Ahsaas pyar ka khubsurat sa - 57 in Hindi Novel Episodes by ARUANDHATEE GARG मीठी books and stories PDF | एहसास प्यार का खूबसूरत सा - 57

एहसास प्यार का खूबसूरत सा - 57









मिशा अपने घर के लॉन में बैठी मोबाइल चला रही थी , तभी उसे अपने घर में कार के रुकने की आवाज़ आती है । वो खुश हो जाती है , ये सोचकर कि उसके मॉम डैड आ चुके हैं । वह उठ कर तुरंत उस तरफ बढ़ती ही है , कि तभी सामने देखते ही उसके कदम ठिठक जाते हैं । सामने से राजवीर चला आ रहा था , जो कि गुस्से से मिशा को घूर रहा था। उसे देखकर मिशा का मुंह बन जाता है और साथ ही उसे चिढ़ भी होती है , कि ये यहां क्या कर रहा है..?? राजवीर उसके पास आता है और गुस्से से उसे घूरते हुए कहता है ।

राजवीर - क्या है ये सब मिशा....???? मिला क्या तुम्हें ये सब करके....????

मिशा ( हाथ बांधकर उसे घूरते हूर बोली ) - खुशी...., सुकून....., गलतफहमियों के तमगे....., जो कि मैं चाहती थी , मिले मुझे.....।

राजवीर ( गुस्से से उसका गला दबाने के लिए हाथ बढ़ाता है ) - यू..........। ( फिर रुक जाता है और अपने हाथ पीछे कर लेता है और कहता है ) तुम्हारी जैसी मतलबी लड़की मैंने आज तक नहीं देखी , जो अपना गुस्सा उतारने के लिए , किसी को भी इस्तेमाल कर सकती है ।

मिशा ( शैतानी मुस्कान के साथ ) - बहुत जल्दी नहीं जान गए तुम मुझे...., मिस्टर राजवीर तिवारी....???!!!! ( इस बात पर राजवीर उसे दुबारा घूरता है । तो मिशा उसे इग्नोर कर दोबारा अपना मोबाइल चलाते हुए , चेयर पर बैठते कर कहती है ) खैर जाने दो....., क्यों आए हो यहां , रीजन बताओ....!!!!

राजवीर को अब ध्यान आता है , कि वो यहां क्यों आया था । और मिशा को देखते ही उसे गुस्सा आ गया, जिससे वो जो काम करने यहां आया था , वो भूल गया । अब राजवीर ने खुद के गुस्से को एक किनारे किया और बहुत ही ज्यादा स्वीट बनते हुए , मिशा के बगल में बैठ गया , जिसे देखकर मिशा को बहुत हैरानी हुई और वो तुरंत उठते हुए बोली ।

मिशा - हाउ डेयर यू....???? हिम्मत कैसे हुई तुम्हारी , इस तरह बिना मेरी परमिशन के मेरे साथ बैठने की ।

राजवीर ( चेहरे पर जबरदस्ती की बहुत ही ज्यादा स्वीट मुस्कुराहट ओढ़े , मिशा का हाथ पकड़कर उसे वापस से बैठाते हुए बोला ) - चिल मिशा....., वी आर फ्रेंड्स यार..।

मिशा ( अपना हाथ छुड़ा कर ,मुंह बनाते हुए बोली ) - व्हाट एवर....., ( राजवीर को घूरते हुए ) तब तुम्हें याद नहीं थी दोस्ती , जब तुमने मुझे बिना बताए प्लान्स बनाए थे और उन्हें एक्जीक्यूट भी किया ।

राजवीर - ओफ्फो....मिशा....!!!! एक ही बात के लिए आखिर कब तक ताने दोगी ।

मिशा - काम बताओ ....., तुम्हारी ये स्वीट सी बातों से लालच की बदबू आ रही है मुझे ।

राजवीर - ऐसा नहीं है मिशा....., मैं भला तुम्हारे सामने किस बात की लालच करूंगा...????

मिशा - काम....।

राजवीर - ओके....., मैं बस ये कहने आया था , कि हमें पहले की तरह ही एक दूसरे के साथ मिलकर काम करना चाहिए , बेहतर तरीके से मात दे पायेंगे हम उन्हें । इससे तुम्हें तुम्हारा आरव मिल जाएगा और मुझे मेरी कायरा...।

मिशा ( तुरंत चेयर से उठ गई और उससे उंगली दिखा कर बात करते हुए बोली ) - आ गए न तुम अपनी औकात पर , सो कॉल्ड मिस्टर राजवीर तिवारी...????

राजवीर ( गुस्से से उठकर ) - माइंड योर लेंग्वेज मिशा कपूर.....। भूल रही हो तुम , कि तुम्हारे सामने कौन खड़ा है और तुम किससे बात कर रही हो...!!!!

मिशा ( दांत पीसते हुए ) - एक धोखे बाज से बात कर रही हूं मैं...., धोखे बाज हो तुम सबसे बड़े ....। समझे....!!!! और एक बार अगर कोई मेरे साथ धोखा करता है न , तो दोबारा उसे मेरे साथ वही बात दोहराने का मौका नहीं देती मैं ......।

राजवीर ( दांत पीसते हुए ) - बस करो मिशा...., हद से ज्यादा बोल......।

मिशा - व्हाय....., क्यों....???? क्यों बस करूं मैं...???जब तुमने वफादारी नहीं निभाई सौदेबाजी में , तो मुझसे क्यों उम्मीद कर रहे हो , कि मैं दोबारा तुम्हारे ऊपर ट्रस्ट करूं..????

राजवीर - बात यहां ट्रस्ट की नहीं है , जरूरत की है...। इस वक्त उन्हें हराने के लिए , हम दोनों को एक साथ मिलकर अपना दिमाग यूज करने की जरूरत है ।

मिशा ( फीका हंसकर ) - जरूरत....., और मुझे....!!!! आर यू मेड....???? ( चिल्लाकर ) फॉर गॉड सेक मिस्टर राजवीर तिवारी....!!!!! जरूरत मुझे तुम्हारी या तुम्हारे दिमाग की नहीं है , बल्कि तुम्हें मेरे साथ की जरूरत है , कायरा को पाने के लिए........ । इसी लिए तुम कुत्ते की तरह पूंछ हिलाते हुए यहां आ गए हो ....।

राजवीर ( गुस्से से ) - हाऊ डेयर यू....????

मिशा ( उसी तरह गुस्से में , उसकी आखों में आंखे डालकर बोली ) - यस ....., आई डेयर !!!! अपना ये सो कॉल्ड एंग्री यंग मैन टाइप एटीट्यूड न , तुम कहीं और जाकर दिखाओ , मुझे नहीं....। मैं तुम्हारी रग - रग से पहले भी वाकिफ थी , और अब भी हूं ....., समझे !!!!!

राजवीर - तो मुझसे हेल्प क्यों ली थी तुमने फंक्शन के वक्त...????

मिशा - मति मारी गई थी मेरी , जो खुद का दिमाग चलाने की जगह , तुम्हारे दिमाग की सुनी । इसी लिए मेरे सारे प्लान्स फेल हुए ।

राजवीर - पर कल का प्लान तो तुमने खुद का दिमाग यूज कर ही बनाया था , फिर वो फैल क्यों हुआ...????

मिशा ( हड़बड़ाते हुए ) - कहना क्या चाहते हो तुम ???

राजवीर - कायरा को हमेशा - हमेशा के लिए इस शहर से दूर करने का प्लान था न तुम्हारा..., या ये कहूं, उसे मौत के घाट उतारने का.....????

मिशा ( खुद की हड़बड़ाहट को शांत करते हुए ) - आधा प्लान तो सफल हुआ न मेरा ...!!!!! जिसमें तुम फंस गए....। अब जो आधा बचा है , उसे भी मैं अपने तरीके से ही एक्जीक्यूट कर लूंगी और एक दिन कायरा को आरव की जिंदगी से बाहर फेंक कर ही रहूंगी । क्योंकि आरव सिर्फ मेरा है , कायरा के आने से पहले भी और उसके आने के बाद भी ।

राजवीर - भूल रही हो तुम , कि आरव तुमसे नहीं बल्कि कायरा से प्यार करता है ।

मिशा ( तुरंत पलट कर ) - बहक गया है वो , और कुछ नहीं । जब उसे मेरा प्यार मिलेगा , तो वह सब कुछ भूल जायेगा , उस मिडिल क्लास कायरा को भी....। वैसे भी , अमीर लड़के कभी मिडिल क्लास चीप लड़कियों से प्यार नहीं करते , बल्कि वो लड़कियां सिर्फ रखैल बनाने के लिए होती हैं ।

राजवीर ( गुस्से से चिल्लाते हुए ) - आज तुम एक के बाद एक हद पार कर रही हो मिशा अपने शब्दों की ....।

मिशा ( राजवीर की तरफ पलटकर ) - मुझे मेरी हद मत सिखाओ राजवीर । ( राजवीर को देख फीका हंसते हुए ) और वैसे भी ...., ये बात बोल भी कौन रहा है , वो इंसान जिसे खुद अपनी हद पता नहीं है ।

राजवीर ( चिग्घाड़ कर ) - मिशा.......!!!!!!

मिशा ( उसी की तरह ऊंची आवाज़ में ) - स्टॉप ....., चिल्लाओ मत .....। ( घर से बाहर का रास्ता दिखाते हुए ) निकल जाओ मेरे सामने से , अभी के अभी । इससे पहले कि मैं कुछ ऐसा बोल जाऊं जो तुम बर्दास्त न कर पाओ , या फिर तुम्हें धक्के मार कर अपने घर से बाहर निकलवाऊं , निकल जाओ यहां से......, गो अवे फ्रॉम हीयर, राइट नाउ......।

राजवीर ( गुस्से से उसे घूरते हुए ) - मुझे शौक भी नहीं है , तुम्हारे घर की मिट्टी पर खड़े होने का । ( मिशा को वॉर्न करते हुए ) लेकिन एक बात याद रखना मिशा कपूर , बहुत पछताओगी तुम ....., बहुत ज्यादा पछताओगी मेरा ये ऑफर ठुकरा कर ।

मिशा - तब की तब देखी जायेगी राजवीर.....। इस वक्त तो तुम यहां से चले जाओ , वही तुम्हारे लिए अच्छा है ।

राजवीर ने एक नज़र उसे गुस्से और नफ़रत के मिले जुले भाव से देखा और अगले ही पल वह पैर पटकते हुए अपनी कार की ओर बढ़ गया । उसने गुस्से से कार स्टार्ट की , और बहुत ही रफ ड्राइविंग कर वह वहां से निकल गया । उसके जाते ही मिशा ने अपने नेल्स पर फूंक मारी और फीका मुस्कुराकर बोली ।

मिशा - हु...हं, डफर बुल......!!!! , मुझसे मदद मांगने आया था , और उसके बाद भी इतना घमंड दिखा रहा था ....। इस जैसे इंसान के साथ तो यही करना शोभा देता है । एनी वे......, अब मुझे नेक्स्ट वॉर की प्लानिंग करनी चाहिए ।

इतना कह कर वह घर के अंदर चली जाती है । यहां कायरा अनय से मिलकर ऑफिस पहुंचती है , जहां उसे पहुंचते - पहुंचते साढ़े बारह बज जाते हैं । उसे अब नई टेंशन खाए जा रही थीं, कि कहीं आरव उसे लेट आते देख गुस्सा न हो जाए । कायरा स्कूटी पार्क कर , ऑफिस पहुंचती है , लेकिन उसकी किस्मत अच्छी कही जाए , या फिर उसकी आने की सटीक टाइमिंग , कि आरव अपने केबिन में एक ऑनलाइन मीटिंग में बिज़ी था , इस लिए उसका ध्यान कायरा पर गया ही नहीं , ऐसा कायरा को लग रहा था । कायरा फटाफट से अपने केबिन में पहुंची , और अपने पेंडिंग काम पर लग गई । इधर आरव किसी से फोन पर बात कर रहा था और मुस्कुरा भी रहा था । फोन पर बात खत्म होते ही आरव की मुस्कान और बढ़ गई और वह फोन को हाथ में घुमाते हुए , बड़ी सी मुस्कान के साथ खुद से बोला ।

आरव - क्या ही कहने आपके । नाराजगी तो इतनी दिखाते हैं आप , कि हमसे बड़ा दुश्मन आपका कोई हो ही न इस शहर में , और जबकि हमारी पीठ पीछे हमारी ही चिंता में आधे हुए जा रहे हैं । कमाल का रिश्ता निभा रहे हैं आप हमसे , परायों सा बिहेव करके , अपनो सा खयाल जाता रहे हैं ।

ये सब कहते हुए आरव खुद में ही मुस्कुराए जा रहा था , तभी उसकी नज़र उस कांच की दीवाल पर गई , जहां से कायरा और उसका केबिन साफ - साफ दिखाई पड़ रहा था । कायरा लैपटॉप पर प्रेजेंटेशन तैयार कर रही थी और उसे इस तरह काम में रमा देख , आरव को काफी अच्छा लग रहा था , साथ ही कायरा को देख उसे सुकून भी मिल रहा था । वह बस अब सोच रहा था , कि कायरा का गुस्सा कैसे कम किया जाए और वजह कैसे जानी जाए इस बात की , कि आखिर कायरा इतनी गुस्सा क्यों है उससे...??? क्या छुपा रही है वो आरव से...!!!! आरव अभी ये सब सोच ही रहा था , कि तभी आदित्य उसके केबिन में आया और मुस्कुराकर चेयर पर बैठते हुए बोला ।

आदित्य - कांग्रेट्स भाई....., हमने जैसा सोचा था ठीक वैसा ही हुआ । क्लाइंट्स के पास , उनका सारा मटेरियल पहुंच गया । अब तू खुश हो जा , अब तेरे पास किसी भी क्लाइंट का कॉल नहीं आयेगा, डैमेज मटेरियल को लेकर ।

आरव - थैंक्स यार आदि , बहुत बड़ी टेंशन से बेड़ा पार करा दिया तूने।

आदित्य - मैंने....!!!!! या तूने.....????? ( आरव हल्का सा मुस्कुरा दिया ) भाई तूने ही ये सब प्लान किया था , तभी तो हमारी कंपनी को जितना नुकसान नहीं हुआ , उससे ज्यादा का मुनाफा हो गया । और ये बता...!!! कि मैं तेरे लिए पराया हूं क्या...???

आरव ( आश्चर्य से ) - ये क्या बोल रहा है तू...???

आदित्य - मैं नहीं , तू ऐसा बोलने की कोशिश कर रहा है , थैंक्स बोलकर .....। ( उदास होने का नाटक करते हुए ) पराया कर दिया भाई तूने तो मुझे ।

आरव ( हल्का मुस्कुराकर ) - सुधरेगा नहीं न तू , कभी भी...!!!! ( आदित्य ने साफ इंकार में सिर हिला दिया और फिर हंस पड़ा । आरव भी हंस दिया ) सच आदि...., तू इस कंपनी का आधे से ज्यादा काम संभाल लेता है , इसी लिए मैं बेफिक्र होकर बाकी कामों में ध्यान दे पता हूं ।

आदित्य ( झूठा गुस्सा दिखाकर ) - फिर वही बात....!!!!

आरव - ओके ....., नहीं कहूंगा ।

आदित्य ( मुस्कुराकर ) - भूल मत , हम पांचों ने मिलकर इस कंपनी को संभालने का टारगेट सेट किया था , और देख....., आज हम पांचों ही इसे खूब अच्छी तरह से संभाल रहे हैं । ( आरव मुस्कुरा देता है ) अच्छा सुन , एक बहुत बढ़िया गुड न्यूज लेकर आया हूं ...., तेरे लिए...।

आरव हैरान सा उसे देखने लगा और सोचने लगा कि आरव के बोलने से पहले ही तो किसी दोस्त ने इसे बता तो नहीं दिया , सौम्या और शिवानी के ऑफिस ज्वाइन करने के बारे में । फिर उसने अपने शक को दूर करने के अंदाज से पूछा ।

आरव - कैसी गुड न्यूज...??? सौम्य...........।

आदित्य ( उसकी बात पूरी होने से पहले ही, खुश होते हुए बोला ) - अरे भाई , मेहरा साहब को हमारा काम इतना पसंद आया , कि उन्होंने हमारे साथ एक और डील साइन करने के लिए कहा है । और उसी एवेज में , उन्होंने पार्टी में हम चारों को और साथ में कायरा को भी इन्वाइट किया है ।

आरव ( नासमझ सा ) - पार्टी....!!!!!

आदित्य - हां....., उनके बेटे का बर्थडे है कल , तो उन्होंने बर्थडे सेलिब्रेशन रखा है , इसी के साथ उन्होंने ये भी डिसाइड किया है , कि उसी पार्टी में वो हमारी कंपनी के साथ एक और डील साइन करेंगे ।

आरव - पर डील तो ऑफिस में भी साइन हो सकती है ।

आदित्य - हां हो सकती हैं, बट वो शायद इस बर्थडे पार्टी को बिजनेस पार्टी का रूप भी देना चाहते हों , इसी लिए उन्होंने ऐसा किया हो । वैसे वहां काफी बड़े और शहर से बाहर के बिजनेस मैन आने वाले हैं , हमारे लिए ये प्रॉफिट हो सकता है कि उनसे हमारी मुलाकात हो और हमारे काम के बारे में लोग मुंबई के बाहर भी जाने । और सबसे इंपोर्टेंट बात तो ये हैं , कि वो तुझसे और कायरा से मिलना चाहते हैं । तू कंपनी का सीईओ है , इस लिए शायद । और कायरा ने को डिजाइन बनाए हैं , वो उन्हें काफी पसंद आए हैं , वो उसके काम से खुश हैं , इस लिए वो खुद कायरा से मुलाकात करना चाहते हैं ।

आरव - बट तुझे तो पता हैं, मुझे ये पार्टिस वगेरह ज्यादा अच्छी नहीं लगती , मतलब हद से ज्यादा भीड़ - भाड़ में मेरा दम घुटने लगता है ।

आदित्य - आई नो......, और तू अधिकतर पार्टीस में जाता भी नहीं है , जानता हूं ये बात मैं । लेकिन उन्होंने स्पेशली हमें इन्वाइट किया है , इस लिए अपने प्रॉफिट के खातिर ही सही , उनका मान रख लेना चाहिए हमें ।

तभी पियुन अंदर आता है , और आरव की टेबल पर एक कार्ड रख कर चला जाता है । आदित्य कार्ड ओपन करता है और फिर खुद देखने के बाद आरव को दिखाता है । आरव कार्ड पढ़ ही रहा होता है , कि तभी उसके लैंडलाइन पर कॉल आता है । वह रिसीवर को कान से लगाता है और नजरें उसकी कार्ड पर ही होती हैं ।

आरव - हैलो......।

मिस्टर मेहरा ( दूसरी ओर से ) - आरव साहब बोल रहे हैं..!!!

आरव - यस...., हूज़ देयर...????

मिस्टर मेहरा ( मुस्कुराकर ) - आयम अनिकेत...., अनिकेत मेहरा....। कार्ड......।

आरव ( बीच में बात काटकर ) - या....., उसे ही पढ़ रहा हूं ।

मिस्टर मेहरा ( हंस कर ) - सिर्फ पढ़ना नहीं है आरव साहब , बल्कि शरीक भी होना है हमारी छोटी सी पार्टी में । जब से आपके बारे में सुना है , वाकई मिलने के इंतजार में हूं । खास कर कल के इंसिडेंट के बाद भी जब आपकी कंपनी के शेयर्स वापस से अपनी पोजीशन पर आते देखे , तब से और बेचैन हो गया आपसे मिलने को , क्योंकि इतने बड़े नुकसान के बाद भी आपकी कंपनी का बाल तक बांका नहीं हुआ , ऐसे कंपनी के मालिक से मिलना और उस कंपनी के साथ काम करना तो बनता ही है । अभी तक सिर्फ आदित्य जी और नील जी से ही मुलाकात हो पाई है मेरी, इसलिए मैं अब आपसे भी मिलना चाहता हूं । उम्मीद है आप न नहीं कहेंगे ....। मैं ये भी मानता हूं , कि आप बहुत बिजी होंगे , इसी लिए मैंने आपको प्रोफेशनल के साथ - साथ पर्सनली इन्वाइट करना भी जरूरी समझा । ताकि अगर आप प्रोफेशनली इनकार भी कर दें , तो पर्सनली कोई रीजन न बचे आपके पास यहां न आने का।

आरव - बहुत ज्यादा स्मार्ट हैं आप ।

मिस्टर मेहरा - बिजनेस मैन हूं , स्मार्ट होना तो बनता ही है हमारी फील्ड में । तो मैं ये समझूं , कि कल आप आ रहे हैं .....!!!!!????

आरव - आपकी बातों ने वाकई मजबूर कर दिया है मुझे , इस पार्टी में शरीक होने को ।

मिस्टर मेहरा ( मुस्कुराकर ) - माय प्लेजर......, उम्मीद है आप मिस कायरा को भी साथ लेकर आएंगे , काफी अच्छा काम करती हैं वो , और काफी टैलेंटेड भी हैं , उनके काम में हार्ड वर्क नज़र आता है , और बहुत सुना भी है उनके बारे में...., उनसे मुलाकात तो बनती ही है ।

आरव - हम सभी जरूर आयेंगे ।

मिस्टर मेहरा - थैंक्यू सो मच ......।

इतना कह कर मिस्टर मेहरा ने फोन कट कर दिया और आरव सोच में पड़ गया , कि इतना इंसिस्ट क्यों किया जा रहा है , उन्हें बुलाने के लिए । आदित्य ने जब उसे सोच में गुम देखा , तो कहा।

आदित्य - क्या सोच रहा है ...??? अब जायेगा कल या नहीं ....!!!!

आरव - कुछ खास नहीं ....। ( कार्ड को अपनी टेबल के ड्रावर के हवाले करके ) जाना तो पड़ेगा , क्योंकि उन्होंने तुझे तो कहा ही , साथ ही कार्ड भिजवाने के बाद मुझे खुद कॉल कर इन्वाइट भी किया है , इस लिए जाना ही पड़ेगा ।

आदित्य - हम्ममम ....!!!! कायरा को बता देना , या फिर मैं कह दूंगा.....?????

आरव ( कुछ याद करते हुए ) - नहीं , रहने दे । मैं खुद कह दूंगा ।

आदित्य ( चेयर से उठते हुए ) - ठीक है , फिर मैं चलता हूं ।

आरव ( उसे रोकते हुए ) - रुक ....., कुछ बात करनी है तुझसे ।

आदित्य ( वापस चेयर पर बैठते हुए ) - हां बोल ।

आरव - सौम्या कल से ऑफिस ज्वाइन कर रही है ।

आदित्य ( शांत सा ) - हम्मम, बताया मुझे नील ने, मेरे ऑफिस आते ही ।

आरव ( मन में ) - मतलब कि मैं सही था , मेरे बताने से पहले ही इसे बता दी गई है ये बात । ( फिर आदित्य के चेहरे को देखते हुए ) तुझे कोई प्रॉब्लम नहीं है...!!???

आदित्य - नहीं....., कोई प्रॉब्लम नहीं है मुझे । इनफेक्ट अच्छा ही है , उसकी सारी शिकायतें कुछ हद तक दूर कर सकूंगा मैं ।

आरव - उसकी शिकायतें गलत भी तो नहीं है ।

आदित्य ( भावशून्य सा ) - जानता हूं.....।

आरव - तो क्या सोचा है...????

आदित्य ( एक गहरी सांस छोड़ कर ) - कुछ भी नहीं .....।

आरव ( हैरान सा ) - कुछ भी नहीं...????

आदित्य ( मुस्कुराकर ) - जब तुझ जैसा दोस्त हो , सबके बारे में सोचने के लिए , सबका खयाल रखने के लिए , तो भला हम दोस्तों को क्या जरूरत , कुछ भी सोचने की ।

आरव ( मुस्कुराकर ) - मतलब कि आलसी ही रहोगे तुम लोग इस मामले में .....। ( आदित्य मुस्कुरा देता है । आरव गंभीर होकर कहता है ) पर मौका दे रहा हूं मैं आदि तुझे , ताकि दोबारा मैं उसकी आंख में आसूं न देख सकूं । तू जानता है अच्छे से , कि मेरे लिए दोस्त कितने मायने रखते हैं । तुम सभी की प्रॉब्लम्स देखी नहीं जाती मुझसे , इस लिए जो बन पड़ता है करता हूं । लेकिन यहां मैं जो कर सकता था , वो मैने किया , अब तेरी बारी है । तुझे अब ये ध्यान रखना है , कि तू अब सौम्या को दोबारा शिकायत का मौका न दे । वरना.......।

आदित्य ( मुस्कुराकर ) - आई नो....., आई नो कि मुझे क्या करना है । डोंट वरी ...., ध्यान रखूंगा मैं तेरी बात का । चल अब चलता हूं , वरना पूरा दिन यहीं निकल जायेगा और हमारी बातें ही खत्म नहीं होंगी ।

आरव मुस्कुरा देता है और आदित्य अपने केबिन में चला जाता है । उसके जाते ही आरव की नज़र अनायास ही खुद के और कायरा के केबिन की कांच से बनी कॉमन दीवार की तरफ घूम जाती है , जहां से अब उसे कायरा नहीं दिख रही थी । वह कुछ सोचकर पियून को बुलाकर , उसे कायरा को अपने केबिन में बुलाने के लिए कहता है । पियून के जाते ही , आरव कांच की दीवार पर पर्दा ढक देता है , क्योंकि कायरा को अब तक उस दीवार के बारे भी नहीं पता था ।

इधर कायरा, मनीष और नैन्सी से किसी पेपर को हाथ में पकड़े हुए , उसे उन्हें दिखाकर कुछ डिस्कस कर रही थी । तभी पियून ने आकर उसे बताया , कि आरव उसे बुला रहा है , तो वह नैन्सी और मनीष को उस पेपर को देकर , उसके बारे में डिटेल्स निकालने के लिए कहकर , आरव के केबिन की तरफ बढ़ गई ।

कायरा ( दरवाज़े पर खड़े होकर ) - मे आय कम इन सर..???

आरव ( कायरा को देखकर ) - यस.....।

कायरा ( आरव की टेबल के सामने खड़े होकर ) - आपने बुलाया ....????

आरव ( फाइल रीड करते हुए ) - यस.....। क्या कर रही थीं आप अभी...????

कायरा आरव के इस सवाल से हैरान हो जाती है , कि एक तो इतनी इज्जत , कि आप कह कर बात की जा रही है , ऊपर से ये कैसा सवाल हुआ , कि मैं क्या कर रही थी । वह असमंजस से आरव को देखते हुए कहती है ।

कायरा - जी.......।

आरव ( उसकी तरफ देखकर ) - मैने पूछा क्या कर रही थीं आप अभी ....????

कायरा - नैन्सी और मनीष से एक कढ़ाई के वर्क के बारे में डिस्कस कर रही थी । न्यू आया है ये वर्क मार्केट में और काफी ट्रेंड में भी है , इसी लिए इसके बारे में दोनों से डिटेल्स निकालने लिए कहा है , ताकि हम भी उस वर्क को अपने कलेक्शन में शामिल कर सकें ।

आरव ( फाइल पढ़ने का नाटक करते हुए ) - हम्ममम ।

कायरा ( आरव के चेहरे की ओर झांकते हुए ) - बस..!!!! यही पूछने के लिए बुलाया था आपने मुझे...????

आरव ( एक दम से होश में आते हुए ) - नो....., नहीं.....। ( संभलते हुए ) आई मीन, मुझे और भी कुछ काम था आपसे ।

कायरा ( दोबारा इतनी इज्जत पाकर फिर से हैरान हुई , पर अपनी हैरानी छुपाते हुए बोली ) - कहिए ....।

आरव - ऑफिस आने के बाद जो आपने डिजाइन बनाएं हैं , उन्हें मुझे दिखाइए । उन्हें आज ही फाइनल कर , सबमिट करना है । ताकि वे जल्द से जल्द फैक्ट्री पहुंच सके और उन पर काम होना स्टार्ट हो सके । और हां ....., बाकी के बचे हुए डिजाइंस आप यहीं , मेरे केबिन में बैठ कर बनाएंगी।

कायरा - बट मैं आपने केबिन में बैठ कर बना सकती हूं , कंप्लीट होने के बाद आपको दिखा.....।

आरव ( कायरा को झूठे गुस्से के साथ देखकर ) - जितना कहा है उतना कीजिए मिस गर्ग.....।

कायरा ( मन ही मन चिढ़ते हुए ) - ओके....। आती हूं ....।

इतना कह कर , वह गुस्से और चिढ़न के मिलेजुले भाव के साथ केबिन के बाहर निकल जाती है और अपने केबिन में डिजाइंस समेटते हुए बड़बड़ाने लगती है ।

कायरा - कोई काम नहीं बचा है मेरे पास , इनके ऑर्डर फॉलो करने के अलावा । पहले कॉलेज में और अब यहां.. । ( आरव की नकल उतारते हुए ) " जितना कहा है उतना कीजिए मिस गर्ग ....। " जैसे मैं इनकी एम्प्लॉय नहीं , गुलाम हूं । जब मन किया , हुक्म चला दिए .....। यार बॉस हैं , इसका मतलब ये थोड़े ही है , कि मेरी मर्जी के खिलाफ कुछ भी करवाते रहें मुझसे और मुझे कुछ बोलने का मौका ही न दें ।

कायरा ये सब बड़बड़ा ही रही थी , कि तभी उसके लैंडलाइन पर कॉल आया । कायरा ने गुस्से में बिना देखे ही कॉल अटेंड कर लिया । और रिसीवर कान से लगाकर बोली ।

कायरा - कौन हैं...???? चैन नहीं है क्या इस ऑफिस में किसी को भी ...???? पहले ही दिमाग का दही हुआ रखा है , बचा - खुचा तुम रिसेप्शन से फोन कर - करके कर दो । अब बोलो न प्रेमा ( ऑफिस की रिसेप्सनिस्ट ) , क्या हुआ...???

आरव ( फोन की दूसरी ओर से सधे हुए लहजे में ) - कम फास्ट....।

आरव की आवाज सुनकर कायरा के हाथ से रिसीवर छूटते - छूटते बचा । उसने दोबारा रिसीवर कान से लगाया , लेकिन तब तक आरव दूसरी तरफ से कॉल कट कर चुका था । कायरा ने अब झल्लाकर रिसीवर वापस रखा , और बचा हुआ समान समेटते हुए बोली ।

कायरा - किस्मत ही फटी पड़ी है मेरी तो आज ।

इतना कह कर वह डरते हुए आरव के केबिन की ओर बढ़ गई , कि उसने बिना वजह ऑफिस के बॉस को इतना कुछ सुना दिया । अब पता नहीं आरव बॉस होने के नाते , उससे क्या कहेगा और इस बात के लिए कैसे उसकी बैंड बजाएगा । जबकि इधर आरव कायरा की हरकतें कांच की दीवार के इस पार से देखकर , मुस्कुरा रहा था। जैसे ही उसने कायरा को केबिन से निकलते देखा , तुरंत पर्दा डाला दीवार पर और आकार अपनी चेयर पर बैठ कर काम करने लगा । कायरा उसके केबिन में आई और उसे डिजाइंस दिखाए । आरव ने डिजाइंस देखने के बाद , उसे साइड में रखा और बिना मिस्टेक के भी बचे हुए डिजाइंस में मिस्टेक निकाल - निकाल कर जबरदस्ती कायरा से काम करवाता रहा , या एक तरह से कहा जाए कायरा को अपने सामने बैठा कर, उसे जी भर के परेशान करने के साथ - साथ उसकी मासूमियत से भरा चेहरा देखने के लिए जबरदस्ती गलतियां निकालता रहा , दैट मींस....., ताड़ता रहा😀 .......।

क्रमशः

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