Ahsaas pyar ka khubsurat sa - 42 in Hindi Novel Episodes by ARUANDHATEE GARG मीठी books and stories PDF | एहसास प्यार का खूबसूरत सा - 42

एहसास प्यार का खूबसूरत सा - 42





ऑफिस में आरव के केबिन में आदित्य आया और उसे छेड़ते हुए बोला ।

आदित्य ( चेयर पर बैठते हुए ) - क्या बात है , आज कल हवाओं में भी इश्क नज़र आ रहा है ।

आरव ( नासमझ सा आदित्य को देखकर कहता है ) - मतलब??? कहना क्या चाहते हो तुम????

आदित्य ( मुस्कुराते हुए ) - कहना क्या है ???? आज कल लोग कई - कई मिनटों के लिए , एक दूसरे की बाहों में खोए रहते हैं । इतना ही नहीं , उन्हें ये भी होश नहीं रहता कि लोग जाने कब से उन्हें ही घूरे जा रहे हैं ......।

इतना कह कर अपनी हंसी कंट्रोल करते हुए आदित्य आरव की तरफ देखता है । तो आरव उसे एक नज़र देखता और और अगले ही पल उसके पास आकर , उसकी गर्दन को अपने हाथों में जकड़ कर कहता है ।

आरव - तेरी तो......। बहुत ज्यादा बोलने लगा है तू । भूल मत , तू भी उन सभी लोगों की तरह सिर्फ हमें घूर ही रहा था और सिर्फ अपनी बत्तीसी चमका रहा था । ये नहीं कि दोस्त होने के नाते हमें आगाह करे ।

आदित्य ( अपनी गर्दन आरव की पकड़ से छुड़ाते हुए ) - अबे........, मैं भला वहां कैसे कुछ कहता या तुझे आगाह करता । कबाब में हड्डी बनने का शौक नहीं है मुझे ।

आरव ने सुना तो उसके चेहरे पर भी हल्की सी मुस्कुराहट आ गई , वह मूमेंट्स याद कर जब कायरा और आरव एक हसीन सपने में खोए हुए थे । आरव ने आदित्य को छोड़ दिया और मुस्कुराते हुए अपनी चेयर पर जाकर बैठ गया । आदित्य ने जब उसे खुद में मुस्कुराते हुए देखा तो तुरंत कहा ।

आदित्य - देख ......, देख अभी भी कायरा के खयालों में खोया हुआ खुद में ही मुस्कुराये जा रहा है ।

आरव - अरे तू चुप कर ......, वरना अभी ही तेरे सारे वहम और तेरे खयालों की बैंड बाजा दूंगा ।

आदित्य - अरे ......, अरे नहीं बाबा । आप बिना अपनी ताकत हमपर दिखाए अपने आसन पर विराजमान रहें , यही हमारे लिए बेस्ट है ।

आरव ने सुना तो मुस्कुरा दिया । अगले ही पल आरव के चेहरे पर गंभीरता के भाव आ गए और उसके चेहरे से मुस्कुराहट गायब हो गई । क्योंकि उसने अपने केबिन के बाहर से अभी - अभी राजवीर को जाते हुए देखा । आरव ने आदित्य की तरफ देख कर तुरंत कहा ।

आरव - आदि सुन.....। कायरा पर नज़र रख .....।

आदित्य ( हैरानी से आरव को देखते हुए ) - राजवीर पर नज़र रखने के किए तू बोले , तो समझ आता है । पर कायरा पर किस लिए नज़र रखूं मैं???? बल्कि हमें तो उसकी सेफ्टी के किए कुछ सोचना चाहिए । और तू उसी पर शक की सुई घुमा रहा है ।

आरव - मैं कायरा की सेफ्टी के लिए ही उस पर नज़र रखने के लिए कह रहा हूं ।

आदित्य - कैसे????

आरव - देख....., अगर हम कायरा पर नज़र रखेंगे , तो उसके आस - पास होने वाली ऐसी ऐक्टिविटी जो कायरा को हार्म कर सकती है , उससे कायरा को हम प्रोटेक्ट कर सकते हैं । जिससे कायरा पर होने वाले अटैक से पहले ही , हम अटैकर को पकड़ लेंगे और कायरा किसी भी मुसीबत में फंसने से बच जाएगी ।

आदित्य - तेरा कहना तो सही है । तो मैं किसे कायरा पर नज़र रखने के लिए कहूं????

आरव - एजेंसी से और आदमी बुला , क्योंकि वो लोग ट्रेंड होते हैं । और उन्हीं को ये काम सौंप ।

आदित्य ( अपनी पॉकेट से अपना सेल फोन निकाल कर , कहता है ) - ओके......, मैं अभी तेरे घर के लोगों की सुरक्षा का जिम्मा लेने वाली सुरक्षा एजेंसी से बात करता हूं .....और.......।

आरव ( बीच में ही उसकी बात काट कर कहता है ) - नो...., मानता हूं कि हमारे घर में जो बॉडी गार्ड्स हैं वो ट्रेंड हैं और इंडिया की सबसे बड़ी सिक्योरिटी एजेंसी से उन्हें हमने हायर किया है । पर कायरा की सिक्योरिटी का जिम्मा , मैं उन्हें नहीं देना चाहता ।

आदित्य - बट व्हाई...?????

आरव - क्योंकि राजवीर हमारे यहां काम कर रही सारी एजेंसीज के बारे में जानता है, चाहे वह सिक्योरिटी एजेंसी हो, या फिर हमारे घर झाड़ू पोछा लगाने वाले नौकर को भेजने वाली एजेंसी हो । उसे हमारे घर के हर एजेंसी के मेंबर के बारे में पता है । इस लिए मैं चाहता हूं , कि ये काम हम किसी दूसरी एजेंसी को दे , जो अपना काम अच्छी तरह से करे और राजवीर को इसके बारे में पता भी न लगने दे । अगर हमने मेरे घर में काम कर रहे बॉडी गार्ड्स को जिस एजेंसी से बुलाया है उसी एजेंसी कायरा की सेफ्टी के लिए भी गार्ड्स बुलवाए , तो ये बात तुरंत राजवीर को पता चल जाएगी और जिससे बचाने के लिए हम कायरा के लिए ये सेक्योरिटी प्लान कर रहे हैं , उसके ऊपर एक सिरे से पानी फिर जायेगा । और मैं कायरा को लेकर इतना बड़ा रिस्क नहीं ले सकता ।

आदित्य - तो फिर किसे हायर करें????

आरव - तेरे घर में जो सिक्योरिटी एजेंसी काम करती है , उसी से बात कर । और ध्यान रहे कि कायरा को और राजवीर, दोनों को इस बारे में पता न चले । ये बात सिर्फ हम पांचों दोस्तों के बीच ही रहनी चाहिए । दूसरी बात , कायरा से दूर रहकर उसकी सेफ्टी का ध्यान रखना है । और इन सेक्योरिटी एजेंसी के बदौलत ही हम कायरा की सेफ्टी उनके हाथों में सोपेंगे । ताकि कायरा तक मुसीबत पहुंचने से पहले ही , ये बॉडीगार्ड्स उन मुसीबतों का खात्मा कर सकें । ये बातें उन्हें अच्छी तरह से समझा देना .....।

आदित्य - रिलेक्स आरव .....। वो लोग इन सब चीजों के लिए पहले से ट्रेंड होकर आते हैं । और अगर हम उन्हें कोई जिम्मेदारी सौंपेंगे, तो वे जरूर हमारी उम्मीदों पर खरे उतरेंगे । अगर हमें कायरा की सेफ्टी की चिंता से मुक्त होना है , तो हमें एजेंसी के आदमीयों पर विश्वाश करना ही होगा ।

आरव - जब राजवीर जैसा इन्सान , जो मेरी भाभी का भाई और हमारे परिवार का अपना है । उस जैसा इन्सान, जो हमसे हर पल एक नई जंग लड़ने की तैयारी में खड़ा है । जब उसपर मैं विश्वाश नहीं कर पा रहा हूं , तो परायों पर तो फिर मैं विश्वास करने से रहा ......। अपने ही जब अपनो की बर्बादी का कारण बन जाएं , तो पयारे भी हमें दुश्मन से लगने लगते हैं आदि।

आदित्य - तू कुछ ज्यादा ही सोच रहा है आरव । राजवीर अब ऐसा कुछ भी नहीं करेगा ।

आरव - वो करेगा नहीं....., बल्कि कर रहा है ।

आदित्य - तेरे कहने का मतलब मैं समझा नहीं.....!!!!

आरव - बहुत जल्द समझ जायेगा । अभी के लिए तेरे घर पर काम करने वाली एजेंसी के ऑफिस में कॉल कर और उसे कायरा की सेफ्टी के लिए हायर कर ।

आदित्य ने ओके कहा और एजेंसी में बात कर, कल से ही कायरा की सेफ्टी के लिए बॉडीगार्ड्स बुला लिए । आदित्य आरव के केबिन से बाहर चला गया ।

इधर चारों लोग मॉल से निकलकर सौम्या की गाड़ी में बैठे । आज सौम्या के साथ उसके कार का ड्राइवर भी आया हुआ था । पहले अंशिका और शिवानी को उन लोगों ने घर छोड़ा और फिर रेहान को । रेहान के घर के बाहर सौम्या के ड्राइवर ने गाड़ी रोकी । तो रेहान के साथ - साथ सौम्या भी उतर गई और उसने रेहान से कहा ।

सौम्या - मुझे विनय को लेकर कुछ डाउट हो रहा है । जैसे वो हम पर नज़र रखने के लिए राजवीर के कहने पर आया था ।

रेहान - मे बी......। क्योंकि विनय राजवीर का ही दोस्त है । और राजवीर जिस तरह की आजकल हरकतें कर रहा है , उस नाते विनय का हमारा पीछा करना, या एक तरह से कहूं नज़र रखना , लाजमी सा है । शायद वो हमारे थ्रू कोई बात पता करना चाहता हो ।

सौम्या - तुम कहो तो आदि से मैं इस बारे में बात करूं .....।

रेहान - नहीं सौम्या ......। हम अभी इस बात को लेकर श्योर नहीं है और ना ही हमारे पास कोई सबूत है । इस लिए मैं ये बात अपने तरीके से पता करूंगा । और जब श्योर हो जाऊंगा , कि विनय हम पर नज़र रखने ही आया था । तब मैं खुद बाकी के दोस्तों को बताऊंगा । और फिर उसके बाद हमें क्या करना है , ये हम सभी मिलकर डिसाइड करेंगे । तब तक तुम ये बात किसी से नहीं कहोगी । इनफेक्ट आदि से भी नहीं.....।

सौम्या ने हां में सिर हिला दिया और अपनी कार में जाकर बैठ गई । रेहान ने उसे बाय कहा और ड्राइवर ने उसकी कार उसके घर की ओर बढ़ा दी । रेहान भी अपने घर के अंदर आ गया ।

शाम को सात बजे कायरा ऑफिस के बाहर खड़ी , कैब का वेट कर रही थी , जो उसने आधे घंटे पहले बुक की थी , पर अभी तक कैब नहीं आयी थी । तभी आरव आया और उसे ऑफिस के बाहर खड़े देखा तो उसकी ओर बढ़ गया । आरव ने कायरा के सामने आकर कहा ।

आरव - तुम यहां क्या कर रही हो ???? अभी तक घर नहीं गई???

कायरा - वो आज मेरी स्कूटी पापा लेकर गए थे , इस लिए मैं यहां कैब का वेट कर रही हूं ।

आरव - तो सुबह तुम स्कूटी के बिना कैसे आयी???

कायरा - सुबह भी मैंने कैब बुक की थी । उसी से मैं कॉलेज और फिर कॉलेज से ऑफिस आयी थी ।

आरव - तुमने मुझे क्यों नहीं बताया??? मैं तुम्हें अपने साथ ले आता ....!!!!

कायरा - मैं आपको परेशान नहीं करना चाहती थी ।

आरव - तुम भी पागल लो कायरा । भला तुम्हें ऑफिस लाने में कैसी परेशानी .....???? ( आरव की बात सुनकर कायरा ने उसे हैरानी से देखा , तो आरव ने बात संभालते हुए कहा ) मेरा मतलब है, कि मैं भी यहीं आ रहा था , तुम्हें भी अपने साथ ऑफिस ले आता । खैर छोड़ो ....., चलो अब मेरे साथ , मैं तुम्हें तुम्हारे घर ड्रॉप कर देता हूं।

कायरा - नहीं आरव ....!!!! आपको अपने घर पहुंचने में लेट हो जाएगा । आप घर जाइए , मैंने कैब बुक कर ली है , बस आती ही होगी ।

आरव - अभी तक तो नहीं आयी है । और वैसे भी तुम तो जानती हो , कि मैं तुम्हें घर ड्रॉप किए बिना खुद के घर तो जाने से रहा । इससे पहले कि मुझे हर बार की तरह तुम्हें डांट कर अपनी कार में बैठना पड़े , उससे अच्छा है तुम बिना डांट खाए ही मेरी कार में बैठ जाओ । ताकि मैं तुम्हें घर ड्रॉप कर , अपने घर जाकर रेस्ट कर सकूं । क्योंकि कल भी माथेरान तक मुझे ही गाड़ी ड्राइव करनी है , उसके लिए ड्राइव करने से पहले रेस्ट भी तो जरूरी है ना ....।

कायरा ने सुना , तो बिना कुछ कहे पार्किंग एरिया में जाकर आरव की कार में बैठ गई । आरव भी उसके पीछे - पीछे मुस्कुराते हुए अपनी गाड़ी की ड्राइविंग सीट पर बैठ गया । क्योंकि उसे आज कायरा से लड़ाई नहीं करनी पड़ी और कायरा उसके कहते ही आरव के साथ जाने को रेडी हो गई । आरव ने कार स्टार्ट की और कायरा के घर की ओर बढ़ा दी । गाड़ी ड्राइव करते हुए आरव ने कायरा से कहा ।

आरव - वैसे कायरा.....। आजकल अधिकतर शाम को , मैं ही तुम्हें तुम्हारे घर ड्रॉप करने जाता हूं । तो तुम एक काम क्यों नहीं करती , परमानेंट मेरे साथ ही आना जाना किया करो , घर से कॉलेज , कॉलेज से ऑफिस और ऑफिस से घर । तुम्हारे लिए ईजी होगा। ( आंखें चमकाते हुए ) है न बेस्ट आइडिया.....!!!!

कायरा ( आरव को घुरकर कहती है ) - आप मूझपर एहसान जाता रहे हैं ...!!!???

आरव ( सकपकाते हुए ) - न...., नहीं कायरा । मैं भला तुम पर एहसान क्यों जताऊंगा । और वैसे बता दूं , मेरी ऐसी आदत भी नहीं है । मैं तो बस तुम्हारी सुविधा के लिए कह रहा था ।

कायरा ( सामने की ओर देखते हुए ) - रहने दीजिए । मुझे इस कार की सैर से अच्छी , अपनी स्कूटी में बैठ कर खुली हवा की थपेड़े महसूस करना पसंद है और वो ही मुझे अच्छी लगती है ।

आरव - ओह......।

कायरा ने हम्मम कहा और फिर खिड़की के बाहर देखने लगी । उसके बाद दोनों के बीच कोई बात चीत नहीं हुई । आरव कायरा का हाज़िर जवाब सुनकर , मुस्कुराते हुए गाड़ी ड्राइव करने लगा । लगभग एक घंटे बाद , आरव ने कायरा को उसके घर ड्रॉप किया और खुद अपने घर चला गया ।

इधर रात का डिनर करने के बाद , सरिता जी ने राघवेंद्र के साथ अपने पूरे परिवार को बड़े से हॉल नुमा बैठक में बैठे देखा, तो राघवेंद्र के सामने खड़े होकर कहा । क्योंकि उनके यहां , औरतें मर्दों के साथ न ही बैठती थी और न ही उनके साथ कभी साथ में बैठकर खाना खाती थी । एक तरह से औरतों के लिए , पुरानी पर्दा प्रथा और रीति रिवाज़ आज भी उनके राजघराने में प्रचलित थे । सरिता जी ने एक नजर रूही को देखा , जो उनसे दूर खड़ी उनके बोलने का ही वेट कर रही थी , और फिर राघवेंद्र से कहा ।

सरिता जी - हम सोच रहे थे कि अपने कुल देवी के मंदिर एक बार जाकर , दर्शन कर आएं । वैसे भी , देवेंद्र ( रूही के बड़े भाई सा ) और नीरा ( रूही की भाभी सा ) के विवाह के बाद, हम कुलदेवी के मंदिर उन्हें धन्यवाद कहने नहीं जा पाए हैं । तो दर्शन के बहाने उन्हें चढ़ावा भी चढ़ा देंगे , और इन दोनों के विवाह कि रस्में अच्छे से सम्पन्न कराने के लिए , उन्हें धन्यवाद भी कह देंगे ।

राघवेंद्र ( खुश होते हुए ) - ये बहुत अच्छा सोचा आपने छोटी रानी सा । हम तो अभी व्यस्त हैं , आप देवेंद्र और और उसकी दुल्हन को ले जाईयेगा अपने साथ और देवी जी का आशीर्वाद भी दिलवा दीजिएगा ।

देवेंद्र - लेकिन बापू सा .....!!! मुझे कल बिजनेस के सिलसिले में गुजरात जाना है । तो मैं कल मां सा के साथ नहीं जा पाऊंगा ।

सरिता जी ( तुरंत कहती है ) - कोई बात नहीं बेटा , हम चले जाएंगे । और वैसे भी देवेंद्र तो आपके साथ , व्यवसाय के कामों में व्यस्त रहता है और हम चले जाएंगे , तो महल संभालने के लिए किसी एक को यहां रहना तो होगा ही । इस लिए इन दोनों को यहीं रहने देते हैं ।

नीरा ( सरिता जी की बात कर समर्थन करते हुए, दबी आवाज़ में बोली ) - मां सा ठीक कह रही हैं बापू सा .....। और अगर कुंवर सा ( देवेंद्र ) हमारे साथ नहीं जाएंगे , तो हमारा भी वहां जाने का कोई ओचित्य नहीं होगा ।

राघवेंद्र ( सरिता जी से ) - तो क्या आप अकेली जाएंगी ।

सरिता जी - अगर आप कहें , तो हम रूही बिटिया को अपने साथ ले जाएं । इसी बहाने वो घर से बाहर , हमारे साथ घूम भी आएगी और हम मां बेटी को कुछ वक्त साथ में बिताने का समय भी मिल जाएगा ।

राघवेंद्र ( रूही की तरफ देख कर ) - तुम अपनी मां सा के साथ जाना चाहती हो???

रूही ने हां में सिर हिला दिया , तो सरिता जी के चेहरे पर मुस्कुराहट आ गई । तभी राघवेंद्र ने सरिता जी से कहा ।

राघवेंद्र - ठीक है , तो आप दोनों चली जाइएगा। लेकिन कब जाना चाहती हैं आप???

सरिता जी - राजा साहब .......!!!! अगर आप इजाजत दें , तो कल ही जाना चाहते हैं । कल रविवार है , और रूही के कॉलेज की छुट्टी भी है । इस लिए हम कल ही जाने का विचार कर रहे थे ।

राघवेंद्र - ठीक है ...., आप कल ही चली जाएगा । साथ ही देवेंद्र और उसकी दुल्हन के नाम की पूजा भी करवा दीजिएगा । हम आपके जाने का बंदोबस्त करवा देते हैं ।

सरिता जी ने हां कहा । और राघवेंद्र और देवेंद्र सरिता जी और रूही के जाने का बदोबस्त करने के लिए , बाहर बगीचे की ओर चले गए । सरिता जी और रूही के होठों मे , राघवेंद्र जी की बात सुनकर मुस्कुराहट तैर गई । सरिता जी और रूही , रूही के कमरे में आए । तो रूही ने तुरंत अपने कमरे का दरवाज़ा बंद किया और अपनी मां सा को गले से लगा कर थैंक्यू कहा । बदले में सरिता जी ने उसके सिर में प्यार से हाथ फेरा । रूही उनसे अलग हुई और उसने सरिता जी से कहा ।

रूही - लेकिन मां सा.....। आपने बापू सा से झूठ क्यों कहा ???

सरिता जी - क्योंकि सच बताने पर वे तुम्हें जाने नहीं देते । इस लिए हमने उनसे कुल देवी के मंदिर जाने का बहाना बनाया । कल हम आपको रास्ते में छोड़ देंगे , और आप अपने दोस्तों को रास्ते से पिकअप करने के लिए कह दीजिएगा । लौटते समय भी आप हमें उसी जगह पर मिलिएगा , जहां हम आपको आपके दोस्तों के पास छोड़ कर जाएंगे ।

रूही - आपका बहुत , बहुत शुक्रिया मां सा । हमारी छोटी सी खुशी के लिए , इतना सब करने के लिए ।

सरिता जी ने उसके ललाट को प्यार से चूमा और फिर उसे सोने को कहकर , वहां से चली गई । बताइए, कितनी अजीब बात है ना , कि एक मां को अपनी बच्ची की खुशी के खातिर अपने ही पति से झूठ बोलना पड़ा । अगर घरों में लड़कियों के ऊपर इतनी पाबंदियां न लगाई जाएं , तो किसी भी बेटी को उसकी खुशी देने के लिए , किसी भी इन्सान को कभी झूठ न बोलना पड़े ।

इधर आरव अपने घर पहुंचा । तो मिस्टर शर्मा उसे , हॉल में ही बैठे हुए मिल गया । उन्होंने आरव को घर के अंदर आते देखा , तो तुरंत उससे कहा ।

मिस्टर शर्मा ( अपने हाथ में , आरव के ऑफिस की बजट फ़ाइल लिए ) - ये क्या है आरव बेटा ???? तुमने इतने सारे पैसे, पचास लाख रुपए कहां खर्च किए ??? और इस फाइल में , कंपनी के फंड से इतना पैसा खर्च होने का कोई रीजन ही नहीं दिया है तुमने । तुमने इसमें कोई वेलिड रीजन क्यों नहीं लिखा है बेटा ????

आरव - वो पापा ......., मैंने ऑफिस को रेनोवेट करवाया था । उसी में ये सारे पैसे खर्च हुए हैं ।

मिस्टर शर्मा - सिर्फ ऑफिस को , या फिर फैक्ट्री को भी ???? क्योंकि अपनी कंपनी के मैनेजर मेहरा जी कह रहे थे , कि पिछले दिनों फैक्ट्री में भी रेनोवेशन का कुछ काम हुआ हैं। वो भी तुमने ही करवाया है क्या???

आरव - जी पापा ......।

मिस्टर शर्मा - पर क्यों ????? अभी एक महीने पहले तो हमने ये कंपनी ओपन की है । फिर इतनी जल्दी , ये सारे काम क्यों???

आरव कोई जवाब देता , उससे पहले ही अरनव सीढ़ियों से नीचे आया और आरव को देखते ही उससे तुरंत सवाल किया ।

अरनव - आरव ....!!!! तूने दूसरी एंजेंसी से , बॉडीगार्ड.......।

इतना कह कर अरनव चुप हो गया , क्योंकि आंखों के इशारों से ही आरव ने उसे अपने पापा के सामने ये बात करने के किए मना कर दिया । जब अरनव को अपनी बात बीच में रोकते हुए मिस्टर शर्मा ने देखा , तो उससे कहा ।

मिस्टर शर्मा - किस बारे में बात कर रहे हो तुम अरनव ????

अरनव ( बात बदलते हुए ) - कुछ नहीं पापा .....। वो कंपनी के एम्पलाई से रिलेटेड कुछ बात करनी थी , आरव से । तो उसी बारे में कह रहा था ।

तभी आरव ने तुरंत , मिस्टर शर्मा का ध्यान खुद की ओर खींचते हुए, मिस्टर शर्मा से कहा ।

आरव - पापा ......, ऑफिस में एम्प्लोई की संख्या बढ़ गई है । इस कारण , उनके लिए न्यू केबिन बनवाना पड़ा । इसी वजह से मैंने ऑफिस को रेनोवेट करवा दिया । और फैक्ट्री में और मशीन मंगवाई है मैंने , उनके रखने की जगह नहीं थी , इस लिए फैक्ट्री को भी रेनोवेट करवाकर , बड़ा करवा दिया है ।

मिस्टर शर्मा ( मुस्कुराकर ) - अगर ऐसा है , तो ये ठीक किया तुमने । अच्छा अब जाओ , फ्रेश हो जाओ । थक गए होगे , तो डिनर करने के बाद आराम कर लेना ।

तभी सुनयना जी वहां आयी और उन्होंने आरव से कहा ।

सुनयना जी - आरव ....., अगले हफ्ते गुरुवार को , जन्माष्टमी है । इस लिए तुम्हें और अरनव को मिलकर सारी तैयारीयो में मदद करना है । और हां , हर बार की तरह इस बार भी हम धूम - धाम से जन्माष्टमी मनाएंगे । तो तुम अपने दोस्तों को इन्वाइट कर देना ।

अरनव - मम्मी ...., मैं लगभग दिनभर घर में ही रहता हूं । तो मैं सारी तैयारी देख लूंगा । आरव ने अभी नई - नई कंपनी खोली है , इस लिए उसके सिर पर अभी बहुत ज्यादा बर्डन है । इस लिए आप मुझे बता दीजिएगा सारा काम , मैं कर लूंगा ।

सुनयना जी - ठीक है , पर अपने दोस्तों को बुलाना मत भूलना आरव बेटा ।

आरव - ओके मम्मी .....। मैं उन्हें बता दूंगा । ( मिस्टर शर्मा से ) पापा , कल हम सभी घूमने जा रहे हैं । और मैं अंशिका को भी हमारे साथ लेकर जा रहा हूं ।

मिस्टर शर्मा - ये तो बहुत अच्छी बात है । ठीक है , अंशिका को ले जाओ । इसी बहाने वो भी घूम लेगी । बहुत दिनों से कॉलेज के अलावा कहीं गई भी नहीं है वो ।

आरव ने उनकी बात पर हां में सिर हिला दिया । तभी अरनव उसे कुछ इंपोर्टेंट काम है , बोलकर वहां से उसे लेकर , आरव के कमरे की ओर बढ़ गया । अरनव और आरव , आरव के रूम मे पहुंचे । तभी अरनव ने रूम में एंटर होते ही , आरव के सामने सवाल दाग दिया ।

अरनव - ये दूसरी एजेंसी से , न्यू बॉडीगार्ड्स हायर करने का क्या माजरा है ???? और पापा के सामने ये बात बोलने से क्यों माना किया तूने????

आरव ने सुना , तो उसे कुछ सूझा ही नहीं , कि वो आरव को क्या जवाब दे । तभी उसने अरनव से कहा ।

आरव - भैया ......!!!! इसमें कोई माजरा नहीं है । एक फ्रेंड को जरूरत थी , तो उसी के लिए हायर किया है । और पापा को ये छोटी - छोटी बातों के बारे में क्या बताकर , परेशान क्यों करना .....।

अरनव - तो हमारे घर में परमानेंट जो एजेंसी , सालों से काम कर रही है । उसे क्यों नहीं हायर किया , उस दोस्त के लिए ???? और तूने खुद की जेब से पैसे क्यों खर्च किए ????

आरव ( मन में ) - भैया को ये सारी बातें कहां से पता चल गई???? ये तो मुझसे भी ज्यादा शातिर दिमाग है और इन्हें दो सेकंड नहीं लगता , बात पता करने में । क्या करूं ???? राजवीर की सच्चाई इन्हें बता नहीं सकता और मैंने ये सब कायरा के लिए किया है , ये मैं अभी इन्हें बताना नहीं चाहता ।

अरनव ( कुछ न बोल रहे आरव की ओर देखते हुए ) - जवाब है तेरे पास??? या फिर मैं अपने तरीके से पता लगाऊं???

आरव - हमारे यहां जो एजेंसी काम करती है , उसका रेट काफी हाई है । इस लिए मैंने थोड़े कम रेट वाली एजेंसी से , उसे बॉडीगार्ड दिलवाए हैं । और उसके पास उस वक्त पैसे नहीं थे , क्योंकि वो अपना कार्ड घर पर भूल गया था । इस लिए मैंने अपने कार्ड से पेमेंट कर , उसकी हेल्प की है । बस......।

अरनव - तू सच कह रहा है ना आरव????

आरव - जी......., जी भैया ।

अरनव ने उसकी बात पर कुछ नहीं कहा और कुछ सोचते हुए आरव के रूम से चला गया । अरनव के जाते ही आरव की जान में जान आयी और वह कपड़े चेज करके , नीचे डिनर करने के लिए चला गया ।

अगली सुबह सभी अपना - अपना सामान लिए , माथेरान की सैर करने के लिए रेडी थे । आदित्य और सौम्या आठ बजे के करीब , एक ही गाड़ी में माथेरान के लिए निकल गए थे । नील , रेहान , शिवानी और अंशिका एक कार में गए थे । रूही को राहुल ने बीच रास्ते से पिक कर लिया था और सरिता जी राघवेंद्र के द्वारा उनकी सुरक्षा के लिए भेजे गए आदमियों के साथ , अपने कुल देवी के मंदिर चली गई थी । और आरव ने अपनी कार कायरा के घर की ओर घुमा दी थी । हालांकि कायरा ने उसे खुद को पिक करने के लिए नहीं कहा था । पर आरव उसकी सेफ्टी के लिए , खुद उसे अपने साथ ले जाना चाहता था । आरव ने कायरा के घर सामने अपनी कार खड़ी करने के बाद तेज़ आवाज़ में हॉर्न दिया , तो कायरा अपने मम्मा और पापा को बता कर आरव के साथ गाड़ी में बैठकर , माथेरान के लिए निकल गई ।

दस बजे के करीब सभी वहां पहुंचे । सभी ने अपनी - अपनी कार घाटियों में स्थित मार्ग पर चढ़ा दी । और फिर अपनी मंजिल की ओर बढ़ने लगे । घाटियों में फैली हरियाली , सभी के मन को भा रही थी । सभी बड़े गौर से उस हारियाली को और उनसे कुछ ही दूर उड़ रहे बादलों को देख रहे थे । कुछ देर बाद ,सभी की गाड़ी नेरल से एक किलोमीटर दूर बने पार्किंग एरिया में पहुंची । उससे आगे वाहनों का प्रवेश निषेध था। क्योंकि उसके आगे , रिक्शे , बग्घी , टॉय ट्रेन या फिर पैदल जाने के लिए रास्ता था । सभी अपनी कार से उतरे और सारी गर्ल्स ने , हाथों में पानी की बॉटल ली और पैदल ही नेरल नामक स्थान की ओर बढ़ गए । सभी बातें और मस्ती करते हुए , जा रहे थे । तभी आदित्य से बातें करते हुए आरव की नजरें , खुद से थोड़ी दूरी पर रूही और अंशिका से बातें करती हुई कायरा पर गई । जल्दी - जल्दी के कारण आरव ने ठीक तरह से आज कायरा को देखा ही नहीं था । पर अब आरव की नजरें उस पर जाकर टिक गई थी । कायरा ने नेवी ब्लू कलर का जीन्स , उसके साथ क्रीम कलर की टी शर्ट जो उसने जींस में इन की हुई थी , और उसके ऊपर ब्लू कलर की हाफ जैकेट पहनी हुई थी । हाथ में ग्रे कलर का स्टोल पकड़ा हुआ था और वह रूही और अंशिका से हंस - हंस कर बातें कर रही थी । हंसने से उसकी चेहरे की मासूमियत और खिलकर उसके चेहरे पर झलक रही थी । आरव तो इस बार फिर उसकी खूबसूरती में खो गया । आरव ने कायरा को जीन्स टॉप में पहली बार देखा था और वह जीन्स टॉप में भी इतनी सुंदर लग रही थी, कि आरव अपनी नज़रों को उसे देखने से नहीं रोक पाया । आरव कायरा को देख ही रहा था , तभी राहुल ने उसके आंखों के सामने चुटकी बजाते हुए कहा ।

राहुल - अगर जी भर के दर्शन हो गए हों , तुम्हारी महबूबा जी के । तो कृपया अपने कदम आगे की ओर बढ़ाए । जाने कब से मूर्ति बने यहीं पर खड़े , ताड़ रहें हैं अपनी वाली को ।

राहुल की बात सुनकर , उनके साथ चल रहे सारे ब्वॉयज हंस दिए तो उनकी आवाज़ सुनकर आरव को होश आया । और वह झेंपते हुए बोला ।

आरव - कोई काम नहीं है ना तुम लोगों के पास , मुझे तंग करने के सिवा।

नील ( आरव के गर्दन पर हाथ डालकर कहता है ) - अरे हमारे आरव मियां.....। बड़ी मशक्कतों के बाद ये दिन आता है हमारी ज़िन्दगी में , जब हम तेरा पोपट बना पाते हैं । तो मेरे भाई , जी लेने दे हमें भी तेरे पोपट बने हुए चेहरे के साथ । ताकि हम तुझे देख कर भी हंस सकें , जैसे तू हमें देख कर हमेशा हंसता रहता है ।

आरव ने सुना तो तुरंत उन्हें मारने के लिए भागते हुए कहा ।

आरव - तुम लोग को मैं बताता हूं , कि कैसे हंसना है । पकड़ में आ जाओ , फिर अच्छे से ट्रेनिंग देता हूं मैं तुम चारों को ।

इतना कह कर आरव उन्हें मारने के लिए उनके पीछे भागने लगा । चारों दोस्त आगे - आगे भाग रहे थे और आरव उनके पीछे - पीछे । देखते ही देखते वो सभी नेराल नामक स्थान पर पहुंच गए । वहां से उन्होंने , ट्रॉय ट्रेन का चुनाव किया और फिर सभी के लिए उसकी टिकिट्स लेकर , अपनी - अपनी सीट पर आकर बैठ गए । सभी के बैठने के बाद कायरा और आरव के लिए मात्र एक ही सीट बची थी, जिसमें सिर्फ दो लोग ही बैठ सकते थे । आरव तो बैठ गया , पर कायरा को आरव के साथ बैठने में थोड़ी शर्म आ रही थी । क्योंकि दोनों सीट के बीच बिल्कुल भी स्पेस नहीं था । वह वहीं खड़ी रही , तो सामने वाली सीट पर आदित्य के साथ बैठी सौम्या ने उसे आरव की ओर धक्का दिया, तो कायरा सीधे आरव के ऊपर जाकर गिरी । आरव ने जब कायर को खुद के इतने नजदीक देखा, तो एक पल के लिए वह उसे देखता ही रह गया , लेकिन अगले ही पल वह हड़बड़ा गया और उसने कायरा को सीधा खड़ा किया । अब कायरा के पास कोई चारा ही नहीं था , इस लिए वह उसी सीट में सीधी बैठ गई । उसके बैठते ही , कायरा की बाहें आरव की बाहों से छू गई । जिससे एक खुशनुमा एहसास दोनों के मन को गुदगुदा गया । तभी ट्रॉय ट्रेन का हॉर्न बजा और वह अपने गंतव्य की ओर बढ़ गई । ट्रॉय ट्रेन से , माथेरान की घाटी के अंदर का दृश्य देखा जा सकता था । सभी बड़े ध्यान से उस घाटी की खुबसूरती को देख रहे थे । उन्हें एलेक्जेंडर पॉइंट, रामबाग पॉइंट, लिटिल चौक पॉइंट, चौक पॉइंट, वन ट्री हिल पॉइंट, ओलंपिया रेसकोर्स, लॉर्डस पॉइंट, सेसिल पॉइंट और पनोरमा पॉइंट इत्यादि व्यू पॉइंट्स देखने को मिले । इसी बीच ट्रॉय ट्रेन , पहाड़ के सबसे ऊपरी हिस्से में पहुंची , जहां से बादल उस ट्रेन के एकदम नजदीक से होकर गुजर रहे थे । उन्हें देख कर ऐसा लग रहा था , कि जैसे वो ट्रेन बादलों में उड़ रही हो । कायरा को ये देख कर बहुत खुशी हुई और उसके चेहरे पर बड़ी सी मुस्कान आ गई । उसने मासूमियत से आरव का हाथ पकड़ते हुए आरव से कहा ।

कायरा ( बादलों की ओर इशारा कर ) - वो देखिए आरव , कितना सुन्दर नजारा है । मेरा तो मन कर रहा है, कि मैं भी उन बादलों के बीच पहुंच जाऊं और उनमें शामिल होकर उन्ही की तरह आसमान में उड़ने लगूं ।

आरव ने उसकी बात सुनी तो कायरा को देखने लगा । इस वक्त कायरा के चेहरे पर जो खुशी थी , जो चमक थी , वो आरव ने पहली बार देखी थी । क्योंकि उसने कायरा को अधिकतर उदास ही देखा था । पर अचानक से इतनी चमक , वह कायरा के चेहरे पर पहली बार महसूस कर रहा था । आरव तो एक बार फिर कायरा को देखता ही रह गया और अपने हाथ पर कायरा का स्पर्श महसूस करने लगा । तभी आदित्य और सौम्या दोनों ने एक साथ खांसने की एक्टिंग की , तो कायरा का ध्यान अपने हाथ पर गया और उसने एक झटके से आरव का हाथ छोड़ दिया और आरव भी अब झेंपते हुए ट्रेन से बाहर की ओर देखने लगा ।

लगभग दो ढाई घंटे की, वहां के पहाड़ों की सैर के बाद, सभी एक बार फिर नेरल ट्रॉय ट्रेन स्टेशन पहुंचे । और सभी एक बार फिर पैदल चलकर वापस अपनी - अपनी कार के पास पहुंचे गए । वहां पहुंचते ही नील ने कहा ।

नील - कायरा ....., तुमने तो जितना इस जगह के बारे में बताया था , ये तो उससे भी ज्यादा खूबसूरत है । बहुत सही जगह चुनी है तुमने घूमने के लिए । मैं एक बार अपनी फैमिली को लेकर यहां जरूर आऊंगा । तुम पहले भी यहां आयी हो क्या ???

कायरा - नहीं....।

नील - तो फिर तुम्हें यहां के बारे में इतना नॉलेज कैसे है???

कायरा - नेट पर इस जगह के बारे में पढ़ा था । और आज तुम सबके कारण, देख भी लिया ।

आंशिक - मैंने भी नेट में इस जगह के बारे में पढ़ा था , पर सच कहूं, यहां घूमने के बाद ज्यादा अच्छा लगा । मेरा तो यहां से जाने का मन ही नहीं कर रहा है ।

नील ( अंशिका से, बाकी सभी की अपनी एक आंख विंक करते हुए कहता है ) - ठीक है , तो फिर स्वीटी को यही छोड़ देते हैं । लेकिन तू देख ले स्वीटी , रात के घने अंधेरे में यहां पर बहुत सारे जंगली जानवर भी आते हैं । फिर तुझे डर लगे , तो हमें मत कहियों । क्योंकि उस वक्त हम सब तो अपने - अपने एसी वाले रूम में, मस्त चद्दर तान के खरांटे ले रहे होंगे । यहां पर तुझे अकेले पूरी रात काटनी होगी ।

अंशिका ने सुना, तो वह किसी छोटे से बच्चे की तरह डर गई और आरव के सीने से जाकर चिपक गई । उसने घबराते हुए कहा ।

अंशिका - नई......., मैं यहां नहीं रुकूंगी । बल्कि आप लोगों के साथ वापस मुंबई जाऊंगी । आरव भाई, आप मुझे वापस अपने साथ घर ले चलोगे ना ।

अंशिका की बात सुनकर और उसकी मासूमियत देखकर सभी को हंसी आ गई । जबकि रेहान उसकी इस नादानी पर और उसकी मासूमियत पर खोकर , उसे बड़े प्यार से देखने लगा । तभी सौम्य उसके पास आयी और उसके हाथ में अपने नाखून से हल्की सी चिमटी काटते हुए , उससे धीरे से बोली ।

सौम्या - इतने ध्यान से मत देख मेरी ननद को । मासूम सी बच्ची है अभी , इस लिए नज़र लग जाएगी ।

रेहान ने सुना तो सकपका गया , और फिर अंशिका को देख कर मुस्कुराने लगा । तो इधर आदित्य और कायरा ने अंशिका से कहा ।

आदित्य - लाडो .....!!!! ये नालायक नील तुझे परेशान करने के लिए ये सब कह रहा है ।

कायरा ( अंशिका के पास आकर ) - हां अंशिका , नील तो बस तुम्हारे साथ छोटा सा मजाक कर रहा था । तुम उसकी बातों को दिल पर मत लो । और वैसे भी हम तुम्हें छोड़ कर जा ही नहीं सकते । क्योंकि तुम हमारे फ्रेंड्स ग्रुप की सबसे प्यारी मेंबर जो हो ।

आंशिक ने कायरा की बात सुनी , तो आरव की ओर देखा । तो आरव ने पलकें झपकाकर अंशिका को आश्वस्त किया । तो अंशिका आरव से अलग हुई और नील को घूरते हुए मुंह बना कर बोली ।

अंशिका - आप घर पहुंचो नील भाई । फिर अरनव भैया से शिकायत करके , लूंगी मैं इस बात का बदला आपसे ।

ये बात भी अंशिका ने इतनी मासूमियत से कही , कि सभी उसकी मासूमियत पर मुस्कुराने से खुद को नहीं रोक पाए । तभी सभी को भूख लगी । तो राहुल ने कहा ।

राहुल - भूख लगी है , पर यहां तो कोई रेस्टोरेंट ही नहीं है ।

कायरा - रेस्टोरेंट की क्या जरूरत है । ( सामने बने सुन्दर से पार्क की ओर इशारा करते हुए ) वो देखो , हम वहां भी लंच कर सकते हैं ।

राहुल - पर वहां पर खाने की चीजें नहीं है ।

शिवानी - तो क्या हुआ....। हम सभी अपने साथ खाने की , जमीन पर बैठने की और साथ में धूप से बचने की सारी सामग्री लाए हैं ।

सौम्या - हां...., आज तो मेरी मम्मी ने खुद से सारा खाना पैक किया है और वो बोल भी रही थी , कि ऐसी पिकनिक उन्होंने पुराने समय में , बहुत बार अपने दोस्तों के साथ मनाई है । और वो बता रही थी, कि इन सब में उन्हें बहुत मजा आया था । तो चलो , आज मम्मी लोगों के समय के टाइप की, पिकनिक मनाते हैं । इसी बहाने हमें कुछ न्यू चीज़ें करने को मिलेंगी ।

कायरा - वैसे भी मेरी मम्मा ने तुम सब के किए , ढ़ेर सारी डिशेश बनाकर भेजी है । अगर हम रेस्टोरेंट ढूंढ़ने जाएंगे और वहां पर बैठकर वहीं का कहना खाएंगे । तो हमारी मम्मियों की सारी मेहनत पर पानी फिर जाएगा ।

अंशिका - राइट दी......। इस लिए हम सभी वहां सामने , उस सुन्दर से पार्क में बैठकर लंच करेंगे ।

सारी गर्ल्स के तर्कों के आगे , सारे बॉयज की बोलती ही बंद हो गई । सभी ने गाड़ी से अपने साथ लाया हुआ सारा सामान निकाला और सभी सामने बने पार्क की ओर बढ़ गए । वहां पर इन्हीं के जैसे कई लोग बैठें, अपनी - अपनी पिकनिक को एन्जॉय कर रहे थे । ये सब भी खाली जगह देख कर , उस पार्क की जमीन में बैठ गए । शिवानी ने कल मॉल से लाए हुए समानो में से , एक बड़ा सा मेट निकाला और कायरा की मदद से उसे जमीन में बिछा दिया । सारी गर्ल्स उसमें बैठ गई । रेहान ने एक छोटा सा टेंट निकाला , जो उसने कल मॉल में खरीदा था । और उसने सभी ब्वॉयज की मदद से वहीं पर बांध दिया । जिससे अब उन सभी को उस टेंट के नीचे बैठने से , धूप नहीं लग रही थी । और दूसरी ओर से आ रही ठंडी - ठंडी हवा , उन सभी को आंनद दे रही थी । सभी ने हाथ मुंह धोया और फिर उस बड़े से मेट पर , उस छोटे से टेंट के नीचे बैठ गए । सारी गर्ल्स ने एक - एक कर टिफिन्स ओपन किए और फिर सभी के लिए प्लेट्स में खाना परोसा । सभी ने बातें और मस्ती करते हुए लंच किया और फिर वहीं पर बैठकर बातें करने लगे । तभी शिवानी ने कहा ।

शिवानी - चलो ना कोई गेम खेलते हैं ।

अंशिका - पर क्या...???

सौम्या - अंताक्षरी.....!!!!

राहुल और नील ( एक साथ ) - नो....., बहुत बोरिंग हो जाता है ये गेम ।

सौम्या - पर मेरा गाना सुनने का मन है ।

अंशिका - तो उसमें कौन सी बड़ी बात है , हमारी कायरा दी भी तो बहुत बढ़िया सोंग गाती है । चलो कायरा दी , सुनाइए आज कुछ स्पेशल ।

कायरा ( हिचकिचाते हुए ) - मैं....., मैं कैसे ...???

आदित्य - अरे कायरा , शरमाओ मत । यहां सिर्फ हम दोस्त ही हैं । और हमारे ग्रुप में तुमसे और आरव से अच्छा सोंग कोई नहीं गाता । आरव के सोंग्स हम कई बार सुन चुके हैं । पर आज हम तुम्हारी आवाज़ एक बार फिर सुनना चाहते हैं ।

कायरा ने सुना , तो आरव और रूही की ओर देखा । दोनों ने उसे गाने के लिए आंखों के इशारों से ही कहा । तो कायरा ने सभी से कहा ।

कायरा - ठीक है , मैं गाऊंगी । पर मेरे साथ आप सब भी गाएंगे ।

सभी एक साथ - ओके डन.....।

सभी की आवाज़ सुनकर कायरा ने आरव की ओर देखा और हल्की मुस्कान के साथ गाने लगी । जैसे वह उसी के लिए ये सोंग गा रही हो ।

कायरा - पहला पहला इश्क़ हुआ है
पहला तजुर्बा पहली दफा है

आरव ने सुना , तो कायर के गाने के अंदाज को देख कर मुस्कुरा दिया और उसे ये समझते देर न लगी , कि कायरा उसी के लिए ये गाना गा रही है । क्योंकि कायरा ने आरव की ओर नजरें करके ही , गाना शुरू किया था ।

हो तू जो नहीं तो , कुछ भी नहीं है
सासों के चलने की तू ही वजह है

तभी रेहान की नज़र , पार्क के एक किनारे में रखी हुई मटकी पर गई । उसे देखते ही रेहान कि आखें चमक गई और वह दौड़ कर उस मटकी को लेकर आ गया और उसे उल्टा जमीन में रखकर , तबले की तरह बजाने लगा । तभी रेहान की नज़र अंशिका की ओर गई , जो उसकी इस हरकत पर , उसे ही देख कर खिलखिला रही थी । रेहान ने अंशिका की ओर मुस्कुराकर देखा और वह भी उसे देखते हुए गाने लगा ।

रेहान - मांगे फ़क़ीर दुआ-ऐ-अल्लाह
यार दी सूरत माशा अल्लाह

अंशिका ने रेहान को जब खुद को देखकर गाते हुए पाया , तो उसने अपनी नजरें झुका ली जैसे उसके दिल में भी कुछ हलचल सी मची हो , रेहान को अपनी ओर देखता पाकर।

रीत न जानु, रिवाज न मानु
मैं ते ठहरा........ सादा बंदा

तभी नील ने शिवानी की ओर देखा, तो शिवानी ने शर्माकर अपनी नजरें नीची कर लीं । तो नील ने उसे देख कर ही गाना गुनगुनाया ।

नील - मांगे फ़क़ीर दुआ-ऐ-अल्लाह
यार दी सूरत माशा अल्लाह

अब इन तीनों के गाने से माहौल थोड़ा रोमेंटिक सा हो गया था । तो राहुल ने भी अपने दिल की फीलिंग्स एक बार फिर रूही के सामने एक्सप्रेस करने के इरादे से गाया ।

राहुल - रीत न जानु, रिवाज न मानु
मैं ते ठहरा .........सादा बंदा

रूही ने सुना तो शर्मा गई और राहुल उसकी इस अदा पर फिदा हो गया । तभी रेहान ने फिर से अंशिका की ओर देखकर गाना गया ।

रेहान - बेचारा दिल मेरा
मेरा दिल......
तुझको ही ढूंढता रहता है

रेहान के गाने से अंशिका सिर्फ उससे नजरें बचाते हुए इधर उधर देखने लगी, जैसे वो उसके दिल के जज्बातों को जान गई हो । तभी आदित्य ने सौम्या का एक हाथ पकड़ा और बहुत ही रोमेंटिक अंदाज़ में सौम्या के सामने गाने लगा ।

आदित्य - आवारा, आवारा,
आवारा दिल मेरा
मेरा दिल .......
तुझको ही ढूंढता रहता है

सौम्या उसकी तरफ देख कर मुस्कुरा दी और फिर उसने भी नहले में दहला मारते हुए , गाने के कुछ बोल गुनगुनाए ।

सौम्या - कल परसों के लिए
न तो बरसों के लिए
तुझको है मांगा
हर जन्म के लिए

तभी शिवानी ने अपनी नजरें ऊपर की , तो पाया कि नील अभी भी उसे बड़े प्यार से देख रहा है । तो शिवानी ने उसे देखा और फिर और वह भी गाने लगी ।

शिवानी - हो मेरी तो दुआएं सारी
मेरी तो वफ़ाएँ सारी
जो भी हैं वो हैं मेरे
सनम के लिए

नील ने सुना तो तुरंत उसके जवाब में , गाने की एक लाइन कह दी ।

नील - हो मैं भी सजदे में झुका कर सर
दुआ में माँगता हूँ तुझे

जबकि आदित्य ने एक बार फिर बड़े प्यार से सौम्या को देखा और नील के बाद , गाने की एक लाइन उसने भी गुनगुना दी ।

आदित्य - न होगी आखिरी दम तक
ये चाहत कम

दोनों जोड़ियां शायद एक दूसरे से इन लफ़्ज़ों के माध्यम से , एक दूसरे को प्रॉमिस कर रही थी , कि वे कभी एक दूसरे से अलग नहीं होंगे । सभी को गाते देख , आरव ने अपना गला साफ किया , और फिर कायरा को देखते हुए उसने भी अपनी आवाज़ का जादू बिखेर दिया ।

आरव - आवारा दिल मेरा
मेरा दिल........
तुझको ही ढूंढता रहता है

कायरा ने सुना , तो बस मुस्कुराकर रह गई । फिर उसने भी कुछ लाइन , आरव की तरफ इशारा कर कह दी ।

कायरा - जब न मैं देखूं तुझे
जब न मैं सोचूं तुझे
मेरे दिन ढले ना
मेरी रात हो

आरव ने सुना , तो उसका दिल खुशी के मारे हिचखोले खाने को करने लगा । तभी इतनी देर से शांत बैठी रूही ने भी , राहुल की तरफ देखा और गाने लगी ।

रूही - कोई भी ज़माना आए
कोई भी ठिकाना आए
कोई संग हो न हो
तेरा साथ हो

राहुल ने रूही की तरफ देखा , तो समझ गया कि रूही उससे हमेशा साथ देने के लिए प्रॉमिस मांग रही है । राहुल ने आंखों के इशारों से ही उसे प्रॉमिस किया और फिर राहुल , उसे देखकर मुस्कुरा दिया और फिर उसकी तरफ प्यार से देखते हुए बोला ।

राहुल - तेरी यादों के साए में
मैं एक-एक पल बिताता हूँ

रूही ने सुना , तो शर्माकर मुस्कुरा दी । और इस तरफ आरव ने भी कायरा को अपने अंदाज में , गाने के साथ बताते हुए कहा ।

आरव - कहीं जाऊं तेरे चर्चा
तेरी बात हो...........

कायरा ने एक नजर आरव के अंदाज़ को देखा और फिर मुस्कुरा दी । तभी अंशिका को भी पता नहीं क्या सूझा , उसने भी रेहान की तरफ तिरछी निगाहों से देखा और फिर गाने की लाइन गुनगुनाने लगी ।

अंशिका - आवारा दिल मेरा
मेरा दिल..............
तुझको ही ढूंढता रहता है

रेहान अंशिका की नज़रों और उसके गाने को सुनकर, खुशी से फूला नहीं समाया । तभी आरव ने कायरा की तरफ एकदम कातिलाना अंजाद में देखा , जिससे कायरा ने शर्माकर अपनी पलकें नीचे कर लीं । तो आरव ने उसके इस अंदाज़ से घायल होकर , अपने दिल में हाथ रखते हुए गाया ।

आरव - आवारा, आवारा,
आवारा दिल मेरा
मेरा दिल.....,
तुझको ही ढूंढता रहता है ।

आरव के गाना खत्म करते ही सभी ने एक साथ खुद के लिए ही ताली बजाई। तो आरव को होश आया और उसने अपना हाथ अपने सीने से हटा लिया और सभी की इस हरकत पर मुस्कुराने लगा........... ।

क्रमशः

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