इन्तजार एक हद तक - 10 - (महामारी) in Hindi Social Stories by RACHNA ROY books and stories Free | इन्तजार एक हद तक - 10 - (महामारी)

इन्तजार एक हद तक - 10 - (महामारी)

रमेश बोला देखो हमें बहुत ही जरूरी है वो आशा से मिलना।

अमित बोला अरे मामाजी आप।

मामा जी बोले अच्छा एक बार मुझे डिन से मिलना है।

फिर कुछ देर बाद डिन के आफिस में ये लोग पहुंचे गए।

मामा जी ने कहा नरेंद्र सिंह जी मैं एक काम से आया था।
नरेंद्र सिंह ने कहा हां बोलिए।

फिर रमेश ने सारी बात बताई।
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नरेंद्र सिंह ने बताया कि वो आशा तो बहुत पहले ही छोड़ दिया था।
पर ठीक है मैं उर्मी ला का पता करवाता हूं इसके लिए तीन दिन का समय चाहिए।
आप लोगों को एक बार फिर आना होगा।

फिर सभी वहां से निकल गए।

रमेश को जैसे लग रहा था कि उस अस्पताल में ही कुछ संकेत मिल जाएगी।


फिर तीनों वापस आ गए।

रमेश ने कहा पता नहीं यहां भी मायुसी मिलेगा।

अमित बोलें देखो रमेश हिम्मत मत हारो कुछ ना कुछ होगा।


फिर सभी एक साथ आना खाने बैठे और फिर बातचीत भी होने लगी।

मामी जी ने कहा रमेश बेटा देखो सब ठीक हो जाएगा।

फिर खाना खा कर दोनों ही सो गए।

शाम को मौसम बहुत ही सुहाना हो गया था हल्की बारिश हो रही थी।
मामी जी ने कहा चलो सब चाय और पकोड़े खा लो।
सभी चाय के साथ गर्मागर्म पकौड़ों खाने लगे।
रमेश ने कहा वाह इस मौसम में पकौड़ी बहुत ही स्वादिष्ट बना है।


फिर तीन दिन बाद मामा जी आफिस से लौटने पर बताया कि आशा का पता चला है वो एक आश्रम में है।
कल हमें निकलना होगा।

फिर रमेश ने हाथ जोड़कर कहा भगवान से प्रार्थना किया कि मुझे परी लौटा दे।

अमित बोलें हां अब तो परी बड़ी हो गई होगी।

फिर किसी तरह रात निकल गई रमेश सो नहीं पाया और जल्दी से तैयार हो बैठ गया।

फिर सभी लोग जल्दी तैयार हो गए।

नाश्ता में पुरी छोले बना था पर रमेश खा नहीं सका।

मामी जी बोली अरे रमेश थोड़ा सा खा लो बहुत दूर जाना है।

रमेश ने कहा हां ठीक है पर ज्यादा नहीं खा सकता।

फिर सभी निकल गए।
मामा जी की गाड़ी में बैठ कर तीनों निकल गए।

काफी देर तक जाते रहे बहुत ही दूर था वो आश्रम।

फिर दो घंटे बाद ये लोग नीमा आश्रम पहुंचे।

फिर आफिस में जाकर मामा जी ने आशा नर्स के लिए पुछा तो उन्होंने कहा कि कमरा नं नौ में जाओ।

फिर तीनों पहुंच गए।
देखा कि एक बेड पर एक औरत लेटी हुई है।

रमेश ने कहा आशा नर्स हो।

वो औरत ने कहा हां मैं हुं पर तुम कौन हो?
रमेश ने फिर सब कुछ खुल कर बताया।

आशा ने बहुत देर तक सोचा और फिर बोला
हां उर्मी ने एक लड़की जना था और फिर वो मर गई थी।
बच्ची बहुत ही कमजोर थी तो उसको चाइल्ड केयर सेंटर में तीन महीने तक थी। वो अस्पताल में ही रही थी।
और फिर पता नहीं।।।

रमेश ने कहा ऐसा कैसे हो सकता है? आप अगर उसी अस्पताल में रही थी तो वो कहां चली गई?

आशा ने कहा अरे मुझे क्या पता?

रमेश ने कहा फिर भी कुछ तो पता होगा?

आशा ने कहा पता नहीं मुझे।। मुझे आराम करना है।

रमेश बहुत ही मायुस सा खड़ा रहा।।

फिर सभी वहां से निकल गए।

अमित ने कहा मामा जी यहां पर बात नहीं बनी।
रमेश ने कहा मुझे लगता है कि ये कुछ छुपा रही है।

मामा जी ने कहा हां वो लग रहा है।

फिर सभी वहां से निकल गए।
मामा जी ने कहा देखो अब घर चलते हैं।

रमेश ने कहा खाली हाथ मैं नहीं लौटना चाहता हूं।

सभी घर वापस लौट आए।
खाना खा कर सो गए।
रमेश ने फिर सपना देखा कि अम्मा रो रही थी। और कुछ इशारा कर रही थी।
रमेश उठ खड़ा हुआ।। अमित बोला अरे रमेश क्या हुआ?

रमेश ने कहा अम्मा ने सपने में कुछ तो संकेत दे रही है।पर क्या ये नहीं समझ पा रहा हूं।

अमित ने कहा अरे भाई तुम चिंता मत करो सब ठीक हो जाएगा।

सुबह फिर बैठ कर चाय नाश्ता करने लगे।
मामा जी ने कहा देखो रमेश हमें थोड़ा सा समय दो। मुझे लगता है कि वह आशा हमें पुरी जानकारी नहीं दे रही है।

रमेश ने कहा हां मुझे भी ऐसा लगता है।।

अमित ने कहा पर हमारा नौकरी भी है।

मामा जी ने कहा दो दिन रूक जाओ।

नाश्ता करने के बाद सभी निकल गए।


अमित और रमेश सामने के एक मार्केट में जाकर कुछ खरीदारी करने लगे।
रमेश ने रत्ना और रवि के लिए कुछ नये कपड़े, खिलौने और चन्दू के लिए एक कुर्ता ख़रीदा।


फिर वहां से घर आ गए।
फिर दोपहर का खाना खा कर सो गए।

शाम को चाय के टाइम मामा जी आकर बोले कि देखो कल हमलोग को निकलना है।

रमेश ने कहा हां मामा जी कुछ पता चला क्या?

मामा जी ने कहा हां रमेश एक दम्पत्ति ने चार साल पहले उसी अस्पताल से एक बच्चे को लिया था और आशा ने ही दिया था उसके बदले आशा को बहुत सारा पैसा भी मिला था।
पर एक समस्या है कि वो लोग का पता नही मिला पर नाम पता चला। उमेश कुमार चौरसिया।


रमेश ने कहा ओह तो आशा ने झूठ बोला।

रमेश मन में सोचा कि हे भगवान सब कुछ ठीक करना।

फिर सभी इत्मीनान से टीवी देखने लगे।

फिर रात को डिनर में गर्म गर्म आलू के परांठे और चटनी के साथ सभी खाने लगे।



फिर रमेश अपने कमरे में जाकर सो गए।
फिर आधी रात रमेश एकाएक उठ कर बैठ गया और फिर बोला। अरे अम्मा अब तुम ने एक घर क्यों दिखाया।

रमेश ने देखा कि अचानक से एक कापी गिर गया। और फिर रमेश ने वो कापी उठाया
और फिर रमेश अचानक उठ खड़ा हुआ और एक पेन लेकर उस कापी के पन्ने में कुछ जल्दी जल्दी लिखने लगा।

फिर रमेश जैसे अब जाकर उसकी तन्दा टुट गई।

रमेश एकदम से डर गया था। फिर किसी तरह से सो गए।

सुबह उठते ही सबसे पहले रमेश ने उस कापी पर देख तो उसका हाथ कांपने लगा।
और फिर वो कापी गिर गया।
अमित बोलें अरे क्या हुआ दोस्त।।

रमेश ने कहा अरे अरे ये ये ये सब देख क्या हो रहा है।
अमित ने कहा क्या हुआ।
वो कापी उठाया और देखा कि उमेश कुमार चौरसिया लिखा है।
४०/६७ सब्जी बाजार। घंटाघर चौक।

अमित ने कहा अरे ये तो नाम कुछ सुना सा लग रहा है


रमेश ने कहा हां ये तो मामा जी ने कहा था।।

अमित ने कहा हां पर ये पता तेरे पास कहा से आया?

रमेश ने फिर वो सब कुछ बताया जो उसके साथ हुआ।।
अमित ने कहा ओह माई गॉड।।
फिर वो कापी ले जाकर मामा जी को दिया और फिर सब बात बताई।

दूसरे दिन सुबह सबने मिलकर नाश्ता किया और निकल गए।

 घर का पता था  उनके पास तो जल्दी ही घंटा घर पहुंच गए।
एक दुकानदार से पता पुछ कर सब उमेश कुमार चौरसिया के घर पहुंच गए। और रमेश ने दरवाजा खटखटाया।

एक औरत आकर दरवाज़ा खोली। और फिर बोली किसको चाहिए? 
रमेश बोला अरे उमेश जी रहते हैं यहां?
औरत बोली हां पर सहाब तो शादी में गए हैं।

रमेश इधर उधर देखने लगा।
मामा जी बोले अच्छा तो घर में कौन है?
औरत बोली अरे अम्मा जी है।
मामा जी बोले अच्छा हमें मिलना है।

वो औरत बोली अच्छा आईए।।
फिर सभी अन्दर पहुंच गए।
औरत ने बैठक में उनको बैठने को कहा।

और फिर वो अन्दर चली गई।

एक कमरे में जाकर वो औरत बोली अरे अम्मा जरा बाहर आओ देखो तो कौन आएं हैं?
जानकी देवी ने कहा अच्छा अब कौन आ गए।

फिर बैठक में उपस्थित अमित, रमेश और मामा जी बोले अरे आप उमेश की मां है?
जानकी देवी ने कहा हां,पर क्या बात है?
रमेश ने कहा अरे हमें उमेश जी से कुछ पुछना है?
जानकी देवी ने कहा का पुछना है?
रमेश ने कहा मैं उर्मी का पति हुं।

जानकी देवी ने कहा कौन उर्मी?

तभी वहां एक पांच साल की बच्ची आकर बोली ओ अम्मा चल रोटी खा ले।

रमेश उस नन्ही सी बच्ची को देखता रहा और एक बार में उसे लगा उसकी आंखें बिल्कुल उर्मी की तरह।। क्या ये ही परी है?

जानकी देवी अरे कलमुंही मना किया था यहां मत आ सबके सामने,मनहुस कही की।।

अरे बिमला कहा मर गई?

वो औरत आकर बोली अरे क्या हुआ?
जानकी देवी ने कहा किन लोगों को घर में बैठा दिया।। उमेश को पता चला तो इस बार तेरा पगार गया।

मामा जी बोले अच्छा फिर हम चलते हैं।
तीनों उठ कर निकल गए।
बिमला दरवाजा बंद करने लगी तो रमेश ने पांच सौ का नोट दिखाया और बाहर आने को कहा।।

बिमला भी धीरे से बाहर आ गई।

और बोली क्या बात है सहाब।।

रमेश बोला कब से यहां काम कर रही हो।



क्रमशः।

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Suresh

Suresh 4 months ago

Nabina Chakarborty

So,,,,,,beautiful story

B N Dwivedi

B N Dwivedi 4 months ago

Sonal

Sonal 4 months ago

Sushma Singh

Sushma Singh 4 months ago