अस्तित्व in Hindi Short Stories by Piya books and stories PDF | अस्तित्व

अस्तित्व

रात के 3 बजे थे फिर भी मुझे नींद नहीं आ रही थी बस यही बत मुझे खाये जा रही थी की कल क्या होगा?

ऐसे अनगिनत सवाल मेरे दिमाग़ मे अपना घर बनाये बैठे थे,
वैसे देखा जाये तो हम घर मे सिर्फ 3 लोग थे मे मा और पिताजी मे हमेशा किताबों मे खोया हुआ पढना बहोत अच्छा लगता है मुझे इसलिए किताबों से अच्छा कोई दोस्त नही था मेरा,
बचपन से लेकर आज तक कोई अच्छा दोस्त नही बना सिर्फ एक मिनी थी मेरी बचपन की दोस्त और कोई दोस्त नही हुआ क्युकी शायद लोग मे जो हु ये accept नहीं कर पाते.......
सुबह मे जब कमरे से बाहर आया तो मा पूजा कर रही थी और पापा हमेशा की तरह चाई का घूंट लेते हुए अख़बार पढ़ रहे थे,
जैसे मुझे देखा तो शुरु हो गये अरे बेटा जग गये आज तुम्हारे life का बड़ा दिन है आज पहला interview जो है, आवाज सुनके मा भी आ गयी,
ये ले प्रशाद मेरा बेटा बहोत तरक्कि करे तुझे जो चाहे वो मिले,
ये कहते हुए मा की आँखे भरी हुयी थी,
पता नहीं लेकिन मन इस बात के लिए तैयार हि नही की क्या करु जाऊ या नही ?
डर लगता है बहोत समाज के रिवाजों से मे फिर से किसी किताब मे अपना सर डालके बैठ गया फिर पिताजी आये बेटा क्या हुआ जाना है ना मे कुछ नही बोला फिर पिताजी बोले ये लो तेरा बैंक का फॉर्म मेरे पास है इसे भर दो अरे ऐसे डरो मत शुक्ला जी के बेटे हो तुम डरते थोड़ी हो, Mcom gold medalist हो भाई हर साल फर्स्ट आते थे ये जॉब तो सिर्फ तुम्हारा हि है,
लड़ना सीखो बेटा इससे पहले की कोई तुम्हे कुचल कर आगे चला जाये पैरो पे खड़ा हो जाओ,
Talent की कोई कमी ना है हमारे बेटे के पास मे हस पड़ा और पिताजी के गले लगा फिर मा आयी शिव बेटा तैयार हो जाओ देर हो जाएगी मैने हा मे सर हिलाया, अगर मा को पता चलता की मे दुखी हु तो माग रो पड़ती और भगवान को बोलती रहती इसलिए मैने अपने आपको संभाला और घर से बहार निकल गया जाते वक़्त मा ने हमेशा की तरह दही शक्कर दिया,
आखिर तक मे बैंक मे पोहोच गया लेकिन फर्म अभी तक अधूरा था जब मेरा नंबर आया तो मुझे फॉर्म जमा करना था क्या करू,
मैने फिर से फॉर्म को अच्छे से देखा तो मुझे वो कॉलम नज़र आता जहा पे gender लिखना था स्त्री पुरुष अन्य मेने थर्थराते हातों से अन्य पे मार्क किया और फॉर्म दे दिया फिर पिताजी की बाते याद आ गयी वो कहते की बेटा तुम्हरि गलती नही है इसमे तुम्हे तो बनाने वाले ने ऐसा बनाया है, तुम तो अर्धनारेश्वर के अवतार हो ये मत सोचो की दुनिया क्या सोचेगी अपने बारे मे सोचो, अगर तेरे मा बाप तुझे अलग नही समझते तो बाकियोंका क्या सोचना, दुनिया मे अच्छे लोग भी होते है बेटा,
इतने मे आवाज आयी शिव शुक्ला आपको अंदर बुलाया है, मे थोड़ा चौका लेकिन अंदर चला गया सामने देखा तो 1 मॅडम और सर बैठे थे दोनो के चेहरे पे एक smile थी फिर मैडम बोली बैठो,
इतनी हिम्मत कहा से आयी यार हम हर साल इतने लोगो का interview लेते है मगर तुम सबसे अलग हो, अब बोलो कब से join करोगे जॉब?
मेरी आँखे भर गयी थोड़ी मुस्कान के साथ बोल दिया जब आप बोलो, सर ने कहा Monday से,
ये बात लेकर मे घर आया तो देखा मिनी पहले से वहा बैठी थी तीनो चाई पीते पीते मेरा इंतज़ार कर रहे थे मे जैसे हि गया सब चिल्लए congratulations अरे तुमको कैसे पता मैने पूछा मिनी बोली stupid तेरे चेहरे की खुशी बता रही है,
उस दीन मा पिताजी बहोत खुश थे उन्होंने कभी मेरे अस्तित्व पे ऊँगली नही उठायी, हमेशा मुझे साथ दिया, एक खुशहाल ज़िंदगी जिने के लिए और क्या चाहिए, अब कभी नही लगता की मुझ मे कुछ कमी है या मे कुछ और हु,
मे जो हु मेरा अस्तित्व मेरी पहचान है......😊


Piya

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बहुत बढ़िया कहानी 👌👌