Learn the secret of health from nature in Hindi Short Stories by Jatin Tyagi books and stories PDF | प्रकृति से सीखे सेहत का राज

प्रकृति से सीखे सेहत का राज

अच्छे स्वास्थ्य की कामना सभी को होती है। हम सभी चाहते हैं कि स्वस्थ जीवन जिएं, कोई बिमारी न हो, किसी प्रकार के दवा खाने की जरुरत न पड़े। परंतु ऐसा होता नहीं है। अक्सर हम सभी बीमार पड़ते रहते हैं। उदाहरण के लिए कभी सर्दी-जुकाम, बुखार, खांसी जैसे सामान्य बीमारी से पीड़ित रहते है तो कभी-कभी किसी को गम्भीर बीमारी की वजह से कई दिनों-महीनों तक बीमारी की चपेट में रहना पङता है।

आशा – हरी
आज के इस कहानी के माध्यम से हम आपको एक ऐसे दंपति के बारे में बताने जा रहे हैं जिन्हें 17 वर्षों से कभी दवाई खाने की जरुरत नहीं पड़ी। वे कभी बीमार नहीं पड़े। आइए जानते हैं उस दंपति के स्वस्थ जीवन के पीछे राज के बारे में।

मिट्टी का घर
हरी (Hari) कन्नूर के स्थानीय जल प्राधिकरण में कर्मचारी हैं। उनकी पत्नी आशा (Aasha) किसानों को प्राकृतिक खेती के लिए बढ़ावा देने वाले एक समुदाय से जुड़ी हुईं हैं। इन दोनों को प्रकृति से बेहद प्रेम है। प्रकृति के प्रति उनका लगाव उनकी जीवनशैली में भी दिखाई देता है। हरी और आशा अपनी शादी के समारोह में कुछ अन्य पर्यावरण प्रेमियों को भी बुलाया था। सभी मेहमानों का स्वागत फलों और केरल की पारंपरिक मिठाई ‘पायसम’ से किया गया।

जब इस दंपति ने घर बनाने का विचार किया तो उस समय दोनों ने तय किया था कि घर न सिर्फ उर्जा से भरपूर हो बल्कि प्रकृति के भी समीप हो। दंपति के इस कार्य मे उनके एक आर्किटेक्ट दोस्त ने सहायता किया और अन्ततः हरी और आशा के सपनों का घर बनकर तैयार हो गया। उनका घर 960 sq.ft. है और वह केरल (Kerala) राज्य के कन्नूर (Kannur) जिले में स्थित है। आधुनिकीकरण के नए जमाने में वह घर मिट्टी से निर्मित किया गया है। ऐसा घर बनाने की प्रेरणा आदिवासी तबके से लिया गया है, जो ऐसे हीं घरों में रहते हैं।


मिट्टी की दीवारें भी सांस लेती है

दिन के वक्त में मिट्टी की दीवारें सूर्य की किरणों को घर के भीतर प्रवेश करवाती है। जब तक घर के भीतर की हवा सूर्य की गर्मी से गर्म होता है, शाम हो जाती है। इसकी वजह से रात के 11 बजे तक घर का तापमान अधिक होता है। उसके बाद हवा ठंडी होने लगती है। हवा के आने जाने की वजह से घर मे पंखे की आवश्यकता नहीं है। इस घर की छत कॉनक्रीट और नालीदार टाइल से बनाया गया है। केरल में अधिक वर्षा होने की वजह से हरी और आशा ने कंक्रीट का प्रयोग किया है।

दंपति के सपनों के इस घर में बिजली का उपयोग बेहद कम होता है। उन्होंने प्रकाश की व्यवस्था करते समय ध्यान रखा कि प्रत्येक लैंप को इस प्रकार से लगाया जाए जिससे ज्यादा दूर तक प्रकाश फैल सके। इस घर को प्राकृतिक रोशनी प्रचुर मात्रा में मिलती है।

दंपति ने फैसला किया है वह फ्रिज नहीं रखेंगे। इसकी वजह यह है कि अपने द्वारा उगाए गए फलों और सब्जियों को अधिक समय तक ताजा हीं खाते हैं। कभी अधिक समय तक कुछ रखना हो इसके लिए हरि और आशा ने किचन के एक कोने में ईंट की जोड़ाई कर के एक चौकोर जगह बनाई है जिसके अंदर एक मिट्टी का घड़ा रख दिया है। घड़े के अंदर रखा भोजन एक सप्ताह तक खराब न हो इसके लिए घड़े को चारो ओर से रेत से ढक दिया गया है।

हरि और आशा ने अपने घर में सोलर पैनल भी लगवाया है। उनके घर का किचन बायो गैस से चलता है। घर से निकलने वाले सभी कचरे और मल को बायो गैस में तब्दील कर दिया जाता है। सामान्यतः एक आम घर में बिजली की खपत लगभग 50 यूनिट होती है। लेकिन इस दंपति के घर में प्रत्येक महीने में सिर्फ 4 यूनिट बिजली का उपयोग होता है। इनके घर में आधुनिक उपकरण भी हैं। इनके घर में टीवी, कम्प्यूटर, मिक्सर जैसे अन्य उपकरण भी है। हरि और आशा दोनों उर्जा का सही इस्तेमाल करना बखूबी जानते हैं।

हरि और आशा
हरि और आशा का सपनों का यह घर उनके द्वारा बनाए गए एक छोटे से जंगल के बीचों-बीच है। यहां अब तक कई तितलियों, चिड़यों और जानवरों का बसेरा बन चुका है। वे अपनी भूमि पर कई तरह के फल और सब्जियों को प्राकृतिक रूप से उगाते हैं। वे सिर्फ बीज बोने के समय ही खुरपी का प्रयोग करते हैं उसके बाद वे भूमि की जुताई नहीं करते हैं। प्राकृतिक खाद का प्रयोग भी बेहद सावधानीपूर्वक किया जाता है ताकि भूमि का अपना पोषक तत्व नष्ट न हो।

आशा पूछती हैं,” आप सब ने ध्यान दिया है जंगलों में उगे फल और खेती की गईं जमीन पर उगाए हुये फलों के स्वाद में अंतर होता है?” इस सवाल के जवाब मे आशा स्वयं ही मुस्कुराकर जवाब देती हैं, मिट्टी से आप कुछ नहीं छुपा सकते है।

हरि और आशा को विश्वास है कि प्राकृतिक जीवन जीने से उनकी सेहत को बेहद लाभ प्राप्त हुआ है। बीते 17 वर्षों से उन्होंने दवा का सेवन नहीं किया है। पौष्टिक भोजन और शरीर को प्राकृतिक स्वभाव से छेड़-छाड़ न करने की वजह से इस दम्पती को किसी भी गंभीर बीमारी ने अभी तक छुआ नहीं हैं।

हरि ने बताया कि यदि कभी-कभी सर्दी-जुकाम हो जाए तो अधिक पेय, थोड़ा आराम और उपवास से शरीर फिर से स्वस्थ हो जाता है।

हरि और आशा की तरह सभी कोई खुद का जंगल नहीं बना सकता है। परंतु 2 बाद उनकी जीवनशैली से सीख सकते हैं। पहला प्रकृति के साथ मिलकर चलना और दूसरा स्वयं को सादा और व्यवस्थित रखना।

मैं जतिन त्यागी, आशा और हरी को स्वस्थ जीवन जीने के लिए ढेर सारी शुभकामनाएं देता है।

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