Secret Admirer - 24 in Hindi Love Stories by Poonam Sharma books and stories PDF | Secret Admirer - Part 24

Secret Admirer - Part 24

ऐसे ही दिन बीतने लगे। कभी अमायरा रुकती हॉस्पिटल में अपनी मॉम के पास तोह कभी इशिता रुकती। दोनो खूब ध्यान रख रहे थे अपनी मॉम का। कबीर भी अमायरा को पीछे से साइलेंट सपोर्ट दिए हुए था जिसकी उस बहुत ज्यादा जरूरत भी थी। यह पहली बार था इतने सालों में की अमायरा ने यह महसूस किया था की कोई तोह है उसके साथ, जो उसे सपोर्ट करता है, और उससे कुछ एक्सपेक्ट भी नही करता बिना किसी चीज़ के बदले। उसने सोच लिया था की वोह उसके लिए कुछ खरीदेगी, उन्हे थैंक यू कहने के लिए, एक थैंक यू गिफ्ट। डॉक्टर ने अब के दिया था की उसकी मॉम अब खतरे एस बाहर है और अब उन्हें जल्द ही डिस्चार्ज मिल जायेगा। इसका मतलब है की अमायरा आज जा सकती थी गिफ्ट खरीदने। कल तोह वोह बिज़ी रहती अपनी मॉम को डिस्चार्ज करने के लिए हॉस्पिटल से इसलिए वोह आज ही चली गई थी। उसने पूरे दो घंटे लगाए गिफ्ट सिलेक्ट करने में। जब उसे सेटिस्फेक्शन मिल गया की उसने एक अच्छा गिफ्ट खरीद लिया है कबीर के लिए तो वो घर की तरफ बढ़ गई। वोह बहुत खुश थी लेकिन उसे यह अंदाज़ा नही था की घर पर उसके लिए क्या सर्प्राइज वेट कर रहा है।

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उधर कबीर बहुत ही ज्यादा कन्फ्यूज्ड था अपनी फीलिंग्स को लेकर, आखिर वोह क्या महसूस कर रहा था यह उसे खुद समझ नही आ रहा था। वोह जानना चाहता था की अमायरा के दिमाग में क्या चल रहा है, और अब जब वोह जान गया था, तोह उसे समझ नही आ रहा था की अब क्या करे। पहले जब वोह जनता नही था की अमायरा का उसे शादी करने का कारण क्या है, तब सब ठीक था। अब वोह जान गया था की अमायरा उसके साथ नही होती, अगर उसकी मॉम उसके साथ बायस्ड नही होती। फिर वोह शायद दूसरी लाइफ चुनती अपने लिए। यह वोह जगह नही है जो वोह चाहती थी। वोह जनता था की अमायरा ने उसके दिल में एक खास जगह बना ली है और अब यह उसके लिए बहुत मुश्किल होगा उसे जाने देने के लिए कहने में। उसका तो दिल ही टूट जायेगा लेकिन वोह सेलफिश नही होना चाहता था। वोह भी खासकर तब जब वोह उसे उसकी खुशियां दे सकता है, जो वोह डिजर्व करती है। वोह यह भी जानता था की वोह यह सब किसी से शेयर या डिस्कस नही कर सकता इसलिए वोह उस इंसान से मिलने चला गया जो उसे समझ सकती, की वोह इस वक्त क्या महसूस कर रहा है।

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"आई लव यू अमायरा।"

"मैं जानता हूं की तुम नही चाहती हो की मैं यह तुमसे कहूं पर और कोई नही है जिससे मैं यह बात कह सकता हूं। अगर मैं फैमिली में से किसी से यह बात कहूंगा तोह वोह मुझे वोह नही करने देंगे जो मैं करना चाहता हूं।"

"तुम जानती हो मैं कभी भी उससे प्यार नही करना चाहता था। मैं कभी भी उससे शादी नही करना चाहता था, पर वोह एक ऐसी लड़की है जिसे किसी इन्विटेशन की जरूरत नही वोह अपनी अच्छाई से सबके दिल में जगह बना ही लेती है। और मैं बस उसके सामने मजबूर महसूस करता हूं। उसने मेरे दिल के सभी दरवाज़े खोल दिए, जिसे मैंने बंद कर रखा था, कस कर। कब, कैसे, मुझे अभी तक नही पता। मैं बस इतना जानता हूं की उसने बिना कोई कोशिश किए ही मेरे दिल में अपनी जगह बना ली है, जिसे मैं यह भी नही जानता की इसका भी कोई अस्तित्व है भी की नही।"

"और यह मत समझना की मैं तुमसे अब प्यार नही करता। कोई भी मुझसे यह नहीं करवा सकता। पर अमायरा की देख कर मुझे तुम्हारी याद आती है। वोह बहुत बहादुर है, थोड़ी सेंसिटिव है, वोह सबको निस्वार्थ भाव से प्यार करती है, वोह सबको खुश रखती है सबको हसा देती है भले ही वोह खुद से अंदर से कितनी टूटी हुई हो। वोह यह सब है करती है बल्कि वोह जो भी करती है मुझे तुम्हारी याद दिलाती है। और तब भी वोह बहुत अलग है, सबसे, मैने आज तक ऐसी लड़की कभी नही देखी। मैं बस असहाय महसूस कर रहा हूं, मुझे पता ही नही चाल की कब मैं उससे प्यार करने लगा।

"सबसे अजीब बात तोह यह है की मुझे एहसास हुआ की मुझे उससे प्यार हो गया है, वोह भी अब, जब मुझे यह पता चला की उसकी खुशियां किसी और के साथ है। वोह मुझे नही चाहती है अपनी जिंदगी में। वोह कोई और है जो उसको खुश रखेगा, जो उसकी मुस्कुराहट की वजह है, जो उसे प्यार करेगा, उसका ख्याल रखेगा। जो उसे रात को बाहों भर कर सोएगा जब वोह परेशान या बेचैन होगी। जो उसे किस करेगा उसे आश्वस्त करने के लिए जब वोह किसी उलझन में होगी। उसे गले लगाएगा जब उसे थोड़ा सपोर्ट की जरूरत होगी। इन दिनों यही सब मैं कर रहा हूं, जबकि यह अच्छी तरह से जानता हूं की मेरा इस पर कोई हक नही है और ना ही उसकी जिंदगी में मेरी कोई जगह है। उसे अभी किसी साथी की जरूरत है, और मुझे तोह वोह सिर्फ अपना एक अच्छा दोस्त समझती है। कुछ दिनों बाद जब उसे मेरे सपोर्ट की जरूरत नहीं महसूस होगी, तोह वोह फिर से वोह ही अमायरा बन जायेगी और मुझसे दूर दूर रहने लगेगी। अमायरा जी वोह पहले थी। मैं जानता हूं की मैं उसे बहुत मिस करूंगा।"

"पर अभी, जब मैं जानता हूं की उसे जिंदगी से कुछ और चाहिए, मैं उसे इस रिश्ते में नही घुटने दे सकता, दोस्ती के नाम पर। वोह प्यार डिजर्व करती है, बहुत सारा प्यार। और वोह किसी और को एक्सपेक्ट करती है उसकी यह इच्छा पूरी करने के लिए। इसलिए मैं अब उसे आज़ाद कर रहा हूं, उसे उसकी खुशियां ढूंढने के लिए। मैं श्योर हूं की तुम भी मेरी इस बात सहमत हो। वोह डिजर्व करती है अपनी जिंदगी अपनी शर्तो पर जीना। मैं चाहता हूं की वोह यह सब करे बिना किसी अपने ऊपर ज़िमेदारी के। मैं जानता हूं की जिंदगी जीना कैसा होता है बीना अपने प्यार के। मैं नही चाहता वोह भी इसी दौर से गुज़रे।"

"तोह अब मैं चलता हूं। मुझे कुछ जरूरी काम करने हैं उसकी उसकी जिंदगी वापिस देने के लिए। वोह भी जल्द ही।"

"आई लव यू महिमा। थैंक यू मेरी बातें सुनने के लिए। बाय।"
कबीर महिमा की कब्र के पास से उठ खड़ा हुआ और कब्रिस्तान से बाहर निकल गया। यह पहली बार था जब वोह यहां से दुखी हो कर नही जा रहा था। लेकिन वोह दुखी था, उसके लिए जो वोह अब करने जा रहा था।

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उसी शाम जब कबीर ऑफिस से घर पहुंचा और अपने कमरे में गया तोह उसने बड़े ही खूबसूरत आर्किड के फूलों का गुलदस्ता बैड पर रखा हुआ था। वोह भी उसके फेवरेट जो उसे बहुत पसंद थे। और वोह जनता था की यह अमायरा लाई होगी उसके लिए। म्यूजिक प्लेयर में स्लो मोशन में कबीर का ही फेवरेट सॉन्ग बज रहा था। कैसे इतनी छोटी छोटी बातें अमायरा उसके बारे में जान जाती थी उसे नही पता था।

*जैसे तुम जान जाते हो की उसे पुराने हिंदी गाने पसंद हैं और गुलाब के फूल से तोह नफरत है।* कबीर के मन ने उससे कहा।

"अरे आप आ गए।" कबीर ने उसकी आवाज़ सुनी। और उसका सामना करने से पहले कुछ पल उसने अपने आप को तैयार किया। वोह डर रहा था, जो वोह करने वाला था।

"हां। तुम मेरे लिए यह फूल लाई हो?" कबीर ने पूछा, और ऐसे प्रिटेंड किया की उसको इससे कोई फर्क नही पड़ता की वोह उसके लिए कुछ लाई है।

"हां। आपके लिए।" अमायरा ने चहकते हुए कहा।

"थैंक्स। लेकिन क्यों?"

"दो वजह हैं। पहली, की हमारी शादी को कुछ दिन पहले ही छह महीने पूरे हुए हैं और मॉम की तबीयत की वजह से मैं कुछ सोच नही पाई। और दूसरी, की मुझे आपको थैंक यू बोलना था की आपने मुझे बहुत सपोर्ट किया, मॉम की बीमारी के वक्त। नही तोह मैं कुछ नही कर पाती। डॉक्टर ने कहा है की वोह अब ठीक हैं और कल उन्हे डिस्चार्ज मिल जायेगा। तोह आज मैने सोचा की आपके लिए कुछ लेकर जाना चाहिए। तोह मैं यह गिफ्ट आपके लिए लाई हूं। हमे अपने मंथली ट्रेडिशन को तोड़ना नहीं चाहिए। आपको यह कुछ अजीब नही लगता, की हम हर महीने एक दूसरे को गिफ्ट्स देते हैं मंथली एनिवर्सरी सेलिब्रेट करने के लिए, जबकि हम दोनो ही यह सोचते हैं की यह शादी तोह असल मायने में हैं ही नहीं।" अमायरा ने चहकते हुए एक गिफ्ट कबीर के हाथ में थमा दिया। कबीर सब सुन कर भी चुप था वोह आगे बोलने के लिए अपने आपको तैयार कर रहा था।

"सही कहा। यह शादी असल में कोई मायने नहीं रखती। हम दोनो ही के पास कोई ना कोई वजह थी एक दूसरे से शादी करने की पर मुझे लगता है अब वोह वजह नही रही।" कबीर ने बहुत कोशिश करने के बाद आखिर कहा।

"क्या?"

"जैसे की तुम मेरे लिए कुछ लाई हो, मैं भी तुम्हारे लिए कुछ लाया हूं।" कबीर ने बिना अमायरा की तरफ ध्यान दिए जवाब दिया।






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