह कितने बड़े खतरे से घिर गया था उसे सोचते हुए भी लालू के हाथ - पैर सुन्न हो जाते हैं ।
इसीलिए मसाननाथ के मुंह से एक बार फिर मंदिर के ऊपर जाना है यह सुनकर लालू ने तुरंत मना कर दिया । लालू अब फिर से किसी खतरे में नहीं पड़ना चाहता क्योंकि इतना मनोबल उसे अंदर नहीं है ।
इधर मसाननाथ भी लालू को नहीं छोड़ना चाहते उन्होंने चार गुना पैसा देना चाहा । लेकिन इससे भी कोई लाभ नहीं हुआ लालू माझी अपने बात पर अटल है । अंत में बहुत विनती करने के बाद लालू ने दिनेश का नाम बताया ।
दिनेश शिवपुर का एक मछुआरा है । उम्र 50 के पार होने पर भी उसका शरीर अभी मानो एकदम नौजवान है । अजय नदी में मछली पकड़ने के लिए वह बहुत बार अपने नाव को लेकर जाता है । नदी में कहा तेज बहाव है व कहाँ मगरमच्छ का उपद्रव ज्यादा है । इन सब बातों को दिनेश अच्छी तरह जानता है ।
मसाननाथ ने लालू से कहा - " ठीक है अभी तुरंत मुझे दिनेश के घर लेकर चलो । "
लालू ने पहले बहाना बनाया लेकिन फिर राजी हो गया ।रास्ते में जाते हुए मसाननाथ को पता चला कि दिनेश के अंदर चारित्रिक दोष है । गांव की लड़की व महिलाएं उसे देखते ही घर के अंदर चले जाते हैं । लेकिन फिर भी मसाननाथ के पास कोई उपाय नहीं है । इस वक्त दिनेश के अलावा अच्छा मांझी इस क्षेत्र में नहीं है । और कोई अतीत के घटनाओं को सुन मंदिर के पास जाएगा इसमें भी संदेह है । इन्हीं बातों के बीच वो सभी दिनेश के घर पहुंच गए । इस तरफ के ज्यादातर घर मिट्ठी और बांस द्वारा ही बनाए गए हैं ।
घर के सामने खड़े होकर तीन व्यक्तियों में बात शुरू हुई । भयानक उस रात के बारे में सुन दिनेश को कुछ डर लगा लेकिन वह पैसा नहीं छोड़ना चाहता । लेकिन पैसों के पअलावा भी उसका एक मांग है ।

दिनेश बोला - " तांत्रिक बाबा आप तो सब कुछ जानते होंगे । आपको मैं अपने नाव पर उस मंदिर तक ले जाऊंगा ।आप जब कहेंगे उसी समय मैं जाने के लिए राजी हूं । लेकिन इसके लिए पैसों के अलावा भी मुझे एक वस्तु चाहिए । अगर वह मिला तो मैं जाने के लिए तैयार हूं । "
" तुमको और क्या चाहिए? "
दिनेश हंसते हुए बोला - " आप तो एक तांत्रिक हैं आप अपनी मंत्रो के द्वारा किसी को भी वशीकरण कर सकते हैं । इसलिए मुझे एक ऐसा मंत्र देना होगा जिसे बोलते ही गांव की लड़कियां मेरे पास चली आए । "
यह सुनते ही मसाननाथ का चेहरा गुस्से से लाल हो गया ।
" आप गुस्सा कर रहे हैं लेकिन मेरे अलावा कोई भी आपकी मदद नहीं करेगा । गांव का कोई भी माझी आपके साथ नही जाएगा इसीलिए मेरे बात को मान लीजिए । "
दिनेश ने ठीक ही कहा पिछली घटना को सुनकर कोई भी उस मंदिर में नहीं जाना चाहेगा । इसीलिए मसाननाथ के पास कोई दूसरा उपाय नहीं हैं ।
ना चाहते हुए भी दिनेश के बात को उन्हें मानना पड़ेगा । मसाननाथ ने वादा किया कि अगर जिस काम के लिए मंदिर जा रहे हैं वह सफल हुआ तो दिनेश को अवश्य एक ऐसा मंत्र बताएंगे जिससे वह आसानी से किसी नारी के ऊपर वशीकरण सम्पन्न कर सके । यह सुन दिनेश की ख़ुशी उबलने लगा ।
तय हुआ कि अगले दिन दोपहर को सभी अजय नदी के पश्चिम में मिलेंगे और वहीं से उनकी यात्रा उस ऐतिहासिक व अभिशापित यमहि मंदिर की ओर शुरू होगा ।…......

अगला भाग क्रमशः .....


@rahul