Vah ab bhi vahi hai - 37 in Hindi Novel Episodes by Pradeep Shrivastava books and stories PDF | वह अब भी वहीं है - 37

वह अब भी वहीं है - 37

भाग -37

मैं तुम्हारी कमर के गिर्द साड़ी लपेट कर पेटीकोट के अंदर खोंसने लगा तो तुम हंसने लगी। मेरा हाथ लगते ही तुम्हें गुदगुदी लगने लगती। तुम्हारी हंसी से मेरे मन में खुराफात सूझी। मैं जानबूझ कर साड़ी ऐसे ढंग से अंदर खोंसता कि तुम्हें ज़्यादा गुदगुदी लगे। यह सब मैंने तब-तक किया, जब-तक कि तुम हंसते-हंसते दोहरी नहीं हो गई। तुम्हारी आंखों से पानी न आने लगा।

आखिर मैंने किसी तरह तुम्हें करीब-करीब उसी तरह साड़ी पहना दी, जैसी रिसेप्सनिस्ट पहनती हैं। जैसी रमानी बहनों ने पहनने को कहा था। हालांकि बड़े अस्त-व्यस्त ढंग से ही पहना पाया था। लेकिन तुम्हारे लिए यह आश्चर्य जैसा था कि एक मर्द ने इस ढंग से पहना दी। शीशे में अपने को देखकर तुम खुश होती हुई बोली, 'अरे तूने तो एकदम हिरोइन जैसे पहना दिया। कहां सीखा तूने?'

'सीखा-वीखा किसी से नहीं, बस ऐसे ही कोशिश की और बन गई। पार्टी में तुझे इसी तरह पहननी है। थोड़ा और अच्छे से।'

'क्या! ऐसे पहननी? ये..ये इतना पेट खुला रहेगा। इतना नीचे तक और ये...ये नाभि-साभि सब दिखती रहेगी? अरे, ये भी कोई पहनावा हुआ भला?'

'सुन तू इतने से मना कर रही है। मैं इन बहनों की बातों को जितना समझ पाया हूं, उस हिसाब से ये और ज्यादा खुली रहेंगी, और तुझे ब्लाउज भी ऐसा पहनने को दिया जाएगा जिससे तेरी छाती भी कम-कम आधी तो खुली ही रहेगी। और बताऊँ पहले से कि ये पार्टी उन लोगों की मस्ती के लिए ही रखी गई है, जो इन बहनों के काम-धाम में आगे काम आने वाले हैं। मुझे तो पक्का यकीन है कि रात में रुकने वाले सब खुला जश्न मनाएंगे।'

'ये खुला जश्न क्या?'

'यही कि खाएंगे-पीएंगे, नाचेंगे तो है ही। रात भर जम कर अय्याशी भी होगी। समझी।'

'भाड़ में गई ऐसी पार्टी, जश्न। हम उन सबके सामने अपने बदन की नुमाइश करने नहीं जाएंगे। काम इन बहनों का होगा और बदन हम अपना दिखाएं। इनका काम है, ये दोनों ही अपना बदन दिखावें। हमें क्या फायदा? हम क्यों करें ये सब?'

'समीना देखा जाए तो फायदा तो है ही। जब इन बहनों की फैक्ट्री चलेगी, तभी हम को काम मिलेगा। जो तुम्हारा सपना है ना कारोबार करने, इन बहनों की तरह आगे बढ़ने का, तो ये सब इस फैक्ट्री के चलने पर, और इन बहनों का तुम्हारी बात मान लेने पर ही निर्भर है। देखो, बहुत साफ बात है कि जब इनकी गाड़ी बढ़ेगी तो हमारी भी गाड़ी आगे बढ़ेगी। इसलिए मैं तो सब करने को तैयार हूं, क्योंकि मुझे तुम्हारी योजना बहुत सही लग रही है। इससे हम दोनों अपना कारोबार कर सकते हैं। आगे बढ़ सकते हैं। मैं तो भाई पूरी तरह तैयार हूं। तुम अपनी बताओ। ये याद रखना, तुम्हारी ''ना'' का मतलब है सब खत्म। तुम्हारे-मेरे सारे सपने खत्म।''

'समझ रही हूं तुम्हारी बात, मगर ये भी तो समझो हमने कभी ये सब किया ही नहीं। कैसे कर लेंगे।'

'सभी काम कभी न कभी शुरू ही किये जाते हैं। जो काम कर रहें है, यह भी तो पहले कभी नहीं किया था ना। लेकिन जरूरत पड़ी तो कर रहे हैं ना। जैसे विलेन बनने की ठान ली है, कोशिश कर रहा हूँ, मौका मिलते ही बनूँगा। वैसे ही यह सब भी करेंगे। तुम सीधे-सीधे यह समझ लो कि तुम्हारा-हमारा सपना इसी रास्ते से चल कर पूरा होगा।'

मेरी बातों को बड़े ध्यान से सुनने के बाद तुम बोली, 'बातें तो तू बड़ी-बड़ी कर लेता है। सुन, मैं भी पीछे हटने वाली नहीं हूं। देखो सपना तो पूरा करना ही है। साड़ी पहनकर थोड़ा सा बदन दिखाकर पूरा होगा, तो यही सही, करेंगे सब।'

'तो ठीक है, आओ अब तान कर सोते हैं। देखते हैं कुछ और नए सपने, फिर उन्हें भी पूरा करने का रास्ता भी ढूंढ़ते हैं।'

अगले कई दिन जिस तरह की तैयारियां हुईं, उससे साफ हो गया कि पार्टी में आएंगे तो गिने-चुने लोग, लेकिन सब कुछ होगा बहुत हाई-क्लास। इन तैयारियों के लिए जिस तरह हम-दोनों को सोलह-सोलह घंटे काम में लगाया गया, उससे हम-दोनों एकदम पस्त हो गए। हमें क्या-क्या करना है, दोनों बहनें यह भी समझाती चल रही थीं।

पार्टी से एक दिन पहले हम-दोनों की ड्रेस भी आ गई। दोनों बहनों के कई काम इतने उलझे, इतने रहस्यमयी लग रहे थे, कि उन्हें देखकर मुझे लगता कि यह बहनें तो साहब से भी आगे हैं। तुम जब काम करके थक जाती तो इन बहनों को खूब अंड-बंड कहती। मगर अपने सपने को लेकर एकदम सजग थी, कि जो भी हो पूरा करना ही है। पार्टी वाले दिन तुम ऐसे खुश थी, जैसे कि पार्टी तुम्हारे बिजनेस को ही शुरू करने के लिए हो रही है।

उस दिन दोनों बहनें सुबह पांच बजे ही उठ गईं, और घर पर सारे कामों को करते हुए दस बजे चली गईं। जब चार बजे वापस आईं, तो पता चला कि फैक्ट्री का उद्घाटन शानदार ढंग से हो गया। जिन मेहमानों को आना है वो देर रात आएंगे। उनके ना रहने पर हम-दोनों ने जिस तरह से घर पर सारी तैयारी की, उसे देख कर दोनों बहनें खुश हुईं। मेहमानों के आने के कुछ देर पहले ही हमें अपनी ड्रेस पहन कर तैयार हो जाने को कहा।

तुम जब हल्की दुधिया नीली, प्लेन सिल्क साड़ी पहने, पूरे मेकअप के साथ सामने आई, तो कुछ देर मैं तुम्हें देखता ही रह गया। चौड़ा पीला बार्डर, और उसी से मैच करता सिल्क का ही पीला ब्लाउज पहने तुम वाकई किसी फाइव स्टार होटल की रिसेप्सनिष्ट ही लग रही थी। एकदम नीचे से बांधी गई साड़ी, और गहरे गले, पीठ के ब्लाउज में तुम बहुत खूबसूरत लग रही थी। मैंने मिलते ही तुम्हें छेड़ा।

'अरे, तुम तो एकदम हिरोइन लग रही हो।'

तुम्हारे खुले पेट, छाती की तरफ भी इशारा करके कहा, 'यार तुम बहुत खतरे में हो, सारे मेहमान इसी में उलझ कर रह जाएंगे।'

कई और बातें कहीं, तो तुम अपने हाथों से छाती, पेट को छिपाने की कोशिश करती हुई बोली, 'चुप रह न, सबसे पहले तो तू ही इसी में उलझता जा रहा है। सब काम चौपट कर देगा।'

मैंने उस औरत की भी खूब तारीफ़ की जिसने तुम्हें तैयार किया था। हम-दोनों काम करते रहे और सामने पड़ते ही एक दूसरे को छेड़ते भी रहे। टाइम से करीब डेढ़ दर्जन मेहमान आ गए। सारे मेहमान बड़ी हाई-फाई सोसाइटी के लग रहे थे। उनके आने के पहले चार अजीब से हाव-भाव वाले जेंट्स व लेडी भी आ गई थीं।

सारे मेहमानों के लिए जिस हॉल में सब-कुछ अरेंज किया गया था, दोनों बहनें उन्हें वहीं ले गईं। सभी का बड़े खूबसूरत से बुके देकर स्वागत किया। उनकी सेवा में ऐसी लगीं कि, मानों उनके मेहमान ना हो कर दामाद हों।

खाने-पीने के समय ही हमें बहनों ने दुबारा चौंका दिया। म्यूजिक सिस्टम पर कोई अरेबिक धुन पहले से चल रही थी। मेहमानों के अलावा जो अजीब से हाव-भाव वाले जेंट्स, लेडीस आये थे, वो अचानक ही मेहमानों के बीच से गायब हो गए। फिर अचानक ही कुछ देर में सभी आ गए। सब मेकअप करने गए थे। उन्होंने उस अरेबिक धुन पर थिरकते हुए ही प्रवेश किया।

दोनों महिलाओं ने कमर के नीचे और छाती के महत्वपूर्ण हिस्सों पर कई रंगों की कोई चमकीली चीज लगा रखी थी, या यह कहें कि उन चमकीली चीजों से ही उन हिस्सों को ढंका था, जो लाइट पड़ने पर खूब चमक रही थीं। बाकी अपने पूरे खुले शरीर पर दोनों ने न जाने कौन सा स्प्रे या क्रीम लगा रखी थी कि लाइट में संगमरमर सी दमक रही थीं ।

दोनों आदमियों ने चमकीली काली पैंट और साटन की चमकती महरून शर्ट पहन राखी थी। थिरकते हुए जब दोनों आये तो अपने हाथों में ''सिरेमिक ब्लैक दरबुका'' लिए हुए थे, जिस पर दोनों ''बेली डांस'' के लिए कोई धुन बजा रहे थे। जिसकी टुन्न-टुन्न की आवाज़ माहौल में गूंज रही थी।

उनके आने के बाद म्यूजिक सिस्टम पर चल रही अरेबिक धुन की आवाज़ बिलकुल धीमी कर दी गई। दोनों महिलायें दरबुका की थाप से अपनी थिरकन की लय मिलाने लगीं। यह सब देख कर मैं समझ पाया कि रमानी बहनों ने अपने स्वार्थ सिद्धी हेतु मेहमानों के लिए नेकेड बेली डांस की व्यवस्था की है। जिसके बारे में पहले सुना भर था। प्रत्यक्ष देखूंगा यह सपने में भी नहीं सोचा था।

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Suresh

Suresh 6 months ago