Unfortunate Love - 32 in Hindi Love Stories by Veena books and stories PDF | अनफॉरट्यूनेटली इन लव - ( कैंसल दी ब्रेक अप ?_१) 32

अनफॉरट्यूनेटली इन लव - ( कैंसल दी ब्रेक अप ?_१) 32

उस रात के बाद नियान को एक नजर देखना गन का शौक बन गया था। जब भी उसे वक्त मिलता वो उसके कॉलेज पोहोच जाता। या फिर उसके घर। दूर गाड़ी खड़ी रख बस नियान को ढूंढता। ऐसे ही हफ्ता बीत गया। अब गन का सब्र जवाब देने लगा था। पहले ही उसका खुद के गुस्से पर काबू नही था। ऐसे में बार बार सताने वाली नियान की याद उसे तड़पा रही थी। लड़को की लापरवाही आग में घी डालने का काम करती।

" ज्यादा बिजी हो आज कल ?" गन के भाई डीटी ने उस से पूछा।

" कुछ काम ना हो तो ट्रेनिंग पर ध्यान दो।" गन ने उस पर ज्यादा ध्यान देना जरूरी नही समझा।

" आंटी कब से फोन कर रही है। तुमने नही उठाया तो उन्होंने मुझे कॉल किया। उन्हे हार चाहिए अगले हफ्ते। कॉल कर के बता दो कैसे भेजोगे।" डीटी ने अपना फोन गन के पास फेंका।

अब ये नई परेशानी थी, वो हार गन पहले ही नियान को दे चुका है। भला अब उसे वापस कैसे लाएं। उसने अपनी सौतेली मां को फोन लगाया। " हैलो। वो मुझसे हार खो गया।"

" कैसे मतलब ? मुझे क्या पता। एअरपोर्ट तक मेरे पास था। जब घर आ कर देखा, हार वहा नही था। मैं आपको सारे पैसे वापस कर दूंगा। फिक्र मत कीजिए।"

ज्यादा बात ना कर उसने फोन रख दिया। डीटी को सारी बाते पता थी। लेकिन उसने पूछताछ करना जरूरी नही समझा। यहां उसी हार की बात चल रही थी जिसे गन ने नियान को दिया था, क्योंकि नशे में उसने वो हार मांगा था। या यूं कह लीजिए ये वो पहली चीज़ थी, जो उसने गन के पास मांगी।

आज नियान का गाना रिकॉर्ड किया जाने वाला था। सोलो और बाकी के लोक पहले ही वहा मौजूद थे। गन को पहले ही देर हो चुकी थी, लेकिन फिर भी नियान वहा आने वाली थी। ये उसे देखने का एक बहाना हो जाता। वो उठा फ्रेश हुवा और रिकॉर्डिंग कंपनी जाने निकला। जैसे ही वहा पोहचा उसने नियान का गाना सुना। उसकी आवाज में आज भी दर्द था, क्या वो अभी भी उसे भूल नहीं पाई ?

गन ने कैंटीन से २० ज्यूस की बॉटल ली। उस में से एक पे नियान के लिए एक मैसेज लिखा और सारी बॉटल रिकॉर्डिंग रूम में भिजवा दी।

" सर आपके हैंडसम दोस्त ने भेजा है।" सोलो की सेक्रेटरी ने ज्यूस की बॉटल्स टेबल पर रखते हुए कहा।

" मेरा हैंडसम दोस्त, हान शंग्यान भी अजीब है। ये भिजवा सकता है, लेकिन खुद नही आ सकता।" सोलो ने मैसेज लिखी हुई बॉटल देखी। वो तुरंत समझ गया की वो बॉटल किस के लिए है। उसने नियान को वो बॉटल थमा दी।

" तुम ये कर सकती हो। मुझे तुम पर पूरा यकीन है। "

नियान ने मैसेज देखा और वो उसे ढूंढने बाहर की तरफ भागी। वो कही नही था। उसने बिल्डिंग के बाहर आकर रास्ते पर उसकी गाड़ी तक को ढूंढा, पर वो उसे नही दिखा। नियान की आखों में आसूं थे। गन दूर से उसे देख रहा था, वो उसके पास जाना चाहता था। लेकिन नही जा सकता था क्यों कि ये दोनो का निर्णय था। उनका अलग होना ही एक दूसरे के लिए सही था। वो रात भी गन ने नियान के कॉलेज के बाहर गुजारी।

दूसरे दिन सुबह गन को क्लब में ना पाकर सु चैन उसे ढूंढने गई, तब उसे गन अपने कमरे में बुखार में तड़पता मिला। सु चैन ने डॉक्टर बुलाने की जिद्द की, पर गन ने मना कर एक दिन की छुट्टी ले ली। शाम को जब डीटी वापस आया, सु चैन ने उस से बात की।

" देखो, मुझे बताओ। कुछ परेशानी है क्या उसे ? मैंने उसे ऐसे कभी नही देखा। वो उदास लग रहा है ? उपर से बुखार में है। जाओ अपने भाई से बात करो।" सु चैन।

डीटी गन के कमरे में गया,

" अजीब है नही। २ करोड़ किसी को एक दिन में बीमार कर सकते है क्या ?" उसने मज़ाक में पूछा।

" अगर हमदर्दी नही दिखा सकते तो, चुपचाप चले जाओ।" गन ने कहा।

" दादाजी ने तुम्हे घर बुलाया है।" डीटी।

" बिल्कुल नहीं। पहले ही मेरा सर दर्द कर रहा है। ऐसी हालत में मैं उनसे नही निपट सकता। उन्हे मना कर दो।" गन।

" मैने उन्हे समझाया। उन्होंने कहा अगर तुम शाम तक घर नहीं पोहचे तो कल सुबह वो क्लब पोहोच जाएंगे। निर्णय तुम्हारा है।" डीटी गन को अकेला छोड़ वहा से जाने लगा।

" सुनो" जैसे ही डीटी मुड़ा गन ने अपनी गाड़ी की चाबी उसकी तरह फेंकी। " इसमें गैस भरवा दो। फिर घर चलेंगे।"

शाम को डीटी ने क्लब आकर गन को कॉल किया। जैसे ही गन नीचे आया डीटी ने उसे चाबी देने की कोशिश की, लेकिन गन ने मना कर दिया। " तुम चलाओ आज गाड़ी।" और फिर गन पैसेंजर सीट पर बैठ गया।

" कितनी अजीब बात है, ना बिना गैस के वो गाड़ी यूनिवर्सिटी पार्किंग में कैसे पोहचि? बता सकते हो।" डीटी। " और वो वॉचमैन तुम्हारे बारे में पूछ रहा था। मानो सदियों से तुम्हे जानता हो।"

" मैंने सुबह ही कहा था ना मेरे सर में दर्द है। बस गाड़ी चलाओ।" गन ने खिड़की से बाहर देखते हुए कहा।

" तुम्हे देख के कोई भी बता देगा, के तुम अपने ब्रेक अप से गुजर रहे हो।" डीटी ने हंसते हुए कहा।

गन ने तुरंत आयने में अपनी शक्ल देखी, " सच में, मैं कोई दिल टूटा हुआ आशिक लग रहा हूं क्या ?"

डीटी ने सर हिलाते हुए हा में जवाब दिया, " रहने भी दो। देवदास अवतार मे भी तुम हैंडसम लगते हो।"

आखिरकार दोनो भाई घर पोहचे,

" हान शंग्यान बैठो यहां पे।" घर में कदम रखते ही दादाजी ने फरमान सुनाया।

" जी। कहिए।" गन

" तुम्हारी मां का फोन आया था। तुमने उनका हार गुमा दिया। देखो मुझे सच बताओ। तुम्हारा क्लब किसी मुश्किल से गुजर रहा है, तो में उसमें अपना पैसा लगाने के लिए तैयार हूं। पर तुम उनका हार वापस कर दो।" दादाजी ने गन से कहा।

" दादाजी। मां का हार चुराकर क्लब चलाने के लिए मैं क्या आपको १६ साल का कोई बच्चा लगता हु ? वो हार सच में मुझसे गुम हो गया है। मैं जल्द ही उन्हे पूरे पैसे वापस लौटा दूंगा। फिक्र मत कीजिए। और मेरा क्लब अभी जापान में ज्यादा अच्छा काम नही कर पा रहा है। लेकिन नॉर्वे, अमेरिका और एशिया में अभी भी टॉप पर है। मुझे आपके फाइनेंस की कोई जरूरत नही है। शुक्रिया, अब आप जा कर आराम किजिए खाना तैयार होते ही में आपको बुला लूंगा।" गन।

अपना ध्यान नियान से हटाने की कोशिश मे गन ने दो लोगो के लिए १० लोगो का खाना बनाया। टेबल पर सजाया खाना देख दादाजी चकित हो गए।

" क्या कोई मेहमान आने वाला है ?" उन्होंने डीटी से पूछा। डीटी ने ना में सर हिलाया, लेकिन वो वजह जानता था।

" ये आप दोनो के लिए है।" गन अपने कमरे में जाने लगा।

" तुम्हे खाना नही खाना ?" दादाजी ने पूछा।

" नही। मेरी मीटिंग है। खाना खा कर आराम किजिए।" उन दोनो से विदा ले वो अपने कमरे में चला गया।

अगले दिन सुबह सुबह जब डीटी जॉगिंग से घर आया, दादाजी टीवी पर न्यूज देख रहे थे। जिसमे नियान की यूनिवर्सिटी दिखाई जा रही थी।

" ये। इसी जगह नियान पढ़ती है ना ?" उन्होंने डीटी से पूछा। डीटी ने फिर से सिर्फ हा मे सर हिलाया। वो जानता था की अगर उसने कुछ कहा तो दादाजी उस से और सवाल पूछेंगे। जिसमें वो झूठ नही बोल पाएगा। और वही हुवा।

" वु बाई। तुम्हारा भाई अचानक इतना परेशान क्यों लग रहा है ? और नियान ने इतने दिनो से कोई कॉल क्यो नही किया बताओ दादाजी को ?" दादाजी ने अपने सबसे प्यारे पोते से पूछा।

" जी। मुझे पूरी बात नही पता। पर शायद दोनो में कोई झगड़ा हुआ है।" और तुरंत डीटी अपने कमरे में भाग गया।

कुछ ही देर में गन अपने कमरे से बाहर आया। उसने एक ग्लास में दूध लिया और एक ब्रेड ली। अपने नाश्ते की शुरुवात बस करने ही वाला था की दादाजी की आवाज आई, " हान शंग्यान।"

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