Tantrik Masannath - 29 in Hindi Horror Stories by Rahul Haldhar books and stories PDF | तांत्रिक मसाननाथ - 29

तांत्रिक मसाननाथ - 29

तांत्रिक व पिशाच - 9


उस वक्त रात के 11 बज रहे थे। पूरे गांव में सन्नाटा पसरा हुआ है।
मसाननाथ प्रधान जी के घर के सामने खड़े होकर हरिहर के आने का इंतजार कर रहे थे। उनके हाथ में एक थैली है और उसी में आज की सभी तंत्र क्रियाओं का सामान भरा हुआ है।
हरिहर जाने से पहले एक बार अपने मालिक से मिलने ऊपर गया है। राजनाथ जी के लिए हरिहर एक बहुत ही भरोसेमंद आदमी है। आज अगर इस भयानक कार्य में हरिहर को कुछ हो गया तो राजनाथ जी मसाननाथ को इतनी आसानी से नहीं छोड़ेंगे। हालांकि इस बारे में मसाननाथ ज्यादा नहीं सोच रहे, इस वक्त उनके दिमाग में केवल यही चल रहा है कि इस पूरे गांव को कैसे बचाया जाए।
कुछ ही मिनट बाद हरिहर ऊपर से नीचे आया। उसके हाथ में मसाननाथ से भी एक बड़ा थैला है , उसके अंदर लकड़ी भरी हुई है। इसके बाद दोनों कुएं की ओर रवाना हो गए।
चारों तरफ झींगुर की आवाज के अलावा और कोई आवाज नहीं आ रहा। वैसे मसाननाथ को क्रमशः अनुभव हो रहा था कि कोई उनके पीछे - पीछे चलता हुआ आ रहा है। मसाननाथ ने पीछे घूम कर नहीं देखा और इस बात को हरिहर से भी नहीं बताया , क्योंकि यह बात सुनकर हरिहर शायद डर भी सकता था।
उन्हें कुएं तक पहुंचने में लगभग 20 मिनट लगा। कुएं के पास पहुंचकर उसके ऊपर के सीमेंट की परत को दोनों ने पकड़ कर हटाया।
मसाननाथ बोले,
" हरिहर अंदर जो कुछ भी होगा उसे देखकर डरना मत। तुम जितना डरोगे नकारात्मक शक्ति तुम पर उतना ही हावी हो जाएंगे। "

" अंदर आखिर ऐसा क्या होगा जो मैं डर जाऊंगा? "

यह सुनकर मसाननाथ समझ गए कि हरिहर अभी से डर गया है। उसके डर को दूर करने के लिए मसाननाथ बोले,
" अभी से मत डरो। बस अगर भोला सरदार की लड़की जैसा कुछ घटना अगर अंदर होगा तो उसे देखकर डरना मत। "

यह सुनकर हरिहर बोला,
" तांत्रिक बाबा मुझसे कुछ भी मत छुपाइए ,नीचे जो कुछ भी है मुझे बता दीजिए। नीचे क्या होगा मुझे बता दीजिए जिससे मैं खुद को उसके लिए तैयार कर लूं। "

" हरिहर इस कुएं के नीचे कुछ ऐसा हो रहा है जिसकी कल्पना भी तुमने नहीं की होगी। जो कुछ भी हो डरना नहीं अगर डर गए तो उन्हें लगेगा कि तुमने हार मान लिया है। वो सभी तुम्हें डराने की बहुत कोशिश करेंगे लेकिन तुम्हें डरना नहीं है। ऐसा भी हो सकता है कि वो सभी तुम्हारे ऊपर आक्रमण कर दे लेकिन वो ऐसे नहीं करेंगे क्योंकि तुम्हारे गले में कृष्ण मंत्र का ताबीज है। अगर इसके बाद भी कोई घटना घट गई तो हमें वहां से भागना होगा। क्योंकि इससे पहले मैंने इतने बड़े पिशाच के विरुद्ध तंत्र क्रिया नहीं किया है। जो भी हो डरने से कोई लाभ नहीं अब हमें धीरे - धीरे अंदर चलना चाहिए। लकड़ी के थैले को सावधानी से पकड़ना और अब मशाल को जला दो। "

इतना बोलते वक्त ही मसाननाथ ने कुएं के पीछे की ओर देखा और बोले,
" कौन है वहां ? जो भी है वहां पर सामने आ जाओ। "

यह सुनकर हरिहर और भी डर गया। मानो कोई आदमी कुएं के पीछे बैठकर मसाननाथ और हरिहर की बातों को सुन रहा था। ध्यान से देखने के बाद मसाननाथ समझ गए कि वहां पर कौन बैठा है , इसीलिए मसाननाथ बोले ,
" बाहर निकल आओ डरने की कोई बात नहीं लेकिन इतनी रात को आप यहां क्या कर रहे हैं ? "
इतना बोलते ही वह आदमी बाहर निकल आया। उस आदमी को देखते ही हरिहर बोला,
" ये तो वही पागल बूढा आदमी है।
तुम इतनी रात को यहां क्या कर रहे हो? हम एक जरूरी काम से यहां आए हैं। जाओ यहां से चले जाओ। "

अब वह बूढा आदमी बोला ,
" मुझे एक बार अंदर लेकर चलिए। मेरे लड़के को मार कर उन्होंने अंदर ही फेंक दिया है। वो मुझे कभी-कभी अंदर से बुलाता है। मैं उसे बचा नहीं पाया। आज मौका मिला है मैं आप दोनों की सहायता से उसे बचाकर ले आऊंगा। मुझे एक बार अंदर लेकर चलिए मैं वादा करता हूं कि मैं अपनी जान देकर भी आप दोनों की रक्षा करूंगा। "

यह सब सुनकर हरिहर उसे भगाने के लिए उसकी ओर जा रहा था लेकिन मसाननाथ ने उसे रोकते हुए कहा ,
" रुको हरिहर "
और फिर उस बूढ़े आदमी से बोले,
" ठीक है आप भी हमारे साथ अंदर जाओगे लेकिन याद रखना कि इसमें आपकी जान भी जा सकती है। अंदर तुम्हारा लड़का मिलेगा या नहीं इस बारे में मैं कुछ भी नहीं बता सकता। क्योंकि तुमने खुद ही बताया कि उन्होंने तुम्हारे लड़के को मार कर इसमें फेंक दिया था। अंदर तुम्हारे साथ कुछ हुआ तो उसकी जिम्मेदारी मुझ पर नहीं है। सोच समझकर अंदर जाना। "

अब वह पागल बूढ़ा आदमी बोला,
" हां मैं अंदर चलूंगा और जैसे भी हो मैं अपने लड़के को लेकर आऊंगा। "

" ठीक है फिर चलो। हरिहर तुम मशाल जलाओ। यहां समय बर्बाद करके कोई फायदा नहीं। 12 बजकर 55 मिनट तक ही अपने पास समय है। आज या तो हमारा अंत होगा या फिर पिशाचों का का अंत होगा। "

अब हरिहर अपने झोले से कुछ मोमबत्ती निकालते हुए बोला,
" तांत्रिक बाबा मशाल भी लाया हूं लेकिन आते वक्त कुछ मोमबत्ती भी लेकर आया हूं। क्या पता कब मशाल बुझ जाए और अगर अंदर अंधेरा हो गया तो बाहर निकलना मुश्किल हो जाएगा। "

यह बात सुनकर मसाननाथ काफी खुश हुए। हरिहर ने इसी बीच मशाल को जला दिया। मशाल जलाते ही पहले मसाननाथ फिर हरिहर और सबसे पीछे वह बूढ़ा आदमी कुएं के अंदर उतरने लगे। सीढ़ी को पकड़कर धीरे-धीरे उतरते हुए वो तीनों गहरे अंधेरे में समाने लगे।

नीचे उतरते हुए ही मसाननाथ बोलते रहे ,
" तुम दोनों से कह रहा हूं कि ध्यान रखना कि शरीर के किसी भी अंग से खून ना निकलने पाए। शरीर के किसी भी जगह से खून निकला तो यह हानिकारक होगा। "

कुछ देर तक सीढ़ी पकड़कर उतरने के बाद उन्होंने कुएं के नीचे की जमीन को स्पर्श किया। नीचे उतरने के बाद मसाननाथ ने हाथ में मशाल लेकर सामने देखते ही जो दृश्य उनके सामने उभरा वो इतना भयानक था कि जिसे शब्द द्वारा नहीं बताया जा सकता।
उन्होंने देखा कि पूरे कुएं में चारों तरफ बहुत सारे मुंड हीन कंकाल इधर-उधर बिखरे पड़े हैं। कहीं कंकाल की हड्डी है तो कहीं खोपड़ी की हड्डी।
कुछ जगहों पर पत्थर के टुकड़े टूटकर गिरे हुए हैं। शायद यही पत्थर के टुकड़े उसी दिन की है जब सन्यासी शिवराज बाबा और शेर सिंह ने उस भयानक कार्य को किया था , अर्थात उन्होंने मालती की हत्या किया था। उस दिन इस कुएं के नीचे जो भूकंप आया था उसी में शायद यह सभी पत्थर टूट कर गिरे हैं।
हरिहर भी वह दृश्य देखकर कांपने लगा था और बोला,
" आखिर यह सब क्या है तांत्रिक बाबा , इतना कंकाल कहां से आया ? "

इसके उत्तर में मसाननाथ बोले,
" ये सभी मालती की घटिया कार्य की निशानी है। इन सभी का बलि दिया गया था तथा इनके खून से पिशाच को भोग दिया गया था। जो भी हो हरिहर तुम इन मशालों को कुएं के चारों तरफ के कोने में लगा दो। "

यह सुनते ही हरिहर व बूढ़ा आदमी दोनों काम में लग गए। चार मशाल को उन्होंने कुएं में लगा दिया।
मशाल की रोशनी के कारण कुएं का अंधेरा काफी कम हो गया। कुए के चारों तरफ केवल मकड़ी के जाले ही दिखाई दे रहे हैं। अचानक ही मसाननाथ की नजर पड़ी तो उन्होंने देखा कि कुएं के एक तरफ एक सुरंग गांव के दक्षिण - पश्चिम की ओर चला गया है। लेकिन उधर अंधेरा काफी ज्यादा है।
उस तरफ ही हरिहर ने अपने साथ लाए मोमबत्ती को जला दिया जिससे सुरंग में थोड़ा बहुत अंधेरा कम हुआ।....

क्रमशः...


Rate & Review

Himanshu P

Himanshu P 1 month ago

Shakti Singh Negi

Shakti Singh Negi Matrubharti Verified 2 months ago

Darshit

Darshit 2 months ago

Hitesh Shah

Hitesh Shah 2 months ago

Balkrishna patel

Balkrishna patel 2 months ago