Ahsaas pyar ka khubsurat sa - 65 in Hindi Novel Episodes by ARUANDHATEE GARG मीठी books and stories PDF | एहसास प्यार का खूबसूरत सा - 65

एहसास प्यार का खूबसूरत सा - 65

आखिर अब तक जो बातें
ख्वाबों के दीदार में होती थीं
उस सच ने आज हकीकत की
तब्दीलियों का समा बांध ही लिया था ❤️

आखिर सच ही तो है , अब तक कायरा और आरव दोनों ख्वाबों में जीते थे और आज उन्होंने ये सब महसूस किया था , वो भी हकीकत में । अब देखना ये था , ये हकीकत और किन - किन हकीकत के राजों से पर्दा फाश करती है ।

राहुल घर पहुंच चुका था । वह अपने रूम का डोर ओपन कर अंदर आया ही था , कि तभी जोर - दार बिजली कड़कने के साथ , तेज़ बारिश शुरू हो गई । उसने अपनी कार की चाबी , बेड के बगल वाले ड्रॉर के ऊपर टेबल लैंप के पास रखी , कि तभी रूही का फोन आ गया । उसने जब फोन की स्क्रीन में फ्लैश हो रहे रूही का नाम देखा , तो मुस्कुरा उठा और फोन रिसीव कर , बेड में अपने जूते उतारकर , लेटते हुए रूही से बोला ।

राहुल - तो अब याद आई है राजकुमारी जी को हमारी ।

रूही ( गुस्से से ) - ये राजकुमारी शब्द से हमें न नवाजा कीजिए कुंवर सा , हमें ये गाली सा मालूम पड़ता है , खुद के लिए ।

राहुल - अरे मैं तो मजाक कर रहा था ।

रूही - पर हमें ये शब्द मजाक में भी पसंद नहीं है कुंवर सा ।

राहुल - तो फिर तुम मुझे ये बार - बार , कुंवर सा क्यों बोल रही हो ..??? मैं तो किसी रियासत का राजकुमार नहीं हूं ।

रूही - आपने राजकुमारी कहा , तो हमारे मुंह से भी आपके लिए ये शब्द निकल गए । आपको अगर परेशानी हो , तो सॉरी , हम कभी आपको इन नामों से नहीं पुकारेंगे ।

राहुल ( मुस्कुराकर ) - तुम मुझे किसी भी नाम से पुकारो , मुझे तो अच्छा ही लगेगा , क्योंकि ये नाम तुम रखोगी और मुझे पता है , तुम जो नाम रखोगी उसमें तुम्हारा प्यार ही छुपा होगा । और आपके द्वारा नवाजे गए प्यार भरे नामों से भला हमें तो कभी एतराज़ हो ही नहीं सकता ।

रूही ( मुस्कुराकर ) - दिन - ब - दिन आप शायर और बेशरम होते जा रहे हैं राहुल जी ।

राहुल ( मुंह बनाकर ) - अब इसमें बेशर्मी कैसी मोहतरमा ..????

रूही ( मुस्कुराकर, तकिया अपने सीने से लगाकर ) - प्रेम का इस तरह शादी से पहले प्रदर्शन करना , बेशर्मी नहीं तो और क्या है कुंवर सा..!!!???

राहुल - खूब समझ रहा हूं मैं तुम्हारे शब्दों के मतलब को । मुझे बेशरम कहकर अपने दिल की भड़ास निकाली जा रही है ।

रूही ( रूही अपने मुंह पर हाथ रखकर ) - हअआ......, आप न ...….। खैर छोड़िए , पता नहीं कब समझेंगे ।

राहुल ( मुस्कुराकर उसे छेड़ते हुए ) - आप समझाइए तो सही , हम सब समझ जायेंगे ।

रूही ( हल्का सा चिढ़ कर ) - बस भी कीजिए राहुल जी । आप आजकल बहुत शरारती हो गए हैं , मौका मिलता नहीं कि उड़ाने लगते हैं मजाक हमारा ।

राहुल ( अपनी हंसी रोककर ) - ओके ...., ओके .....। नहीं करता अब मैं मजाक । अच्छा ये बताओ , इतनी देर बाद कॉल क्यों किया आज ...???

रूही - आज सभी ने लेट से डिनर किया । हम मां सा और भाभी सा के साथ उनके कामों में हाथ बंटा रहे थे , इस लिए हमें आज देर हो गई । अच्छा आप बताइए , आप आज पार्टी में गए थे न , वहां से वापस आ गए ...???

राहुल ( आवाज़ में खुशी भरते हुए ) - हां...., आ गया वापस । और आज हम सारे दोस्तों ने बहुत बड़ा काम किया है , बस वो सफल हो जाए , तो कल ट्रीट तो डन है ।

रूही - कैसा काम , हमें भी बताइए ।

राहुल ने आज की सारी दोस्तों की प्लानिंग रूही को बता दी । और राहुल की बात सुनकर रूही अपने बिस्तर पर उठकर बैठ गई और उसने घबराते हुए अपने सिर पर हाथ रखा और कहा।

रूही - ये क्या कर दिया आप सबने राहुल जी ..???

राहुल ( हैरान होकर ) - क्या हुआ ...???? तुम इतनी हाइपर क्यों हो रही हो ...??? हमने तो बस एक छोटी सी कोशिश की है , उन दोनों को मिलाने की , बस ।

रूही ( परेशान होकर ) - आप सबने कोशिश नहीं की , बल्कि कायरा के लिए एक अलग से परेशानी को न्योता दिया है ।

राहुल ( एकदम से बिस्तर पर उठकर बैठते हुए ) - कहना क्या चाहती हो तुम , साफ - साफ बताओ ।

रूही - राहुल जी ....., जिस तरह हमें हमारे घर में बहुत सी बातों के लिए बंदिशों का सामना करना पड़ता है , वैसे ही कायरा को भी बहुत सी बातों के लिए बंदिशे झेलनी पड़ती है । फर्क सिर्फ इतना है , कि हमारे साथ सिर्फ हमारी मां है और उसके साथ उसकी दादी को छोड़कर पूरा परिवार । अगर दादी को पता चला , कि कायरा इतनी लेट घर पहुंची है , तो पता नहीं वो क्या करेंगी कायरा के साथ । ये सारी प्लानिंग आप लोग दिन में भी कर सकते थे । उन्हें दिन में कहीं किसी तरह बहाना बनाकर भेज देते । लेकिन इस तरह रात के दस , साढ़े दस बजे तक घर से दूर रहना , उसकी दादी का गुस्सा बढ़ाना और खुद के लिए मुसीबत खड़ी करने बराबर है । हमने उसे कितने फोन भी किए , पर उसने हमें आंसर ही नहीं किया । बारिश इतनी तेज है , कहीं वो किसी मुसीबत में न हो ।

राहुल - ये बात तुमने पहले क्यों नहीं बताई रूही ।

रूही - कैसे बताते राहुल जी , हमें कभी समय ही नहीं मिला और ऊपर से कायरा की कसमें । उनके चलते हम कभी कुछ बोल ही नहीं पाए । लेकिन आज आप लोगों की प्लानिंग की वजह से हमें उसकी ये बात छुपाने वाली कसम तोड़नी पड़ी । हमें तो बस डर है , कहीं अगर दादी को भनक भी लगी कायरा के इतनी रात को घर से बाहर रहने की , तो पता नहीं वो कैसे रिएक्ट करेंगी । हम तो बस भगवान से यही प्रार्थना करते हैं, वो सही सलामत घर पहुंच जाए और दादी को उसके इतने रात में घर से बाहर होने की कानों कान खबर तक न लगे ।

राहुल ने उसकी बात सुनकर तुरंत फोन कट कर दिया । अब उसे कुछ समझ नहीं आ रहा था , कि वो क्या करे । उसने आरव को कॉल करना चाहा , लेकिन रुक गया । वह अब गहरी सोच में डूब गया था।

इधर आदित्य और सौम्या कॉलेज आए । सौम्या ने कॉलेज देखा , तो आदित्य से बोली ।

सौम्या - हम घर जाने की जगह यहां क्यों आए हैं ..???

आदित्य ( उसकी साइड आकर , डोर ओपन कर उसकी तरफ एकदम बेहतरीन अदा के साथ हाथ बढ़ाते हुए बोला ) - उसके लिए तुम्हें मेरे साथ चलना होगा , यहीं बैठी रहोगी तो पता कैसे चलेगा...!!!!

सौम्या ( नासमझ सी ) - मतलब ...!!!

आदित्य - पहले कार से बाहर आओ ।

सौम्या उसका हाथ थाम, कार से बाहर आ गई । कॉलेज के मेन गेट पर चपरासी बैठा नींद से ऊंघ रहा था । ये देख आदित्य सौम्या का हाथ पकड़ उसे कॉलेज के पीछे वाले रास्ते पर ले गया । वहां कोई बॉडीगार्ड नहीं था , लेकिन बड़ा सा चैनल गेट था और उसपर बड़ा सा ताला भी था । दोनों पीछे के गेट के सामने आए , और सौम्या ये देख आश्चर्य से कभी गेट को तो कभी आदित्य को देख बोली ।

सौम्या - क्यों लाए हो तुम मुझे यहां । बताओ तो ।

आदित्य ( गेट की लंबाई का जायजा लेते हुए ) - तुम यहां से कूद तो पाओगी न...!!???

सौम्या ( नासमझ सी आदित्य को देख बोली ) - ये कैसी बात हुई भला..??? और मैं यहां से क्यों कूदुंगी...????

आदित्य ( उसे देखकर स्माइल करते हुए बोला ) - क्योंकि मैं कह रहा हूं ।

सौम्या ( हड़बड़ाते हुए ) - अरे लेकिन तुम ऐसा क्यों कह रहे हो आदि..??? हमें यहां से कूदने की जरूरत ही क्या है , हम सामने वाले गेट से भी तो जा सकते हैं । और मोस्ट इंपोर्टेंट बात , हम इस वक्त कॉलेज क्यों आए हैं , हम अंदर जाकर करने क्या वाले हैं ।

आदित्य ( खीझकर ) - यहीं पूछ लेना सब , सारी ज्ञान की गंगा यहीं बहाना और मेरे दिमाग का दही करना । ये नहीं , कि अगर मैं कुछ कह रहा हूं , तो उसे तुम मान लो ।

सौम्या - लेकिन पता तो होना चाहिए , कि बात क्या है..!!??

आदित्य ( सौम्या को घूरकर ) - सौम्या....!!!!!!

सौम्या ( अपने होठों पर उंगली रख ) - ओके....., ओके...., प्लीज कंटिन्यू । आई वांट से एनीथिंग ( मैं कुछ नहीं बोलूंगी ) ।

आदित्य ने उसकी बात सुनकर , एक बड़ा सा पत्थर उठाया और गेट के सामने रख दिया और उसमें खड़े होकर जायजा लेने लगा , कि इससे गेट के ऊपर पहुंचा जा सकता है या नहीं । कुछ पल बाद उसने सौम्या को उस गेट से कूदने को कहा । सौम्या ये देख डर गई । तो आदित्य ने उसे हिम्मत दी और चढ़ने के लिए कहा । सौम्या पत्थर के सहारे आधे गेट और फिर पूरे गेट पर चढ़ गई और फिर आहिस्ता - आहिस्ता गेट के दूसरी तरफ उतर भी गई । और उतरते ही उसने चैन की सांस ली । आदित्य ने भी गेट के ऊपर चढ़कर , छलांग लगा दी और वह जमीन में आ टपका , लेकिन गनीमत था कि गिरा नहीं और खुद को संभाल लिया । अंदर आने के बाद आदित्य सौम्या को गार्डन ले गया । रात का वक्त था , इस लिए पूरा कॉलेज खाली था । वहां आकर सौम्या ने गार्डन देखकर कहा।

सौम्या - अब तो बता दो , हम यहां क्यों आए हैं ...???

आदित्य ( अपनी चढ़ी हुई सांसों को कंट्रोल करके बोला ) - हम यहां कुछ क्वालिटी टाइम स्पेंड करने आए हैं । ( मुस्कुराकर , सौम्या के गालों पर अपनी हथेली रखकर ) बिल्कुल पुराने दिनों की तरह ।

सौम्या ( चहककर ) - तीन साल पहले की तरह ।

आदित्य - हां...., तीन साल पहले की तरह । जब हम अपने दोस्तों से छुप - छुपकर यहां मिला करते थे ।

सौम्या ( वो समय याद करते हुए ) - वो भी क्या दिन थे न , सबसे छुपकर मिलने का मज़ा ही कुछ और होता था।

आदित्य ने देखा सौम्या वो वक्त याद करते हुए कितनी खुश है और उसकी आखों की चमक तो देखते ही बन रही है । उसने सौम्या का हाथ पकड़कर झटके से अपने करीब किया , जिससे सौम्या उसके सीने से आ लगी । आदित्य ने सौम्या के चेहरे को चिन से ऊपर किया और उसके चेहरे पर आ रही बालों की लटों को , उसके कान के पीछे करते हुए , बड़े मनमोहक अंदाज़ में प्यार से उसे देखते हुए बोला ।

आदित्य - उन्हीं लम्हों को एक बार फिर से जीने के लिए ही तो तुम्हें मैं यहां लाया हूं ।

सौम्या ने उसकी बात सुन , नजरें उठाकर उसकी तरफ देखा , जिसकी आंखों में बेतहाशा मदहोशी भरी थी । शर्मा कर सौम्या ने नजरें नीची कर लीं और फिर आदित्य से छूटकर उससे दूर जाने लगी । लेकिन आदित्य ने उसके छूटते ही पीछे से उसका हाथ पकड़ा और उसकी पीठ को अपने सीने से लगाते हुए , उसकी गर्दन के पास आकर उसकी खुशबू को महसूस कर मदहोशी से बोला ।

आदित्य - मुस्कुराकर तुम्हारा मुझसे नजरें चुराना , ठीक नहीं है होने वाली मिसेज आदित्य सिंघानिया ।

सौम्या तो उसकी बात पर कोई जवाब ही नहीं दे पाई । वो तो अपनी गर्दन पर पड़ती आदित्य की सांसों में इतनी डूब चुकी थी , कि उसे न जवाब देने का होश था और न ही कोई जवाब इस वक्त उसे सूझ ही रहा था । सौम्या पूरी तरह से पिघल चुकी थी , उसकी शरारतें और उसका आदित्य पर गुस्सा भी इस वक्त खो गया था , जो मेहरा मेंशन के बाहर पार्किंग एरिया में कुछ वक्त पहले तक था ।
आदित्य बस मुस्कुरा रहा था , और शायद सौम्या को कम वक्त दे पाने के गिल्ट के कारण ही , वो उसे कुछ क्वालिटी टाइम यहां बिताने के लिए लाया था । तभी तेज़ बिजली कड़की और बहुत तेज़ पानी बरसने लगा । दोनों अब उस पानी में भीगने लगे और अब उनके बीच का माहौल और ज्यादा खुशनुमा हो चुका था । सौम्या कुछ कहती या कुछ रिएक्ट करती , उससे पहले ही आदित्य ने उसे घुमाकर अपनी तरफ किया और उसके चेहरे को अपने हाथों से थामकर उसके होठों पर अपने होठ रख दिए । सौम्या वहीं जम गई और अगले ही पल उसने आदित्य के सीने में अपना सिर छुपा लिया और कस कर उसके गले से लग गई । आदित्य उसे अपने सीने से लगाए , उसके सिर को सहलाते हुए मुस्कुरा दिया ।

नील और शिवानी कार में बैठे बातें कर रहे थे । शिवानी का घर वाकई में बहुत दूर पड़ता था । और उसी बीच में कई सूनसान इलाके और सड़क पड़ती थी । जिनमें ज्यादा पेड़ पौधे होने के कारण , बीच का रास्ता जंगल सा मालूम पड़ता था । नील ड्राइव कर ही रहा था , कि अचानक से कार कि स्पीड कम हो गई और कार बीच सड़क पर रुक गई । नील और शिवानी ये देख हैरान हो गए और शिवानी घबरा गई । नील ने स्टेयरिग के पीछे लगे, डीजल की खपत दिखाने वाले डीजल मीटर की तरफ देखा , तो उसके हिसाब से कार में डीजल निल ( खत्म ) बता रहा था । नील ने अपने सिर पर हाथ रख लिया और स्टेयरिंग पर हाथ मारते हुए कहा।

नील - ओ शिट यार.....।

शिवानी ( तुरंत उसका हाथ थामकर बोली ) - क्या हुआ..?? कार क्यों बंद पड़ गई और तुम ऐसे रिएक्ट क्यों कर रहे हो..???

नील - डीजल खत्म हो गया है कार का ।

शिवानी ( गुस्से से ) - तुमने डीजल क्यों नहीं डलवाया..?? ( हल्की गुस्से और मिनमिनाते हुए ) बिना डीजल की कार में तुम मुझे घर छोड़ने जा रहे थे ..???

नील ( उसकी तरफ देखकर ) - नहीं यार...। मुझे लगा था , कि तुम्हारे घर पहुंचते तक इतना डीजल चल जायेगा । फिर तुम्हारे घर के पास वाले पेट्रोल पंप से डीजल डलवालूंगा । लेकिन ये तो बीच रास्ते में ही खत्म हो गया ।

शिवानी ( उसकी तरफ टकटकी लगाए ) - अब क्या करेंगे ..????

नील ( उसकी हथेली कसकर अपने हाथ में थामते हुए ) - डोंट वरी , मैं अभी अपने घर पर कॉल करता हूं , ड्राइवर दूसरी कार ले आएगा , मैं उसमें तुम्हें तुम्हारे घर ड्रॉप कर दूंगा ।

नील ने अपने घर के ड्राइवर को कॉल किया और उसे एड्रेस बताकर कार लाने को कहा और साथ में एक्स्ट्रा डीजल से भरा हुआ कनस्तर भी । कॉल कट कर उसने शिवानी की तरफ देखा , जो अजीब तरह की निगाहों से उस जगह का, अपनी सीट पर बैठे - बैठे ही मुआयना कर रही थी । नील ने फोन पॉकेट के हवाले कर , शिवानी के कंधे पर हाथ रखा , तो वह एकदम से चौंक गई और डरी सहमी सी निगाहों से उसे देखने लगी । नील ने उससे कहा ।

नील - क्या हुआ...??? तुमने ऐसे क्यों रिएक्ट किया ..??

शिवानी - मुझे न बंद कार के अंदर बैठना अजीब लग रहा है । सफोकेशन हो रही है ।

नील - अपनी साइड का डोर ओपन करते हुए । ओके...., चलो बाहर चलते हैं , खुली हवा में सांस लोगी तो बेहतर महसूस करोगी ।

शिवानी ने हौले से सर हिला दिया और कार से बाहर आ गई । अब वह बेहतर महसूस कर रही थी । लेकिन वहां सून - सान इलाका होने के कारण वह अब भी डर रही थी । तभी जोर की बिजली की गड़गड़ाहट हुई और शिवानी ने तुरंत नील के पास आकर उसकी बाजू कसकर थाम ली । उसे ऐसे देख , नील उसके गाल पर हाथ रखकर बोला ।

नील - डोंट वरी शिवानी । बादल ही तो हैं , शोर करेंगे और चले जायेंगे । तुम इतना मत डरो , मैं हूं न ...!!!!

शिवानी ( उसकी एक बांह में डरी हुई सी , चारों तरफ देखते हुए बोली ) - नील...., मैंने सुना है ऐसी अंधेरी रात में कीड़े मुकूड़े , शेर , डाकू और पता नहीं क्या क्या होते हैं , जो हम मुसाफिरों को अपना शिकार बनाते हैं ।

नील ने ये सुनकर हैरानी से शिवानी को देखा , कि " ये क्या सोच रही है इस वक्त ..!!! " । अगले ही पल उसके दिमाग की घंटी बजी और उसके जहन में एक शैतानी आइडिया कौंध गया । उसने अपनी एक बांह में लिपटी शिवानी को देखा , जो इस वक्त पूरे एरिया को बड़े गौर से देख रही थी , तो उसने भी उसे और डराते हुए कहा ।

नील ( डरने का नाटक करते हुए ) - हां..., शिवानी । सिर्फ कीड़े मकूड़े , शेर , डाकू ही नहीं , बल्कि यहां तो चीता, सियार, और सबसे बड़ी बात भूत, चुड़ैल और डायन भी आते हैं ।

शिवानी ( डरते हुए उसकी तरफ देखकर बोली ) - क्या...???

नील ( डरा सा मुंह बना कर ) - हां....., सांप बिच्छू की भी भरमार है यहां तो । पता नहीं हम यहां कैसे फंस गए ।

शिवानी ( उसका चेहरा ताकते हुए ) - लेकिन भूत , चुड़ैल और डायन तो रात को बारह बजे के बाद आते हैं न ..!!!! अभी तो बारह नहीं बजे ।

नील ( उसे और डराते हुए ) - वो सारी झूठी बातें हैं । इनके आने का कोई ठिकाना नहीं रहता है । किसी भी टाइम कहीं भी दिख जाते हैं । ( शिवानी बुरी तरह से डरते हुए नील की बाजू से लिपटी जा रही थी और नील को उसे सताने में बहुत मज़ा आ रहा था , वो सामने बरगद के पेड़ की ओर इशारा करते हुए बोला ) वो देख रही हो ...., वो जो ट्री है न , वो बरगद की है । मैंने सुना है बरगद के पेड़ पर ही भूत और चुडैलों का घर होता है । यहां तो जगह भी सून - सान है । इतनी देर हो गई , अभी तक एक भी इंसान यहां नहीं दिखा और न ही कोई गाड़ी दिखी । कहीं हमें यहां रोकने के लिए इन भूतों या चुड़ैलो ने कोई साजिश तो नहीं रची ..???

शिवानी का ये सुनना था, कि वह तुरंत नील को पकड़े हुए ही कार की ओर बढ़ी । कार के पास पहुंच कर उसने अपनी साइड का डोर ओपन करना चाहा , पर वो नहीं खुला । बार - बार उसने कोशिश की , पर डोर ओपन नहीं हुआ । ये देख नील को हंसी आ रही थी , लेकिन उसने अपनी हंसी मन में ही कंट्रोल की और शिवानी के एकदम पास आकर उसके कानों में कहा ।

नील - कहीं हमारी कार का डोर भी किसी चुड़ैल या भूत ने तो नहीं बंद कर दिया..??? वो हॉरर फिल्म में होता है न , डोर लॉक हो जाता है अपने - आप, कितनी भी कोशिश करो नहीं खुलता और फिर अचानक से एक तेज़ आवाज़ के साथ कोई आता है और कंधे पर हाथ रखता , तेज़ बिजली कड़कती है और बारिश होने लगती है , सांय - सांय हवा चलने लगती है , और पीछे मुड़ कर देखने पर वो भयानक......।

नील ने ये कहते हुए शिवानी के दूसरे साइड के कंधे पर हाथ रखा और उसी वक्त खूब जोर से बिजली कड़की, हवा ने भी आंधी का रुख ले लिया और तेज़ बारिश होने लगी । ये देख शिवानी बहुत बुरी तरह से डर गई और उसने आंखें भींचते हुए नील के सीने में अपना सिर छुपा लिया , और उसे बहुत तेज़ी से जकड़ लिया । ये देख नील के होठों पर प्यारी सी मुस्कान आ गई । तेज़ बारिश में इस वक्त दोनों भीग रहे थे । नील ने शिवानी का सर सहलाया और कहा ।

नील - डोंट वरी शिवानी , मैं हूं न , कुछ नहीं होगा । तुम डरो मत ।

शिवानी ( वैसे ही उसके सीने से चिपकी , आंखें भीचें हुए बोली ) - लेकिन नील...., देखो न , अभी ठीक वैसे ही हुआ , जैसा हॉरर फिल्मों में होता है । मुझे बहुत डर लग रहा है , प्लीज कुछ करो , मुझे यहां से लेकर चलो , प्लीज....।

ये कहते हुए शिवानी रो पड़ी और जब नील ने ये बात महसूस की , तो उसने शिवानी को अपनी बाहों में जकड़ लिया और उसके सिर को सहलाते हुए बोला ।

नील - नहीं शिवानी , ऐसा कुछ नहीं होता । तुम डरो मत , मैं तो बस मज़ाक कर रहा था , सच में ऐसा कुछ नहीं होता है । और मेरे इस मज़ाक का तुम पर ये असर होगा ,ये मैंने नहीं सोचा था । अगर मुझे पता होता , कि तुम इस तरह डर जाओगी , तो मैं तुम्हें सताने के लिए ये मज़ाक कभी नहीं करता ।

शिवानी - तुम झूठ बोल रहे हो , मुझे बहलाने के लिए । अगर ऐसा नहीं होता , तो सेम टाइम पर बिजली ,पानी, तेज़ हवा क्यों स्टार्ट होती ..??? इतनी देर से हम यहां है , लेकिन एक परिंदा भी नहीं दिखा इस सड़क पर । और वो कार का डोर...., वो भी ओपन नहीं हुआ । मुझे बहुत डर लग रहा है ।

नील ने उसे खुद से अलग किया और उसका चेहरा अपने हाथों में भरकर , उसकी आंखों में देखकर बोला ।

नील - ट्रस्ट मी , तुम जैसा सोच रही हो वैसा कुछ भी नहीं है । ये सब बेकार की बातें होती हैं शिवानी । मैं बस मजाक में सब कह रहा था , तुम्हारे साथ मस्ती कर रहा था , बस । ट्रस्ट मी...., मुझे नहीं पता था कि तुम इतना घबरा जाओगी । और वो कार का डोर ओपन कैसे होता ...!!! जबकि उसकी चाबी तो मेरे पास है । मैंने ही लॉक किया था डोर । और अगर मैं झूठ कहता , तो तुम्हें खुद की बातों पर विश्वास दिलाने के लिए , इस तेज़ भिगाती बरसात में तुम्हें खड़ा नहीं रखता ।

इतना कहते हुए नील ने अपनी पॉकेट से कार की चाबी निकाली , और कार अनलॉक कर दी । ये देख हैरानी से शिवानी ने एक बार कार को देखा , तो दूसरी बार नील को । अगले ही पल उसने नील को जोर का धक्का दिया और कार का डोर ओपन कर , अंदर बैठ गई और जोर से दरवाज़ा बंद कर दिया । बेचारा नील गिरते - गिरते बचा । मन ही मन बेचारा अब सोचने लगा , कि " अब मेरी खैर नहीं , किस मुहूर्त में मैंने शिवानी को डराने का सोचा और अब खुद ही उसके कहर से डर लग रहा है , और ये बारिश ...., बिलकुल सही टाइम पर बरसी मेरी बैंड बजाने को " । झल्लाकर नील कार की दूसरी साइड आया और ड्राइविंग सीट के साइड का डोर ओपन कर कार के अंदर बैठ गया । उसने शिवानी की तरफ देखा , तो वह उसे ही ठंड से कांपती हुई गुस्से से घूरकर देख रही थी और अगले ही पल उसे छींके आनी भी शुरू हो चुकी थी । इतनी तेज़ बारिश में भीगना, तबियत खराब करने का न्यौता देने बराबर था । नील ने तुरंत कार की एसी चालू कर दी , और उसका टेंपरेचर ऐसा सेट किया , जिससे कार का वातावरण गर्माहट से भर जाए । गनीमत थी , कि सिर्फ डीजल ही खत्म हुआ था , कार की बैटरी अभी थोड़ी बहुत बाकी थी , इस लिए एसी चल गई , वरना पता नहीं शिवानी का क्या होता , बेचारी गिले कपड़ों में कहीं बर्फ बन जाती , तो आफत हो जाती । शिवानी को नील की खुद के लिए परवाह करते देख , उसे अच्छा लगा । लेकिन उसके इस मजाक को वो ऐसे जाने दे , ऐसा तो वो कभी होने दे ही नहीं सकती थी । नील उसे ही देख रहा था, तो शिवानी ने अपना मुंह फेर लिया , लेकिन दूसरी तरफ मुंह करते ही, उसके होठों पर एक दबी मुस्कान जरूर ठहर गई थी । नील ने उसका चेहरा अपनी तरफ किया , तो शिवानी ने अपना चेहरा गुस्से वाला बना लिया । नील ने अपने दोनों हाथों से अपने कानों को पकड़ा और कहा " सॉरी " । बाय गॉड...., ये देखकर शिवानी ऐसे पिघली , कि जैसे बर्फ फ्रिज से बाहर रखते ही पिघलने लगती है । क्योंकि लड़कों की इस अदा पर तो , हर लड़की फिदा हो जाती है , चाहे वो कितने ही गुस्से में क्यों न हो। शिवानी ने उसकी तरफ अपनी बाहें बढ़ाना चाही , लेकिन फिर खुद को रोक लिया । आखिर वो नील की वजह से कितना डर गई थी और कितना रोई भी थी । ये याद आते ही शिवानी ने मुंह फेर लिया और मन ही मन ठाना , कि "वो नील को इतनी आसानी से माफ नहीं करेगी" । और उसका ऐसे इग्नोर करने वाला बिहेव देख , नील बेचारा उदास हो गया । वह शिवानी को मनाने के लिए और कुछ करता या कहता , उससे पहले ही नील की गाड़ी आ गई और ड्राइवर ने नील को कॉल कर दिया । नील ने ड्राइवर से बात की और फिर दोनों कार में जा बैठे । बारिश अभी भी जम कर हो रही थी । लगभग एक घंटे बाद शिवानी को उसके घर छोड़ने के बाद नील अपने घर चला गया ।

कायरा का कॉल देख मालती जी ने एक ही रिंग में कॉल रिसीव कर लिया , शायद वो उसकी टेंशन में फोन हाथ में ही लिए बैठी थी । कॉल रिसीव करते ही उन्होंने कायरा के कुछ कहने से पहले ही तुरंत कहा ।

मालती जी ( घबराई हुई सी ) - कहां है मेरी बच्ची...???? इतनी देर से फोन कर रहे हैं हम । अभी तक घर क्यों नहीं आई...???

मालती जी को घबराते देख, देवेश जी उन्हें शांत कराने लगे और उनके हाथ से फोन ले लिया , तब तक अंश भी उनके रूम में आ गया । उन्होंने फोन कान से लगा कर कहा ।

देवेश जी - कहां हो बेटा ...???? कब से कॉल कर रहे हैं हम तुम्हें .!!! बाहर इतनी बारिश हो रही है ...., हैलो कायरा...., बेटा चुप क्यों हो , बताओ तुम कहां हो इस वक्त....??? कितनी चिंता में हैं हम लोग । तुम कुछ बोलती क्यों नहीं बेटा..????

अपने पैरेंट्स को खुद की इतनी चिंता करते देख , कायरा का गला भर आया और वो कुछ बोल नहीं पाई । आखों से उसके आंसू छलकने लगे । ये देख आरव ने उसके हाथ से फोन ले लिया और उसे शांत रहने का कहकर , देवेश जी को वर्तमान के बने हुए हालातों के बारे में जानकारी दी ।

आरव - प्रणाम अंकल जी , हम ऑफिस किसी जरूरी काम से आए थे और यहां हमें वक्त लग गया , बारिश बीच में ही शुरू हो गई और अब ये हालात हैं , कि नीचे सड़कों पर पानी भर गया है । बारिश है कि रुकने का नाम नहीं ले रही । हम अभी ऑफिस के टेंथ फ्लोर पर हैं , इस लिए पानी के भराव का खतरा यहां नहीं है , लेकिन ऐसे में हमारा यहां से बाहर जाना खतरे से खाली नहीं है ।

देवेश जी - आप ठीक कह रहे हैं आरव । ऐसी स्थिति में आप और कायरा जहां भी हैं , वहीं रहें । हमें अपनी बेटी की चिंता हो गई थीं , क्योंकि कायरा इतने वक्त तक बिना बताए कभी घर से बाहर नहीं रही । और फोन तो कायरा एक बार में उठा लेती है । बस इन्हीं कारणों से हम परेशान थे । लेकिन अगर आप उनके साथ हैं , तो हमें चिंता नहीं है । हम आप पर भरोसा तो कर सकते हैं न , अपनी बेटी को लेकर आरव..!!??

आरव ( तुरंत बोला ) - आपको ट्रस्ट है न अंकल जी मुझपर..???

देवेश जी - भरोसा है तभी आपसे ये सवाल कर रहे हैं ।

आरव - आप बस अपना भरोसा मुझपर ऐसे ही बनाए रखिए अंकल जी , मैं कायरा को कोई तकलीफ नहीं होने दूंगा यहां और सड़कों पर पानी का बहाव कम होते ही , कायरा को सही सलामत घर पहुंचा दूंगा । ये मेरा वादा है आपसे अंकल जी ।

देवेश जी - हमें आप पर और अपनी बेटी पर विश्वास है ।

तभी मालती जी ने तुरंत देवेश जी से फोन ले लिया और कहा ।

मालती जी - कायरा कहां है आरव...?? वो ठीक तो है न ...??? बात क्यों नहीं कर रही वो हमसे..???

आरव ( फोन कायरा की तरफ बढ़ाकर बोला ) - अपने इमोशंस पर काबू रखो कायरा , वरना तुम्हारे घर वाले परेशान हो जायेंगे और ये लो फोन...., आंटी जी तुम्हारे बारे में पूंछ रही हैं , बात करना चाहती हैं तुमसे ।

कायरा ने अपने आसूं पोंछे और आरव से फोन ले लिया । उसने शांत लहजे में मालती जी से बात की और मालती जी ने उसे खुद का खयाल रखने को कहा और हो सके तो जल्दी वापस आने की सलाह दी । कायरा ने उनकी बात को मानने का वादा किया और फिर कुछ देर बाद कॉल कट गई । कायरा उदास थी और उसे ऐसे उदास देखकर आरव को अच्छा नहीं लग रहा था । उसने कायरा के दिमाग डायवर्ट करने के इरादे से, कायरा से कहा ।

आरव - अब तो हमें कम से कम आज की रात तो यहीं गुजारनी है , तब तक तुम.... ये.... इस तरह से..... जोकर टाइप की साड़ी पहनकर रहो , उससे अच्छा है कि तुम साड़ी अच्छे से पहन लो , लाओ मैं मदद कर देता हूं ।

कायरा ( हड़बड़ा कर दो कदम पीछे होते हुए बोली ) - नहीं....., रहने दीजिए । नहीं चाहिए मुझे कोई मदद । मैं ऐसे ही ठीक हूं ।

आरव - लेकिन तुम्हें इस तरह जोकर बने देख मैं रात भर अपनी हंसी कंट्रोल नहीं कर सकता ।

ये बोल आरव जोर से हंस दिया और ये देख कायरा इतनी चिढ़ी कि उसने तुरंत उसे गुस्से से खा जाने वाली नजरों से घूरते हुए कहा ।

कायरा - मुंह बंद कर लीजिए अपना , वरना कहीं अगर मुझसे मेरा गुस्सा कंट्रोल नहीं हुआ , तो मैं जरूर आपके दांत तोड़ दूंगी ।

इतने सुनना था , कि आरव ने अपने मुंह पर हाथ रख लिया और अगले ही पल हाथ हटा कर , थोड़ा रौब दिखाते हुए बोला ।

आरव - तुम अपने बॉस से ऐसे बात करोगी , शर्म नहीं आती तुम्हें...??

कायरा ( चिढ़कर ) - जिसने की शर्म , उसके फूटे कर्म । आप मेरा मजाक उड़ाएं और मैं चुप - चाप आपको देखती रहूं , ये कभी हो ही नहीं सकता । और अभी ऑफिस टाइम तो है ही नहीं , तो आप अपनी इस वक्त ये बॉस गिरी नहीं दिखा सकते ।

आरव - धमकी दे रही हो...????

कायरा - जो समझना है समझिए ।

आरव - अब धमकी दोगी तो यही समझूंगा । लेकिन तुम अपने ये कपड़े चेंज कर लो , क्योंकि भले ही तुम मेरे दांतों को तोड़ों या न तोड़ो , लेकिन तुम्हें ऐसे देखकर मैं रात भर हंसने से खुद को बिलकुल भी नहीं रोकने वाला ।

कायरा ( उसकी तरफ गुस्से से बढ़कर ) - आप.....!!!!

आरव ( उसे हाथों के इशारे से रोकते हुए ) - वेट ..., वेट....। मुझसे लड़ने से अच्छा है , तुम ये चेंज कर लो । आओ मैं कोई ड्रेस तुम्हारे हिसाब की ढूंढ देता हूं , क्योंकि अब हमारे पास वक्त भी है ड्रेस ढूंढने के लिए ।

इतना बोल वो बिना कायरा का जवाब सुने , चाबी डेस्क से उठाकर डिजाइनर रूम की तरफ बढ़ गया । कायरा भी बेचारी क्या करती , वह भी उसके पीछे - पीछे चल दी , क्योंकि उसे भी अपने कपड़ों से ऊब होने लगी थी । एक घंटे की मशक्कत के बाद आरव को एक नेवी ब्लू कलर की टी - शर्ट और एक मल्टी कलर की लांग स्कर्ट मिली । उसने कायरा की तरफ देखा , और उसे वो कपड़े थमा दिए । कायरा ने उन कपड़ों को देखा और फिर आरव को ताकने लगी । आरव ने एक नज़र उसे देखा और दुप्पटे वाले हैंगर्स की तरफ बढ़ गया । एक ये ही थे , जिसे आरव को ढूंढना नहीं पड़ा , सामने ही ये हैंगर में टंगे मिल गए । आरव ने एक शिफॉन का पिंक कलर का दुपट्टा निकाला और आकार कायरा को थमा दिया । कायरा उसे हैरानी से देखने लगी , कि उसने तो इसके बारे में कहा नहीं , जबकि उसे दुपट्टे की सख्त जरूरत थी , लेकिन आरव ने उसके बिना कहे ही उसकी मन की मुराद पूरी कर दी । आरव उसे चेंज करने का कहकर रूम से बाहर चला गया । और कायरा के चेहरे पर मुस्कान बिखर गई । कितना समझता था उसे आरव , बिना कहे ही उसकी सारी जरूरतें पूरी कर देता था । कुछ देर बाद कायरा चेंज कर रूम से बाहर आई , तो उसे आरव कहीं नहीं दिखा । उसने आरव को आवाज़ लगाई ।

कायरा - आरव....!!!! कहां हैं आप..???

आरव - अपने केबिन में हूं , यहीं आ जाओ ।

कायरा ने अपना मोबाइल और क्लच उठाया और आरव के केबिन में आ गई । आरव तब आदित्य की फाइल ही रीड कर रहा था । कायरा को देख उसने सोफे की तरफ , उसे बैठने का इशारा किया । कायरा अपना फोन लेकर सोफे पर बैठ गई और उसने अपना ध्यान पूर्णतः फोन में लगा लिया । लेकिन ....., ये क्या..!!! हर दो मिनट में उसका ध्यान आरव की तरफ जा रहा था , जो कि फाइल में बिजी था । जब ऐसा बहुत बार हुआ , तो उसने अपने सिर पर टपली मारी और खुद से धीरे से कहा ।

कायरा - ये क्या कर रही है तू...!!??? वो अपना काम कर रहे हैं और तू है कि उनसे नजरें नही हटा पा रही । अगर उन्होंने तुझे ऐसे खुद को देखते हुए नोटिस किया , तो फिर से सवालों की झड़ी लगा देंगे और फिर तू उन्हें जवाब नहीं दे पायेगी ।

कायरा ने ये सब बहुत धीरे बोला था , लेकिन कायरा की हरकतें आरव कन्खियों से उसे देखकर नोटिस कर रहा था और कायरा के इतने धीमे बोलने के बाद भी उसे सब कुछ साफ - साफ सुनाई दे गया । आरव ने फाइल पूरी पढ़ ली थी , तो उसने फाइल में साइन किया और फाइल को ड्रॉर मेन रखते हुए मन ही मन खुद से बोला ।

आरव - यही सही वक्त है , अपने सवालों के जवाब लेने का ।

वह कायरा की तरफ बढ़ गया और उसके बगल में थोड़ी दूरी बनाकर बैठ गया । जबकि कायरा अपने ख्यालों में इतनी खोई थी , कि उसे पता ही नहीं चला आरव कब उसके बगल में आकर बैठ गया । उसने एक बार फिर आरव की डेस्क की तरफ नजरें घुमाई , तो उसे आरव गायब दिखा। ये देख कायरा अपना फोन चलाना छोड़कर खड़ी हो गई और आश्चर्य से देखते हुए वह खुद से नॉर्मल आवाज़ में बोली ।

कायरा - ये आरव कहां चले गए..??? अभी तो यहीं थे । कहीं मुझे छोड़कर कहीं चले तो नहीं गए...??? लेकिन ऐसे मौसम में तो वे बाहर जा ही नहीं सकते हैं । फिर कहां गए..???

आरव उसकी ये बातें सुन रहा था और उसे कायरा की इस मासूमियत भरी बातों से हंसी भी आ रही थी और उसपर प्यार भी आ रहा था । कायरा थोड़ी और आगे बढ़ी , कि उसके कानों में आरव की आवाज आई ।

आरव - ध्यान से देखो , यहीं हूं , तुम्हारी आंखों के सामने ।

कायरा का ये सुनना था , कि वो तुरंत पलटी और आरव को सोफे में बैठा देख हड़बड़ा गई और अब उसे पूरा यकीन हो गया था , कि अभी - अभी जो उसने बोला , वो पक्का आरव ने सुन लिया । कायरा बस बुत बनी वहीं खड़ी रही , तो आरव ने कहा ।

आरव ( मुंह बनाकर ) - खा नहीं जाऊंगा तुम्हें ..., बैठो आराम से ।

कायरा अपनी पहली वाली जगह पर आकर बैठ गई । आरव ने पहले उसे देखा और फिर कहा ।

आरव - सवाल तो मेरे पास अब भी हैं , वो भी बहुत सारे । जिनके जवाब तुम्हें देने ही होंगे ।

कायरा ( नजरें चुराते हुए बोली ) - कैसे सवाल..!! कौन से सवाल...??? मैं किसी सवाल के बारे में नहीं जानती । और जिनके बारे में मैं जानती ही नहीं हूं , उसका जवाब कैसे दूंगी ..???

आरव ( शांत लहज़े में ) - देखो कायरा....., मुझे घुमा फिराकर बात नहीं करना है । सीधा - सीधा पूछूंगा और सीधा - सीधा जवाब मुझे चाहिए । क्योंकि मैं जितना बात को तुमसे घुमाऊंगा या तुम घुमाओगी , उतनी ही बात बढ़ेगी ।

आरव ये सब बोल ही रहा था , कि तभी जोर की बिजली कड़की और लाइट ऑफ हो गई । एकदम से हुए इस वाकिये से , कायरा डर गई और आरव के पास जाकर उसके सीने से चिपक कर बैठ गई । ये सब इतना अचानक से हुआ , कि आरव भी हल्का सा सहम गया और जो कायरा ने किया , उससे उसकी धड़कने फिर से तेज़ चलने लगी । उसे समझ ही नहीं आया , कि ये हुआ क्या और वो इस पर क्या रिएक्ट करे । पूरा केबिन घुप्प अंधेरे में तब्दील हो गया था , जिससे डरना लाजमी ही था । आरव ने कायरा के सिर पर हाथ रखकर , उसके बालों को सहलाया और कहा ।

आरव - बी ब्रेव कायरा....!!!! कुछ नहीं हुआ है , तुम डरो मत । बस लाइट गई है , थोड़ी देर में आ जाएगी ।

कायरा ने जैसे उसकी बात सुनी ही नहीं , वह वैसे ही उससे लिपटी रही । आरव ने अपना फोन टेबल से उठाया , और चेक किया तो टॉवर भी अब फोन में शो नहीं हो रहे थे । उसने सोचा था , बिजली ऑफिस में बात करेगा , लेकिन अब ऐसा हो पाना संभव नहीं था । बारिश अब भी तेज़ थी , जिसकी वजह से लाईट्स और टावर का ऑफ होना भी उसी का एक हिस्सा था । आरव ने फोन की फ्लैश लाइट ऑन की और कायरा से कहा ।

आरव - कायरा.....!!!! टावर ऑफ है मोबाइल का , पानी इतना बरस रहा है कि लाइट्स का अब ठिकाना नहीं है । तुम ऐसे डरोगी , तो कैसे चलेगा..??? अभी हमें यहां ऐसे ही पूरी रात गुजारनी है ।

कायरा ने ये सुनकर झटके से आरव को छोड़ दिया और फिर अपना मोबाइल चेक किया , तो उसमें भी मोबाइल टावर ऑफ था । ये देख कायरा को घबराहट होने लगी । उसने भी फोन की फ्लैश लाइट ऑन की , और आरव से बोली ।

कायरा - अब क्या होगा...??? मुझे अंधेरे से वैसे तो डर नहीं लगता , लेकिन अचानक से ये सब देखकर मुझे घबराहट हो रही है । मैं पहले कभी ऐसी सिचुएशन में नहीं फंसी हूं। और अभी तो मम्मा पापा भी मेरे पास नहीं हैं । आज मुझे इस अंधेरे से डर लग रहा है ।

आरव - डोंट वरी कायरा । भले ही तुम्हारे मम्मा पापा यहां न हों , लेकिन मैं तो हूं न । मेरे रहते तुम्हें डरने की कोई जरूरत नहीं है । कुछ नहीं होगा , वैसे भी यहां हमारे अलावा और कोई नहीं है , जो तुम्हें नुकसान पहुंचाए ।

कायरा ने जब ये सुना " यहां हमारे अलावा और कोई नहीं है " , तो वह झटके से उठ गई और उसने अपने कदम आरव की डेस्क की तरफ बढ़ा दिए । तभी आरव ने उसका हाथ पकड़ लिया और कायरा के कदम वहीं ठहर गए । उसने पीछे मुड़कर नहीं देखा , तो आरव उसके सामने आया और उसने कहा ।

आरव - कहां जा रही हो..?? अगर तुम्हें इस अंधेरे में चोट वगेरह लग गई तो...!!??? अभी तो ऐसी स्थिति भी नहीं है , कि मैं तुम्हें क्लिनिक तक भी ले जा सकूं ।

कायरा ( अपना हाथ आरव से छुड़ा कर रूखे लहज़े में बोली ) - आपको मेरी चिंता करने की जरूरत नहीं है , मैं बिल्कुल ठीक हूं और अपना खयाल खुद रख सकती हूं ।

आरव ( कायरा की बात सुनकर हैरान होकर बोला ) - ये कैसी बातें कर रही हो तुम..??? अभी तो तुम कितनी डरी हुई थी और अब अचानक से ऐसा बिहेव.... क्यों कायरा क्यों...??? क्यों कर रही हो तुम ऐसा...???

कायरा ( बिना उसकी तरफ देखे ) - पल भर के लिए भटक जरूर गई थी , लेकिन अब संभल गई हूं। हां...., लगा तब मुझे डर , लेकिन अब मैंने खुद को मजबूत बना लिया है । मुझे खुद को संभालना अच्छे से आता है । नहीं है मुझे किसी सहारे की जरूरत । बेहतर होगा , आप मुझसे दूर रहें और मैं आपसे । क्योंकि इन बेफिजूल की चीजों के लिए वक्त बर्बाद करना , बेवकूफी से बढ़कर और कुछ नहीं है ।

आरव - मैंने सिर्फ तुम्हारे बिहेव की बात की थी , लेकिन तुमने इतना कुछ कह दिया । ये जरूर मेरे सवालों से बचने का नया तरीका है तुम्हारा ...!!!???

कायरा ( चिल्लाकर , उसकी तरफ पलटकर बोली ) - कौन से सवाल..??? कैसे सवाल...???? क्यों आप ये बार - बार सवालों का राग अलाप रहे हैं , ( फिर नजरें नीची कर ) जबकि मुझे तो पता भी नहीं है , कि आप किन सवालों की बात कर रहे हैं ।

आरव को उससे इस तरह के व्यवहार की बिल्कुल भी उम्मीद नहीं थी । उसे कायरा की बातें सुनकर बेहद गुस्सा आया । उसने कायरा की बांह पकड़ने के लिए गुस्से में हाथ बढ़ाया , फिर रुक गया और जोर से अपना हाथ झटक दिया । ये सब करते कायरा उसे देख रही थी , उसे अंदाज़ा लग चुका था , कि आरव इस वक्त कितने गुस्से में है । वह उसका ये बिना आवाज़ का गुस्सा देख , सहम चुकी थी । आरव ने कुछ पल बाद खुद को संभाला और पलटकर कायरा की तरफ देखकर उससे कहा।

आरव - देखो कायरा....., मुझे इतना मजबूर मत करो कि मैं अपना गुस्सा कंट्रोल न कर पाऊं और कुछ ऐसा कर जाऊं जिससे तुम्हें तकलीफ हो । मैं उनमें से बिल्कुल भी नहीं हूं , जो किसी भी लड़की से गुस्से से अपनी बात मनवाता हो । तो जो मैं हूं नहीं , वो बनाने की कोशिश मुझे मत करो और न मुझे वो बनने पर मजबूर करो । मुझे चिंता है तुम्हारी , फिक्र है । इस लिए शांति से मेरे सवालों के जवाब दे दो , इससे पहले कि मैं गुस्से में अपना आपा खो दूं ।

कायरा ( दोबारा चिल्लाकर ) - कौन से सवाल कैसे सवाल आरव.....?? कितनी बार बताऊं , जब मुझे नहीं पता कि आप किस सवाल की बात कर रहे हैं , तो मैं जवाब क्यों और कैसे दूं....????? और क्यों फिक्र है आपको मेरी..??? क्यों तकलीफ होती है आपको मुझे प्रॉब्लम में देखने पर ..???

लास्ट सवाल कायरा ने जानबूझकर पूछा था । हर बार यहीं पर तो दोनों की बातें खत्म हो जाती थी । कायरा ने इसी लिए पूछा , ताकि हर बार की तरह बात यहीं पर खत्म हो जाए । आरव ने जब सुना , तो उसे पलटाकर सोफे के सामने वाली दीवाल से लगा दिया , उसका एक हाथ पकड़कर दीवाल से लगाया और दूसरा हाथ उसकी पीठ की तरफ मोड़कर गुस्से से बोला ।

आरव - बार - बार असलियत से मुकरने की कोशिश तुम मत करो कायरा । तुम भी जानती हो अच्छे से , मैं किस सवाल की बात कर रहा हूं और क्यों कर रहा हूं ।

कायरा ( दर्द से हल्का कराहते हुए बोली ) - आह....., ( फिर आरव की आखों में देखकर बोली ) ये मेरे सवाल का जवाब नहीं है आरव । मुझे ये बताइए....., कि किस हक से आप मुझसे सवाल पूंछ रहे हैं ...??? किसने हक दिया आपको मुझसे सवालों के जवाब मांगने का...??? और आपको मेरी तकलीफ से दर्द क्यों होता है...???? ( फिर हल्के दर्द में ) और ये क्या हरकत है आरव...??? किसने अधिकार दिया आपको मेरे साथ ऐसा बिहेव करने का...??? छोड़िए ...., तकलीफ हो रही है मुझे ।

ये कहते - कहते कायरा की आंखें बरस पड़ी । और आरव ने तुरंत उसे छोड़ दिया और अपना दाहिना हाथ उसी के बगल में दीवाल पर दे मारा । कायरा ने जब देखा तो उसका हाथ पकड़ लिया और उस पर फूंक मारने लगी । आरव ने उसकी कंसर्न जब अपने लिए देखी , तो गुस्से से अपना हाथ खींच लिया और उससे कहा ।

आरव - कहा था न मैंने , मुझे वो बनने पर मजबूर मत करो जो मैं हूं नहीं । और ये कंसर्न क्यों दिखा रही हो , जब तुम्हें मेरी तकलीफ से कोई फर्क ही नहीं पड़ता ...!!!!

कायरा - किसने कहा आपसे कि मुझे आपकी तकलीफ से फर्क नहीं........।

फिर एक दम से चुप हो गई , जबकि आरव उसे बस देखता ही रह गया । उसने कायरा के चेहरे को अपने दोनों हाथों में भरकर , उम्मीद भरी नजरों से कहा ।

आरव - रुक क्यों गई , बोलो न कायरा । तुम्हें मेरी तकलीफ से फर्क पड़ता है न...!!!! बोलो ....., यही बोलना चाह रही थी न तुम ..???!!!!

कायरा ने झटके से उसके हाथ हटाए और दीवाल की तरफ पलटकर बोली ।

कायरा - नहीं...., नहीं फर्क पड़ता मुझे । ( फिर आरव की तरफ पलटकर ) लेकिन आपको क्यों फर्क पड़ता है , इसका जवाब आप दीजिए। जब - जब मैंने आपसे ये सवाल पूछा , आपने कभी इसका मुझे सेटिस्फाई करने वाला जवाब नहीं दिया । आज दीजिए...., आज मैं भी आपसे पूछती हूं ये सवाल , कि आपको फर्क क्यों पड़ता है ...??? आज दीजिए आरव जवाब , खत्म कर दीजिए इससे रिलेटेड उठने वाले मेरे हर सवाल को ...!!!!

कायरा ने ये सब इतनी तेज आवाज में कहा , कि आरव खुद को रोक नहीं पाया और एक बार फिर उसके करीब पहुंच गया। उसने कायरा के दोनों हाथों को पीठ से लगाया और उसके चेहरे को बालों से पकड़कर , अपने चेहरे के एकदम करीब लाकर बोला ।

आरव - जानना चाहती हो न ....!!!!! जानना चाहती हो न तुम्हारे सवालों के जवाब..???

कायरा ने उसे देखते हुए ही , हां में सिर हिलाया , तो आरव ने चिल्लाकर कहा ।

आरव - क्योंकि पसंद करता हूं मैं तुम्हें । प्यार करता हूं मैं तुमसे , वो भी बेइंतहा । चाहने लगा हूं तुम्हें , दिलों जान से भी ज्यादा । खुद की जिंदगी से पहले तुम्हारा खयाल आता है । उठते बैठते सोते जागते सिर्फ तुम ही नज़र आती हो मुझे हर जगह। जब भी तुम्हारी तरफ कोई गंदी नज़र से देखता है , तो मन करता है उसी वक्त उसकी जिंदगी छीन लूं । जब भी तुम तकलीफ में होती हो , तो दिल चीर कर रख देती है तुम्हारी तकलीफ मुझे । दिल रो देता है मेरा , तुम्हें प्रॉब्लम में देखकर । मन करता है , तुम्हें एक झटके में सारी मुसीबतों से आजाद कर दूं , ताकि तुम अपनी जिंदगी खुशी - खुशी जी सको । टूट जाता हूं मैं , जब तुम्हारी आंखों में आसूं का एक कतरा भी देखता हूं मैं तो , टूट जाता हूं । तुम रूठती हो मुझसे , तो लगता है जैसे जिंदगी रूठ गई हो मेरी , किसी ने मेरे शरीर से मेरी जान निकाल दी हो , ऐसा महसूस होता है मुझे ।

ये कहते - कहते आरव का गला भर आया । उसने झटके से कायरा को छोड़ दिया और उसकी तरफ पीठ करके खड़ा हो गया । खुद को वह अब शांत करने लगा । आरव की बात सुनकर तो कायरा एक दम भौचक्की सी उसे देख रही थी । उसे समझ ही नहीं आया , ये हुआ क्या ...!!?? चाहती तो वो भी यही थी , उसका दिल तो जाने कितनी बार इस बात की गवाही दे चुका था , कि आरव उससे प्यार करता है , लेकिन ये सच होगा ये सोचकर ही उसके हाथ पैर कांप रहे थे । चाहती थी वह भी , कि आरव इस सच्चाई को उसके सामने कबूल करे , लेकिन इस तरह और वो भी आज ही , इतनी जल्दी ..!!! ये सोचकर ही उसकी सांसें तेज़ हो चल रही थी। क्या बोले इस वक्त वो , उसे कुछ समझ ही नहीं आ रहा था । खुशी मनाए या मातम , यही सोच रही थी वो इस वक्त । आरव दोबारा कायरा की तरफ पलटा और बोला।

आरव - मिल गई न खुशी...??? सुन लिया न तुमने सच..!!!! ( कायरा के दोनों हाथों को थामकर ) क्यों और कब कर बैठा मैं तुमसे प्यार , नहीं पता मुझे कायरा। तुम कब मेरे दिल में उतर गई , नहीं जानता मैं । लेकिन तुम्हारे मेरे आसपास होने से जो मैं जो महसूस करता हूं , वो मैने कभी महसूस नहीं किया । मैंने तो कभी सोचा भी नहीं था , कि एक दिन कोई मुझे इतना अच्छा लगने लगेगा , कि उसकी खुशी ही मेरी खुशी हो जायेगी और उसका दुख ही मेरा दुख बन जायेगा । तुम्हें याद है ..., जिस दिन तुम यहां अपना इंटरव्यू देने आई थी , उसी दिन...., उसी दिन मुझे ये एहसास हुआ था , कि मैं तुमसे प्यार करने लगा हूं । उसके पहले मैं क्यों तुम्हारे बारे में ही सोचता रहता था , नहीं पता था मुझे। राहुल ..., राहुल ने मुझे इस सच से रूबरू करवाया था । वरना मैं तो इन एहसासों से कोसों दूर था । ( कायरा बस एक टक उसकी आखों में देख रही थी , जिसकी आखों में ये सब बताते हुए एक अलग ही चमक थी ) पहली बार...., पहली बार तुम्हें देखकर मेरी धड़कने बेकाबू हुई थीं । पहली बार मैं किसी लड़की के बारे में सोचकर मुस्कुराया था । पहली बार मुझे कोई लड़की अच्छी लगी थी। पहली बार मुझे किसी लड़की के कॉलेज न आने से फर्क पड़ा था । पहली बार मैंने किसी लड़की का इंतजार किया था । पहली बार किसी लड़की से मेरी लड़ाई हुई थी । पहली बार मुझे किसी लड़की की प्रॉब्लम से फर्क पड़ा था । पहली बार मेरी आंखों में कोई लड़की बसी थी । पहली बार मैं किसी की मुस्कान में , किसी की खूबसूरती में , किसी की बेबाक बातों में और किसी की आंखों में खोया था । और वो तुम थी कायरा..., वो लड़की तुम थी , इनफेक्ट हो ...., तुम ही वो लड़की हो । ( ये कहते हुए आरव की आंखें भर आई थीं और होठों पर सुनहरी मुस्कान थी ) तुम्हें पता है , मैं कभी किसी की नजरें नहीं पढ़ पाता था और न ही किसी लड़की की तरफ मैंने आज तक नज़र उठाकर देख था । लेकिन तुम...., तुम मेरी जिंदगी की वो पहली लड़की हो , जिसे मैंने जी भरकर देखना चाहा , अपनी आंखों में तुम्हारी मासूमियत को बसाना चाहा । लेकिन कभी मेरा जी भरा ही नहीं , जब - जब तुम मेरे साथ होती हो , लगता है मैं अब भी तुम्हें जान रहा हूं , पूरी तरह से मैं तुम्हें पहचान ही नहीं पाया हूं , ऐसा लगता है । ( कायरा की आखों को अपने हाथों से छू कर ) तुम्हारी नजरें पढ़ने लगा हूं मैं , बातें करना लगा हूं मैं इनसे । पहली लड़की हो तुम मेरी जिंदगी में , जिसकी नजरें मुझसे बातें करती हैं । तुम ऐसी पहली लड़की हो ....., मेरी मां , बहन और भाभी के बाद , जिसके होने से , जिसकी परेशानियों से , जिसकी मुस्कुराहट से मुझे फर्क पड़ता है । और मुझे पता है , तुम भी मेरे लिए यही फील करती हो । ये जो तुम्हारी आंखें हैं न , सब कह जाती हैं मुझसे । सब....., तुम्हारी उदासी , तुम्हारी हंसी , तुम्हारे जज्बात, सब बयान कर देती हैं तुम्हारी ये मासूम आंखें । बस ...., अब तुम भी अपनी आखों से बयान करती सच्चाई को , अपने होठों से कुबूल कर लो । मैं समझूंगा , मेरी मोहब्बत की पहली सीढ़ी पर मेरा चढ़ना सफल हो गया ।

इतना कहते हुए आरव कायरा के नजदीक आ गया और उसकी आखों में बड़े प्यार से देखने लगा । कायरा भी बस उसकी आखों में ही देखे जा रही थी और उसकी बातों में अपने लिए अथाह प्रेम को महसूस कर रही थी ।

माना कि जरूरत नहीं थी अब शब्दों के धागे की
लेकिन हकीकत से मुंह मोड़ लेना भी काफी न था

भले ही आरव के इजहार के बाद , अब जरूरत नहीं थी कायरा को कुछ कहने की । और कायरा की बोलती आखें , जो चीख - चीख कर ये बयान कर रही थी , कि वह भी आरव से प्यार करती है , उसके बाद कुछ कहने के लिए बचा ही नहीं था। लेकिन शब्दों को हमारे दामन में यूं ही नहीं संजोया गया है , इसका भी अपना एक अलग महत्व होता है । इन सबके बाद भी , अभी शब्दों की जरूरत थीं , कायरा के शब्दों की जरूरत। तभी ये आरव के यकीन पर मोहर लगा सकती थी , कि जो उसने कायरा की आखों में देखा , वो सच था । अब देखना ये था , क्या कायरा आरव की इस पाक साफ मोहब्बत को एक्सेप्ट करेगी...??? क्या वो मानेगी ये बात , कि वो भी उससे प्यार करती है...?? खैर ये तो वक्त ही बताएगा।

कायरा उसे अब भी एक टक देखे ही जा रही थी । तब ही एक बार फिर कड़कड़ाती बिजली का शोर हुआ और कायरा अब हकीकत में आ गई । उसे अब साफ - साफ नज़र आने लगा , कि आरव ने उसके सामने अपनी मोहब्बत का इजहार कर दिया हैं, ये सोचकर ही वह अंदर तक सहम गई । उसने आरव को खुद से दूर किया और उसकी तरफ पीठकर उससे दूर जाकर खड़ी हो गई । और फूट - फूट कर रो दी , लेकिन उसने अपने मुंह पर हाथ रख लिया , जिससे आरव को एक तिनके भर की आवाज़ भी कायरा के रोने की न सुनाई दे । केबिन में उस वक्त सिर्फ मोबाइल की फ्लैश लाइट्स की रोशनी थी , इस लिए आरव उसकी ये हरकत देख नहीं पाया । तेज़ बारिश और बिजली के कड़कने की आवाज़ से वह कायरा की रोने की आवाज़ भी सुन नहीं पाया । आरव उसके पास गया और कायरा की हालत से अनजान वह, हल्का सा मुस्कुराकर उससे बोला।

आरव - तुम नाराज़ हो गई हो न कायरा...??? कि मैंने तुम्हारे सामने इस तरह से अपनी मोहब्बत का इजहार किया । जबकि मुझे तो कुछ अच्छा , कुछ अट्रेक्टिव करना चाहिए था , क्योंकि तुम स्पेशल हो मेरे लिए और स्पेशल पर्सन के लिए हमेशा स्पेशल चीजें ही की जानी चाहिए। पर सॉरी कायरा....., मैं भी वह सब करके ही तुमसे अपने प्यार का इजहार करना चाहता था। लेकिन गुस्से में मैं खुद को कंट्रोल नहीं कर पाया और सब कुछ इस तरह कह गया। इसी वजह से तुम नाराज हों न मुझसे , इसी लिए तुमने मेरी बात का जवाब नहीं दिया और ऐसे यहां आकर खड़ी हो । सॉरी कायरा...., मैं तुम्हारे इस सपने को पूरा नहीं कर पाया , सॉरी....।

आरव की बात सुनकर कायरा का मन किया , कि वो अभी आरव के गले लग जाए और उसे सब सच बता दे , लेकिन वो ऐसा नहीं कर सकती , ये सोचकर उसका दिल बार - बार पसीजने लगा । एक मन किया उसका , कि आज वो बालकनी से कूद कर अपनी जान दे - दे क्योंकि आरव की बात का जवाब देने में वो असक्षम थी। लेकिन ऐसा कर वो बहुतों के जज्बातों के साथ खेलेगी , यही सोच वह रोए जा रही थी । इस वक्त कायरा क्या फील कर रही थी ,ये उससे बेहतर कोई नहीं जानता था । उसने खुद का दिल कड़ा किया और जैसे ही आरव की तरफ मुड़ी , आरव उसे खुद के कान पकड़े हुए, उससे इशारे से माफी मांगते हुए दिखा । ये देख कायरा दुबारा पलट गई । और अब बचे हुए जज्बात भी उसके आसुओं के सहारे बहने लगे ।

नैनों के द्वारे, आने के वादे
बाँधे ऐसे बोलो काहे
चौखट पे दिल की, आहट रखी है
ताकों पे हैं तोरे साए
उन बिन उन्हें मनाये
उन बिन कभी जो उनको रिझाये
उन बिन छले हैं मोरा ये जिया हाय.......
बहे नैना भरे मोरे नैना, झरे मोरे नैना
मोहे नैना सुने नहीं कहना, बहे मोरे नैना

कायरा की प्रतिक्रिया न आने पर , आरव ने उसका हाथ पकड़कर अपनी तरफ करते हुए कहा।

आरव - प्लीज कायरा..., अब तो मुझे यूं न सताओ । अब तो सच मान लो । देखो...., मैं अब और इंतजार नहीं कर सकता । कहीं ऐसा न हो , कि ये इंतजार मुझे अंदर तक तोड़ दे , उससे पहले ही तुम मुझे संभाल लो कायरा , संभाल लो । मान लो अपने दिल की बात , मत सताओ अब मुझे , मत सताओ ।

ये कहते हुए आरव ने कायरा को अपनी तरफ चेहरा कर खड़ा कर लिया और कायरा उसे अब देखने लगी । अगले ही पल कायरा ने उसका हाथ झटका और सोफे की तरफ जाकर खड़ी हो गई । तो आरव मुस्कुराकर अटकलें लगाता हुआ बोला ।

आरव - मजाक कर रही हो न तुम मेरे साथ , या फिर नाराज़ होने का नाटक कर रही हो , तभी तो मुझसे नजरें नहीं मिला रही । बहुत देर की न मैंने तुम्हें अपने दिल की बात बताने में , इसी लिए मुझे सता रही हो न । सता लो..., सता लो अच्छे से , हक है तुम्हारा , लेकिन सच एक्सेप्ट करने की भी गारंटी दो । आखिर कब तक मैं तुमसे इस बात की गुहार लगाता रहूंगा , कि कायरा सच स्वीकार कर लो ।

आरव की बात पर कायरा ने बहते आसुओं को साफ किया और अपनी मुट्ठी कसकर , खुद को मजबूत करते हुए बोली ।

कायरा - नहीं करती मैं प्यार....., नहीं करती । गलतफहमी हुई है आपको ।

कायरा की बात सुनकर आरव हैरान रह गया । अगले ही पल उसने कायरा को अपनी तरफ किया और मुस्कुराकर कहा ।

आरव - मजाक कर रही हो न ...!!!???? मुझे मंजूर है तुम्हारा मजाक , लेकिन इस बात पर नहीं ।

कायरा ( गुस्से से झल्लाकर बोली ) - मैं मजाक नहीं कर रही हूं । ( फिर उसने अपना हाथ झटककर, आरव से अपना हाथ छुड़ा लिया और उसकी तरफ दोबारा पीठकर बोली ) सच है ये...., जो कुछ भी मैं बोल रही हूं । नहीं है मुझे आपसे कोई लगाव...., नहीं पसंद मुझे आप । और ये सब सिर्फ छलावा है , नजरों का धोखा है और कुछ नहीं ।

अब आरव को गुस्सा आ गया , क्योंकि कायरा उसके प्यार की बेज्जती कर रही थी , वो भी तब...., जब वो खुद आरव से प्यार करती थी । ये जानकर आरव ने तेज़ आवाज़ में कहा ।

आरव - तुम्हें मेरा प्यार , नजरों का धोखा लगता है , छलावा लगता है..????

कायरा ( चिल्लाकर ) - हां....., धोखा और छलावे के अलावा ये और कुछ नहीं है । अट्रेक्शन है ये बस...., क्योंकि इस उम्र में ये होना लाजमी है । आप जिसे प्यार समझ रहे हैं , वो मात्र एक अट्रेक्शन है , उम्र भर का वादा नहीं । जो कि समझ आने पर , जाने कब पीछे छूट जायेगा , पता भी नहीं चलेगा आपको ।

आरव ( कायरा को अपने तरफ कर , उसकी आखों में देख जोर से बोला ) - कायरा....!!!!! इतना नासमझ नहीं हूं मैं , ये पूरी कंपनी चलाता हूं ....., और तुम मुझे कह रही हो कि मेरी फीलिंग्स, प्यार नहीं अट्रेक्शन है । इतना बेवकूफ समझ लिया तुमने मुझे , कि मुझे प्यार और अट्रेक्शन में फर्क समझ नहीं आयेगा ...!!!??? अट्रेक्शन में अपनी मोहब्बत की अनकही बातें समझ में नहीं आती । अगर मेरा प्यार अट्रेक्शन ही होता , तो तुम्हारी नजरों को यूं ही न पढ़ पाता मैं ।

कायरा - गलतफहमी है ये आपकी आरव । उससे ज्यादा और कुछ नहीं । और ये बॉस होने का रौब मत झाड़िए । कंपनी चलाने में और प्यार करने में जमीन आसमान का फर्क है ।

आरव ( उसके बाहों को अपने हाथ में कसते हुए ) - मतलब कि तुम्हारे हिसाब से मुझे तुमसे प्यार नहीं है ...???

कायरा ( नजरें नीची कर ) - हां....।

आरव ( उसके चेहरे कर अपनी नजरें जमाते हुए ) - मेरी आखों में देखकर यही बात बोलो ।

कायरा ( खुद को उसकी पकड़ से आजाद कर ) - ये क्या तमाशा लगा रखा है आपने ..???? कह दिया न एक बार , ये सिर्फ नजरों का धोखा है और कुछ नहीं , तो क्यों पीछे पड़े हैं आप....??? सच्चाई चाहे आंख मिलाकर बोली जाए या आंख बंद कर , सच्चाई .... सच्चाई ही कहलाती है । उसे झूठ में तब्दील नहीं किया जा सकता ।

आरव ( चुटकी बजाकर ) - राइट...। सच्चाई को झूठ में तब्दील नहीं किया जा सकता । जिसे तुम बदलने की कोशिश कर रही हो ।

कायरा ( पलटकर ) - नहीं...., ऐसा कुछ नहीं है ।

आरव - सच को बार - बार झूठ कहने से , वो झूठ नहीं बन जाता कायरा । तुम सच को झूठ बनाकर पेश करने की कोशिश जो इतनी देर से कर रही हो न , उसमें तुम खुद असफल हो । झूठ बोलना नहीं आता तुम्हें । और तुम जितनी बार झूठ बोलने की कोशिश कर रही हो , उतनी ही बार धोखा दे रही हो तुम खुद को ।

कायरा - नहीं....., मैं ऐसा कुछ नहीं कर रही ।

इतना कह कायरा सोफे के किनारे पर आ गई । आरव वहीं से बोलते हुए उसके पास आया ।

आरव - तुम ऐसा कर रही हो । झूठ बोल रही हो , कि तुम्हे मुझसे कोई लगाव नहीं , मैं तुम्हें पसंद नहीं । जबकि तुम्हारी आखें चीख - चीख कर सच्चाई बयान कर रही हैं । मुझे बस इतना बता दो , क्यों कर रही हो ये सब । मुझे आज कारण जानना ही है तुमसे ।

कायरा ( उसकी तरफ पलटकर ) - क्यों बेवजह की जिद पकड़े बैठे हैं आप..????

आरव ( उसकी तरफ अपने कदम बढ़ाकर ) - सच और कारण ....!!!!

कायरा ( नजरें चुराते हुए ) - देखिए आरव , मुझे जो बोलना था बोल चुकी । वही सच है , बाकी सब झूठ ।

आरव ( गुस्से से चिल्लाकर ) - आज सच बता दो कायरा , कहीं ऐसा न हो कि तुम मुझे हमेशा के लिए खो दो ।

ये सुन कर कायरा एकदम डर गई और तपाक से बोली ।

कायरा - नहीं...., ऐसा मत कहिए ।

आरव - सच्चाई ...., कारण ।

कायरा ( चिल्लाकर ) - मैं आपकी बात नहीं मान सकती , आप बेवजह की जिद करना छोड़ दीजिए आरव ।

आरव ( उसकी तरफ दूसरा कदम बढ़ाकर ) - कारण ....।

कायरा - मैं नहीं बताना चाहती ।

आरव - कारण ....., कायरा ।

कायरा ( आसुओं से भरे नैनों के साथ , जोर से चीख कर ) - क्योंकि मैं शादी शुदा हूं.....।

आरव के ये सुनकर कदम रुक गए । उसने ऐसे कायरा को देखा , जैसे उसने कुछ गलत सुन लिया हो ।

आरव - ज़रा फिर से बोलना कायरा , मैंने शायद कुछ गलत सुन लिया । तुम शायद दोबारा मज़ाक कर रही हो ।

कायरा ( एक बार फिर जोर से चिल्लाकर ) - मैं शादी शुदा हूं ।

आरव ने गुस्से से घूरकर कायरा को देखा और उसकी बाहों को जोर से अपनी हथेलियों से दबा कर बोला।

आरव - बकवास नहीं कायरा ।

कायरा ( रोते हुए ) - ये बकवास नहीं , सच है ।

आरव - मुझसे पीछा छुड़ाने के लिए , मेरी बात झुठलाने के लिए तुम इस हद तक झूठ बोलोगी , इसका अंदाजा मुझे नहीं था ।

कायरा ( अपनी बांहों में जकड़न महसूस कर , भीगी पलकों से बोली ) - ये सच है आरव , मेरी जिंदगी का वो सच , जो शायद कभी बदला नहीं जा सकता ।

आरव ( उसकी बाहों को और जोर से दबाकर , गुस्से से जबड़ा भींचते हुए बोला ) - झूठ मत बोलो.....!!!!! अगर ये सच होता , तो तुम्हारे मांग में और गले में सुहाग की निशानियां तो होती हीं । इतनी भी मॉर्डन तो नहीं हुई होगी तुम , कि हमारी ये सनातन परंपरा भूल जाओ ।

कायरा ( रोते हुए ) - ये सच है आरव , मेरा कहा एक - एक शब्द सच है ।

आरव ने ये सुनकर उसे जोर से झटक दिया , जिसकी वजह से कायरा लड़खड़ा गई , पर उसने खुद को संभाल लिया । आरव ने गुस्से से , सामने रखी कांच की टेबल पर पूरी ताकत के साथ जोर से हाथ मारा । तो टेबल उसके इस प्रहार को न सह पाई और टूटकर बिखर गई । जबकि उस टेबल का कांच काफी मोटा था , पर शायद आरव के गुस्से के आगे कम। कायरा ने देखा , तो सहमकर दो कदम पीछे हो गई । आरव ने गुस्से से चिल्लाकर उससे पूछा।

आरव - कब हुई तुम्हारी शादी , कौन है तुम्हारा पति और इसका जिक्र आज तक क्यों नहीं हुआ..??? न कभी रूही ने इस बारे में बताया और न ही कभी तुमने अपना मुंह खोला।

आरव को कायरा की बातों पर यकीन नहीं हो रहा था । या फिर शायद उसका कायरा की बातों पर यकीन करना मुश्किल सा था।

कायरा - रूही को इस बारे में नहीं पता ।

आरव ( खून से लथपथ हाथ से , ताली पीटते हुए बोला ) - वाह कायरा ..... वाह...!!! बचपन की दोस्त को ये नहीं पता , कि उसकी इकलौती दोस्त शादी शुदा है । यू नो व्हाट कायरा....., एक परसेंट भी तुम्हारी बात पर यकीन नहीं हो रहा मुझे , एक परसेंट भी नहीं ।

कायरा ( आसुओं से भरी आंखों से उसे देखकर ) - मेरा बाल विवाह हुआ था आरव ।

ये सुनकर आरव स्तब्ध रह गया। क्योंकि कायरा के शब्द उसकी आखों से हुबहू मिल रहे थे । कायरा की बात सुनकर आरव को ऐसा लगा , जैसे किसी ने उसके कानों में गर्म शीशा घोल दिया हो । वह स्तब्ध सा कायरा को देखते खड़ा रह गया। उसे अब भी विश्वास नहीं हो रहा था , कि ये सच है । उसके दिमाग में अब ये आने लगा , कि किसी दूसरे की ब्याहता को वह प्यार कर बैठा । कैसे उसकी नजरें इतनी गन्दी हो गई , कि वो शादी शुदा लड़की से प्यार कर बैठा , जो किसी और की अमानत है । आरव की आंखों के आगे अब अंधेरा सा छाने लगा , उसने धीरे से अपने पैर पीछे की तरफ बढ़ाए , तो वह लड़खड़ा गया । उसने किसी तरह खुद को संभाल , और अपना हाथ थोड़ा सा झुकाकर आस - पास बैठने के लियेल कुछ ढूंढने लगा । उसे अपने हाथ में सोफे का हत्था महसूस हुआ , उसने उसपर हाथ रखा और पीछे की तरफ कदम बढ़ाकर , वह उसमें बैठने लगा । जैसे ही वह बैठने के लिए झुका , कि उसे पता नहीं चला कि वो कब धम्म से उस सोफे पर बैठ गया । उसने अपना सिर पीछे सोफे से टिकाया और पलकें बंद कर ली । कायरा आरव को ये सब बताने के बाद , उसकी तरफ पीठकर पलट गई और धम्म से जमीन में बैठ गई और फूट - फूटकर रोने लगी । उसे पता ही नहीं चला , कि आरव की इस वक्त हालत क्या है , सच सुनकर । जबकि आरव को इस वक्त ऐसा महसूस हो रहा था , कि जैसे मुंह को आया निवाला उससे छीन लिया गया हो । वो अपनी मंजिल के सबसे करीब पहुंच कर भी , खाली हाथ रह गया और उसकी मंजिल पर किसी और ने कदम रख दिए । इस वक्त आरव के दिमाग में सिर्फ कायरा की बताई आखिरी लाइन ही घूम रही थी और उसे बिलकुल भी होश नहीं था , कि कायरा इस वक्त बेतहाशा रोए जा रही है । कुछ पल बाद जब कायरा को आरव का खयाल आया , तो उसने पलटकर आरव की तरफ देखा और आरव को ऐसे बेजान से सोफे में पड़े देख , उसकी आंखें डर से बड़ी हो गई । वह आरव की हालत देख बुरी तरह घबरा गई । वह तुरंत उठी और आरव की तरफ आकर , उसे आवाज़ दी ।

कायरा - आरव...., आरव ...!!!! आरव उठिए , आप ऐसे क्यों ......, क्यों आप ऐसे बैठे हुए हैं ।

आरव ने कोई जवाब नहीं दिया, जैसे उसे कायरा की आवाज़ सुनाई ही न दे रही हो । ये देख कायरा ने आरव को तीन चार बार आवाज़ लगाई , लेकिन आरव ने कोई जवाब नहीं दिया , उसके दिमाग में बस इस वक्त कायरा के शब्द और उसके बाद उसे लेकर उमड़े विचार ही घूम रहे थे , जिसकी वजह से उसे कुछ सुनाई ही नहीं दे रहा था। जबकि उसके ऐसे चुप रहने से कायरा को लग रहा था , कि आरव उससे जान बूझकर बात नहीं कर रहा है । ये देख वह वहीं खड़ी - खड़ी रो दी । क्योंकि उसे यही लगता था , कि सच जानने के बाद आरव उससे बात नहीं करेगा ।

कोमल बड़ी है, साँसन की डोरी
रूठे से भी टूट जाये
बावन तरह से, जी को मनाया
खोजे अजहूँ तोरी राहें
उन बिन उन्हें मैं पाऊँ
उन बिन उन्हें मैं गरवा लगाऊँ
उन बिन उन्हीं में मोरा जी लगे हाय
बहे नैना भरे मोरे नैना...
क्यूँ ना बोले मोसे मोहन
क्यूँ है रूठे-रूठे मोहन यूँ
कैसे मनाऊँ, हाय कैसे मनाऊँ
उन बिन कटे ना रैना
उन बिन आवे ना इक पल चैना
उन बिन जीयूँ तो कैसे मैं जीयूँ हाय
बहे नैना भरे मोरे नैना, झरे मोरे नैना
मोहे नैना सुने नहीं कहना, बहे मोरे नैना

आरव की इस वक्त जो हालत थी , वो शायद उससे बेहतर कोई नहीं जान सकता था । मानो उसे लग रहा था , जैसे उसने कायरा को पाने से पहले ही खो दिया हो । और इस बात की तकलीफ उसे खुद के न संभलने पर मजबूर कर रही थी । लगा उसे मानो , जैसे दिल के किसी ने एक झटके में सौ टुकड़े कर दिए हों और अब उन्हें जोड़ना नामुमकिन सा हो गया हो । वह बस बेसुध सा , आंखें बंद किए पीछे सोफे से सिर टिकाए बैठा था । कायरा ने अपने आसूं साफ किए और आरव को आवाज़ दी , लेकिन आरव का फिर से कोई रिप्लाई नहीं आया । कायरा ने उसकी तरफ अपना हाथ बढ़ाया , फिर रोक लिया । फिर कुछ पल बाद , उसने उसके सिर पर हाथ फेरा और कहा ।

कायरा - आरव , उठिए । क्या हो गया है आपको , आप ऐसा बिहेव क्यों कर रहे हैं...???

अपने चेहरे पर कायरा का स्पर्श पाकर आरव ने तुरंत आंखें खोल दी और उठकर सीधे बैठ गया । लेकिन उसकी सांसे तेज़ चल रही थी । कायरा ने जब ये महसूस किया , तो उसने आरव के केबिन में ही बने एक छोटे से किचेन रूम में , जिसमें सिर्फ आरव के लिए कुछ हल्का फुल्का खाने पीने के लिए रखा रहता था , वहां गई । ये रूम सिर्फ आरव की सुविधा के अनुसार ही बनाया गया था , क्योंकि वो अक्सर रात में ऑफिस में रुक जाया करता था। अंदर आकर उसने फोन के फ्लैश लाइट की रोशनी चारों तरफ घुमाई , तो उसे एक फ्रिज दिखा । उसने वहां से पानी की बॉटल उठाई और बाहर आ गई । उसने गिलास में पानी लेकर आरव की तरफ बढ़ाया , तो आरव ने नजरें उठाकर उसे देखा , तो कायरा ने नजरें झुका ली और पानी की तरफ इशारा किया । आरव ने पानी ले लिया , शायद उसे इस वक्त इसकी बहुत जरूरत थी । वह एक बार में ही पूरा पानी गटक गया , और खाली गिलास को निहारने लगा । तो कायरा ने उसमें और पानी डाला , तो आरव उसे भी पी गया । शायद बहुत देर से उसका गला सूख रहा था । कायरा ने बॉटल और गिलास साइड में रखा और एक ड्रावर से , फर्स्ट एड बॉक्स निकाला और आरव की तरफ आ गई । उसने आरव का हाथ पकड़ा और बॉक्स को ओपन करने लगी , कि आरव ने अपना हाथ झटक दिया । तो कायरा उसका हाथ दोबारा पकड़ते हुए बोली ।

कायरा - अगर घाव पर मरहम न लगाया गया , तो घाव नासूर हो जायेगा।

आरव ने एक नज़र उसे देखा , फिर मुंह मोड़ लिया । कायरा उसकी पट्टी करने लगी , पर आरव ने कुछ नहीं कहा । वो शायद अपने दिल के दर्द को संभाल ही नहीं पा रहा था । आरव की हथेली , खून से लतपथ थी । एक छोटा सा कांच का टुकड़ा भी घुसा था , जिसे कायरा ने डरते - डरते निकाला । जबकि आरव को उसका एहसास ही नहीं था और न ही उसे हाथ पर अपने जलन या दर्द महसूस हो रही थी । शायद दिल की तकलीफ इन सबसे कहीं ऊपर थी । पट्टी कर कायरा ने बॉक्स एक साइड में रख दिया । तो आरव ने उसकी तरफ देख दिल पर पत्थर रख कहा ।

आरव - मुझे पूरा सच जानना है ।

कायरा ( गहरी सांस लेकर ) - मैं बता दूंगी , पर अभी नहीं । अभी आपको आराम की जरूरत है ।

आरव - मुझे अभी जानना है कायरा ।

ये कहते हुए आरव के शब्दों और आंखों में जो दर्द उभरा था , वो कायरा की नजरों से छुप न सका और बरबस ही एक बार फिर उसकी आखें पनीली हो गईं । वह आरव के सीने से लग गई और आरव समझ न पाया कि ये क्यों हुआ । कायरा उसके गले लगते ही रोने लगी , और आरव ने उसकी तरफ हाथ बढ़ाया पर रुक गया । शायद गुस्सा अब भी बाकी था । पर फिर उसने कायरा की तरफ हाथ बढ़ा ही दिया और उसके बालों में हाथ फेरने लगा । कायरा वैसे ही रोते - रोते अपने बचपन का वो पल याद करते हुए कहने लगी ।

कायरा - बचपन से ही मैं बहुत नटखट थी । हमेशा शैतानी करने वाली और अंश को भी अपनी शैतानी में शामिल करने वाली । लेकिन दादी को मेरा यूं शैतानी करना कभी पसंद नहीं आता था । वे हमेशा मुझे डांट देती थी और एक बार तो उन्होंने मुझपर हाथ भी उठाया था । बचपन से ही मैं पता नहीं क्यों उनकी आखों में खटकती थी। जबकि उनका ये बिहेव हमारे घर में किसी से भी छुपा नहीं था । पर मैं बच्ची थी , तो उनकी डांट सुन दो पल रो लेती और फिर दोबारा शौतानियाँ करने लगती । जिसके लिए मुझे न जाने क्या - क्या नहीं दादी से सुनने को मिलता । जब मैं बहुत छोटी थी आरव , लगभग आठ या नौ साल की । तब एक दिन घर में मम्मी पापा नहीं थे , वे अंश के लिए स्कूल यूनिफार्म खरीदने गए थे और मुझे घर में दादी के भरोसे छोड़ रखा था। तब लगभग दोपहर का समय था । मैं अपने खिलौनों के साथ खेल रही थी , तभी मेरे पास दादी आईं और मेरा हाथ पकड़कर मुझे उठाया और घर से बाहर ले गई । मैंने उनसे पूछा तो उन्होंने मुझे डांट दिया , और मुझे एक पहाड़ी में बने मंदिर में ले गईं । मैं बहुत रो रही थी और आंखें आसुओं से भरी होने के कारण मुझे रास्ता भी साफ दिखाई नहीं दे रहा था । मैं गिरते पड़ते उनके साथ मंदिर पहुंची । वहां पहले कोई नहीं था , एक शक्श के अलावा , शायद वो उस मंदिर के पंडित जी थे । उन्होंने मुझे वहीं खड़ा किया और मुझे वहां से हिलने से भी मना किया । मैं अपने आसूं साफ करते हुए वही खड़ी रही । जब मैंने अपने आसूं साफ कर पलकें उठाई , तो वहां तीन लोग और मुझे दिखे, जिनमें से दो लोग पापा और मम्मा के उम्र के थी और एक शायद बारह साल का लड़का था उनके साथ । दादी उनसे बात करने लगी और फिर जब उनकी बात खत्म हुई , तो उन्होंने मेरा हाथ पकड़ा और उस लड़के के बगल में मुझे खड़ा कर दिया , उसके बाद पता नहीं दादी और वो लोग क्या - क्या बातें कर रहे थे , मुझे तो कुछ समझ ही नहीं आया । और सामने जलती वेदी में आग की लपटों की तपन सीधे मेरे ऊपर पड़ रही थी , जिससे मेरा वहां खड़े होना और बैठना भी मुश्किल हो रहा था । उस वक्त क्या हुआ और क्या - क्या बातें हुई , उस तपन के कारण मैं समझ ही नहीं पाई । कुछ देर बाद मुझे किसी ने वहां से उठाया और अपने सीने से लगा लिया , मैं रोते हुए ही उनके सीने से लग गई । उनके सीने से लगे हुए मुझे ये एहसास हुआ , जैसे मैं अपनी मम्मा के पास हूं । मैंने उनसे छूट कर उन शक्श की तरफ देखा , तो वो सच में मेरी मम्मा थी और फिर जब पटलकर देखा , तो वहां पापा भी खड़े थे और उनकी गोद में अंश था । मम्मा को अपने पास देखकर , मैं दोबारा उनसे लिपट गई और फिर खूब रोई । और रोते - रोते उन्हीं की गोद में सो गई । क्योंकि शायद उस तपन की वजह से मेरा शरीर आग की भट्टी की तरह गर्म था और जैसे ही मुझे उससे दूर किया गया , मुझे राहत मिली । लेकिन मैंने बहुत देर से पानी नहीं पिया था , इस लिए शायद मैं बेहोश हो गई थी । जब मेरी आंख खुली , तो मैं अपने छोटे से कमरे में थी , जो मेरी ही जिद पर खिलौने और मेरी सुविधाओं से लैस कमरा बनाया गया था । मेरी आंख खुलते ही मैं मम्मा - पापा को आवाज देते हुए रूम से बाहर आई । पर वहां का नजारा तो कुछ और ही था । मम्मा - पापा और दादी के बीच बहुत ज्यादा बहस हो रही थी । मैं उनकी तरफ देखते हुए दीवार से लग गई । मम्मा रो रही थी और पापा उन्हें शांत कराते हुए दादी को बहुत कुछ कह रहे थे । बहुत शोर हो रहा था वहां । वो लोग क्यों इतनी बहस बाजी कर रहे थे , नहीं समझ आ रहा था मुझे । जब मुझसे बर्दास्त नहीं हुआ , तो मैं भागकर मम्मा के कमरे में चली गई और जोर से दरवाज़ा बंद कर दिया । जिसकी आवाज़ से तीनों का ध्यान मम्मा पापा के कमरे की ओर गया । शायद वो समझ गए थे , कि ऐसा सिर्फ मैं ही कर सकती हूं । मैं अंदर आकर दरवाजे से लगी घुटनों पे सिर छिपाए फूट - फूट कर रोने लगी । और वहां खिलौने के साथ खेलता चार साल का अंश भी इतनी तेज आवाज से डर गया था । पर जब उसने मुझे देखा , तो अपना खिलौना छोड़ भागकर मेरे पास आया और मुझे अपनी मीठी और मासूम बातों से चुप कराने लगा । उस वक्त उसे देख मुझे और रोना आया और मुझे लगातार बुरा फील हो रहा था उसके लिए, कि छोटा भाई होने के बाद भी वह मुझे चुप कराए जा रहा था । उसका इतना सा दिमाग देख मुझे और खराब लग रहा था , कि मेरे वजह से मेरा भाई अपना खिलौना छोड़कर मुझे चुप करवाने में लगा है । तभी दरवाजे पर तीनों लोगों की दरवाजा खटखटाने की और मुझे पुकारने की आवाज़ आई । सबने खूब खटखटाया , पर मेरी हिम्मत नहीं थी दरवाजा खोलने की और मैं सबसे गुस्सा भी थी , क्योंकि वो सब आपस में फाइट कर रहे थे । तभी दादी की आवाज़ मेरे कानो में पड़ी , जो कह रही थी " कहीं ये मेरे पोते को कुछ कर न दे " । ऐसे शब्द मैंने पहले भी सुने थे और मम्मा से इनका मतलब भी पूछा था , तब उन्होंने बताया था कि , " जब कोई किसी इंसान को भगवान जी के पास भेजना चाहता है , तब वो उस इंसान को चोट पहुंचाता है , जिसकी वजह से वो इंसान हमेशा - हमेशा के लिए सबको छोड़कर भगवान जी के पास चला जाता है , जैसे मेरे दादा जी चले गए , सबको छोड़ कर ऊपर ,भगवान जी के पास " । मम्मा की बात याद आई , तो मैंने अंश को जोर से खुद के गले लगा लिया और उसको प्यार करने लगी , ताकि मेरे भाई को कभी कोई मुझसे दूर न करे और न ही खुद मैं उसे कभी कोई चोट पहुंचाऊं । दादी ने दोबारा ये शब्द दोहराए , तो मुझे गुस्सा आ गया , कि दादी मुझे ऐसा समझती हैं कि मैं अपने ही छोटू से भाई को चोट पहुंचाऊंगी । मैने गुस्से से दरवाज़ा खोल दिया और फिर मैं कुछ कह पाती , उससे पहले ही मम्मा पापा ने मुझे और अंश को गले से लगा लिया । फिर दादी ने मुझे बहुत कुछ सुनाया , जो कि मुझे अच्छे से याद भी नहीं है । हाथ भी उठाया उन्होंने , लेकिन मम्मा पापा ने उन्हें मुझे टच भी नहीं करने दिया । उस दिन के बाद से मेरे और दादी के बीच में बातें कम ही होने लगी । और मेरी शैतानियां भी कम हो गई । दादी से मैं बुरी तरह से डरने लगी , कि कहीं दादी मुझे दोबारा ऐसे ही कहीं न ले जाएं । दादी को मैं देखती , तो कभी मम्मा तो कभी पापा के पीछे छुप जाती और अंश को भी उनसे दूर रखने के लिए ही हमेशा कहती और रोती ।

वक्त करवट लेता गया , मैं और अंश बड़े होते गए । इन सबमें मेरी एक दोस्त , जो कि मुझे बहुत अच्छी लगती थी , वो थी " रूही " , उसे भी भगवान जी ने मुझसे छीन लिया था । फिर पता नहीं क्या हुआ , कि पापा और दादी का इंदौर छोड़ने का फरमान आ गया । तब भी मैं ज्यादा बड़ी नहीं थी , लगभग दस से ग्यारह साल की रही होऊंगी । हम सब अपना घर छोड़कर हमेशा - हमेशा के लिए यहां , मुंबई आ गए...., ' सपनों के शहर ' । यहां आते हुए मैने यहां के बारे में बहुत कुछ मम्मा पापा से पूछा , तब उन्होंने मुझे यहां की सारी अच्छी - अच्छी बातें बताई । हम पहले किराए के घर में रहते थे , फिर पापा की एक अच्छी सी नौकरी लगी और उन्होंने अपना खुद का घर बना लिया । मैं खुश रहने लगी और अंश के साथ खेलती भी । वो भी मेरे साथ हमेशा खुश रहता । लेकिन दादी से डरना मेरा तब भी बंद नहीं हुआ । फिर मुझे वापस से रूही मिल गई और फिर तब तो मेरी खुशी का ठिकाना ही नहीं रहा । ऐसा लगा , जैसे सारी मुराद पूरी हो गई हो मेरी ।

वक्त बदला और हालत भी , लेकिन एक इंसान के प्यार को मैं हमेशा तरसती रही और वो थी "दादी" । जब उन्हें अंश को प्यार करते देखती , तो मुझे खुद के लिए बहुत बुरा फील होता । लेकिन वक्त के साथ - साथ मैंने इन सबसे समझौता कर लिया ।

मैं अब चौदह साल की हो चुकी थी , चीज़ें थोड़ी बहुत समझने और जानने लगी थी । एक दिन मैं डिनर कर अपने कमरे में मैथ्स के इक्वेशंस सॉल्व कर रही थी , कि तभी मेरे रूम में मम्मा आई । उन्हें जब मैंने देखा , तो उनके हाथ में दूध का गिलास था , मेरे लिए । पर जब उनके चेहरे को देखा , तो उदास लगी मम्मा । मैंने उन्हें अपने बेड पर बिठाया और बिना आना - कानी किया सारा दूध फिनिश कर लिया , क्योंकि मम्मा को उदास देख कर उनकी बात न मानना , मतलब कि उन्हें और उदास करना था । खाली भरा गिलास खत्म कर मैने उसे टेबल पर रखा , और मम्मा से उनके उदासी का कारण पूछा , तब उन्होंने कहा.....।

सात साल पहले........,

मालती जी - बेटा तुम्हें याद है, बचपन में तुम्हें तुम्हारी दादी एक पहाड़ी वाले मंदिर लेकर गई थी , इंदौर में ।

कायरा ( याद करे हुए ) - हां.., मम्मा याद हैं मुझे । और तब से ही मैं दादी से बात नहीं करती और उनसे डरती भी हूं ।

मालती जी - मैं उसी बारे में तुम्हें कुछ बताने आई हूं और तुम्हें भविष्य के लिए इत्तिला करने भी ।

कायरा ( असमंजस में ) - ऐसी कौन सी बात है मम्मा , जिसके लिए आपके चेहरे कर इतनी बेचैनी है ...???

मालती जी ( खुद के बहते आसुओं को रोककर ) - बेटा तुम अब इतनी तो समझदार हो गई हो , कि तुम्हें तुम्हारे अतीत में घटी सारी बातें बताने का सही समय आ चुका है ।

कायरा - कैसी बात , कौन सी बात मम्मा ...???

मालती जी - बेटा तुम्हारा बाल विवाह हुआ है...।

कायरा ( उनकी बात सुनकर पीछे सरक गई और हैरानी से उन्हें देखते हुए बोली ) - ये क्या कह रही हैं मम्मा आप...???? बाल विवाह...!!!! जो कि मैंने हिस्ट्री की बुक में बढ़ा था , वो तो कानूनी अपराध है और अब ऐसा कुछ होता भी नहीं है ।

मालती जी - आज से पांच - छः साल पहले ये घटना तुम्हारे साथ घट चुकी है बेटा , जिसे कोई कानून नहीं रोक पाया ।

कायरा - ये कैसी बात कर रही हैं मम्मा आप..??? ये कैसे संभव है...???

मालती जी ( रोते हुए ) - तुम तब बहुत छोटी थी बेटा , तुम्हें तो शायद कुछ याद भी नहीं । तुम्हारी दादी तुम्हें उस पहाड़ी में तुम्हारी उस लड़के से शादी कराने ले गई थीं । उन्होंने तुम्हें बचपन में ही इस घर से विदा करना चाहा था ।

शॉपिंग कर जब हम घर आए थे , तो पड़ोसी से पता चला था, कि मां जी तुम्हें पहाड़ी वाले मंदिर लेकर गई हैं । हम तीनों वहां चले गए । पर जब वहां का नज़ारा देखा , तब तुम्हारे पापा की भौहें गुस्से से तन गई थी और मेरी आखों से आसूं बरबस ही बरस पड़े थे । जब हमने तुम्हें देखा , तब तक तुम्हारे मांग में सिंदूर भरा जा चुका था । हमने इस शादी को मानने से इंकार कर दिया , जिसकी वजह से लड़के वाले बिना तुम्हें मगलसूत्र पहनाए ही वहां से चले गए थे । तुम रोने की वजह से बेहोश हो गई थी , तो हम सब तुम्हें लेकर घर आ गए । घर आकर फिर घर में बहुत क्लेश हुआ । और उन सबमें तुम्हारी दादी का कहना है कि तुम्हारी शादी हो चुकी है , भले ही अधूरी ही सही । मांग में अगर किसी लड़के के द्वार किसी लड़की की मांग में सिंदूर भर दिया जाए , तो वह उसकी ब्याहता कहलाती है । पर तुम्हारे पापा और मैं ये नहीं मानते । क्योंकि एक तो यह कानूनी अपराध है , दूसरा ये शादी तुम्हारे बचपने में हुई है , तब तुम्हें शादी और उससे जुड़ी रस्मों रिवाजों का ज्ञान ही नहीं था । और जब रस्में निभाने वाले को ही उनका ज्ञान न हो , तो वह अमान्य ही मानी जाती है । लेकिन तुम्हारी दादी का कहना है , कि वो लड़का एक दिन जरूर आयेगा और तुम्हें दोबारा शादी कर ले जायेगा । लेकिन हम ऐसा नहीं मानते । और इन सबमें तुम्हारे पापा ने भी एक फैसला उस दिन लिया था , कि तुम्हारी शादी वो अपने पसंद के लड़के से कराएंगे । तुम्हें सारे अधिकार देंगे , हर चीज़ की आजादी देंगे , लेकिन तुम्हारी जिंदगी का ये फैसला वो खुद लेंगे , ताकि इस तरह की कोई गलती दोबारा न दोहराई जाए और तुम्हें ऐसे ही किसी के भी घर न ब्याह दिया जाए ।

कायरा ( अपने बहते आसुओं को साफ कर बोली ) - मेरे साथ इतना कुछ हो गया , और मुझे खबर ही नहीं लगी । खैर मम्मा...., मैं पापा के फैसले में उनके साथ हूं । पापा को मेरी जिंदगी से जुड़े फैसले लेने का पूरा अधिकार है , साथ में आपको भी । आप लोग जो डिसाइड करेंगे , मैं वही करूंगी ।

कायरा की ये बात सुनकर , मालती जी रो दी । और कायरा के कमरे के बाहर खड़े देवेश जी, जो कि कायरा का फैसला सुनने के लिए ही वहां पर न जाने कब से खड़े थे , अपने आंखों में आए आसुओं को साफ कर , मुस्कुराकर प्यार से कायरा को देखते हुए चले गए । आखिरकार उनकी बेटी उन्हें समझती थी , इस लिए वो खुश थे और उन्हें अपनी परवरिश पर फक्र भी हो रहा था । जब मालती जी को आभाष हुआ , कि देवेश जी वहां से चले गए हैं । तो उन्होंने अपने आसूं साफ किए और कायरा का हाथ अपने हाथों में लेकर बोलीं ।

मालती जी - सिर्फ यही कारण नहीं है कायरा , जो तुम्हारे पापा ने तुम्हारी जिंदगी का इतना बड़ा फैसला अपने हाथों में लिया है ।

कायरा - मतलब....!!! और कौन सा कारण हो सकता है , जो पापा ने ये फैसला अपने हाथों करने का निश्चय किया....???

मालती जी - अब जो मैं कहने वाली हूं , वो तुम्हारी उम्र से ज्यादा समझदारी की बात है , जो कि बड़े लोगों को बताई जाती है । पर मैं चाहती हूं , कि तुम ये बात जान जाओ । और कभी अपने पापा का सिर सबके सामने न झुकने दो ।

कायरा - ये कैसी बातें कर रही हैं आप मम्मा...??? भला मैं पापा का सिर क्यों झुकने दूंगी...???

मालती जी - मेरी बात ध्यान से सुनो बेटा । तुम्हारे पापा सालों पहले किसी को दिल से पसंद करते थे । उन्होंने और उस लड़की ने एक दूसरे को अपना सर्वस्व चुन लिया था , लेकिन तुम्हारी दादी को ये सब पसंद नहीं था । तुम्हारे पापा और उन लड़की ने , अपने घर वालों को मनाया , जिसमें लड़की के घर वाले तो मान गए , लेकिन इस खानदान में कभी लव मैरिज नहीं हुई थी , इस लिए तुम्हारी दादी इसके लिए नहीं मानी । धीरे - धीरे वक्त बिता और तुम्हारे पापा तुम्हारी दादी को इस रिश्ते के लिए मनाने में सफल रहे । मां जी मान गई और फिर दोनों परिवारों के बीच इनका रिश्ता तय हुआ । सगाई और शादी की डेट फिक्स हो गई , और फिर वो दिन भी आया जब तुम्हारे पापा और उन लड़की की सगाई थी । सगाई वाले दिन मां जी और तुम्हारे पापा , मेहमानों के साथ लड़की वालों के घर गए । वहां पहुंचकर उनका खूब आदर सत्कार हुआ , लेकिन जब लड़की को सगाई के लिए बुलाने की बारी आई , तब पता चला कि वह लड़की तो वहां है ही नहीं , वह अपनी ही सगाई छोड़ कर भाग गई थी । इस बात का तुम्हारे पापा को गहरा धक्का लगा और वे इससे कभी उबर नहीं पाए । फिर तुम्हारी दादी ने उनके लिए मुझे पसंद किया , और फिर तुम्हारे पापा मुझे शादी कर इस घर में लाए ।

उस दिन जब तुम्हारी शादी की गई थी , वो इसी वजह से तुम्हारी दादी ने की थी । तुम्हारे पापा और तुम्हारी दादी अब तक उस धोखे से उबर नहीं पाए हैं , जो उन्हें उस लड़की पर ट्रस्ट करने के बाद मिला था । तुम भी बड़े होकर उस लड़की की तरह अपने घर वालों का कभी सिर न झुकाओ , इस लिए तुम्हारी दादी ने तुम्हारी बचपन में ही शादी करानी चाही । जब ये कारण तुम्हारे पापा को पता चला , तो उन्होंने इस लिए ही ये फैसला लिया , ताकि तुम कभी उस लड़की की तरह अपने खानदान का और अपनी परवरिश का सिर न झुकाओ । हालांकि तुम्हारे पापा को तुम पर पूरा ट्रस्ट है , कि तुम ऐसा कुछ नहीं करोगी । लेकिन तुम्हारी दादी के डर की बात को दूर करने के लिए , ये फैसला उन्होंने अपने हाथ में लिया । इसके साथ ही वे भी उस धोखे से बहुत ज्यादा आहत थे , इस वजह से उन्होंने तुम्हें सारी आजादी दी , पर तुम्हारी खुद की जिंदगी का ये फैसला करने का अधिकार वे तुम्हें नहीं दे पाए ।

इतना कह मालती जी चुप हों गईं , और कायरा बस बुत बनी उन्हें देख रही थी । उसने मालती जी का खुद के पकड़े हाथ को , अपनी हथेली में थामा और उनके चेहरे को देखते हुए बोली ।

कायरा - मम्मा ....., आप क्या सोचती हैं इस बारे में...??? आप क्या चाहती हैं इस फैसले के बारे में मुझसे...???

मालती जी ( अपने आसुओं को साफकर ) - तुम्हारे पापा मुझसे सात साल बड़े हैं , उन्होंने मुझसे ज्यादा दुनिया देखी है और समझते है दुनिया के कायदे और रीत को । इस लिए जो वे चाहते हैं , मैं उससे ही सहमत हूं । लेकिन मैं ये भी कभी नहीं चाहूंगी , कि तुम्हारी इच्छाओं के साथ कभी भी अन्याय हो । तुम्हारी मर्जी और खुशी भी मेरे लिए उतनी ही मायने रखती है बेटा , जितना कि तुम्हारे पापा का हर फैसला ।

कायरा - आप लोगों ने अगर मेरे लिए कुछ सोचा है , तो वह अच्छा और मेरे भले के लिए ही सोचा होगा । मैं इस खानदान की बेटी हूं और इस खानदान की मान मर्यादा की रक्षा करना मेरा कर्तव्य है और अपने परिवार की इज्जत को दुनिया के सामने नीलाम होने से बचाना मेरा फर्ज़ । मैं कभी आप लोगों के खिलाफ जाकर कोई काम नहीं करूंगी । आप लोग जो कहेंगे , जैसा कहेंगे मैं अब भी और भविष्य में भी वैसा ही करूंगी ।

मालती जी ने उसकी बात सुनकर , उसे गले से लगा लिया और फिर फूट - फूट कर रो दीं । और मन ही मन खुद से बोलीं ।

मालती जी - यही मैं नहीं चाहती थी बेटा , कि तुझसे कोई भी तेरा अधिकार छीने । अभी तो तू छोटी है , पर भविष्य में इस बात का गम तुझे हमेशा रहेगा , कि ये फैसला तुम्हारे हाथों में क्यों नहीं सौंपा गया । और उस वक्त शायद मैं तुम्हारे लिए कुछ नहीं कर पाऊंगी ।

कायरा अपनी मां के गले लगे , उनके मन में चल रहे विचारों से अनजान , मुस्कुरा रही थी । क्योंकि उनसे अपने हिसाब से अपनी जिंदगी की डोर अपने मां बाप के हाथों सौंप , उन्हें सबसे बड़ी खुशी दी थी । भविष्य में आने वाले उतार - चढ़ावों से अनजान वह अपने मां बाप को ये खुशी देकर , खूब खुश थी ।

वर्तमान समय.............,

कायरा रोते हुए आरव से अलग हुई और उसकी तरफ देखकर , रोते हुए और अटक - अटक कर उससे बोली ।

कायरा - मेरा ये नादानी में बात मानने का फैसला , आज मुझपर ही भारी पड़ रहा है आरव । मैं कभी नहीं जानती थी , कि इस वक्त का भी मुझे कभी सामना करना पड़ेगा , जब मुझे अपनों की खुशी के लिए अपनी ही इच्छाओं की बलि देनी होगी । नहीं जानती थी मैं , कि मैं भी अपने और अपनों के फैसले के खिलाफ जाकर कभी किसी को अपने दिल में जगह दूंगी ....। आपको...., आपको अपने दिल में बसाऊंगी । और आपके प्यार में इतनी डूब जाऊंगी , कि आपको देखे बगैर मुझे सुकून ही न मिलेगा । नहीं जानती थी मैं आरव ये सब ...., नहीं जानती थी । अगर पता होता , की भविष्य में ऐसा कुछ भी मेरे साथ होगा , तो मैं कभी उस फैसले को नहीं मानती । और मुझे पता है , मेरे मम्मा पापा मेरी बात का मेरे फैसले का पूरा - पूरा समर्थन करते । मैं आज बहुत पछता रही हूं आरव , बहुत ज्यादा । क्योंकि अब न मैं उनके फैसले को मान पा रही हूं और न ही मानने से इंकार कर पा रही हूं । क्योंकि वो अपनी जगह सही हैं , पर शायद मैं गलत ।

कायरा की बातें सुनकर आरव की आंखों में भी आंसू छलक आए । जिसे उसने तुरंत साफ किया। कायरा की लास्ट लाइन सुनकर उसे बहुत बुरा लगा , कि वह अपने ही प्यार के इस खूबसूरत एहसास को गलत मानती है । उसने कुछ कहने की बजाय , कायरा के आसूं साफ किए और टेबल में रखे जग से गिलास में पानी भरकर , उसे पीने के लिए दिया । कायरा के हाथ कांप रहे थे , वह अच्छे से गिलास भी नहीं थाम पा रही थी । ये देख आरव ने उसे खुद के हाथों में गिलास पकड़कर पानी पिलाया । कायरा को पानी पीने के बाद कुछ बेहतर महसूस हुआ। उसने अब रोना बंद कर दिया और शांत बैठ गई । आरव ने गिलास साइड में रखा और कायरा से कहा ।

आरव - कायरा , तुमने अपनी बात कह दी । और सब जानने के बाद , मुझे भी तुम्हारे लिए बहुत बुरा लगा । काश कि अगर मैं वहां होता , या मेरे पेरेंट्स वहां होते , तो शायद तुम्हारे साथ ऐसा कभी नहीं होने देते । क्योंकि ये बहुत गलत है और कानूनी अपराध भी । इस बाल विवाह संस्कार की वजह से जाने कितनी जिंदगियां बर्बाद हुई हैं और कितनी जिंदगियां घुट - घुटकर जीने पर मजबूर हुईं । लेकिन हम खुशनसीब हैं , कि अब ऐसा कुछ नहीं होता । लेकीन इसका ये मतलब भी नहीं है , कि हम अतीत की घटी घटनाओं को भुला दें और उन पर पर्दा डाल दें । देखो कायरा....., अब जो मैं तुमसे कहूंगा उसे तुम ध्यान से सुनना और फिर खुद से फैसला लेना । क्योंकि तुम्हारा खुश होना इन सबसे ज्यादा जरूरी है । अगर किसी फैसले में तुम खुश नहीं हो , तो वह तुम्हें सिवाय घुटन और बरबादी के कुछ नहीं देगा । इससे न कभी तुम खुश रह पाओगी और न ही तुम्हारे अपने कभी खुश होंगे , जब वो तुम्हें ऐसे घुटते हुए देखेंगे ।

कायरा ( आरव की तरफ देखकर ) - कहिए आरव , आप क्या कहना चाहते हैं ।

आरव ने कायरा के हाथ को छोड़कर , उसके चेहरे को अपने हाथों में थामा और उसकी नजरों में देखते हुए कहा ।

आरव - कायरा..., तुमने प्यार करके कुछ गलत नहीं किया । ये एक जेनुअन सी फीलिंग है , जिससे हर इंसान गुजारता है । अगर इंसान इसे नहीं मानता , तो वह जिंदगी भर अफसोस में जीता है और अगर इसे इंसान मान लेता है , तो वह काफी हद तक अपने आपको जीने की आजादी दे पाता है ।

कायरा ( आरव के हाथ अपने गालों से हटाकर अपने हाथों में थामकर बोली ) - लेकिन आरव ये सब गलत है , शादी से पहले प्यार सही नहीं है ।

आरव - देखो कायरा..., पहले शादियां जल्दी हो जाती थी , इस लिए प्यार शादी के बाद होता था । क्योंकि इंसान को सारी समझ शादी के बाद आती थी , जब वह हमारी उम्र में होता था । लेकिन अब शादियां जल्दी नहीं होती , बल्कि एक सही समय के बाद होती हैं। इस लिए अब शादी से पहले प्यार और फिर शादी होती है । इसका मतलब ये बिलकुल भी नहीं है , कि शादी से पहले प्यार करना गलत है । अगर हम किसी को दिल से प्यार करते हैं और उसे अच्छे से समझते हुए , उसे जीवन भर अपने साथ जीवन साथी के रूप में देखना चाहते हैं , तो इसमें कुछ भी गलत नहीं है । प्यार करना गलत तब होता है कायरा , जब आप जिसे पसंद करते हैं , वह आपको धोखा दे और आपकी जिंदगी को बर्बाद कर दे । तब लोगों के द्वारा प्यार और पसंद को गलत बता दिया जाता है । जबकि गलती इसमें सच्चा प्यार करने वाले की नहीं , बाकी धोखा देने वाले की होती है । लेकिन जिंदगी सच्चे प्यार करने वाले की बर्बाद होती है और फिर प्यार गलत बन जाता है । लेकिन अगर हम किसी अच्छे इंसान को पसंद करते हैं, और प्यार दोनों तरफ से हो , तो प्यार करना बिल्कुल भी गलत नहीं माना जाता । अब लोगों ने इस पर अपने मतलब के हिसाब से, एक बंदिश के रूप में नियम कायदे कानून बना दिए हैं । जिससे लोग बस इन नियम कायदे कानूनों में फंस कर , अपनी खुशियों की बलि दे देते हैं । जबकि प्यार का दूसरा और अच्छा पहलू कोई नहीं समझना चाहता । तुमने प्यार करके या मैंने तुमसे प्यार करके , कोई गलत काम नहीं किया है । लेकिन हां.... अगर हम अपनी फीलिंग्स को नकार देते हैं , तो जरूर हम बाकियों के साथ तो नहीं....., पर खुद के साथ बहुत ज्यादा गलत करते हैं। और खुद की खुशियों को कुर्बान करने का अधिकार हमें खुद भी नहीं दिया है भगवान ने कभी । अब तुम ही बताओ कायरा , जिस फैसले में तुम खुश नहीं हो , जो शादी नाबालिक उम्र में हुई , उसे जबरदस्ती ढोना और सच मानना कहां से सही हुआ..??? तुम ये सब मानकर अपनी जिंदगी की अपनी खुशियों की बलि दिए जा रही हो , जो कि ठीक नहीं है । तुम्हें एक मेच्योर इंसान बन कर , अपनी खुशियों के दरवाजे खोल देना चाहिए , जिससे आगे चलकर तुम खुश हो सको ।

कायरा - लेकिन ये तो खुद की खुशियों के बारे में बस सोचकर स्वार्थी होना हुआ आरव । और मैं ऐसा कर स्वार्थी नहीं बनाना चाहती , अपने घर वालों के फैसले को न मान कर मैं स्वार्थी और मतलबी नहीं कहलाना चाहती आरव ।

आरव ( कसकर उसका थाम कर ) - कायरा....., कायरा....., कायरा.....। अपनी खुशियों के बारे में सोचना स्वार्थी पन या फिर मतलबी पन नहीं होता । सोचो अगर तुमने अपने पिता का फैसला मान भी लिया और तुम मुझे छोड़कर या अपने प्यार को छोड़कर , अपने पिता के पसंद के लड़के से शादी कर लेती हो , तो क्या कभी तुम खुश रह पाओगी...??? क्या तुम कभी अपने प्यार को भूल पाओगी ...???

कायरा ने न में सिर हिलाया , तो आरव ने एक बार फिर उसका चेहरा अपने हाथों में लिया और कहा ।

आरव - तो ये बताओ , जब तुम ही खुश नहीं रहोगी , तो तुम्हारे घर वाले कैसे खुश रहेंगे....??? तुम क्या चाहती हो , कि कल के दिन उन्हें अपने इस फैसले पर पछतावा हो । और साथ में तुम्हारी भी जिंदगी बर्बाद हो । वो इस पछतावे में खुद को झोंक दें और बस गिल्ट में जिएं, कि उन्होंने अपनी बेटी की खुशियों के साथ समझौता कर कितना बड़ा गुनाह किया है...!!??? तुम न चाहते हुए भी किसी ऐसे रिश्ते को ढोना चाहती हो , जिसमें तुम्हारा ही कोई वजूद न बचे .....???? क्या तुम्हें एक बार अपना फ़ैसला आजमाने की आजादी नहीं है , या फिर तुम खुद को ये आजादी देना ही नहीं चाहती ...?? या फिर तुम मुझे इस लायक नहीं समझती , कि मैं तुम्हारे लायक हूं या तुम्हारी पसंद के काबिल हूं...??

कायरा ( उसकी नजरों में देखकर ) - नहीं आरव......, मैं आपको खुद के लायक भी समझती हूं और एक अच्छा इंसान भी । आप जिस भी लड़की के हिस्से में जायेंगे , वह दुनिया की सबसे खुशकिस्मत लड़की होगी । आपमें कोई कमी नहीं है आरव । बस मैं ये नहीं चाहती , कि कल के दिन मेरे इस प्यार की वजह से आपको तकलीफ हो । मैं नहीं चाहती , कि आप मेरी वजह से शर्मिंदा हों । आपकी जिंदगी मेरी वजह से बरबाद हो ।

आरव - तुम्हें प्यार करना मेरी खुशकिस्मती होगी कायरा । और मुझे प्यार कर , क्या तुम वो खुशकीमत लड़की नहीं बनना चाहती , जैसे मैं तुम्हें पसंद कर खुशकिस्मत इंसान बन गया हूं ...????

कायरा ( रोते हुए ) - लेकिन मेरी बरबादी की वजह से आपकी जिंदगी बर्बाद होते मैं नहीं देख सकती ।

आरव - आज तक ऐसा कोई पैदा नहीं हुआ कायरा , जो आरव शर्मा और उसके अपनों को बर्बाद कर सके । और अब से न ही तुम्हारी जिंदगी बर्बाद होगी और न ही मेरी । क्योंकि जब तक मैं जिंदा हूं , तुम्हारे ऊपर एक आंच भी नहीं आने दूंगा , चाहे तुम मेरी फीलिंग्स को एक्सेप्ट करो या न करो । तुम्हारी रक्षा की जिम्मेदारी तो मैं ले चुका हूं , बहुत पहले ही । फिर भले ही तुम मानों या न मानो , मैं ये जिम्मेदारी पूरी शिद्दत से , पूरी जिंदगी निभाऊंगा । जब तक मैं भगवान को प्यारा न हो जाऊं......।

कायरा ने उसकी बात सुनकर उसके होठों पर अपना हाथ रख दिया और न में सिर हिला दिया । तो आरव ने भरी हुई पलकों से उसे देखकर कहा ।

आरव - इतना प्यार है तुम्हें मुझसे , कि तुम मेरे मरने की बात भी नहीं सुन सकती..???

कायरा ( भरी पलकों से हां में सिर हिलाकर बोली ) - हां....., इनफेक्ट इससे भी ज्यादा प्यार हैं मुझे आपसे । मैं सावित्री की तरह आपको यमराज से भी छीनकर अपने पास ले आऊंगी , अगर उन्होंने आपको मुझसे छीनने की कोशिश की तो ।

आरव ( भरी पलकों से फीका मुस्कुराते हुए बोला ) - इतना प्यार....!!!!!! फिर भी मानने से इंकार.....!!!! क्या अब भी तुम मेरा प्यार और अपने प्यार को नहीं मानना चाहती...??? क्या अब भी हमारी फीलिंग्स को दरकिनार कर, अपनी खुशियों से समझौता करना चाहती हो तुम ...??? क्या अब भी हमारी खुशियों की कोई वैल्यू नहीं , तुम्हारे नासमझी में लिए गए फैसले के आगे...????

कायरा ( झट से उसके गले लग गई और बोली ) - मैं अब अपनी नासमझी में की गई गलती को सुधारना चाहती हूं आरव । घर वालों को उनके फैसले पर अफसोस करने का मौका नहीं देना चाहती । मैं भी अब आपके साथ खुश रहना चाहती हूं आरव ।

आरव ( उसे अपनी बाहों में कसकर , भीगी पलकों से मुस्कुराकर बोला ) - तो क्या मैं अब मेरे प्रपोजल के लिए तुम्हारी तरफ से हां समझूं ...???

कायरा ( वैसे ही उसके सीने से लगकर ) - आपने मेरे आगे कोई ऑप्शन ही नहीं छोड़ा है । मेरी परेशानियों को तक अपने सिरे लेने को तैयार हैं , तो भला मैं क्यों आपकी खुशियों की बलि अपने स्वार्थ के लिए दूं । एक अच्छी बेटी बनने के स्वार्थ में मैं ये नहीं भूलना चाहती , कि मुझे एक अच्छी प्रेमिका , एक अच्छी साथी और एक अच्छी हमसफर भी बनना है । भविष्य में अपने मां बाप को मेरे लिए रोने पर मजबूर नही करना चाहती । और मुझे पूरा ट्रस्ट हैं , पापा मुझे , मेरे प्यार और मेरी खुशी को समझेंगे । क्योंकि मुझे आपसे अच्छा जीवन साथी कभी नहीं मिल सकता । और मैं आपको पाकर बहुत खुश हूं ।

आरव ( कायरा के बालों को प्यार से सहलाकर , आखों से रिस रहे आसुओं के साथ मुस्कुराकर बोला ) - मैं भी तुम्हें पाकर बहुत खुश हूं कायरा । और मैं अब तुम्हें कभी नहीं खोना चाहता , किसी भी वजह से तुमसे दूर नहीं होना चाहता अब मैं ।

कायरा ( भरी पलकों से आरव के पीठ पर अपने हाथ कसते हुए बोली ) - मैं भी अब आपसे जुदा नहीं होना चाहती आरव । हमारे प्यार के इस खूबसूरत एहसास को मैं जीवंत रखना चाहती हूं और इसमें आपके साथ सुकून का अनुभव करना चाहती हूं । आपसे अब दूर मैं न ही कभी जाऊंगी और न ही कभी आपको जाने दूंगी , ये वादा है मेरा आपसे । जो भी, जैसी भी सिचुएशन आएंगी , हम दोनों मिलकर हैंडल करेंगे । पर कभी एक दूसरे से जुदा नहीं होंगे , कभी भी नहीं .........।

आरव - मैं भी तुमसे वादा करता हूं , कि मैं तुम्हारी बातों पर अमल करूंगा और तुम्हारी खुशियों की जिम्मेदारी अब मैं उठाऊंगा । ( कायरा को बाहों में और कसते हुए ) आई लव यूं कायरा...., आई रियली ...., रियली लव यूं ।

कायरा ने उसकी बात सुनकर उसे और कस लिया और फिर मुस्कुराकर आसुओं के साथ कहा ।

कायरा - मैं भी आपसे बहुत प्यार करती हूं आरव , अपनी जान से भी ज्यादा ।

कायरा की बात सुनकर आरव के चेहरे पर खुशी और सुकून के भाव उमड़ आए और दोनों ही कुछ देर तक एक दूसरे को कस कर गले लगाए वैसे ही सोफे पर बैठे रहे .......।

क्रमशः

तो खुश हो जाइए आप सब । आप सबकी मुराद आज पूरी हो गई है 🤗🤗🤗🤗 ।

आज के इस भाग में लिखे गाने के शब्दों को कहानी के हिसाब से अर्जेस्ट किया गया है । अगर आप सुनना चाहें , तो उसे नेट पर सर्च कर सुन सकते हैं।

और हां....., कहानी का भाग बड़ा होने के साथ - साथ आप सबकी दोनों मनोकामनाएं भी पूरी हुई हैं , कायरा का सच और इन दोनों का इजहार - ए - इश्क़ के मुकम्मल होने की कामना । तो इस लिए मुझे इस भाग में कम से कम 30 समीक्षाएं और कम से कम 100 रेटिंग चाहिए। और हां....., आज की समिक्षाओं में नाइस , वेल डन , बेहतरीन ......, कहने का मतलब है एक दो शब्द लिखकर तारीफ करने से काम नहीं चलेगा , बल्कि आज मुझे भर - भर कर समीक्षाएं चाहिए । और समीक्षा की उपयोगिता कितनी ज्यादा होती है , ये तो आप सब जानते ही हैं।

So enjoy this part and give fabulous review 😊😊😊😊😊😊😊

धन्यवाद 🙏🏻😊


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