Ahsaas pyar ka khubsurat sa - 51 in Hindi Novel Episodes by ARUANDHATEE GARG मीठी books and stories PDF | एहसास प्यार का खूबसूरत सा - 51

एहसास प्यार का खूबसूरत सा - 51







गाना गुनगुनाते हुए कब कॉलेज आ गया , आरव को पता ही नहीं चला । जब उसे अपनी कार के सामने स्टूडेंट्स की भीड़ दिखी, तो उसे होश आया, कि वो कॉलेज पहुंच चुका है । उसने तुरंत अपनी कार पार्किंग में लगाई और मिडिल सीट से अपनी कुछ बुक्स और नोट्स उठा कर , कार से नीचे उतरा और कॉलेज बिल्डिंग की ओर बढ़ गया । जाते - जाते वो पार्किंग में टू - विलर गाड़ी की लाइन्स में, कायर की स्कूटी ढूंढ रहा था । उसे उम्मीद थी, कि अब तक कायरा कॉलेज आ चुकी होगी । लेकिन उसे कायरा की स्कूटी कहीं नहीं दिखी । जिससे वो थोड़ा सा निराश हो गया । फिर उसने खुद के मन को समझाया , कि हो सकता है शायद ट्रेफिक में फंस गई होगी कायरा , बस अभी आती ही होगी । तब तक मैं क्लास में जाता हूं , सारे दोस्त मेरा ही वेट कर रहे होंगे क्लास में । यही सोचते हुए एक सीढ़ियों से होते हुए , क्लास की ओर बढ़ गया और उसका अंदाजा सही निकला , सारे दोस्त उसी का वेट कर रहे थे । आरव सब के पास आकर बैठ गया और उनसे बातें करने लगा । कुछ ही पल बीते थें, कि सक्सेना मैडम क्लास में आ गई । वो अकाउंट की प्रोफेसर थीं , और आते ही उन्होंने सारे स्टूडेंट्स को बैठने के लिए कहा और फिर क्लास लेना उन्होने चालू किया । सबकी नजरें सक्सेना मैडम के लेक्चर पर थी , लेकिन आज आरव की नजरें सिर्फ और सिर्फ क्लास के डोर पर थी , जहां से वह बेसब्री से कायरा के आने का इंतेज़ार कर रहा था ।

इधर कायरा कॉलेज आयी और उसने अपनी स्कूटी पार्किंग एरिया में पार्क की । उसने अपने कदम क्लास की ओर बढ़ाए ही थे , कि कुछ पल बाद वह रुक गई । आज पहली बार उसका मन क्लास में जाने का नहीं था । जो कुछ देर पहले वह राजवीर के साथ करके आयी थी , उससे वह अभी निकल नहीं पाई थी । उसका दिमाग अब भी सिर्फ राजवीर की हरकतों पर अटका हुआ था । यही सोचते हुए कायरा ने अपने कदम क्लास की ओर न बढ़ाकर , बास्केट बॉल स्टेडियम की ओर बढ़ा दिए । वहां आकर वह सीढ़ियों में बैठ गई । स्टेडियम काफी बड़ा था , और वहां पर कुछ लोग बास्केट बॉल की प्रेक्टिस भी कर रहे थे । उन लोगों में अनय भी शामिल था , जिसपर कायरा का ध्यान गया ही नहीं । कायरा ने बैठने के बाद , अपने हाथ घुटनों पर रख दिए और उसी पर सिर टिका कर , आखें बंद कर बैठ गई । उसके दिमाग में इस वक्त बहुत कुछ चल रहा था । राजवीर की हरकतें , आरव और उसकी केयर , एक रीजन भी , जिसकी वजह से वो आरव से दूर थी , दादी की बातें, पापा का प्यार , उसका वर्क पढ़ाई कैरियर सब चल रहा था । एक साथ इतनी चीज़ें उसे करनी पड़ रही थी, कि उसका दिमाग अब शून्य कि तरह हो चुका था । वो किसी भी चीज में फोकस नहीं कर पा रही थी । जब - जब चीज़ें सही करने के लिए उसके दिमाग में एकाद आइडिया आता , तब - तब उसे राजवीर की कल की हरकतें याद आ जाती , जो उसने आरव और कायरा के साथ की थी । जब उसे कुछ समझ नहीं आया , तो उसने अपना सिर झटक दिया । लेकिन कहते हैं न , जब इन्सान प्यार में हो तो वो न चाहते हुए भी अपने प्यार के खयालों में खो ही जाता है । ऐसा ही कुछ कायरा के साथ हुआ । बाकी सारी चीज़ों के बारे में उसने सोचना तो बंद कर दिया, लेकिन आरव के खयालों से वो खुद को बाहर नहीं निकाल पाई । अब उसे आरव से मिलने से लेकर , कल आरव के साथ पार्क में बैठे रहने तक की, सारी यादें उसके जहन में घूम गई । जिसकी वजह से , वह हाथ में अपना चेहरा रखे आखें बंद किए हुए ही , कभी मुस्कुरा देती , तो कभी उसकी आंखों से आसूं आ जाते , ये सोचकर कि वह सब जानते हुए भी आरव के साथ गलत कर रही है , उसके प्यार को निग्लेक्ट करके , जो उसे आरव की आंखों में साफ - साफ दिखता है । तभी उसे कुछ याद आया , जिसे याद कर उसका चेहरा भावहीन हो गया ।

एक लड़की लगभग नौ साल की होगी , वह अपने घर के लिविंग रूम में दीवाल से चिपकी खड़ी - खड़ी आंसुं बहा रही थी । सामने उसके क्या हो रहा था , उसे भनक भी नहीं थी । सामने तीन लोग आपस में बहस कर रहे थे , जो कि उस लड़की माता - पिता और एक उम्र दराज दादी थी । तीनों ही बुरी तरह से एक दूसरे पर चिल्ला रहे थे । और वह लड़की बस दीवाल के सहारे खड़ी , डरी सहमी सी उन लोगों को देख रही थी । मालती जी और देवेश जी , जो कि उस लड़की के सामने खड़े थे, जो कि उस लड़की के माता - पिता थे , वे अपनी मां ( राधा जी ) से बहस कर रहे थे । वहां किस बात पर और क्यों बहस चल रही थी , वो उस लड़की के समझ से परे था । तभी उसके कानों में देवेश जी की जोर - दार आवाज़ पड़ी ।

देवेश जी ( राधा जी से चिल्लाकर बात करते हुए ) - आपने ये क्या कर दिया मां..???? किसी और की गलतियों की सजा, आपने उस मासूम सी बच्ची को दी , जो कि शायद अभी ये सब जानती ही नहीं है, कि कुछ घंटों पहले उसके साथ हुआ क्या है । आपने एक बार उस मासूम सी बच्ची के बारे में नहीं सोचा, कि जब उसे ये बात समझ आइएगी , कि आखिर उसके साथ हुआ क्या है, तब उसपर क्या बीतेगी । आप उस लड़की पराई के कारण, अपनी ही घर की बच्ची के साथ अन्याय कर रही हैं । क्या गलती हैं आखिर इस नौ साल की बच्ची की...???? उसे तो ये भी नहीं पता, कि उसे किस गलती की सज़ा दी जा रही है, या फिर उसने कोई गलती भी है या नहीं.......।

राधा जी ( तेज़ आवाज़ में चिल्लाते हुए ) - इस लड़की की गलती ये है, कि ये हमारे घर में बेटी बन कर पैदा हुई है । और तुम इस लड़की के लिए मुझसे लड़ रहे हो , मुझसे ऊंची आवाज़ में बात कर रहे हो । सारी मर्यादाएं भूल चुके हो क्या देवेश तुम ....???? भूल रहे हो , कि इस शहर में कितनी इज्जत है हमारी और हमारे पूरे खानदान की । उसके बाद भी तुम अपनी मां से इतनी ऊंची आवाज़ में बात कर रहे हो , सारी मर्यादाएं लांघ रहे हो .....।

माल्ती जी ( आंखों में आसूं लिए , राधा जी को गुस्से में देखते हुए बोलीं ) - मर्यादाएं तो आपने लांघ दी है मां जी , एक छोटी सी फूल सी बच्ची की जिंदगी में बिना सोचे - समझे एक ऐसे रिश्ते को शामिल कर , जिसका मतलब भी मेरी बच्ची को नहीं पता है । आप मेरी बच्ची की जिंदगी तबाह करने में लगी हुई हैं मां जी , इसके बाद भी आप ये चाहती हैं, कि आपके बेटे इस बात का विरोध तक न करें.... !!!

राधा जी ( गुस्से में आखें बड़ी कर मालती जी को देखते हुए बोलीं ) - जिसके मुंह से कभी एक शब्द नहीं निकलता, आज वो मुझे बता रही है , मेरी मर्यादाएं.....???? बहू....., तुम इस तरह से मुझसे बात करके ठीक नहीं कर रही हो । गलत कर रही हो तुम अपनी सास से इस तरह बात करके , ये सरासर अपमान है मेरा .....। जिसकी सज़ा तुम्हें मिलेगी...।

मालती जी ( उन चिल्लाकर ) - गलत आप कर रही है मां जी । बिना सोचे समझे , किसी दूसरे के किए की सजा आप मेरी बच्ची को दे रही हैं । किसने हक़ दिया आपको ऐसा करने का ...??? मेरे पति ने , आपके बेटे ने , मैंने , या फिर उस फूल सी मासूम बच्ची ने ....??? क्या गलती है मेरी बच्ची की , ये..... कि उसने इस घर में जन्म लिया , जहां आप उसकी थोड़ी सी भी इज्जत नहीं करती हैं । अरे इज्जत करना तो दूर मां जी , आप तो उसे एक पल के लिए प्यार से उसके नाम तक का भी संबोधन नहीं करती हैं । ( नौ साल की बच्ची की तरफ , जो दीवाल से चिपकी आंखों में आसूं लिए , डरी सहमी सी खड़ी थी , उसकी तरफ वे हाथों की एक उंगली से इशारा करते हुए कहती हैं ) देखिए आप उस बच्ची को , कहीं से भी दिख रहा है , कि देवेश जी के साथ जिसने वो सब किया, उसके कर्मों के पीछे इस बच्ची का हाथ है ...??? बताइए न मां जी ..., क्या कहीं से भी आपको लग रहा है, कि ये बच्ची हमारे खानदान की इज्जत को इस उम्र में नीलाम करेगी ..??? मां जी ...., उसे तो ये भी नहीं पता, कि इज्जत क्या होती है । तो वह किस तरह आपकी बदनामी करवाएंगी , बताइए.....!!!!! क्यों किसी और के कर्मों कि सज़ा आप मेरी इस छोटी सी बच्ची को दे रही हैं ...???? क्या लड़की होना पाप है मां जी , या फिर इस बच्ची ने इस घर में जन्म लिया , वो पाप है....???? मां जी , मैं और आप भी एक लड़की ही हैं , एक औरत ही हैं । लेकिन उसके बाद भी , आप एक औरत होकर भी फूल सी नाजुक बच्ची के साथ ये सब कर रही हैं । मैं तो कभी सपने में भी नहीं सोच सकती थी मां जी, कि जिसे मैंने अपनी खुद की सगी मां से भी बढ़ कर इज्जत दी , सम्मान दिया , वहीं औरत मेरी बच्ची के साथ ऐसा करेगी ....। क्यों नहीं आप समझने की कोशिश कर रही हैं मां जी , कि आप जो कर रही हैं वह गलत है , कानून के खिलाफ है और हमारी मर्यादाओं के भी । आपकी ही इस हरकत से पूरे शहर में हमारी बदनामी होगी , लेकिन आप अपनी सोच को सही साबित करने के लिए, मेरी बच्ची की जिंदगी के साथ खेल रही हैं......।

गुस्से और नफ़रत के साथ तेज़ आवाज़ में शुरू हुई मालती जी की बात , आसूं और बेबसी के साथ धीमी आवाज़ में खत्म हुई । और मालती जी जमीन पर, घुटनों के बल बैठकर फूट - फूट कर रो दी । जिनका रोना न ही उस छोटी बच्ची को बर्दास्त हो रहा था और न ही देवेश जी को । वह बच्ची राधा जी और वहां के माहौल के डर के कारण कुछ बोल ही नहीं पा रही थी । उसके आंखों से आसूं तो ऐसे बह रहे थे , जैसे नदी की कोई धरा हों । वो बच्ची धीमे - धीमे कदमों से नीचे बने मालती जी के कमरे की ओर बढ़ गई , जिसपर वहां मौजूद किसी भी इन्सान की नजर नहीं गई । देवेश जी ने मालती जी को संभालते हुए , राधा जी से कहा ।

देवेश जी - आज जो आपने किया है न मां , वो मैं कभी सपने में भी नहीं सोच सकता था । आज की आपकी गलती के लिए , मैं आपको कभी माफ नहीं कर सकता मां । शर्म आ रही है आज मुझे ये सोचते हुए भी , कि मैं आपका बेटा हूं । उस औरत का , जो एक छोटी सी बच्ची को किसी अनजान हाथों में सौंपने चली थीं । आपकी जगह अगर आज कोई और होना न मां , तो आपकी कसम , बुरी तरह से अपमानित करके मैं उसे अपने घर से बाहर धक्के मार कर फेंकता । लेकिन मैं मजबूर हूं , कि आप मेरी मां है । और मां चाहे कितनी भी गलत हो , पर बच्चे को कभी उनकी इज्जत करना नहीं छोड़ना चाहिए । आज मेरे हाथ बांध दिए हैं भगवान ने मां, आपको मेरी जन्मदात्री बना कर । इसी वजह से मैं आपका न ही अपमान कर सकता हूं और न ही आपको आपकी गलती की सजा दे सकता हूं । क्या करूं ....!!!! बेटा हूं न मां मैं आपका । अपनी बच्ची के साथ एक बार को गलत होते हुए ये आखें देख भी लेंगी , लेकिन अपनी मां को अपमानित होते हुए, ये आखें कभी नहीं देख पायेगी ।

राधा जी ( कड़क आवाज़ में ) - तुम लोगों ने मुझे समझ क्या रखा है , मुजरिम या फिर अपराधी...????

मालती जी ( भीगी पलकों से राधा जी की तरफ देखकर कहती है ) - आप अपराधी ही हैं मां जी, लेकिन अफसोस इस बात ये है, कि आप अपने गुनाह कबूल नहीं कर रही हैं । और सबसे बड़े शर्म की बात हमारे लिए ये हैं मां जी , कि हम आपको चाहते हुए भी अपराधी नहीं कह पा रहे हैं ।

राधा जी ( आखें बड़ी - बड़ी करके गुस्से से फुंफकारती हुई बोलीं ) - तुम हद से ज्यादा बोल रही हो बहु ....। भूलो मत , मेरे बेटे के गले से घंटी की तरह तुम्हें बांधने वाली , मैं ही हूं । जिस लड़की के लिए.......।

राधा जी इससे आगे कुछ कह पाती , उससे पहले ही दरवाज़े के बंद होने तेज़ आवाज़ उन तीनों के कानो मे पड़ी । जो कि मालती जी और देवेश जी के कमरे के दरवाज़े की थी , जिसे उस नौ साल की बच्ची ने बंद किया था । दरवाज़े की आवाज़ सुनकर , उन तीनो का ध्यान मालती जी और देवेश जी के कमरे की तरफ गया और वो तीनो तेज़ी से भाग कर उनके कमरे की तरफ बढ़ गए । इधर दरवाज़ा बंद करने के बाद वो बच्ची कमरे के अंदर आयी और फुट - फुट कर रोने लगी । उस तो समझ ही नहीं आ रहा था , कि वो तीनो किस बात पर झगडा कर रहे थे और एक दूसरे पर क्यों चिल्ला रहे थे । वह बच्ची वहीं दरवाज़े से लगकर बैठ गई और रोने लगी । किसी छोटे बच्चे के लिए , अपने सामने, अपने ही लोगों के बीच हो रहे झगड़े देखना , किसी श्राप से कम नहीं होता । इसका असर बच्चे की मानसिक स्थिति पर क्या पढ़ता है , ये तो सिर्फ वहीं बच्चा समझ सकता है , जो इस दौर से गुजरा हो । वहीं पर उस कमरे में , एक छोटा सा बच्चा अपने खिलौनों के साथ खेल रहा था , जो कि शायद सिर्फ चार साल का था और उस कमरे से बाहर क्या चल रहा था , उसकी उस बच्चे को कोई खबर नहीं थी । वो तो बस अपने खिलौनों के साथ मगन होकर , बढ़िया से खेल रहा था । लेकिन जब उसे दरवाज़े की आवाज़ आयी, तो वह डर के कारण हड़बड़ा गया । क्या करे.., छोटा सा बच्चा था । इतनी तेज़ आवाज़ से तो बड़े - बड़े लोग डर जाते हैं , फिर वो तो महज एक चार साल का मासूम था । उसके हाथ से खिलौने छूटकर जमीन पर गिर चुके थे, और घबराहट में उसने पीछे की तरफ जब पलट कर देखा , उसे एक लड़की दिखाई थी , जो कि उसकी बहन थी और बुरी तरह से रो रही थी । उस बच्चे को , अपनी बहन का रोना बिल्कुल भी अच्छा नहीं लगा , इस लिए वह तुरंत भाग कर अपनी बहन के पास आया और उसे अपने गले से लगा लिया । बच्ची ने भी , अपने भाई को सीने से चिपका लिया , लेकिन उसके आसूं अभी भी थम नहीं रहे थे । वो चार साल का बच्चा , अपनी बहन से अलग हुआ और उसकी आंखों से बह रहे आसुओं को , अपने नन्हें - नन्हें कोमल हाथों से साफ कर , तुतलाती हुई आवाज़ में उस बच्ची से बोला ।

चार साल का बच्चा - आप मत तो ( रो ) दी.....। ( अपना सिर ऊपर - नीचे मटकाते हुए ) मैं हूं न, आप्तके ( आपके ) साथ, आप्तका ( आपका ) छोटा चा (सा) भाई....। आप मत तो ( रो‌ ) .....। जिच्शने ( जिसने ) भी आप्तको परेचान ( परेशान ) तिया ( किया ) है , मैं उशे अप्तने ( अपने ) प्लास्टि्च्क ( प्लास्टिक ) बेट से मलूंगा ( मारूंगा )। फिर वो आप्तको , कभी परेचान नहीं तर ( कर ) पाएगा ...., ( अपने नन्हें हाथों को , बच्ची के सामने कर ) प्रोमिच ( प्रॉमिस ) दी...., आज के बात ( बाद ) ....., आपटो...., तोई ( कोई ) भी परेचान नहीं तर पाएगा....।

जब उस बच्ची ने , अपने भाई की बात सुनी , तो उसे एक बार फिर सीने से लगा लिया और फूट - फूट कर रोने लगी ये सोचकर, कि क्या बताए वह अपने भाई को , कि वह क्यों रो रही है । बाहर उसके पैरेंट्स , अपनी ही मां से क्यों झगड़ रहे हैं , ये तो वह बच्ची भी नहीं जानती थी । तभी मालती जी , देवेश जी और राधा जी , जोर - जोर से कमरे का दरवाज़ा पीटे जा रहे थे और उस बच्ची से दरवाज़ा खोलने के लिए कह रहे थे । राधा जी चिल्लाते हुए कह रही थी ।

राधा जी - अरे खोल दरवाज़ा लड़की ....। अरे देवेश ...., दरवाज़ा जल्दी खुलवाओ ...., कहीं वह मेरे पोते को कुछ कर न दे.....।

राधा जी की बात सुनकर , देवेश जी और मालती जी हैरानी से उनकी तरफ देखने लगे और सोचने लगे , कि आखिर उनकी मां , उनकी बच्ची से कितनी नफ़रत कर सकती हैं । वहीं उस बच्ची के कानों में जब राधा जी की ये बात पड़ी , तो उसे सिर्फ इतना समझ आया , कि राधा जी ये सोच रही है , कि वो बच्ची अपने भाई को मारेगी । यही सोचकर , वह अपने भाई को सीने से चिपकाकर , और जोर - जोर से रोने लगी ।

कायरा आखें बंद किए, साथ में आंखों में आंसूं भरे हुए, ये सब सोच ही रही थीं, कि तभी उसे अपने कंधे पर किसी का स्पर्श महसूस हुआ और उसने घबराहट के कारण झटके से आखें खोल दी । और अपने पीछे की तरफ , झटके से मुड़कर देखा , तो वहां पर अनय था , जिसने कायरा के कंधे पर हाथ रखा हुआ था और उसे अपने - पन के साथ देख रहा था । कायरा ने उससे नजरें फेर ली , और अब वह स्टेडियम की तरफ देखने लगी । डर उसे अभी भी हल्का - हल्का सा लग रहा था , क्योंकि वह स्पर्श आरव का नहीं है , ये वह अपने कंधे में हाथ महसूस करते ही जान गई थी । वहीं अनय ने जब कायरा को डरा हुआ देखा , तो उसने अपना हाथ कायरा के कंधे से हटा लिया । उसे कायरा का इस तरह रिएक्ट करना , थोड़ा अजीब लगा । जब कायरा अपनी बचपने में गुम थी , तभी अनय की बास्केट बॉल , सीढ़ियों से नीचे आकर गिरी थी । जिसे वह लेने आया था । वह बास्केट बॉल उठाकर जैसे ही मुड़ा था, तभी उसे कायरा दिखाई दी थी, अपना सिर अपने घुटनों पर रखें हाथों पर टिकाए हुए । उसे ऐसे देख कर, अनय कायरा के पास ऊपर की तरफ आ गया था और वह कायरा के पीछे जाकर खड़ा हो गया , उसके साथ थोड़ा सा मस्ती मजाक करने के लिए । लेकिन जब कायरा के पीछे मुड़ने के बाद , उसने कायरा के आंखों में आसूं देखे , तो उसे अजीब लगा और वह कायरा के बगल में बैठ गया । अनय के कायरा के बगल में बैठते ही , कायरा की नज़र अनय पर गई , जो कि अपने स्पोर्ट्स ड्रेस में था । लाइट रेड और येलो कलर में मिक्सअप , स्लीव लेस टीशर्ट और घुटनों के ऊपर तक आता उसका निक्कर । जिसमें वह काफी हेंडसम लग रहा था । कायरा ने उसे एक नजर देखकर , अपनी नजरें दूसरी तरफ घुमा ली । क्योंकि वह इस तरह , सिर्फ और सिर्फ आरव को नोटिस करना कहती थी, किसी और मर्द को नहीं....। वहीं अनय ने कायरा की तरफ देखकर , अपने पन से , उससे कहा ।

अनय - क्या हुआ कायरा....??? तुम यहां , ऐसे अकेले क्यों बैठी हो ...??? और मेरे सिर्फ तुम्हारे कंधे में हाथ रखने से तुम ऐसे चौंक गई , जैसे मैं कोई अनजान हूं । अब तो हम, फंक्शन के बाद से अच्छे दोस्त हैं न कायर , फिर ऐसा अजनबी जैसा बिहेव क्यों किया तुमने...???? हैव एनी प्रॉब्लम कायरा.....???

उसके सवाल करने पर कायरा को एहसास हुआ , कि उसने अनजाने में ओवररिएक्ट कर दिया है । पर अनय के इतने अपने पन से बात करने के कारण , अब उसे डर नहीं लग रहा था । लेकिन उदासी उसकी आंखों से अभी भी खत्म नहीं हुई थी । उसने बिना अनय की तरफ देखे, तुरंत अपने आसूं साफ किए , जिसे अनय भी नहीं देख पाया। और फिर कायरा ने उससे अपनी परेशानी छुपाते हुए कहा ।

कायरा - नथिंग अनय....., ऐसा कुछ भी नहीं है । वो बस कुछ सोच रही थी , और अचानक से तुम आ गए , इस लिए थोड़ी सी घबरा गई थी । बस...., और कोई बात नहीं है ।

अनय ( कायरा के चेहरे को पढ़ने की कोशिश करते हुए बोला ) - आर यू श्योर न कायरा...????

कायरा ( जबरदस्ती झूठी मुस्कान लिए , अनय की तरफ देखते हुए बोली ) - यस....., आई एम डैम श्योर ।

अनय कायरा को मुस्कुराते देख , मुस्कुरा दिया । और फिर उससे बोला ।

अनय - वैसे क्या सोच रही थी तुम ...????

कायरा ( बिना किसी भाव के ) - कुछ खास नहीं....।

अनय - ऐसा हो ही नहीं सकता । जब कुछ खास होता है, तभी इन्सान इस तरह खोया रहता है, कि उसे अपने आस पास किसी के आने जाने की तक खबर नहीं रहती । देखो कायर....., अगर बात बताने लायक है मुझे , तो बता सकती हो । हो सकता है तुम्हें अच्छा फील हो....।

कायरा ( स्टेडियम में , स्पोर्ट्स स्टूडेंट्स को देखते हुए कहीं खोए हुए स्वर में बोली ) - बस यही सोच रही थी अनय...., कि एक ही ज़िन्दगी में हमें जाने कितने रंग देखने पड़ते हैं । कभी - कभी ज़िन्दगी हमें ऐसे रंग दिखाती है , जिससे रूबरू होने की हमारी उम्र ही नहीं होती । तो कभी जिंदगी ऐसे रंग दिखाती है , जिसे समेटने के लिए खुशियों की झोली भी कम पड़ जाती है ।

अनय ( अपने हाथों में पकड़ी हुई बास्केट बॉल को साइड में रखते हुए , कायरा की तरह वह भी स्पोर्ट्स स्टूडेंट्स को देखकर, मुस्कुराते हुए बोला ) - हम्ममम...., तुम सही कह रही हो । इसी लिए तो कहा जाता है, कि जिंदगी बहुत छोटी होती है , इसे हमेशा खुलकर और खुश होकर जीना चाहिए । ताकि हमारे जिंदगी के अंतिम सफर को हम , अच्छी यादों के साथ जी सकें....।

कायरा ( उसी तरह खोए हुए अंदाज़ में बोली ) - लेकिन जब हमें खुश होकर कोई भी जीने दे , तब न हम अच्छी यादें संजो पायेंगे....।

अनय ( झटके से कायरा की तरफ पलटकर, नासमझ सा उससे बोला ) - कहना क्या चाहती हो तुम कायरा...???? मुझे कुछ समझ नहीं आया.....।

कायरा ( हड़बड़ाते हुए , अपनी नजरें यहां वहां घुमाकर कहती है ) - कुछ...., कुछ नहीं अनय....। बस मैं ये कह रही थी , अच्छी यादें बनाने से बनती हैं , जिन्हें हमें छोटी - छोटी चीजों में खुशियों को ढूंढकर बनानी पड़ती है ।

अनय ( मुस्कुराकर ) - हां....., ये बात तो तुमने हंड्रेड परसेंट सच कही । वैसे तुम आज क्लास नहीं गई ????

कायरा ( उसी की तरह मुस्कुराकर , उसे देखकर बोली ) - मेरी छोड़ो , अपनी बताओ । क्लास तुम भी तो नहीं गए हो ।

अनय - मैं तो प्रेक्टिस कर रहा था , बास्केट बॉल की । क्योंकि एक हफ्ते बाद , टूर्नामेंट है अपने कॉलेज में । जिसमें बहुत सारे कॉलेज से स्टूडेंट्स आएंगे और हमारी कॉलेज की टीम का उनके साथ मैच होगा ।

कायरा - हम्ममम ।

अनय - मैंने तो अपना बता दिया , अब तुम बताओ । तुम क्यों नहीं गई क्लास ...??? जहां तक मैंने सुना है, तुम तो कभी क्लास मिस नहीं करती । फिर आज क्यों नहीं गई ...??

कायरा ( झूठ बोलते हुए ) - वो आज मैं लेट हो गई थी । जब तक कॉलेज पहुंची , तब तक क्लास आधी हो चुकी थी । इस लिए मैं यहां आकर बैठ गई ।

अनय ( अपना एक हाथ बॉल पर रखकर बोला ) - वैसे तुम शायद बहुत टाइम से यहां अकेले बैठी हो । अब तक तो शायद तुम बोर भी हो चुकी होगी , ( बॉल को दोबारा हाथों में लेकर घुमाते हुए ) चलो....., एक मैच हो जाए । तुम्हें भी अच्छा लगेगा , और वैसे भी मैंने सुना है, कि तुम स्पोर्ट्स में चैंपियन हो । तो चलो आज एक - एक मैच खेल ही लेते हैं ।

कायरा ( अनय की बात पर इंट्रेस्ट न लेते हुए कहती है ) - नहीं अनय...., मुझे अभी नहीं खेलना । मेरा मन नहीं है ।

वो दोनो बात कर ही रहे थें, कि तभी अनय के दो दोस्त आ गए , को उसके साथ ही कुछ देर पहले खेल रहे थे और अब अनय को बॉल के साथ बुलाने आए थे । उन्होंने दोनों की लास्ट की बातें सुन ली थी और उनमें से एक लड़का , कायरा का मजाक उड़ाते हुए बोला ।

लड़का - अरे ये क्या खेलेगी...., आता होगा इसे तब न हमारे साथ मैच खेलेगी ये मिस टॉपर... ।

दूसरा लड़का ( उसी लड़के की तरह हंसते हुए ) - और क्या भाई.....। इसे तो सिर्फ किताबी कीड़े की तरह, टॉप करना बस आता है । पता नहीं इसके कॉलेज वालों ने , कैसे इसे स्पोर्ट्स के सर्टिफिकेट दे दिए ।

उन लड़कों की बात सुनकर कायरा और अनय दोनों को काफी गुस्सा आया । और अनय ने उन्हें झिड़कते हुए बोला ।

अनय - ये क्या तरीका है किसी से बात करने का ...??? और अगर वो नहीं खेलना चाहती , तो उसमें प्रॉब्लम क्या है तुम लोगों को ...???

पहला लड़का - अरे भाई कूल डाउन .....। सिर्फ लड़की की खूबसूरती देखकर उस पर फिदा मत हो जा । और वैसे भी, इसे खेलने आता होगा तब न ये हमारे साथ खेलेगी....।

इतना कह कर उस लड़के ने अपने साथी को हाई फाइव दी और दोनों एक बार फिर हंसने लगे । उन दोनों की बातों के कारण , कायरा और अनय दोनों को गुस्सा आ रहा था । जब अनय से बर्दास्त नहीं हुआ , तो वह उठा और उनमें से एक की टीशर्ट की कॉलर पकड़ कर बोला.......।


क्रमशः