Ahsaas pyar ka khubsurat sa - 59 in Hindi Novel Episodes by ARUANDHATEE GARG मीठी books and stories PDF | एहसास प्यार का खूबसूरत सा - 59

एहसास प्यार का खूबसूरत सा - 59





इधर आरव ने कायरा को अपने केबिन में बुलवाया , लेकिज पियून ने उसे बताया कि वो इस वक्त ऑफिस में नहीं है , कहीं बाहर गई है ।

आरव - किसी को उसने बताया कि वह कहां जा रही है ...???

पियून - नो सर....., किसी को नहीं पता ।

पियून को ये बात पता नहीं थी , कि आदित्य और रेहान इस बारे में जानते हैं । आरव ने उसका जवाब सुनकर उसे जाने के लिए कहा और तुरंत जय को कॉल किया ।

जय ( फोन रिसीव करते हुए ) - गुड आफ्टर नून सर....।

आरव - वेरी गुड आफ्टर नून जय .....। इस वक्त तुम कहां हो और कायरा कहां है ....????

जय ( कायरा को मिशा के घर के अंदर जाते देख बोला ) - कायरा मैम मिस्टर कपूर के घर आई हुईं हैं , शायद आपकी फ्रेंड मिशा कपूर से मिलने । मैं उन्हीं के पीछे आया हुआ हूं , लेकिन उनसे दूर में खड़ा हूं , ताकि वो मुझे देख न ले ।

आरव ( हैरानी से मन में ) - मिशा वापस आ गई , और मुझे पता भी नहीं है । ( जय से ) ओके....., तुम ध्यान रखना , जो मैंने तुम्हें समझाया है उस बात का !!!!

जय - ओके सर.....।

आरव ने फोन कट कर दिया और सोचने लगा , कि " जय को तो मैंने समझा दिया कि कायरा का ध्यान रखे । लेकिन कायरा ऑफिस टाइम के बीच में मिशा से मिलने क्यों गई ...??? और मिशा वापस कब आयी..???? " आरव यही सब सोचने लगा । पर फिर कायरा आयेगी तो उसी से पूछ लूंगा सोचकर उसने उस बात को वहीं विराम दिया और कुछ सोचकर चंदन को कॉल किया । चंदन ने कॉल रिसीव की तो आरव ने कहा ।

आरव - कहां है वह...????

चंदन ( अपने घर में बैठा , दूसरे फोन में अपने आदमी का मैसेज पढ़कर बोला ) - अभी राजवीर घर पर है साहब....। बुरी तरह से बौखलाया हुआ है वह । आज सुबह कायरा मेमसाहब ने उसे जबदस्त धमकी दी है , जिसकी वजह से उसे कुछ समझ ही नहीं आ रहा , कि वह क्या करे । ( ये बात सुनकर आरव मुस्कुरा दिया, ये सोचकर कि सुबह उसने जो अंदेश लगाया था , जय के आदमियों के बताए अनुसार , वह सही निकला ) कुछ समय पहले उसे मिसेज तिवारी ने बहुत समझाया , पर वह उनसे भी बहस कर बैठा ।

आरव - हम्मम.....। अभी वह कोई प्लानिंग तो नहीं कर रहा हमारे खिलाफ...????

चंदन - कोशिश की थी साहब उसने आज...!!!

आरव - मतलब....!!!!

चंदन - वह आज मिशा मेमसाहब के घर गया था और वहां पर राजवीर को मिशा मेमसाहब ने बहुत कुछ सुनाया ....।

आरव ( हैरानी से ) - लेकिन वह मिशा के यहां क्यों गया था...??? और उनके बीच क्या बात - चीत हुई..???? क्या तुम्हें पता है...????

चंदन - जी साहब....। राजवीर मिशा मेमसहाब से........!!!!

तभी आरव के केबिन में एक एम्प्लॉय आया और उसने फेब्रिक से रिलेटेड , बजट की फाइल आरव के सामने कर दी । आरव ने उसे देखा , तो चंदन से दो मिनट होल्ड करने के लिए कहा । आरव की बात सुनकर चंदन चुप हो गया और आरव ने उस एम्प्लॉय से कहा ।

आरव - फाइल रख दो , मैं बाद में साइन कर भिजवा दूंगा।

एम्प्लॉय ( डरते हुए बोला ) - सर...., वो....। राहुल सर ने ये फाइल अभी मंगवाई है , क्योंकि ये फाइल आपके साइन होने के बाद तुरंत भिजवानी है । अगर लेट हुआ , तो न्यू फेब्रिक नहीं आ पायेंगे ।

इतना कह कर उस एम्प्लॉय ने गहरी सांस ली , कि चलो जबान खोल ली कम से कम गुस्सैल बॉस के सामने । लेकिन आरव ने उसकी बात पर उस एम्प्लॉय को घूर कर देखा , जिससे वह एम्प्लॉय डर गया और चुप - चाप उसने अपनी नजरें झुका ली । ये देख कर आरव को हंसी आयी और वह मन ही हंस दिया लेकिन चेहरे पर गुस्से वाले भाव लिए रहा , और मन ही मन सोचने लगा कि " मेरी एक डांट ने ऑफिस में दहशत मचा दी है , जब असली गुस्सा दिखाऊंगा तो पता नहीं क्या होगा इन सबका..!!! " । आरव के घूरने के बाद बेचारे की हिम्मत ही नहीं हुई दोबारा आरव की तरफ देखने की । आरव ने पेन लिया और फाइल में रखे पेपर्स पर साइन करने लगा ।

असल में जिस दिन से आरव ने नैन्सी को और बाकी सभी को डांट लगाई थी, उस दिन से सभी एम्प्लॉय आरव से डरने लगे थे , जिसे आज आरव ने भी महसूस कर लिया था । आरव ने फाइल साइन कर उस एम्प्लॉय की तरफ बढ़ा दी , तो एम्पलॉय ने कांपते हाथों से फाइल लेनी चाही , तो आरव मुस्कुराते हुए उससे बोला ।

आरव - अच्छे से पकड़िए.....। वरना गिर जायेगी फाइल । ( एम्प्लॉय ने फाइल अच्छे से पकड़ ली , तो आरव बोला ) थैंक्यू.....।

थैंक्यू सुनकर एम्प्लॉय ने आरव की तरफ देखा , तो उसे मुस्कुराता पाया । तो एम्प्लॉय को थोड़ा अच्छा लगा , और सुकून भी मिला कि " चलो बॉस का मूड अच्छा है , इन्होंने गुस्सा नहीं किया । " बदले में एम्प्लॉय ने भी मुस्कुराकर थैंक्यू कहा और टेंशन फ्री होकर वापस केबिन से बाहर चला गया । आरव को भी अच्छा लगा , उस एम्प्लॉय की मुस्कान देख कर । क्योंकि एक बॉस का कर्तव्य काम को सही ढंग से करवाने के अलावा ये भी होता है , कि उसके एम्प्लॉय उससे डरे न बल्कि उसकी इज्जत करें और डर कर नहीं , बल्कि जिम्मेदारी समझ कर ऑफिस में काम करें, इस लिए बॉस को कभी - कभी ऐसा व्यवहार कर देना चाहिए , जिससे एम्प्लॉय के चेहरों पर भी मुस्कान आ सके ।

एम्प्लॉय के जाने के बाद आरव ने दोबारा फोन कान से लगाया और कहा ।

आरव - हां चंदन ...!!! क्यों गया था राजवीर मिशा के घर..??

चंदन - क्योंकि राजवीर.....।

तभी चंदन का छः साल का बेटा जोर - जोर से रोने लगा , जो कि खेलते हुए वहीं गिर गया था । चंदन की पत्नी उसे चुप करवाने लगी , लेकिन वह चुप नहीं हुआ । उसकी आवाज फोन के इस पार आरव को भी सुनाई दे रही थी । उसकी आवाज की वजह से चंदन का ध्यान उसकी ओर गया और उसने अपनी पत्नी को उसे चुप करवाने को कहा , पर उसने बताया कि उसका बेटा चुप ही नहीं हो रहा है और पैर में चोट लगने की वजह से हल्का खून भी निकल रहा है । जब ये बात आरव ने सुनी , तो तुरंत चंदन से कहा ।

आरव - चंदन जाओ , पहले बच्चे को देखो और उसकी मलहम पट्टी करो।

चंदन - लेकिन साहब आपका ये बात जानना ज्यादा जरूरी है......।

आरव ( उसकी बात बीच में काटकर बोला ) - अपने बच्चो और परिवार से ज्यादा जरूरी कुछ नहीं होता चंदन । जाओ और बच्चे की मलहम पट्टी करो ....., इस वक्त वह ज्यादा जरूरी है ।

चंदन उसकी बात पर मुस्कुरा दिया , और उसने " जी साहब " कहा । आरव ने उसका रिप्लाई सुनकर, फोन कट कर दिया और अपने काम में लग गया । इन सब में चंदन की बात अधूरी रह गई और आरव को मिशा की सच्चाई पता नहीं चल पाई ।

यहां कायरा मिशा से लगभग आधे घंटे बात करने के बाद उसके घर से बाहर निकली । उसके चेहरे पर गुस्सा भी था और एक हल्की विजई मुस्कान भी , कि कम से कम उसकी धमकी से मिशा की आखों में थोड़ा ही सही , पर डर साफ देखा था कायरा ने, जो कि आज सुबह राजवीर की आखों में भी उसे दिखा था और गुस्सा उसकी बातों से थी, जो मिशा ने कायरा को लेकर की थी । लेकिन उसे एक उम्मीद भी थी , कि शायद उसकी धमकी मिशा की हरकतों पर और उसके पागल पन पर रोक लगा सके । अब देखना ये था कि मिशा कायरा की बातों से अपनी हरकतों पर ब्रेक लगाती है , या फिर उसकी नफरत कायरा के लिए और बढ़ती है ।

कायरा मिशा के घर से बाहर आयी और स्कूटी स्टार्ट कर ऑफिस निकल गई । जय भी एक उचित दूरी बनाकर उसके पीछे हो लिया । लेकिन वह मिशा और कायरा की बातें नहीं सुन पाया था । कायरा ऑफिस पहुंच कर अपने केबिन की ओर जाने लगी , तो बीच में ही उसे आदित्य मिल गया । रेहान वापस घर जा चुका था । आदित्य ने उसे वापस आया देखा , तो तुरंत कहा।

आदित्य - क्या बात हुई वहां पर कायरा...????

कायरा ने आस - पास देखा जहां बहुत से लोग थे । तो उसने आदित्य से कहा ।

कायरा - आई थिंक यहां बात करना ठीक नहीं होगा आदित्य । केबिन में चलो , वहीं बात करते हैं ।

दोनो कायरा के केबिन की ओर बढ़ गए । आदित्य केबिन में आते साथ ही बोला ।

आदित्य - अब बताओ कायरा......, क्या बात हुई मिशा से, उसने अपनी गलती मानी ..???

कायरा ( थकी हुई सी अपनी चेयर पर बैठते हुए बोली ) - लगा तो नहीं ऐसा , पर.....।

तभी उसकी नज़र अपने केबिन के बाहर गई , जहां से उसे राहुल उसके केबिन में ही आता दिखा । तो उसने आदित्य को बाहर की तरफ इशारा किया और दोनों मिशा की बात छोड़, किसी डिजाइन से रिलेटेड बात करने लगे । राहुल कायरा के केबिन में आया और आदित्य को कायरा के साथ डिजाइन के बारे में डिसकस करते देख बोला ।

राहुल - अरे आदि..!!! तू भी यहां है , मैं अभी तेरे ही केबिन से आ रहा हूं । नील तुझे बुला रहा है , किसी डील पर डिस्कस करने को । ( कायरा से ) और तुम कहां थी कायरा ...??? अभी थोड़ी देर पहले मैं तुमसे मेहरा साहब की डील की फाइल मांगने आया था , पर तुम तो यहां थी ही नहीं ।

कायरा और आदित्य ने एक दूसरे को देखा , फिर कायरा ने झूठी कहानी गढ़ते हुए कहा ।

कायरा - वो मेरी एक फ्रेंड प्रॉब्लम में थी , तो उसी की हेल्प करने गई थी ।

राहुल ने आदित्य की तरफ देखा , तो उसने तुरंत कहा ।

आदित्य - मैं भी कायरा से यही पूछने आया था , फिर हम इस डिजाइन के बारे में डिसकस करने लगे ।

दोनों ने झूठ बोल दिया , जिसे राहुल ने सच मान लिया । फिर राहुल ने कहा ।

राहुल - अच्छा कायरा , वो फाइल तो दे दो ।

कायरा ने तुरंत अपने टेबल की ड्रावर से मेहरा कंपनी की फाइल निकाल कर दी । तो राहुल उसे लेकर जाने लगा । तभी उसने देखा , कि आदित्य वहीं खड़ा है तो उसने आदित्य से कहा ।

राहुल - तू क्या कर रहा है , चल न ...!!!! नील बुला रहा है तुझे कब से ।

आदित्य और कायरा ने एक बार फिर एक दूसरे को देखा और फिर कायरा ने उसे इशारों में ही बाद में मिशा के बारे में बताने को कहा । तो आदित्य भी राहुल के साथ चल दिया । इन सब में कायरा ने अभी तक कुछ नहीं खाया था और नींद तो इन सब में ले पाना उसके लिए संभव ही नहीं था । इस वजह से उसे सिर में बुरी तरह से दर्द होने लगा और आखें भारी होने लगी । आदित्य और राहुल बाहर जाने को हुए , कि कायरा ने सिर पर हाथ रखकर थकी हुई नजरों से कहा ।

कायरा - आदित्य....!!! ( आदित्य और राहुल रुक गए ) प्लीज...., पियून से कह कर मेरे लिए एक कप कॉफी भिजवा दोगे क्या , सिर बहुत दुख रहा है ।

कॉफी सुनकर दोनों एक साथ हैरानी से बोले - कॉफी...??? पर तुम्हें तो कॉफी से एलर्जी है .....।

कायरा को ध्यान आया , कि वह सिर दर्द के कारण क्या बोल गई । वह उन दोनों से बोली ।

कायरा - सॉरी....। इतना ज्यादा दर्द है , कि मुझे इस वक्त इस बात का ध्यान ही नहीं आया । प्लीज एक कप चाय अगर भिजवा सको तो....।

आदित्य - डोंट वरी....। मैं भिजवाता हूं चाय...।

इतना कह कर दोनों केबिन से बाहर निकल गए । यहां कायरा का सिर बहुत ज्यादा दर्द करने लगा। उसे लग रहा था जैसे एक साथ कई हथौड़े उसके सिर पर कोई मार रहा हो । इसके साथ ही चेहरा दर्द से पूरा लाल हो चुका था और आखें भी लाल हो चुकी थी और उनमें स्वैलिंग भी आ चुकी थी । गर्मी लगने के कारण कायरा ने एसी का टेंपरेचर और ठंडा कर दिया और उसने दोनों हाथों को एक के ऊपर एक रखा और उस पर अपना सिर रखा , और आखें बंद कर ली । कुछ पलों बाद ही उसे बहुत तेज़ नींद आ गई , ऐसा कायरा को लगा । कुछ पल बाद ही पियून चाय लेकर आया और उसने कायरा को जगाया , पर कायरा नहीं उठी । गहरी नींद में सो रही होगी सोच कर पियून ने चाय टेबल पर ढककर रख दी , ये सोचकर कि कुछ देर में उठने के बाद वह पी लेगी और फिर वह केबिन से बाहर चला गया ।

इधर आरव को जय ने मैसेज कर दिया था कि कायरा ऑफिस पहुंच चुकी है । मैसेज पढ़ कर आरव बिना किसी से कायरा के बारे में पूछे , उसके केबिन की ओर बढ़ गया । अंदर आने के बाद केबिन का नजारा देखकर आरव को हैरानी हुई । वह अंदर आया , और चाय को टेबल पर रखा देख उसने कायरा को आवाज़ दी । लेकिन कायरा नहीं उठी । आरव ने उसकी तरफ उसे उठाने के लिए हाथ बढ़ाया , फिर कुछ सोच कर रुक गया । उसने एक दो बार फिर आवाज़ लगाई , पर कायरा नहीं उठी । तो आरव उसे सोया हुआ सोचकर केबिन से बाहर जाने लगा , फिर अचानक ही रुक गया और कायरा की तरफ देखा , जिसका चेहरा आरव की तरफ न होकर खिड़की की तरफ था । इस वजह से आरव अभी तक कायरा का चेहरा नहीं देख पाया था । कुछ सोच कर आरव वापस कायरा की तरफ आया और उस तरफ चला गया जिस ओर कायरा का चेहरा था । आरव ने देखा कायरा का चेहरा उसके बालों से ढका हुआ था , जिससे आरव को अभी भी कायरा का चेहरा नहीं दिख पा रहा था । उसने कायरा के चेहरे से बालों को हटाने के लिए हाथ बढ़ाया , फिर एकदम से रुक गया । उसके हाथ कांप रहे थे , बिना कायरा की इजाजत के उसे छूने से । जब आरव से रहा नहीं गया , तो आरव ने अपने तर्जनी उंगली से हल्के से कायरा के चेहरे पर ढके हुए बालों को उसके कान के पीछे किया । उसके हाथ अब भी कांप रहे थे । इसी वजह से आरव की उंगली हल्की से कायरा के चेहरे को छू गई , जिससे एक मीठा सा एहसास आरव के दिल को छू गया और उसने तुरंत अपना हाथ हटा लिया । कुछ पल बाद उसका ध्यान कायरा के लाल चेहरे पर गया , तो उसने खुद से कहा।

आरव - आखों को देख कर ही पता चल रहा था , कि सोई नहीं है रात भर । इसी लिए थक कर नींद आ गई होगी इसे और चेहरा भी पूरा लाल हो चुका है । पक्का गहरी नींद में हैं । क्या करूं ..??? इसे उठा कर सोफे पर लेटा दूं क्या...??? ऐसे सोएगी तो इसकी कमर दर्द करने लगेगी और साथ में इसे बैक पेन भी होगा । ( कुछ पल सोचने के बाद ) नहीं....., कहीं उठाने से जाग न जाए । फिर इसकी नींद भी खराब हो जायेगी । घर जाने को कहा था , पर नहीं मानी । रहने देता हूं , ऐसे ही । ( मुस्कुराकर ) वैसे भी सोते हुए कितनी मासूम लग रही है , बिल्कुल किसी छोटी बच्ची की तरह । काश कि मैं तुम्हें ऐसे ही जीभर कर दिनभर देखता रहूं । पर लगता है किस्मत को ये मंजूर नहीं । इसी लिए देखो न , तुम्हारे पास होकर भी तुमसे दूर हूं । प्यार होकर भी कह नहीं पा रहा हूं तुमसे । तुम्हें ऐसे ही देखते रहने को दिल चाह रहा है । लेकिन पता नहीं , तुम कभी ये हक मुझे दोगी भी या नहीं ...???

यही सब कहते हुए आरव प्यार से कायरा को देखने लगा । फिर वह उसे सोता छोड़ केबिन से बाहर जाने के लिए बढ़ने लगा , लेकिन उसके कदम आगे बढ़ने को तैयार नहीं थे और दिल उसे यहीं रुकने को कह रहा था और दिमाग यहां से बाहर जाने को । आरव ने एक कदम और बढ़ाया , तो उसके दिल ने एक बार फिर आवाज़ लगाई , कि इस वक्त उसे यहीं रुकना चाहिए । क्यों , किसलिए...???? इसका जवाब दिल ने उसे नहीं दिया , बस उसे यहीं रुक जाने को कहा । और दिमाग यहां से जाने को दोबारा कहने लगा । आरव ने एक कदम और बढ़ाया , फिर रुक गया । उसने कायरा की तरफ देखा , जो अब भी वैसे ही बैठे - बैठे सो रही थी ( ऐसा आरव को लग रहा था ) । आरव ने अब कायरा की टेबल के सामने रखी चेयर उठाई और ठीक कायरा के सामने उसे रखकर , वहीं उस चेयर पर बैठ गया और उसके चेहरे को एक टक देखने लगा....... । दिल और दिमाग की जंग में आखिर दिल जीत गया और आरव अपने प्यार.... , अपनी मोहब्बत ....., अपने इश्क़ को एक टक निहारने लगा , बिना ये सोचे कि अगर कोई उन्हें देखेगा तो क्या कहेगा , या फिर कायरा उठेगी तो क्या सोचेगी ।

कुछ पल बाद आदित्य नील के केबिन से बाहर आकर कायरा के केबिन की ओर बढ़ गया , और कायरा के केबिन का दरवाजा ओपन करते ही उसने जब वहां का नज़ारा देखा , तो मुस्कुरा उठा । उसने अपने कदम पीछे ले लिए और वापस नील के केबिन में चला गया , जहां इस वक्त राहुल भी नील के साथ था । वहां उसने उन दोनों को आरव और कायरा के बारे में बताया , तो वो दोनों भी मुस्कुराए बिना नहीं रह सके । आरव कायरा को देखने में इस कदर खो गया था , कि उसे आदित्य के आकार जाने के बारे में खबर ही नहीं थी । वह तो आज एक टक कायरा को निहारने में बिज़ी था , जैसे उसने अपने बिज़ी शेड्यूल में से , फुरसत के ये कुछ पल चुराए हों। जिसमें वह इत्मीनान से अपनी खूबसूरत मोहब्बत को निहार सके ।

आरव को इसी तरह बैठे हुए लगभग दो घंटे बीत चुके थे । और घड़ी में शाम के साढ़े चार बज चुके थे । आज आरव को न ही काम का और न ही लंच का होश था । साढ़े चार के करीब ही आदित्य कायरा के केबिन में आया , कोई इंपोर्टेंट फाइल लेकर , जिसपर आरव के सिग्नेचर करवाना जरूरी था । बात सीधी सी ये थी , कि कोई भी दोस्त आज आरव को इस खूबसूरत पल को जीने से नहीं रोकना चाहता था , या ये कहें कि उसमें बाधा नहीं डालना चाहता था । लेकिन इस इंपोर्टेंट फाइल के चक्कर में आदित्य को आरव के पास आना ही पड़ा , जिससे आरव के द्वारा कायरा को निहारने में खलल पड़ने ही वाला था ।

आदित्य ने दरवाजा नोक किया , पर आरव को कोई फर्क नहीं पड़ा , वह वैसे ही बैठा रहा , जैसे उसे दरवाजा नोक होने की आवाज आयी ही न हो । ये देख आदित्य केबिन के अंदर आ गया और उसने आरव को आवाज़ दी । पर आरव ने तब भी उस पर ध्यान नहीं दिया । ये देखकर आदित्य आरव का नाम लेकर जोर से चिल्लाया । और उसकी आवाज़ से आरव की तंद्रा टूटी और वह तुरंत उसे इशारे से बोला ।

आरव ( उंगली अपने होठों पर रखते हुए ) - श् श्श् श्श्श् श्श्श ..............। ( कायरा की तरफ इशारा कर ) सो रही है , उठ जायेगी । अभी सोई है..... ।

आरव की बात सुनकर आदित्य हैरान नजरों से उसे देखने लगा , फिर उससे मुस्कुराकर बोला ।

आदित्य - भाई.....!!!!! तुझे पूरे दो घंटे हो चुके हैं यहां ऐसे बैठे , कायरा को निहारते हुए । जब मैं दो घंटे पहले आया था, तब भी तू इसी पोजीशन में बैठा था और अब जब आया हूं , तब भी वैसे ही बैठे मिला ।

ये सुनकर आरव झेंप गया और इधर - उधर देखने लगा । फिर खुद को सही करते हुए बोला ।

आरव - क्या काम है ये बता अब ।

आदित्य ( मुस्कुराकर ) - इन इंपोर्टेंट पेपर्स पर आपके साइन चाहिए हैं सर जी , वरना आपके इस खूबसूरत वक्त पर खलल न डालते हम ।

आरव ( उसे घूरते हुए , फाइल हाथों में लेकर और कायरा की टेबल से पेन लेकर साइन करते हुए बोला ) - बस कर अब......। कुछ ज्यादा ही बोल रहा है तू ।

आदित्य ( शरारत से ) - अच्छा जी.....। मैं ज्यादा बोल रहा हूं .....। और तू जो इतने वक्त से यहां बैठा है , उसका क्या...??? तू क्या कर रहा है बता ज़रा...???

आरव ( पेन वापस पेन बॉक्स में रख, फाइल आदित्य के हाथों में थमा कर बोला ) - तू निकल यहां से ......। बहुत हो गया तेरा ।

ये कहते हुए वह चेयर से उठकर , आदित्य को केबिन के बाहर निकालने लगा । ये देखकर आदित्य उसे और चिढ़ाने लगा और आरव उसे लगातार केबिन के बाहर धक्का देने लगा। फिर अचानक से आदित्य चुप हो गया और कुछ पल बाद बोला।

आदित्य - आरव....!!!! इतने शोर के बाद भी कायरा नहीं उठी , इनफेक्ट उसने हाथ पैर तक नहीं हिलाए.... ।

ये सुनकर आरव रुक गया और हैरानी से कभी आदित्य को तो कभी कायरा को देखने लगा । अगले ही पल किसी अनहोनी की आशंका से दोनों ही केबिन में आए और कायरा को उठाने का जतन करने लगे , लेकिन कायरा नहीं उठी । तभी कायरा का फोन बजा , जो कि टेबल पर ही रखा था। आरव ने उसे इग्नोर कर दिया और कायरा को उठाने लगे । हैरानी की बात ये थी , मोबाइल के शोर में भी कायरा नहीं उठी । तभी फोन दोबारा रिंग हुआ। तो आदित्य ने आरव को फोन चेक करने के लिए कहा। आरव ने फोन उठाया , तो स्क्रीन पर मालती जी का नाम फ्लैश हो रहा था । आरव ने स्क्रीन आदित्य की तरफ की , तो आदित्य ने उसे कॉल अटेंड करने को कहा। आरव ने कॉल अटेंड की और दूसरी तरफ से मालती जी की चिंता भरी आवाज उसके कानों में पड़ी ।

मालती जी - कहां हो तुम कायरा...???? कब से तुम्हें फोन कर रही हूं। पहले तो लगा नहीं , और अब लगा तो तुमने फोन उठाने में इतनी देर कर दी । कहां हो तुम ...???? चिंता हो रही है हमें तुम्हारी ...??? तुमने खाना खाया न......????? कितने टाइम तक आओगी , आज जल्दी भी निकल गई थी । ( जब दूसरी तरफ से कोई आवाज नहीं आई ,तो मालती जी बोली ) तुम ठीक तो हो न बेटा....??? कुछ बोल क्यों नहीं रही हो…???? हमारा मन बहुत घबरा रहा है , तुम ठीक हो न...????

मालती जी की बातें सुनकर आरव ने निराशा से अपनी आखें भींच ली और फिर कुछ पल बाद सधी हुई आवाज़ में बोला ।

आरव - नमस्ते आंटी जी .....!!!!! मैं बोल रहा हूं , आरव ।

मालती जी ( हैरानी से ) - आरव बेटा आप...!!!! कायरा.... , कायरा कहां है...???? उसका फोन आपके पास कैसे...??? वो ठीक तो है न...????

आरव ( एक नज़र कायरा की तरफ देखकर ) - जी आंटी..., वो ठीक है। वो क्लाइंट के साथ एक मीटिंग में बिज़ी है , प्रेजेंटेशन दे रही है । मैं भी उसके साथ हूं , कॉन्फ्रेंस रूम में । फोन मेरे पास ही रखा था , तो मैंने रिसीव कर लिया ।

कहीं मालती जी ज्यादा परेशान न हो जाएं , सोचकर आरव ने झूठ कर दिया । और उसके झूठ पर आदित्य ने आरव को हैरानी से देखा , फिर कुछ सोच कर वह आरव से इस बारे में कुछ कहते - कहते चुप हो गया ।

मालती जी - ओह.....। तभी मैं कहूं , कि मेरा फोन कॉल एक रिंग में उठाने वाली लड़की आज कॉल क्यों रिसीव नहीं कर रही है । अच्छा बेटा , उसने लंच तो किया है न ..???? क्या है कि वो आज टिफिन नहीं ले गई है। सुबह भी जल्दी निकल गई थी , बिना कुछ खाए पिए और कल आप लोगों के साथ घूम फिर के आने के बाद से , उसने कुछ खाया भी नहीं है । इसके साथ ही शायद वह रात भर सोई नहीं है , सुबह उसकी आखें काफी बदली सी दिख रही थी । इसी लिए मुझे उसकी चिंता हो गई......।

आरव ( हैरानी से उनकी बात बीच में काट कर ) - कायरा ने कल रात में डिनर नहीं किया था...????

मालती जी - नहीं ...... , बेटा...!!!!!

आरव - क्यों..????

मालती जी - कह रही थी, कि वह आप लोगों के साथ ढाबे से खा कर आई है । और सुबह जल्दी में निकल गई ।

मालती जी की बात सुनकर आरव ने अपने सिर पर हाथ रख लिया और आखें बंद कर ली । कुछ पल तक आरव ने कुछ नहीं कहा और इधर आदित्य धीमी आवाज़ में लगातार कायरा को उठाने की कोशिश कर रहा था । जब कुछ पल तक आरव की आवाज नहीं आई तो मालती जी बोली ।

मालती जी - क्या हुआ आरव बेटा...???? आप ये सब क्यों पूछ रहे हैं और कुछ बोल क्यों नहीं रहे ...???

आरव को मालती जी की आवाज़ सुनकर होश आया और अब उसे कायरा के ऊपर गुस्सा भी आया , कि उसने खुद का खयाल नहीं रखा , इस लिए उसकी इस वक्त ये हालत है । आरव ने मालती जी की बात सुनकर तुरंत जवाब दिया।

आरव - सॉरी आंटी .....। वो थोड़ा सा डिसक्शन करने लगा आदि से । और हां आंटी......, कायरा ने हमारे साथ लंच कर लिया था और वो ठीक भी है । अच्छा आंटी मैं रखता हूं । फ्री होकर कायरा आपको कॉल करेगी ।

इतना कह कर , बिना मालती जी का रिप्लाई सुने आरव ने कॉल कट कर दिया । और उधर मालती जी को उसकी ये हरकत थोड़ी अजीब लगी , लेकिन एक मां के लिए तो यही काफी होता है कि उसके बच्चे ठीक से रहे और ठीक से भोजन करें । जब उन्हें अपने बच्चों की ठीक तरह से खोज खबर मिल जाती है , तो वे अपने आप खुश हो जाती हैं । मालती जी भी निश्चिंत हो चुकी थी , कि आरव के बताए मुताबिक कायरा ठीक है । इस लिए उन्होंने आरव के इस बर्ताव पर ध्यान नहीं दिया ।

इधर आरव ने फोन वापस टेबल पर रखा और आदित्य को साइड कर कायरा के गाल थपथपाने लगा।

आरव - कायरा.....!!! कायरा उठो....!!!

लेकिन आरव के ऐसा करने पर भी कायरा नहीं उठी , तो आदित्य ने कहा।

आदित्य - शायद ये बेहोश हो गई है आरव ।

आरव - यस..... । बेहोश ही हो गई है ये । कल दोपहर के बाद से इसने खाना नहीं खाया है और अपने घर में झूठ कहा, कि ये हमारे साथ ढाबे से खाना खाकर आई है, जबकि हम तो कल वापस आते वक्त ऐसी किसी जगह रुके ही नहीं थे । और रात भर सोई भी नहीं है ये लड़की । इसी वजह से पक्का बीपी लो हो गया होगा इसका और ये बेहोश हो गई ।

आदित्य ( हैरानी से ) - क्या....???? ( आरव ने दोबारा कुछ नहीं कहा और कायरा को उठाने के जतन करने लगा ) एक काम कर आरव , इसे सोफे पर लेटा । मैं इसके चेहरे पर पानी डालता हूं , शायद उससे होश में आ जाए । वरना डॉक्टर को कॉल कर बुलाता हूं ......।

आदित्य की बात सुनकर आरव ने कायरा की तरफ हाथ बढ़ाए और उसे बाहों में उठा कर वहीं रखे सोफे पर लेटा दिया और उसके पैर से सेंडिल्स उतारकर , उसके पैर के तलवे मलने लगा और साथ में हाथ की हथेली भी । इस वक्त ऐसा करने से आरव खुद को रोक नहीं पा रहा था । या यूं कहें , कायरा की ये हालत देखकर उसे कायरा को छूने के लिए किसी की इजाजत लेनी की जरूरत महसूस ही नहीं हुई । न ही कायरा की और न ही किसी और की । और ये करना इस वक्त मुनासिब भी था । खास कर तब , जब कोई अपना ऐसे कंडीशन में हो , फिर शायद किसी अपने को देख कर हमारे जमीर के लिए भी उसकी जान बचाने से ज्यादा इंपोर्टेंट और कुछ नहीं होता । और फिर इस वक्त तो बात आरव की मोहब्बत की थी , उसके अपने की थी । जिसे उसने दिल से अपना मान लिया था ।

वह लगातार कायरा के पैर के तलवे और हाथ की हथेली मले जा रहा था । तभी आदित्य गिलास में पानी लाया और कायरा के चेहरे पर पानी की कुछ बूंदें छिड़कने लगा । लेकिन कायरा ने कोई रिएक्शन नहीं दिया । ये देखकर आदित्य ने दोबारा पानी छिड़का और गिलास साइड में रख कर फोन में डॉक्टर का नंबर सर्च करने लगा ।

कायरा के ऊपर दोबारा से पानी के छीटे पड़ते ही कायरा को होश आया और उसने हल्की सी अपनी आखें खोली और अधखुली आंखों से उसने अपने आस - पास देखा , तो उसे आरव उसके पैर के तलवों को रगड़ते मिला । ये महसूस होते ही, कि आरव ने उसके पैर पकड़ते हुए हैं , कायरा ने अपनी आखें खोल ली और उसने अपने पैर भी खींच लिए । ये देखकर आरव ने कायरा की तरफ देखा , जो अब पूरी आखें खोलकर उसे ही देख रही थी और फिर उसने उसके पैरों को देखा , जिसे कायरा ने मोड़ लिया था । ये देख कर आरव को तसल्ली मिली कि कायरा को होश आ गया और वह तुरंत कायरा के पास आकर उसके चेहरे को दोनों हाथों से पकड़ कर घबराई हुई सी आवाज़ में बोला ।

आरव - कायरा....!!!! तुम्हें होश आ गया । तुम ...... , तुम ठीक तो हो न...???? अब कैसा महसूस कर रही हो...????

कायरा को होश आया देख , आरव ने उससे सवालों की झाड़ियां लगा दी । और आरव की बात सुनकर आदित्य भी दोनों की तरफ पलटा और कायरा को देखकर वह उससे बोला ।

आदित्य - थैंक गॉड ..... कायरा....!!!! कि तुम्हें होश आ गया । हम पिछले आधे घंटे से तुम्हें जगाने की कोशिश कर रहे थे , लेकिन तुम जागी ही नहीं । पिछले दो घंटे से भी ज्यादा समय से तुम बेहोश थी ।

ये सुनकर कायरा को याद आया , कि दो घंटे पहले उसने हाथों को टेबल में रखकर , उसपर अपना सिर रखा था और आखें बंद कर कर ली थी । उसके बाद क्या हुआ , उसे कुछ याद नहीं । कायरा ने अब न ही आदित्य की और न ही आरव की बात का कोई जवाब दिया और उठकर बैठने लगी , तो आरव ने उसे बैठने में मदद की और फिर उसने परेशान होकर कायरा को कसकर गले लगा लिया । जैसे अगर अब उसने कायरा को छोड़ा , तो उसकी तबियत दोबारा से खराब हो जायेगी । आरव को खुद के लिए इतना पोजेसिव देखकर कायरा को एहसास हो रहा था , कि आरव उसके लिए कितना परेशान है । आरव ने उससे कुछ कहा नहीं , लेकिन लगभग दो मिनट तक उसे कस कर गले लगाए रहा और इस वक्त उसके आखों में नमी भी उतर आई थी , जिसे उसने दोनों से छुपकर साफ कर किया था । कायरा ने अब अपने हाथ आरव के कंधे पर रखे और उससे धीमी आवाज़ में कहा ।

कायरा - मैं ठीक हूं आरव ......, आप इतना परेशान मत होइए । मुझे कुछ नहीं हुआ है .....। प्लीज आप मेरी वजह से परेशान मत होइए ।

आरव ने जब कायरा की बात सुनी , तो उसने कायरा को खुद से अलग किया और उसका हाथ थामकर धीमी आवाज़ में बोला ।

आरव - मैं बता नहीं सकता कायरा , कि इस वक्त मैं क्या फील कर रहा हूं । अगर तुम्हें होश नहीं आता , तो पता नहीं मेरा ......, मैं शायद खुद को संभाल नहीं पता ।

आरव की ये बात सुनकर कायरा को दोबारा रूही की बात याद आ गई जो उसने आरव को लेकर कही थी " प्यार करते हैं वो तुमसे , आखों में दिखता है उनकी " । रूही के शब्द याद आते ही कायरा ने आरव की तरफ देखा , जो कायरा के हाथों को थामे, नजरें झुकाए जमीन में बैठा हुआ था । आखों में उसकी हल्की नमी भी थी । ये देखकर कायरा को बिलकुल भी अच्छा नहीं लगा , एक टीस सी उठी उसके दिल में , कि उसकी वजह से पिछले चौबीस घंटे में दोबारा आरव की आंखों में आसूं हैं । उसने दोबारा आरव की तरफ देखा और फिर अनायास ही उसके हाथ आरव की तरफ बढ़ गए । उसने आरव के दोनों गालों पर हाथ रखा और उसके चेहरे को ऊपर उठाकर उससे कहा।

कायरा - मेरी तरफ देखिए आरव ....।

आखों में आई नमी के कारण आरव ने उसकी तरफ नहीं देखा , पर आखें बंद कर ली , तो उसकी आंख से आसूं का एक कतरा उसके गाल पर लुढ़क आया , जिसे कायरा ने देखा , तो अपने हाथ से साफ कर दिया । ये सब आदित्य बड़े प्यार से मुस्कुराते हुए देख रहा था । लेकिन जब कायरा ने आरव का चेहरा अपने हाथों में लिया , तो आदित्य तुरंत बिना आवाज किए केबिन से बाहर निकल गया । कायरा ने उसके आसूं साफ करने के बाद दोबारा उससे कहा।

कायरा - आंखें खोलिए आरव , और देखिए मेरी तरफ .... ।

इस बार आरव ने कायरा की बात मान ली और आखें खोल दी , तो उसने कायरा को अपने थोड़ा करीब और उसके चेहरे को ठीक अपने सामने पाया । और कायरा का ऐसा करना उसे सपने सा लगा । आरव के आंख खोलते ही कायरा ने तुरंत कहा ।

कायरा - आपके होते हुए मुझे कभी कुछ नहीं हो सकता आरव । क्योंकि मुझे विश्वास है , कि आप मुझे कभी कुछ होने ही नहीं देंगे । इसलिए दोबारा मैं अपनी वजह से आपकी आखों में नमी नहीं देखना चाहती , क्योंकि आपके आसूं मेरे लिए बहुत कीमती है। इन्हें मुझ जैसी आम लड़की पर खर्च मत कीजिए , जो आपको हमेशा तकलीफ देती है ।

कायरा की बात सुनकर आरव ने तुरंत उसके हाथ पर अपना हाथ रखा और उसकी आखों मे देखते हुए कहा ।

आरव - नहीं कायरा.....!!!! तुम मेरे लिए कोई आम सी लड़की नहीं हो , बल्कि खास हो , बहुत खास .....।

ये सुनकर कायरा को कुछ याद आ गया और वह झटके से होश में आई और इससे पहले कि आरव कुछ कहता , उसने तुरंत अपना हाथ आरव के गाल से हटा किया । कायरा की ये हरकत देख , आरव ठगा सा उसे देखता रह गया । अगले ही पल उसने कायरा से कहा ।

आरव - क्या हुआ कायरा...??? तुम अचानक से ऐसे बिहेव क्यों करने लगी ..???? कहीं तुम मुझसे कुछ छुपा रही हो क्या ...????

कायरा ( आरव से नजरें चुराते हुए बोली ) - नहीं आरव, ऐसा कुछ नहीं है ।

आरव - तो फिर अचानक से तुम्हारा बिहेव चेंज क्यों हो गया...????

कायरा को उसके दोबारा सवाल करने पर गुस्सा आ गया और वह गुस्से से बोली ।

कायरा ( आरव की तरफ देखकर ) - कहा न मैंने आपसे , कि ऐसा कुछ नहीं है । हर चीज की एक मर्यादा होती है , और हम भी दोस्ती के दायरे में रहकर , मर्यादित भूमिका निभाएं , वही हमारे लिए सही होगा ।

आरव को उसकी ये बात समझ ही नहीं आई , कि वह अचानक से ऐसा क्यों कह रही है , जबकि थोड़ी देर पहले तक तो उसने खुद आरव का चेहरा थामा हुआ था । आरव इस बारे में कायरा से कुछ कहता , उससे पहले ही कायरा गुस्से में उठने लगी , कि कमजोरी की वजह से लड़खड़ा गई और गिरने को हुई , कि आरव ने उसे संभाल लिया । लेकिन अब आरव को गुस्सा आ गया और उसने कायरा को संभालते हुए कहा ।

आरव - अब क्या तुम्हें गिरने से बचाने के लिए भी मर्यादाओं को देखूं , कि वो मुझे इसकी इजाजत देती हैं या नहीं ...???? मुझे मेरी मर्यादा बहुत अच्छे से पता है , और तुम्हें भी ....। क्योंकि नासमझ तो तुम भी नहीं हो । जो मैं तुम्हारे बारे में सोचता हूं , कहीं न कहीं तुम्हारे दिल में भी मेरे लिए वही जज्बात हैं । इन्हें मानना न मानना तुम्हारी मर्जी , लेकिन झूठ को सच साबित करने की नाकाम कोशिशें जो तुम सुबह से कर रही हों न , ये करके तुम खुद के जज्बातों के साथ खेल रही हो ।

इंडैरेक्टली ही सही , पर आरव ने आज कायरा से वह कह ही दिया था , जो उसका दिल कायरा के लिए महसूस करता था । वहीं कायरा आरव की बात सुनकर हड़बड़ा जाती है , जैसे उसकी कोई चोरी पकड़ी गई हो और उससे नजरें चुराते हुए कहती है ।

कायरा - मुझे समझ नहीं आ रहा , कि आप किस बारे में बात कर रहे हैं ।

आरव ( कायरा को सीधा खड़ा कर , उसे वापस सोफे पर बैठाते हुए बोला ) - नासमझ ही बनी रहो अब तुम , तो ही अच्छा है । ( ये कहते हुए उसने कायरा को घूरा और फिर कहा ) बैठ जाओ शांति से , तबीयत ठीक नहीं है तुम्हारी । कल दोपहर से तुमने कुछ खाया नहीं है और रात भर सोई नहीं हो , इस लिए पक्का बीपी लो गया है तुम्हारा । और इसी वजह से तुम बेहोश हो गई थी । ( इस बात पर कायरा ने आरव को हैरानी से देखा , तो अरव ने टेबल से पानी से भरा गिलास उठाकर, कायरा के तरफ बढ़ा कर कहा ) ऐसे हैरान मत हो...., तुम्हारी मां का फोन आया था , बताया उन्होंने , तुमने कल रात में डिनर नहीं किया था । और तुम्हारी ये लाल आंखें इस बात की गवाही दे रही हैं , कि तुम रात भर सोई नहीं हो । रही सही कसर ये मुसझाया चेहरा पूरी कर रहा है ।

कायरा ( गिलास अपने हाथ में लेते हुए बोली ) - पर आपने मम्मा को बता दिया कि मैं बेहोश ...।

आरव ( बीच में ही ) - रिलेक्स....., मैने उन्हें तुम्हारी तबियत के बारे में नहीं बताया । बल्कि झूठ कहा , कि तुम मीटिंग में बिज़ी हो और तुम्हारा फोन मेरे पास रखा है , इस लिए मैंने उनका फोन रिसीव किया ।

कायरा ( थोड़ा रिलेक्स होकर ) - थैंक गॉड....., कि उन्हें मेरी तबियत के बारे में पता नहीं चला ।

आरव ( गुस्से से ) - हरकतें तो तुम्हारी ऐसी है न कायरा , जिन्हें देखकर मुझे अब लग रहा है , कि मुझे उन्हें सच बता देना चाहिए था । क्योंकि मैंने तुमसे कहा था , कि ऑफ लेकर घर चली जाओ और रेस्ट करो , लेकिन नहीं .....। तुम्हें तो काम करने का शौक चढ़ा है । सुबह से देख रहा हूं तुम्हारा उतारा हुआ चेहरा । कहा नहीं कुछ , कि तुम समझदार हो , समझ जाओगी कि तुम्हें रेस्ट की जरूरत है । लेकिन नहीं.….., तुम्हें तो काम करना है ....।

आरव लगातार बोले जा रहा था और कायरा शांति से उसकी बातें सुन रही थी । जब कायरा ने आरव की ये बात सुनी , कि वह सुबह से कायरा को देख रहा है , तो उसने तुरंत आरव को बीच में ही टोकते हुए कहा ।

कायरा ( आरव की आखों ने देखते हुए ) - आप सुबह से नोटिस कर रहे थे मुझे ...... ।

आरव ( गुस्से से अपनी ही धुन में बोल गया ) - हां...., और......।

कायरा - क्यों नोटिस कर रहे थे आप मुझे...???

आरव - क्योंकि मैं तुमसे......।

अचानक ही कहते - कहते आज फिर आरव रुक गया और उसे कायरा की थोड़ी देर पहले मर्यादा वाली बात याद गई , जिसके कारण उसकी जुबान सिल गई और उसने अपनी नजरें कायरा से हटा ली । अब तक उसे होश आ चुका था , कि वह कायरा से क्या बोलने जा रहा था । आरव को चुप देखकर कायरा ने दोबारा अपना सवाल दोहराया ।

कायरा - क्यों नोटिस कर रहे थे आप आरव , मुझे...????

कायरा ने बात पर आरव उसकी ओर पलटा और कायरा की उंगलियों में जिसमें पानी का गिलास था , उस पर अपनी हथेली रखकर , गिलास उसके होठों से लगाते हुए बोला।

आरव - सिर्फ मैने ही नहीं बल्कि तुम्हारी मम्मा ने भी नोटिस किया था । बताया था फोन पर उन्होंने । और तुम जैसी लापरवाह लड़की , जो अपनी सेहत का ध्यान नहीं रखती है , उसके लिए हम जैसे लोगों को ये सारी बातें नोटिस करनी पड़ती है । ताकि हम तुम्हारा खयाल रख सकें । अब अभी ही देख लो , हाथ में पानी का गिलास है, लेकिन पानी पीने की जगह तुम मुझसे सवाल किए जा रही हो । पियो गिलास का पूरा पानी , ठीक महसूस होगा तुम्हें । शुक्र है कि रास्ते में कहीं आते जाते चक्कर खा कर नहीं गिरी , वरना लेने के देने पड़ जाते आज । और तुम्हारे घर वाले मुझे और हमारी कंपनी को दोष देते , कि हम अपने एम्पलॉयज से इतना काम करवाते हैं , कि उन्हें खुद का खयाल रखने का वक्त ही नहीं मिलता ।

इतना कहते हुए आरव उसे गिलास का पूरा पानी पिला देता है और कायरा भी उसकी बातें सुनते हुए पानी पी लेती है .......।

क्रमशः

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Usha Dattani Dattani
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