विश्वासघात(सीजन-२)--भाग(५) in Hindi Novel Episodes by Saroj Verma books and stories Free | विश्वासघात(सीजन-२)--भाग(५)

विश्वासघात(सीजन-२)--भाग(५)

लेकिन आपने ये नहीं बताया कि आप उस बच्ची से इतनी नफरत क्यों करते हैं,?आखिर उस बच्ची ने आपका क्या बिगाड़ा हैं?शकीला बानो ने विश्वनाथ से पूछा।।
उसने नहीं ,उसकी माँ ने बिगाड़ा था और अपनी माँ के कर्मों की भरपाई उसे ही करनी पड़ेगी,विश्वनाथ बोला।।
ऐसा इसकी माँ ने क्या किया था आपके साथ ?जो आप उस बच्ची से बदला लेने पर अमादा हैं,शकीला बानो ने पूछा।।
तुम्हें ये सब जानने की कोई जुरूरत नहीं है,तुम्हें जो काम सौंपा गया है तुम बस वो ही करो,अब लड़की चौदह साल की हो चुकी है,उसके रियाज़ मे कोई कमी नहीं आनी चाहिए,उसके खाने पीने का ख़ास ख्याल रखों,ताकि उसकी खूबसूरती निखर कर आए,जिससे आगे चलकर उसे किसी भी बड़े क्लब में कैबरे डान्सर रख लिया जाए,विश्वनाथ बोला।।
लेकिन क्या महफ़िलों में और क्लबों में उससे नचवाना ठीक लगेगा,वो तो मुझे एक भले घर की लड़की मालूम होती है,शकीला बानो बोली।।
भले घर की है इसलिए तो उसे ऐसा बनाना है,विश्वनाथ बोला।।
हुजूर! क्यों बच्ची की जिंदगी बर्बाद करने पर तुले हैं आप! शकीला बोली।।
उसकी जिन्दगी बर्बाद होगी तभी तो मेरे कलेजे को ठण्डक मिलेगी,विश्वनाथ बोला।।
लेकिन हुजूर....ना जाने क्यों? मुझे उस पर तरस आता है,शकीला बोली।।
ऐसा है,तुम्हें अगर अपनी दरियादिली दिखाने का इतना ही शौक़ है तो तुम बच्ची की परवरिश करना छोड़ दो,मैं किसी और औरत को देखता हूँ उसकी परवरिश के लिए,विश्वनाथ बोला।।
हुजूर!मैने ऐसा तो नहीं कहा कि मै ये काम छोड़ना चाहती हूँ,शकीला बोली।।
ठीक है,मैं ये बताने आया था कि आज से एक टीचर लाज को अंग्रेजी पढ़ाने और अंग्रेजी डान्स सिखाने  आएगी और टीचर के सामने लाज का नाम जूली बताना,अब से लाज का यही नाम चलेगा,विश्वनाथ बोला।।
हुजूर!कम से कम बच्ची की पहचान तो मत छीनिए,शकीला बोली।।
मेरे मामले में तुम्हें ज्यादा टाँग अड़ाने की जुरूरत नहीं है और तुम ये काम मुफ्त मे नहीं कर रही हो,तुम्हें इसके पैसे मिलते हैं,समझी!  इतना कहकर विश्वनाथ बाहर गया , अपनी मोटर में बैठा और चला गया।।
      शकीला बानो बस चुपचाप विश्वनाथ को जाते हुए देखती रही,तभी शकीला के पास चौदह साल की लाज आकर बोली____
   कौन आया था खा़लाजा़न?
शकीला ने लाज के सवाल का जवाब देते हुए कहा___
तेरी बदकिस्मती...
क्या कहती हो? खालाजा़न!..मेरी बदकिस्मती....! ये कैसा जवाब हुआ भला! बताओ ना! कि  कौन थे वो? लाज ने फिर पूछा।।
ये शख्स वही तो था जो तेरी परवरिश का खर्चा उठा रहा है,शकीला ने जवाब दिया।।
तो ये कभी मुझसे मिलते क्यों नहीं? लाज ने पूछा।।
वो तुझसे मिलना नहीं चाहते मेरी बच्ची!शकीला ने जवाब दिया।।
लेकिन क्यों? उन्होंने मुझे आज तक अपना चेहरा भी नहीं दिखाया और ना मुझसे मिले,लाज बोली।।
रहने दे ना बेटी! मत पूछ मुझसे इतने सवाल,मैं तेरे सवालों के जवाब नहीं दे पाऊँगी,शकीला बोली।।
       तो किससे जाकर अपने सवालों के जवाब पूछूँ,एक आपके सिवाय मेरा इस दुनिया में हैं ही कौन?नौ साल की थी,तो पता नहीं कौन  उस रात बेहोश करके मुझे, मेरे घर से उठा लाया और एक अँधेरी सी कोठरी में कैद कर दिया,दो दिनों तक मैं उस अँधेरी कोठरी में भूखी प्यासी बन्द पड़ी रही,आखिर छोटी सी बच्ची भूख प्यास कब तक सहती,बेहोश हो गई और जब होश आया तो खाल़ाजान मै आपकी बाँहों में थी,
          पता नहीं कौन मुझे आपके पास छोड़कर गया था?आपने कभी कुछ नहीं बताया,मेरी माँ,मेरे पापा ,मेरा भाईं और अनवर चाचा सब मुझसे बिछड़ गए,मैने आपको अपने शहर का नाम पता भी बताया लेकिन आप कभी भी मुझे वहाँ लेकर नहीं गई और आपने ये सब करने की कोई वज़ह भी तो नहीं बताई।।
   मैं अभी तुझे कुछ नहीं बता सकती मेरी बच्ची! ख़ुदा के लिए शांत हो जा....शांत हो जा,शकीला बोली।।
        कैसे शांत हो जाऊँ खा़लाजन!उस रात जो मेरी जिन्दगी पर कह़र टूटा था,वो बस मैने सहा है और अब तक सह रही हूँ,आपको क्या पता कि अपनों का बिछड़ना क्या होता है?लाज रोते हुए चीखी।।
    तू मुझसे कहती हैं कि अपनों का बिछड़ना क्या होता हैं? तुझे मेरी जिन्दगी के बारें में क्या बता है?जिस दर्द की तू बात कर रही है ,मैने भी इस दर्द को झेला हैं,मेरा भी एक खुशहाल परिवार था,लेकिन मेरी अम्मी अल्लाह को प्यारी हो गई तो मेरे अब्बू ने दूसरा निकाह पढ़वा लिया,मेरी सौतेली अम्मी के किसी और के साथ नाजायज सम्बन्ध थे,मेरी सौतेली अम्मी ने  मेरे अब्बू को ज़हर देकर मार दिया और सारी जायदाद पर कब्जा करके बैठ गई और उनके प्रेमी ने मुझे इस बाज़ार में लाकर बेच दिया और इतनी कम उम्र में इस दुनिया ने मेरे पैरों में घुँघरू बाँध दिए गए,लेकिन जो तेरी परवरिश के लिए पैसे दे रहा है,वही तुझे पालने पोसने के लिए मुझे उस कीचड़ से निकाल कर ले आया,तबसे मैं तेरे साथ इस घर में रहकर तेरी परवरिश कर रही हूँ,
     मैं उस आदमी का एहसान मानूँ या तुझे लेकर उसको कोसूँ कि तुम क्यों बच्ची की जिन्दगी बर्बाद कर रहे हो? बेटी मैं क्या करूँ ?मुझे खुद़ कुछ समझ में नहीं आता,शकीला बोली।।
    शकीला की बातें सुनकर फिर लाज कुछ ना बोल सकी......
शाम को अंग्रेजी सिखाने वाली टीचर आई और उसे शकीला ने लाज का नाम जूली बताया,उसने लाज को अंग्रेजी पढ़ाना और अंग्रेजी डान्स की तालीम देनी शुरू कर दी,ऐसे ही जिन्दगी के पाँच साल और गुजर गए,सोलह साल की होते होते लाज डान्स में निपुण हो गई और अंग्रेजी गानों की धुनों पर बिजली की तरह थिरकने लगी,तब विश्वनाथ को लगने लगा कि लाज अब इतनी काबिल हो चुकी है कि कोई भी क्लब उसे अपने यहाँ कैबरे डान्सर के रूप में रख लेगा।।
        इस विषय में विश्वनाथ ने शकीला से कहा, लेकिन शकीला बोली___
हुजूर!मैं किस मुँह से लाज से ये कहूँ कि तुम्हें ये तालीम केवल कैबरे डान्सर बनने के लिए दी गई है,शकीला बोली....
ये तो तुम्हें कहना पड़ेगा,शकीला!,विश्वनाथ बोला।।
ना हुजूर!ये मुझसे ना हो पाएगा,मैने उसे अपनी बच्ची की तरह पाला है,मै उससे कैसे कहूँ कि तुम्हें अब महफ़िलों में अपने बदन की नुमाइश करनी पड़ेगी,इतने सारें लोगों का अपनी अदाओं से दिल बहलाना पड़ेगा,लोंग शराब पीकर उसे गंदी निगाहों से देखेगें,ना!...ना!...मुझसे ये ना होगा,शकीला चीखी।।
     तुम ये क्यो नहीं सोचती कि वो क्लब में कैबरे करेंगी तो उस पर दुनिया नोट लुटाऐगी,वो लाखों में खेलेगी....लाखों में...विश्वनाथ बोला।।
   इज्ज़त बेच के जो पैसा कमाया जाएं,वो भला किस काम का हुजूर! शकीला बोली।।
आजकल के जमाने में इज्ज़त और ज़मीर सब पैसा ही होता है,जो बातें तुम कर रही हो उनका इस जमाने में कोई मोल नहीं है,ये बकवास बातें तुम किसी और से जाकर करो,कल ही जूली को तुम नाइट स्टार क्लब भेज देना,वहाँ के मालिक को मैं जानता हूँ,वो फौरन ही उसे क्लब में रख लेगा,अभी मैं जाता हूँ और इतना कहकर विश्वनाथ चला गया।।
  उधर शकीला ने लाज से क्लब जाने को कहा.....
लाज भी क्या करती,शकीला और उस अंजान आदमी के एहसानों तले जो दबी थी,इसलिए मजबूरी में उसने क्लब में डान्सर बनना मंजूर कर लिया......
  इसी तरह पाँच साल और बीत गए,अब लाज चौबीस साल की हो गई थी,इन पाँच सालों में लाज ने जूली बनकर बहुत नाम और पैसा कमाया,उसके पास अब उसका खुद का बंगला और कई मोटरें हो गईं,वो देर रात गए क्लब से नशे में धुत लौटती और आकर सो जाती,शकीला बानो उसकी ऐसी हालत देखकर रो पड़ती और इन सबका जिम्मेदार वो खुद को समझती।।
        अब जूली खुद को बहुत अकेला महसूस करती,ये दौलत और ये शौहरत उसे राश़ ना आ रही थी,उसके अन्दर ना कोई जज्बात थे और ना कोई उमंग, वो सिर्फ़ एक बेजान पुतला बनकर रह रही थी,वो सिर्फ़ लोगों के सामने खुश रहने का दिखावा करती थी लेकिन अन्दर से वो बिल्कुल टूट चुकी थी,वो  अपने दुखों से भाग रही थी,लेकिन उसके दुःख उसका पीछा नहीं छोड़ रहे थे।।
    वो जब कभी अपने इस दौलत शौहरत की दुनिया से तंग आ जाती तो रात में छुट्टी वाले दिन दरिया के किनारे जाकर बैठ जाती और शराब पीकर अपना दुख हल्का कर लेती ....
    इसी तरह एक दिन वो रात के समय अपनी मोटर से दरिया किनारे पहुंची,उसने डिग्गी से शराब की बोतल निकाली और ड्राइवर से घर जाने को कहा....
   ड्राइवर ने पूछा___
लेकिन मेमसाहब! आप घर कैसीं आऐगी?
तुम मेरी चिन्ता मत करो,मैं आ जाऊँगी,मैने कहा ना कि तुम घर जाओ,जूली बोली।।
और इतना सुनकर ड्राइवर मोटर लेकर घर चला गया....
   इधर जूली ने दरिया किनारे बैठकर शराब की पूरी बोतल खत्म की और सड़क पर लड़खड़ाते हुए चल दी...
    उसे पता ही नहीं था कि उसके पग़ कहाँ पड़ रहे हैं,वो अपने ग़मो मे डूबी हुई मदहोश सी चली जा रही थी,तभी उसकी सैण्डल की हील टूट गई और वो सड़क पर गिर पड़ी,उसको सड़क पर गिरा हुआ देखकर एक टैक्सी उसके पास रूकी और उसका ड्राइवर उतर कर उसके पास आ कर बोला....
    क्या हुआ मेमसाब? आपको कोई मदद चाहिए?
  नहीं मुझे किसी की मदद की जुरूरत नहीं है,तुम जा सकते हो,जूली बोली।।
  आपकी हालत ठीक नहीं लग रही हैं,आप कहें तो मैं आपको आपके घर तक छोड़ दूँ,टैक्सी ड्राइवर बोला।।
मैने कहा ना! मुझे किसी की मदद नहीं चाहिए,फिर मुझे क्यों परेशान कर रहे हो,जूली ने लड़खड़ाती जुबान में कहा.....
   फिर जूली ने खड़े होने की कोशिश की लेकिन वो खुद को सम्भाल ना पाई....

क्रमशः___
सरोज वर्मा___

     


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