इश्क़ है तुमसे ही - 29 (रुद्राक्ष-देव का गुस्सा) in Hindi Novel Episodes by Jaimini Brahmbhatt books and stories Free | इश्क़ है तुमसे ही - 29 (रुद्राक्ष-देव का गुस्सा)

इश्क़ है तुमसे ही - 29 (रुद्राक्ष-देव का गुस्सा)

(कहानी को समझने के लिए आगे के पार्ट जरूर पढ़ें.....)











रुद्राक्ष वापस रतनगढ़ आ गया।कुछ दीन यू ही बीत जाते हैं।इन दिनों शीवांगी रुद्राक्ष के बिल्कुल सामने नही आति रुद्राक्ष को उसका यू  इग्नोर  करना 
अच्छा नहीं लग रहा था।एक दिन शीवांगी देव के साथ रतनगढ़ सोनाली का कुछ सामान लेने आई थी।रुद्राक्ष सब के साथ नीचे बैठ गया इस उम्मीद में की शीवांगी उससे बात करे,पर शीवांगी तो शीवांगी है बात करना दूर नज़रे उठा कर भी उसने रुद्राक्ष को नही देखा और ये रुद्राक्ष को बहुत ज्यादा खल गया।
शीवांगी सोनाली के कमरे थी वहां रुद्राक्ष ने आके दरवाजा बंद कर दिया,शीवांगी को देख कहा;आप मुझे इग्नोर कर रही है,क्यों.?

शीवांगी बिना उसकी तरफ देखे ,आप ने जो कहा वही हम कर रहे हैं।

रुद्राक्ष गुस्से 😡से उसकी कलाई पकड़ मोड़ के उसकी पीठ से लगा देता है;-देखिये ,मुझे.!

शीवांगी नज़रे नही उठाती।रुद्राक्ष फिरसे😡:-मेने कहा देखिये मेरी तरफ,

शीवांगी उसे गुस्से😡 से धक्का देकर:-क्यों.??क्यों देखे .?क्यों बात करे ,आप ने ही कहा था न मुझसे दूर रहो तो दूर है हम अब क्या.??उसकी आँखों मे नमी उतर आई थी।
रुद्राक्ष शांत लहज़े में कहता है, पता नहीं पर मुझे अच्छा नहीं लगता ओर आप मुझे वो चेन भी लोटा दे.!
शीवांगी:-वो आपका नही है।
रुद्राक्ष:-वो तब मेरा हुआ जब आपने मुझे गिफ्ट किया था ओर शायद सब जानते है कि गिफ्ट की हुई चीज़े वापस नही लिया करते।
शीवांगी:-हमने कहा ना कि वो आपका नही है,बात यही खत्म.!!
रुद्राक्ष:-वो चेन सीधे सीधे मुझे दे दीजिए वरना में सब के सामने आपसे लूंगा..!
शीवांगी कुछ नही कहती तो रुद्राक्ष उसके पास आ जाता है।वो कहता है;,,okk जैसी आपकी मर्जी i promise u ,वो चेन आप सब के सामने मुझे पहनाएगी..!
रुद्राक्ष चला जाता है।शीवांगी भी देव के साथ वापस जैसलमेर चली जाती है।रुद्राक्ष अपने कमरे में खिड़की के पास खड़े होते चांद को देख कहता है:-जब तक आपको नही देखा था नही जाना था तब शायद गुस्सा करना आसान सा था।जब पहलीबार आप जैसलमेर गई तब भी बेचेन था में..!ये जो भी एहसास है,अब में नही भागने वाला इससे अब शायद मेरा सुकून है आप अगर इसे प्यार कहते है तो ठीक है यही ही सही प्यार करता हूं में आपसे अब आप सिर्फ मेरी है और में आपका।शीवांगी जी आप है रुद्राक्ष प्रताप सिंह का प्यार..!ये बोल वो खुद ही मुस्कुरा ने लगा.!!

शीवांगी भी अपनी सोच में:-हम नही जानते आप क्या सोच रहे है बस इतना जानते है,आपने बहुत देर कर दी रुद्र..!

अगले दिन--देव का हॉस्पिटल
देव पुरी कोशिश करता हैं वीना को हंसाने की,खुश रहने की ओर खास सोहम के दीये हुए जख्म को भुलाने की..!देव जितना हो सके उतना सोनाली का जरिया बनाके वीना को सोहम से दूर रख लेता था।सोहम इन दिनों पूरी तरह से बौखलाया हुआ था, की वीना उसे कम दिखती थी।
उसी दिन सोहम शराब के नशे में हॉस्पिटल पहुंच जाता हैं,वो वीना को वहाँ से जबरदस्ती ले जाने की कोशिश करता है उस पर हाथ भी उठाता है, शोर शराबा सुनकर देव भी उस ओर आता है।जब वो देखता है तो उसे भी गुस्सा आता है।सोहम को हाथ उठाते देख वो बीच मे आ जाता है।

सोहम😡:-अबे ओ,हट्ट जा मेरे रास्ते से..!

देव😤:-तुम होश में नही हो, चुपचाप घर जाओ..!

सोहम:-में इसे लिए बिना नहीं जाऊंगा।,वैसे तू होता कोन है.?पति-पत्नी के बीच में आनेवाला।

देव:-तमाशा मत करो और जाओ यहाँ से, इससे पहले में अपना आपा खो दूँ.!

सोहम:-साला,तुझे इससे क्या.? हट्ट वो वीना की तरफ बढ़ता है ।

देव वीना को अपने पीछे कर लेता है।वीना भी डर के मारे देव की बाहे कसकर पकड़ लेती है।उसे देख सोहम :-नया यार है क्या तेरा,इसलिये तो तू घर नही आति ।देव को बहुत गुस्सा आता है पर वीना की वजह से उसने खुद को रोक रखा था।
सोहम:-एक फायदे की बात कहु डॉक्टर,छोड़ दे इसे साली मन बहलाने के भी काम नहीं आएगी।

ये सुनते ही देव उसे मारने लगता है।दोनो में बीच में हाथापाई होने लगती है कुछ देर में देव उसे बाहर फिकवा देता है।सोहम का ड्राइवर उसे घर लेकर चला जाता है।देव के हाथ मे भी चोट लग जाती है।
देव के केबिन में वीणा उसे दवाई लगाने आति है।वो दवाई लगाते हुए:-दोस्त,आप सोहमजी से दूर रहे वो अच्छे इंसान नही है।

देव:-वाह,मुझे लगा आपको पता नहीं है।

वीना:-वो,

देव गुस्से से उसका हाथ झटक देता है😡😡:-क्या वो,हं.!उस जैसे घटिया इंसान को जवाब देना चाहिए और शायद आपने सुना नही है कि जुल्म करने वाले से ज्यादा गुनहगार झुलम सहने वाला होता है।आप उसे जवाब दिया कीजिए..!
आज पहलीबार वीना ने देव को गुस्से में देखा था।
वो मुस्कुरा ☺️कर बोली;,आप गुस्सा भी करते हैं.?आज पता चला।

देव😒 :-बात को घुमाइए मत सखी में कोई बच्चा नहीं हूं जो आप मुझे बहला लेगी।

वीना😄:-मेने कब कहा आप बच्चे हैं।आप तो दोस्त है..!

देव😒:-में मजाक नहीं कर रहा हूँ, सखी..!

वीना 😢:-हम इस बारे मे बात ना करे दोस्त..!उसकी आँखों मे नमी उतर आई जिसे देख देव को बिल्कुल अच्छा नहीं लगा।वो नही चाहता था कि वीना सैड फील करे उसने बात घुमाते हुए:-सखी,चाय मिलेगी क्या.?
वीना:-जरूर में अभी लाई..!
देव :-साथ मे चलते हैं फिर वही से घर निकल जाएंगे,बड़ी मा ने कहा है कि आपको सोनाली भाभी के साथ रहना है कल सब भी जैसलमेर आही रहे हैं।किसी पूजा के मुहूर्त के लिए ।
वीणा:-जी..!
दोनो महल चले जाते है।
अगले दिन सभी पंडितजी से मुहर्त निकलवा कर आराम से बैठे थे।गायत्रीजी सभी बच्चो को वसंतपूजा का महत्व समझा रही थी।फिर  बाते होने लगी।तभी 

रुद्राक्ष:-मासां कुँवरिसा से कहिये न कि मेरा चेन मुझे लोटा दे..!

सुमित्राजी:-कैसा चेन रुद्र..!

रुद्राक्ष:-वो मासां मेरा चेन है मुझे बहुत पसंद है पर कुँवरिसा नही देती मुझे..!

देव:-सोना क्या रुद्राक्ष सही कह रहा है।

शीवांगी कुछ कहती उससे पहले ही रुद्राक्ष उसके कान में धीरे से फुसफुसाया:-अगर आपने मना किया तो में सबको बताऊंगा की होटल मेनेझर ने आपको मेरी वाइफ कहा जिससे आप ने मुझसे झगड़ा कर लिया सोच लीजिये...!

शीवांगी उसे घूर 😒😡के देखने लगी।फिर बोली:-हा भाई था पर अब नही है।

देव:-मतलब सोना.?

शीवांगी:-मतलब ये भाई की हमने रखा था ।पर अब हमें याद नही की कहा छूट गया शायद मुंबई में ,या फिर एयरपोर्ट पे ,वो क्या है ना हमारा बेग भी चोरी हो गया था शायद उसी में ..!sorry mr, singh.!

सुमित्राजी:-ओफ्फो लाडो,ये तो अच्छा नहीं हुआ रुद्र को वैसे भी कम चीज़े पसंद आती है।अब..!

शिवांश:-कोई बात नही बड़ी मा आप मुझे बता दीजिए में सैम वैसा ही बनवाके दे दूंगा।

शीवांगी ख़ुशी से:-हा, ये सही है भैया..!

रुद्राक्ष गुस्से से:-कोई जरूरत नही है.!
शीवांगी छत पे होती है वहा रुद्राक्ष आता है शीवांगी उसे देख जाने लगती है तो वो उसे पकड़ के दीवार से सटा देता है।"आपको लगता है आप जीत गई नही आप हार गई वो चेन तो में आपसे लेकर ही रहूंगा ये मेरा वादा है आपसे पर अब आप खुद मुझे वो चेन देंगी बहुत प्यार से मेरे गले मे डालेगी।ये याद रखना..!"वो वहा से चला जाता है।

सब वापस रतनगढ़ चले जाते है।कुछ 4 दिन बाद ही वसंतपूजा थी।वसंतपूजा के ठीक एक दिन पहले शीवांगी शिवराज जी,गायत्रीजी,देव और शिवांश को बुलाती है।वो उन सबको विनय जी के 20 साल पहले वाली बाते बताती है जिसे सुन सब शोक में चले जाते हैं।
शिवराज जी:-इतनी बड़ी साजिश, यकीन नही होता..!
गायत्रीजी:-वो भी अपनो की.!
शिवांश:-लाडो,आपने ये सब अकेले किया मुझे तो बता देती।
देव:-अच्छा है कि सच सामने है वैसे सबको कब बताना है सोना.!
शीवांगी:-कल वसंतपूजा में इससे अच्छा कोनसा दिन होगा.?
शिवराज जी:-हम्म,ठीक है हम आपके साथ है बेटा.!
शीवांगी:-हमे पता है पापा,पर हम इतना चाहते थे कि हमारी फैमिली को सब पता हो।
शिवांश:-वैसे भी गद्दारो ओर चलबाज़ों का भरोसा नही किया जाता ।
शिवराज जी शीवांगी के सर पर हाथ फेरते:-हमारी बेटी ,आज हमें आप पर गर्व है।
देव:-अब वीणा को भी न्याय मिलेगा।
शिवांश:-कल की पूजा धमाकेदार होगी,उस भूसे भरे दिमाग को भी समझ आएगा,हुंह..!
शीवांगी:-भैया आप भी ना.!
देव :-चलो good night.!
सब सोने चले जाते है।अपनी अपनी सोच में गुम,
शीवांगी कमरे में:-कल हम आपको आपके पापा लोटा देंगे ,रुद्र.!आपसे किया हर वादा हमने निभाया है कल आखिरी वादा भी निभा देंगे..!

देव:-कल सच के सामने आने से वीणा के लिए सही होगा वो आज़ाद हो जाएगी इस बेफालतू के रिश्ते से.!

शिवांश कुशन को समझा रहा था.।'कुशन,कल हमे सबसे ज्यादा सतर्क रहना है।
कुशन;-जी कुंवरसा आप फिक्र ना करे।
रात गुझर जाती है....











……….……….......................बाकी अगले पार्ट में...!










Rate & Review

Saroj Bhagat

Saroj Bhagat 5 days ago

ashit mehta

ashit mehta 4 months ago

N  boss

N boss 4 months ago

Usha Dattani Dattani
Ranjan Vaghela

Ranjan Vaghela 4 months ago