Nafrat se bandha hua pyaar - 11 in Hindi Love Stories by Poonam Sharma books and stories PDF | नफरत से बंधा हुआ प्यार? - 11

नफरत से बंधा हुआ प्यार? - 11

"देव?" देव ने डॉक्यूमेंट्स से नज़रे हटा कर ऊपर सिर उठाया, जब उसने किसी जानी पहचानी सी किसी लड़की की आवाज़ सुनी।
अनिका सिंघम, उसकी भाभी देव के सामने उसके घर में बने हुए ऑफिस में खड़ी थी। अनिका उसे गौर से देख रही थी लेकिन हमेशा की तरह उसके चेहरे पर को खुशी या हसी नही थी।
"व्हाट्स अप, भाभी?" देव ने पूछा।

धीरे धीरे अनिका के चेहरे पर मुस्कान आ गई।
"देव, मुझे तुमसे कुछ जरूरी डिस्कस करना है, लेकिन में तुमसे खुद मिल कर ही बात करना चाहती थी।"

देव ने तुरंत अपने डॉक्यूमेंट्स साइड में रख दिए और खड़ा हो गया और अपनी भाभी अनिका को कुशन वाली आरामदायक कुर्सी पर बैठाया जो उसके सामने ही रखी थी। एक हफ्ता हो चुका था अब तक अभय और अनिका को वापिस आए।

"बिलकुल! आप बिना झिझक कह सकती हैं। वैसे आज कल अभय आपका ठीक एस ध्यान रख रहा है या नही?" देव ने पूछा।

देव जनता था की अभय और अनिका एक दूसरे से बहुत प्यार करते हैं। उन दोनो के चेहरे से और एक दूसरे को देखने के अंदाज़ से ही पता चलता था उन दोनो में कितना प्यार है। अभय को देखते ही अनिका चेहरा खिल उठता था।

"अभय तो ठीक है। बस थोड़ा ओवर प्रोटेक्टिव हैं। जबकि मैं बार बार उन्हे याद दिलाती हूं की मैं भी एक डॉक्टर हूं और मैं जानती हूं की मेरे और मेरे बच्चे के लिए क्या सेफ है क्या नही।"
देव उसकी बात सुन कर मुस्कुरा दिया। वोह अपने भाई को अच्छी तरह से जानता था। अभय लोगों को कंट्रोल करना जानता था। उसने बहुत कम उम्र में ही घर की सभी जिम्मेदारियां संभाल ली थी। ये भी सही था की अभय ने देव और देव के गुस्से को भी संभाला था बीते सालों में।

"आप मुझसे क्या बात करना चाहते थे भाभी?" देव ने पूछा।
अनिका के चेहरे पर एक चिंतित और शक भरे भाव आ गए। देव ने महसूस किया था कि अनिका की प्रजापति होने के बावजूद, उसे देखकर उसे गुस्सा नहीं आता था। बल्कि अनिका की मुस्कुराहट उसके आस पास के लोगों को सुकून देती थी। जबकि उसकी बहन सबिता को देख कर..........
देव अपने मन में ये सब सोच ही रहा था की अनिका की आवाज़ ने उसे अपनी सोच से आज़ाद किया।

"देव....मैने सुना है की कंस्ट्रक्शन साइट पर कुछ मुसीबतें आ रही हैं आज कल। मैं बस ये चाहती हू की मैं कुछ मदद कर पाऊं तुम्हारी परेशानियों को कम करने में।"

"डैम इट! क्यों सब मुझे हमेशा उसकी याद दिलाते हैं।" देव ने अपने मन में सोचा।
"हुंह! क्या मतलब तुम्हारा?" देव ने अपनी भौंहे सिकोड़ कर कहा।
जबकि वो जानता था की अनिका सही कह रही है। हालांकि उसका काम बिलकुल सही चल रहा है, लेकिन थोड़ी बहुत टेंशन उसके कर्मचारियों में अभी भी बनी हुई है।

अनिका ने गहरी सांस लेते हुए कहा "मैं जानती हूं मेरी बहन और तुम्हारे बीच बहुत मतभेद है। मैं तुम दोनो के बीच परेशानियों को कम करना चाहती हूं....."

ये सुनते ही देव की भौंहे और सिकुड़ गई और आंखे छोटी हो गईं। उसके और अनिका की बहन के साथ उसका सिर्फ 'मदभेद' है। बल्कि उनके बीच सीधे सीधे दुश्मनी या नफरत है।
"मुझे अच्छा लगा की तुम मेरी मदद करना चाहती हो, अनिका, लेकिन ऐसा कुछ नही है की किसी को मेरी मदद करनी पड़े। ये बस पुरानी रन........"

"एक्सेक्टली," अनिका ने बीच में टोकते हुए कहा।
"मुझे लगता है सब पुरानी बातों को ही लेकर बैठे हैं। लेकिन मुझे इन दिनों कुछ पता लगा है जो कई सवाल खड़े कर सकता है। ऐसा लगता है जैसे कुछ बातें जान बूझ कर फैलाई गई थी।"

देव ने कोई जवाब नही दिया वोह बस चुप रहा। उसे समझ नही आ रहा था की उसे अनिका से ये सब बातें करनी चाहिए या नहीं। लेकिन जब से उन्हे रायडू के बारे में पता चला था, उनका अतीत फिर सामने आ गया था।

"कैसी बात?" देव ने पूछा।
अनिका देव को ध्यान से देख रही थी। "जैसा की सब जानते हैं सबिता के पिता, हर्षवर्धन प्रजापति, ने गलती से तुम्हारे दादाजी को गोली मार दी थी। जबकि वो तुम्हारे पिता को गोली मारना चाहते थे लेकिन तुम्हारे दादाजी बीच में आ गए अपने बेटे को बचाने और गोली उन्हे लग गई। तुम्हारे दादाजी के जाने के बाद मेरे चाचाजी बहुत दुखी हुए थे वोह अपने आप को बर्बाद करने पर आतुर हो गए थे। उन्होंने अपने आपको सिंघम फैमिली के हवाले कर दिया था ताकी वोह सज़ा दे उनके गुनाह को कम करने के लिए।

देव ये सब पहले से ही जानता था। "हां! मैने ये सब अपनी दादी की मुंह से सुना था। तोह?" देव ने पूछा।

"मुझे नही लगता की सबिता के पिता ने तुम्हारी मां का कत्ल किया है, देव," अनिका ने धीरे से कहा।

देव इतना सुनते ही अपनी कुर्सी से उठ खड़ा हुआ। वोह अभी यह सब सुनने और समझने की स्तिथि में नही था।
"अनिका, मुझे अच्छा....."

"पहले मेरी पूरी बात तो सुनलो, देव, उसके बाद ही किसी नतीजे पर पहुंचना।"

देव जनता था की अनिका, देव और अभय की तरह ही उनके अतीत से जुड़ चुकी है। क्योंकि वोह भी, रायडू को ढूंढने और बीस साल पहले उस दिन मंदिर में क्या हुआ था, पता लगाने लगी हुई थी।

"ठीक है! बोलो," देव ने धीरे से कहा।

अनिका ने लैदर की बुक में से एक कागज़ निकाला और देव को दे दिया।
"यह उन खातों में से एक है जो हर्षवर्धन प्रजापति ने तुम्हारी मां को उनकी शादी से पहले और बाद में लिखे थे।"

देव ने अपनी भौंहे सिकोड़ ली। "तुम कहना क्या चाहती हो, अनिका?" उसने पूछा।

"मैं ये कहना चाहती हूं की हर्षवर्धन प्रजापति तुम्हारी मां से प्यार करते थे। लेकिन तुम्हारी मां उन्हे सिर्फ एक बचपन का दोस्त ही समझती थी। वोह दोनो पड़ोसी राज्य में रहते थे और कई अवसरों पर मिला करते थे। हर्षवर्धन प्रजापति उन्हे बेइंतिहा प्यार करते थे। उन्होंने उन्हे लंदन में भी खत भेजे थे उन्हें मुबारकबाद देने के लिए जब भी उन्होंने बच्चे को जन्म दिया था। मुझे नही लगता इस तरह का इंसान उन्हे मार सकता जिनसे वोह इतना प्यार करता है वो भी इतनी भयानक तरीके से।"

इस खुलासे ने देव को पूरी तरीके से हैरत में डाल दिया था। उसे बिलकुल तोड़ कर रख दिया था। उसने बेमन से उस खत को अनिका से लिया और कुछ लाइनें पढ़ने लगा। "शायद वह इस तरह का इंसान हो की जिस लड़की से वोह प्यार करता है अगर वो उसकी नही हुई तो किसी की भी नही हो सकती।" देव ने कहने को तो कह दिया लेकिन उसे खुद ही अपनी बात पर भरोसा नहीं था।
जिस तरीके से वोह लैटर लिखा गया था उससे साफ पता चल रहा था की लिखने वाला उत्साही प्रेमी नही था बल्कि एक नरम दिल का शुभ चिंतक लग रहा था। हालांकि, देव नही चाहता था की वोह इस खत की सच्चाई पर भरोसा करे। क्या पता ये जान बूझ कर खत लिखे गए हो ताकी उसकी मां हर्षवर्धन प्रजापति पर भरोसा बना सके?

"शायद मेरे चाचाजी एक सरफिरे आशिक थे, पर ये भी तो हो सकता है ये खत उन्होंने अपने दिल से लिखें हों।" अनिका ने शांत भाव से कहा।
"इसका मतलब है कि इस बात की संभावना है कि वो वोह नहीं थे जिसने तुम्हारी मां को मारा था। अगर तुम मेरी बहन से इसलिए नफरत करते हो की वोह उनकी बेटी है........"

"ऐसा नहीं है," देव ने अनिका को बीच में टोकते हुए कहा। "ऐसा इसलिए नही है की वोह उनकी बेटी है।"
बल्कि उनके बीच सात सालों में बहुत कुछ ऐसा हो गया था की दोनो एक दूसरे से नफरत करने लगे थे।

अनिका ने अपना सिर हिलाते हुए कहा, "मुझे पूरी उम्मीद है की तुम उन्हे माफ कर सको और भुला सको उनपर लगाए गए इल्जाम जब सच्चाई सबके सामने आ जाए।"

देव चुप रहा लेकिन हां में अपना सिर हिला दिया।

"थैंक यू," अनिका ने अपने चेहरे पर छोटी सी मुस्कुराहट के साथ कहा।
"और देव," उसने यूहीं कहा। "मैं बस ये बताना चाहती हूं की...कभी कभी जो लोग ठंडेपन का और भावहीन होने का दिखावा करते हैं...वोही सबसे ज्यादा दिल की गहराइयों से सोचते हैं और उनका दिल बहुत बड़ा होता है।"

देव ने बात समझते हुए फिर से हां में सिर हिला दिया।

अनिका को शुरू में लगता था की अभय उसकी परवाह नही करेगा। देव की दादी ने एक बार कहा था की अभय अपने नाम, अभिमन्यु सिंघम, की तरह ही है। उसके अंदर बहुत सारा प्यार भरा हुआ है लेकिन अपने आप को बाहर से सख्त और कठोर दिखाता है। देव दिखने में बिलकुल अपने पिता, विजय सिंघम, पर गया था। देव जो सोचता था जो करता था वो सबके सामने था कुछ भी छुपा हुआ नही था। जब वो बड़ा हो गया, तब भी वोह अपनी दादी को गले लगाने और प्यार से किस 😘 करने में बिलकुल नहीं हिचकिचाता था। अपने जल्दी गुस्सा होने और जंगली स्वभाव के बावजूद भी, देव आसानी से अपने स्नेह अपने लगाव अपने प्यार को जता पता था। जबकि वो सिर्फ सात साल का ही था जब उसके माता पिता चल बसे थे, लेकिन तब भी कई यादें उसकी उसके माता पिता के साथ थी जो खुशियों भरी थी, जब वो लंदन में रहता था। उसने याद किया कैसे उसकी पिता उसकी मां को देख कर खुश हो जाते थे, उनके गालों को प्यार से चूम लेते थे और उन्हें यूंही छू कर अपना प्यार अपनी परवाह जताते थे।
विजय सिंघम वोह आदमी थे जो अपने परिवार से बहुत प्यार करते थे और कभी अपनापन जताने में डरते या झिझकते नही थे। विजय सिंघम और अरुंधती दोनो ही एक दूसरे और अपने बच्चों के लिए ढाल की तरह खड़े रहते थे।

"मुझे लगता है मेरी बहन भी शायद अपने दिल को बांधे रखी हुई है," अनिका ने कहा। उसने आगे झुक कर देव के गाल को प्यार से चूम लिया और उसके ऑफिस से बाहर निकल गई।

देव यूहीं किसी खत पर विश्वास कर के हर्षवर्धन प्रजापति को माफ नही कर सकता था, वोह धीरे धीरे अपने अतीत में जाने लगा और सबिता के साथ हुई पुरानी बातों को याद करने लगा। उसने महसूस किया शुरू से अभी तक जब भी वो सबिता से मिला था उसपर गुस्सा ज्यादा तर इसी बात की वजह से निकाला था की वोह हर्षवर्धन प्रजापति की बेटी है। और सबिता प्रजापति बस उसकी नफरत का जवाब नफरत से देती थी। हालांकि, अनिका सबिता के बारे में गलत थी। देव ने नही लगता था की सबिता इतने शांत दिल की और भावहीन इसलिए है क्योंकि वोह अपने आप को अपने दिल को टूटने से बचाती थी। जबकि देव को लगता था सबिता ठंडे दिल के साथ साथ बहुत चालाक और क्रूर भी है।




















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