Nafrat se bandha pyaar - 38 in Hindi Love Stories by Poonam Sharma books and stories PDF | नफरत से बंधा हुआ प्यार? - 38

नफरत से बंधा हुआ प्यार? - 38

जैसे ही वोह वहां पहुंचा उसकी नज़र सबसे पहले उन गार्ड्स पर पड़ी जो दरवाज़े के बाहर खड़े इंतजार कर रहे थे। उन सबके चेहरे कुछ गंभीर दिख रहे थे। वैसे तोह ऐसे भाव हमेशा ही उनके रहते थे लेकिन आज कुछ अलग था जो देव को खटक गया। चिंता जताते हुए देव ने उनसे पूछा, "क्या सबिता ठीक है?"

सबिता के पर्सनल बॉडीगार्ड ध्रुव ने सिर हां में सिर हिला दिया।
"कहां है वोह?" देव ने पूछा।

"मैडम अंदर है। नीलाम्मा से बात कर रहीं हैं।" ध्रुव ने जवाब दिया।

देव ने अपनी भौंहे सिकोड़ ली और आंखे छोटी कर ली। देव अंदर चला गया। वहां के एक सर्वेंट ने उसे लिविंग हॉल तक पहुंचाया। जब वोह पहुंचा तोह देखा की सामने सबिता बिना किसी चेहरे पर भाव के खड़ी है और उसके भाव तब भी नही बदले जब उसने देव को आते देखा। उसी के बगल में उसकी आंट नीलांबरी खड़ी थी जिसके चेहरे पर एक लंबी मुस्कुराहट खिल आई जब उसने देव को आते देखा।
"देव सिंघम," नीलांबरी ने कहा।
"व्हाट एन अनएक्सपेक्टेड सरप्राइज, माय बॉय। आओ हमारे साथ तुम भी सेलिब्रेशन में शामिल हो जाओ। साबी ने अभी मुझे एक ग्रेट न्यूज सुनाई है।"

*क्या सबिता ने मेरे दिल की बात भांप ली थी और अपनी बुआ को सब बता दिया?*
ऐसा मन में सोचते हुए देव नीलांबरी को देख कर मुस्कुराया।

"प्रजापति और सेनानी जल्द ही एक रिश्ते में जुड़ने वाले हैं," नीलांबरी ने खुशी से खबर सुनाई। "मेरी साबी, ने रेवन्थ सेनानी से शादी करने के लिए हां करदी। तुम पहले इंसान हो हमारे परिवार से बाहर जिसे मैंने यह खबर सुनाई है।"

देव ने अपना चेहरा सबिता की तरफ घुमा लिया। सबिता के चेहरे पर अभी भी कोई भाव नहीं थे और ना ही वोह आने दे रही थी।

"साबी, बताओ इसे," नीलांबरी सबिता को उकसाते हुए के रही थी। "तुम जल्द ही सेनानी की दुल्हन बनने वाली हो। मैं अब बिलकुल भी इंतजार नही कर सकती अपने दूसरे नाती या नतनी के स्वागत का।"

देव के सुनने की शक्ति की अब हद हो गई। वोह अपने कदम बढ़ा कर सबिता के नज़दीक आ गया। उसका हाथ पकड़ कर उसे खींच कर हॉल से बाहर ले जाने लगा। वोह प्रजापति मैंशन में दो तीन बार ही आया था इसलिए उसे नही पता ज्यादा इस जगह के बारे में। वोह बस चलता जा रहा था जब ताकी कोई ऐसा कमरा ना आ जाए जो प्राइवेसी के हिसाब से ठीक हो और नज़दीक भी हो।
सबिता उसके साथ चुपचाप चल रही थी जिस वजह से देव और चिढ़ रहा था।
जब देव की नज़र उस कमरे पर पड़ी जो आधा खुला हुआ था तोह वोह सबिता को लेकर अंदर चला गया और अंदर से दरवाज़ा बंद कर दिया। उस कमरे में खिड़की से धूप की अच्छी रोशनी आ रही थी जिस वजह से वहां सब कुछ साफ साफ दिखाई दे रहा था।
"तुम्हारी बुआ क्या बकवास कर रही थी?" देव ने आदेशात्मक पूछा।
सबिता कुछ देर चुप रही। फिर वोह बोली, "वोह सच बोल रही थी। मैं शादी कर रही हूं रेवन्थ सेनानी से।"
सबिता के शब्द देव को हिला कर रख दिया। उसे लगा जैसे एक पल में ही उसकी दुनिया उजड़ गई।
"क्यों?" देव ने चिल्लाते हुए पूछा। वोह अपना आपा खो रहा था।
"तुमने तोह सुना ही होगा की इस बारे में पहले से बात चल रही थी। मैने फाइनली कल रात अपना मन बना लिया। यह आसन नही था पर मैंने यह सोच लिया था," सबिता ने जवाब दिया।
"मुझे तुम पर यकीन ही नहीं हो रहा," देव ने कहा। "और रात में कब? जब मैने तुम्हे अपनी बाहों में भर रखा था और कहा था की मैं तुमसे बहुत प्यार करता हूं? या फिर तब जब तुमने भी मुझे यह इशारा दिया था की तुम भी ऐसा ही महसूस करती हो?"

"आई एम सॉरी, अगर तुम्हे गलत फैमी हुई है तोह।"

"फक द सॉरी! आखिर यह चल क्या रहा है।"

सबिता खिड़की से बाहर देखने लगी। "मैने कभी तुमसे नही कहा की मैं अपनी पूरी ज़िंदगी तुम्हारे साथ बिताना चाहती हूं," सबिता ने धीरे से कहा।

देव ने उसकी बांह पकड़ कर अपनी तरफ मोड़ दिया और उसका चेहरा अपने दोनो हाथों में भर लिया ताकि सबिता उसकी तरफ देख सके। "तुम्हे ये सब बोलने की जरूरत नहीं है। यह तोह मैं तुम्हारी आंखों से ही देख कर बता सकता हूं। और मेरा गट कह रहा है की तुम अभी भी मुझसे बहुत प्यार करती हो और मुझे चाहती हो। क्या हो रहा है यह सब, बेबी? क्यों कर रही हो तुम ऐसा?"

सबिता उसे अपनी बिखरी हुई नज़रों से देख रही थी। "यह प्यार नही है, देव। किसी को भी तीन महीनों में प्यार नही होता। खासकर वोह लोग जो अपनी सारी जिंदगी एक दूसरे नफरत करते रहे हो।"

"हम दोनो ही एक दूसरे से प्यार करने लगे है, इस नफरत के बावजूद भी," देव ने प्यार से उसकी आंखों में देखते हुए कहा। "लोग थोड़े समय में भी पड़ते हैं प्यार में। मेरे पेरेंट्स को भी हुआ था। मेरे डैड मेरी मेरी मां को काफी समय से जानते थे, पर मेरे डैड को मां से कुछ दिनों में ही प्यार हो गया था जब उन्होंने काफी समय बाद उन्हे देखा था। मेरे दादा और दादी के साथ भी ऐसे ही हुआ था। लोग और भावनाएं बदल सकती हैं। हमारी नफरत तोह उससे पहले ही खतम हो गई थी जब हम दोनो पहली बार एक साथ हुए थे।"

"हम तुम्हारे पेरेंट्स नही हैं और ना ही तुम्हारे ग्रैंड पेरेंट्स हैं। मैं अपना फैसला ले चुकी हूं, देव। मैं रेवन्थ सेनानी से शादी कर रही हूं।"

देव का गुस्सा बढ़ गया जब सबिता ने उस कमीने इंसान का नाम लिया। "रेवन्थ सेनानी ही क्यों? ऐसा क्या है उसके पास जो मैं नही दे सकता? मेरे पास उससे ज्यादा पैसा है, ज्यादा पावर है और उस साले **** से ज्यादा दिमाग भी है। फिर तुम ऐसा क्यों कर रही हो? मुझे तोह बिलकुल समझ नही आ रहा?

सबिता चुप रही।
देव ने सबिता को दोनो कंधो से पकड़ लिया। "तुम सिर्फ *मेरी* हो," देव ने कहा। उसे घबराहट होने लगी थी। "और मैं सिर्फ तुम्हारा। मत करो हमारे साथ ऐसा।"

सबिता ने अपनी आंखे भींच ली जैसे वोह अब और ज्यादा देव को टूटते हुए नही देख सकती थी। "देव प्लीज, चले जाओ यहां से। मैं फैसला कर चुकी हूं। और मैं अपना फैसला नही बदलने वाली। प्लीज अपने शब्दो से मत पलटो, जो हमने डील की थी। हम अपना रिलेशनशिप कभी भी खतम कर सकते हैं बिना किसी आर्गुमेंट के।"

"फक द ब्लडी डील," देव गुस्से से गुर्राया।

सबिता ने अपनी आंखे खोली। "यही तोह तुम्हारी प्रॉब्लम है, देव। तुम दूसरों के बारे में नही सोचते," सबिता देव की आंखों में देख कर बात कर रही थी। "सच्चाई तोह ये है की मैं तुम्हारे जैसे इंसान के साथ नही रहना चाहती। मैं तुम पर भरोसा भी नही करती, तुम बहुत अनप्रीडेक्टेबल हो। तुम काफी हद तक मुझे मेरे पापा की याद दिलाते हो। वोह भी तुम्हारे जैसे ही अनप्रीडेक्टेबल थे। अक्सर तुम्हारे जैसा ही गुस्सा उन्हे भी रहता था। और सभी जानते हैं की आखिर में क्या हुआ।"

"बुलशिट!" देव चिल्लाया। "मैं मानता हूं की कभी कभी मैं सेलफिश हो जाता हूं, ज्यादा ही आवेश में आ जाता हूं और बहुत जल्दी गुस्सा भी आ जाता है। और मैं यह भी जानता हूं की मैं कभी कभी आउट ऑफ कंट्रोल भी हो जाता हूं और फिर बहुत मुश्किल हो जाता है मुझे संभालना। लेकिन कभी भी मैने इस वजह से कुछ बुरा नही किया। और जहां तक की हम दोनो जानते हैं, की यह प्रूफ होना तोह अभी बाकी है की तुम्हारे पापा उस हत्याकांड के लिए जिम्मेदार है भी या नही। तुम मुद्दे से मत भटको और सच सच बताओ की क्या हुआ है!"

"मैं पहले ही कर चुकी हूं, देव। और एक कारण यह भी है की मेरे लोगों को शांति की जरूरत है। और रेवन्थ सेनानी से शादी कर के मेरे क्षेत्र में शांति बनी रहेगी। प्लीज ऐसा कुछ मत करो की मुझे पछतावा हो हमारे...... हमारे समझौते का।"

देव के अंदर गुस्सा बढ़ने लगा क्योंकि सबिता उनके बीच रिश्ते को नीचा दिखाने की कोशिश कर रही थी। "तुम खुद जानती हो की हमारे बीच सिर्फ समझौता है या उससे कही ऊपर। तुम मेरे साथ पहली बार ही कभी नही आती अगर तुम्हे लगता की मैं तुम्हारे लायक नही हूं।"

सबिता दूसरी तरफ देखने लगी। एक तेज़ दर्द उठा सबिता के दिल में। और देव ने उसे अपनी तरफ फिर पलट लिया। और उसका हाथ पकड़ लिया। "तुम अच्छी तरह से जानती हो की सिर्फ तुम ही बनी हो मेरे लिए। और मैं अच्छे से जानता हूं की जरूर कोई बड़ी वजह है तुम्हारा ऐसा करने की। पर मैं चाहता हूं की तुम मुझ पर भरोसा करो और बताओ मुझे की ऐसा क्या है जो तुम्हे परेशान कर रहा है," देव ने कहा।

देव महसूस कर सकता था की सबिता का हाथ कांप रहा है। "नही, देव। तुम गलत समझ रहे हो। मुझे प्यार व्यार जैसे शब्दों पर विश्वास नहीं। मैं उस तरह की नही हूं। मैं बस हमारे बीच सब खत्म करना चाहती हूं," सबिता ने किसी तरह से अपनी बात कही।

"नही। तुम झूठ बोल रही हो। मुझे पता है।"

"तुम मेरे बारे में अभी जानते नही हो, देव," सबिता ने आराम से कहा।

"शायद सब कुछ नही। लेकिन जितना भी जानता हूं उतना काफी है। और बाकी, मैं बाद में पता लगा लूंगा तुम्हारे साथ। बस एक चांस देदो मुझे।"

सबिता चुप थी और ज़मीन पर नज़रे गड़ाए हुए थी क्योंकि वोह देव का सामना नहीं कर पा रही थी।
देव ने सबिता का हाथ पकड़ा और उसे अपने होंठों के पास ले जा कर उसकी हथेली को चूम लिया।

"मुझे एक चांस दे दो, सबिता," देव ने दुबारा कहा। "एक चांस जिससे मैं अपने आप को तुम्हारे सामने प्रूफ कर सकूं। एक चांस की तुम मुझ पर पूरी तरह से भरोसा कर सको। एक चांस हमारे लिए ताकि हम दोनो खुश रह सके।

एक गहरी सांस लेते हुए सबिता ने अपना हाथ देव के हाथ से खीच लिया और उसे गंभीर नज़रों से देखने लगी। सबिता देव के नज़दीक आई और अपना हाथ देव के सीने पर रख दिया जहां उसका दिल धड़क रहा था।
"तुम सही कह रहे हो," सबिता ने आराम से ही कहा। "शायद यह सब खत्म नहीं होगा। हमारे अंदर अभी भी वासना और एक दूसरे को छूने की चाहत बची हुई है। तोह क्या हुआ अगर हम अलग अलग इंसान से शादी कर लें? हम तब भी कॉटेज में मिलते रहेंगे। किसी को पता नहीं चलेगा। और अगर पाता चल भी गया तोह क्या हो जायेगा? कौन हमें मिलने से रोक........"

"शट अप!" देव ने धीरे से लेकिन गुस्से से कहा।

सबिता चुप हो गई और देव को ही देखने लगी। देव को अब लगने लगा था की सच में सबिता किसी और आदमी से शादी करने वाली है। और यह खयाल आते ही उसका मन किया की उस आदमी को बर्बाद करदे जिससे सबिता शादी करने वाली है। वोह अभी भी उन यादों को खराब नही करना चाहता था जो उसने साबित के साथ जी थी। वोह उन पलों को यादें बना कर संजो के रखना चाहता था जो उन्होंने साथ में बिताए थे। उसे कोई बाहरी चोट नहीं लगी थी। उसे अंदर तक गहरा घाव हो गया था सबिता की बात का। उसका दिल तोह बहुत पहले ही सबिता के लिए धड़कने लगा था। और उसे लगा था की आखिर में सबिता का भी दिल उसी के लिए धड़कने लगेगा। पर ना चाहते हुए भी वोह गलत हो गया था।

सबिता, देव को, गुस्से से बाहर जाते हुए देख रही थी। वोह जानती थी की देव सिर्फ कमरे से ही नही बल्कि उसकी ज़िंदगी से भी जा रहा है। वोह आदमी जिसे सबिता इंटीमेसी की वजह से जानती थी, वोह पिछले कुछ महीनों में, सबिता की नज़र में, एक ऐसा इंसान बन गया था जिसपर सबिता को बहुत गर्व था। उसके साथ चीट कर के, उसको यह बता के की वोह किसी और आदमी से शादी कर रही है, सबिता ने उनके बीच रिश्ते को तुच्छ करार कर दिया था, असल में यह ऐसा था की मानो सबिता अपने ही दिल की सीने से निकल कर बाहर फेक दिया हो। वोह अपने सीने में उमड़ रहे दर्द को नजरंदाज करने लगी।
वोह पहले से ही जानती थी अपने पर्सनल एक्सपीरियंस से की जिंदगी बहुत निर्दय भी हो सकती है और अनुचित भी। वोह यह भी जानती थी जीने के लिए वोह करना ही पड़ता है जो जरूरी है। पर वोह यह नही जानता की उसे उस इंसान को तकलीफ देनी होगी जिसे वोह डीपली लव 💕 करती है।
उसके अंदर गुस्सा बढ़ने लगा जब वोह कमरे से बाहर निकली और अपनी बुआ की तरफ बढ़ने लगी जो अभी भी उसी चेयर पर बैठी हुई थी और मैगज़ीन पढ़ रही थी।
उसके अंदर से जैसे कोई आवाज़ आई जब उसने देखा नीलांबरी ऐसे बिहेव कर रही है जैसे कुछ हुआ ही नहीं। उसने अपनी गन निकाली और नीलांबरी पर प्वाइंट कर दी।
नीलांबरी की नज़रे सबिता की नज़रों से मिली पर उसने गन देख कर कोई रिएक्शन नहीं दिया नाही वोह पैनिक हुई। "तुम जानती हो तुम कभी भी मुझ पर ट्रिगर नही दबाओगी। और यह पहली बार नही है जब तुमने मुझ पर अपनी बंदूक तानी है," नीलांबरी ने उस पर गहरी नज़र डालते हुए कहा।
जैसे ही नीलांबरी ने नरमी से ताना मारा, सबिता ने अपनी आंखे बंद कर ली जैसे वोह कंट्रोल करने की कोशिश कर रही थी की वोह उस बेरहम औरत पर गोली ना चलाए। कुछ ही पल बाद सबिता ने धीरे से अपनी गन नीचे कर ली और अपनी आंखे भी खोल ली।
नीलांबरी ने लंबी सांस भरी। "साबी," उन्होंने उसे प्यार से पुकारा। "मुझे पता है तुम अब अपने आप को चोट पहुंचा रही हो, मेरी बच्ची। पर जैसा मैंने कहा था, देव सिंघम तुम्हारे लिए नही बना है। वोह एक बड़े घर का है, उसकी रगों में विजय सिंघम का खून दौड़ रहा है। वोह एक ऐसी लड़की से बिलकुल शादी नही करेगा जिसकी मां एक वैश्या थी और जिसका तुम्हारे जैसा अतीत हो। नर्मदा सेनानी उसी पत्नी बनेगी जल्द ही। वोह बहुत नाज़ो से और सुरक्षित ढंग से पली है। वोह ही हकदार है सिंघम का खून अपनी कोख में पालने के लिए जो सिंघम वंशज की शुद्धता का प्रमाण देगी।"
नीलांबरी कुर्सी खड़ी हुई और सबिता की तरफ बढ़ी। "तुम्हे भी मिलेगी, तुम्हारा खुशियां, मेरी बच्ची। रेवन्थ सेनानी भी एक बड़े घर से है, और अभी भी, वोह तुम्हे चाहता है। तुमने बहुत सही फैसला लिया है उसके प्रोपोजल का।"
सबिता ने कोई जवाब नही दिया। उसने अपनी बुआ को घृणा की नज़रों से देखा और अपने कमरे की तरफ चली गई।

****

नीलांबरी ने देखा की सबिता उससे चिढ़ कर चली गई अपने कमरे में। वोह जानती थी की वोह सबिता को ज्यादा कंट्रोल और मैनिपुलेट नही कर सकती है। किसी भी समय सबिता अपना आपा खो सकती है और नीलांबरी का उसपर कंट्रोल तोड़ सकती है। सबिता ऐसी लड़की है जिसे कंट्रोल और पावर बहुत पसंद है और वोह उसे हथियाना भी जानती है। नीलांबरी सोच कर ही घबरा गई की जब सबिता को सच्चाई का पता चलेगा तोह क्या होगा। इससे पहले की सबिता को सच्चाई का पता चले वोह किसी ऐसे से मिलना चाहती थी जो उसकी मदद कर सके।

****

उसी रात, जब सबिता अपना लंबा दिन खतम करके, प्रजापति एस्टेट का उस दिन का सारा काम खतम करके, बैड पर लेटने आई। वोह बाहर खिड़की से अंधेरी रात को देखने लगी। बचपन से ही वोह हमेशा अंधेरों से घिरी रही थी। वोह ज्यादा तर घर में ही रहती थी, लोगों की घृणा से बचने के लिए जो उसके पापा और मां की वजह से उसे सामना करना पड़ता था। बाद में जब वोह सब कंट्रोल करने लगी, तब भी उसकी जिंदगी में कुछ अंधेरा छाया रहा क्योंकि उसे शांति बनाए रखने और व्यवस्थित रखने के लिए कुछ चीज़े करनी पड़ी थी। लेकिन बाद में जब वोह देव से मिली तोह उसे लगने लगा था की उसे भी खुशियां पाने ज़िंदगी जीने का अधिकार है।

और अब.... फिर से उसे, उसी अंधेरे में, जाने के लिए धकेला जा रहा था।

इन छह सालों में पहली बार उस रात सबिता प्रजापति रोई थी।













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(पढ़ने के लिए धन्यवाद 🙏)



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