Nafrat se bandha hua pyaar - 4 in Hindi Love Stories by Poonam Sharma books and stories PDF | नफरत से बंधा हुआ प्यार? - 4

नफरत से बंधा हुआ प्यार? - 4

देव गुस्से में अपने ऑफिस में खड़ा था। उसका मन कर रहा था एक कुल्हाड़ी उठाए और जाके सबको काट डाले या फिर सुबह साढ़े नौ बजे ही स्कॉच की बॉटल को उठाये और फिर उसे तोड़ दे। वोह अपना गुस्सा शांत करना चाहता था ताकी कहीं सबिता का ही गला ना दबा दे।
सबिता प्रजापति ने उसके अंदर एक ज्वाला को भड़का दिया था। वोह उसकी आवाज़ दीवार से साफ सुन पा रहा था जब वो अपने किसी आदमी से कुछ सवाल कर रही थी और वो आदमी उसे ज़ोर ज़ोर से वोह डॉक्यूमेंट्स पड़के सुना रहा था।
अभय ने क्या सोच कर प्रजापतिस की तरफ से उस सबिता को कहा प्रोजेक्ट की देख रेख़ के लिए? देव को प्रजापतिस के साथ डील करने में कोई प्रॉब्लम नहीं थी। उसे तो प्रॉब्लम थी खुद सबिता प्रजापति के साथ काम करने में। वोह तो उम्मीद कर रहा था की प्रजापतीस शायद किसी को हायर करेंगे प्रोजेक्ट मैनेज करने के लिए। उसने अपने आपको शांत करने के लिए एक गहरी सांस ली।
"सबिता -------ब्लडी -------प्रजापति"
वोह जब भी उससे मिला था हमेशा ही वो उसका मज़ाक बनाती थी उसको बेइज्जत करती थी।

अभी तक की वो एक ही लड़की उसकी जिंदगी में आई थी जो उससे बिना डरे उलझ जाती थी।
उसका दिमाग धधक रहा था जहां अभी कुछ देर पहले सबिता ने गन तान दी थी और उससे उसे ये याद आ गया था की कैसे सबिता ने जब पहली बार हथियार उठाया था तो उसे इसी तरह डराया था वो भी जब वो अपने प्रोजेक्ट के अप्रूव हो जाने की खुशी में सेलिब्रेट कर रहा था।




***फ्लैशबैक***


***एक साल पहले***



देव अपने चेहरे पर बार बार पानी डाल रहा था, वोह अपने आप को जगाने की कोशिश कर रहा था। अभी तो सिर्फ रात के दस ही बजे थे पर वो बहुत ही ज्यादा थक गया था। अभी एक हफ्ते से वोह दिन रात एक किए हुए था कुछ जरूरी काम को पूरा करने के लिए अपनी टीम के साथ। दिन भर काम करना और शाम और रात को हाई प्रोफाइल के लोगों से मिलना ताकि उनसे मेल जोल बढ़ा सके और वो वक्त पड़ने पर कभी काम आ जाएं। क्योंकि आज कल अभय बहुत बिज़ी रहने लगा था और जब वक्त मिलता था तो फैमिली के साथ वक्त बिताना पसंद करता था, इसलिए देव को ही ऐसे सोशल गेथरिंग्स में जाना पड़ता था। देव को भी कोई प्रॉब्लम नहीं थी। देव भी जनता था की अपने लोगों में शांति बनाए रखने के लिए अभय पूरी कोशिश कर रहा है। तो अब देव की भी ज़िमेदारी थी सिंघम्स के नेटवर्क को और भी ज्यादा मजबूत और शक्तिशाली बनाने की कोशिश करे। इसके लिए उसको ज्यादा मेहनत नही करनी पड़ी लोगों का ध्यान अपनी तरफ करना उसका नेचुरल टैलेंट था। कुछ गुण उसमे पहले से ही थे और कुछ उसने बिजनेस स्कूल से पढ़ाई करते वक्त सीखे। इसका फायदा ये हुआ की बड़े बड़े लोगों से मेल जोल बढाने से उसकी दोस्ती हो गई उनसे और साथ ही उससे इंप्रेस हो कर नए नए महत्वपूर्ण कॉन्ट्रैक्ट्स यानी प्रोजेक्ट्स मिलने लगे। उसे बहुत खुशी थी की उसकी और अभय की मेहनत रंग ला रही है। सिंगम्स जल्दी ही अपने लोगों के लिए पानी और रोजगार के लिए नया प्रोजेक्ट शुरू करने वाले थे। इसी खुशी में एक शाम अभय ने एक छोटी सी पार्टी रखने की सोची सिंघम मेंशन में। देव भी यही सोच रहा था वो भी जशन मानना चाहता था आखिर इतनी मेहनत की थी उसने इस प्रोजेक्ट के लिए और वो जल्द ही शुरू भी होने वाला था। एक शाम जब देव शहर से वापिस घर आ रहा था तभी किसी ने उस पर हमला कर दिया।
कृतिका, एक जानी मानी अभिनेत्री, जिससे देव कुछ महीनो से डेट कर रहा था उसके ऑफिस पहुंची। देव पिछले कुछ हफ्तों से काम का भार ज्यादा होने कारण कृतिका से मिल नही पा रहा था। इसलिए कृतिका उससे जबरदस्ती उसके साथ उसके सिंघम एस्टेट जाने की ज़िद्द करने लगी ताकि कुछ वक्त मिल सके उन दोनो को साथ बिताने के लिए। देव जब भी जिन लड़कियों को डेट करता था कभी उसे अपने सिंघम राज्य की तरफ नही ले गया था।वोह उसकी दोनो जिंदगियों को मिक्स नही करना चाहता था इसलिए अलग रखता था अपनी गर्लफ्रेंड्स को अपने परिवार से। पर इस बार उसने ना जाने क्यों हां कर दिया और उसकी बात मान ली। ये पहली बार था जब वो किसी लड़की को उसके घर की तरफ ले जा रहा था। वोह उसे अपने घर नही लेकर जाना चाहता था और नाही सिंघम लेकहाउस ले जाना चाहता था इसलिए वो उन पांच कॉटेज की तरफ ले गया जो सिंघम एस्टेट में ही थे। और यही उसकी सबसे बड़ी गलती थी। उनमें से एक कॉटेज में उसकी कुछ यादें दफन थी जो आज से छे साल पहले घटित हुई थी जो आज भी देव के दिमाग और ज़हन में बसी हुई थी। उसे कुछ अजीब सा लगने लगा लेकिन फिर उसने अपने दिमाग को समझा दिया की वोह उसे याद नही कर सकता, क्यों आज भी उसके ज़ेहन से उसका वोह मासूम चेहरा उसकी गहरी भूरी आंखे जिसपर घनी पलके छाई हुई थी नही हटती?
दे...ए...व..व। आई एम वेटिंग, बेबी! कम आउट सून। एक लड़की की मोहक आवाज़ बेडरूम से आ रही थी। जैसे ही देव ने उसकी आवाज़ सुनी उसने एक आह्ह भारी अब उसका शक यकीन में बदल गया की सच में वो उसके साथ शाम बिताने आया है। इससे पहले जब भी वो दोनो मिलते थे कुछ वक्त ही साथ रहते थे। देव उसे सोशल इवेंट्स में ले जाता था और उसके बाद उसे घर छोड़ते वक्त उसके कमरे में उसके बिस्तर पर उसके साथ थोड़ा वक्त बिता के तुरंत निकल जाता था। उसने आज तक उससे ज्यादा बात नहीं की थी। सोशल इवेंट्स में भी देव और लोगों से मिलने में ही व्यस्त रहता था और उसके बाद उसके घर में भी एक दूसरे से बात करने के जगह एक दूसरे की इच्छा और जरूरतों को पूरा करने में व्यस्त रहते। अपनी जरूरत को शांत करने के बाद देव कभी भी वहां रुकता नही थी। पर आज तो रास्ते में शहर से आते वक्त गाड़ी में दोनो में कई बातें हुई। देव ने महसूस किया दोनो में कुछ भी कॉमन नही था। बल्कि उसने ये महसूस किया की ये बातें तो वन साइडेड थी, बात तो सिर्फ कृतिका ही कर रही थी नॉनस्टॉप अलग अलग टॉपिक्स पर जैसे गॉसिप करना, पार्टिंग और शॉपिंग, ये सब देव को इरिटेट करने लगा था वो चिढ़ रहा था। उसे वोह बहुत कंजूस भी लगी। जबकि देव ने उसे साफ साफ कह दिया था की वोह कोई सीरियस रिलेशनशिप में नही रहना चाहता है बस ऐसे ही उसे डेट कर रहा है उनके बीच कोई कमिटमेंट नही है, फिर भी कृतिका आगे मिलने के लिए प्लानिंग का रही थी। देव ने एक लंबी सांस भरी और उसी पल ये निश्चित कर लिया की बाहर आके उसे बता देगा की यह रिलेशनशिप आगे नहीं बढ़ सकता। उसे तो यह सोच के ही अजीब लग रहा था की अब उसे वापिस शहर छोड़ने जाना होगा और फिर से उसके साथ गाड़ी में वक्त बिताना पड़ेगा। अपने मन में यह विचार के साथ देव ने बाथरूम का दरवाज़ा खोला और बेडरूम में आ गया। शिट! कृतिका तो छोटे छोटे कपड़े पहने में बैड पर लेटी हुई थी। उसका बदन ढक कम रहा था दिख ज्यादा रहा था। वोह उसे अजीब अजीब इशारे करके अपने पास बुला रही थी।
"डू यू लाइक इट, देव?" उसने अपने चेहरे पर मुस्कान बिखेरते हुए पूछा, वोह मुस्कान जिसके दुनिया में लाखों करोड़ों दीवाने थे।
"लव इट!" में भी बिलकुल पागल था जो इतना अच्छा मौका अपने हाथ से गवा रहा था। भाड़ में जाए वोह यादें मुझे तो बस एंजॉय करना है और नई यादें बनानी हैं। यह उसका आखरी ख्याल था जो उसके मन में उस वक्त आया था उसके बाद तो उसने आगे बढ़ कर कृतिका का ऑफर एक्सेप्ट कर लिया था। देव ने सोचा था उसका खयाल दिमाग से निकालना और आगे बढ़ना उसके लिए आसान होगा लेकिन नहीं यह सब इतना आसान भी नहीं था क्योंकि पंद्रह मिनट बाद ही उसे यह एहसास हो गया की यह सब उसके लिए मुश्किल है।
"देव! ओह माई गॉड! देव! यू आर द बैस्ट, देव! द बैस्ट!"

व्हाट द हैल? उसके आज तक छब्बीस साल की लाइफ में इस तरह का परफॉर्मेंस इश्यू देव के साथ कभी नही हुआ। देव ने अपनी आंखे बंद की और को काम कर रहा था उसी ओर फोकस करने लगा साथ ही कृतिका की इरिटेटिंग आवाज़ भी इग्नोर करने की कोशिश करने लगा। पर जैसे ही उसने अपनी आंखें बंद की थी उसे वोह घनी पलके और सुंदर भूरी आंखे दिखाई देने लगी थी साथ ही वो वक्त भी याद आ गया जब देव ने उसे देखा था।

कृतिका वैसे ही तेज़ तेज़ और अजीब अजीब आवाजें निकाल कर नौटंकी करती रही। "ओओह, देव, यू आर द मैन!"

क्या यह हमेशा ऐसे ही नौटंकी करती है? ऐसे ही फेक आवाज़ें निकालती है? शिट! मेरे लिए तो यह किसी टॉर्चर से कम नही है। और में क्यों इतना गिल्टी महसूस कर रहा हूं उन यादों की वजह से? क्यों वोह याद मेरे दिल और दिमाग से निकलती नही है? अगले ही पल देव पीछे हट गया और एक साइड बैठ गया।

"बेबी, रुक क्यों गए?" कृतिका ने मुंह बनाते हुए कहा।

"लिस्टन, कृतिका! आई एम सॉरी, पर अब मुझसे नही होगा। मुझे लगता है की हमें........

देव आगे कुछ बोल पाता की अचानक कृतिका चिल्लाने लगी। उसकी आवाज़ इतनी तेज़ थी की किसी के भी कान के परदे फट जाएं। देव ने भी अपने दोनो हाथ से अपने कान ढक लिए।

व्हाट द हैल? देव ने महसूस किया की कृतिका उसको देख कर नही चिल्ला रही बालक उसके पीछे देख कर चिल्ला रही है। इससे पहले की वोह पीछे पलट कर देखता एक तेज़ धार वाली कोई चीज़ किसीने उसके गले के नीचे रख दी। वोह एकदम शांत पड़ गया। कृतिका अभी भी चिल्ला रही थी, जिससे अब देव का सिर चकराने लगा था। "चुप रहो," एक जानी पहचानी आवाज़ सुनाई पड़ी देव के कान में। वह एक लड़की की आवाज़ थी जिसने कृतिका को नरमी से आदेश दिया था चुप रहने के लिए। कृतिका ने तुरंत चिल्लाना बंद कर दिया लेकिन डर से उसके कापने की थरथराहट सुनाई पड़ रही थी। अपने गले में चाकू को ध्यान में रखते हुए, देव ने धीरे से कंबल को अपने बगल में खींचा और कृतिका के ऊपर फेंक दिया, जिससे उसका लगभग नग्न शरीर ढँक गया। अगले ही पल दो आदमियों ने उसे पीछे से पकड़ कर उठाया और कुर्सी पर बिठा दिया और पीछे से ही कस कर पकड़ लिया।

सबिता प्रजापति उसके सामने शैतानी मुस्कान लिए खड़ी थी और अपने हाथ में लाल और हरे रंग का चाकू लिए देव के गर्दन पर घुमा रही थी।
उसे बिलकुल ऐसा लग रहा था जैसे उस रात की याद के बाद वो यहीं बस गई हो।
वोह उसे पहचान नहीं पाया था क्योंकि इन छह सालों में उसने उसे एक बार भी देखा ही नहीं था। पर उसकी गहरी घनी पलके और भूरी आंखों ने उसे याद दिला दिया था की यह वोही है क्योंकि छह साल पहले उसने उसे नजदीक से देखा था। उसे यह भी याद आ गया था की उसने नाक में को नोसपिन पहनी है यह वोही है जो उस वक्त पहनी थी बिलकुल सेम और तो और उसके लंबे बाल आज भी उसने उसी तरह से छोटी बनाई थी जैसे उस वक्त बना रखी थी। पर तब उसके गोल गोल लटकते गाल थे जिससे देखते ही पता चलता था की अभी वोह छोटी है लगभग सत्रह अठारह की, और अब वो नर्म से गाल सख्त दिखने लगे थे। पर अब तो उसका पहनावा भी बदल चुका है जैसे उसने तब ट्रेडिशनल कपड़े पहने थे आज वो कॉटन शर्ट और खाकी कलर की ट्राउजर में थी।उसने इन सालों में उसे एक बार भी नही देखा था जबकि उसकी जिंदगी में वो खलबली मचाई हुई थी उसकी जिंदगी बर्बाद करने के लिए उसने क्या कुछ नहीं किया था। उसने याद किया कैसे उसका जान से भी प्यारा घोड़ा चोरी हो गया था, उसकी पसंदीदा गाड़ी और बाइक उसने जलवा दी थी, और उसने ऐसे कई कांड करवाए थे जिससे देव को परेशानी या तकलीफ पहुंचे। पर बदले में देव ने भी उसकी गाड़ी को जलवाया था और उसकी कई प्रॉपर्टी भी मिट्टी में मिलावा दी थी। वोह तब रुका था जब अभय ने उसे नही रोक दिया आगे कुछ करने से।

"सुना की तुम आसपास ही हो, सिंघम। तो तुमसे "हैलो" कहने आ गई।"
वैसे तो उसकी आवाज़ में नरमी थी पर देव को तो वो किसी टौंट की तरह लग रही थी। जब देव ने कोई जवाब नही दिया तोह सबिता की मुस्कान और बढ़ गई।
में तुम्हारे साथ नरमी से पेश आना चाहती हूं, में नही चाहती हमारी वजह से हमारी फैमिली को प्रॉब्लम हो। आखिर शांति बनाए रखने के लिए ही तो उन्होंने ये कदम उठाया है। अब जल्दी ही हम फैमिली होने जा रहे हैं। बरसो पुरानी दुश्मनी को खतम करने के लिए, नीलांबरी प्रजापति ने अपनी भतीजी अनिका की अभय सिंघम से शादी का प्रस्ताव रखा। और अगले ही दिन अभय ने भी हां में जवाब दे दिया था जबकि देव थोड़ा कन्फ्यूज्ड था इस शादी को लेकर। एक तरफ तो देव बिलकुल भी नहीं चाहता था की संधि हो क्योंकि बीते कल में जो हुआ वो भुला नहीं पा रहा था वोह प्रजापतीस को माफ नही करना चाहता था, लेकिन दूसरी तरफ अपने लोगों की सलामती के लिए शांति भी चाहता था। वोह जनता था की जितना लड़ाई आगे बढ़ेगी उतना ही किसी ना किसी की जान जानी है। उसे अपने निर्दोष लोगों की ज्यादा चिंता थी। इसलिए उसने पहले अनिका के बारे में छानबीन करवाई ताकि ये पता चल सके की कहीं प्रजापति उनके साथ कोई धोखा तो नही कर रहे। अनिका के बारे में देव को कुछ भी संदेहजनक नही लगा था। असल में जो भी उसको अनिका के बारे में पता चला था उससे देव को यही लगता था की अनिका हर तरीके से एक अच्छी लड़की है और अभय के लिए परफेक्ट रहेगी। अनिका एक नरम दिल की पड़ी लिखी लड़की है। जो पेशे से डॉक्टर है जिसका काम लोगों को ठीक करना और उनकी मदद करना है - इसके विपरीत देव ने तो बस अपने सामने लोगों को मरते या बर्बाद होते देखा था।
देव अपने विचारों से तब बाहर आया जब उसे किसी लड़की की सिसकियों की आवाज़ सुनाई पड़ी।
"प्लीज़.. प्लीज़ डोंट हर्ट मी.. प्लीज़..प्लीज.."
देव जनता था की कृतिका के नज़दीक कोई नही है क्योंकि सबिता सिर्फ दो आदमियों के साथ आई थी और उन पांचों के अलावा कोई नहीं था वहां जबकि सबिता और उसके आदमी तो देव को टॉर्चर करने उसके पास खड़े थे। फिर भी, वोह यह भी जानता था की ये सब देख कृतिका सच में डर रही है।
"उसे जाने दो," देव ने सबिता के चेहरे की तरफ देखते हुए बहुत ही शांत भाव से कहा।
"उसकी कार बाहर खड़ी है और वोह खुद जा सकती है। मेरी दुश्मनी सिर्फ तुमसे है।" सबिता प्रजापति ने मुस्कुराते हुए कहा।
"आप कितने महान है ना, सिंघम। कोई सोचता होगा की मुश्किल वक्त में भी आप लड़कियों को बचा लेते हैं।" ये कहते हुए उसकी आंखें और भी सख्त दिखने लगी थी। "पर सच क्या है ये हम दोनो जानते हैं, है ना? उसने नरमी बरतते हुए पूछा, उसने उसे ये याद दिलाने की कोशिश की कैसे छह साल पहले जब वो अपने ब्वॉयफ्रेंड के साथ भागी थी तो देव ने सब बर्बाद कर दिया था। देव कुछ बोलता उससे पहले सबिता बैड की तरफ मुड़ गई, "गैट आउट"। जैसे ही उसने ये कहा कृतिका लड़खड़ाती हुई बिस्तर से उठ गई।
कृतिका ने अभी भी अपने पूरे कपड़े नही पहने थे लेकिन उसे कोई फर्क नहीं पढ़ता था उसे तो बस यहां से भागना था। उसने सिर्फ अपना पर्स उठाया और दरवाज़े की तरफ दौड़ गई।
कुछ ही पल बाद, देव को गाड़ी के इंजन की आवाज़ सुनाई पड़ी क्योंकि कार स्टार्ट हो गई थी फिर एक ज़ोर दार एक्सीलरेटर दबा के गाड़ी फुर्ती से कॉटेज से बाहर निकल गई। तब तक सबिता प्रजापति अपने हाथों पर चाकू की नोक घुमाते हुए गौर से देव की तरफ देख रही थी।
"ऐसा लगता है कि मैंने आपके बारे में जो अफवाहें सुनी हैं, वे सब झूठी हैं, सिंघम। एक प्लेबॉय के लिए, बिस्तर में उसका प्रदर्शन इतना खराब। असल में ये इतना खराब था की बेचारी लड़की तो इंतजार ही नही कर पाई तुम्हारा जब मैंने तुम्हारे इस खराब प्रदर्शन में आके खलल डाल दी थी।"
जब देव ने अभी भी उसके ताने का कोई जवाब नही दिया तो, सबिता और नज़दीक आ गई देव के और अपने नज़रों को उसके नग्न शरीर पर चलाने लगी। उसने उससे एक फुट की दूरी पर खड़े होके चाकू को उसकी गर्दन पर रख दिया। वोह चाकू की नोक को उसकी गर्दन पर घुमाते हुए गर्दन के बीच में ले आई फिर धीरे धीरे चाकू की नोक को उसके शरीर पर खाल को हल्का दबाते हुए नीचे की तरफ सरकाने लगी। फिर एक जगह आके चाकू को रोक दिया।
देव की गुस्से भरी भावनाओं के बावजूद, देव के शरीर में दर्द होने लगा और वह पूरी तरह से उत्तेजित हो गया। उसकी उत्तेजना को देखते ही सबिता प्रजापति के चेहरे पर एक हल्की सी मुस्कान आ गई।
"क्या होगा अगर में इस चीज़ को काट दूं?"....."मुझे लगता है लड़िकयों पर ये मेरा एहसान होगा। फिर तो सिंघम वंश बढ़ाने के लिए सिर्फ तुम्हारा भाई ही रह जायेगा। हम्मम! नॉट अ बैड आइडिया?" उसने फिर उसे उकसाने और ताने मरने के लिए कहा। जब देव ने फिर भी कुछ नहीं कहा तो सबिता ने चाकू वापिस खीच लिया और उसकी गर्दन पर ही वापिस गड़ा दिया।
देव ने दर्द को महसूस किया लेकिन एक इंच भी हिला नही। वह उसे देखता रहा। सबिता ने देव के गले पर अपनी उंगली चलाई और उसे अपने चेहरे के करीब लाई। "तुम क्या जानते हो," उसने धीरे से ताना मारना जारी रखा। "द ग्रेट प्योर हार्टेड सिंघम, का खून तो एक आम आदमी के जैसा ही है।"

देव का गुस्सा तेज़ी से बढ़ता ही जा रहा था। वोह बहुत देर से चुप्पी बनाए हुए था। आखिरकार वो अब बोला, "तुमने आज अपनी सारी हदें पार कर दी हैं", वोह खतरनाक लहज़े में बोला। "मैंने इन दिनों तुम्हे इसलिए छोड़ दिया था क्योंकि हमारे परिवारों में एक संबंध बनने जा रहा है और में नही चाहता था की हमारे बड़ों का फैसला गलत साबित हो।"
देव की धमकी सुन कर सबिता के एक्सप्रेशन बदल गए अब वो और भी घातक नज़रों से देव को देखने लगी उसने चाकू की नोक को देव की गर्दन में और गड़ा दिया।

"पार करने के लिए कोई लाइन है ही नही, सिंघम। यह हमेशा से ही एक लड़ाई थी। अगर अनिका और अभय की शादी हो भी जाती है ना तो भी तुम्हारे और मेरे बीच ये लड़ाई चलती रहेगी। क्योंकि तुम हार रहे हो, इसलिए रोओ मत और परिवार का सहारा लेकर उनके पीछे मत छुपो।
ये सुन कर देव का गुस्सा फूट पड़ा। "अगर तुम्हे जंग चाहिए, तो में दूंगा तुम्हे फ*** जंग," उसने अपने दात पीसते हुए कहा। और साथ ही उन आदमियों से छूटने की कोशिश करने लगा जिन्होंने उसे पीछे से पकड़ा था। उसके हिलने की वजह से चाकू से उसके गर्दन के आसपास कई घाव बन गए थे लेकिन उसने अपने दर्द को नजरंदाज कर दिया।
यह देख कर सबिता प्रजापति अपनी हसी नही रोक पाई और जोर जोर से हंसने लगी। "में बहुत एक्साइटेड हूं मुझे तुम्हारी कोशिश का इंतजार रहेगा, सिंघम।"
"ओह! हां.....वोह तुम्हारी लाल फरारी जो तुमने अभी नई खरीदी थी.....वोह राख बनके ज्यादा अच्छी लगती है"

"यू....." इससे पहले देव आगे बोलता बाहर से गाड़ी की आवाज़ें आने लगी जैसे कोई इसी तरफ आ रहा हो।

"मैम...अब हमें यहां से निकलना होगा," उन दो प्रजापति के आदमियों में से एक ने हड़बड़ी दिखाते हुए कहा। "हम सिंघम की ज़मीन पर हैं और हम सिर्फ तीन ही हैं।"

सबिता प्रजापति ने चाकू देव की गर्दन से हटा लिया और एक तिरछी मुस्कान दिखाते हुए कहा "इस दिन को हमेशा याद रखना, सिंघम। तुम आज मेरी दया की वजह से ही जिंदा हो। में चाहती तो आसानी से तुम्हारा गला काट सकती थी या फिर बंधी बना के ले जाती। पर मैने ऐसा कुछ नहीं किया।"

***प्रेजेंट डे***


देव का खून खौल रहा था गुस्से से ये याद करते हुए की कैसे एक साल पहले सबिता प्रजापति ने उसे उस रात चाकू की नोक पर धमकाया था और उसे नंगा सिर्फ शरीर से ही नही बल्कि हर तरीके से छोड़ कर चली गई थी।
उसके बाद वह दोनो कितनी बार भिड़े और हर बार दोनो एक दूसरे पर हावी होने की कोशिश करते थे। सबिता प्रजापति एक खूनी तूफान की तरह थी जो सिर्फ देव के सामने ही दुगनी ताकत से हमला करती थी उसे बर्बाद करने के लिए।
सिंघम के कुछ लोग उसकी ओर से नाराज हो गए थे और केवल उसे निशाना बनाकर हमले की योजना बनाना चाहते थे। लेकिन देव ने उन्हें रोक दिया था।
सबिता प्रजापति शायद सबसे चालाक, हिंसक और खतरनाक लड़की थी, जैसा कि सिंघम के लोगों का भी मानना था। लेकिन वह उसकी शिकार थी। तो वो ही खुद अपनी बेइज़ती, और जो सबिता ने देव के साथ बुरा बुरा किया है, उस का बदला लेगा।

देव ने अपने आपको शांत करने के लिए एक गहरी सांस ली और अपने दिमाग से ये सब बातें निकलने की कोशिश करने लगा। उसने अपने मन को बार बार ये एहसास दिलाने की कोशिश की वोह सबिता प्रजापति उसकी दुश्मन ही नही अब तो प्रोजेक्ट में उसकी ब्लडी फेलो है।
अपने आपको समझाते समझाते उसको कई बार गहरी सांस लेनी पड़ी अपना गुस्सा ठंडा करने के लिए।
देव जनता था आने वाले कुछ महीने उसके लिए बहुत मुश्किल होने वाले हैं क्योंकि सबिता के साथ काम करना आसान नहीं था। उसके लिए सबिता के सामने अपने गुस्से को काबू में रख कर काम करना बहुत मुश्किल था क्योंकि उसको देखते ही उसका गुस्सा फूट पड़ता था।






























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