Ahsaas pyar ka khubsurat sa - 18 in Hindi Novel Episodes by ARUANDHATEE GARG मीठी books and stories PDF | एहसास प्यार का खूबसूरत सा - 18

एहसास प्यार का खूबसूरत सा - 18




शाम को सभी दोस्त अपने फेवरेट रेस्टोरेंट में डिनर करते है , जहां सभी रेहान को भी बुला लेते हैं और आज की अंशिका की बातों को याद कर सभी हंस रहे होते हैं , और रेहान कुछ ज्यादा ही खुश हो रहा होता है । अब रेहान क्यों इतना ज्यादा खुश क्यों हो रहा था, ये तो वक्त ही बताएगा । पर उसके साथ - साथ ही सभी खुश थे ।

कायरा का भी दिन आज अपनी फैमली के साथ ही बीत जाता है , बचे हुए समय में वह अपनी सब्जेक्ट्स की बुक्स पढ़ कर अपना समय निकाल देती है । रात के साढ़े नौ बजे उसकी आंखें लग जाती है , शायद दवाई का ही असर था , जो रात के ग्यारह , साढ़े ग्यारह तक जग कर पढ़ने वाली लड़की आज दो घंटे पहले ही नींद के आगोश में जा चुकी थी ।

सुबह से ले कर अभी तक का समय तो आरव के लिए मस्ती मजाक कर निकल जाता है । पर जब आरव सोने के लिए अपने रूम में आता है, तो कमरे के अंधरे और खाली पन में खुद को अकेला पाता है । वह सोने की भरपूर कोशिशें कर रहा होता है, पर सो नहीं पा रहा होता है । क्योंकि दिनभर भले ही उसे कायरा की याद न आई हो , पर कमरे के अकेले पन में उसे कायरा की बहुत याद आ रही थी । कल की तरह ही आज भी उसके आंखों से नींद कोसों दूर थी ।

कुछ देर सोचने के बाद वह बेड के बगल मे रखी टेबल से अपना फोन उठाता है और कायरा से बात करने की , उसका हाल - चाल जानने की कोशिश में, फोन करने की सोचता है । क्योंकि जब से वह कायरा को उसके घर ड्रॉप करके आया था , तब से लेकर अभी तक उसने न ही एक भी बार कायरा को देखा था , और न ही एक भी बार उसकी आवाज़ सुनी थी । जिसकी वजह से वह बेचैन हुआ जा रहा था । वह फोन का लॉक जैसे ही ओपन करता है , उसकी नज़र फोन की फ्रंट स्क्रीन में नज़र आ रहे टाइम पर जाती है , जिसमें रात के ग्यारह बज चुके थे । आरव जब टाइम देखता है तो खुद से कहता है ।

आरव - नहीं आरव...... , नहीं..... ! रात बहुत हो चुकी है , वह सो चुकी होगी , वैसे भी उसे रेस्ट की जरूरत है । मुझे इस वक्त उसे कॉल कर डिस्टर्ब नहीं करना चाहिए । सुबह तो कॉलेज आएगी ही, तब पूछ लूंगा उसकी तबीयत के बारे में ।

इतना कह कर वह अपने मोबाइल को वापस टेबल पर रख देता है और बिस्तर में आंखें बंदकर लेट जाता है , लेटने के बाद उसके खयालों में एक बार कायरा का फिरसे समावेश हो जाता है । थोड़ी देर सोचते हुए ही आरव को रूही की कहीं बात याद आती है , जब वह कह रही थी के " आखिर कायरा ने कॉफी क्यों पी??? " , फिर उसके बाद उसे मीशा की कहीं बात भी याद आती है के " चाए और कॉफी का टेस्ट अलग होता है , तो जब इसने पी होगी तो इसे पता तो चला होगा के वह चाए नहीं कॉफी है " । सहसा ही आरव अपनी आंखें खोल देता है और खुद से करवट बदलते हुए कहता है ।

आरव - रूही और मीशा के कहने का मतलब था तो सही । कायरा को इतना तो पता चला ही होगा , के वह जो पी रही है , वह चाए है या कॉफी । ( दिमाग पर जोर डालते हुए ) कहीं कायरा ने जान बूझ कर कॉफी तो नहीं पी ???? ( बिस्तर से उठ कर बैठते हुए ) नहीं .. नहीं .... नहीं ... कायरा अपनी जान , जानबूझ कर खतरे में नहीं डालेगी । वो भी तब , जब अभी कुछ दिन पहले ही वह बहुत बड़े हादसे का शिकार होते - होते बची हो । ( आंखें बड़ी - बड़ी कर सोचते हुए ) अगर उस दिन सड़क पर जब कायरा स्कूटी से गिरी थी , वहां अगर उसे कुछ हो जाता तो......, ( घबराते हुए ) नहीं ,,,,, नहीं ,,,,,, आरव ( अपने गालों पर थपकी देते हुए ) तू ये क्या सोच रहा है !!!???? ऐसा कुछ नहीं होता , और न ही हुआ है और आगे भी कभी नहीं होगा , क्योंकि मैं ऐसा होने ही नहीं दूंगा । कायरा ने गलती से ही कॉफी पी है , और उस गलती की वजह मैं हूं , सिर्फ मैं। अगर आज कायरा को कुछ हो जाता तो मैं खुद को कभी माफ नहीं कर पाता , ( रूम की खिड़की पर आकर आसमान की ओर देखते हुए ) आपका बहुत - बहुत शुक्रिया भगवान , जो आपने मेरी कायरा को बचा लिया । ( चांद की ओर देखते हुए ) जिस तरह तुम अपनी चांदनी का बहुत अच्छे से खयाल रखते हो , उसे तरह मैं भी कायरा का बहुत अच्छे से खयाल रखूंगा , भले ही हमारा रिश्ता हमेशा सिर्फ दोस्ती का ही क्यों न बना रहे , पर तब भी दोस्त होने के ही नाते से सही , मैं आजके बाद उसे एक खरोंच भी नहीं आने दूंगा । ( वापस बिस्तर पर आकर दोबारा लेटते हुए ) मैं कल ही कायरा से अपने किए की माफी मांग लूंगा । क्योंकि ये सब हुआ तो मेरी ही वजह है , तो अपनी गलती की माफी मांग कर मैं ही इसे ठीक भी करूंगा , क्योंकि अगर मैंने कायरा से अपने किए की माफी नहीं मांगी , तो हमेशा मेरे दिल में एक टीस सी उठती रहेगी , के आखिर मैंने उसका चाए का कप, अपने कॉफी के कप से क्यों चेंज किया ।

यही सब सोचते - सोचते आरव की आंखें भारी होने लगती हैं। इस वजह से वह थोड़ी ही देर में सो जाता है ।

सुबह सभी दोस्त अपने कॉलेज की फेवरेट जगह , कैंटीन में बैठे , कायरा , रूही और रेहान का वेट कर रहे होते हैं । पर जब बहुत देर तक वे नहीं आते तो , सौम्या सभी से कहती है ।

सौम्या - मुझे लगता है , हमें ऑडिटोरियम चलना चाहिए । इस तरह से वेट करने से हमें कुछ हासिल नहीं होगा । जितने भी लोग है, कम से कम उतने ही चल कर अपनी प्रैक्टिस स्टार्ट करते हैं । वे सब जब भी आएंगे , और हमें यहां नहीं देखेंगे तो खुद ही समझ जाएंगे , के हम सभी ऑडिटोरियम में है , और अगर नहीं समझेंगे , तो फोन तो करेंगे ही ।

शिवानी - हां गाईस , सौम्या ठीक कह रही है , इस तरह से वेट करते हुए , पूरा टाइम निकल जाएगा , और हम आज प्रैक्टिस भी नहीं कर पाएंगे ।

सभी सौम्या और शिवानी की बात से सहमत होते हैं । और अपने - अपने बैग्स उठाकर प्रैक्टिस के लिए ऑडिटोरियम चले जाते हैं । वहां जाकर , मीशा अकेले ही अपने पुराने स्टेप्स की प्रैक्टिस करने लगती है , मीशा को देख राहुल भी अकेले ही प्रैक्टिस करने लगता है । पर आरव हाथ में अपना मोबाइल लिए बार - बार टाइम को देख रहा होता है । और बेसब्री से कायरा का इंतजार कर रहा होता है , साथ ही उसकी नजर बार - बार गेट की ओर भी जा रही थी , इस इंतेज़ार में के कायरा अभी ही आ जाएगी । वह बेचैनी से कभी मोबाइल की तरफ तो कभी गेट की तरफ देख रहा होता है ।

कायरा और रूही को आज घर से निकलने में देर हो गई थी , इस लिए दोनों ही एक - दूसरे से कॉन्टैक्ट कर, देरी से ही कॉलेज जाने वाली थीं । रेहान को आज मार्केट में कुछ काम था , तो वह भी लेट ही कॉलेज आने वाला था । थोड़ी देर बाद रूही कॉलेज पहुंचती है , और पार्किंग में अपनी स्कूटी को लगाकर जैसे ही मुड़ती है, वैसे ही कायरा अपनी स्कूटी लिए उसके स्कूटी के बगल में आती और , और वहीं रूही के स्कूटी के बगल में पड़ी खाली जगह पर अपनी स्कूटी पार्क करती है । दोनों ही साथ में पार्किंग एरिया से बाहर आती है और एक दूसरे से बातें करते हुए कहती है ।

कायरा - आज बहुत लेट हो गए यार । मैं आज सुबह उठने में लेट हो गई थी, इसी लिए तुझे कॉल किया था ।

रूही ( कहीं खोई हुई सी ) - हमारे घर का तो रोज का है , पर आज कुछ ज्यादा ही हो गया ।

कायरा ( हैरानी से ) - मतलब !!????

रूही ( सकपकाते हुए ) - क... क..... कुछ ......., कुछ नहीं ......।

कायरा - तो फिर तूने ऐसा क्यों कहा , के हमारे घर का तो रोज का है ? जबकि तू तो डेली टाइम पर आ जाती है ।

रूही ( अपने आपको कवर करते हुए ) - अरे , हमारा ध्यान कहीं और था तो इस लिए कुछ भी बोल गए ।

कायरा - हम्मम , अच्छा बता क्यों लेट हुई आज तू????

रूही - तू तो जानती है न , घर में सुबह से बहुत काम होते हैं , और आज मां सा को उठने में लेट हो गया था , इसी वजह से आज घर में नाश्ता लेट बना और फिर सभी भाई सा , भाभी सा , और बापू सा भी लेट हो गए । और हम भी आज इसी वजह से लेट हो गए ।

रूही क्षत्रीय परिवार से थी , इसी वजह उसके यहां राजपूतों वाले शब्द बोले जाते थे । रूही दोस्तो के साथ रहते - रहते हम को मैं कभी - कभी बोल लेती थी , पर अपने घर वालो को हमेशा सा लगा कर ही बोलती थी । ये शायद उसके घर की परम्परा भी थी, साथ ही बड़ों को आदर देने का तरीका और रिवाज़ भी ।

कायरा - हम्मम।

बात करते - करते दोनों कैंटीन में पहुंचती है । वहां किसी को भी न पाकर दोनों हैरान होती है। रूही वहां पर काम कर रहे लड़के छोटू से सभी के बारे में पूछती है ।

रूही ( छोटू को आवाज़ देते हुए ) - छोटू भैया , ज़रा इधर आना तो...।

छोटू ( भाग कर रूही और कायरा के पास आते ही साथ कहता है ) - का हुआ दीदी ??? हमका कहे बुलाईं??!!!

छोटू उत्तरप्रदेश से था , यहां वह काम करने के लिए ही रहता था । रूही उससे कहती है ।

रूही - आपने हमारे दोस्तों को देखा क्या ???

छोटू - हां , अभी हियां ही तो बैठे रहे सब ।

रूही - तो फिर आपने उन्हें कहीं जाते हुए देखा ???

छोटू ( ऑडिटोरियम की ओर इशारा करते हुए ) - ऊ तरफ गए है ऊ लोग ( रूही से ) का हुआ दीदी , कोनो समस्या है का ????

रूही - नहीं भैया , हम दोनों आने में आज लेट हो गए है , इसी वजह से हम दोनों उन सभी को ढूंढ रहे हैं ।

छोटू - कोनो बात नहीं दीदी , आप लोग कछु लेंगी ???? ऑर्डर लिखें आपका ????

कायरा - नहीं छोटू भैया , हमें कुछ नहीं चाहिए । आप जाइए , हम भी ऑडिटोरियम ही जा रहे हैं ।

छोटू कायरा की बात सुनकर अपने काम में लग जाता है और रूही कायरा से कहती है ।

रूही - चल हम भी चलते हैं।

कायरा - हम्मम।

दोनों ही कैंटीन से निकल कर जैसे ही ऑडिटोरियम जाने को मुड़ती है , तभी रेहान आ जाता है और दोनों से कहता है ।

रेहान - कहां जा रही हो तुम दोनो ? ( कैंटीन की ओर देखते हुए ) बाकी सब कहां है ???

रेहान की आवाज़ सुन दोनों रुक जाती है और कायरा रेहान से कहती है ।

कायरा - वो हम दोनों आज लेट हो गए हैं, तो शायद बाकी सब भी हमारा वेट करते - करते थक गए थे , इसी लिए सभी प्रैक्टिस के लिए चले गए होंगे । हम दोनों भी ऑडिटोरियम ही जा रहे हैं ।

रेहान - हम्मम।

रूही - पर तुम यहां क्या कर रहे हो ?

रेहान ( मुस्कुराते हुए ) - मैं भी आज तुम दोनो की तरह ही लेट हूं । चलो मैं भी साथ चलता हूं ।

रूही और कायरा - हम्मम।

तीनों ही ऑडिटोरियम की ओर बढ़ने लगते हैं , रेहान आगे - आगे और कायरा व रूही उसके पीछे - पीछे। तीनों ही बातें करते हुए जा रहे होते है, तभी कायरा अचानक से रुक कर तेज़ आवाज़ में कहती है ।

कायरा - रुको।

रेहान पीछे मुड़ कर कायरा के पास आता है और रूही भी कायरा के पास खड़ी हो जाती है । दोनों ही एक साथ कायरा से हैरानी के साथ पूछते है ।

रेहान और रूही - क्या हुआ??? क्यों रोका तुमने हम लोगों को ???

कायरा ( रेहान से उसके दाहिने हाथ की तरफ इशारा करते हुए कहती है ) - रेहान अपना वो वाला हाथ आगे करो।

रेहान कायरा की बात सुन घबरा जाता है , और हिचकिचाते हुए अपना हाथ आगे करता है । कायरा उसके हाथ को देखती है, तभी रूही उससे कहती है।

रूही ( हैरानी से ) - क्या बात है कायरा ? तुम रेहान के हाथ को ऐसे क्यों देख रही हो ????

कायरा - रूही कल क्या था ???

रूही ( तपाक से ) - कल रक्षाबंधन था ।

कायरा ( रेहान से ) - तो फिर तुम्हारी कलाई सूनी क्यों है रेहान ????

रेहान झटके से अपना हाथ पीछे कर लेता है और रूही समझ जाती है, के कायरा क्या कहना चाह रही थी । रेहान कोई जवाब नहीं देता, तो रूही अपने शब्दों में जोर देते हुए कहती है ।

रूही ( रेहान से ) - रेहान कायरा ने कुछ पूछा है । जवाब दो उसके सवाल का।

रेहान ( उदास चेहरे के साथ कहता है ) - मेरी कोई बहन नहीं है । मामा की जो लड़की है , वह हमेशा से अपनी नानी के यहां रही है , इस लिए मुझे राखी बांधने वाला कोई भी नहीं है, मेरे घर में।

इतना कहते - कहते रेहान की आंखे भीग जाती है , पर वह अपने आंसुओं को रोक लेता है, ताकि उसके आंसू कायरा और रूही को न दिख सकें । पर उसका उदास चेहरा कायरा और रूही से नहीं छुपता है । कायरा रेहान से कहती है ।

कायर ( हैरानी से ) - और ये बात तुमने कभी हमें क्यों नहीं बताई ???

रेहान ( उदासी के साथ ) - तुम लोगों को आए अभी वक्त ही कितना हुआ है ? और सभी ब्वॉयज दोस्तों को ये बात पता है ।

रूही - और सौम्या , शिवानी और मीशा को पता है ???

रेहान - नहीं , मैं हर एक इंसान से अपनी पर्सनल लाइफ के कोई भी पन्ने शेयर नहीं करता ।

कायरा - तो फिर हमसे क्यों शेयर किया ??? और उन्हें क्यों नहीं बताया ????

रेहान - तुम लोगों ने मेरा हाथ देख कर पहचान लिया , के मेरी कलाई सूनी है , पर उन लोगों ने शायद कभी इस बात पर ध्यान ही नहीं दिया , और न ही उन्होंने एक दोस्त के हक़ से भी मुझसे कभी पूछा । शायद उन्हें पता है , इस लिए वे मुझे हर्ट नहीं करना चाहती थीं।

कायरा - हो सकता है , पर अगर आज से पहले उन्होंने हमारी तरह तुमसे ये सवाल कर लिया होता , तो शायद तुम्हारी कलाई आज सूनी नहीं रहती ।

रेहान ( सवालिया निगाहों से ) - मतलब क्या है तुम्हारा कायरा ????

कायरा ( मुस्कुराते हुए ) - मतलब ये है रेहान , के आज से मैं तुम्हारी बहन और तुम मेरे भाई । और आज के बाद किसी भी रक्षाबंधन में तुम्हारी कलाई सूनी नहीं रहेगी ।

रेहान भीगी पलकों में भी मुस्कुरा देता है । पर इस बार उसकी भीगी पलकें कायरा और रूही से नहीं छुपतीं । उसकी भीगी पलकें देख कायरा और रूही के आंखों में भी पानी आ जाता है , और दोनों ही एक - दूसरे को देख इशारों में कहती हैं के "आज उन दोनों ने बहुत ही नेक काम किया है , एक नया रिश्ता जोड़ कर ", तब रूही भी कायरा से चंचतला के साथ इशारों में कहती है के " मैं भी पीछे नहीं रहूंगी , मैं भी इस रिश्ते का हिस्सा बनूंगी " , रूही की आंखों की चंचलता को देख कायरा मुस्कुरा देती है । तभी रेहान कायरा से कहता है ।

रेहान ( मुस्कुराहट के साथ ) - कायरा , तुम नहीं जानती , तुमने आज मेरी ज़िन्दगी में उस कमी को पूरा किया है जिसके शायद मैं काबिल नहीं था , तभी शायद भगवान ने मुझे कोई बहन या भाई नहीं दिए ।

रूही ( मुस्कुराते हुए ) - क्योंकि रेहान, अगर भगवान तुम्हें भाई और बहन दे देते, तो हम जैसी बहनों की तो तुम्हें जरूरत ही नहीं रहती ।

रेहान ( एक बार फिर सवालिया निगाहों से रूही को देखते हुए ) - हम का मतलब !!!! मैं कुछ समझा नहीं रूही ।

रूही ( मुस्कुराते हुए रेहान के पास आती है और उसका हाथ पकड़ कर अपना हाथ उसके ऊपर रखकर कहती है ) - रेहान , मेरी ज़िन्दगी में भाई का रिश्ता होकर भी नहीं है । और शायद मैंने कभी इस बात को माइंड भी नहीं किया ।

कायरा ( रूही की बात बीच मे काटते हुए ) - रूही , तू ये क्या कह रही है ??? तेरे बड़े भाई हैं तो ।

रूही ( अपनी बात को संभालकर कायरा से मुस्कुराते हुए कहती है ) - हां हैं ना , पर मुझे एक और भाई चाहिए ( रेहान की ओर देखते हुए ) रेहान मैं भी तुम्हें राखी बांधना चाहती हूं , क्या तुम इजाजत दोगे , इस रिश्ते को कायम रखने के लिए ।

रेहान ( मुस्कुराते हुए रूही और कायरा को साइड से हग करता है , और कहता है ) - जब मेरी इतनी अच्छी बहनें , मेरे ज़िन्दगी में अधूरे रिश्ते को पूरा करना चाहती हैं , मेरे दिल में हमेशा से अपनी बहन की खाली पड़ी जगह को पूरा करना चाहती हैं, तो भला मैं उन्हें कैसे मना कर सकता हूं ???

कायरा और रूही मुस्कुरा देती है और रेहान से अलग होकर अपने बैग से राखी निकालने लगती है । रेहान उनसे पूछता है।

रेहान - तुम दोनो के पास राखी कहां से आई????

कायरा ( मुस्कुराते हुए ) - मैं जब राखी लेने गई थी , तो एक राखी मेरे बैग में ही रह गई थी , जिसे मैंने आज सुबह देखा और अनजाने में ही उसे अपने बैग से नहीं हटाया , क्योंकि शायद ये रिश्ता आज पहले से ही बंधने वाला था । शायद इसी लिए उस वक्त मुझे ये राखी अपने बैग में रखे रहने का खयाल आया ।

रेहान मुस्कुरा देता और रूही की ओर देखता है । रूही मुस्कुराते हुए कहती है ।

रूही - ये राखी मैं , आज सुबह घर के मंदिर में चढ़ाने वाली थी , क्योंकि कल मैं भूल गई थी। पर आज़ लेट होने की वजह से मुझे फिर से याद ही नहीं रहा । और ये यहां तक चली आई मेरे साथ । अभी जब राखी की बात हुई तब मुझे याद आया ।

रूही की बात से कायरा और रेहान दोनों ही मुकुरा देते हैं । कायरा कैंटीन से चॉकलेट लाती है , दोनों ही रेहान को राखी बांध कर चॉकलेट खिलाती हैं , बदले में रेहान भी उन्हें चॉकलेट का एक टुकड़ा तोड़ कर खिलाता है । उसके बाद रेहान शगुन के लिए पैसे निकालने लगता है और दोनों की ओर पैसे बढ़ा देता है । कायरा और रूही दोनों ही मुस्कुराते हुए एक दूसरे को देखती है , और फिर कायरा रेहान से कहती है ।

कायरा - रेहान , हमें इसकी बिल्कुल भी जरूरत नहीं है ।

रेहान - पर ये तो शगुन है ।

कायरा - हमें शगुन के रूप में ये तुम तब देना , जब तुम इसे खुद से कमाने के लायक बन जाओ । इसके बदले तुम हमें कुछ और शगुन भी से सकते हो ।

रेहान - क्या ?????

कायरा ( फिर से रूही को मुस्कुरा कर देखती है और रूही उसे कहने का इशारा करती है , कायरा रेहान से कहती है ) - शगुन के रूप में हमें , हमेशा के किए तुम्हारा साथ एक बड़े भाई के रूप में चाहिए । और ये जो रिश्ता आज हम लोगों ने बनाया है , यह कभी न टूटने का वादा चाहिए । क्या तुम हमें ये वादा दोगे रेहान ???

रेहान ( मुस्कुरा देता है , कायरा और रूही अपनी हथेली आगे करती है , तो रेहान अपने दोनो हाथो से उनकी हथेलियों मे अपनी हथेली रख कर कहता है ) - ये मेरा तुम दोनों से वादा है , मैं कभी अपने भाई होने के फर्ज़ से पीछे नहीं हटूंगा । और हमेशा तुमदोनो की बड़े भाई की तरह रक्षा करूंगा । साथ ही यह रिश्ता इस ज़िन्दगी में तो कभी नहीं टूटेगा ।

तीनों ही मुस्करा देते है , तभी कायरा फिर से रेहान से कहती है ।

कायरा - रेहान , मैंने तुम्हें बड़े भई का दर्जा दिया है , तो तुम्हारे बड़े भई होने के नाते मैं, तुम्हें भैया बुला सकती हूं ???

रेहान ( मुस्कुरा देता है और कहता है ) - भैया थोड़ा ओल्ड फैशन हो चुका है , तुम मुझे भाई बोलना , क्योंकि आजकल यही ट्रेंड में है।

रेहान की बात सुन रूही और कायरा हंस देते हैं और कायरा रेहान से कहती है ।

कायरा - ठीक है मैं आपको भाई ही बुलाऊंगी । अब ठीक है रेहान भाई ????!!!

रेहान भी हंसते हुए हां में सिर हिलाता है , और तीनों ही ऑडिटोरियम की ओर बढ़ जाते हैं , जहां जाने कब से आरव कायरा का , राहुल रूही का और बाकी सब इन्हीं तीनों का इंतेज़ार कर रहे होते हैं......... ।

क्रमशः

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