Secret Admirer - 15 in Hindi Love Stories by Poonam Sharma books and stories PDF | Secret Admirer - Part 15

Secret Admirer - Part 15

मैं हमेशा ही अपने फ्रेंड्स को कहती थी की मेरी मॉम आपकी मॉम की फ्रेंड है और मैं आपसे बचपन में मिली हुई हूं। इसलिए वोह हमेशा मुझसे अंदर की बाते जानने के लिए पूछते रहते थे। क्योंकि मैं ज्यादातर आती रहती थी यहां मॉम और दी के साथ इसलिए मुझे आसानी से खबरे पता चल जाति थी।" वोह बोलते बोलते अपने इस राज़ का भी खुलासा कर गई।

"रियली?" यू स्टॉकर। आई कांट बिलीव इट। मुझे यह सब क्यों नही याद आ रहा। आई मीन मुझे नही याद की तुम्हारे डैड के जाने के बाद मैं तुमसे कभी मिला था। दस साल बीत गए इस बात को।" कबीर ने कहा। अमायरा के खुलासे के बाद से वोह हैरान था।

"एक्चुअली, मैं जब भी यहां आती थी बाय चांस आप घर पर नहीं होते थे। कभी आप देश से ही बाहर होते थे और कभी ऑफिस में। मैने आपको एक दो बार देखा था लेकिन उस वक्त आपने मुझे नोटिस नही किया या फिर मुझ पर ध्यान देना जरूरी नहीं समझा। वैसे सुमित्रा आंटी मुझे आपके और उनके बारे में सारी गॉसिप देती रहती थी। और उनके मरने के बाद, आप वैसे भी अपने में ही खोए खोए रहने लगे थे और अपने आपको सबसे दूर कर लिया था तोह आपने मुझे कभी नोटिस ही नही किया होगा।"

"सही कहा। उसके जाने के बाद मैं सबसे कटा कटा रहने लगा था। पर इसका मतलब है की तुम शरारती चालक लोमड़ी हो। क्या अब मुझे तुमसे सतर्क रहना चाहिए?" कबीर ने मज़ाक करते हुए पूछा।

"हां बिलकुल, अगर आप चाहे तोह। मैं उस वक्त कॉलेज में नई नई थी तोह बस सबको इंप्रेस करना चाहती थी। ताज़ा और सबसे पहले खबरे पहुंचा कर मैं पॉपुलर होना चाहती थी।" अमायरा कहते हुए हसने लगी और उसके साथ ही कबीर भी यह सुनकर हंस पड़ा।

"वोह बहुत प्यारी थी। मैं उनसे एक बार मिली हूं जब वोह यहां सुमित्रा आंटी से मिलने आई थी और उस वक्त आप घर पर नहीं थे। मैने उनसे उनका ऑटोग्राफ भी मांगा था। वोह मेरे साथ बहुत अच्छे से पेश आई थी। मुझे नही पता था की एक इतने बड़े मूवी स्टार इतना नम्र भी हो सकते हैं। इसमें कोई हैरत की बात नही है की आप उनसे कितना प्यार करते हैं। और अभी भी करते हैं। वोह डिजर्व करती थी।"

"ओके। तोह मेरे बारे में अपने कॉलेज में न्यूज फैलाने से तुम पॉपुलर हो गई थी तोह अब क्या? अब तोह मुझसे शादी भी हो गई, हाँ?" कबीर ने पूछा। वोह बहुत मुश्किल से अपने इमोशंस को कंट्रोल करने की कोशिश कर रहा था। वोह अपने दुख को चेहरे पर आने से रोक रहा था।

"वोह अब मुझसे जलते है। अब कोई भी मुझसे बात नही करता।" अमायरा ने दुखी होते हुए जवाब दिया।

"क्या? क्यों?"

"आपकी शादी की डेट से कुछ दिन पहले महिमा ने अनाउंस किया था की वोह अपना शादी का लहंगा लकी विनर को गिफ्ट कर देंगी। जब आप और वोह उस इवेंट में जाने वाले थे। और उस इवेंट का जो भी प्रॉफिट था वोह चैरिटी को जाने वाला था।" उसने याद दिलाते हुए कहा।

"हां किया था। तोह?"

"मेरे सारे फ्रेंड्स उस इवेंट में पार्टिसिपेट करना चाहते थे। इस उम्मीद से की शायद वोह लहंगा उन्हे मिल जाए, इस उम्मीद से की वहां उन्हे आपसे और उनसे मिलने का मौका मिलेगा। मुझे कभी नही चाहिए था। और फिर मुझे उनकी शादी मिल गई, उनका दूल्हा मिल गया। जो दोनो ही मैं कभी नही चाहती थी। और उन्हे लगता है की मैने महिमा की डैथ और आपके परिवार से हमारे रिलेशन का फायदा उठाया है और यहां पहुंच गई, उन्हे लगता है की मैने कहीं न कहीं उन्हे धोखा दिया है। जबकि मुझे तोह पता ही नही की मेरी गलती क्या है।"

"पर यह सच नहीं है। तुमने किसी का इस्तेमाल नहीं किया। तुमने कभी अपने दोस्तों से बात करने की कोशिश नही की?" कबीर को अमायरा के लिए बुरा लगने लगा था।

"मैं उनसे क्या कहूंगी? की यह सिर्फ एक एग्रीमेंट है? ऑब्वियसली मैं यह नहीं कर सकती। जिंदगी हमे बहुत कुछ सीखा देती है। और मैने यह सीखा है की कभी ऐसे इंसान से जैलस नही हूंगी जिसके पास ऐसी चीज़ हो जो मेरी कभी नही हो सकती क्योंकि पता नही उसे पाने के लिए उसने क्या खोया हो।"अमायरा ने कहा और कबीर को उसके लिए बुरा लगने लगा, जिसने बहुत कुछ खोया था। और अपनी फैमिली के लिए बहुत सेक्रिफाइस कर रही थी बिना किसी को शो हुए। और उसे लगता था की उसने बहुत खोया है क्योंकि उसके सामने सबूत था।


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"दी। क्या आप मुझे कुछ पैसे दे सकती हो?"

"ऑफ़ कोर्स। आई एम सॉरी मैं तोह भूल ही गई तुम्हारे अकाउंट में पैसे ट्रांसफर करना। इस लॉन्ग हनीमून की वजह से। मैं आज ही कर दूंगी। तोह तुमने इन दिनों फिर मैनेज कैसे किया?"

कुछ दिन पहले ही इशान और इशिता अपने महीने भर के हनीमून से वापिस आ गए थे। और वापिस आने के बाद वोह और भी ज्यादा खुश दिखने लगे थे। अमायरा भी उन्हे देख कर खुश थी की उसकी बहन अपनी जिंदगी में खुश है। शादी के बाद उन दोनो का प्यार और बढ़ गया था और गहरा हो गया था।

"कोई बात नही। मेरे पास कुछ पैसे थे अकाउंट में। और मैं अनाथाश्रम से भी पेमेंट आने का वेट कर रही थी। पर इस महीने हमे अनाथ आश्रम के बच्चों के लिए एक मेडिकल कैंप अरेंज करवाना था। और मिस्टर बैनर्जी भी किसी को पैसे दिए बिना चले गए।"

"कोई बात नही। मुझे तोह वैसे भी तुम्हे तुम्हारा अमाउंट ट्रांफर करना ही था। बल्कि मैं तोह अभी ही कर देती हूं।" इशिता यह कहते हुए अपने फोन से मनी ट्रांसफर करने लगी। "और, यह हो गया। अगर तुम्हे और चाहिए हो तोह बताना। ओके। तुम्हे मुझे पहले ही याद दिलाना चाहिए था, जब मैं वापिस आई थी तब ही।"

"थैंक यू दी। मेरे पास थोड़ा थोड़ा है, लेकिन मुझे थोड़ा और चाहिए था क्योंकि मुझे मिस्टर मैहरा के लिए एक गिफ्ट खरीदना था। वोह तोह हमेशा एक्सपेंसिव चीज़े ही यूज करते हैं और मेरे पास पैसे कुछ कम पड़ रहे थे। इसलिए मैं अनाथ आश्रम से मिलने वाले पैसों का इंतजार करने लगी। और अब वोह इस महीने नही आने वाले हैं तोह मुझे आपसे मांगने पड़े। उन्होंने मुझे वन मंथ एनिवर्सरी पर वोह ब्यूटीफुल डायमंड इयरिंग दिए थे और मैने कुछ नही दिया। और देखिए अब तोह दो महीने हो गए हमारी शादी को।"

"औ....डेट्स स्वीट! मुझे बहुत खुशी है की तुम दोनो कोशिश कर रहे हो एक दूसरे के साथ खुश रहने के लिए। और तुम एक काम करो। मेरा क्रेडिट कार्ड ले जाओ आज के लिए। अगर उनके लिए कुछ खरीद रही हो तोह इसे यूज कर लो।"

"नही दी। मुझे लगता है इतना काफी है। लेकिन मुझे और जरूरत पड़ी तोह आपसे मांग लूंगी।"

"ओके। मैं ऑफिस के लिए लेट हो रही हूं। मेरा लंच बॉक्स कहां है। तुम्हे पता है, सब मुझसे तुम्हारे बारे में ही पूछते रहते हैं। कभी कभी तोह मुझे ऐसा लगता है की वोह मेरे नही तुम्हारे दोस्त हैं।"

"सच में? उनसे मेरा हाय कहना।"

"हाय से काम नही चलेगा। वोह तुम्हारे स्पेशल आलू के परांठे डिमांड कर रहे हैं।"

"ओह! ठीक है तोह मैं अभी बना कर लाती हूं। जब तक आप जा कर ब्रेकफास्ट करो, मैं तब तक आपके लिए आलू के परांठे पैक कर देती हूं।" अमायरा ने अपनी बहन इशिता को डाइनिंग एरिया की तरफ धकेलते हुए कहा।

कबीर जो दोनो बहनों की बातें कब से सुन रहा था वोह थोड़ा कन्फ्यूज्ड सा हो गया। उसे समझ नही आ रहा था की वोह क्या महसूस कर रहा था। अमायरा ने उसे इसलिए गिफ्ट नही दिया था क्योंकि उसके पास ब्रांडेड एक्सपेंसिव गिफ्ट्स खरीदने के लिए पैसे नहीं थे।

*"मैं तोह बस मज़ाक कर रहा था उस वक्त जब मैने उससे गिफ्ट मांगा था। वोह हमेशा हर चीज़ के लिए इतनी सीरियस क्यों हो जाती है? और उसने मुझसे क्यों नही मांगा जब उसे पैसों की जरूरत थी। उसने इशिता से क्यों मांगे पैसे?"* कबीर अपने मन ही मन अपने से बाते पर रहा था।

*"जो भी है हमारे बीच, यह हमारे बीच एग्रीमेंट की तरह है, ताकि हम दोनो की ही फैमिली खुश रहे। बस और कुछ नही।"*

*"पैसे खर्च करना आप के लिए कोई बड़ी बात नही है। पर मेरे लिए, यह बहुत बड़ा बोझ है।"*

*"पर जब मैंने शादी के लिए हां कहा था, मैं यह अच्छे से जानती थी की मैं अपने आप को आप पर कभी थोपूंगी नही।"*

*"मुझे बिना वजह वोह ज्वैलरी नही पहननी जो असल में मेरी है है नही। जिसपर मेरा हक नही है।"*

*"वोह सब आपकी पत्नी के लिए है, मेरे लिए नही। मुझे अच्छी तरह से याद है की हम दोनो कपल का सिर्फ नाटक कर रहे हैं।"*

*"ऑफकोर्स। वोह मुझसे क्यों कुछ मांगेगी? हम कपल होने का सिर्फ नाटक ही तोह कर रहे हैं।"* कबीर ने मन ही मन कहा। उसे बुरा लगने लगा लेकिन किस लिए यह नहीं पता था।

*"पर वोह तोह दो जगह काम करती है। किसी एक जगह नही। तोह उसे इशिता से पैसे मांगने की जरूरत क्यों पड़ी? मैने उससे कभी क्यों नही पूछा की वोह दो महीनो से क्या कर रही है?"* कबीर सोचते हुए डाइनिंग एरिया की तरफ बढ़ गया। वोह देख सकता था की अमायरा अभी किचन में थी और इशिता के कहने पर परांठे बना रही थी। वोह परेशान हो उठा, नही, वोह गुस्सा हो गया, अपनी फैमिली में हर किसी पर क्योंकि सब वहां बैठ कर नाश्ता कर रहे थे और अमायरा किचन में खाना बना रही थी।

"यह गाजर का हलवा खाइए। मेरी मॉम ने एस्पेशियली मेरे लिए बनाया है।" इशिता अपने मायके से लाए गए अपनी मॉम के हाथ के बने स्पेशल गाजर के हलवे को सबको सर्व कर रही थी।

"यह आया कहां से?" इंद्रजीत ने पूछा।

"मैं कल रात अपने घर गई थी। उन्होंने मेरे लिए बनाया था तोह मैं यहां ले आई। यह मेरा फैवरोइट है और मॉम जानती है, इसलिए उन्हें जब भी समय मिलता है मेरे लिए बनाती रहती है।" इशिता ने जवाब दिया।

"अमायरा।" कबीर ने अपनी पत्नी को पुकारा अपनी सीट पर बैठने के बाद ताकि सब का ध्यान इस ओर जाए।

"हां।" अमायरा ने किचन से बाहर आते हुए कहा।


















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