इन्तजार एक हद तक (महामारी) - 13 (महामारी) in Hindi Social Stories by RACHNA ROY books and stories Free | इन्तजार एक हद तक (महामारी) - 13 (महामारी)

इन्तजार एक हद तक (महामारी) - 13 (महामारी)



रमेश ने कहा अच्छा बाबू लाल तुम जाओगे तो?
बाबूलाल ने कहा हां सहाब ।।

फिर आफिस के बाद रमेश घर लौट आए और देखा कि सभी बच्चे एक साथ पढ़ाई कर रहे थे। ये देख रमेश बहुत खुश हो कर बोलें अरे वाह बच्चों क्या बात है।रवि बोला हां चाचू चाची ने हमेशा हमें ये भी सिखाया गांव में भी हमलोग दो घंटा पढ़ने बैठ जाते थे। उर्मी चाची हमें पढ़ाई-लिखाई करवाती थी। रमेश की आंखें भर आईं ये सब सुन कर। फिर वो अन्दर कमरे में जाकर तैयार हो कर बैठक में बैठ गए। चन्दू ने आकर चाय और नाश्ता दिया।
और सब कुछ बता दिया कि कैसा रहा दिन परी बिटिया के साथ। रमेश ने कहा क्या परेशान किया था। चन्दू ने कहा ना बेटा,परी तो रानी बिटिया है।
फिर सभी मिलकर रात का खाना खा कर सो गए। आधी रात परी फिर से उठ कर रोने लगी, रमेश भी उठ कर परी को गोद ले लिया और फिर लोरी सुनाने लगा और फिर परी हो गई ‌। रमेश मन में सोचा कि हे भगवान किस बात की सजा मिल रही है उर्मी तुम कहां चली गई?
फिर देखते देखते सुबह हो गई।
बच्चे सभी तैयार हो कर स्कूल चले गए। फिर रमेश भी तैयार हो कर नाश्ता करके आफिस निकलने लगें तो परी ने कहा बाबा मुझे भी स्कूल जाना है। रमेश ने ये सुनकर कहा हां परी जरूर।
रमेश आफिस पहुंच कर ही अमित को सारी बात बताई तो अमित ने कहा हां ज़रूर उसको रवि और रत्ना के स्कूल में दाखिला करवा दो। रमेश ने कहा हां ठीक है। फिर लंच ब्रेक में रमेश ने रत्ना के स्कूल प्रिंसिपल को फोन किया और सारी बात बताई तो प्रिंसिपल ने कहा कि आप परी को लेकर शनिवार को आईये।
फिर लंच खत्म करते ही अमित को सारी बात बताई। अमित ने कहा हां, और सन्डे को तो जाना है वो बाबा के पास।
रमेश ने कहा हां बाबूलाल ने बोला है कि आश्रम सभी को लेकर जाना होगा। और परिवार के सदस्यों की तस्वीर भी।
फिर शाम को रमेश घर वापस आ गए और वो ही देखे जैसे सोचे थे तीनों भाई बहन पढ़ाई कर रहे थे। रमेश फे्श होने चले गए और फिर चाय नाश्ता करने लगे। चन्दू ने दिनचर्या बताया। फिर सभी एक साथ बैठ कर टीवी देखने लगे और तभी रमेश ने परी की एडमिशन की बात बताई। ये सुनकर सभी खुश हो गए और जब ये पता चला कि परी का एडमिशन उनके ही स्कूल में होगा ये सुनकर रत्ना और रवि बहुत खुश हो गए।रवि ने कहा चाचू आप बिल्कुल चिंता मत करिए हम परी का विशेष ख्याल रखेंगे।
रमेश ने कहा हां, मुझे पता है बच्चों। और हां एक बात और सन्डे को हमें सुबह-सुबह आश्रम के लिए निकलना होगा सभी को।
चन्दू ने कहा हां ठीक है मैं सबको जल्दी तैयार कर दूंगा।
सभी खाना खाने के बाद अपने कमरे में चले गए।
रमेश ने कहा चन्दू वो जो दिवाल पर तस्वीर है उसको भी लेकर जाना होगा।

हां जी ज़रूर।
सभी सो गए। और फिर आधी रात को परी अम्मा, अम्मा कह कर रोने लगी।
और फिर रमेश उठकर बैठ गए और फिर बोलें कि क्या बात है परी को किसी की याद आ गई।परी ने कहा हां बाबा मुझे अम्मा चाहिए।
रमेश एकदम मायुस हो कर परी को सुलाने लगा।
अगले दिन सुबह रत्ना रवि के स्कूल की छुट्टी थी क्योंकि शनिवार था।
रमेश जल्दी से तैयार हो कर परी को लेकर स्कूल पहुंच गए और फिर स्कूल के प्रिंसिपल से मिलने पहुंचे।
प्रिंसिपल साहिबा ने परी को अपने पास बुलाया और कुछ प्रश्न पुछा।परी ने सटिक उत्तर दिया तो प्रिंसिपल साहिबा परी के जबाव से प्रभावित होकर बोली कि हम परी का एडमिशन जरूर लेगे। आप काउंटर पर जाकर फार्म भर कर जमा कर दें।
रमेश बहुत ही खुश हो कर बोला कि मैडम आपका धन्यवाद।
फिर रमेश परी को लेकर काउंटर पर जाकर फार्म भर दिया और साथ ही फीस जमा कर दिया और फिर परी को स्कूल से ही किताब,कापी सब कुछ मिल गया।
फिर रमेश परी को लेकर घर लौट आए।

रमेश ने आ कर कहा कि चन्दू आज अम्मा जी के स्वाद का बेंसन का लड्डू खाने का मन है। चन्दू ने कहा हां ठीक है मैं तैयार करता हूं।
रवि और रत्ना परी को लेकर खेलने लगें।
फिर अमित भी आ गए और फिर सभी साथ में मिलकर खाना खाने लगे।
रमेश बोला देखो बच्चों कल हमें निकलना होगा सभी जल्दी से तैयार हो जाना हां।
रत्ना बोली हां चाचू हमें कल आश्रम जाना होगा।
दूसरे दिन सुबह जल्दी उठकर तैयार हो कर निकल गए। नीचे अमित भी आ गए और फिर रमेश ने गाड़ी निकाली और सभी लोग बैठ गए।
रमेश ने कहा चलो पहले बाबू लाल को लेंगे उसके बाद कचोड़ी, जलेबी और चाय । अमित ने कहा हां वो भी देसी घी का।
रत्ना, रवि परी को लेकर बैठें थे। 
चन्दू भी तस्वीर को लेकर बैठा था। फिर कुछ देर बाद बाबू लाल भी अपने घर के बाहर खड़ा मिल गया। रमेश की गाड़ी बहुत ही बड़ी थी तो जगह की कमी नहीं थी। रमेश का मन भी बड़ा था हमेशा सोचता था कि परिवार के लोगों को एक साथ घुमाने ले जाएगा इसी सोच के साथ ही उसने बड़ी गाड़ी ही ख़रीदीं थी।
बाबूलाल भी पीछे बैठ गया। फिर गाड़ी चल पड़ी और फिर सीधे हरीश जी की दुकान पर रुकीं। जहां पर अमित और रमेश जाकर सबके लिए नाश्ता लेकर आ गए। सभी ने गाड़ी में बैठ कर ही नाश्ता कर लिया। रत्ना ने परी को खिला दिया। रमेश, अमित, बाबूलाल, चन्दू ने चाय भी पी लिया।
और फिर निकल गए।दोपहर करीब दो बजे तक ये लोग आश्रम पहुंचे। सबसे पहले बाबू लाल जा कर वहां पर पुछताछ किया और फिर सभी को लेकर अन्दर पहुंच गए।
पहले एक कमरे में जाकर बैठ गए। जगह काफी शांत और स्थिर था। ज्यादा चहल-पहल नहीं था।
फिर कुछ देर बाद सभी को बुलाया गया। रमेश थोड़ा सा घबरा गया था। रत्ना रवि परी सभी को एक जगह बैठने को कहा गया।
रमेश, अमित और चन्दू आगे बढ़ कर बैठ गए। बाबूलाल ने धीरे से उस बाबा को कहा तो बाबा ने इशारे से रमेश को आगे आने को कहा। रमेश आगे बढ़ कर बैठ गया। फिर बाबा ने हाथ ऊपर किया और फिर कहा कि अब मुझे बताओ। रमेश ने पूरी बात बताई और फिर जैसे ही बाबा ने तस्वीर मांगी तो रमेश ने तस्वीर आगे बढ़ा दिया।
बाबा ने तस्वीर ले लिया और फिर अच्छी तरह से देखने लगें।
फिर बाबा ने कहा कि अपनी बेटी को बुला लो। अमित जल्दी से परी को गोद ले कर आया। बाबा ने परी से पूछा कि इस तस्वीर में तुम्हारी मां कहां है?परी ने अपनी नन्ही सी उंगली से बताया कि ये है। अब फिर बाबा ने पूछा कि ये इस समय कहां है?परी ने कहा जोधपुर में है। रमेश ये सुनकर चौंक गए और बाकी सब लोग भी सुन्न हो गए।
बाबा ने कहा कि रमेश तुम्हारी पत्नी अभी तक जिंदा है और तुम्हारा आसरा देख रही है।शायद तुम्हारी अम्मा जी ये बताने की कोशिश कर रही हैं उसी वजह से उनकी आत्मा अभी तक भटक रही हैं जब तक उर्मी बहु के हाथों उनको जल नहीं मिलेगा तब तक शान्ति नहीं मिलेगी। रमेश ने सुनकर कहा कि बाबा अब मैं कहां ढुढु उसको। बाबा ने कहा अभी रुको मैं कुछ करता हूं।


क्रमशः

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