Vo Pehli Baarish - 1 in Hindi Novel Episodes by Daanu books and stories PDF | वो पहली बारिश - भाग 1

वो पहली बारिश - भाग 1

"खेल की दूसरी पारी वैसे तो शुरू हो गई है, रवि, पर जिस तरह बादल दिख रहे है, ऐसी संभावना की बारिश जल्दी ही इस खेल में खनन डाल सकती है, अब देखना दिलचस्प होगा कि इस पारी की शुरुआत कैसी रहती है, क्योंकि आगे सब उसी से तय होगा।"

ब्लू हार्ट कैफ़े के टीवी पे चलती इस कमेंट्री को सुनती निया, गोल लंबा सा चेहरा, काले बाल जो ना तो ज्यादा छोटे थे और ना ही ज्यादा लंबे और वहीं गिसा पीटा नॉर्मल वाला हेयरकट। रंग गेहुआ, काली आँखें, और उपर से उनकी शोभा बढ़ाता हुआ काजल लगाए बैठी वो, कभी अपनी घड़ी को देखती और कभी कैफ़े के दरवाज़े को। वो घड़ी जो अंकित ने बहुत जिद्द करके उसे दिलाई थी और वो उसे मुश्किल से दो तीन बार ही पहन पाई थी। शायद आज भी बस इसी ख्याल से पहन करके आई थी की अंकित और उसके बीच का जो समय थम सा गया है, वो शायद इस घड़ी को देखकर फिर से चलने लग जाए।

जब बहुत देर इंतज़ार के बाद भी अंकित नहीं आया तो निया परेशान हो गयी। आखिर होती भी क्यों ना अंकित ने पिछले दो दिनों से उसका कोई फ़ोन नहीं उठाया था और आज भी बस उसके मैसेज का रिप्लाई ओके करके छोड़ दिया था।

“क्या ओके का मतलब बदल कर ना हो गया है? अभी तक आया क्यों नहीं वो, एक छोटा सा ही तो झगड़ा हुआ था हमारे बीच, और वो है की यूँ सड़ गया", निया खुद से बोली । यूं तो निया अपने ना घबराने वाले अंदाज के लिए जानी जाती थी, पर जब नाम अंकित का आता था तो वो ऐसी हो जाती थी जैसे बच्चे सुई लगाने की धमकी पे हो जाते है। और होती भी क्यों ना अंकित निया का पहला प्यार जो था।

वो कुछ सोच ही रही होती है की इतने में ही मैरून शर्ट और ब्लू जीन्स पहने गेहूए रंग वाला कद काठी में लंबा लड़का, जिसने अपने छोटे बाल बड़े ही प्यार से ऊपर की और करे हुए थे, और उनसे भी ज्यादा जो ध्यान खींच रहे थे वो थी उसकी छोटी दाढ़ी और बड़ी सी नाक पे चढ़ा नीला चश्मा, जिनके साथ उसकी हल्की डिंपल वाली मुस्कराहट और प्यारी लगती, निया की तरफ बढ़ता है। निया उसे देखते ही जैसे ख़ुशी से फुले नहीं समा पाती। उसी की तरह निया ने भी मैरून टी-शर्ट और ब्लू जीन्स का कॉम्बो पहना हुआ था ।


“देखा इसे कहते है प्यार, मैंने तुम्हें बताया भी नहीं और फिर भी तुम बिलकुल मेरे जैसे लगते हुए आ गए”, निया अंकित की तरफ मुस्कुरा कर बढ़ते हुए बोली।



निया को एक जैसे कपडे पहन कर अंकित के साथ फोटो खिचवाना बहुत पसंद था। उसके फ़ोन में ऐसी हज़ारों तस्वीरें थी और निया जब मन ही मन ये तय कर रही होती है की वो अगली फोटो कहाँ खिचवाये तभी अंकित उसे टोकते हुए बोला,


“निया मुझे तुमसे बहुत जरुरी बात करनी है।"



“हाँ,मुझे भी", निया बहुत प्यार से जवाब देते हुए कहती है। “पर पहले कॉफ़ी ले आए?", अंकित के कुछ भी कहने से पहले निया बोलती है।



दोनों जब अपनी पसंद की कॉफ़ी लेकर आते है, तो निया अंकित की कॉफी के कप से अपने कप को धीरे से टकराते हुए बोली,


“पचासवीं कॉफ़ी है यह हमारी। 50th कॉफ़ी मुबराक हो।”



"पर निया… "अंकित ने परेशान सा चेहरा बनाते हुए बोला। “देखो तुम मेरी बात का बुरा मत लगाना, और ना ही ये सोचना की इसमें तुम्हारी कोई गलती है। वो क्या है ना कि मुझे लगता है कि मैं अब इस रिलेशनशिप में और नहीं रह सकता।”


“क्या.. क्या बोल रहे हो??.. अंकित अगर ये मज़ाक है तो तुम्हे पता है ना, मुझे ऐसे मज़ाक बिलकुल पसंद नहीं है।” निया एकदम से छिड़ते हुए बोली।


“नहीं, मैं मज़ाक नहीं कर रहा।”


“क्या कहना चाहते हो ??”


“निया मैं सचमुच इस रिलेशनशिप में और नहीं रह सकता, दम घुटता है मेरा अब।"


“क्या कह रहे हो तुम ये? ऐसे कैसे? हमारी दो साल की रिलेशनशिप में, आज तक बस एकबार लड़ाई हुई और वो भी परसो और तुम कह रहे हो दम घुटता है, पर क्यों??"



“पता नहीं क्यों, पर सब जैसा पहले था, वैसा कुछ नहीं रहा, ना तो तुम, ना ही मैं और ना ही हालात। इन हालातों ने भी तो अलग - अलग कर दिया है हमें, तुम शहर के उस कोने में और मैं इस कोने में। "


“पर उसके लिए तो मैं यहाँ...”


“देखो मैं जानता हूँ की ये सब तुम्हारे लिए बहुत अचानक से हुआ, तो इसलिए तुम्हें बुरा लग रहा है ,पर मैंने बहुत सोचा है इस बारे में, और इस से सही अभी और कुछ नहीं हो सकता।"



“पर हम दोनों के बारे में कोई फैसला तुम अकेले कैसे ले सकते हो??”



“मैं अकेले नहीं ले रहा, मैं तो कह रहा हूँ की तुम भी घर जाकर इस बारे में सोचना, और फिर समझना की मैंने ऐसा फैसला क्यों लिया है, तुम्हें जवाब खुद का खुद मिल जाएगा।"



“हाँ, ढूँढना तो खुद ही पड़ेगा, क्यूंकि तुम तो मेरा फ़ोन उठाओगे नहीं”, निया ने झेपते हुए कहा, जिसपे अंकित ने कुछ ना कहना ही ठीक समझा।



“अच्छा अब मुझे जाना है, काम है कुछ मुझे", ये कह कर अंकित टेबल से उठ गया और जाने से पहले बोला , “तुम भी निकल जाओ शाम हो गयी है , अँधेरा होने से पहले घर पहुंच जाना... चलो बाय।"

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Mamta

Mamta 2 months ago

Liza Ansari

Liza Ansari 4 months ago

Monika

Monika 6 months ago

mam your story is very nice, i have an opportunity for you..if you ki m apko detail m samjhau then plz mail me on reenadas209@gmail.com

Daanu

Daanu Matrubharti Verified 7 months ago