Ahsaas pyar ka khubsurat sa - 1 in Hindi Novel Episodes by ARUANDHATEE GARG मीठी books and stories PDF | एहसास प्यार का खूबसूरत सा - 1

एहसास प्यार का खूबसूरत सा - 1

एहसास प्यार का खूबसूरत सा❤️ ( भाग - 1 )


अरनव ( खुशी को संभालते हुए ) - आराम से बैठो आप यहां पर ....., और खुद का खयाल रखा करो ।

खुशी - मुझे क्या जरूरत खुद का खयाल रखने की , आप तो हैं न मेरा खयाल रखने के लिए ।

अरनव ( हल्के गुस्से से ) - हां...., इसी लिए तुम खुद का ध्यान नहीं रखती । अब बताने का आप कष्ट करेंगी, कि आप ऐसा क्यों करती हैं....?????


खुशी (शरमाते हुए ) - ह ..... हां ..... आ..... आप .. म .... मु....मुझे ..... द ..... डा ..... डांटते ..... ह...हो।

और इतना कह कर खुशी बेड से उठने लगती है और वीकनेस की वजह से फिर से गिरने लगती है पर अरनव उसे संभाल लेता है । और फिर कहता है ।

अरनव - हो गया ना प्रूफ , के मैं क्यू डांटता हूं तुमको , बच्चे की मां बनने वाली हो और अभी भी पूरी की पूरी बच्चो जैसी हरकतें करती हो । अब चलो दवाई खा कर आराम करो । बहुत हुआ तुम्हारा , चुप चाप आराम करोगी तुम । वरना मैं......

खुशी ( बीच में ही ) - वरना क्या ?

अरनव - वरना मैं ..... वरना मैं ..... हां .... वरना मैं तुमसे बात नहीं करूंगा ।

खुशी - नहीं ! मैं खाऊंगी दवाई और आराम भी करूंगी । आप मुझसे बात करोगे ना?

अरनव - हां अगर तुम मेरी बात मानोगी और आराम करोगी तो मैं तुमसे बात करूंगा और अगर नहीं मानोगी तो नहीं करूंगा बात ।

खुशी - ठीक है , मानूंगी ।

अरनव - गुड गर्ल ।

अरनव खुशी को उसकी दवाई देता है और उससे गिलास ले कर टेबल पर रखता है और खुशी को आराम से सहारा दे कर बेड पर लेटाता है और उससे कहता है ।

अरनव - अब आप यहां आराम करेंगी। जब तक मै आपको ना जगाऊं तब तक आप यहां से उठोगी भी नहीं , समझी आप?

खुशी ( मासूमियत से) - ठीक है , मैं समझ गई पति देव ।मै सो रही हूं ।

अरनव ( मुस्कुराते हुए खुशी के माथे पर किस करके) - ओके , मै यही हूं किसी भी चीज की जरूरत हो तो मुझे बता देना ।

खुशी - ओके।

अरनव वहीं पर अपना लैपटॉप उठा कर अपना काम करने लगता है और खुशी सो जाती जाती है । असल में खुशी 4 मंथ प्रेगनेंट होती है और अरनव उसका ख्याल रखने के लिए घर से ही अपने ऑफिस का काम करता है । आरव और अरनव अपने पापा के साथ उनका बिजनेस संभालते हैं और इसी वजह से उनका बिजनेस इंडिया में टॉप पर है । आरव अपनी भाभी और मां का लाडला है। आरव भी अपने ही कॉलेज में BBA के एडमिशन के लिए जाने वाला होता है । इसी लिए वो रेडी होकर नीचे आता है और अपनी मम्मी को बता कर जाने वाला होता है पर जैसे ही वो निकलने वाला होता है वैसे ही उसकी मम्मी बोलती हैं।

आरव - मम्मी मैं जा रहा हूं एडमिशन के लिए कॉलेज ।

सुनयना जी - हां ठीक है । पर नाश्ता तो करता जा बेटा ।

आरव - मम्मी मैं वहीं पर कुछ खा लूंगा ना ।

सुनयना जी - नहीं ! चुप - चाप डायनिंग टेबल पर आकर नाश्ता कर फिर चले जाना ।

आरव - जी मम्मी ।

और आरव आकर नाश्ता करने लगता है। और नाश्ता करके कॉलेज के लिए अपनी कार से निकाल जाता है। कॉलेज में पहले से पढ़ने की वजह से और हमेशा हर चीज में टॉप में आने को वजह से उसे जल्दी ही एडमिशन बिना किसी रुकावट के मिल जाता है । और वो अपना एडमिशन करा कर एडमिशन कैंपस से बाहर आता है । जैसे ही वो बाहर आता है किसी लड़की से टकरा जाता है । और फिर वो उसे संभालता है । और जब आरव की नजर उस लड़की पर पड़ती है तो आरव उसमे खो जाता है। भूरी आंखे , आईब्रो सलीके से सेट हुई , माथे पर छोटी सी बिंदी , गोरा रंग , बाल लंबे , कमर तक आते हुए जिसमें छोटा सा क्ल्चर फंसा हुआ रहता है , कान में छोटे - छोटे झुमके , नाक में छोटी सी नोज पिन , होठ सुर्ख गुलाबी और बालों की कुछ लटें चेहरे पर आती हुई , ब्लू कुर्ती के साथ टाईट जीन्स और हाथ में ब्लैक कलर का दुपट्टा । और चेहरे की उतनी ही खूबसूरत मासूमियत जो कि उसके चेहरे पर चार - चांद लगा रही थी । आरव उसमे इतना खोया हुआ रहता है कि उसे आस - पास का ध्यान ही नहीं रहता । उसी तरह वो लड़की भी आरव को देख कर उसमे खो जाती है। गोरा रंग , नीली आंखें , बाल सलीके से जेल से सेट किए हुए , व्हाइट शर्ट , ब्लू जींस , हाथों में ब्रांडेड घड़ी , कुल मिला कर बहुत ही ज्यादा हैंडसम लग रहा था आरव । लड़की का एक हाथ आरव के कंधे पर और एक हाथ हवा में लटकता रहता है। आरव का एक हाथ लड़की की कमर पर और एक हाथ लड़की के सिर पर होता है। लड़की को जब पैर में दर्द होता है तो उसे याद आता है के वो कहां है , और एकदम से चौंकते हुए वो लड़की सही से खड़ी होने की कोशिश करती है पर खड़ी नहीं हो पाती , और उसे अजीब सी फीलिंग होती है । लड़की असहज होते हुए और गुस्से से आरव को बोलती है ।

लड़की - अब क्या ज़िन्दगी भर ऐसे ही लिए खड़े रहेंगे , के छोड़ेंगे भी ?

आरव को तो जैसे कुछ सुनाई ही नहीं देता है । लड़की एक बार फिर से वही शब्द कहती है । पर आरव को तो जैसे कोई फर्क ही नहीं पड़ता है । लड़की लगभग गुस्से में अपने हवा में लटके हुए हाथ को उठा कर आरव के कंधे पर रख कर जोर से आरव को झकझोरते हुए ......

लड़की - मिस्टर ! छोड़िए मुझे , ये क्या रोमियो जैसे पकड़ कर रखा है आपने? छोड़िए मुझे ।

आरव को एकदम से होश आता है और वो चौंक जाता है और रोमियो शब्द सुनते ही उसे अजीब लगता है और आरव लड़की को बिना खड़े किए ही छोड़ देता है जिससे लड़की वहीं जमीन पर गिर जाती है । लड़की लगभग चिल्लाते हुए .....।

लड़की - हाए मार डाला , मेरी कमर । क्या है ये ? ये कोई तरीका होता है ? छोड़ने बोला था मतलब खड़े करके छोड़ देते , ऐसे छोड़ने किसने कहा था ? अक्ल नहीं है क्या ?

आरव - मुझे अक्ल नहीं है ? तुम खुद देख कर नहीं चल सकती थी ? और तुमने जो कहा मैने वहीं किया । ( अपना एक हाथ लड़की की तरफ बढ़ा कर ) अब यही बैठने का इरादा है क्या या फिर यहां से उठना भी है आपको?

लड़की - मैं तुमसे तो कभी हेल्प नहीं लूंगी ।

आरव - अब देख लो , लड़कियां मरती हैं सिर्फ मेरा हाथ पकड़ने को ।

लड़की - लेकिन मैं नहीं मरती हूं ।

आरव - सोच लो , अगर ज़िन्दगी भर यही रहने का इरादा है तो मुझे कोई प्राब्लम नही है ।

और इतना कहने के बाद आरव जाने लगता है । तभी लड़की अपने चारो ओर देखती है के कैसे सभी लोग उन्हें घूर रहे हैं , लड़की को थोड़ा अजीब फील होता है और वो देखती है कि उसकी फ्रैंड भी कहीं नहीं दिख रही है , कुछ पल सोचने के बाद लड़की आरव को रोक कर उसका हाथ पकड़ कर उठ जाती है । और आरव से कहती है ।

लड़की - ये मत समझना के मैं तुम्हारा हाथ पकड़ना चाहती हूं । वो तो आस - पास मेरी फ्रैंड नहीं दिख रही है इस लिए मुझे तुम्हारी हेल्प लेनी पड़ी ।

तभी अंशिका भी कॉलेज कैंपस से बाहर आती है और आरव के गले लग जाती है , और लड़की की फ्रैंड रूही भी उसी समय अपनी स्कूटी पार्क कर लड़की और आरव के पास आती है । आरव कुछ बोलता उससे पहले ही अंशिका आरव से बोलती है ।

अंशिका - भाई आप आए और मुझे बताया भी नहीं । और ये लड़की कौन है ?

आरव - मै एडमिशन कराने आया था , और तुम क्लास में होगी सोच कर मैने तुम्हे डिस्टर्ब नहीं किया ।

अंशिका ( एक बार फिर वही सवाल करती है ) - अच्छा ये तो ठीक है । पर ये कौन है भाई?

आरव ( लड़की की तरफ देख कर) - मुझे नहीं पता ये कौन है ....। वो तो ये गिर गई थी तो मैने इनकी हेल्प की पर मुझे थैंक्स बोलने की जगह ये उल्टा मुझपर चिल्ला रही हैं ।

लड़की घूर कर आरव को देखती है । और लड़की कुछ बोलने वाली होती है के तभी रूही जो इतनी देर से ये सब सुन रही थी लड़की से बोलती है ।

रूही - कायरा , ये क्या तरीका है , एक तो उन्होंने तुम्हारी हेल्प की और तुम उनसे बहस कर रही हो । चलो अपने बिहेव के लिए उनसे सॉरी बोलो और हेल्प करने के लिए उनसे थैंक्स बोलो।

आरव ( मन में सोचते हुए ) - ओह ! तो इन मैडम का नाम कायरा है । सच में बहुत ही प्यारा नाम है ।

कायरा के रूही को बोलने से आरव की तंद्रा टूटती है । और कायरा आरव को घूर कर देखती है और रूही से कहती है ।

कायरा - ये क्या बात हुई , मैं क्यू सॉरी बोलू , और क्यों थैंक्स बोलूं? जब मेरी कोई गलती ही नहीं है तो और रही बात हेल्प करने की तो वो कोई बड़ी बात नहीं है ।

रूही - तूने एक तो गलती की है इस तरह से बात करके, ऊपर से तू उनसे थैंक्स तक नहीं कह रही है ।

कायरा - हां नहीं बोलूंगी मैं थैंक्स और सॉरी 😏।

आरव - रहने दीजिए ना , उनका मन नहीं है तो , मै तो बस ऐसे ही कह रहा था ।

कायरा - देख वो भी माना कर रहे हैं ।

रूही - तू सॉरी और थैंक्स बोलेगी के नहीं?

कायरा - नहीं , नहीं , नहीं ......,😠।

रूही - नहीं बोलेगी ?

कायरा - नहीं ......😏।

रूही - ठीक है , फिर मैं घर में दादी को बता दूंगी ।

दादी का नाम सुनते ही कायरा सोचने लगती है🤔 और मासूम सा चेहरा बना कर अपने हाथो के नाखूनों को अपने दांतों से खाने लगती है और वो उस समय इतनी मासूम दिख रही थी के आरव के चेहरे पर फिर से उसे देख कर अपने आप ही मुस्कान फैल जाती है और उसे इस तरह से मुस्कुराते देख कर अंशिका भी मन ही मन मुस्कुराती है और आरव को कंधे से धक्का देती है , आरव हड़बड़ा जाता है वो कुछ बोलता उससे पहले ही कायरा रूही से कहती है ।

कायरा - तू ऐसा नहीं करेगी ।

रूही - अगर तूने मेरी बात नहीं मानी तो मैं ऐसा ही करूंगी ।

कायरा - ठीक है । ( आरव के तरफ़ थोड़ा पास आकर ) सॉरी वो मैने आपसे ऐसे बात की और थैंक्यू हेल्प करने के लिए ।

आरव - सॉरी , गलती मेरी भी थी ।

और इतना कह कर आरव पार्किंग एरिया की तरफ चला जाता है और उसके पीछे - पीछे अंशिका भी चली जाती है और कायरा उसे ऐसे जाते हुए देखती रहती है और गुस्से से रूही से बोलती है।

कायरा - देखा ऐटिट्यूड 😡। मैने सिर्फ तेरी वजह से सॉरी और थैंक्स बोला था , वरना तू भी जानती है के मैं किसी को भी सॉरी और थैंक्स नहीं बोलती ।

रूही - जाने दे ना । अभी चल अपना एडमिशन करवा लेते हैं वरना तेरा सपना अधूरा रह जाइएगा और तू फिर से भड़केगी ।

कायरा - ठीक है , चल ।

इतना कह कर दोनों एडमिशन कैंपस की ओर चली जाती हैं । आरव भी अपनी कार पार्किंग एरिया से निकाल कर बाहर लाता है और अंशिका को बैठने के लिए कहता है । अंशिका बैठा जाती हैं और सीट बेल्ट बांधते हुए कहती है ।

अंशिका - वैसे भाई ! वो क्या नाम था उस लड़की का , जो अभी मिली थी ।

आरव - कायरा 😍 ।

अंशिका - हां ..... कायरा , बहुत ही स्वीट दिख रही थी एकदम परी जैसी 😁।

आरव - हां ( जब उसे पता चलता है के उसने क्या कहा दिया तो हड़बड़ाते हुए ) क.... क.... क्या व... वो... ल..... लड़की और स..... स्वीट और परी , बिल्कुल भी नहीं , कितना झगड़ती है वो लड़की , भगवान ही बचाए ऐसे लोगो से तो ।

अंशिका उसकी ऐसी हरकतों से मुस्कुरा देती है😊 और कार में एफएम चालू कर देती है। अब आरव की किस्मत कहो या इत्तेफाक एफएम में जो गाना चल रहा था वो भी बिल्कुल आरव के जज्बातों पर फिट बैठ रहा था ।

अखियाँ दे कोल रह जाने दे
कहना है जो कह जाने दे

तेरे ख्यालों में, बीते ये रातें
दिल मेरा मांगे ,एक ही दुआ
तू सामने हो ,और करूँ मैं बातें
लम्हा रहे यूँ ठहरा हुआ

पहले तो कभी यूँ मुझको ना ऐसा कुछ हुआ
दीवानी लहरों को जैसे साहिल मिला.. ओ..

एक लड़की को देखा तो ऐसा लगा
एक लड़की को देखा तो ऐसा लगा

ओ मेरे सोह्णेया वे छढ़ सारी गलियाँ मैं
नाल तेरे तुर चलेया मैं
ले चल मुझको दुनिया से तू दूर .......
चोरी-चोरी जद तैनू तकेया मैं
खुद को संभाल ना सकेय मैं
चढ़ गया सजना तेरा ये फितूर .......

रंग जानी रे ....मरजानी रात
कहनी जो थी कह दे वो बात
हो.. एक लड़की को देखा तो ऐसा लगा ........।

आरव गाना गुनगुनाते रहता है और गाना सुनते - सुनते दोनों कब घर पहुंच गए पता ही नहीं चला , आरव और अंशिका घर के अंदर आते हैं सुनयना जी दोनों को आता देख आरव और अंशिका से पूछती हैं ।

सुनयना जी - आरव हो गया एडमिशन ? और अंशिका बेटा आप आज इतनी जल्दी क्यों आ गई , अभी तो आपकी क्लासेस चल रही होगी ?

आरव - हां मम्मी हो गया एडमिशन ।

अंशिका - मम्मी , मैं कैंटीन के तरफ जा रही थी तो वहीं भाई मिल गए तो मैं भी उनके साथ आ गई , और मैं 2 क्लासेस अटेंड कर चुकी हूं , और बाकी की क्लासेस के नोट्स ले लूंगी अपनी फ्रैंड से ।

सुनयना जी - ठीक है जाओ तुम लोग फ्रेश होकर आओ खाना लग गया है ।

आरव और अंशिका एक साथ - जी मम्मी ।

सुनयना जी - नकुल ( घर का नौकर ) ।

नकुल - जी बड़ी मैडम !

सुनयना जी - जाओ अरनव और खुशी को लंच के लिए बुला लाओ ।

नकुल - जी मैडम ।

नकुल अरनव के कमरे में जाता है और अरनव को बोलता है ।
नकुल - बड़े भैया जी ! आपको और भाभी जी को बड़ी मैडम लंच के लिए बुला रही हैं ।

अरनव - ठीक है , तुम जाओ और मम्मी को कहना मैं खुशी को लेकर आता हूं ।

नकुल - जी बड़े भैया ।

नकुल सुनयना जी को बताता है और सुनयना जी लंच के लिए टेबल रेडी करवाती हैं । अरनव खुशी को उठाते हुए ।

अरनव - खुशी उठो , मम्मी लंच के लिए बुला रही है ।

खुशी ( आंखे मलते हुए )- नहीं ना अरनव , आप लंच कर लो ना मेरा अभी मन नहीं है । और फिर आप ही तो बोलते हो के मैं आराम नहीं करती हूं ।

अरनव - हां मैं कहता हूं , ( खुशी के करीब बैठ कर प्यार से उसके सिर पर हाथ फेर कर ) पर आपने पिछले 4 घंटे से कुछ नहीं खाया है , आप लंच कर लो , आकर फिर से आराम कर लेना ।

खुशी - नहीं ना।

अरनव - प्लीज , मम्मी को भी अच्छा नहीं लगेगा , और वो फिर मुझ पर गुस्सा करेंगी के मैं तुम्हारा ध्यान नहीं रखता ।

खुशी- ठीक है , मैं फ्रेश होकर आती हूं फिर साथ में नीचे चलते हैं।

अरनव - ओके ।

इतना कह कर खुशी बेड से नीचे उतरती है और अरनव उसे सहारा देकर वाश रूम की तरफ ले जाता है फिर दोनों तैयार होकर नीचे आ जाते हैं । खुशी सुनयना जी की हेल्प करती है लेकिन सुनयना जी उसे मना कर देती हैं और उसे डायनिंग टेबल की चेयर पर बैठा देती हैं । आरव भी अपनी फाइल रख कर चेंज करके नीचे आ जाता है और अंशिका भी अपनी बुक्स और बैग रख कर चेंज करके नीचे आ जाती है , दोनों भाई बहन नीचे आकर डायनिंग टेबल पर बैठ कर खाना खाते हैं और सुनयना जी सभी को खाना परोसती है । खुशी खाना देख कर बहुत खुश होती है क्योंकि आज की सारी डिशेज खुशी की मन पसंद की बनी हुई रहती है । खुशी जैसे ही कुछ कहने वाली होती है उतने में ही आरव के पापा मिस्टर राजेश शर्मा आ जाते हैं और सोहन जो कि घर का शेफ होता है उससे पूछते हैं ।

मिस्टर शर्मा - सोहन आज खाने में क्या बनाया है , बहुत बढ़िया खुशबू आ रही है ।

सोहन ( खाना लाते हुए ) - सर आज मैने नहीं बड़ी मैडम ने खाना बनाया है वो भी भाभी की पसंद का।

सभी बहुत खुश होते हैं क्योंकि सुनयना जी के हाथो का कहना सभी को बहुत पसंद होता है । मिस्टर शर्मा चेयर पर बैठते हुए आलू के पराठे को उठाते हैं । सुनयना जी उनका हाथ खिचते हुए कहती हैं ।

सुनयना जी - जी, ये सब आपके लिए नहीं है । आपके लिए कम तेल मसाले वाला खाना बना हुआ है , वरना बीपी बढ़ते देर नहीं लगती है आपका , और ये क्या जाइए पहले फ्रेश होकर आइए , आते साथ ही चालू हो गए ।

मिस्टर शर्मा ( मासूम बनते हुए ) - पर मोहतरमा .....।

सुनयना जी ( बीच में ही टोकते हुए ) - नहीं पहले जाइए और कपड़े बदल कर हाथ मुंह धोकर आइए ।

मिस्टर शर्मा ( मुस्कुराते हुए) - जो आज्ञा ।

मिस्टर शर्मा अपने रूम में चले जाते हैं और बाकी सब अपनी हंसी दबा कर खाना खाने लगते हैं । खुशी सुनयना जी को गले लगाते हुए ।

खुशी - थैंक्यू मम्मी , आप तो मेरी मां से भी ज्यादा मेरा खयाल रखती हैं ।

सुनयना - आखिर बेटा आप हो ही इतने स्वीट ।

खुशी - थैंक्यू मम्मी ।

सुनयना - आॕलवेज़ वेलकम बेटा ,चलो अब सब आराम से लंच करो।

मिस्टर शर्मा भी आकर अपनी चेयर पर बैठ कर खाना खाने लगते हैं और सुनयना जी भी बैठ जाती हैं और खाने लगती हैं । मिस्टर शर्मा आरव से पूछते हैं ।

मिस्टर शर्मा - आरव बेटा आपका एडमिशन हो गया ?

आरव - जी पापा हो गया और कल से क्लासेस भी चालू हो जायेंगी ।

मिस्टर शर्मा - गुड । अब आप बिजनेस के साथ साथ अपनी स्टडीज पर भी ध्यान देना और अरनव कल जो क्लाइंट आने वाले हैं उनसे अपने और आरव के टाइम के अकॉर्डिंग मीटिंग फिक्स कर लेना और ध्यान देना ये प्रोजेक्ट हाथ से ना जाए ।

आरव और अरनव एक साथ - जी पापा ।

मिस्टर शर्मा - अंशिका आपकी पढ़ाई कैसी चल रही हैं बेटा ?

अंशिका - बहुत अच्छी चल रही है पापा ।

खुशी - पापा मुझे भी ऑफिस ज्वाइन करना है , मैं घर में बैठे बैठे बोर होती रहती हूं ।

अरनव ( तुरंत ही बोलता ) - नहीं , कहीं नहीं जाओगी तुम , घर में तो एक जगह बैठ के आराम करती नहीं हो ऑफिस में झेलना तो और मुस्किल हो जायेगा ।

आरव ( खुशी को उकसाते हुए ) - भाभी देख लो भैया क्या बोल रहे हैं ।

अंशिका - आपका मतलब है भैया आप भाभी को झेलते हो ? 🤨

और सभी दबी हंसी हंसने लगते हैं और खुशी घूर कर अरनव को देखती है🙄 । अरनव भी घूर कर आरव और अंशिका को देखता है और खुशी से कहता है ।

अरनव - अरे ऐसा नहीं है ये दोनों जान बूझ कर मस्ती कर रहे हैं तुम खाना खाओ ।

सुनयना जी - खुशी बेटा , अभी आपका बाहर काम करना ठीक नहीं होगा । और मैं हूं ना , जब आप बोर होगे तो मुझे बता देना मैं आपके साथ आ जाऊंगी बाते करने ।

मिस्टर शर्मा - हां बेटा ,अभी आप घर पर रह कर आराम करो । कुछ समय बाद हम खुद आपका ऑफिस में शानदार वेलकम करेंगे ।

खुशी ( खुश होते हुए) - जी पापा , जी मम्मी 😊।

और सब इसी तरह बाते करते हुए खाना फिनिश करके अपने अपने रूम में चले जाते हैं । उधर कायरा और रूही भी एडमिशन करा रहे होते हैं । कायरा के सभी सब्जेक्ट्स में अच्छे मास्क होने के कारण उसका एडमिशन आराम से हो जाता है पर रूही के उतने अच्छे मास्क नर होने के कारण उसे टाइम लगता है और कायरा उसकी हेल्प करा रही होती है । दोनों का एडमिशन जब हो जाता है तो दोनों ही अपने डॉक्यूमेंट ले कर अपने अपने घर चली जाती हैं । घर पर पहुंचते ही जैसे ही कायरा घर के अंदर पैर रखती है उसकी दादी उसको चिल्लाती है ।

राधा जी - हो गया तेरा एडमिशन ? इतना टाइम लगता है एडमिशन में ? कहां थी अभी तक ? पढ़ाई के लिए छूट है तो आवारा गर्दी करती रहती है , बाहर में घूमती रहती है ।

कायरा को ये सब सुन कर अच्छा नहीं लगता है और वो भीगी आंखो के साथ 🥺अपने रूम की ओर चली जाती है और दादी न्यूज पेपर पढ़ने लगती है । वहीं मालती जी दादी कि आवाज़ सुन कर किचेन से बाहर आती हैं और कायरा को इस तरह देख कर वो भी अपने किचेन का काम ख़तम कर कायरा को लंच के लिए बुलाती हैं । मालती जी जब कायरा के रूम में जाती हैं तो देखती हैं कि कायरा अपनी बुक्स खोल कर पढ़ रही है और उसकी आंखो से आंसू बह रहे हैं । मालती की बुक्स को साइड में रख कर कायरा के पास बैठ कर उसे गले लगाती हैं और उससे कहती हैं ।

मालती जी - क्या हुआ बेटा , आप ऐसे क्यू रो रहे हो ?

कायरा कोई जवाब नहीं देती ।

मालती जी - क्या हुआ बेटा , मम्मा को नहीं बताओगी?

कायरा ( सिसकते हुए ) - मम्मा .... दादी हमेशा ... मुझे ऐसे क्यों डांटती हैं , जबकि मैं तो ज्यादा कहीं बाहर जाती भी नहीं हूं ।😭

मालती जी ( कायरा के चेहरे को अपने हाथो में लेकर उसके आंसू साफ करते हुए ) - बेटा दादी बड़ी हैं ना । उनके लिए ऐसे नहीं बोलते । और बड़े तो हमेशा हमारे भले के लिए ही बोलते हैं । और दादी को प्यार दिखाना नहीं आता जबकि वो आपसे बहुत प्यार करती हैं इस लिए वो गुस्सा करती हैं । आप तो समझदार हो ना उसकी बातों का बुरा मत माना करो ।

कायरा - ठीक है मम्मा , मै दादी कि बातो का बुरा नहीं मानूंगी ।

मालती जी - गुड गर्ल । अब जाओ बुक्स को अच्छे से रख कर फ्रेश होकर नीचे खाने के लिए आ जाओ आज मैंने अपनी बेटी की फेवरेट डिशेज बनाई है ।

कायरा - थैंक्यू मम्मा , आप चलो मैं अभी सब कुछ सही से रख कर आती हूं ।

मालती जी नीचे चली जाती हैं और कायरा अपनी बुक्स सही से रख कर चेंज करके नीचे खाने के लिए आ जाती है और मालती जी उसे खाना परोसती है । कायरा थोड़ी देर पहले की सारी बातें भूल कर मस्ती करते हुए बच्चो की तरह खाना कहने लगती है क्योंकि दादी वहां पर नहीं होती है वे अपने रूम में आराम कर रही होती है इस लिए कायरा बेफिक्री से खाना खा रही होती है और मस्ती कर रही होती है । तभी अंश भी स्कूल से आ जाता है । अंश 12th क्लास में पढ़ रहा होता है पर दोनों भाई बहन अभी भी बच्चो जैसी मस्ती करते रहते हैं। अंश घर आकर बैग सोफे पर रख कर अपने जूते उतार रहा होता है के कायरा की नजर उसपर पड़ती है और वो जान बूझ कर तेज आवाज़ में बोलती है ।

कायरा - थैंक्यू मम्मा , मेरी फेवरेट डिशेज बनाने के लिए ।

मालती जी समझ जाती है और बोलती है - वेलकम बच्चा।

अंश - हां मम्मा बेचारी को कोई फेवरेट चीज नहीं मिलती है ना तो आपको मस्का लगा रही है।😅

कायरा - क्या बोला तू 🤨? और मुझे सारी मेरी फेवरेट चीज़े मिलती है , और मम्मा पापा तुझसे ज्यादा मुझसे प्यार करते हैं।

अंश - हां , क्योंकि आपको शादी करके भगाने वाले है ना इस लिए खातिर दारी कर रहे हैं । और आपके जाने के बाद मैं खूब मस्ती करूंगा और आपका बड़ा वाला रूम भी ना मैं ही रखूंगा और आपका सारा सामान बाहर कर दूंगा क्योंकि आप तो जाने के बाद वापस नहीं आओगी तो आपके सामान का यहां क्या काम रहेगा 😆।

कायरा ( चिढ़ते हुए )😑 - मम्मा देखो ना जब देखो तब भगाने के लिए बोलता रहता है ।

मालती जी - अंश मस्ती नहीं , चलो जाओ चेंज करके आओ खाना तैयार है , और अपना टिफिन और बॉटल लेते आना । बड़े हो गए हैं लेकिन अभी भी बच्चो की तरह झगड़ते हैं ।

अंश - जी मम्मा ।

अंश अपने सूज उनकी जगह पर रख कर अपना बैग उठा कर अपने रूम में चला जाता है और फ्रेश होकर अपना टिफिन और बॉटल ला कर अपनी मां को दे देता है और दोनों भाई बहन मस्ती करते हुए खाना खाते है और मालती जी मुस्कुराते हुए खाना खा कर किचेन में जा कर अपना काम समेटती है । कायरा और अंश भी खाना खा कर अपने रूम में चले जाते है और पढ़ाई करने लगते है । इसी तरह शाम बीत जाती है और कायरा के पापा भी घर आ जाते हैं । और रात में फिर सब खाना खा कर आराम करने चले जाते हैं । इधर आरव के यहां भी सब डिनर करके अपने अपने रूम में आराम करने चले जाए है । कायरा और आरव आज जो कुछ भी कॉलेज में हुआ उसे सोचते रहते हैं । आरव इसी तरह सोचते हुए मुस्कुराते हुए सो जाता है । और कायरा को आरव पर बहुत गुस्सा आ रहा होता है और वो भी यही सब सोचते हुए सो जाती है। सुबह उठ कर कायरा नहा कर अपना टिफिन ले कर कॉलेज के लिए जाती है और उसे रास्ते में ही रूही मिल जाती है दोनों ही कॉलेज पहुंच कर गाड़ी पार्क करके अपनी क्लास चले जाते हैं । इधर आरव भी अरनव के साथ ऑफिस जाता है और अपनी मीटिंग ख़तम करके दोनों ही ऑफिस से बाहर आते हैं । अरनब किसी काम से चला जाता है और आरव वहीं से अपने कॉलेज चला जाता है । आरव अपनी गाड़ी पार्क करके बाहर आता है तो उसके दोस्त राहुल , नील , रेहान , सौम्या , मीशा , आदिया और शिवानी मिल जाते हैं और ये सभी बाते करते हुए अपनी क्लास की ओर चले जाते हैं । जब आरव क्लास में जाता है तो वहीं कायरा और रूही भी होते हैं और वो भी बाते कर रहे होते हैं । आरव और उसके दोस्त अनजाने में बाते करते हुए कायरा के डेस्क के जस्ट पीछे बैठ जाते हैं , आरव कायरा और रूही के जस्ट पीछे रेहान के साथ बैठा होता है बाकी सब उनके पीछे बैठ जाते हैं । उनकी क्लास में प्रिंसिपल आते हैं । सभी उनको देख कर एक साथ खड़े हो जाते हैं और गुड मॉर्निंग विश करते है । प्रिंसिपल सर सभी को बैठा कर कायरा को सामने बुलाते हैं । कायरा प्रिंसिपल के पास जाती है । और आरव आश्चर्य से कायरा और रूही को देखता है जो उसकी डेस्क के सामने ही बैठी रहती हैं और मन ही मन सोचता है ।

आरव - तो ये दोनों मेरी ही क्लास में पढ़ती है । और मुझे पता कैसे नहीं चला । मैं इन्हीं के पीछे आ कर बैठ गया ।

आरव सोचता रहता है के तभी प्रिंसिपल आरव को भी सामने में बुला लेते हैं । अब बारी चौंकने की कायरा और रूही की थी ।

रूही धीमी आवाज़ में - मर गए ये तो हमारी ही क्लास में पढ़ता है और ये हमारी डेस्क के पीछे बैठा था और हमे पता भी नहीं चला ।

कायरा मन में सोचते हुए - ये हमारी क्लास में क्या कर रहा है , कहीं ये मेरा पीछा तो नहीं कर रहा है ?

आरव भी सामने आ जाता है । प्रिंसिपल के एक तरफ कायरा और दूसरी तरफ आरव खड़ा होता है । प्रिंसिपल दोनों को इंट्रोड्यूस करवाते हुए ।

प्रिंसिपल - इनसे मिलिए , ये हैं आरव शर्मा , हमारे कॉलेज के होनहार स्टूडेंट , और गेम्स में हमारे कॉलेज को हमेशा फर्स्ट रैंक में लाने वाले । और ये हैं कायरा गर्ग , जिन्होंने अपने पूरे कॉलेज में टॉप किया है और गेम्स में भी इन्होंने अपने कॉलेज को कई ट्रॉफियां दिलवाई हैं । आप सभी को स्टडीज में कोई भी प्रॉब्लम हो तो आप इन दोनों से हेल्प ले सकते हैं । आप दोनों सभी की हेल्प करोगे ना?

आरव और कायरा एक साथ - यस सर ।

प्रिंसिपल उनके बारे में और जरूरी चीज़े बता कर उन्हें बैठने को बोल देते हैं और कुछ जरूरी इंफॉर्मेशन दे कर वो क्लास से बाहर चले जाते हैं । उनके जाते ही सभी अपनी अपनी जगह पर बैठ जाते हैं और कायरा गुस्से से पीछे मुड़ती है और गुस्से से आरव को घूरती है । आरव कायरा को इस तरह से अपने आपको को घूरते देख कर कहता है ............



क्रमशः

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