रत्ना पांडे, खंडवा (मध्य प्रदेश) की रहने वाली हैं तथा इस समय वडोदरा (गुजरात) में रह रही हैं। देश के विभिन्न कोनों से प्रकाशित होने वाले समाचार पत्र और पत्रिकाओं में इनकी 450 से अधिक कविताएं, लघु कथाएं तथा कहानियां प्रकाशित हो चुकी हैं। इनकी रचनाएँ मुख्यतः पारिवारिक संबंधों, नारी, देश-भक्ति तथा सामाजिक घटनाओं पर केंद्रित रहती हैं।

प्यार का एहसास है, रक्षा की बहन को भाई से आस है,
रेशम की डोरी से बंधा हुआ, यह रिश्ता बहुत ही खास है,
ना छल है ना कपट, इसमें तो केवल मिठास ही मिठास है,
ना जाति धर्म का बंधन, यह पर्व हर दिल के आसपास है,
कीमती राखी में नहीं, कच्चे धागे में भी वही आभास है,
उपहार की चाह नहीं, भाई के प्यार की मन में प्यास है।।

-Ratna Pandey

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Happy Friendship day to all

मेरी रचना "जब मैं सासु मां बनूंगी" पढ़िए:-

कारगिल विजय दिवस के अवसर पर मातृभूमि की रक्षा में पराक्रम दिखाने वाले देश के सभी साहसी सपूतों को शत-शत नमन। जय हिन्द ! वन्दे मातरम 🇮🇳🇮🇳

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मेरी कहानी "बदलता परिवेश" सुनिए:-

https://youtu.be/V-v2usm6C74

मेरी रचना घमंड पढ़िए:-

मेरी कहानी "इसका कारण केवल तुम हो" सुनिए:-
https://youtu.be/IZRS_MteFKw

मेरी कविता "मन" पढ़िए:-

आप सभी को मजदूर दिवस की हार्दिक शुभकामनाएं। इस अवसर पर लिखी मेरी रचना श्रमिक पढ़िए:-

आप सभी को विश्व पुस्तक दिवस की हार्दिक बधाई और शुभकामनाएं। इस अवसर पर पढ़िए मेरी रचना ज्ञान का भंडार -