Ahsaas pyar ka khubsurat sa - 40 in Hindi Novel Episodes by ARUANDHATEE GARG मीठी books and stories PDF | एहसास प्यार का खूबसूरत सा - 40

एहसास प्यार का खूबसूरत सा - 40





राजवीर कायरा की बात सुनकर हैरान था । तो उसे ऐसे हैरान होकर खुद को देखते हुए , कायरा ने जब देखा । तो गुस्से से उसे घूरकर, मुस्कुराते हुए कहा।

कायरा ( राजवीर से ) - क्यों ....??? तुमने ऐसा नहीं किया था ? उस आदमी के इयर पिन में कैमरा फिट नहीं किया था तुमने, जिससे तुम लाइव, हमारे और तुम्हारे गुंडों के बीच हो रही हाथापाई, देख रहे थे ????? अब जब तुमने देखा ही था , तो बताओ , कैसा लगा तुम्हें लाइव शो ???? अच्छा लगा ........!!!!! तुमने जो एक्सपेक्ट किया था , वो तुम्हें वहां पर देखने को मिला ???? या फिर तुम्हारी ये प्लानिंग बेकार ही चली गई ??? बोलो ......राजवीर ......। बताओ हमें , कि तुम्हारी ये हमें डराने की प्लानिंग , जो कि तुमने मेरे ऊपर हमला करके रची थी , सक्सेस हुई या नहीं ???

राजवीर अब भी हैरान था । कायरा की बातें सुनकर , उसके पसीने छूटने लगे थे । पर उसने खुद को संभाला और नासमझ बनते हुए कहा।

राजवीर - व्हाट आर यू सेइंग कायरा .......???? मैंने ......, मैंने ऐसा कुछ भी नहीं किया है । इन्फेक्ट मुझे तो इस बारे में कुछ पता भी नहीं है ।

कायरा ( फीका मुस्कुराते हुए, राजवीर को देखकर कहती है ) - ओह राजवीर .....। मुझे तुमसे ये उम्मीद नहीं थी, कि तुम झूठ भी बोलोगे । मुझे लगा था कि शायद , अगर तुममें ये सारी प्लानिंग करके लोगों से बदला लेने की क्षमता है , तो खुल कर अपने कर्मों को भी एक्सेप्ट करने की क्षमता तो होगी ही तुममें। मुझे लगा था तुम बहादुर हो , निडर हो । ढ़िढ़ोरा पीट कर , छाती तान कर , अपनी बहादुरी के किस्सों की फेहरिस्त बताने का जिगर रखते हो , जो भले ही किए तुमने लोगों के पीठ पीछे हों.....। ( राजवीर की तरफ हल्का सा झुककर ) पर तुम तो डरपोक निकले..... मिस्टर राजवीर तिवारी। तुम्हारे पास तो अपने किए गए कर्मों को एक्सेप्ट करने की भी हिम्मत नहीं है ।

आरव ( हैरानी से कायरा को देखते हुए ) - ये तुम क्या कह रही हो कायरा ...???? और तुम्हें ये सब कैसे पता है ???? मैंने तो तुम्हें नहीं बताया , और तो और ये कैमरे वाली बात तो मैं भी नहीं जानता.... ।

कायरा ( आरव की तरफ मुड़कर कहती है ) - पर मैं जानती हूं आरव .......। आपने भले ही सिर्फ वो देखा हो , जो इस राजवीर ने आपको दिखाया था । ( राजवीर को गुस्से से देख कर ) पर मैंने वो भी देखा है , जो इसने हमसे छुपाने की कोशिश की थी ।

आरव ( असमंजस की स्थिति में ) - व्हाट डिड यू से.....?? प्लीज डीटेल में बताओ ।

कायरा ( अपने हाथों की घड़ी बनाकर , सोफे में आराम से बैठ कर कहती है ) - जब मैंने ,कल रात खुद को उन गुंडों से प्रोटेक्ट करने के लिए , उन्हें मारा था । तब उस आदमी , जिसे आप लास्ट में पकड़ने की कोशिश कर रहे थे और जिसने आपको ये बताया, कि इन सबके पीछे इस राजवीर का हाथ है , उसे मैंने आपसे पहले ही खुद को प्रोटेक्ट करने के लिए , पीटा ......., आई मीन मारा था । तभी उसका नकाब एक साइड से हल्का सा, कान से सरककर नीचे आ गया था । तभी मेरी नज़र उसके कान में पहने हुए इयरपिन पर गई । पहले तो मैंने उस पर ध्यान नहीं दिया , पर जब हल्की सी रोशनी के कारण उसकी चमक रिफ्लेक्ट होकर मुझ तक पहुंची , तो मुझे थोड़ा आश्चर्य हुआ । मैंने उसे ध्यान से देखा तो पाया , कि वो छोटा सा मिनी कैमरा है । मुझे ये समझते देर नहीं लगी , कि जिसने भी ये हमला मेरे ऊपर करवाया है , वो पक्का ये सारा नज़ारा अपने मोबाइल या फिर लेपटॉप या फिर किसी भी गैजेट की स्क्रीन पर देख रहा होगा ।

तभी उस आदमी ने अपने नकाब को एक साइड से पूरा हटा कर , फिर से बांधा । जब वह नकाब दोबारा बांध रहा था , तब मेरी नज़र उसके पूरे ईयर पर गई , जिसमें व्हाइट कलर का ब्लूटूथ स्पीकर लगा हुआ था। अब ब्लैक पर व्हाइट, ब्राइट कलर होने के कारण हमेशा जल्दी ही नज़र आ जाता है । इस लिए मुझे वो ब्लूटूथ स्पीकर तुरंत नजर आ गया । उसे देख कर मुझे , ये तो पता चल गया, कि इस आदमी को हो ना हो इसका बॉस मॉनिटर कर रहा है। पर जैसा कि मैंने बताया , व्हाइट कलर ब्लैक पर जल्दी ही दिख जाता है , उसी के चलते मेरी नज़र बाकी के नकाब पोश गुंडों पर गई , तो मैंने पाया कि सभी के कानों में वही सेम ब्लूटूथ स्पीकर लगा हुआ है। मुझे ये समझते भी देर न लगी , कि इनका बॉस सिर्फ मेरे सामने खड़े आदमी को ही नहीं , बल्कि सारे गुंडों को मॉनिटर कर रहा है । उन सारे गुंडों ने इस राजवीर के कहे मुताबिक ही हमारे ऊपर सारे हमले किया । चाहे वो हमला , मेरे ऊपर चाकू से हो , आप पर गन से हो या फिर दोबारा से मेरे ऊपर हॉकी स्टिक से हो...... । इतना सब करवाने के बाद भी, इसने उस आदमी से ये बुलवाया , कि ये हमला हम दोनों को सिर्फ डराने के लिए गया है.... । शर्म आनी चाहिए राजवीर तुम्हें , ऐसा करते हुए ........। और रही बात ये , कि मुझे कैसे पता चला कि ये सब किसके कहने पर हो रहा है , ( आरव के पास आकर , उसके सामने नजरें झुका कर कहती है ) तो आरव......, मैंने आपकी , आदित्य , राहुल, नील और रेहान भैया की बातें सुन ली थी ।

आरव ( हैरानी से ) - व्हाट.......????

कायरा ( आरव की तरफ बेबसी से देखते हुए ) - आई एम् सॉरी आरव...... । मैं जानती हूं, कि आप मुझे ये सब नहीं बताना चाहते थे । पर तब भी मैंने आप लोगों के आपस का डिस्कशन, सुन लिया था । जब आप आदित्य लोगों को बता रहे थे , कि उस आदमी ने राजवीर के बारे में क्या कहा । तब मैं आपकी कार के पीछे खड़े होकर, आप लोगों की बातें सुन रही थी ।

आरव ( कायरा को घूरते हुए ) - पर तुमने ये सब मुझे पहले क्यों नहीं बताया ????

कायरा ( जमीन की ओर देखते हुए ) - मैं नहीं चाहती थी कि आपको पता चले , कि जो बात आप मुझसे छुपाना चाहते हैं , वो मुझे पता है। ( आरव की ओर एक नज़र देख कर , फिर इधर - उधर देखते हुए ) आई मीन ......., मैं ये बात खुद राजवीर के सामने कहना चाहती थी । ( राजवीर की ओर गुस्से से देखते हुए ) ताकि इसे भी पता चले , कि एक ये ही शातिर दिमाग इस दुनिया में पैदा नहीं हुआ है । इसके अलावा और भी लोग हैं , जो इससे भी ज्यादा चालाक और शातिर हैं ।

आरव ने सुना तो कोई रिक्शन नहीं दिया और कुछ सोचते हुए अपनी चेयर पर जाकर बैठ गया । कायरा और राजवीर हैरान थे , कि इतनी बड़ी बात सुनकर भी आरव ने कोई रीक्शन नहीं दिया और न ही कुछ कहा। राजवीर ने जब आरव को चुप देखा, तो खुद के प्रोटेक्शन में कहा।

राजवीर - देखो......, तुम न झूठ बोल रही हो । मैंने ऐसा कुछ भी नहीं किया है ।

कायरा ( राजवीर को घूरते हुए ) - इतना सब मेरे मुंह से सुनने के बाद भी तुम ये एक्सपेक्ट कर रहे हो , कि मैं झूठी हूं .....। हाऊ चीप राजवीर तिवारी .......। तुम्हें तो झूठ बोलने का सर्टिफिकेट मिलना चाहिए ।

राजवीर ( फीका सा मुस्कुराकर, चेयर से उठ कर कायरा के नजदीक जाकर कहता है ) - मान लो......, ये सब मैंने ही करवाया हो । तब भी तुम मुझे ये बताओ , कि तुम ये साबित कैसे करोगी ???? कि ये सारी प्लानिंग मेरी ही थी???

कायरा ( राजवीर की आंखों में गुस्से से देखते हुए ) - कुछ ही सेकंड्स में, मैं ये साबित कर सकती हूं, कि मेरे ऊपर तुमने ही जानलेवा हमला करवाया है और फिर अपने आदमी से ये कहलवाया , कि ये हमला सिर्फ मुझे और आरव को डराने के लिए था..... । बताओ , क्या विचार हैं तुम्हारे .....???? तुम कहो तो साबित कर दूं.....?????

राजवीर ने सुना तो वह तुरंत कायरा से, दो कदम दूर पीछे की ओर हट गया । जबकि आरव ने तुरंत कहा ।

आरव - नो......., नो कायरा । तुम ऐसा कुछ नहीं करोगी ।

कायरा ( आरव जी तरफ पलटते हुए ) - बट व्हाई....???? क्यों मैं साबित न करूं , कि ये गुनहगार है । क्यों मैं साबित न करूं , कि इसने मुझ पर अटैक करवाया और वो भी सिर्फ अपने एंटरटेनमेंट के लिए...... । आखिर ये हमें डरा कर साबित क्या करना चाहता है ??? और इतना सब होने के बाद भी , क्यों आप मुझे रोक रहे हैं , इसे सबक सीखाने से ???

आरव - उसका रीजन मैं तुम्हें अभी नहीं दे सकता । पर प्लीज ......, इस वक्त तुम ऐसा कुछ भी नहीं करोगी ।

राजवीर ने आरव की बात सुनी, तो मुस्कुरा दिया और दोबारा चेयर पर बैठ गया । पर कायरा को उसका मुस्कुराना, अपने सीने में काटें की तरह चुभने लगा । कायरा ने घूरकार राजवीर को देखा और आरव से कहा ।

कायरा - ओके आरव सर.....। कीजिए शौक से इसे आप प्रोटेक्ट । पर अगर इसने दोबारा ऐसा कुछ करने की सोची भी , तो मुझसे बुरा इसके लिए कोई नहीं होगा । ( मोबाइल की ओर इशारा करते हुए ) और अपना ये न्यू मोबाइल फोन, किसी जरूरतमंद को गिफ्ट कर दीजिए । जो ये ले पाने में सक्षम न हो । पर मुझे इसकी न ही जरूरत है और न ही इसे लेने का शौक । तो आपका मोबाइल फोन आपको ही मुबारक हो आरव सर.......। ( राजवीर की ओर देख कर ) और तुम ......, आज तो बच गए । पर दोबारा नहीं बच पाओगे......, मार्क माय वर्ड्स एंड रिमेंबर दैट...... ।

इतना कह कर कायरा गुस्से से वहां से अपने केबिन की ओर बढ़ गई । राजवीर उसकी बात पर हैरान तो था , पर मुस्कुरा भी रहा था । ये सोच कर कि कायर उसके खिलाफ कुछ भी नहीं कर सकती । जबकि आरव की नजर सिर्फ, गुस्से से जा रही कायरा पर थी । तभी उसकी नजर कायरा की बांह पर गई , जिसमें हल्का सा ब्लड दिख रहा था । आरव को कायरा के बांह में ब्लड देखकर , ये समझते देर न लगी, कि कायरा ने न ही अपनी दवाई ली है और न ही अपनी चोट की ड्रेसिंग की है । उसने कायरा से ध्यान हटा कर , इंटरकॉम बजाया । जिससे रमेश ( पीयून ) भागते हुए आरव के केबिन में आया । उसे देख कर आरव ने कहा ।

आरव - रमेश......, जल्दी से फर्स्ट एड बॉक्स लेकर आओ और राजवीर की हाथ की चोट साफ कर , उसकी ड्रेसिंग करो । क्योंकि अपने दुश्मनों को बिना बात के चोट पहुंचाने की आदत मेरी नहीं है..... ।

राजवीर ने सुना तो उसका ध्यान अपनी हाथ की चोट पर पड़ा , जिससे खून अभी भी रिस रहा था । उसने तुरंत आरव की ओर देख कर कहा ।

राजवीर - इसकी कोई जरूरत नहीं है । मैं भी अपने दुश्मनों का एहसान अपने सिर पर पड़ने नहीं देना चाहता ।

आरव ( फीका सा मुस्कुराकर ) - ड्रेसिंग करवा लो राजवीर । क्या पता अगली बार तुम्हें चोट मेरी वजह से ही लगे और मैं मलहम की जगह तुम्हारे ज़ख्मों पर नमक छिड़कूं..... ।

राजवीर ( गुस्से से उठते हुए ) - हाऊ डेयर यू....???? तुम मुझे धमकी दे रहे हो ..?????

आरव ( पेपर वेट घुमाते हुए ) - यही समझ लो .......।

राजवीर - हिम्मत भी कैसे हुई तुम्हारी मुझे धमकाने की ।

आरव ( राजवीर की ओर देख कर ) - वैसे ही , जैसे तुम्हारी हिम्मत हुई कल रात हमें डराने की ।

राजवीर - तुम्हारी ओर से, इस तरह का मेरे साथ बिहेव , तुम्हें बहुत महंगा पड़ेगा आरव शर्मा ।

आरव ( फीका सा मुस्कुराते हुए ) - बिना कुछ किए , इतना कुछ महंगा पड़ चुका है मुझे । अब और ज्यादा, इस जमाने की महंगाई से क्या डरना ....!!!! वैसे तुम्हें बता दूं, कमी नहीं है मेरे पास पैसों की । जितनी भी महंगाई हो, मैं तब भी आसानी अपनी चीज़ खरीद लूंगा और अपने दिमाग के सही यूज से , अपनी चीज़ों को अपना भी बना लूंगा ।

राजवीर - मैं तुम्हें ऐसा करने नहीं दूंगा । कायरा सिर्फ और सिर्फ मेरी होगी । सिर्फ मेरी .......।

इतना कह कर राजवीर गुस्से से पैर पटकते हुए चला जाता है । उसके, आरव के केबिन से बाहर निकलते ही , ऑफिस के सारे लोग उसे ही घूरने लगते हैं । राजवीर गुस्से में उन्हें एक नज़र देखता है और फिर ऑफिस से बाहर चला जाता है ।

इधर राजवीर के खुद के केबिन से जाते ही , आरव उसे ऑफिस से बाहर की ओर जाते हुए देखता है और मुस्कुराकर कर खुद से कहता है ।

आरव - शायद तुमने वो कहावत नहीं सुनी है राजवीर , कि गरजने वाले बादल कभी , बरसते नहीं हैं । और तुम भी सिर्फ गरज ही सकते हो , बरसने की तो तुम्हारी औकात ही नहीं है ।

इतना कहकर आरव , तुरंत अपनी चेयर से उठता है और सीधे कायरा की केबिन कि ओर जाता है । जहां पर कायरा गुस्से में खुद से कहे जा रही थी ।

कायरा - समझते क्या हैं खुद को ??? वो जो कहेंगे वहीं सही होगा । अरे उस राजवीर की वजह से प्रॉब्लम मुझे हुई।सब कुछ मुझे सहना पड़ा , पर आरव ......, उनको तो इस बात से कोई फर्क ही नहीं पड़ता । पता नहीं क्यों उस आदमी को मुझसे प्रोटेक्ट कर रहे हैं । राजवीर से ज्यादा तो मुझे आरव पर गुस्सा आ रहा है । अगर मेरा बस चले तो , मैं राजवीर की जगह, आरव का सिर फोड़ दूं........।

कायरा ये सब बोल ही रही थी, तभी उसके केबिन का किसी ने दरवाज़ा ओपन किया और बिना नोक किए कायरा के केबिन में आ गया । कायरा की नजर जैसे ही दरवाज़े पर गई , उसके शब्द अपने आप उसके गले में अटक गए । क्योंकि वो जिसके बारे में इतना भला - बुरा कह रही थी , वो उसके सामने खड़ा था । जी हां , कायरा के सामने आरव खड़ा था । उसे देखते ही कायरा के मुंह में तो जैसे, ताला ही लग गया । वह बस चुप - चाप बुत बन कर, अपने केबिन में खड़ी रही । आरव, कायरा के केबिन में आया और कायरा को ऐसे बुत बने खड़े देखा, तो तुरंत कहा ।

आरव - क्या हुआ???? तुम मुझे ऐसे क्यों देख रही हो ???

आरव ने कायरा की कहीं हुई बातें नहीं सुनी थी । इस लिए उसे पता नहीं था, कि कायरा ने अभी - अभी उसके बारे में क्या कहा है । कायरा ने जब सुना तो झेंपते हुए कहा ।

कायरा ( जबरदस्ती मुस्कुराने की कोशिश करते हुए ) - कुछ ......, कुछ नहीं......। मैं तो बस ......., वो .......।

आरव - क्या........, क्या वो ????? ( कायरा को कुछ सूझा ही नहीं, कि वो आरव से क्या कहे , इस लिए वो चुप - चाप खड़ी हो गई । आरव ने जब उसे चुप - चाप खड़े देखा , तो बाहर से रमेश को बुलाते हुए कहा ) रमेश......., रमेश .....।

रमेश ( फटाफट कायरा के केबिन में एंटर होते हुए ) - जी...., जी साहब .... ।

आरव - फर्स्ट एड बॉक्स लेकर आओ ......, क्विक .....।

रमेश ने उसकी बात सुनी तो फटाफट केबिन से बाहर चला गया और कुछ सेकंड्स के बाद ही, फर्स्ट एड बॉक्स लेकर दोबारा कायरा के केबिन में हाज़िर हो गया । आरव ने उसके हाथ से फर्स्ट एड बॉक्स लिया और उसे जाने के लिए कहा । रमेश चला गया , जबकि कायरा हैरानी से आरव को देखते हुए बोली ।

कायरा - आपने ये क्यों मंगाया है ???

आरव ने कुछ नहीं कहा , बस हाथ में बॉक्स लिए कायरा की ओर अपने कदम बढ़ाने लगा । कायरा ने देखा , तो वह हैरान परेशान सी आरव को देखकर , अपने कदम पीछे की ओर बढ़ाने लगी । आरव उसकी ओर बढ़ता रहा और कायरा अपने कदम पीछे लेती रही । तभी कायरा के पीछे उसकी केबिन में रखा हुआ सोफ़ा आया और वह खुद को संभाल नहीं पाई और सोफे पर लड़खड़ा कर ही बैठ गई । आरव भी उसकी बगल में आकर बैठ गया। कायरा अब भी हैरान सी उसे देख रही थी । आरव ने बॉक्स सोफे के सामने रखी टेबल पर रखा और अपना हाथ कायरा की बांह की ओर बढ़ाने लगा । पर कायरा को कुछ और ही लगा, तो उसने तुरंत आरव को हाथ दिखाते हुए कहा ।

कायरा - खबरदार......, जो आपने अपने हाथ मेरी ओर बढ़ाए तो ...। मुझे ये सब पसंद नहीं है । न ही आप मुझे ऐसी लड़की समझिए, जो अपने बॉस के करीब आने की कोशिश करती हो । और अगर उसके बाद भी आप मेरे करीब आए , तो मैं शोर मचा दूंगी । जिससे आपके ऑफिस के सारे लोग यहां इकट्ठा हो जाएंगे , और फिर आप कुछ नहीं कर पायेंगे ।

आरव ने सुना तो , उसके हाथ कायरा की ओर बढ़ते - बढ़ते रुक गए । उसे एक बार फिर बुरा लगा , ये सोच कर कि कायरा उसे कितना गलत समझती है । उसने कुछ नहीं कहा और अपने हाथ एक बार फिर कायरा की ओर बढ़ा दिए । उसने अपने एक हाथ से, कायरा का ज़ख्म वाला हाथ पकड़ लिया। कायरा ने देखा तो चिल्ला कर कहा ।

कायरा - ये क्या कर रहे हैं आप ?????

कायरा ने जीन्स के साथ फूल स्लीव्स की कुर्ती पहनी हुई थी, साथ में एक साइड दुपट्टा डाला हुआ था । और उसकी स्लीव्स में ऊपर की तरफ डिजाइन बनी हुई थी , जिसमें पतली सी चैन लगी हुई थी । आरव ने उस चैन को ओपन करते हुए कहा ।

आरव - तुम्हारी चोट की ड्रेसिंग कर रहा हूं । जो तुमने मेरे लिए ही बचा कर रखी है..... ।

आरव के इतना कहते ही, कायरा की नजर अपनी बांह पर गई । जिसमें कल की चोट की वजह से हल्का - हल्का खून रिस रहा था और उसी वजह से उसकी स्लीव्स भी खराब हो चुकी थी । कायरा को ये देख कर याद आया, कि उसने कल रात के टेंशन के चलते, न ही दवाई ली है और न ही अपनी चोट की ड्रेसिंग की है । पर उसे आरव का यूं खुद की केयर करना अच्छा लग रहा था। वह अब अपनी चोट को भूल कर, एक टक आरव को देखने लगी। जो एक बार फिर उसके करीब था । आरव ने स्लीव्स की जिप ( चैन ) पूरी ओपन की, जो कायरा के कंधे तक थी । फिर उस पर लगी पट्टी को निकालते हुए, उसने कायरा से कहा ।

आरव ( बिना कायर की ओर देखे ) - मानता हूं कि तुम बहुत ब्रेव हो । पर इसका मतलब ये बिल्कुल भी नहीं है, कि तुम खुद का खयाल रखना ही भूल जाओ । कल से लेकर अब तक में, बारह घंटे से ऊपर का टाइम हो चुका है । पर तुमने अभी तक अपनी ड्रेसिंग नहीं की है । और मैं ये भी जानता हूं, कि तुमने अपनी मेडिसिन भी नहीं ली है । वरना अब तक तुम्हारा घाव, काफी हद तक , ड्राइ हो चुका होता ।

इतना कह कर आरव ने कायरा की ओर देखा , जो बस उसे ही देख रही थी । उसे तो शायद आरव की कही गई बातें, सुनाई ही नहीं दे रही थी । आरव ने उसे आवाज दी। पर कायरा को तो जैसे कुछ सुनाई ही नहीं दिया। आरव ने कायर की आंखों के सामने अपना हाथ हिलाया , तब कायरा को होश आया। उसने अपनी नज़रें नीची कर लीं , तो आरव ने कॉटन में डेटॉल लेकर कायरा के घाव को साफ किया। घाव पर डेटॉल लगते ही कायरा को, अपने घाव पर दर्द होने लगा, जिससे उसकी हल्की सी चींख निकल गई। तो आरव ने कायरा के चेहरे की ओर देखा , जिससे साफ पता चल रहा था, कि कायरा को काफी दर्द हो रहा है। आरव ने कायरा के चेहरे से अपनी नजरें हटा लीं और कायरा के घाव पर फूंक मारते हुए, उसे डेटॉल से दोबारा से साफ करने लगा। कायरा को उसके ऐसे फूंक मारने से, अब आराम मिल रहा था । उसने अपनी आंखें बंद कर ली और अपने बांह पर आरव की सासों की गर्मी और हाथों की हथेलियों का स्पर्श महसूस करने लगी । आरव ने जब उसे आंखें बंद किए हुए देखा, तो एक पल के लिए वो भी उसकी चेहरे की मासूमियत में खो गया। पर अगले ही पल उसने अपना ध्यान कायरा के चेहरे से हटा लिया और फिर बॉक्स से एक एंटीसेप्टिक क्रीम उठाई और कायर के घाव में लगा दी । जिससे कायरा को अपने घाव पर ठंडक महसूस हुई । उसने अब अपनी पलकें खोल दी । आरव ने बॉक्स से पट्टी उठाई और कायरा की बांह पर बांधते हुए उससे कहा ।

आरव - तुमने अपने घर में कल रात के बारे में और इस चोट के बारे में नहीं बताया है ना...!!!???

कायरा ने सुना तो हैरान हो गई , और खुद से मन ही मन आरव के चेहरे को देखते हुए कहा।

कायरा - इस बार भी आप मेरे बिना कुछ कहे ही सब कुछ समझ गए ना .....। क्यों आरव , ऐसा क्यों हो रहा है , कि आप मुझे इतना अच्छे से जानने समझने लगे हैं । जबकि हमें मिले तो शायद मुश्किल से एक महीना ही हुआ होगा। तब भी आप मेरी हर बात को बिना कहे ही समझ जाते हैं । क्यों आरव .....???? क्यों.....??? क्या हमारा कोई आपस में नाता है ??? या फिर कुछ और , जो शायद दुनिया की इस बेजुबान मोहब्बत से भी बढ़ कर है । जिसकी वजह से आप मुझे इतने अच्छे से जानने लगे हैं । और जिसकी वजह से मेरे न चाहते हुए भी हम , एक - दूसरे के इतने करीब आ जाते हैं । क्यों भगवान , क्यों ??? ये कैसा रिश्ता कायम कर रहे हैं आप हमारे बीच ??? जो दोस्ती और प्यार से भी बढ़ कर होता जा रहा है । एक ऐसा अनकहा रिश्ता आप हमारे बीच बांध रहे हैं , जिसे शायद मैं कभी निभा भी न पाऊं । हमारे बीच मोहब्बत है, ये मैं जानती हूं । पर मोहब्बत के अलावा भी हमारे बीच एक ऐसा रिश्ता बंधता जा रहा है , जो शायद जन्म - जन्मांतर का है। जैसे अगर हम एक दूसरे के साथ न रहे , तो कभी खुश नहीं रहेंगे । जैसे एक दूसरे के बिना हम अधूरे से हैं । ऐसी मोहब्बत तो सिर्फ कहानियों या फिर फिल्मों में देखने को मिलती है , असल ज़िंदगी में नहीं । पर मैं उसे हमारे बीच , क्यों महसूस कर पा रही हूं । क्या है भगवान ये ......???? कौन सा रिश्ता बांधते जा रहे हो भगवान, आप हमारे बीच .....????

आरव - तुमने कुछ कहा ????

कायरा ( धीरे से ) - नहीं.......। ( मन में ) अभी तक तो बिना कोई बात कहे समझ जाते थे , अब क्या मेरे मन में जो बातें चल रही है , वो भी इन्हें सुनाई देने लगी हैं??? ये कैसी मोहब्बत में बांध रहे हो भगवान हमें , जो जन्म - जन्मांतर के बाद बड़ी मुश्किल से , कुछ एक को ही नसीब होती है । और ये जानते हुए भी, कि मैं इसे निभा नहीं पाऊंगी , फिर भी आप हमारे बीच ऐसी गहरी मोहब्बत कायम कर रहे हैं .......!!!!!

आरव ( कायरा की मन की बात से अनजान , पट्टी बांध कर , जीप को वापस बंद करते हुए कहता है ) - मुझे पता है कायरा , कि तुम ये चोट और कल रात वाली सारी बातें, अपने घर वालों को बता कर परेशान नहीं करना चाहती हो । पर कभी - कभी कुछ बातें अपने घर वालों को बता देना चाहिए । हर बात उनसे छुपाना अच्छी बात नहीं होती है कायरा .....।

कायरा ( परेशानी के साथ ) - पर मेरे घर वाले पैनिक करेंगे आरव ।

आरव ( कायरा की तरफ देखकर, उसके दूसरे हाथ की हथेली को अपने दोनो हाथों में पकड़ते हुए कहता है ) - आई नो ...., करेंगे वो पैनिक.... । पर जब उन्हें पता चलेगा, कि उनकी बेटी कितनी तकलीफ में थी , पर उसने सिर्फ हमसे इस लिए सारी बातें छुपाई, कि हम परेशान न हो जाएं, तो उन्हें ये जान कर अच्छा नहीं लगेगा। उन्हें लगेगा कि उनकी बेटी , उन पर ट्रस्ट नहीं करती है । और वो तुम्हारे पैरेंट्स है कायरा । उनका हक़ बनता है तुम्हारी हर खुशी और हर ग़म के बारे में, सब कुछ जानने का । और एक वही हैं , जो हमें सारी समस्याओं से बाहर निकालने की क्षमता रखते हैं ।

कायरा ने सुना तो अपनी आंखें नीचे करके कहा ।

कायरा - जी....., आप सही कह रहे हैं । मैं मम्मा को घर जाते ही सारी बातें बता दूंगी ।

आरव ( मुस्कुराकर ) - वेरी गुड.....। वो तुम्हारे जन्म दाता हैं । अपने जन्म दाता से कुछ भी नहीं छुपाना चाहिए ।

कायरा - हम्ममम । ( मन में ) पर कुछ बातें न चाहते हुए भी छुपानी पड़ती हैं आरव , जो कि आपको भी बहुत जल्द ही समझ में आ जाएगी।

आरव ( बॉक्स टेबल पर रख कर , सोफे से उठते हुए कहता है ) - तुम्हारी मेडिसिन कहां है ???

कायरा - मेरे बैग में .....।

आरव - तुमने सुबह से कुछ खाया ??? ( कायरा ने मासूमियत से न में सिर हिला दिया , तो आरव ने आगे कहा ) चलो पहले लंच कर लो , फिर दवाई खा लेना ।

कायरा ( जमीन की ओर ताकते हुए ) - पर मैं आज जल्दी - जल्दी में , अपना टिफिन बॉक्स लाना भूल गई ।

आरव - तो कोई बात नहीं , चलो कैंटीन में चलकर खा लो।

कायरा ( आरव की ओर देखते हुए ) - पर मैं बाहर का ज्यादा नहीं खाती ।

कायरा सिर्फ आरव से दूर रहने के लिए ये सारे बहाने बना रही थी । जबकि भूख उसे भी बहुत तेज़ लगी थी । पर आरव ने भी आज ठान लिया था , कि वो कायरा को मेडिसिन खिला कर ही रहेगा। इसी लिए उसने कायरा का हाथ खींच कर, उसे सोफे से उठाया और कहा।

आरव - कभी - कभी तो खाती हो ना । तो चलो ,कभी - कभी समझ कर ही आज कैंटीन का खाना खा लो । वैसे मेरे ऑफिस के कैंटीन का खाना अच्छा बनता है। चलो तुम्हें आज टेस्ट करवाता हूं ।

अब कायरा के पास, आरव की बात सुनकर, उससे न कहने का, कोई ऑप्शन ही नहीं बचा । तो उसने आरव के साथ अपने कदम कैंटीन की ओर बढ़ा दिए । दोनों कायरा के केबिन के दरवाज़े तक पहुंचे ही थे , कि तभी आरव ने कायरा को रोका । और उसे अपनी ओर मुंह करके खड़ा किया । कायरा हैरानी से उसे देखने लगी । जबकि आरव ने कायरा के दूसरे कंधे पर डला हुआ दुपट्टा, कायरा की चोट वाली बांह के कंधे पर डाल दिया । जिससे कायरा की चोट की वजह से , उसकी जो बांह की स्लीव्स खराब हुई थी , वो ढंक सके। कायरा ने देखा तो मन ही मन मुस्कुराई । आरव ने कायर का हाथ पकड़ा और उसे कैंटीन ले गया। दोनों ने लंच किया और फिर आरव कायरा को लेकर दोबारा उसके केबिन में आ गया । वहां से उसने कायरा के बैग से उसकी मेडिसिन निकाली और रमेश से पानी मंगा कर उसे मेडिसिन खाने के लिए दी । कायरा ने मेडिसिन खाई और फिर अपने काम में लग गई । आरव ने भी उसके मेडिसिन खाते ही, अपने कदम अपने केबिन की ओर बढ़ा दिए ।

शाम के आठ बजे कायरा , अपने लिए दूसरा मोबाइल फोन लिए ,अपने घर पहुंची । मालती जी को छोड़ कर, सभी लिविंग रूम में ही थे । देवेश जी टीवी देख रहे थे , राधा जी रामायण पढ़ रही थी और अंश अपने नोट्स लेकर वहीं बैठा , अपने दोस्तों से फोन पर कुछ सवाल डिस्कस कर रहा था। मालती जी किचेन में डिनर तैयार कर रही थी , जो कि लगभग तैयार हो ही चुका था । कायरा ने डाइनिंग टेबल से, जग में रखा पानी , गिलास में लिया और उसे अपने साथ लेकर अपने रूम में आ गई । उसने पानी पिया और कपड़े चेंज कर, गिलास लेकर नीचे डाइनिंग के पास आ गई । उसने मालती जी की, डिनर को डाइनिंग टेबल पर सेट करने में मदद की और फिर सभी ने साथ में डिनर किया । सभी का डिनर खत्म हुआ तो सभी एक बार फिर लिविंग रूम में बैठ गए । मालती जी किचेन का काम समेटने लगी । कायरा ने जब सभी को लिविंग रूम में बैठे देखा, तो वह देवेश जी के पास आकर खड़ी हो गई । उसे अपने पास शांति से खड़े देख कर देवेश जी ने उससे कहा ।

देवेश जी - क्या हुआ बेटा ...???? कुछ कहना है ???

कायरा - हां......।

देवेश जी - तो कहो न बेटा ।

कायरा ( एक नजर दादी की तरफ देख कर, डरते हुए कहती है ) - वो पापा ......। इस सन्डे को मेरे दोस्त घूमने के लिए माथेरान जा रहे हैं । और वो लोग ..... , वो लोग चाहते हैं कि मैं भी उनके साथ जाऊं । मैंने मना करने की बहुत कोशिश की, पर उन लोगों ने साफ कह दिया, कि अगर मैं नहीं जाऊंगी , तो वो लोग भी घूमने नहीं जाएंगे ।

देवेश जी - कौन - कौन जा रहा है ???

कायरा - पापा ......, वो......, आरव सर....., आई मीन आरव..... , रूही , राहुल , आदित्य , सौम्या, नील , शिवानी , रेहान भैया और अंशिका । अगर आप मना करेंगे , तो मैं नहीं जाऊंगी पापा । पर बस प्रॉब्लम ये है, कि मेरे कारण शायद वो लोग भी नहीं जाएंगे .....।

देवेश जी ( मुस्कुराते हुए ) - पर तुम्हें जाने के लिए रोक कौन रहा है ??? तुम जाओ , घूमो फिरो और नई - नई जगह देखो । वैसे भी यही तो उम्र है , घूमने फिरने की और दोस्तों के साथ समय बिताने की । दुनिया को जानने की, करीब से परखने की । इस लिए जाओ बेटा , हमारी तरफ से तुम्हें इजाजत है ।

मालती जी ( किचेन से ही चिल्लाकर कहती हैं ) - हां बेटा, तू जा .....। अब जब अपने पापा की उम्र की होगी , तब थोड़ी ना जाएगी घूमने ।

कायरा ने सुना तो खुश हो गई , जबकि देवेश जी और अंश मालती जी की बात सुनकर हंस दिए । अंश ने भी हंसते हुए कहा ।

अंश - मम्मा सही कह रही है दी.....। आप तो जाओ घूमो फिरो , पार्टी करो । आखिर कॉलेज लाइफ होती ही है, एन्जॉय करने के लिए । मैं भी अपनी कॉलेज लाइफ खूब एन्जॉय करूंगा ।

कायरा ने उसकी बात सुनी तो मुस्कुरा दी । तभी एक तेज़ आवाज़ सभी के कानों में पड़ी , जो कि राधा जी की थी ।

राधा जी ( अंश को घूरकर देखते हुए कहती हैं ) - कहीं नहीं जाएगी तेरी दीदी । कॉलेज जाती है , नौकरी करती है । क्या ये कम है घूमने फिरने के लिए , जो अब और शहर से बाहर घूमने का शौक चढ़ा है तेरी दीदी को ।

देवेश जी ( राधा जी की पास आते हुए कहते हैं ) - पर क्यों मां...??? क्या दिक्कत है कायरा के शहर से बाहर जाकर, अपने दोस्तों के साथ घूमने फिरने में ????

राधा जी ( गुस्से से ) - बहुत दिक्कत है...... । हमारे घर की लड़कियां ऐसे बाहर घूमना फिरने नहीं जाती । ( कायरा की ओर गुस्से से भरी नजरों से देखते हुए ) लड़की है , लड़की की तरह रहे । ज्यादा हवा में उड़ने की कोशिश न करे । लड़कियों के पैर जमीन पर ही रहें , तो शोभा देते हैं ।

देवेश जी - ये आप किस जमाने में जी रही है मां ???? हमारी बच्ची आज के जमाने की है । जहां लड़कियों का बाहर घूमना , अपनी घर बाहर ऑफिस सभी जगह की जिम्मेदारियां निभाना आम बात है । और जब हमारी बच्ची बाहर जाएगी , तभी तो लोगों को पहचानेगी । जानेगी दुनिया के रास्तों को , और इस खूबसूरत दुनिया को देखेगी । क्या पता कल के दिन ऐसा कोई दिन आ जाए , जब इसे अकेले ही उन रास्तों पर चलना पड़े । इस लिए हमें अपने बेटियों को चार दिवारी में कैद करके नहीं , बल्कि उन्हें खुले आसमान में उड़ने देना चाहिए । और हमारी बेटी समझदार है , उसे अपनी मर्यादाएं अच्छे से पता ।

देवेश जी की लास्ट लाइन सुनकर , कायरा को अपने और आरव के वो सारे पल याद आने लगे, जिनमें दोनों काफी करीब थे । मालती जी भी दोनों मां बेटे की बहस सुनकर , किचेन का काम छोड़ कर , बाहर लिविंग रूम में आ गईं। राधा जी ने जब देवेश जी की बातें सुनी तो सोफे से उठ कर , गुस्से से तुरंत कहा ।

राधा जी - लड़कियां चार दिवारी के अंदर कैद रहें , तो ही अच्छी लगती हैं । इस लिए ये लड़की, शहर से बाहर घूमने नहीं जाएगी ।

देवेश जी - लेकिन मैं आपके फैसले से सहमत नहीं हूं मां । कायरा अपने दोस्तों के साथ घूमने जाएगी और ये मेरा आखिरी फैसला है ।

राधा जी ( एक नज़र गुस्से से चारों को घूरती है और फिर अपने रूम में जाते हुए ,बड़बड़ाते हुए कहती है ) - करो जिसे जो करना है । चढ़ाओ अपनी लड़की को अपने सिर पर । जिस दिन ये लड़की हमारे खानदान की इज्जत दांव पर लगाएगी ना , तब सबको समझ आएगा, कि मैं क्यों उसे रोकती रही , बाहर जाने से ।

कायरा ने राधा जी की बात सुनी , तो उसकी आंखों से आसूं का एक कतरा छलक आया । देवेश जी कायरा के पास आए और उसके सिर पर अपना हाथ रखते हुए कहा ।

देवेश जी - अपनी दादी की टेंशन तुम मत लो बेटा । हम उन्हें संभाल लेंगे । तुम बस अपने सपने पूरे करो और ज़िन्दगी को एन्जॉय करो । क्योंकि ये कॉलेज के पल बेटा ....., दोबारा कभी ज़िन्दगी में वापस नहीं आते ।

कायरा ने सुना , तो अपने आसूं साफ किए और फिर मुस्कुराकर अपने पापा के गले लग गई । अंश भी कायरा की देखा सीखी , देवेश जी के गले लग गया । मालती जी उन तीनो को ऐसे देख कर , बलैयां लेने लगी और फिर वापस किचेन में चली गईं ।

इधर रूही ने अपनी मां सा को अपने कमरे में बुलाया और फिर उनसे माथेरान जाने की बात कही । तो छोटी रानी सा सरिता ( रूही की मां सा ) ने कुछ देर सोचने के बाद कहा ।

सरिता जी ( रूही की तरफ देखते हुए ) - ठीक है बेटा । हम आपके बापू सा से इस बारे में कल शाम को बात करेंगे। पर हम उन्हें सच्चाई तो बता नहीं सकते , इस लिए हमें दूसरी तरकीब से उन्हें इस बात के लिए मानना होगा । जिससे आपके बापू सा और भाई सा , आपको जाने से रोक न पाएं ।

रूही ( सवालिया निगाहों से उन्हें देखते हुए ) - पर हमें क्या करना होगा मां सा ।

सरिता जी - हम आपको एक तरकीब बता रहें हैं । उसके अनुसार, हम जैसा - जैसा आपसे कहेंगे , आप वैसे - वैसे ही अपने बापू सा के सामने हमारी हां में हां मिलाइगा ।

इतना कह कर उन्होंने रूही को कुछ बताया । जिसे सुनकर रूही की आंखों में चमक आ गई । और फिर उसने अपनी मां सा की बात मान ली । सरिता जी ने रूही के माथे को, प्यार से अपने होठों से स्पर्श किया और फिर उसे सोने का कह कर अपने कमरे में आ गई । रूही सरिता जी की तरकीब सुनकर खुश थी । और फिर वह कुछ ही देर में सो गई ।

अगले दिन सौम्या, शिवानी और रेहान ने शॉपिंग जाने का प्लान बनाया , क्योंकि उसके दूसरे दिन ही संडे था और ये लोग फ्री थे , इस लिए इन लोगों ने पिकनिक की सारी तैयारीयों का जिम्मा, अपने सिर ले लिया । रूही ने इनके साथ जाने से मना कर दिया और वह क्लास अटैंड कर अपने घर चली गई । आरव , कायरा, आदित्य, नील और राहुल कॉलेज में क्लास अटेंड करने के बाद , अपने ऑफिस आ गए । सौम्या , शिवानी और रेहान , अंशिका को अपने साथ लेकर , शॉपिंग करने मॉल आ गए।

यहां ऑफिस पहुंचने के करीब एक घंटे बाद , आरव अपने केबिन से बाहर निकला । और उसी वक्त कायरा भी राहुल के केबिन में जाने के लिए , अपने केबिन से बाहर निकली । दोनों एक दूसरे की तरफ ही आ रहे थे । कायरा अपने हाथ में लिए हुए फाइल को देखने में बिज़ी थी , तो आरव अपने हाथ में लिए मोबाइल फोन की स्क्रीन में क्लाइंट का मैसेज देखने में बिज़ी था । दोनों का एक दूसरे के ऊपर ध्यान ही नहीं था । दोनों स्पीड से एक दूसरे के पास आ रहे थे । तभी एक झटके से कायरा आरव से टकरा गई । और वह जैसे ही गिरने को हुई आरव ने उसे संभाल किया । कायरा के हाथ में पकड़ी हुई फ़ाइल के सारे पन्ने , उसके हाथ से छूट कर ऊपर की ओर हवा में उड़ कर , एक - एक कर जमीन में गिरने लगे । और आरव के हाथ में पकड़ा हुआ मोबाइल भी, उसके हाथ से छूट कर जमीन में गिर गया । जबकि इन सब से बेखबर होकर , आरव ने कायरा को थाम रखा था ।

आरव का एक हाथ कायरा की पीठ पर और दूसरा हाथ उसके हाथ में था। और कायरा का एक हाथ आरव के सीने में और दूसरा हाथ आरव के हाथ में था । आरव के हाथों का स्पर्श अपने पीठ पर पाते ही , कायरा आरव की ओर देखने लगी और उसकी आंखों में खो गई । जबकि आरव उस वक्त कायरा के चेहरे में बिखरे हुए बालों के कारण , उसकी बालों के पीछे छुपी हुई आंखों में खो गया था । दोनों की धड़कने बढ़ी हुई थी । कायरा का हाथ आरव के सीने पर था , इस लिए उसे आरव की बढ़ी हुई धड़कने महसूस हो रही थी । दोनों एक दूसरे के बेहद करीब थे । आरव ने अपने एक हाथ से कायरा को थामे हुए ही , अपने दूसरे हाथ से, उसके चेहरे से बिखरे हुए बाल हटाए । पर अब वह कायरा की चेहरे की मासूमियत का दीदार करने से खुद को रोक नहीं पाया । जबकि अपने चेहरे पर आरव के हाथ का स्पर्श पाते ही कायरा ने अपनी आंखें बंद कर ली । और फिर जब खोली तो पाया, कि आरव उसे ही बड़े ही प्यार से देख रहा है । दोनों एक दूसरे की आंखों में इस कदर खोए , कि उन्हें अपने आस पास का होश ही नहीं रहा। इस वक्त उनके जहन सिर्फ एक गाना चल रहा था , जो उनके कानों को बखूबी सुनाई दे रहा था । तभी उन्हें महसूस हुआ कि ऑफिस में उन दोनों के सिवा कोई भी नहीं है ।

गाने की धुन सुनते ही आरव ने कायरा का हाथ थामा और उसकी आंखों में देखते हुए उसके करीब आया । तभी दोनों के कानों में गाने के बोल पड़े और आरव उसी को महसूस कर कायरा के चेहरे को अपने हाथों से स्पर्श करने लगा ।

तेरे दर पे आके थम गए
नैना नमाज़ी बन गए
एक दूजे में यूँ ढल के
आशिक़ाना आयत बन गए
मैं और तुम .........

कायरा आरव के हाथों का स्पर्श पाते ही , अपनी बढ़ी हुई धड़कनों के साथ अपने कदम पीछे की ओर लेने लगी । तो आरव ने उसका हाथ पकड़ कर , उसे अपने करीब खींचा । और फिर उसके हाथ की उंगलियों से , अपने हाथों के उंगलिओं को मिला दिया ।

कैसी दिल लगाई कर गए
रूह की रुबाई बन गए
खाली खाली दोनों थे जो
थोडा सा दोनों भर गए
मैं और तुम ......

कायरा , आरव के इस तरह खुद के करीब खींचने से, शर्मा गई और फिर मुस्कुराकर , आरव को हल्का सा धक्का देकर , वहां रखे डेस्क की ओर जाने लगी । तो आरव ने जाती हुई कायरा का हाथ पकड़ लिया और उसे वहीं रखी डेस्क से , उसकी पीठ लगा कर , कायरा की आंखों में देखते हुए , उसकी बाहों में अपना हाथ रख दिया।

चलो जी आज साफ़ साफ़ कहता हूँ
इतनी सी बात है मुझे तुमसे प्यार है
यूँही नहीं मैं तुमपे जान देता हूँ
इतनी सी बात है मुझे तुमसे प्यार है

आरव की नज़रों की कशिश से शर्माकर , कायरा ने अपनी नजरें झुका ली और फिर से आरव की पकड़ से निकलने का रास्ता खोजने लगी । तो आरव ने उसकी कमर पर हाथ रखा और उसे खुद के बिल्कुल करीब कर किया ।

चलो जी आज साफ़ साफ़ कहता हूँ
इतनी सी बात है मुझे तुमसे प्यार है
मुझे तुमसे प्यार है ..........

तभी अचानक से ऑफिस की लाइट चली गई । तो आरव ने , कायरा को छोड़ दिया । पूरा ऑफिस एरिया , अंधेरे में तब्दील हो गया । तो कायरा ने झट से वहां पर लगे , विंडो के पर्दों को ओपन कर दिया । जिससे सारे ऑफिस में एक बार फिर रोशनी हो गई । आरव ने जब देखा , तो खिड़की के पास खड़ी कायरा की ओर अपने कदम बढ़ाने लगा। आरव कायरा के पास आया और उसे विंडो के बगल की दीवार से टिका दिया और उसके कंधे को अपने होठों से स्पर्श कर लिया ।

लगे ना ये धूप ज़रूरी
लगे ना ये छाँव ज़रूरी
मिलते हैं इश्क़ ज़मीन पर
अब दो ही नाम ज़रूरी
मैं और तुम ..........

आरव ने कायरा को, उसके एक हाथ से पकड़ा और उसे घुमा कर , उसकी पीठ खुद की ओर की । आरव ने अपने दोनो हाथो से , कायरा को पीछे से अपनी बाहों में जकड़ लिया । कायरा ने अपने उदर पर , आरव के हाथों की पकड़ महसूस करते ही , अपनी आंखें मूंद ली और फिर अपना सिर, पीछे की ओर आरव के सीने से टिका दिया ।

अपना ख़ुदा भी होगा
अपना ही रब ले लेंगे
खुद की बना के दुनिया
ये ज़िन्दगी जी लेंगे
मैं और तुम ........

आरव ने कायरा के गर्दन में आ रही , उसकी जुल्फों को हटाया और उसकी , गर्दन से हल्के नीचे की तरफ अपने होठ रख दिया । आरव की इस हरकत से कायरा सिहर गई और वह झटके से पलट कर , आरव के सीने से लग गई और अपने चेहरे को आरव की बाहों में छिपा लिया । आरव उसकी इस हरकत पर मुस्कुराने लगा , और उसने कायरा के सिर पर अपने होठ रख दिए और कायरा को अपनी बाहों की पकड़ मजबूत करते हुए , सीने से लगा लिया ।

चलो जी आज साफ़ साफ़ कहता हूँ
इतनी सी बात है मुझे तुमसे प्यार है
यूँही नहीं मैं तुमपे जान देता हूँ
इतनी सी बात है मुझे तुमसे प्यार है
मुझे तुमसे प्यार है.......

कायरा ने महसूस किया, कि वो जाने कब से आरव के सीने से चिपकी हुई है । तो वह आरव के सीने से अलग हो गई । पर आरव ने उसे फिर से उसकी कमर से पकड़ कर , अपने सीने से लगा लिया । तो कायरा के चेहरे पर प्यारी सी मु्कुराहट तैर गई।

एक तुम एक मैं
तीजा मांगू क्या ख़ुदा से
दिल दूं जां दूं
क्या दूं इतना बता दे

अब कायरा एक बार फिर आरव से थोड़ी दूर हुई , पर आरव उसे अब उदास नज़रों से देखने लगा , जैसे कह रहा हो कि तुम्हारा मुझसे दूर जाना, मुझे पसंद नहीं है। कायरा ने उसके मनोभावों को भांप लिया , और उसके करीब आकर खड़ी हो गई । कायरा ने अपने दोनो हाथों की माला बना कर आरव के गले में डाल दी । तो आरव खुश हो गया और कायरा को देखकर मुस्कुराने लगा । कायरा ने आरव के चेहरे को अपने हाथ में लिया और फिर उसके मस्तक पर अपने होठों की छाप छोड़ दी। आरव तो कायरा के होठों का स्पर्श पाते ही खो सा गया । उसके शरीर में एक सिहरन सी दौड़ गई । उसने अपनी आंखें बंद कर ली, और कायरा की छुअन को महसूस करने लगा । कायरा ने आरव की आंखों को अपने होठों से स्पर्श किया । फिर उसने आरव के गालों पर अपने होठ रख दिए ।

तेरा मेरा रिश्ता है
साँसों से भी नाज़ुक
तुम सा हम सा दूजा
ना होगा ना हुआ रे
दो दिल सा एक सीने में है
जैसे मैं और तुम
अब दोनों हम एक जीने में है
जैसे मैं और तुम

आरव ने जब अपने गालों पर कायरा का स्पर्श महसूस किया , तो अगले ही पल उसने कायरा के कंधों पर अपना सिर रख दिया और कायरा को अपनी बाहों में समेट लिया । कायरा बड़े प्यार से आरव के सिर पर अपना हाथ फेरने लगी ।

जान से ज्यादा चाहा तुमको पिया रे
हरपल हरदम हमदम तुमको जिया रे ........

आरव कायरा के कंधे से अलग हुआ और उसे खिड़की से दूर ले जाने लगा। तो कायरा भी उसका हाथ पकड़े , मुस्कुराकर आरव की आंखों में देखते हुए, उसके साथ चलने लगी ।

आज साफ़ साफ़ कहता हूँ
इतनी सी बात है मुझे तुमसे प्यार है
यूँही नहीं मैं तुमपे जान देता हूँ
इतनी सी बात है मुझे तुमसे प्यार है

आरव ने कायरा को वहीं डेस्क के पास रखी हुई , चेयर में बैठाया और उसकी तरफ झुककर , बहुत ही प्यार से उसे देखने लगा । कायरा भी आरव की उस नीली और नशीली आंखों में खो गई ।

चलो जी आज साफ़ साफ़ कहता हूँ
इतनी सी बात है मुझे तुमसे प्यार है
मुझे तुमसे प्यार है....... ।

अगले ही पल कायरा से रहा नहीं गया और उसने बिना देर किए आरव के सीने पर अपना हाथ रख दिया । तो आरव ने उसे अपनी बाहों के घेरे में कस लिया, और उसका सिर अपने सीने में छुपा लिया । और उसके कंधे पर अपना सिर रख कर अपनी आखें मूंदे ली । और अपनी बढ़ी हुई धड़कनों के साथ, कायरा से कहा ।

आरव - आई लव यू कायरा.........। आई लव यू सो मच ......😍❤️।

कायरा ने जैसे ही सुना, वैसे ही उसने अपने हाथ आरव के सीने से हटाए और उसकी पीठ पर रख कर , अपने बाहों में कसते हुए आरव से कहा ।

कायरा - आई ऑलसो लव यू आरव ......। आई लव यू टू.......,लव यू टू....... आरव😘😍।

अपने प्यार के इज़हार करने और एक - दूसरे के मुंह से सुनने के बाद , दोनों ने एक दूसरे को और ज्यादा मजबूती से अपनी बाहों में कस लिया और एक बार फिर एक दूसरे में खो गए ...........।


क्रमशः

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