Ahsaas pyar ka khubsurat sa - 49 in Hindi Novel Episodes by ARUANDHATEE GARG मीठी books and stories PDF | एहसास प्यार का खूबसूरत सा - 49

एहसास प्यार का खूबसूरत सा - 49



इधर राजवीर को बार - बार आरव के द्वारा की गई अपनी बेज्जती और कायरा से माफी मांगना याद आ रहा था । उसने गुस्से से उबल कर , अपने पूरे कमरे के सामानों को तोड़ दिया था । दस मिनट में ही उसने अपने कमरे का नक्शा ही बदल डाला था । रह - रह कर उसे आज की घटनाएं याद आ रही थीं । वहीं सब याद कर, गुस्से से उबलते हुए उसने खुद से कहा ।

राजवीर - ये तुमने ठीक नहीं किया आरव....। मेरे ही पिता के सामने तुमने मेरी बेज्जती की । मुझे तुम्हारी वजह से सबके सामने अपना सिर झुकाना पड़ा , अपने पिता की कड़वी बातें सहनी पड़ी । साथ में तुमने आज कायरा से , जिसकी दो कौड़ी की भी वैल्यू नहीं है मेरे सामने , उसके पैरों पर गिरा कर तुमने मुझसे माफ़ी मंगवाई.....। बहुत गलत किया आज तुमने आरव मेरे साथ , बहुत गलत......। ( कुछ याद कर ) लेकिन इन सब में कायरा की किडनेपिंग की बात कहां से आयी ...??? जब मैंने कायरा की किडनेपिंग करवाई ही नहीं है , तो इल्जाम मेरे ऊपर कैसे आया ....???? और विनय...., विनय ने भी मेरे खिलाफ बोला । कौन है जो मेरे और कायरा, आरव , हम तीनो के साथ गेम खेल रहा है ....???? किसने मुझे फंसाया है, जिसमें विनय भी इन्वॉल्व था । मेरे अलावा और कौन है , जो कायरा को हार्म पहुंचाने की सोच सकता है ।

तभी उसे मिशा का खयाल आया । उसका खयाल आते ही , उसने तुरंत अपना फोन ढूंढा और मिशा को कॉल किया । मिशा ने फर्स्ट रिंग में ही कॉल उठा लीं, जैसे वो उसी के कॉल का वेट कर रही हो । मिशा के कॉल रिसीव करते ही राजवीर ने अपनी आंखें लाल करते हुए उससे कहा ।

राजवीर - कायरा का किडनैप तुमने करवाया है न....????

मिशा ( शातिर मुस्कान के साथ कहती है ) - यस राजवीर ...। मैंने ही करवाया है । लेकिन तुमने मुझे कॉल लगाने में , बड़ी देर कर दी । जान सकती हूं क्यों ....??? ओहो......, मैं तो भूल ही गई थीं, इतनी इंसल्ट सहने के बाद , तुम जरूर अपना गुस्सा कम करने के लिए , अपने घर की बाकी चीज़ों को नुक़सान पहुंचा रहे होगे...।

राजवीर ( गुस्से से दांत पीसते हुए कहता है ) - क्यों किया तुमने ये सब मिशा ...???? क्या जरूरत थी कायरा के साथ ये सब करने की ...??? अगर उसे कुछ हो जाता, तो आज मैं तुम्हें जिंदा दफना देता मिशा....।

मिशा - ओफ्फो राजवीर....!!! इतना गुस्सा सेहत के लिए नुकसान दायक है । और कायरा के साथ मैंने ऐसा क्यों किया , ये तुम बहुत अच्छी तरह से जानते हो । वैसे लास्ट लाइन क्या कहीं तुमने ....!!!! हां...., अगर उस कायरा को कुछ हो जाता, तो तुम मुझे जिंदा दफना देते ....। ये बताओ राजवीर....., जब तुमने कायरा पर अटैक करवाया था , तब तुम्हें कायरा का खयाल नहीं आया , कि उसे अगर कुछ हो जाता तो क्या होता....????

राजवीर - बात को घुमाने की कोशिश मत करो मिशा....। क्योंकि मैं बहुत अच्छी तरह से जानता हूं तुम्हें , तुमने आज जरूर कायरा की जान लेने के बारे में प्लान किया रहा होगा ।

मिशा - प्लान तो यही किया था , पर क्या करूं ......., मेरे हीरो आरव ने उस कायरा को बचा लिया । अब क्या है न , मेरा हीरो ये नहीं जानता , कि उसकी असली हीरोइन वो कायर नहीं , बल्कि मैं हूं । इस लिए मैंने सोचा , कि आरव जिसे अपनी हीरोइन मानने की गलती कर रहा है , उसे हमेशा के लिए ही अपने हीरो से दूर कर दूं ।

राजवीर - इन सब में तुमने मुझे क्यों फंसाया ...???

मिशा - वो क्या है न राजवीर....., अपने आपको आगे करके मैं आरव के सामने खुद को गिरना नहीं चाहती थी । इस लिए मुझे किसी न किसी को तो आरव की नज़रों के सामने लाना था , ताकि मेरे गुनाह का ठीकरा उसके ऊपर फूट सके और मुझ पर एक दाग भी न पड़े । और उसके लिए इस वक्त , तुम ही मुझे बेस्ट चॉइंस लगे । तुम्हारे प्लान्स का पता , तो मुझे कल ही चल गया था । इस लिए मैंने भी अपनी चाल चल दी , और खुद घर में आराम से बैठ कर , सारे खेल का लुफ्त उठाने लगी । वैसे घर बैठे काम करने का मजा ही कुछ और होता है । वो कहते हैं आजकल , वर्क फ्रॉम होम.....। मैंने वहीं किया है , और तुमने अपनी प्लानिंग को अंजाम देकर मेरा काम आसान कर दिया । इसके लिए स्पेशल थैंक्स राजवीर तिवारी.....।

राजवीर - ये तुमने अच्छा नहीं किया मिशा । तुम कायरा को अपने रास्ते से हटाने की धुन में ये भूल गई हो , कि हमने आरव और कायरा को अलग करने के लिए साथ में मिलकर काम करने की डील की थी.... ।

मिशा ( तुरंत कहती है ) - ये डील तो तुमने उसी दिन तोड़ दी थी राजवीर, जब तुमने बिना मुझे बताए कायरा पर अटैक करवाया था।

राजवीर - वो सिर्फ मैंने आरव और कायरा को डराने के लिए किया था ।

मिशा - तुमने उन्हें डराया और मैंने अपनी सबसे बड़ी दुश्मन को रास्ते से हटाने का प्लान बनाया , सिम्पल....।

राजवीर - मिशा तुम्हें मेरे खिलाफ जाकर , कायरा को नुक़सान पहुंचाना, बहुत भारी पड़ सकता है ।

मिशा - हल्की चीज़ों में मुझे मजा भी नहीं आता राजवीर । खैर...., सारा दिन काम करते - करते मैं थक चुकी हूं और मुझे भूख भी बहुत तेज़ लगी है । इस लिए सो सॉरी राजवीर ....., मैं तुमसे इससे ज्यादा बात नहीं कर सकती । वरना मैं खाना कैसे खाऊंगी , और खाऊंगी नहीं तो अपने अगले प्लान की प्लानिंग कैसे करूंगी । सो ब.... बाय राजवीर…..। सी यू सून......।

इतना कह कर मिशा ने कॉल डिस्कनेक्ट कर दिया । और मिशा की बात सुनकर राजवीर का गुस्सा और बढ़ गया । उसने फोन अपने बिस्तर पर पटक कर खुद से कहा ।

राजवीर - ये लड़की....... , जिसे प्लानिंग की पी भी अच्छे से नहीं पता । वो मुझे फंसाएगी .....। मुझसे कॉम्पिटीशन करेगी और कायरा को अपने रास्ते से हटाएगी । मैं जब तक जिंदा हूं मिशा , तब तक कायरा को मेरे अलावा और कोई नुक़सान नहीं पहुंचा सकता । ये सिर्फ मेरा हक़ है और मेरा ही रहेगा । ( बिस्तर के किनारे पर बैठ कर , फ्लॉवर पॉट के टुकड़ों को अपने जूतों से कुचलते हुए कहता है ) अगर आज चंदन ने आरव के सामने अपना मुंह नहीं खोला होता , तो आरव मेरी इतनी बेज्जती नहीं कर पाता । न ही सच सामने आता और न ही आरव की बात पर कोई विश्वास करता । और न ही ये मिशा मुझसे अपनी बराबरी करती । चंदन ......., धोखा दिया है तूने और वो भी मुझे । तुझे तो इसकी सज़ा मिलनी चाहिए ।

इतना कह कर उसने वापस से अपना फोन उठाया और अपने किसी आदमी को कॉल किया । सामने से कॉल रिसीव होते ही राजवीर ने कहा ।

राजवीर - मुझे चंदन और उसके पूरे परिवार की लाशें , अगले एक घंटे के अंदर चाहिए ।

आदमी - माफ कीजिएगा साहब ....। लेकिन चंदन तो अपना आदमी है , फिर आप उसे जान से मारने के लिए क्यों कह रहे हैं ।

राजवीर - अपना आदमी है , इसी लिए उसे मारना चाहता हूं । बताना चाहता हूं उसे , कि खुद के बॉस को धोखा देने का अंजाम सिर्फ और सिर्फ मौत होती है ।

आदमी - आपका काम हो जायेगा साहब ।

आदमी के मुंह से इतना सुनकर राजवीर ने कॉल डिस्कनेक्ट कर दिया । और उसने खुद से जलती हुई आंखों के साथ कहा ।

राजवीर - अब पता चलेगा तुझे चंदन , कि तूने कितनी बड़ी ग़लती की है । और उस आरव को भी ये समझ आएगा , कि मेरे आदमी को अपनी तरफ करने का अंजाम क्या होता है ।

इतना कह कर राजवीर हल्का सा जहरीली मुस्कान मुस्कुरा दिया । इधर आरव ने कायरा को घर ड्रॉप किया और उसने अपनी कार वापस अपने ऑफिस की तरफ मोड़ दी , तभी उसे आदित्य का कॉल आया । और उसने आ रहा हूं , बोलकर तुरंत अपनी गाड़ी की स्पीड बढ़ा दी ।

इधर रात के दस बज चुके थे । चंदन और उसका परिवार सो रहे थे । सभी गहरी नींद में थे , लेकिन चंदन आज की हुई सारी घटनाओं के बारे में सोच रहा था । अब उसे समझ नहीं आ रहा था , कि वो काम ढूढने के लिए कहां जाए । उसकी नौकरी भी चली गई थी और राजवीर की सच्चाई बताने के बाद अब राजवीर भी उसे काम नहीं देगा । यही सोच - सोच कर उसे अपने परिवार की चिंता हो रही थी । तभी उसे अपने घर के किचेन से कुछ बर्तन गिरने की आवाज़ आयी । उसने तुरंत उठ कर उस तरफ अपनी नजरें घुमाई , पर उसे वहां कोई नहीं दिखा । उसे लगा कि किचेन में बिल्ली होगी , सोच कर वह वापस अपने बिस्तर पर लेट गया और फिर से आज की बातों के बारे में सोचने लगा । कुछ सेकंड्स ही बीते थे , कि अचानक उसे ऐसा लगा कि कोई उसके कमरे में है । वह दोबारा अपने बिस्तर से उठा और उसने पूरे कमरे में अपनी नजरें दौड़ाई , पर उसे कुछ नहीं दिखा । उसका वहम होगा सोचकर , उसने ध्यान नहीं दिया और अपने बगल में सोये हुए बीबी और बच्चो को देखकर वह हल्का सा मुस्कुरा दिया , और फिर वह भी सो गया । उसके आंख बंद करते ही , राजवीर का एक आदमी उसके जस्ट पीछे आकर खड़ा हो गया और बिस्तर के दूसरी तरफ एक आदमी उसकी बीबी की ओर खड़ा हो गया । दोनों के हाथों में गन थी , जिसमें उन्होंने साइलेंसर लगाया हुआ था , ताकि आवाज़ चंदन के मोहल्ले वालों तक न जाए । चंदन के साइड खड़े आदमी ने , चंदन की बीबी के साइड खड़े आदमी को गन चलाने का इशारा किया और जैसे ही उन दोनों ने गन का ट्रिगर दबाया , वैसे ही उन दोनों का हाथ किसी ने छत की तरफ कर दिया और गोली छत की तरफ चल गई । उन दोनों आदमियों ने अपने हाथो को पकड़े हुए आदमियों की तरफ देखा , तो हैरानी और डर से उनकी आंखे चौड़ी हो गई । पूरे घर में अंधेरा पसरा हुआ था , लेकिन खिड़की से आ रही हल्की - हल्की रोशनी में राजवीर के उन दोनों आदमियों ने अपने हाथ पकड़े हुए आदमियों का चेहरा पहचान लिया था । दोनों के मुंह से एक साथ निकला।

दोनों आदमी - आरव ....., रेहान......।

अगले ही पल रूम की लाइट्स चालू हुई और चंदन और उसके परिवार की नींद भी खुल गई । चंदन और उसकी पत्नी ने जब अपने सामने हाथों में गन लिए हुए आदमीयों को देखा तो डर गए , लेकिन अगले ही पल उनकी नज़र आरव रेहान , और लाइट चालू करने वाले आदमी पर गई , जो कि नील ने चालू की थी , तो उन्हें थोड़ी सी राहत मिली । अगले ही पल नील ने चंदन के घर का दरवाज़ा ओपन किया और बाहर राजवीर के जितने भी आदमी थे , सभी को एक साथ रस्सी से बांध कर आदित्य और राहुल घसीटते हुए घर के अंदर ला रहे थे । चंदन के बच्चो ने जब खून से सने हुए उन आदमियों को देखा , तो डर से कांपने लगे । चंदन की पत्नी ने तुरंत उन्हें अपने सीने से लगा लिया । तभी आरव ने चंदन की पत्नी से कहा ।

आरव - आप तुरंत बच्चो को लेकर इस कमरे से जाइए......।

चंदन की पत्नी - लेकिन इनको ( चंदन ) छोड़ कर .....।

आरव - आप जाइए.... , चंदन को कुछ नहीं होगा ।

चंदन की पत्नी ने आरव की बात सुनकर , तुरंत अपने बच्चो को अपने साथ लिया और किचेन की ओर चली गई । नील ने किचेन का दरवाज़ा बाहर से लॉक कर दिया । नील के दरवाज़ा लॉक करते ही चंदन ने तुरंत आरव से कहा ।

चंदन - साहब , ये लोग कौन है ....???? और इनके हाथों में बंदूक क्यों है ।

आदित्य - ये राजवीर के आदमी हैं चंदन , जो कि तुम्हें और तुम्हारे पूरे परिवार को मारना चाहते हैं ।

आदित्य ये सब बोल ही रहा था , कि तभी राजवीर के पांच आदमी जो कि रूम में अलग - अलग जगह छुपे थे , उनमें से एक ने आरव की तरफ और एक ने चंदन की तरफ गोली चलाई । पर इससे पहले कि गोली उन दोनों को जाकर लगती , उससे पहले ही आरव अपनी जगह से थोड़ा हट गया और साथ में राजवीर के आदमी का हाथ छोड़ कर तुरंत चंदन का हाथ पकड़ कर उसे भी साइड किया । इस लिए गोली उनके पीछे की दीवार पर जाकर धंस गई । गन में साइलेंसर लगा था , इस लिए गन के चलने की आवाज़ किसी के भी कानों तक नहीं पहुंची , पर आरव को गोली की रफ्तार की आवाज़ सुनाई दे गई थी और इसी लिए उसने खुद को और चंदन को बचा लिया । जब रेहान आदित्य नील और राहुल ने दीवाल में गोली धंसे देखा , तो तुरंत वो लोग उन आदमियों के पीछे दौड़ पड़े और उनकी सारी गन छुड़ाकर , उन्हें बुरी तरह से मारना शुरू कर दिया । इधर आरव और चंदन ने भी अपने पास खड़े आदमीयों की गन उनके हाथ से छीनी और उन्हें बुरी तरह पीटने लगे । वे आदमी भी उन सब को मारने के लिए दौड़े , लेकिन आरव , उसके दोस्तों और चंदन ने उन सभी को खूब लताड़ा और लगभग आधे घंटे में सारे आदमी जमीन पर पड़े धूल चाट रहे थे । उन सभी के धराशाई होते ही चंदन आरव के पास आया और उसने तुरंत आरव से कहा ।

चंदन ( आरव के सामने हाथ जोड़ कर ) - साहब .....!!!! मैंने आपके साथ इतना गलत किया , आपका ही नमक खा कर आपके साथ ही गद्दारी की , उसके बाद भी आप मुझे और मेरे परिवार को बचाने आ गए । क्यों साहब …???? मुझ जैसे नमक हराम को मर ही जाने देते न , राजवीर साहब के आदमियों के हाथों ।

आरव ( बिना चंदन की बात का जवाब दिए आदित्य से बोला ) - पुलिस को कॉल करो , और इन सारे आदमियों को जेल में डलवाओ ।

वह इतना कह ही रहा था, कि तभी राजवीर का एक आदमी हिम्मत करके उठा और उसने अपने पास में पड़ी गन उठाई , और ट्रिगर दबाने की कोशिश करने लगा । राहुल ने उसे ऐसा करते देख लिया, राहुल उसकी तरफ दौड़ा , तब तक उस आदमी ने आरव की तरफ निशाना लगा कर , गन का ट्रिगर दबा दिया । राहुल जोर से आरव कह कर चिल्लाया, और उस आदमी का हाथ तुरंत ऊपर की ओर कर दिया । राहुल की तरफ ध्यान जाते ही , तुरंत चंदन ने आरव को धक्का दे दिया और खुद भी पीछे हो गया । राहुल ने उस आदमी का हाथ जरूर ऊपर किया था, पर तब तक गोली चल गई थी और चंदन द्वारा आरव को धक्का देने के कारण आरव एक दीवाल से जाकर टकरा गया और वो गोली उसके बगल में रखी टीवी पर जाकर लगी । अगले ही पल टीवी का सारा कांच फर्श पर बिखर गया । सारे दोस्तों ने जब ये सब देखा , तो उन्हें उस आदमी पर बेहद गुस्सा आया । राहुल उस आदमी के पास था , तो उसने तुरंत गन उस आदमी के हाथ से छीनी और बेतहाशा गुस्से से भरकर उस आदमी को पीटने लगा।

राहुल ( उस आदमी पर अपने पैर से मारते हुए बोला ) - मेरे दोस्त पर गन चलाएगा....। मेरे दोस्त पर ......। तेरी तो.....।

इतना कह कर राहुल ने उसे कॉलर से पकड़ कर उठाया और पास में रखी लकड़ी की टेबल पर पटक दिया । एक जोर दार चीख सभी के कानों में पड़ी , जो कि उस आदमी की थी । राहुल फिर उसके पास गया और उसे एक हाथ से पकड़ कर , दूसरे हाथ से दोबारा उसे बुरी तरह पीटने लगा । ये देख कर आरव उसके पास आया और उसे रोकते हुए बोला ।

आरव - बस कर राहुल , मर जाएगा वो ।

राहुल - मर जाता है तो मर जाए....। मेरे दोस्त को मारने वाले का जिंदा रहना जरूरी भी नहीं है ।

आरव ( राहुल को कस कर पकड़ कर , उस आदमी को उससे अलग करता है और राहुल से कहता है ) - मैं ठीक हूं राहुल । मेरी वजह से तुझे किसी की जान लेने की जरूरत नहीं है । ( राहुल के दोनों कंधो पर हाथ रखकर ) और वैसे भी राहुल , हम यहां सिर्फ चंदन और उसके परिवार की जान बचाने आए हैं । हमें राजवीर के आदमियों को मारना नहीं है, सिर्फ उन्हें घायल करना है । वैसे भी ये लोग सिर्फ राजवीर के आदेश का पालन कर रहे हैं , इसमें इनकी कोई गलती नहीं है और न ही हमारी इनसे कोई दुश्मनी है । हम इन्हें कानून के हवाले कर राजवीर का प्लान फ्लॉप करेंगे बस .......। अगर हमने इन्हें जान से मार दिया , तो हममें और इनमें फर्क ही क्या रह जाएगा राहुल....??? और मैं नहीं चाहता , कि हम किसी की भी जान लें.....।

राहुल ( आरव के गले लगकर ) - आई एम सॉरी आरव
...। मुझे इस पर गुस्सा आया , जब इसने तुझ पर गोली चलाई । इसी वजह से मैं खुद को रोक नहीं पाया और इसे पीटने लगा ।

आरव ( राहुल को खुद से अलगकर ) - कोई बात नहीं राहुल .....। अब तुम लोग पुलिस को कॉल करो और इन्हें पुलिस के साथ भेजने के बाद , चंदन की पत्नी और बच्चों को किचेन से बाहर निकालो ।

आदित्य - इनफॉर्म कर दिया था मैंने पहले ही पुलिस को , आते ही होंगे वो लोग ......।

आदित्य की बात पर आरव ने कुछ नहीं कहा और चंदन के घर के बाहर चला गया । चंदन आरव की कहीं हुई बातों से बेहद प्रभावित था । उसे अब अपने कृत्य पर और ज्यादा शर्मिंदगी हो रही थी । आरव को घर के बाहर जाते देख , चंदन ने भी अपने कदम उसकी ओर बढ़ा दिए । आरव चंदन के घर के बाहर आकर अपनी गाड़ी के बोनट से टिक कर खड़ा हो गया, और पुलिस का वेट करने लगा । तभी वहां चंदन आया और उसके सामने खड़े होकर उसने एक बार फिर वही सवाल किया ।

चंदन - साहब ......, हमारी मदद करने की वजह आपने हमें नहीं बताई ।

आरव ( हाथों की घड़ी बांधे , बिना चंदन की ओर देखे बोला ) - हर मदद , वजह के चलते नहीं की जाती चंदन ।

चंदन - मैंने आपके साथ इतना कुछ किया , बदले आपने मेरी जान बचाई । शुक्रिया इसके लिए साहब ......। इसके साथ ही मैं अपने अपराध के लिए शर्मिंदा भी हूं , आप चाहें तो मुझे भी पुलिस के हवाले कर सकते हैं ।

आरव ( चंदन की तरफ सीधे खड़े होकर ) - तुम्हें पुलिस के हवाले करने के बाद , तुम्हारे बीबी बच्चो का क्या होगा चंदन...?????

चंदन - मैंने आज तक जो किया है साहब , उसकी सज़ा मेरे पूरे परिवार को भुगतनी ही होगी । लेकिन अगर मैंने अपनी सज़ा नहीं भुगती , तो मेरे बच्चे जरूर मेरी तरह बन जाएंगे , और बड़े होकर वे भी मेरी तरह ही गलत काम करके पैसे कमाएंगे ।

आरव - बिना माता पिता के साए के भी बच्चे गलत काम करने लगते हैं चंदन । ( चंदन ने उसकी बात पर ,
उसे हैरानी से देखा । तो आरव ने उसके कंधे पर हाथ रखकर कहा ) देखो चंदन .....!!!! तुमने जो हमारी कंपनी के साथ किया , वो बेशक गलत था । तुमने राजवीर के साथ मिलकर आज तक जो भी गलत काम किए , वे भी गलत थे । लेकिन तुम ये सब एक तरह से अपने बच्चो के लिए ही कर रहे थे न....., शराब का तो तुमने सिर्फ एक बहाना बनाया था !!!!! मैं सही कह रहा हूं न चंदन .....। ( चंदन ने उसकी बात पर सर झुका लिया , तो आरव ने मुस्कुराकर उसका सिर अपने हाथ से ऊपर कर कहा ) देखो चंदन , तुमने जो भी किया , वो सब माफी के काबिल नहीं है । लेकिन तुम्हें उसका अफसोस है , ये जानकर मुझे अच्छा लगा । इस लिए मैं चाहता हूं कि तुम सारे गलत काम छोड़ कर , अच्छी नौकरी करो , भले ही दुगुनी मेहनत करो । लेकिन अपने बच्चो को , एक अपराधी के बच्चे कहलवाने का पाप मत करो । इससे उनका भविष्य खराब हो जाएगा , जिससे तुम्हें ही आगे चलकर पछतावा होगा । क्या तुम अपने बच्चो का भविष्य बिगाड़ना चाहते हो .....????

चंदन - नहीं साहब ....., मैं आपने बच्चो को अच्छे से पढ़ाने के किए ही तो ये सब कर रहा था , ताकि आमदनी ज्यादा हो और मेरे बच्चे अच्छे से पढ़ सकें । लेकिन आपकी बातों से आज मुझे महसूस हुआ , कि मैं कितना गलत था । आमदनी तो अच्छा काम करके भी बधाई जा सकती है । लेकिन आप लोगों के साथ धोखा करके , मैंने अच्छी नौकरी करने का अवसर भी गंवा दिया ।

आरव - मानता हूं कि तुम्हें पापा ने जॉब से निकाल दिया है, लेकिन अगर तुम चाहो , तो मैं तुम्हें नौकरी दे सकता हूं । लेकिन उसके बदले में तुम्हें मुझसे वादा करना होगा, कि तुम अब कभी भी गलत काम नहीं करोगे ।

चंदन - लेकिन बड़े साहब ने साफ शब्दों में मना कर दिया है, मुझे उनके किसी भी कंपनी में कदम भी रखने के लिए।

आरव - मैंने कब कहा तुमसे , कि मैं तुम्हें अपनी किसी भी कंपनी में काम दे रहा हूं ।

चंदन - तो फिर....????

आरव ( अपनी हथेली चंदन के सामने बढ़कर ) - पहले तुम वादा करो , जो मैंने तुम्हें कुछ पल पहले करने के लिए कहा है , वो तुम करोगे या नहीं .....।

चंदन ( आरव की हथेली पर अपनी हथेली रखकर ) - मैं आपसे वादा करता हूं साहब , कि आज के बाद से मैं कभी कोई भी गलत काम नहीं करूंगा ।

आरव ( मुस्कुराकर ) - गुड......।

चंदन ( अपनी हथेली आरव की हथेली से हटाकर ) - लेकिन मुझे क्या करना होगा साहब ....????

आरव - तुम्हें सिर्फ राजवीर पर नज़र रखना हैं, लेकिन बिना उसकी नजरों के सामने आए ।

चंदन - कैसे ....????

आरव - तुम्हें राजवीर कहां जाता है क्या करता है किससे मिलता है , ये सब जानना है । एक तरह से तुम्हें उसकी जासूसी करनी है । और उसकी पल - पल की सारी इंफॉर्मेशन मुझे देनी है । लेकिन कभी उसे ये पता नहीं चलना चाहिए , कि तुम उस पर नज़र रख रहे हो ।

चंदन - बस इतनी सा काम । हो जाएगा साहब ।

आरव - ये काम इतना आसान भी नहीं है चंदन , लेकिन ये तुम कर सकते हो । इसका मुझे पूरा भरोसा है । इस काम के लिए मैं तुम्हें , हमारी कंपनी में मिलने वाली तुम्हारी पिछली सैलरी से तीन गुना एक्स्ट्रा सैलरी दूंगा । और तुम्हारे बच्चो की पढ़ाई का खर्च भी , मैं उठाऊंगा ।

चंदन - इस काम के लिए , मुझे इतने पैसों की जरूरत नहीं पड़ेगी साहब ।

आरव ( मुस्कुराकर ) - ये काम तुम्हें हमेशा करना है चंदन । और मैं जो भी बताऊंगा, तुम्हें वो सब करना है । जिसमें जान का भी रिस्क है । और जब तुम मेरे लिए इतना बड़ा रिस्क उठाने के लिए तैयार हो , तो क्या मैं तुम्हारे बच्चो की पढ़ाई का खर्च नहीं उठा सकता , तुम्हें थोड़ी सी ज्यादा सैलरी नहीं दे सकता .....!!!!

चंदन ( भावुक होकर ) - आज तक जिसने भी मुझे काम दिया है , सभी ने कुछ पैसे मेरे मुंह पर फेंक कर , अपना काम करवाया । लेकिन कभी किसी ने इतने प्यार और अपने पन से , मुझे कभी कोई काम नहीं सौंपा और न ही मुझ पर इतना भरोसा दिखाया । इसके अलावा मेरे परिवार से तो किसी को कोई मतलब ही नहीं था । लेकिन आपने न सिर्फ मुझे मेरी गलतियों पर माफ किया , बल्कि मुझे नया काम भी दिया । साथ ही मेरे बच्चो का भी खर्च उठाया । आप जैसे इन्सान से इतनी इज्जत और अपनापन पाकर , मैं तो धन्य हो गया साहब । मैं अब आपका काम , पूरी ईमानदारी से करूंगा । और गलत कामों की तरफ कभी देखूंगा भी नहीं ।

आरव - एक और काम करोगे क्या मेरा तुम चंदन ।

चंदन - हां बोलिए न साहब ....!!!!

आरव - तुम जो शराब पीते हो , उसे भी छोड़ दो । ये तुम्हारे सेहत और तुम्हारे परिवार के लिए नुकसानदायक है ।

चंदन - साहब ......, अपना काम बोलकर आप तो मेरी ही जान बचा रहे हैं । जहां बड़े लोग अपना काम करवाने के लिए हम जैसे गरीब लोगों को शराब की लत लगवाते हैं, वहीं आप तो शराब छोड़ने के लिए कह रहे हैं । पता नहीं आप मुझ पर अब और कितने उपकार करेंगे साहब और कितनी बार मुझे आइना दिखाएंगे ।

आरव - तुम खुद बहुत समझदार हो चंदन , इस लिए मुझे तुम्हें आइना दिखाने की जरूरत नहीं है ।

चंदन - एक बात कहूं साहब ......, आपकी जो भी जीवन साथी बनेगी , वो बहुत खुशनसीब होगी , क्योंकि उसे आपके जैसा जीवन साथी मिलेगा…..। ( आरव उसकी बात पर मुस्कुरा दिया, तभी चंदन बोला ) मैं वादा करता हूं साहब......, कि मैं अब से शराब नहीं पियुंगा । मैं शराब को आज से , बल्कि अभी से त्यागता हूं साहब ....। आपकी खुशी के लिए नहीं, बल्कि अपने परिवार को , इसके कारण होने वाले नुकसान से बचाने के लिए ।

आरव ( कायरा के बारे में सोचकर मन में ) - फिरहाल तो वो मेरी मेरी फीलिंग्स ही समझ जाएं, यही काफी है । ( चंदन से ) मैं खुश हूं चंदन, कि तुम अब सही रास्ते पर चलकर , एक नई खुशहाल ज़िन्दगी की शुरुवात करोगे ।

चंदन - ये सिर्फ आपकी देन है साहब... ।

वो दोनो बात कर ही रहे थे , कि तभी वहां पुलिस आ गई । और राजवीर के सारे गुंडों को गिरफ्तार कर , अपने साथ ले गई । आरव चंदन को खुद का खयाल रखने का कहकर , रेहान को लेकर उसे उसके घर छोड़ने चला गया । आदित्य , राहुल और नील भी अपने घर चले गए । रास्ते में कार ड्राइव कर रहे आरव की तरफ देखकर , उसके बगल में बैठे रेहान ने उससे कहा ।

रेहान - तेरा शक सही निकला ....., राजवीर ने चंदन को मारना चाहा । तेरे शक के मुताबिक हम चारों चंदन के घर के बाहर पहुंचे ही थे , कि हमें कुछ परछाईं दिखाई दी । और हम समझ गए , कि ये राजवीर के ही आदमी हैं । हमने पहले तो चंदन के घर के बाहर खड़े राजवीर के आदमियों को घायल किया और फिर तेरे आने पर मैं तेरे साथ किचेन की खिड़की से अंदर चला आया......। फाइनली आज हमने चंदन को बचा लिया ।

आरव - लेकिन हमें आगे भी चंदन और उसके परिवार की सुरक्षा का ध्यान रखना होगा रेहान । राजवीर को जब पता चलेगा , कि चंदन और उसका परिवार ज़िंदा है । तो वो उन्हें खत्म करने के कई सारे पैंतरे अपनाएगा । क्योंकि उसकी नज़रों में उसे धोखा देने वाला आदमी , ज़िंदा रहने के काबिल नहीं है ।

रेहान - अगर ऐसा है तो फिर वह विनय को भी मार देगा क्या ........??? फिर तो हमें उसकी सेफ्टी के बारे में भी सोचना होगा ।

आरव - नहीं......, ऐसा नहीं होगा । राजवीर की लाइफ में कुछ ही ऐसे लोग हैं , जिन्हें वो कभी जान से नहीं मारेगा । सबसे पहले तो उसके मां - बाप , दूसरी उसकी बहन खुशी भाभी , तीसरे उसके दो दोस्त , जिनमें से एक विनय है और दूसरा उसका वो वकील दोस्त । वो इन सभी से बहुत प्यार करता है , इस लिए इनकी जान लेने की वो कभी सोच भी नहीं सकता ।

रेहान - राजवीर जैसा इन्सान भी किसी को बख्श सकता है , ये तो मेरी सोच से परे है । ( तभी रेहान का घर आ गया , और उसने आरव से कहा ) खैर , मेरा घर आ गया ।

आरव ( रेहान के घर के सामने कार रोक कर ) - मुझे तेरा घर पता है रेहान ।

रेहान ( कार से बाहर निकलकर , मुस्कुराकर आरव की तरफ देखकर बोला ) - हां मेरे जिगरी दोस्त....., मुझे पता है कि तू मेरे घर का एड्रेस जानता है। चल इसी बात पर घर के अंदर चल , मां बहुत दिनों से तुझे याद कर रही है ।

आरव - फिर कभी आऊंगा भाई , आंटी से मिलने । ( हैंड वॉच पर टाइम देखकर ) अभी रात बहुत हो गई है , मेरा घर जाना ही इस समय सही होगा ।

रेहान - चल ठीक है फिर , आराम से जाना । बाय.....।

बदले में आरव ने मुस्कुराकर रेहान को बाय कहा और अपनी कार अपने घर की तरफ बढ़ा दी । साढ़े बारह बजे के लगभग आरव घर पहुंचा । घर की अधिकतर लाइट्स उसे डिम दिखी , तो वो समझ गया कि सभी सो गए हैं । तभी घर का नौकर उसके पास आया । उसे देखते ही आरव ने उससे अरनव के बारे में पूंछा , तो उसने कहा ।

संजय ( नौकर ) - वो बहुत देर पहले अपने कमरे में चले गए थे ।

आरव - ठीक है ।

इतना कह कर आरव जाने लगा , तो संजय ने उसे रोका और उसके पास आकर बोला।

संजय - भैया डिनर लगा दूं ...????

आरव - हां , लगा दो , और मेरे कमरे में ही भिजवा देना ।

इतना कहकर आरव अपने रूम में चला गया । उसने अपने कपड़े चेंज किए और अपने सोफे पर बैठकर पानी पीने लगा । तभी सुनयना जी , संजय के साथ आरव का डिनर लेकर आयी । उन्होंने संजय को डिनर टेबल पर रखने के लिए कहा और उसे फिर सोने के लिए भेज दिया । आरव की नज़र जैसे ही सुनयना जी पर पड़ी वो तुरंत गिलास टेबल पर रखकर उनसे बोला ।

आरव - मम्मी....., आप अभी तक सोई नहीं । ( डिनर की तरफ देखकर ) और ये तो मैंने संजय से लाने के लिए कहा था , फिर आप क्यों परेशान हुईं....?????

सुनयना जी आरव के पास आयी , उन्होंने टेबल पर रखी ट्रे से खाना , एक खाली प्लेट पर सर्व किया और उसमें से रोटी का एक निवाला तोड़कर आरव की तरफ बढ़ाते हुए कहा ।

सुनयना जी - जब बेटा इतना परेशान हो, इतनी देर से घर आए और उसने अभी तक खाना भी न खाया हो । तो मां को टेंशन तो होगी न बेटा । और खाने की ट्रे संजय ही लेकर आया था मेरे साथ । घर में अब कोई काम नहीं बचा था, इस लिए मैंने उसे सोने के लिए कह दिया ।

आरव ( एक निवाला सुनयना जी के हाथ से खाकर बोला ) - बस मम्मी , मैं खा लूंगा । आप भी अब आराम कीजिए , क्योंकि आपका बेटा अब घर भी आ गया है और खाना भी खा रहा है ।

सुनयना जी - मेरे बेटे को मेरे हाथ से खाना खाने में तकलीफ है क्या ....????

आरव - ऐसी बात नहीं है मम्मी .....।

सुनयना जी - तो फिर तुम चुप - चाप मेरे हाथ से खाना खाओ ।

आरव उनकी बात पर मुस्कुराकर उनके हाथ से खाना खाने लगा । खाना खत्म होते ही , सुनयना जी ने प्लेट वापस ट्रे में रखी और आरव की ओर पानी का गिलास बढ़ा दिया । आरव ने पानी पिया और तुरंत उनसे बोला ।

आरव - आपकी बातों से लग रहा है, कि पापा ने आपको सब कुछ बता दिया है ।

सुनयना जी - हम्मम , तुम्हारे पापा ने मुझे सब कुछ बता दिया है । लेकिन मैं जानती हूं , कि तुम दोनो ही अपनी - अपनी जगह सही हो। और इस वक्त हमारे लिए खुशी के सेहत से बढ़कर कुछ होना भी नहीं चाहिए । इस लिए मेरी तरफ से तुम निश्चिन्त रहो, खुशी से उसके भाई की हरकतों के बारे में, न ही मैं कभी खुद उससे कहूंगी और न ही उसे किसी और के द्वारा कभी पता चलने दूंगी । लेकिन अंशिका से भी हमें ये बात छुपानी होगी , क्योंकि वो अभी बच्ची है। साथ ही वो खुशी से कभी भी कुछ भी नहीं छुपाती , इस लिए हमें उसे भी कुछ नहीं बताना है ।

आरव - डोंट वरी मम्मी । अंशिका को कुछ पता नहीं चलेगा । अब आप आराम कीजिए , क्योंकि रात बहुत हो गई है ।

सुनयना जी ने उसके सिर पर प्यार से हाथ फेरा , और ट्रे लेकर वहां से चली गईं । उनके जाते ही आरव अपने बिस्तर पर लेट गया । आज की सारी घटनाएं उसके आंखों के सामने एक - एक कर चलने लगी । काफी थक गया था आज आरव , क्योंकि एक ही दिन में इतनी सारी परेशानियां आज तक उसने एक साथ कभी हैंडल नहीं की थी । सब के बारे में सोचते हुए उसकी आंखें बंद होने लगी , और कुछ देर में ही वह सो गया ।

यहां कायरा बार - बार अपने बिस्तर पर करवटें बदल रही थी । थक तो वो भी बहुत ज्यादा चुकी थी , लेकिन उसकी आंखों के सामने भी आज की सारी चीज़ें चल रही थी । जिसकी वजह से उसकी आंखों से नींद कोसों दूर थी । इस वक्त कायरा के दिमाग में क्या चल रहा था , ये सिर्फ कायरा ही जानती थी । रात पूरी गुजर गई , लेकिन कायरा को नींद नहीं आयी ।

अगली सुबह कायरा जल्दी ही तैयार हो गई । उसने अपना सारा समान बैग में डाला और अनय को आज दस बजे , कॉलेज से एक किलो मीटर पर बने कॉफी शॉप में मिलने के लिए मैसेज कर दिया । इसके बाद वह अपना बैग और मोबाइल लेकर नीचे आयी, भगवान के सामने आकर उसने हाथ जोड़े , माथे पर टीका लगाया और मालती जी को कॉलेज जाने का कहकर स्कूटी की चाभी लेने लगी। तभी मालती जी ने उससे कहा ।

मालती जी - इतनी जल्दी कहां जा रही है बेटा ...??? अभी तो सिर्फ सुबह के सात बजे है , तुम्हारे कॉलेज जाने में तो अभी वक्त ह न ..????

कायरा - मुझे अपनी स्टडीज से रिलेटेड कुछ काम है मम्मा , इस लिए मैं आज जल्दी जा रही हूं ।

इतना कह कर वह बिना , मालती जी का जवाब सुने वह घर से बाहर निकल गई । जबकि मालती जी सिर्फ सोचती ही रह गईं , कि आखिर इतनी सुबह - सुबह कायरा जा कहां रही है । इधर कायरा के घर से निकलते ही , जय के आदमी ने तुरंत आरव को कॉल किया , जो कि कायरा की सेफ्टी के लिए, वो और उसका एक साथी कल रात से ही उसके घर के सामने छुपकर खड़े थे । आरव के कॉल उठाते ही उसने कहा ।

आदमी - सर, कायरा मैम अपनी स्कूटी से कहीं जा रही है ।

आरव ( कॉफी कप , अपनी बालकनी की दीवाल पर रखते हुए ) - इतनी सुबह - सुबह ...!!!! तुम्हें कुछ अंदाजा है , कि इस वक्त वो कहां जा रही है ?????

आदमी - नहीं सर....।

आरव - ठीक है, तुम उसका पीछा करो । और मुझे खबर करो कि वो इस वक्त कहां जा रही है ।

आदमी - जी ।

इतना कह कर , आदमी ने कॉल डिस्कनेक्ट कर दिया । और वह अपने आदमी के साथ कार में बैठकर , कायरा का पीछा करने लगा.....।

क्रमशः

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