बिज़नेस टाइकून की लव स्टोरी - 8 in Hindi Love Stories by Missamittal books and stories Free | बिज़नेस टाइकून की लव स्टोरी - 8

बिज़नेस टाइकून की लव स्टोरी - 8

कायरा वैसे गुस्से सुभाव की थी
लेकिन वह दिल की अच्छी थी हमेशा लोगों की मदद करती रहती थी
कभी-कभी लोगों के सामने से कभी उनके पीछे से )
देखो बेटा, डरो मत मैं हूं ना, यहां पर तुम्हें कोई कुछ नहीं कहेगा,
कायरा ने उस लड़के को बड़े प्यार से हाथों में हाथ देते हुए कहा,
देखो चुप हो जाओ रो मत,
कायरा उस लड़के के आंखों से आंसू पहुंचती है,
उस लड़के की चेहरे पर अलग ही तेज था वह कुछ बोलने को हुआ कि
तभी ऑफिस स्टाफ के 1 मेंबर्स ने बोलना शुरू किया
अरे मैडम आप क्यों इस चोर के मुंह लग रही है, खामखा अपना टाइम वेस्ट कर रही है,आपको तो पता ही है यह अनाथो का कुछ नहीं हो सकता,
आप जितना इसे प्यार करेंगे उतना ही आपको परेशान करेगा,
अरे मैडम ,अभी इसलिए इसी उम्र में 2 बार चोरी कर ली है आगे जाकर पता नहीं क्या-क्या करेगा,
वह कुछ आगे बोल पाता कि
कायरा ने गुस्से से उसकी तरफ देखते हुए हैं कहा" किसी बच्चे के साथ कैसे बात करते हैं,
आपको अकल नहीं है!
यह क्या चोर चोर लगा रखा है""
आगे से ध्यान रखना ,अगली बार कुछ बोलने से पहले याद रखना कि मैं कौन हूं ,समझे मैं तुम्हें 2 मिनट में यहां से भगा सकती हूं,
कायरा अभी कुछ बोलने को हुई कि
उसे महसूस हुआ कि उस लड़के ने उसकी  कमीज को जोर से पकड़ लिया है, 
कायरा ने उस लड़के की तरफ देखा जो अभी भी डरा हुआ था =
कायरा ने सभी लोगों को कमरे के बाहर जाने के लिए बोल दिया और फिर
उस लड़के के चेहरे पर हाथ रख कर धीरे से बोलने लगी
"बेटा तुम क्यों डर रहे हो देखो मैं हूं ना,"
तुम्हें कोई कुछ नहीं कहेगा,
इतना बोलता ही उसने उस लड़के का हाथ अपने हाथ में लिया और बाहर की तरफ चलने लगी,
कायरा ने उस लड़के से बातें करना शुरू करी
अच्छा मेरा नाम कायरा है तुम्हारा!
उस लड़के ने धीरे से कहा पवन,
अरे वाह पवन तो बहुत अच्छा नाम है,
इतना सुनते ही उस लड़के के चेहरे पर थोड़ी सी मुस्कुराहट आ गई,
कायरा को यह देख कर थोड़ा सुकून मिला,
अगर तुम्हारा नाम पवन है तो
तुम सबको बेबी बेबी क्यों बोल रहे थे?
कि तुम्हारा नाम बेबी है!

जब कायरा ने पवन से पूछा अगर तुम्हारा नाम पवन है तो तुम फिर बेबी बेबी  क्यों कह रहे थे
इस पर पवन ने कोई जवाब नहीं दिया वह चुपचाप चलने लगा,
कायरा ने फिर बात बदलते हुए कहा" अच्छा यह बताओ कहां के रहने वाले हो तुम",
"पता नहीं"
अच्छा,
कायरा ने कहा," अच्छा सुनो ,मुझे भूख लग रही है, तुम कुछ खाओगे",
उस लड़के ने धीरे से गर्दन" हां"' में हिला दी ,
चलो ठीक है,मैं कुछ खाने को मंगाती हूं ,
इतना कहते ही कायदा ने मुस्कुराकर उस लड़के की तरफ देखते हुए अपने सर्वेंट को इशारा किया और कुछ खाने को लाने की कहा,
अच्छा तुम्हें खाने में क्या-क्या पसंद है?
इतना सुनते ही उस लड़के की आंखें उदास हो गई.
उसने कहा जिससे भूख मिट जाए वही
वही पसंद है,
कायरा को इस जवाब से थोड़ी हैरानी हुई, वह कुछ बोल पाती कि तभी सर्वेंट तीन-चार बड़े बड़े टिफन लेकर आ गया,
कायरा ने चारों तरफ नजर घुमाई और सामने एक छोटा सा टेबल दिखा,
कायरा ने पवन का हाथ पकड़ा और टेबल पर जाकर बैठ गई ,
ड्राइवर ने सारा खाना टेबल पर लगा दिया खाना देखकर उस लड़के की आंखों में आंसू आ गए,
कायरा ने उसके आंसू पहुंचते हुए कहा," क्या हुआ खाना तुम्हें पसंद नहीं आया, तो मैं कुछ और चाहिए?
नहीं, बहुत महीनों के बाद इतना सारा खाना देखने को मिला है,
इतना बोलते ही हो रोने लग गया,
कायरा ने उसे गले से लगा लिया और
उसे शांत करने लगी,
थोड़ी देर बाद कायरा ने बोला"
तुम्हें खाने की चोरी की थी?
पवन ने धीरे से गर्दन  हाँ में हिला दी,
इतना सुनते ही कायरा के मन में एक टीस सी उठी,
उसकी आंखों से आंसू आ गए,उसने कहा लेकिन क्यों ??पवन ने रोते हुए बोलना शुरू किया,
वह 5 दिन से भूखा था, मैं एक दुकान पर एक बिस्कुट का पैकेट देखा तो मैंने उसे उठा लिया और भाग गया,
उस आदमी ने पुलिस को फोन करके बता दिया तो पुलिस वाले अंकल ने मुझे पकड़ लिया,
इतना बोलते ही उस लड़के ने फिर से रोना शुरू कर दिया,
कायरा ने उस को तसल्ली देते हुए कहा "लेकिन फिर तुमने यहां पर चोरी क्यों कि ?
यह खाना तो मिलता है फिर ,
यहां के अंकल ने मुझे खाना तो दिया था, लेकिन मेरा पेट नहीं भरा, जब मैंने उसे दूसरी बार मांगा तो उन्होंने मुझे बोला तेरे मां-बाप तेरे लिए खाना छोड़ कर नहीं गई ,
जो तुझे दूसरी बार भी खाना दूं ,
तू अनाथ है जितना मिलता है उतना खा ले ,
मैं बहुत दिनों से भूखा था तो रात को मैं चुपके से किचन में जाकर खाना ढूंढने लगा ,
तभी   security वाले ने मुझे देख लिया और उसने मुझे पकड़ लिया ,
वह लड़का के कुछ बोल पाता के कायरा NE उसको जोर से गले लगा लिया और उसकी आंखों झरने जैसी बहने लगी और खुद को शांत करते  बोलने लगी,
पवन अच्छा, चुप हो जाओ.
देखो मैं हूं ना जितना खाना है खा लो, उसने खाने की तरफ इशारा करते हुए कहा,
कायरा ने रोटी का एक टुकड़ा तोड़कर उसके मुंह में डाल दिया ,
पवन ने भी ऐसा ही किया,
कायरा के मन में जैसे शांति और सुकून आ गया,
बहुत सालों के बाद किसी ने उसको अपने हाथों से खाना खिलाया था,
उसके दिल में पवन के लिए अलग ही जगह बन गई थी,
पवन और कायरा खाना खाने लग गए,
कायरा धीरे-धीरे खा रही थी और पवन वो तो जल्दी जल्दी खा रहा था,
कायरा के चेहरे पर सुकून था,
शायद आज उससे एहसास हो गया था, कि सबसे बड़ी खुशी दूसरों को खुश रखने या उनकी मदद करने में मिलती है,
खाना खाते खाते कायरा को याद आया कि पवन ने उसको क्या बोला था कि किसी ने उसको गलत बोला है, तो उसने धीरे से अपने ड्राइवर को इशारा करके कुछ कहा और पवन को खाना खाते हुए देखने लगी,
थोड़ी देर तक खाना खाने के बाद पवन ने कायरा को कहा "क्या आप मुझसे रोज में ले आ सकती है?
कान्हा ने ना में गर्दन हिला दी ,
इशारा पाते ही पवन फिर से उदास हो गया,
कायरा ने उसको गले लगाते हुए बोला" पवन मैं रोज-रोज तो तुमसे मिलने नहीं आ सकती, लेकिन एक काम कर सकते हैं,
तुम मानोगे मेरी बात,,
इतना सुनते ही पवन की आंखों में चमक आ गई,उसने जल्दी से गर्दन हां मिला दी
अच्छा ठीक है चलो मैं पहले कुछ क्वेश्चन पूछूंगी
ठीक है तुम उसके सही सही जवाब देना फिर मैं डिसाइड करूंगी कि तुमसे मैं मिलने आउंगी या नहीं
इतना सुनते ही पवन का चेहरा थोड़ा मुरझा गया फिर उसने हां में गर्दन हिला दी
अच्छा यह बताओ तुम्हारे मम्मी पापा कहां पर है
मम्मी पापा पता नहीं जब से छोटा था तब से अकेला ही हूं अच्छा

फिर उसकी आंखों में चमक सी आ गई शायद उसे कुछ याद आ गया उसने बोलना शुरू किया पता है आपको
एक बार में जब रेल की पटरी पर प्लास्टिक का सामान इकट्ठा कर रहा था तो मुझे वहां पर एक आंटी मिली उनके हाथ में एक छोटी सी बच्ची थी वह रो रही थी
कायरा  पवन की बातों को बड़े गौर से सुन रही थी बात करते-करते उसके चेहरे पर अलग ही खुशी अलग सा तेज आ गया था कायरा उसे गौर से देख रहे थी,
तो  उसने बात जारी रखते हुए कहा मै उस लड़की के पास गया और उससे ले लिया और उसे खिलाने ल लग गया वह मेरे हाथों में आते ही चुप हो गई मैंने आंटी से उसका नाम पूछा तो आंटी ने कहा कि उसका भी उसने नाम नहीं रखा है तो फिर मैंने आटी  से पूछा क्या मैं इसका नाम रख सकता हूं तो उन्होंने हां में गर्दन हिला दी
तो मैंने उसका नाम बेबी रखा बहुत अच्छी थी वह वह मेरे साथ खेलने लगी थोड़ी देर खेलने के बाद आंटी ने उसे वापस ले लिया फिर वह अपने रास्ते चलने लगी मैं भी वहां से निकल गया
कई दिन हम ऐसे ही मिलते रहे,
फिर एक दिन मैं उससे मिलने के बाद वापस जाने लगा कि अभी थोड़ी दूर ही पहुंचा था कि मुझे आंटी की चीख सुनाई थी तो मैंने पीछे मुड़ कर देखा कि
आंटी और उस बेबी को ट्रेन ने टक्कर मार दी,
मैं भागकर उनके पास गया तो देखा वह दोनों मर चुकी थी इतना कहते-कहते उसकी आंखों से बेतहाशा आंसू निकलने लगे
इधर कायरा मन भी बहुत दुखी  हो गई
उसने उसे जोर से गले लगा लिया अब दोनों ही रो रहे थे थोड़ी देर होने के बाद कायरा शांत हुई तो उसने कहा पवन क्या तुम मेरे साथ चलोगे
उसको तो यकीन ही नहीं हुआ
उसने  कहना शुरू किया लेकिन आप और मैं वह अभी कुछ बोल पाता कि
कायरा ने कहा "
देखो मैं भी अकेली हूं मेरी मम्मा नहीं है ना पापा है घर में कोई नहीं है क्या तुम मेरे साथ चलोगे?
उसने  कायरा   के चेहरे को गौर से देखा और न जाने उसमें क्या कशिश थी कि उसने गर्दन हां में हिला दी,
कायरा ने कहा"
तो फिर  आज से तुम मेरे साथ रहोगे ठीक है,लेकिन उससे पहले मुझे कुछ काम करना है ,
तुम थोड़ी देर यहीं बैठो मैं अभी आती हूं इतना कहते ही का कायरा अनाथालय के ऑफिस में चली गई ,
वहां पर उसने सभी स्टाफ को बहुत जोर से डाटा
उस आदमी को तो थप्पड़ भी मार दिया जिसने पवन को भला बुरा कहा था उसने अनाथालय के मुखिया से कहा कि मैं पवन को अडॉप्ट करना चाहती हूं,
उसके सारी जिम्मेवारी  मेरे पर है
थोड़ी देर बाद कायरा ने अपने वकील को फोन करके सारी फॉर्मेलिटी पूरी कर ली और  पवन के पास चली गई उसने पवन को बताया कि अब वह कानूनी रूप से उसके पास ही रहेगा
इतना सुनते ही पवन तो जैसे खुशी के मारे उछल लग गया तो पवन ने कहा क्या मैं आपको बेबी बुला सकता हूं क्योंकि आप भी उस बेबी की तरह ही बहुत अच्छी हो
इतना सुनते ही कायरा ने जोर से गर्दन हां में हिला दी
और पवन को सीने से लगा लिया ,
..........................
दोस्तों जरूरी नहीं है कि रिश्ता सिर्फ खून का ही हो सकता है
कई बार हम किसी ऐसे इंसान के साथ मिल जाते हैं जिसका दर्द जिसका दुख हमारे जैसा ही होता है अगर हम उस इंसान का दुख कम करने की मदद करते हैं तो कहीं ना कहीं हमको भी कुछ स्कून मिलता है
.........................
ऐसा ही कायरा ने किया था क्योंकि वह भी अकेली थी और पवन भी अकेला था
उसको कहीं ना कहीं उसमें अपनी छवि देखी थी कि कैसे वह दुखी और परेशान था इसी वजह से कायरा ने पवन को अडॉप्ट कर लिया था
उसके सारी जिम्मेवारी उसका खाना-पीना पढ़ाई सभी जिम्मेवारी उठा ली थी उसको सुकून मिला था
कायरा उसे अपने साथ घर ले आई
उसके बाद से ही उसने पवन का ख्याल रखना शुरू किया  पवन उससे बहुत प्यार करता था,

इतना याद करते करते ही कायरा को कुछ और याद आया उसने झट से घर का नंबर मिलाया तो फोन
पवन ने उठाया
पवन तुम तो hostelमें थे तो तुम कब आए
कायरा बेबी,
जब आप रात को सो रही थी,तो मैं रात को आया था
आप गहरी नींद में थी इसलिए मैंने आपको नहीं उठाया अच्छा लेकिन,
यह गलत बात है पवन,
तुम को मुझे बताना चाहिए था कि
तुम आने वाले हो मैं ड्राइवर को भेज देती
नहीं बेबी,आपको मैं परेशान नहीं करना चाहता था इसलिए मैं खुद ही आ गया,
अच्छा ठीक है खाना खा लिया,
हां बेबी खा लिया,
अभी खाकर हटा हूं ,
अच्छा ठीक है, मैं अभी बस ऑफिस पहुंचने वाली हूं अपना ख्याल रखना  अच्छा,
बाय
बाय बेबी,
थोड़ी देर बाद कायरा ऑफिस के सामने थी

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